क्या आपकी डाइट में पर्याप्त कैल्शियम है? जानिए स्रोत, फायदे और रोजाना कितनी जरूरत

नई दिल्ली। हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए कई तरह के पोषक तत्वों की जरूरत होती है और कैल्शियम उनमें से एक बेहद जरूरी खनिज है। आमतौर पर कैल्शियम का नाम सुनते ही सबसे पहले हड्डियों और दांतों का ख्याल आता है, लेकिन इसकी भूमिका सिर्फ इतनी ही नहीं है। इसलिए रोज की डाइट में पर्याप्त कैल्शियम लेना जरूरी है। कैल्शियम हमारी हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शरीर में मौजूद कैल्शियम का बड़ा हिस्सा हड्डियों और दांतों में संग्रहित रहता है। इसके अलावा यह मांसपेशियों के सही तरीके से काम करने में मदद करता है। दिल की सामान्य धड़कन और रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया में भी कैल्शियम की भूमिका होती है। कैल्शियम की जरूरत सिर्फ बच्चों को बढ़ती हड्डियों के लिए नहीं, बल्कि हर उम्र के व्यक्ति को होती है। उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों की मजबूती बनाए रखने के लिए भी पर्याप्त कैल्शियम और संतुलित आहार जरूरी है। कैल्शियम पाने के लिए हमेशा सप्लीमेंट की जरूरत हो, ऐसा नहीं है। संतुलित डाइट के जरिए भी इसे हासिल किया जा सकता है। दूध और दूध से बने उत्पाद जैसे दही और पनीर कैल्शियम के अच्छे स्रोत माने जाते हैं। इसके अलावा सोयाबीन, बादाम, दालें, अंजीर, मूली, गाजर और हरी पत्तेदार सब्जियों को भी अपनी डाइट में शामिल किया जा सकता है। अलग-अलग खाद्य पदार्थों को मिलाकर खाने से डाइट ज्यादा पौष्टिक और संतुलित बनती है। सिर्फ कैल्शियम खाना ही काफी नहीं है। शरीर कैल्शियम को अच्छी तरह अवशोषित कर सके, इसके लिए विटामिन-डी भी महत्वपूर्ण है। इसलिए कैल्शियम युक्त भोजन के साथ विटामिन-डी के पर्याप्त स्रोतों और स्वस्थ जीवनशैली पर भी ध्यान देना चाहिए। आम तौर पर वयस्कों के लिए कैल्शियम की दैनिक आवश्यकता लगभग 1.0 से 1.5 ग्राम प्रतिदिन बताई जाती है। हालांकि वास्तविक जरूरत उम्र, लिंग और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। इसलिए अपनी व्यक्तिगत जरूरत के लिए डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह लेना बेहतर है।

पेरिस में दिलजीत दोसांझ का पंजाबी तड़का, एफिल टॉवर के सामने दिए देसी पोज

मुंबई। पंजाबी सिंगर-एक्टर दिलजीत दोसांझ, जो अभी अपने बहुप्रतीक्षित ‘ऑरा वर्ल्ड टूर 2026’ के तहत यूके और यूरोप के दौरे पर हैं, ने पेरिस में बिताए समय की झलकियां शेयर कीं। उन्होंने इंस्टाग्राम पर फ्रांस की राजधानी में बिताए अपने समय की एक झलक दिखाई। दिलजीत ने सोशल मीडिया पर अपनी कुछ तस्वीरें शेयर कीं और कैप्शन लिखा, “पेरिस में प्योर रोमांस था, कल वियना में,” जिससे पता चलता है कि उनके यूरोप दौरे का अगला पड़ाव वियना है। अपने खास पंजाबी अंदाज के लिए मशहूर दिलजीत ने पेरिस के बैकग्राउंड में अपना देसी टच भी जोड़ा। इन तस्वीरों में ‘उड़ता पंजाब’ के एक्टर को एफिल टॉवर के सामने अलग-अलग पोज देते हुए देखा जा सकता है। उन्होंने अपने पेरिस कॉन्सर्ट की झलकियां भी शेयर कीं, जिनमें वेन्यू के अंदर का जबरदस्त माहौल दिखाई दे रहा है। तस्वीरों में फैंस दिलजीत के लिए जोश के साथ चीयर करते दिख रहे हैं, जबकि एक दिल को छू लेने वाले पल में सिंगर अपने फैंस के हाथों को चूमते हुए नजर आ रहे हैं। कुछ दिन पहले, दिलजीत दोसांझ ने प्राग में बिताए अपने समय की झलक दिखाई थी, जहां उन्होंने अपने चल रहे ‘ऑरा वर्ल्ड टूर’ के कॉन्सर्ट्स के बीच चेक गणराज्य की राजधानी को एक्सप्लोर किया। सोशल मीडिया पोस्ट्स की एक सीरीज के जरिए उन्होंने शहर की आर्किटेक्चर, खाने, वॉटरवेज और लोकल कल्चर की झलकियां दिखाईं। एक वीडियो में दिलजीत को प्राग के वॉटरवेज़ में बोट राइड का मजा लेते हुए भी देखा गया। अपनी पंजाबी जड़ों के मुताबिक, उन्होंने अपने सिग्नेचर भांगड़ा मूव्स दिखाए और कुछ लोकल लोगों और बोट क्रू के सदस्यों को भी यह डांस सिखाया, जिन्होंने खुशी-खुशी उनके स्टेप्स को फॉलो किया। टूर की बात करें तो, दिलजीत के बर्लिन कॉन्सर्ट के साथ उनके ‘ऑरा वर्ल्ड टूर 2026’ के तहत यूके और यूरोप के नौ शहरों में होने वाले एरीना टूर की शुरुआत हुई। सिंगर-एक्टर इसके बाद डबलिन, मिलान और एम्स्टर्डम जैसी कई अहम जगहों पर अपनी म्यूजिक परफॉर्मेंस देंगे। इस टूर का एक मुख्य आकर्षण लंदन के वेम्बली स्टेडियम में दिलजीत की बहुप्रतीक्षित परफॉर्मेंस होगी, जो दुनिया के सबसे मशहूर वेन्यूज में से एक है।

‘अगर मजाक में हो रहा है तो दिक्कत नहीं,’ समय रैना के शो में इमिग्रेंट्स पर जोक से हुए विवाद पर बोले मनोज बाजपेयी

मुंबई। एक्टर मनोज बाजपेयी ने कॉमेडियन समय रैना के शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ में प्रवासियों पर किए गए मजाक से जुड़े विवाद पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अगर मजाक में हो रहा है तो दिक्कत नहीं। हमें खुद पर और एक-दूसरे पर हंसना सीखना चाहिए, सम्मान के साथ। उन्होंने दिल्ली में बस ड्राइवर के ‘ए बिहारी’ कहने का अपना किस्सा भी सुनाया। दरअसल एक्टर मनोज बाजपेयी ने हाल ही में अपनी आने वाली फिल्म ‘लास्ट मैन इन टॉवर’ के प्रमोशन के दौरान आईएएनएस से ​​बात की। जब उन्हें कॉमेडियन के शो में हुई उस घटना के बारे में बताया गया, तो उन्होंने कहा कि अगर यह सब मजाक में हो रहा है, तो मुझे इससे कोई दिक्कत नहीं है। इस शो में शेरोन वर्मा और समय रैना ने मजाक-मजाक में एक-दूसरे की पृष्ठभूमि का मजाक उड़ाया था। मनोज ने ​​कहा, “हमें खुद पर और साथ में भी हंसना सीखना चाहिए। किसी को भावनाओं को आहत किए बिना एक-दूसरे पर हंसना चाहिए और फिर बुरा नहीं मानना ​​चाहिए। हमें यही सीखना चाहिए। हमारे अंदर खुद को लेकर ह्यूमर होना चाहिए, लेकिन साथ ही सम्मान भी होना चाहिए – न सिर्फ अपने लिए, बल्कि उस व्यक्ति के लिए भी जिसके साथ आप बैठे हैं और वह व्यक्ति कहां से आया है, इसके लिए भी। यह बहुत जरूरी है। अगर दो लोग एक-दूसरे के साथ सहज होते हैं, तो वे हमेशा एक-दूसरे पर हंसते हैं।” इसके बाद एक्टर ने राष्ट्रीय राजधानी में अपने शुरुआती दिनों की एक घटना का जिक्र किया, जब एक बस ड्राइवर ने उनसे सख्ती से बात की थी। उन्होंने आगे कहा, “जब मैं दिल्ली में था, तब मैं 18 साल का था, और मैं बस में सामने वाले दरवाजे से चढ़ने की कोशिश कर रहा था क्योंकि यह मेरा पहला अनुभव था। इसलिए, मुझे शहर के नियमों का पता नहीं था। ड्राइवर ने मेरी तरफ देखा और चिल्लाया, ‘ए बिहारी, पिछले गेट से चढ़ो’। उसे पता नहीं था कि मैं बिहार से हूं, लेकिन असल में मैं बिहार से ही हूं। उसके लिए, जो भी व्यक्ति ऐसी बेवकूफी भरी गलती करता था, वह बिहार से ही होता था। मुझे बुरा नहीं लगा क्योंकि पहली बात, वह सही था कि मैं बिहार से हूं। दूसरी बात, मैं भी गलत नहीं था क्योंकि मैं शहर में नया था और बिल्कुल अनजान था।” उन्होंने आगे कहा, “जब मैंने अलग-अलग राज्यों के लोगों से दोस्ती की, तो हम एक-दूसरे पर हंसा करते थे। हमें कभी बुरा नहीं लगा या हम कभी आहत नहीं हुए। लेकिन हां, समस्या तब होती है जब कोई बाहर से आकर आपके लिए या समुदाय के लिए परेशानी का कारण बन जाता है। तब दिक्कत होती है। उससे पहले तो हमें एक-दूसरे पर और खुद पर भी हंसने में सक्षम होना चाहिए। यह एक बहुत ही स्वस्थ समाज की निशानी है।

गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच बड़े हनुमान मंदिर के गर्भगृह में पहुंचा पानी, बजरंगबली का हुआ प्राकृतिक जलाभिषेक

प्रयागराज। प्रयागराज में गंगा और यमुना नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ने से संगम क्षेत्र में पानी का फैलाव बढ़ता जा रहा है। बढ़ते जलस्तर के बीच संगम स्थित प्रसिद्ध बड़े हनुमान मंदिर के गर्भगृह में भी गंगा का पानी प्रवेश कर गया। इसके बाद लेटे हुए हनुमान जी का मां गंगा ने प्राकृतिक जलाभिषेक किया। संगम स्थित प्रसिद्ध बड़े हनुमान मंदिर में पानी पहुंचने का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें सीढ़ियों से होकर गंगा का पानी गर्भगृह की ओर जाता दिखाई दे रहा है। बताया जा रहा है कि नेपाल में भारी बारिश और हिमालयी क्षेत्रों में लगातार हो रही वर्षा के चलते गंगा के जलस्तर में बीते कुछ दिनों से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। इसका असर उत्तर प्रदेश और बिहार के गंगा किनारे बसे शहरों में भी दिखाई दे रहा है। वाराणसी, प्रयागराज के अलावा बिहार के बक्सर, पटना और मुंगेर में भी गंगा का पानी नदी के सामान्य बहाव क्षेत्र से आगे बढ़ गया है। प्रयागराज में गंगा-यमुना के बढ़ते जलस्तर के कारण संगम क्षेत्र में स्थित बड़े हनुमान मंदिर तक पानी पहुंच गया। मंदिर के गर्भगृह में गंगा का पानी प्रवेश करने के बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए हैं। अब जब तक गर्भगृह में गंगा का पानी मौजूद रहेगा, श्रद्धालु लेटे हुए हनुमान जी के प्रत्यक्ष दर्शन नहीं कर सकेंगे। हालांकि, मंदिर परिसर के बाहर स्थित छोटे हनुमान जी के मंदिर में श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना कर रहे हैं। मंदिर में गंगा का पानी प्रवेश करने के बावजूद पंडितों ने पूजा-पाठ किया। श्रद्धालुओं के बीच भी इस प्राकृतिक दृश्य को लेकर उत्साह और आस्था का माहौल दिखाई दे रहा है। दर्शन के लिए पहुंचे लोगों का कहना है कि वे बड़े हनुमान जी के दर्शन करने आए थे, लेकिन मां गंगा ने स्वयं बजरंगबली का जलाभिषेक कर दिया। श्रद्धालुओं ने इसे बेहद अद्भुत और धार्मिक आस्था से जुड़ा दृश्य बताया। उनका कहना है कि हर साल जब गंगा का जलस्तर बढ़ता है तो मां गंगा लेटे हुए हनुमान जी को स्नान कराती हैं। गंगा के पानी से गर्भगृह में हुए इस प्राकृतिक अभिषेक को देखने के लिए संगम क्षेत्र में लोगों की भीड़ भी जुट रही है। प्रशासन की ओर से लगातार बढ़ते जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। गंगा और यमुना के जलस्तर में बढ़ोतरी के चलते निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है।

राजधानी पार्क मेट्रो स्टेशन के पास टिंबर मार्केट में भीषण आग, 25 दमकल गाड़ियों ने आग पर पाया काबू

नई दिल्ली। पश्चिमी दिल्ली में राजधानी पार्क मेट्रो स्टेशन के पास स्थित टिंबर और प्लाईवुड मार्केट में रविवार तड़के भीषण आग लगने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही देर में इसकी ऊंची लपटें दूर-दूर तक दिखाई देने लगीं। लकड़ी, प्लाईवुड और अन्य ज्वलनशील सामग्री मौजूद होने के कारण आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। आग लगने की सूचना मिलते ही दिल्ली दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। आग बढ़ने पर दमकल विभाग ने करीब 25 दमकल गाड़ियों को घटनास्थल पर भेजा। दमकलकर्मियों ने कई घंटों तक लगातार प्रयास कर आग को नियंत्रित किया। बताया जा रहा है कि आग टिंबर और प्लाईवुड से जुड़ी एक फैक्टरी में लगी थी। आग ने इमारत की पहली मंजिल से लेकर तीसरी मंजिल तक के हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। लकड़ी और प्लाईवुड जैसे ज्वलनशील सामान के कारण आग बुझाने में दमकलकर्मियों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। आग की तीव्रता को देखते हुए आसपास के इलाके में भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। घटना के बाद मौके पर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए, जिससे कुछ समय के लिए इलाके में अफरा-तफरी का माहौल रहा। पुलिस और दमकल विभाग की टीमों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला और आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित कराया। दमकलकर्मियों ने आग को अन्य दुकानों और प्रतिष्ठानों तक फैलने से रोकने के लिए भी लगातार प्रयास किया। राहत की बात यह रही कि इस भीषण आग की घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। हालांकि, आग से फैक्ट्री और उसमें रखे लकड़ी तथा प्लाईवुड समेत अन्य सामान को भारी नुकसान होने की आशंका है। फिलहाल नुकसान का विस्तृत आकलन किया जा रहा है। आग लगने के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। दमकल विभाग और संबंधित एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं। प्रारंभिक तौर पर आग के स्रोत और इसके तेजी से फैलने के कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही आग लगने की वजह सामने आ सकेगी।

ऊधम सिंह नगर स्थित बाल सुंदरी देवी मंदिर को लेकर सीएम धामी ने सोशल मीडिया पर लिखा- काशीपुर आगमन पर दर्शन अवश्य करें

देहरादून। उत्तरखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से ऊधम सिंह नगर स्थित बाल सुंदरी देवी मंदिर को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर वीडियो शेयर किया गया। सीएम धामी ने 30 सेकेंड का वीडियो शेयर कर सोशल मीडिया पर लिखा, “काशीपुर (ऊधम सिंह नगर) की पवित्र भूमि पर स्थित मां भगवती बाल सुंदरी देवी मन्दिर एक प्रतिष्ठित सिद्धपीठ है। अद्वितीय आस्था-परंपराओं और ऐतिहासिक मान्यताओं से समृद्ध यह मंदिर अनेक श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहां पूजा अर्चना से मन को असीम शांति का अनुभव होता है। काशीपुर आगमन पर इस पावन स्थल के दर्शन अवश्य करें।” बीते दिन सीएम ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “जनपद उत्तरकाशी में स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर भगवान शिव की आराधना का पावन एवं प्रमुख केंद्र है। यहां श्रद्धालु महादेव की पूजा-अर्चना कर आत्मिक शांति एवं आध्यात्मिक ऊर्जा की अनुभूति करते हैं। आप भी उत्तरकाशी आगमन पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन अवश्य करें।” 27 अगस्त को मुख्यमंत्री की ओर से सोशल मीडिया पर लिखा गया था, “जनपद चमोली में स्थित श्री बैरासकुंड महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित प्राचीन एवं पौराणिक शिवधाम है। मान्यता है कि लंकापति रावण ने यहां भगवान शिव की घोर तपस्या की थी। स्कंद पुराण में भी इस पवित्र क्षेत्र का उल्लेख मिलता है। चमोली आगमन पर श्री बैरासकुंड महादेव के दिव्य दर्शन अवश्य करें।” 26 अगस्त को सीएम की ओर से ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा गया था, “चंपावत जनपद में लोहावती नदी के पावन तट पर स्थित ऋषेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव की आराधना का एक प्राचीन एवं आस्था से जुड़ा केंद्र है। सावन मास में यहां भगवान भोलेनाथ के दर्शन और पूजा-अर्चना से मन को असीम शांति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा की अनुभूति होती है। चंपावत आगमन पर आप भी इस पावन मंदिर के दर्शन अवश्य करें।

8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 3.61, 3.833 और 4 को लेकर तेज हुई चर्चा, जानिए कितना बढ़ सकता है वेतन

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर उत्सुकता लगातार बढ़ रही है। 3 सितंबर को आयोग के गठन के 10 महीने पूरे होने जा रहे हैं और देशभर में विभिन्न हितधारकों के साथ परामर्श का दौर जारी है। आयोग की अध्यक्षता न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं और इसे अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। वेतन संशोधन, भत्तों, पेंशन और अन्य सेवा संबंधी मामलों के बीच सबसे अधिक चर्चा फिटमेंट फैक्टर को लेकर हो रही है, क्योंकि इसी के आधार पर कर्मचारियों के मूल वेतन और पेंशन में बढ़ोतरी तय होती है। फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक होता है जिसके आधार पर वर्तमान मूल वेतन को संशोधित कर नया वेतन तय किया जाता है। वर्तमान में केंद्रीय कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन 18,000 रुपए है, जिसे 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर तय किया गया था। 6वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 1.86 रखा गया था, जबकि 7वें वेतन आयोग में इसे बढ़ाकर 2.57 कर दिया गया था। इसी बदलाव के कारण न्यूनतम मूल वेतन 7,000 रुपए से बढ़कर 18,000 रुपए हो गया था। अब 8वें वेतन आयोग के लिए विभिन्न कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठनों ने इससे कहीं अधिक फिटमेंट फैक्टर की मांग की है। सर्वे ऑफ इंडिया की मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन (एमएसए) ने 3.61 फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव रखा है। यदि इस प्रस्ताव को स्वीकार किया जाता है तो वर्तमान 18,000 रुपए के न्यूनतम मूल वेतन को बढ़ाकर लगभग 64,980 रुपए, यानी करीब 65,000 रुपए किया जा सकता है। दूसरी ओर, नेशनल काउंसिल-जेसीएम (एनसीजेसीएम) स्टाफ साइड और भारत पेंशनर्स समाज (बीपीएस) ने 3.833 फिटमेंट फैक्टर की मांग की है। इस स्थिति में न्यूनतम मूल वेतन करीब 69,000 रुपए तक पहुंच सकता है। सबसे अधिक मांग भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ (बीपीएमएस) ने की है, जिसने 4.00 फिटमेंट फैक्टर लागू करने का सुझाव दिया है। यदि सरकार इस प्रस्ताव को स्वीकार करती है, तो न्यूनतम मूल वेतन बढ़कर 72,000 रुपए तक पहुंच सकता है। इसका मतलब है कि 3.61 और 4.00 फिटमेंट फैक्टर वाले प्रस्तावों के बीच ही लगभग 7,020 रुपए प्रति माह का अंतर बनता है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि 65,000 रुपए, 69,000 रुपए और 72,000 रुपए के ये आंकड़े केवल विभिन्न संगठनों द्वारा दिए गए प्रस्तावों पर आधारित अनुमान हैं। इन्हें 8वें वेतन आयोग के तहत तय होने वाली अंतिम न्यूनतम सैलरी नहीं माना जाना चाहिए। वास्तविक वेतन वृद्धि केवल फिटमेंट फैक्टर पर निर्भर नहीं करेगी, बल्कि नए वेतन मैट्रिक्स, महंगाई भत्ते, अन्य भत्तों और आयोग की अंतिम सिफारिशों पर भी निर्भर करेगी। पेंशनभोगियों के लिए भी फिटमेंट फैक्टर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पेंशन और कई सेवानिवृत्ति लाभ मूल वेतन से जुड़े होते हैं। यदि उच्च फिटमेंट फैक्टर को मंजूरी मिलती है तो इसका सीधा फायदा लाखों पेंशनभोगियों को भी मिल सकता है। हालांकि अंतिम प्रभाव का सही आकलन तभी संभव होगा जब आयोग अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा और उस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल 8वें वेतन आयोग के समक्ष विभिन्न कर्मचारी संगठनों की मांगें पहुंच रही हैं और चर्चा जारी है। ऐसे में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को अभी अंतिम सिफारिशों का इंतजार करना होगा। आयोग की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि फिटमेंट फैक्टर क्या होगा और कर्मचारियों के वेतन तथा पेंशन में वास्तविक बढ़ोतरी कितनी होगी।

अभिषेक और ममता बनर्जी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट पर बोले दिलीप घोष, बंगाल में कोई कानून से ऊपर नहीं

मुर्शिदाबाद। पश्चिम बंगाल सरकार में राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष रघुनाथगंज शहर में सुबह की सैर पर निकले। सुबह-सुबह मंत्री ने कार्यकर्ताओं और आम लोगों के साथ सदरघाट और नेताजी सुभाष द्वीप का दौरा किया। इस दौरान नेपाल के बारे में मीडिया से बात करते हुए घोष ने कहा कि भारत ने मदद का हाथ बढ़ाया है और हमेशा मदद के लिए तैयार रहेगा। उन्होंने ममता और अभिषेक बनर्जी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट पर भी टिप्पणी की और पंचायत विकास व पुराने भ्रष्टाचार के बारे में बात की। टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी और पूर्व सीएम ममता बनर्जी के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट पर मंत्री दिलीप घोष ने कहा, “बंगाल में कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। जो लोग कानून या अदालत का सम्मान नहीं करते, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है और ऐसा हो भी रहा है। अगर वे अदालत के आदेशों को न मानकर सड़कें जाम कर मीटिंग करेंगे, तो कानूनी कार्रवाई तो होगी ही। सभी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी कानून के खिलाफ न जाए।” प्रधानमंत्री आवास योजना की ‘सर्वे टीम’ में तृणमूल समर्थकों के काम करने की बात पर मंत्री दिलीप घोष ने मीडिया से बातचीत में कहा, “जिन स्थानीय लोगों ने यह तय किया है, वे ही इस काम को देख रहे हैं। हम इस बात पर नजर रख रहे हैं कि कहीं इसमें तृणमूल के कार्यकर्ता तो शामिल नहीं हैं। इस इलाके के सभी लोग पहले तृणमूल सदस्य थे। हम इस मामले पर नजर रखे हुए हैं ताकि यह पक्का किया जा सके कि इस काम से कोई भी तृणमूल कार्यकर्ता न जुड़ा हो।” नेपाल में आई बाढ़ और भारत की ओर से मदद करने पर दिलीप घोष ने कहा, “नेपाल में जो त्रासदी हुई, वह मानवता के ऊपर बहुत बड़ा आघात है। पूरी दुनिया इसको लेकर चिंतित है। भारत पड़ोसी देश होने के कारण मदद करना चाहता है। नेपाल की इच्छा है कि वह अपनी समस्या का समाधान करें, यह अच्छी बात है कि नेपाल अपने पैरों पर खड़ा हो और एक मजबूत देश बने, हम भी यही चाहते हैं। लेकिन एक पड़ोसी के तौर पर, जब भी कोई संकट आता है, हम उनके साथ खड़े रहते हैं।

विजय को पीएम उम्मीदवार बनाने पर टीवीके का कैंपेन, कांग्रेस में बढ़ी बेचैनी

चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर पेश करने वाले अभियान के बीच सत्ताधारी पार्टी ‘तमिलगा वेट्री कझगम’ (टीवीके) और उसके सहयोगी दल कांग्रेस के बीच मतभेद के संकेत सामने आए हैं। खबर है कि कांग्रेस नेतृत्व विजय को देश के सबसे बड़े पद के लिए प्रमोट करने वाले पोस्टरों और वीडियो को लेकर परेशान है। हालांकि माना जा रहा है कि यह कैंपेन टीवीके समर्थकों के एक गुट ने पार्टी नेतृत्व को प्रभावित करने के लिए चलाया है, लेकिन कांग्रेस नेताओं को डर है कि इससे गठबंधन के राष्ट्रीय राजनीतिक रुख को लेकर भ्रम पैदा हो सकता है। यह बहस तब शुरू हुई जब टीवीके के विधायकों और मंत्रियों ने विधानसभा में बार-बार विजय की तारीफ की। बाद में यह मामला सदन से बाहर भी फैल गया और सार्वजनिक जगहों पर उन्हें प्रधानमंत्री पद के दावेदार के तौर पर दिखाने वाले पोस्टर लगने लगे। उत्तर भारत में भी प्रचार वाले वीडियो (रील्स) सामने आए हैं, जहां कांग्रेस पार्टी खुद को भाजपा की मुख्य विपक्षी ताकत मानती है। एक टीवी चैनल के सर्वे के बाद इस कैंपेन पर लोगों का ध्यान गया। सर्वे में प्रधानमंत्री पद के संभावित उम्मीदवारों में विजय को 9 प्रतिशत समर्थन के साथ तीसरा स्थान मिला, जो कांग्रेस नेता राहुल गांधी से पीछे थे। खबरों के अनुसार, इस नतीजे से कांग्रेस के भीतर बेचैनी बढ़ गई। पार्टी सूत्रों का कहना है कि नेता इस बात से नाखुश थे कि तमिलनाडु में टीवीके-कांग्रेस गठबंधन के सत्ता में आने के कुछ ही महीनों बाद विजय को इस पद के लिए पेश किया जा रहा था। उन्होंने तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मणिकम टैगोर की हालिया आलोचना का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने मंत्रियों द्वारा ‘फैन वाली मानसिकता’ दिखाने की बात कही थी। कांग्रेस पार्टी के लिए यह स्थिति संवेदनशील है क्योंकि टीवीके के साथ हाथ मिलाने से पहले उसने डीएमके के साथ अपना गठबंधन खत्म कर दिया था, जिसने राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर समर्थन दिया था। कांग्रेस सांसद जोथिमानि ने हाल ही में सीएम विजय को आगे करने की बात को चुनावी रणनीति बताया, लेकिन जोर देकर कहा कि नरेंद्र मोदी की सरकार का सामना करने और उसे हराने के मामले में राहुल गांधी का कोई मुकाबला नहीं है। शनिवार को मदुरै में हुए विवाद के बारे में पूछे जाने पर राज्य मंत्री निर्मल कुमार ने कहा कि पूरे भारत में लोग विजय को लेकर उम्मीदें रखते हैं। उन्होंने कहा कि सीएम विजय राजनीतिक हालात के आधार पर फैसले लेंगे और इस बात पर जोर दिया कि अभी इस मामले पर चर्चा करने की जरूरत नहीं है। खबरों के मुताबिक, कांग्रेस नेता राहुल गांधी को गठबंधन के राष्ट्रीय चेहरे के तौर पर पेश करना चाहते थे और साथ ही दक्षिण भारत में गठबंधन की संभावनाओं को बेहतर बनाने के लिए सीएम विजय की लोकप्रियता का फायदा उठाना चाहते थे। हालांकि, विजय को आगे करने की होड़ ने उस रणनीति को मुश्किल बना दिया है और गठबंधन के भविष्य के संदेश, नेतृत्व की प्राथमिकताओं और राजनीतिक एकजुटता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

‘मैसूर एक्सप्रेस’ के नाम से मशहूर जवागल श्रीनाथ वनडे क्रिकेट में भारत के सफलतम तेज गेंदबाज हैं

नई दिल्ली। जवागल श्रीनाथ का नाम भारतीय क्रिकेट के उन तेज गेंदबाजों में शामिल है जिन्होंने अपने दमदार प्रदर्शन के दम पर लंबे समय तक खेला और बड़ी लोकप्रियता हासिल की। श्रीनाथ को ‘मैसूर एक्सप्रेस’ के नाम से भी जाना जाता है। श्रीनाथ का जन्म 31 अगस्त 1969 को मैसूर, कर्नाटक में हुआ था। दाएं हाथ के तेज गेंदबाज श्रीनाथ बतौर तेज गेंदबाज भारतीय क्रिकेट में कपिल देव के बाद सबसे बड़ा चेहरा थे और कपिल के संन्यास के बाद भारतीय गेंदबाजी की अगुआई की। श्रीनाथ अपनी गति, स्विंग और धीमी गेंदों के बेहतरीन मिश्रण की बदौलत विपक्षी बल्लेबाजों को चकमा देते थे। 1991 में डेब्यू करने वाले जवागल श्रीनाथ को 1997 में इंजरी हुई थी। इस वजह से उन्हें लगभग पूरे साल क्रिकेट से दूर रहना पड़ा था। ऐसी संभावना जताई जा रही थी कि शायद ही उनकी वापसी हो, लेकिन श्रीनाथ न सिर्फ लौटे बल्कि 1998, उनके करियर का श्रेष्ठ वर्ष रहा। इंजरी ने उनकी गति को प्रभावित किया था, लेकिन विकेट लेने की क्षमता उनकी बढ़ गई थी। श्रीनाथ ने 1999 वनडे विश्व कप में पाकिस्तान के खिलाफ 154.5 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से गेंद फेंकी थी। यह गेंद 2023 तक वनडे में किसी भारतीय गेंदबाज की फेंकी गई सबसे तेज गेंद थी। 2023 में श्रीलंका के खिलाफ उमरान मलिक ने 156 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से गेंद फेंक श्रीनाथ का रिकॉर्ड तोड़ा था। एक दशक तक भारतीय तेज गेंदबाजी का प्रमुख चेहरा रहे श्रीनाथ 2002 में श्रीलंका के साथ संयुक्त रूप से आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी की विजेता रही भारतीय टीम के सदस्य थे। 2003 वनडे विश्व कप में भारतीय टीम को फाइनल में पहुंचाने में श्रीनाथ का अहम योगदान था। इस विश्व कप में उनके खेलने की कहानी भी काफी दिलचस्प है। श्रीनाथ ने 2003 विश्व कप से पहले संन्यास ले लिया था, लेकिन तब भारतीय टीम के कप्तान रहे सौरव गांगुली उन्हें वापस लेकर आए। वापसी के बाद श्रीनाथ ने विश्व कप में दमदार प्रदर्शन किया और 11 मैचों में 16 विकेट लिए। जवागल श्रीनाथ ने भारत के लिए 4 वनडे विश्व कप (1992, 1996, 1999, 2003) खेले। 2003 विश्व कप के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया। श्रीनाथ वनडे क्रिकेट में भारत की तरफ से सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले तेज गेंदबाज हैं और अनिल कुंबले के बाद दूसरे सबसे सफल गेंदबाज हैं। वह 300 वनडे विकेट लेने वाले भी एकमात्र भारतीय तेज गेंदबाज हैं। अपने 12 साल के करियर में श्रीनाथ ने 229 वनडे में 315 विकेट लिए। इसके अलावा, 67 टेस्ट मैचों में 236 विकेट उनके नाम हैं। संन्यास के बाद जवागल श्रीनाथ ने कमेंट्री और कोचिंग की जगह पेशे के रूप में रेफरी बनना चुना। मौजूदा समय में वह आईसीसी के सर्वाधिक प्रतिष्ठित रेफरी हैं। 1999 में श्रीनाथ को अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।