चेन्नई की जलकुंभी से भरी व्यासर्पदी नहर में बढ़ा बाढ़ का खतरा

चेन्नई। व्यासार्पडी के शास्त्री नगर के निवासी बाढ़ को लेकर चिंतित हैं क्योंकि लगातार बारिश से जलकुंभी (जलीय पादप) और कचरे से बुरी तरह अवरुद्ध नहर में पानी का खराब प्रवाह उजागर हो गया है। शास्त्री नगर फर्स्ट स्ट्रीट के किनारे व्यासर्पडी नहर का एक हिस्सा जलकुंभी से ढका हुआ है, जिससे पानी के बहने के लिए बहुत कम जगह बची है। नहर एक हरे कालीन की तरह दिखती है, जिसके नीचे जमा पानी दुर्गंध और मच्छरों व कीड़ों के प्रकोप को और बढ़ा देता है। स्थानीय निवासियों ने बताया कि जलीय खरपतवार कई महीनों से अनियंत्रित रूप से फैल रहा था। शहर में रुक-रुक कर हो रही बारिश के कारण, उन्हें आशंका है कि भारी बारिश से नहर में पानी भर सकता है और आसपास की सड़कों और घरों में बाढ़ आ सकती है। शास्त्री नगर के अन्ना सलाई पर पुल के निर्माण से स्थिति और भी जटिल हो गई है। पुल के पास जलमार्ग के कुछ हिस्से निर्माण कार्य के दौरान अवरुद्ध हो गए हैं, जिससे जल निकासी धीमी हो गई है और फर्स्ट स्ट्रीट और आसपास के आवासीय क्षेत्रों में बारिश का पानी जमा हो रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि रात में नहर के पास कूड़ा भी फेंका जा रहा है, जिससे जलमार्ग और भी अवरुद्ध हो रहा है। उन्होंने ग्रेटर चेन्नई नगर निगम से आग्रह किया कि शहर में भारी बारिश होने से पहले जलकुंभी (जलीय पादप) और जमा हुए कचरे को साफ किया जाए। एक निवासी ने बताया, “पिछले पांच महीनों से यहां जलकुंभी उग रही है। कुछ लोग रात में नहर के किनारे कचरा भी फेंक देते हैं। इससे पानी का बहाव और बाधित होता है। दुर्गंध और मच्छरों का प्रकोप रोज़ाना की परेशानी है।” एक अन्य निवासी, नागमणि ने कहा कि पुल के निर्माण कार्य के कारण कुछ स्थानों पर पानी का प्रवाह अवरुद्ध हो गया है, जिसके परिणामस्वरूप आवासीय क्षेत्रों में बारिश का पानी जमा हो गया है। उन्होंने निर्माण कार्य पूरा करने और तब तक निर्बाध जल निकासी सुनिश्चित करने के लिए अस्थायी व्यवस्था करने का आह्वान किया। निवासियों ने चेतावनी दी कि देरी से कार्रवाई करने पर सार्वजनिक स्वास्थ्य और नागरिक जीवन दोनों के लिए दोहरी समस्या उत्पन्न हो सकती है। घरों में बाढ़ आने के खतरे के अलावा, लंबे समय तक पानी जमा रहने से मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन सकती हैं और वेक्टर जनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। नगर निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अन्ना सलाई पर बने पुल के एक तरफ का काम पूरा हो चुका है और दूसरी तरफ का निर्माण कार्य प्रगति पर है। नगर निगम ने नहर से घनी वनस्पति हटाने के लिए रोबोटिक उत्खनन यंत्र की मांग की है। अधिकारी ने बताया कि उपकरण के घटनास्थल पर पहुंचते ही जलकुंभी हटाने का अभियान शुरू हो जाएगा। हालांकि, स्थानीय निवासी चाहते हैं कि नहर को तत्काल साफ किया जाए और भारी बारिश के एक और दौर से पहले उसमें पानी का प्रवाह बहाल किया जाए।
अखिलेश यादव ने बहनों का त्योहार भी घोटाले में बदल दिया: ओपी राजभर

अंबेडकर नगर। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर की ओर से जेपीएनआईसी को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा गया। आईएएनएस से बातचीत करते हुए जेपीएनआईसी को लेकर ओम प्रकाश राजभर ने कहा, “अखिलेश यादव को पहले यह बताना चाहिए कि जेपीएनआईसी जनता के लिए बनी इमारत थी या सैफई के लिए कोई प्राइवेट बंगला। शुरू में इस प्रोजेक्ट की लागत 200 करोड़ रुपये बताई गई थी, लेकिन इस पर 865 करोड़ रुपये खर्च हुए। जनता के टैक्स के पैसे का गलत इस्तेमाल और बंटवारा इसका एक नया उदाहरण है। योगी सरकार ने इसे पीपीपी मॉडल के तहत फिर से जनता के लिए खोलने का फैसला किया है। इसीलिए उन्हें परेशानी हो रही है।” ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर हमला बोलते हुए कहा, “इनके (अखिलेश यादव) राज में पूर्वांचल के गरीब बच्चों इंसेफेलाइटिस से जान चली जाती थी। अब 12 करोड़ से ज्यादा लोगों को मुफ्त इलाज किया जा रहा है। अखिलेश यादव को पता नहीं है कि 2016 की तुलना में डकैती 90 प्रतिशत, लूट 85 प्रतिशत, हत्या 47 प्रतिशत और दुष्कर्म की घटनाएं 53 प्रतिशत घट गई हैं। अखिलेश यादव के राज में हर जिले में एक माफिया होता था। अब माफियाओं की संपत्ति जब्त की जा रही है। ओपी राजभर ने आगे कहा, “अखिलेश यादव के राज में लाल टोपी वाले थाने में कब्जा करते थे। रक्षा बंधन को लेकर अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए ओम प्रकाश राजभर ने कहा, “आपने (अखिलेश यादव) अपने ही दफ्तर में राखी घोटाला किया! पहले आपने 11,000 रुपये के इनाम का ऐलान किया, लेकिन जब महिलाएं आईं, तो आपने उन्हें सिर्फ 1,100 रुपये वाले लिफाफे थमा दिए। बहनों का त्योहार भी घोटाले में बदल दिया। ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि योगी सरकार में 9 सालों में पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के जरिए 9.5 लाख सरकारी नौकरियां दी हैं और 6 महीनों में 1 लाख नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव के राज में विज्ञापन निकलता था। ‘चाचा और भतीजा’ दुकान खोल देते थे। उनकी सरकार में पैसे पर नौकरी दी जाती थी। अखिलेश यादव को जाट तब याद आता है, जब चुनाव आता है। ओम प्रकाश राजभर ने कहा, “देखिए, 3 सितंबर 2013 को हाई कोर्ट ने कहा था कि 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का फायदा सिर्फ 12 जातियां ही उठा रही हैं। इसे बाकी जातियों में बांटा जाना चाहिए और आरक्षण दिया जाना चाहिए। इसी मुद्दे पर, पिछली सरकार के समय राजनाथ सिंह ने 2001 में हुकुम सिंह जी की अध्यक्षता में एक सामाजिक न्याय समिति बनाई थी। उन्होंने 27 प्रतिशत आरक्षण को 7 प्रतिशत, 9 प्रतिशत और 11 प्रतिशत में बांटा था।” आरक्षण मामले को लेकर ओम प्रकाश राजभर ने कहा, “आज जो व्यक्ति डीएम, एसपी, डीआईजी, आईजी, मुख्यमंत्री, राष्ट्रपति या राज्यपाल बन गया है, उनके बेटे को आरक्षण की क्या जरूरत है? आरक्षण उन गरीबों के लिए है जो अभी तक विकास की मुख्यधारा से नहीं जुड़ पाए हैं। आरक्षण की जरूरत उन्हीं को है। इसलिए हमारा मानना है कि आरक्षण गरीबों को मिलना चाहिए और अमीरों के लिए आरक्षण बंद कर दिया जाना चाहिए।
वित्त मंत्री सीतारमण ने अमेरिका में भारतीय समुदाय को किया संबोधित, कई सीईओ से की मुलाकात

शिकागो। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत के महावाणिज्य दूतावास के कार्यालय में अमेरिका में रहने वाले भारतीय समुदाय से बातचीत की और उन्हें संबोधित किया। रविवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, वित्त मंत्री सीतारमण ने विदेशों में बसे भारतीयों की भूमिका की सराहना करते हुए उन्हें एक ऐसी मजबूत ताकत बताया जो भारत की ‘सॉफ्ट पावर’, वैश्विक प्रतिष्ठा और द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ाती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत अपनी तकनीकी क्षमताओं, कुशल वर्कफोर्स और बढ़ते इनोवेशन इकोसिस्टम का इस्तेमाल करके न सिर्फ एक बड़ा बाजार बन सकता है, बल्कि ऑटोनॉमस डिफेंस सिस्टम (खुद से चलने वाले रक्षा सिस्टम) को डेवलप करने, टेस्ट करने और बनाने के लिए एक ग्लोबल हब भी बन सकता है। उन्होंने शिकागो में हयात के प्रेसिडेंट और सीईओ मार्क एस. होपलामैजियन से मुलाकात की। वित्त मंत्रालय के एक बयान के मुताबिक, बातचीत में भारत के प्रति हयात की लगातार प्रतिबद्धता और देश के टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के विकास के नए दौर में प्रवेश करने के साथ अपनी मौजूदगी को और बढ़ाने के मौकों पर चर्चा हुई। उन्होंने भारत की बेहतर होती कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर दिया, जिससे टूरिज्म और कमर्शियल डेस्टिनेशन के नए रास्ते खुल रहे हैं और टियर-2 और टियर-3 शहर आर्थिक गतिविधियों और यात्रा के अहम केंद्र के तौर पर उभर रहे हैं। वित्त मंत्री ने डेस्टिनेशन-बेस्ड टूरिज्म (किसी खास जगह पर केंद्रित पर्यटन) में बढ़ते मौकों पर भी जोर दिया, जिसमें आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, वेलनेस, मेडिकल, नेचर और अनुभव-आधारित टूरिज्म शामिल हैं। साथ ही, उन्होंने हयात को अपनी ग्लोबल विशेषज्ञता और एसेट-लाइट मॉडल का इस्तेमाल करके भारतीय डेवलपर्स और निवेशकों के साथ साझेदारी को और मजबूत करने के लिए प्रोत्साहित किया। यह जानकारी वित्त मंत्रालय ने एक्स पर एक पोस्ट के जरिए दी। वित्त मंत्री सीतारमण ने हयात के भारत में बढ़ते कामकाज के लिए ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ हॉस्पिटैलिटी’ के जरिए टैलेंट डेवलपमेंट के मौकों और ‘गिफ्ट सिटी’ को संभावित फाइनेंसिंग और ट्रेजरी हब के तौर पर इस्तेमाल करने का सुझाव भी दिया। इससे पहले उन्होंने ‘शील्ड एआई’ के को-फाउंडर और प्रेसिडेंट ब्रैंडन त्सेंग से मुलाकात की। बातचीत में ‘शील्ड एआई’ के भारत के साथ जुड़ाव और एआई-इनेबल्ड ऑटोनॉमी, अनमैन्ड सिस्टम और अगली पीढ़ी की डिफेंस टेक्नोलॉजी (जिसमें आर एंड डी, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट, को-डेवलपमेंट और को-प्रोडक्शन शामिल हैं) के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के मौकों पर चर्चा हुई। वित्त मंत्री ने भारत में ‘शील्ड एआई’ की लगातार दिलचस्पी का स्वागत किया और देश के तेजी से बढ़ते डिफेंस टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम, मजबूत इंजीनियरिंग और एआई टैलेंट और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग व इनोवेशन में बढ़ती क्षमताओं पर जोर दिया। एडीएम के ईवीपी और सीएफओ, मोनीश पटोलावाला के साथ हुई बैठक में भारत के प्रति एडीएम की लंबे समय से चली आ रही प्रतिबद्धता और कृषि, भोजन, पोषण, टेक्नोलॉजी और सस्टेनेबल वैल्यू चेन में अपनी भागीदारी को और गहरा करने के अहम मौकों पर चर्चा हुई। वित्त मंत्री ने भारत में एडीएम के निवेश का स्वागत किया, जिसमें किसानों के साथ बढ़ती साझेदारी, एफपीओ के साथ जुड़ाव और बेंगलुरु में अपनी ग्लोबल टेक्नोलॉजी और एआई क्षमताओं की स्थापना शामिल है। उन्होंने भारतीय किसानों के साथ संबंधों को और मजबूत करने और रीजेनरेटिव व सस्टेनेबल खेती को बढ़ावा देने के मौकों पर जोर दिया, साथ ही फूड प्रोसेसिंग, इनोवेशन और उभरती टेक्नोलॉजी में भारत की क्षमताओं का लाभ उठाने की बात कही।
एक और झील फटने की आशंका के चलते नेपाल में बाढ़ की चेतावनी जारी, भोटेकोसी नदी का जलस्तर बढ़ा

काठमांडू। नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (एनडीआरआरएमए) ने नई बाढ़ चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि रसुवा जिले में भोटेकोसी नदी का जलस्तर और बढ़ गया है। अथॉरिटी के अनुसार, एक और झील फटने की संभावना जताई गई है। अथॉरिटी ने सैटेलाइट तस्वीर के आधार पर शनिवार देर रात बताया था कि रसुवागढ़ी सीमा बिंदु से लगभग 18 किलोमीटर ऊपर की ओर ‘ल्हेंडे खोला’ नदी का प्रवाह रुक गया है। इसके कारण करीब 0.11 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में एक झील बन गई है। झील फटने से एक और खतरनाक बाढ़ का खतरा बना हुआ है। अथॉरिटी ने रविवार सुबह जारी एक सूचना में कहा, “रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग और चितवन जिलों सहित प्रभावित इलाकों में खोज, बचाव और राहत कार्यों में लगे सभी लोग, नदियों के किनारे रहने वाले नागरिक और अन्य संबंधित लोगों से अनुरोध है कि वे सतर्क रहें।” जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग के अंतर्गत आने वाले बाढ़ पूर्वानुमान प्रभाग के अनुसार, धाडिंग जिले के गल्छी क्षेत्र में, जो भोटेकोसी नदी के नीचे की ओर स्थित है, त्रिशूली नदी का जलस्तर सामान्य स्तर से तीन मीटर ऊपर पहुंच गया है। बाढ़ पूर्वानुमान प्रभाग के मुताबिक, 26 अगस्त को धाडिंग में बाढ़ का स्तर 14 मीटर से अधिक दर्ज किया गया था। अधिकारियों के अनुसार, त्रिशूली नदी में जलस्तर बढ़ने का मुख्य कारण रसुवा के भोटेकोसी क्षेत्र से आया बाढ़ का पानी है। जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग के एक अधिकारी ने कहा, “फिलहाल ज्यादा खतरा नहीं है, क्योंकि लोग पहले ही नदी किनारे वाले इलाकों से सुरक्षित स्थानों पर जा चुके हैं।” एनडीआरआरएमए लगातार इस बात को लेकर चेतावनी देता रहा है कि एक और बड़ी बाढ़ आ सकती है, क्योंकि ‘ल्हेंडे खोला’ नदी, जो भोटेकोसी नदी की एक सहायक नदी है, उसका प्रवाह बाधित हो गया है। अथॉरिटी ने शनिवार देर रात जारी बयान में कहा, “27 अगस्त 2026 को सुबह 11:44 बजे ली गई सैटेलाइट तस्वीर के शुरुआती विश्लेषण के आधार पर पता चलता है कि रसुवागढ़ी सीमा बिंदु से लगभग 18 किलोमीटर ऊपर की ओर ल्हेंडे खोला नदी का प्रवाह रुक गया है। इसके कारण करीब 0.11 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में एक झील बन गई है।” बयान में कहा गया, “इस बात का खतरा बना हुआ है कि झील को रोकने वाला प्राकृतिक बांध टूट सकता है, जिससे एक और बड़ी बाढ़ आ सकती है। इसलिए नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों और सभी संबंधित पक्षों से सतर्क रहने और बेहद सावधानी बरतने की अपील की जाती है।” अथॉरिटी ने बताया कि शुरुआती आकलन से संकेत मिले हैं कि उस क्षेत्र में कुछ और झीलें भी बनी हो सकती हैं। प्राधिकरण के अनुसार 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ में अब तक 675 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,498 लोग अब भी लापता हैं। लापता लोगों में 589 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है शलभासन, जानिए सही विधि और फायदे

नई दिल्ली। योग शरीर और मन को स्वस्थ रखने की एक प्राचीन पद्धति है, जिसके हर आसन का अपना विशेष महत्व है। इन्हीं महत्वपूर्ण आसनों में से एक है शलभासन। यह आसन पीठ, रीढ़ और कोर की मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए बहुत फायदेमंद है। शलभासन करते समय शरीर की मुद्रा ‘शलभ,’ यानी टिड्डे, जिसे अंग्रेजी में ग्रासहॉपर कहते हैं, के समान होती है। शलभासन रीढ़ की हड्डी की सेहत के लिए बहुत ही अच्छा होता है। यह पीठ के बल लेटकर किया जाने वाला एक बेहद लाभकारी आसन है, जो न सिर्फ रीढ़ की हड्डी को मजबूत करता है बल्कि पाचन तंत्र और मांसपेशियों के लिए भी वरदान माना जाता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, शलभासन एक ऐसा योगासन है जिससे रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है और शरीर का वजन नियंत्रित रहता है। इस आसन को नियमित और सही तरीके से करने से पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद मिलती है। जिन लोगों को हल्का लोअर बैक दर्द या साइटिका जैसी समस्या रहती है, उनके लिए भी यह आसन उपयोगी हो सकता है, हालांकि किसी भी तरह के गंभीर दर्द या चोट की स्थिति में इसे खुद से करने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है। शलभासन देखने में भले ही आसान लगे, लेकिन इसे करते समय शरीर के कई हिस्से एक साथ काम करते हैं। इस आसन में पेट के बल लेटकर पैरों को ऊपर उठाने का प्रयास किया जाता है। इससे पीठ और कमर के आसपास की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं। यही वजह है कि इसे बैक स्ट्रेंथ बढ़ाने वाले योगासनों में शामिल किया जाता है। शलभासन को करने के लिए सबसे पहले पेट के बल जमीन पर लेट जाएं। अपने हाथों को आगे की ओर फैला दें, हथेलियां ऊपर की ओर और पैर सीधे हों। माथा या ठुड्डी जमीन को छू रही हो। गहरी सांस लें और शरीर को स्थिर करें। सांस छोड़ते हुए दोनों पैरों को एक साथ धीरे-धीरे ऊपर उठाएं। पैरों को सीधा रखें और घुटनों को न मोड़ें। इसके साथ ही हाथों को भी ऊपर की ओर उठाना है। यह कुछ सुपरमैन पोज जैसा है। इस स्थिति में 10-30 सेकेंड तक रुकें, सामान्य रूप से सांस लेते रहें। इसके बाद धीरे-धीरे पैरों और छाती को जमीन पर लाएं और विश्राम करें। इस आसन को करने के दौरान कुछ सावधानियां भी बरतनी जरूरी है। गर्भावस्था, हर्निया, या पीठ/गर्दन की चोट वाले लोग इसे न करें।
कलम की बेबाक आवाज अमृता प्रीतम, जिन्होंने अपनी शर्तों पर लिखी इश्क और समाज की बंदिशें तोड़ने की कहानी

नई दिल्ली। कुछ लोग लिखते हैं ताकि उनकी बातें कागज पर दर्ज हो जाएं, लेकिन कुछ ऐसे होते हैं जिनकी लिखी हुई बातें लोगों के दिल में उतर जाती है। अमृता प्रीतम उन्हीं चुनिंदा लेखकों में से एक थीं। उन्होंने सिर्फ कविताएं और कहानियां नहीं लिखीं, बल्कि अपने समय की औरत के मन, उसके दर्द, प्रेम, अकेलेपन और सपनों को शब्द दिए। उन्होंने जिंदगी को भी उसी बेबाकी से जिया, जिस बेबाकी से लिखा। समाज की बनाई लकीरों को मानने के बजाय उन्होंने अपनी राह खुद चुनी। 31 अगस्त 1919 को तत्कालीन पंजाब के गुजरांवाला में जन्मीं अमृता प्रीतम का बचपन आसान नहीं था। महज 11 साल की उम्र में उन्होंने अपनी मां को खो दिया। इस कमी ने उनके भीतर एक गहरी तन्हाई पैदा की और इसी तन्हाई में कागज और कलम उनके साथी बन गए। छोटी उम्र से ही उन्होंने लिखना शुरू कर दिया था। महज 16 साल की उम्र में उनका पहला कविता संग्रह ‘अमृत लहरें’ प्रकाशित हुआ। उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ आया 1947 के बंटवारे के समय। लाहौर उनका अपना शहर था, लेकिन हिंसा और दंगों ने लाखों लोगों की तरह उन्हें भी अपना घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया। इसी सफर में उनके भीतर से निकली कविता ‘अज्ज आखां वारिस शाह नूं’ ने बंटवारे के दर्द को ऐसी आवाज दी, जिसे भारत और पाकिस्तान दोनों तरफ सुना गया। इस कविता में उन्होंने खास तौर पर उन औरतों की पीड़ा को सामने रखा, जो बंटवारे की हिंसा में अपना घर, परिवार और सम्मान तक खो बैठी थीं। अमृता की लेखनी की खासियत यही थी कि वह बड़े से बड़े सामाजिक मुद्दे को इंसानी भावनाओं के जरिए सामने रखती थीं। उनके चर्चित उपन्यास ‘पिंजर’ में भी बंटवारे की पृष्ठभूमि है, लेकिन कहानी के केंद्र में एक औरत है—पूरो। उसका जीवन दंगों की भेंट चढ़ जाता है और वह अपनी पहचान, परिवार और सपनों के बीच फंस जाती है। अमृता ने पूरो के जरिए सिर्फ एक लड़की की कहानी नहीं कही, बल्कि उन हजारों महिलाओं की आवाज को शब्द दिए, जिनकी जिंदगी बंटवारे की हिंसा में बदल गई थी। लेकिन अमृता की पहचान सिर्फ बंटवारे पर लिखने वाली लेखिका की नहीं थी। उन्होंने प्रेम को भी उतनी ही गहराई से महसूस किया और लिखा। उनकी जिंदगी में साहिर लुधियानवी का नाम बेहद खास रहा। दोनों के बीच ऐसा रिश्ता था जिसे शायद शब्दों में पूरी तरह बांधना मुश्किल है। मुलाकातें कम थीं, लेकिन एहसास गहरा था। अमृता ने अपनी आत्मकथा ‘रसीदी टिकट’ में साहिर से जुड़े कई किस्से बेहद खूबसूरती से लिखे। साहिर के कमरे से चले जाने के बाद उनकी बुझी हुई सिगरेटों को संभालकर रखना और उन सिगरेट के टुकड़ों में साहिर की मौजूदगी महसूस करना, उनके उस अनकहे प्रेम की कहानी कहता है। हालांकि यह प्रेम अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच सका। बाद में उनकी जिंदगी में चित्रकार इमरोज आए। इमरोज और अमृता का रिश्ता भी अपने आप में अनोखा था। दोनों ने बिना शादी के साथ रहते हुए एक-दूसरे का साथ निभाया। इमरोज अमृता के जीवन में सिर्फ साथी नहीं, बल्कि उनके मौन को समझने वाले इंसान थे। अमृता रात में लिखती थीं और इमरोज कई बार रात के एक बजे उनके लिए चाय बनाकर रख देते थे। बिना किसी शोर-शराबे के चलने वाला यह रिश्ता प्रेम की अपनी अलग परिभाषा बन गया। अमृता ने अपने लेखन में औरत को सिर्फ किसी रिश्ते की पहचान के रूप में नहीं देखा। उनकी कहानियों और कविताओं में औरत अपनी इच्छाओं, फैसलों और भावनाओं के साथ मौजूद है। यही बात उन्हें अपने दौर से आगे की लेखिका बनाती है। उन्होंने समाज के उन नियमों पर सवाल उठाए, जिन्हें अक्सर बिना सोचे-समझे स्वीकार कर लिया जाता था। अमृता प्रीतम को साहित्य अकादमी पुरस्कार, ज्ञानपीठ पुरस्कार, पद्मश्री और पद्मविभूषण जैसे सम्मान मिले, लेकिन उनकी असली पहचान किसी पुरस्कार से बड़ी थी। वह उन पाठकों के दिल में बसीं, जिन्हें उनके शब्दों में अपना दर्द, अपना प्रेम और अपना संघर्ष दिखाई दिया। 31 अक्टूबर 2005 को अमृता प्रीतम ने दुनिया को अलविदा कहा, लेकिन उनकी कलम की आवाज आज भी सुनाई देती है।
पास्टर अंकुर नरूला की बढ़ सकती है मुश्किल, ईडी ने सीलबंद लिफाफे में कोर्ट में दाखिल की रिपोर्ट

नई दिल्ली। जालंधर के पास्टर अंकुर नरूला की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अंकुर नरूला के खिलाफ कोर्ट में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट दाखिल की है। अंकुर नरूला पर चंगाई सभाओं में चमत्कार के नाम पर लोगों को गुमराह करने का आरोप है। पास्टर अंकुर नरूला पर विदेशी मिशनरी को पर्यटक वीजा पर भारत बुलाकर धार्मिक गतिविधियां करवाने के आरोप हैं। इसे विदेशी अधिनियम 1946 का उल्लंघन माना गया है। इसके साथ ही, आरोप है कि नरूला की संस्था ने बिना एफसीआरए विदेशी चंदा प्राप्त किया। इसके इलावा, अभिषेक तेल और घड़ियों की बिक्री बिना जीएसटी बिलों के करने का आरोप है। ऐसे में मनी लॉन्ड्रिंग की आशंकाओं को देखते हुए ईडी ने मामले की जांच शुरू की थी। फिलहाल, जांच एजेंसी ने कोर्ट में सीलबंद लिफाफे में एक रिपोर्ट दाखिल की है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) भी इस मामले में जांच कर रही है। अदालत ने सीबीआई को भी नरूला पर लगे आरोपों की जांच कर सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिया है। अदालत का यह भी निर्देश है कि इस स्टेज पर कोई भी पक्ष मीडिया को केस की जानकारी नहीं देगा। इस मामले में 6 अक्टूबर को अगली सुनवाई होनी है। नरूला जालंधर-नकोदर रोड पर खाम्बरा गांव में पेंटेकोस्टल चर्च के तहत ‘चर्च ऑफ साइन्स एंड वंडर्स’ नाम का चर्च चलाते हैं। हिंदू खत्री परिवार में जन्मे नरूला ने अपने परिवार का मार्बल और टाइल्स का बिजनेस छोड़कर ईसाई धर्म अपनाने का फैसला किया। नरूला ने 2008 में खाम्बरा गांव में ‘चर्च ऑफ साइन्स एंड वंडर्स’ की स्थापना की थी।
संग्राम सिंह और मुधरिमा तुली ने ‘फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल’ को सरकार की बेहतरीन पहल बताया

नई दिल्ली। ‘फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल इवेंट’ का आयोजन नई दिल्ली में हुआ। केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री मनसुख मांडविया के नेतृत्व में हुए इस कार्यक्रम में खेल और सिनेमा से जुड़ी शख्सियतों ने हिस्सा लिया। पहलवान और अभिनेता संग्राम सिंह ने आईएएनएस से कहा, “प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किया गया फिट इंडिया मुहिम कमाल का है। मनसुख मांडविया ने इस इवेंट से साइकिलिंग को जोड़ते हुए इसे व्यापक स्तर पर ला दिया है। साइकिलिंग से हम स्वास्थ्य के साथ-साथ पर्यावरण को अच्छा बना सकते हैं। अगर हम साइकिलिंग से बेस्ट बन सकते हैं, तो फिर साधारण क्यों रहना है।” कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंची अभिनेत्री मधुरिमा तुली ने आईएएनएस से कहा, “मुझे बहुत खुशी है। मैं संडे ऑन साइकिल इवेंट में तीसरी बार आई हूं। मैं जब भी आती हूं तो यहां के लोगों की ऊर्जा मुझे प्रभावित करती है। इस इवेंट का संदेश पूरे देश में तेजी से फैल रहा है। महाराष्ट्र में 40 से 50 के उम्र के बीच की महिलाएं भी इसको फॉलो कर रही हैं। हेल्थ के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी यह मुहिम काफी अच्छी है। मैं खुशकिस्मत हूं कि इस इवेंट का हिस्सा हूं।” मीडिया से बात करते हुए भारतीय टीम के हेड कोच गंभीर ने कहा, “सरकार के द्वारा आयोजित किया जाने वाला फिट इंडिया अभियान एक बेहतरीन पहल है। मेरा मानना है कि देश जितना स्वस्थ रहेगा, उतना ही मजबूत और आत्मनिर्भर रहेगा।” उन्होंने कहा, “फिट इंडिया को एक इवेंट नहीं, बल्कि एक अभियान के नजरिए से देखा जाना चाहिए। युवा या जितने भी लोग इस अभियान से जुड़े हैं, उन्हें कोशिश करनी चाहिए कि इसे देश भर में फैलाएं और लोगों को फिटनेस के बारे में जागरूक करें। एक स्वस्थ और फिट देश ही मजबूत देश हो सकता है।” फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल का यह 88वां संस्करण था। इसे देश भर में 25,000 से ज्यादा जगहों पर आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में हर उम्र वर्ग के लोगों ने हिस्सा लिया।
महिला एशिया कप: पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ मिलाने पर क्या बोले भारतीय टीम के हेड कोच अमोल मजूमदार?

दुबई। महिला एशिया कप 2026 में रविवार का दिन क्रिकेट फैंस के लिए रोमांचक होने वाला है। दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में भारतीय महिला टीम और थाइलैंड के बीच मुकाबला होने वाला है। हालांकि, टूर्नामेंट में भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले मैच का इंतजार है। दोनों देशों के बीच मुकाबला 5 सितंबर को होना है। भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से आपसी रिश्ते सहज नहीं हैं। अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद क्रिकेट के मैदान पर भी दोनों देशों के बीच दूरियां साफ दिखी हैं। पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के कप्तान और टीम (पुरुष और महिला) एक दूसरे के साथ हाथ नहीं मिलाते। एशिया कप 2026 में क्या यह सिलसिला कायम रहेगा या टूटेगा। इसे लेकर फैंस के मन में सवाल है। पाकिस्तान के खिलाफ होने वाले मैच के दौरान क्या भारतीय टीम पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ मिलाएगी? इस सवाल का जवाब थाइलैंड के साथ होने वाले मैच से पहले आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय टीम के कोच अमोल मजूमदार ने दिया। उन्होंने कहा, “देखिए, हम मैदान पर सबसे अच्छा क्रिकेट खेलने की कोशिश करते हैं, और मैदान के बाहर की चीजों पर हम ध्यान नहीं देते। हम उस दिन सबसे अच्छा क्रिकेट खेलने की कोशिश करते हैं, और जब हम वह मैच खेलेंगे तो इस बारे में बात करेंगे। लेकिन अभी, थाइलैंड के खिलाफ मैच पर ध्यान दे रहे हैं।” थाइलैंड ने टूर्नामेंट की शुरुआत जीत के साथ की है। अपने पहले मैच में थाइलैंड ने हांगकांग को 6 रन से हराया था। भारतीय टीम का टूर्नामेंट में यह पहला मैच है और निश्चित रूप से थाइलैंड के खिलाफ टीम सावधान रहेगी। थाइलैंड के खिलाफ मैच से जुड़े सवाल पर मजूमदार ने कहा, “हमें टूर्नामेंट की अच्छी शुरुआत पर फोकस करना होगा। हम आक्रामक क्रिकेट खेलते हुए बेहतर परिणाम हासिल करने का प्रयास करेंगे।” भारतीय टीम का हाल में टी20 फॉर्मेट में प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। इस पर मजूमदार ने कहा, “हम फॉर्म पर ज्यादा ध्यान नहीं देते। आप पिछले छह महीनों में टी20 हमारे प्रदर्शन पर बात कर रहे हैं। हम जानते हैं कि इस टीम में सुधार की बहुत गुंजाइश है। टीम में युवा खिलाड़ी हैं। हम अच्छा और आक्रामक क्रिकेट खेलने की कोशिश कर रहे हैं।
जीवन का असली पैमाना इस बात में है कि आप समाज को कितना लौटाते हैं: मोहन भागवत

न्यूयॉर्क। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने लोगों से निजी दौलत और भौतिक सफलता से आगे देखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जीवन का असली पैमाना इस बात में है कि आप समाज को कितना लौटाते हैं। यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि हर व्यक्ति दूसरों के काम और योगदान पर निर्भर है। इसी वजह से समाज को वापस देने की जिम्मेदारी भी बनती है। संघ प्रमुख ने कहा, “हम कितना कमाते हैं यह महत्वपूर्ण नहीं है। हम कितना बांटते हैं यह महत्वपूर्ण है।” उन्होंने सवाल उठाया कि क्या करियर को सिर्फ पैसा और भौतिक सुख पाने का जरिया मानना चाहिए। क्या करियर सिर्फ पैसा है? क्या करियर सिर्फ भौतिक खुशी है? मोहन भागवत ने कहा कि भारतीय परंपराएं धन या भौतिक उपलब्धि को खारिज नहीं करतीं। वे दोनों को मानव जीवन का वैध हिस्सा मानती हैं, लेकिन एकमात्र उद्देश्य नहीं। यहां तक कि हमारे उपनिषद भी हमें बताते हैं कि केवल मोक्ष के पीछे मत भागो। आपको भौतिक सफलता भी हासिल करनी है। उन्होंने तर्क दिया कि कोई भी व्यक्ति खुद को पूरी तरह से सेल्फ-मेड नहीं कह सकता, क्योंकि उसका जीवन माता-पिता, किसान, मजदूर और कई अन्य लोगों के सहारे चलता है। उन्होंने पूछा, “हम सभी जीवन के इस मुकाम तक आए हैं। हम बड़े हुए हैं, हम सीख रहे हैं, और हम आगे बढ़ेंगे। हमें यह क्षमता किसने दी? यह शरीर हमें किसने दिया, हमारे माता-पिता ने। दुनिया में कहीं खेती हो रही है। इसीलिए आप खा पा रहे हैं। अगर किसान खेती करना बंद कर दें, तो आप क्या खाएंगे? आप कपड़े पहन रहे हैं क्योंकि मिलें हैं। मजदूर काम कर रहे हैं। कपास उगाने वाले किसान अभी भी हैं। हम सब कुछ किसी और के कारण पाते हैं। हम दुनिया से लेते हैं। और इसलिए हमें वापस भी देना है।” उन्होंने कहा कि भौतिक सुख की तलाश कभी स्थायी संतुष्टि नहीं दे सकती। उन्होंने इस बात को समझाने के लिए डोनट्स का उदाहरण दिया। उन्होंने हंसते हुए कहा, “अगर मुझे न्यूयॉर्क के डोनट्स पसंद हैं, तो मैं डोनट्स खाऊंगा। एक बार में कितने डोनट्स खा सकता हूं? मुझे नहीं पता। मैं डायबिटिक हूं। कल सुबह मैं 50 और खाने के लिए तैयार हो जाऊंगा। तो भौतिक खुशी क्षणिक है, संतुष्ट नहीं कर सकती, और अगर भौतिक सुख की अधिकता है, तो वह विफल भी हो सकती है।” मोहन भागवत ने कहा कि मनुष्य में अपने फैसलों के परिणामों के बारे में सोचने की विशेष क्षमता है। सोच की दिशा ही तय करती है कि वह सिर्फ अपने लिए जी रहा है या दूसरों के लिए भी जिम्मेदारी ले रहा है। संघ प्रमुख ने कहा, “आप सोच सकते हैं, लेकिन आप किस तरह से सोचते हैं, वह महत्वपूर्ण है। अगर आप सही तरीके से सोचते हैं, तो आप भगवान के करीब जाते हैं। अगर आप गलत तरीके से सोचते हैं, तो आप पशु जगत के करीब जाते हैं।” उन्होंने कहा, “हमें एक-दूसरे का ख्याल रखना होगा। हमें इस तरह ख्याल रखना होगा कि मेरा जीवन जीवन को बनाए रखे।