दलीप ट्रॉफी: ईशान किशन के चोटिल होने पर वैभव सूर्यवंशी ने संभाली ईस्ट जोन की कप्तानी

बेंगलुरु। युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को पहली बार सीनियर फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में टीम की कप्तानी करने का मौका मिला। रविवार को दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल में सेंट्रल जोन के खिलाफ उन्होंने ईस्ट जोन के कार्यवाहक (स्टैंड-इन) कप्तान के रूप में टीम की कमान संभाली। ईस्ट जोन टीम के मौजूदा उप-कप्तान सूर्यवंशी ने सेमीफाइनल के पहले दिन कप्तानी की जिम्मेदारी तब संभाली, जब नियमित कप्तान ईशान किशन मैदान से बाहर चले गए। सेंट्रल जोन की बल्लेबाजी के दौरान विकेटकीपिंग करते हुए किशन के दाहिने अंगूठे में चोट लग गई, जिसके कारण उन्हें मैदान से बाहर जाना पड़ा। ईस्ट जोन के कप्तान की जगह कुमार कुशाग्र ने विकेटकीपर की जिम्मेदारी संभाली, जबकि सूर्यवंशी ने कुछ समय के लिए जोनल टीम के स्टैंड-इन कप्तान की भूमिका निभाई। सूर्यवंशी दलीप ट्रॉफी में चर्चा का विषय रहे हैं। इस युवा खिलाड़ी ने नॉर्थ ईस्ट जोन के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में सिर्फ आठ रन बनाए थे, लेकिन गेंदबाजी में उनका प्रदर्शन शानदार रहा था। उन्होंने महज 11 रन देकर 2 विकेट अपने नाम किए थे। वैभव ने गेंदबाजी करने के अपने अनुभव को भी शेयर किया था। उन्होंने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) डोमेस्टिक द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो में सूर्यवंशी ने कहा, “अगर आप किसी भी बल्लेबाज से पूछें, तो उन्हें हमेशा गेंदबाजी करना पसंद होता है। एक बल्लेबाज को हमेशा गेंदबाजी करने में मजा आता है और एक गेंदबाज को हमेशा बल्लेबाजी करने में उतना ही आनंद आता है।” जोनल टीम के उप-कप्तान और ईशान किशन के सहयोगी के तौर पर नियुक्त किए गए सूर्यवंशी ने कप्तान के उन्हें गेंदबाजी कराने के फैसले के बारे में बात की और खुद को विकेट लेने वाला खिलाड़ी बताया था। उन्होंने आगे कहा, “विरोधी टीम के विकेट नहीं गिर रहे थे, इसलिए मुझे दो या तीन ओवर गेंदबाजी करने के लिए कहा गया। ईशान किशन को लगा कि वह जोखिम उठा रहे हैं, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि मैं विकेट लेने वाला खिलाड़ी हूं।” ईस्ट जोन बनाम सेंट्रल जोन सेमीफाइनल की बात करें तो, टॉस जीतने के बाद ईस्ट जोन ने रजत पाटीदार की कप्तानी वाली सेंट्रल जोन टीम को पहले बल्लेबाजी के लिए बुलाया। पाटीदार की टीम में सारांश जैन की वापसी हुई है। इस ऑफ स्पिन ऑलराउंडर ने इस महीने की शुरुआत में श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो टेस्ट में भारत के लिए डेब्यू किया था। पहले दिन के पहले सेशन में ईस्ट जोन ने सेंट्रल जोन को 32 ओवर में 81/3 पर रोककर उन पर दबाव बनाए रखा। अभिजीत के. सरकार और मुकेश कुमार ने क्रमशः दो और एक विकेट लिए। अभिजीत ने दिन के पहले घंटे में अमन मोखाडे और कुणाल चंदेला को आउट किया, जबकि भारतीय खिलाड़ी मुकेश ने दूसरे घंटे के आखिर में पाटीदार को 12 रनों के स्कोर पर क्लीन बोल्ड किया।

संघ प्रमुख के स्पीच पर विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया, बोले- उनको यह भाषण आरएसएस और भाजपा कार्यकर्ताओं को देना चाहिए

नई दिल्ली। संघ प्रमुख मोहन भागवत की ओर से न्यूयॉर्क में ‘यूनिवर्सल वननेस’ कार्यक्रम में हिंदू-मुस्लिम एकता पर भाषण देने को लेकर नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आई है। हिंदू-मुस्लिम एकता पर संघ प्रमुख के बयान को लेकर कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, “वे बदले हुए लहजे में भाषण देकर लौटे हैं। उन्हें उस जगह बोलने की इजाजत नहीं मिली जहां वे बोलना चाहते थे, इसलिए उन्होंने एक छोटे से कमरे में अपनी बात कही और लोग उन्हें सुनने भी नहीं आए। लेकिन मैं यह कहना चाहता हूं कि भारत का संविधान बहुत स्पष्ट है। यह लिंग, धर्म, जाति और भाषा के भेदभाव के बिना सभी को समानता की गारंटी देता है। अगर कोई कानून का उल्लंघन किए बिना अपने धर्म का पालन करता है, तो भारत में उसे भी वही अधिकार मिलते हैं जो बाकी सभी को मिलते हैं।” कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने कहा, “वे अमेरिका में क्यों भाषण देते हैं? उनको यह भाषण भाजपा और संघ के सभी कार्यकर्ताओं को देना चाहिए। उनके इस भाषण की आवश्यकता देश में है। वे इस देश को बचाने की बजाए बिगाड़ने का काम कर रहे हैं। कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा, “इन लोगों को दोहरा चरित्र है और इनकी हिप्पोक्रेसी की सीमा नहीं रही। वे न्यूयॉर्क में गरीबी दूर करने गए हैं। यहां के लोग अपनी गरीबी दूर करने के लिए अमेरिका गए हैं। वे डंकी रूट से जाते हैं और बेइज्जती सहते हैं। भारत में 80 करोड़ से ज्यादा लोग गरीब हैं, उसकी चिंता नहीं है। आरएसएस के लोग जिस तरह से चुनाव लड़वाते हैं, जमीन पर उतरते हैं और झूठ बोलते हैं और भाजपा को जीत दिलाते हैं, उनसे ज्यादा लालची कोई हो ही नहीं सकता है। सपा सांसद हरेंद्र सिंह मलिक ने कहा, “अच्छा रहेगा कि मोहन भागवत की ओर से भाजपा कार्यकर्ताओं और उनके जो मुख्यमंत्री और मंत्री हैं, उनको ये निर्देश दिया जाए। मोहन भागवत को भी उनके काम और आचरण की समीक्षा करनी चाहिए। टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कहा, “यह अच्छी बात है। हम सभी चाहते हैं कि भारत में एकता और विविधता बनी रहे। लेकिन मुझे नहीं पता कि मोहन भागवत ने जो कहा है, उस पर वे सच में यकीन करते हैं या नहीं।” डीएमके नेता टी.के.एस. इलांगोवन ने कहा, “उन्हें इस बात की कोई परवाह नहीं है कि संविधान क्या कहता है। संविधान हर भारतीय नागरिक को किसी भी धर्म को मानने, उसका पालन करने और उसका प्रचार-प्रसार करने का मौलिक अधिकार देता है। किसी को भी अपनी पसंद का धर्म चुनने या उसका पालन करने से नहीं रोका जा सकता। संविधान का अनुच्छेद 25 यही कहता है। लेकिन उन्हें इन संवैधानिक अधिकारों की कोई परवाह नहीं है। वे असभ्य लोगों जैसा व्यवहार कर रहे हैं। मेरा यही कहना है। उन्हें कानून की कोई परवाह नहीं है।

इंडियन गोल्फर भाटिया 22वें नंबर पर खिसके, होवलैंड टूर चैंपियनशिप में आगे

अटलांटा। अक्षय भाटिया ने बैक नाइन के आखिर में अपनी तीन में से दो बोगी गंवा दीं और टूर चैंपियनशिप के तीसरे राउंड के आखिर में 29 खिलाड़ियों में से टाई-22वें नंबर पर आ गए। दूसरे राउंड के बाद टी-11 पर चल रहे भाटिया के 1-ओवर 71 के स्कोर ने 65-69 और 71 के राउंड के बाद उनका टोटल 5-अंडर कर दिया। भाटिया ने पांचवें होल पर एक शॉट गंवा दिया, जिसे उन्होंने 12वें होल पर वापस पा लिया, लेकिन 14वें और 15वें होल पर लगातार बोगी के कारण 17वें होल पर बर्डी के बावजूद वह फिर से पीछे हो गए। अभी एक और राउंड बाकी है, लेकिन टूर चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई करने की वजह से भाटिया अगले सीजन के सभी चार मेजर्स में अपनी जगह पक्की कर चुके हैं। विक्टर होवलैंड ने अपने पिछले छह लगातार पुट में सात फीट या उससे ज्यादा के चार बर्डी पुट लगाए और 5-अंडर 65 का स्कोर किया। उन्होंने सीजन के आखिरी मुकाबले में एक शॉट की बढ़त ले ली, जो बहुत मुश्किल था। होवलैंड ने आखिर में 8-फीट के दो बर्डी पुट लगाए, जिससे उनका स्कोर 15-अंडर 195 हो गया, जो टूर चैंपियनशिप के नए खिलाड़ी रयान जेरार्ड से एक शॉट आगे था, जिन्होंने 66 के लिए बोगी-फ्री खेला। स्कॉटी शेफलर (66) और क्रिस गॉटरअप (67), जिन्होंने इस साल मिलकर पांच पीजीए टूर टाइटल जीते हैं, 12-अंडर 198 पर तीन शॉट पीछे थे। उनके साथ 46 साल के एडम स्कॉट और लुडविग एबर्ग भी थे। दोनों ने इस साल अपनी पहली जीत की तलाश में 65 का स्कोर किया। इस रेस में रोरी मैकलरॉय भी थे, जिन्होंने दो बोगी कीं, पार-5 18वें होल पर पार स्कोर किया और फिर भी 63 का स्कोर करके पांच शॉट के अंदर आ गए। उनके साथ कैमरन यंग भी थे, जिनकी 10वें होल पर डबल बोगी ने उन्हें 68 के राउंड में पीछे कर दिया। आखिरी दिन जीतने वाले के लिए 10 मिलियन डॉलर दांव पर लगे हैं, जो गोल्फ में किसी एक टूर्नामेंट के लिए सबसे बड़ी आधिकारिक राशि है। होवलैंड आखिर में ग्रीन्स पर अपना बेस्ट दे रहे थे – 13वें होल पर बर्डी के लिए 11 फीट, 14वें होल पर पार बचाने के लिए 18 फीट, 15वें होल पर पेनिनसुला-ग्रीन पर बर्डी के लिए 11 फीट, 16वें होल पर 7-फुट का पार पुट और उनकी आखिरी बर्डी। जेरार्ड ने अच्छा खेला, खासकर बैक नाइन पर, दोनों पार 5 पर बर्डी लगाईं और इस साल अपनी पहली जीत के मौके के लिए गेम में बने रहे। मैकलरॉय ने भी यही किया, सात शॉट पीछे से शुरुआत की और उनके पास खोने के लिए बहुत कम था। शेफलर ने भी बोगी-फ्री खेला और 8 से 12-फीट की रेंज में कुछ और बर्डी मौकों का फायदा नहीं उठा पाने का अफसोस जताया। वह इस सीजन में कमाल की निरंतरता के साथ खेल रहे हैं, जिससे वह करियर मनी लिस्ट में टाइगर वुड्स की जगह लेने की कगार पर हैं।

आईसीसी का बड़ा फैसला, श्रीलंका से छीनी महिला चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी: रिपोर्ट्स

नई दिल्ली। इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) ने श्रीलंका से पहली बार होने वाली महिला चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी का अधिकार छीन लिया है। नए मेजबान देश को लेकर फैसला आईसीसी की अगली बैठक में लिया जाएगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह फैसला तब लिया गया जब आईसीसी ने तय किया कि वह श्रीलंका में टूर्नामेंट की मेजबानी के साथ आगे नहीं बढ़ सकता, क्योंकि श्रीलंका क्रिकेट (एसएलसी) को सरकार द्वारा नियुक्त एक अंतरिम प्रशासन चला रहा है। महिला क्रिकेट में अगले साल पहली बार चैंपियंस ट्रॉफी खेली जाएगी, जिसकी शुरुआत 14 फरवरी से होगी, जबकि फाइनल मुकाबला 28 फरवरी 2027 को खेला जाना है। इस टूर्नामेंट में कुल छह टीमें हिस्सा लेंगी। ‘संडे टाइम्स’ की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि श्रीलंका ने टूर्नामेंट की मेजबानी का अधिकार खो दिया है और नए मेजबान देश का फैसला आईसीसी बोर्ड की अगली बैठक में किया जाएगा। एसएलसी ट्रांसफॉर्मेशन कमेटी के सेक्रेटरी प्रकाश शैफ्टर ने साप्ताहिक अखबार से कहा, “हां, इसे श्रीलंका से दूसरी जगह ले जाया गया है। यह टूर्नामेंट किसी दूसरी जगह पर खेला जाएगा, लेकिन अभी मुझे पक्का नहीं पता कि यह कहां खेला जाएगा।” इंटरनेशनल क्रिकेट संस्था का कहना है कि सदस्य देशों में सरकार का कोई दखल नहीं होना चाहिए। आईसीसी ने एसएलसी के प्रतिनिधियों को आईसीसी बोर्ड की बैठक में शामिल होने की इजाजत देने से भी मना कर दिया था, क्योंकि बोर्ड को एक ट्रांसफॉर्मेशन कमेटी चला रही थी। पिछले महीने एक बयान में आईसीसी ने एसएलसी से जितनी जल्दी हो सके चुनाव कराने को कहा था। आईसीसी ने एक बयान में कहा था, “आईसीसी बोर्ड को श्रीलंका क्रिकेट के बारे में जानकारी मिली और उन्होंने बदले हुए संविधान की दिशा में हुई प्रगति पर ध्यान दिया। उन्होंने जल्द से जल्द चुनाव कराने की जरूरत पर जोर दिया और इस बात पर सहमति जताई कि श्रीलंका क्रिकेट अभी के लिए आईसीसी बोर्ड की बैठकों में प्रतिनिधित्व करने में असमर्थ रहेगा।” अंतरिम कमेटी ने खेल मंत्री को संविधान का एक ड्राफ्ट सौंपा है। प्रस्तावित बदलाव कानूनी प्रक्रिया से गुजरेंगे और फिर संसद में पेश किए जाएंगे। हालांकि, इस प्रक्रिया के जल्दी पूरी होने की संभावना नहीं है। इसके अलावा, श्रीलंका चैंपियंस ट्रॉफी में हिस्सा लेने से भी पूरी तरह चूक सकता है। आईसीसी रैंकिंग में शीर्ष पांच टीमों के क्वालिफाई करने की उम्मीद है, जबकि मेजबान देश छठी टीम होगी। श्रीलंकाई टीम अभी दुनिया में छठे नंबर पर है, और अगर टूर्नामेंट को ऐसे देश में ले जाया जाता है जो आईसीसी रैंकिंग में शीर्ष छह से बाहर है, तो श्रीलंका क्रिकेट टीम टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले पाएगी।

दिल्ली के पुरानी सीलमपुर में गारमेंट की दुकान में लगी आग, कोई हताहत नहीं

नई दिल्ली। दिल्ली के पुरानी सीलमपुर इलाके में रविवार सुबह एक तीन मंजिला इमारत में चल रही गारमेंट की दुकान में आग लग गई। घटना की सूचना मिलते ही दमकल की चार गाड़ियां मौके पर भेजी गईं। अधिकारियों ने बताया कि दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पा लिया है। दिल्ली दमकल विभाग के अनुसार, शाहदरा जिले में कुर्ती गारमेंट के गोदाम के रूप में इस्तेमाल हो रही इमारत से सुबह करीब 8:21 से 8:22 बजे आग लगने की सूचना मिली थी। दमकल विभाग के अधिकारी अनूप सिंह ने बताया कि जब दमकल की टीम मौके पर पहुंची तो स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण थी। तंग रास्तों और तेज आग के कारण आग बुझाने में दिक्कत आई। अनूप सिंह ने कहा, “हमें सुबह करीब 8:21 या 8:22 बजे एक इमारत के अंदर आग लगने की कॉल मिली जो कुर्ती गारमेंट के गोदाम के रूप में काम कर रही थी। मौके पर पहुंचने पर स्थिति बेहद खतरनाक थी। यहां फायर इंजन लाने में हमें काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा।” उन्होंने बताया कि दमकल कर्मियों ने किसी तरह गाड़ी को इमारत के करीब लाकर होज पाइप बिछाए और आग बुझाने का काम शुरू किया। आग पर काबू पाने के लिए पांच हौज लाइनें लगाई गईं। अधिकारी ने कहा, “धुआं बहुत ज्यादा था, लेकिन अब आग पर काबू पा लिया गया है।” पुरानी सीलमपुर की इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। दमकल अधिकारी परिसर और आग से हुए नुकसान का आकलन कर रहे हैं। वहीं, राजधानी में एक अन्य आग की घटना में देर रात दिल्ली के राजधानी पार्क मेट्रो स्टेशन के पास टिम्बर मार्केट में भीषण आग लग गई। आग पहली से तीसरी मंजिल तक फैल गई, जिसके बाद 20 से 22 दमकल गाड़ियों को मौके पर लगाया गया। दमकल कर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद स्थिति पर काबू पाया। इस घटना में भी कोई हताहत नहीं हुआ। इस महीने की शुरुआत में दिल्ली के रघुबीर नगर में एक किराए के परिसर में आग लगने से दो ई-रिक्शा चालकों की मौत हो गई थी। पीड़ित कथित तौर पर परिसर में पोर्टेबल ई-रिक्शा बैटरी चार्ज कर रहे थे, तभी यह हादसा हुआ। दिल्ली पुलिस के अनुसार, रघुबीर नगर के आर-17, पहली मंजिल पर आग लगने की पीसीआर कॉल ख्याला पुलिस स्टेशन को सुबह करीब 5:24 बजे मिली थी। अलर्ट के बाद जांच अधिकारी पुलिस कर्मियों के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे। परिसर में दो घायल व्यक्ति मिले, जिनकी पहचान बिहार के भागलपुर निवासी 17 वर्षीय मो. सूफेद और 38 वर्षीय मो. साहमद के रूप में हुई। दोनों ई-रिक्शा चालक के रूप में काम कर रहे थे और आग में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। पुलिस ने किराए के परिसर में पोर्टेबल ई-रिक्शा बैटरी चार्ज करने सहित घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी थी।

ताशकंद में प्रधानमंत्री मोदी का औपचारिक स्वागत, राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ करेंगे अहम वार्ता

ताशकंद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रविवार को उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में औपचारिक स्वागत किया गया। उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया और दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से एक-दूसरे का अभिवादन किया। दिन में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता होगी। इस दौरान दोनों नेता विकसित भारत 2047 और उज्बेकिस्तान-2030 के साझा विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने पर चर्चा करेंगे। रवाना होने से पहले जारी अपने बयान में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “हाल के वर्षों में भारत और उज्बेकिस्तान की रणनीतिक साझेदारी में काफी प्रगति हुई है। मैं राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ अपनी बातचीत को लेकर उत्साहित हूं। हम व्यापार और निवेश, डिजिटल कनेक्टिविटी, रक्षा, ऊर्जा और विकसित भारत तथा यांगी उज्बेकिस्तान के साझा विजन को आगे बढ़ाने पर चर्चा करेंगे।” इससे पहले रविवार को प्रधानमंत्री मोदी ने उज्बेकिस्तान यात्रा के दौरान एक विशेष योग सत्र भी देखा, जिसमें उज्बेकिस्तान के 52 योग साधकों ने हिस्सा लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस योग सत्र की झलकियां अपने सोशल मीड‍िया अकाउंट ‘एक्‍स’ पर साझा कीं। वीडियो में उन्होंने कहा, “नमस्ते। आप सभी ने आज बहुत शानदार योग प्रदर्शन किया है। यहां हर उम्र के लोग मौजूद हैं। उज्बेकिस्तान को योग से जोड़ने के लिए मैं अपने मित्र राष्ट्रपति का आभार व्यक्त करता हूं। आप सभी को बहुत-बहुत बधाई।” वीडियो साझा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, “उज्बेकिस्तान योग पसंद करता है!” इस योग सत्र ने प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा में एक खास सांस्कृतिक रंग जोड़ा और यह भी दिखाया कि उज्बेकिस्तान में योग की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। सत्र में शामिल लोगों में योग फेडरेशन ऑफ उज्बेकिस्तान के छह सदस्य भी थे, जिन्होंने जून 2026 में अहमदाबाद में आयोजित प्रथम विश्व योगासन चैम्पियनशिप में अपने देश का प्रतिनिधित्व किया था। प्रधानमंत्री मोदी शनिवार को दो दिवसीय यात्रा पर उज्बेकिस्तान पहुंचे थे। ताशकंद हवाई अड्डे पर मिले गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए उन्होंने राष्ट्रपति मिर्जियोयेव का धन्यवाद भी किया। ताशकंद पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक्‍स’ पर लिखा, “राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने ताशकंद में मेरा गर्मजोशी से स्वागत किया। उनके इस विशेष सम्मान के लिए मैं उनका आभारी हूं। यह मेरी उज्बेकिस्तान की चौथी यात्रा है, जो हमारे द्विपक्षीय संबंधों की गहराई और लगातार बढ़ती गति को दर्शाती है।” उज्बेकिस्तान में भारतीय समुदाय ने भी प्रधानमंत्री मोदी का भव्य स्वागत किया। लोगों ने ‘मोदी मोदी’, ‘वंदे मातरम्’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए। भारतीय समुदाय की कुछ महिलाओं ने प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करते हुए उन्हें राखी भी बांधी। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कलाकारों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आनंद लिया।

‘धुरंधर’ में ‘घायल-घातक’ के रेफरेंस पर बोले राजकुमार संतोषी, ‘एक मेकर के तौर पर मिला काफी संतोष’

मुंबई। फिल्ममेकर राजकुमार संतोषी की फिल्मों और उनके दमदार डायलॉग्स का असर आज भी दर्शकों के बीच देखने को मिलता है। ‘घायल’, ‘घातक’ और ‘दामिनी’ जैसी फिल्मों ने हिंदी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई है, और इन फिल्मों के कई डायलॉग आज भी लोगों की जुबान पर हैं। ऐसे में जब रणवीर सिंह स्टारर फिल्म ‘धुरंधर’ में उनकी चर्चित फिल्मों ‘घायल’ और ‘घातक’ का रेफरेंस देखने को मिला, तो यह राजकुमार संतोषी के लिए भी खास पल था। फिल्म में रणवीर सिंह का किरदार कहते हुए सुनाई देता है, ‘घायल हूं, इसीलिए घातक हूं।’ आईएएनएस से खास बातचीत में राजकुमार संतोषी ने बताया है कि अपनी फिल्मों के इस रेफरेंस को देखकर उन्हें कैसा महसूस हुआ। आईएएनएस से बात करते हुए राजकुमार संतोषी ने कहा, “एक फिल्ममेकर के लिए इससे बड़ी खुशी की बात नहीं हो सकती कि सालों बाद भी लोग उनके काम को याद रखें। मेरी फिल्मों के डायलॉग आज भी लोगों को याद हैं। यह इस बात का सबूत है कि मैंने अपने करियर में अच्छा काम किया है। यह देख एक फिल्ममेकर के रूप में मुझे काफी संतोष मिला।” ‘धुरंधर’ में रणवीर सिंह के किरदार का डायलॉग ‘घायल हूं, इसीलिए घातक हूं’ को लेकर उन्होंने कहा, “मेरे लिए यह सिर्फ एक डायलॉग का इस्तेमाल नहीं था, बल्कि मेरी फिल्मों की विरासत को आगे की पीढ़ी तक पहुंचाने वाला एक सम्मान भी था। मैं फिल्म के निर्देशक आदित्य धर और पूरी टीम को इसकी सफलता के लिए बधाई देता हूं। आदित्य धर एक अच्छे फिल्ममेकर हैं और मैं चाहता हूं कि वह भविष्य में भी इसी तरह अच्छी फिल्में बनाते रहें।” आईएएनएस के सवाल पर संतोषी ने कहा, ”हां, फिल्म में डायलॉग इस्तेमाल किए जाने की जानकारी मुझे तुरंत मिल गई थी। मुझे इस बात की खुशी थी कि डायलॉग को फिल्म में सही तरीके से इस्तेमाल किया गया है।” राजकुमार संतोषी का सिनेमा में योगदान काफी खास रहा है। ‘घायल’ में सनी देओल के साथ उनकी जोड़ी ने दर्शकों को एक ऐसी फिल्म दी, जिसने एक्शन और इमोशन दोनों को मजबूत तरीके से पेश किया। इसके बाद ‘दामिनी’ में उन्होंने सामाजिक मुद्दे को बेहद असरदार तरीके से पर्दे पर उतारा।

किसने क्या पहना, क्या खाया इस पर निशाना नहीं साधना चाहिए : अभिनेता रजा मुराद

लखनऊ। आउटफिट, हिजाब और निजी पसंद को लेकर देश में एक बार फिर बहस तेज है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश के बाद यह मुद्दा कानूनी दायरे से निकलकर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है। वहीं, बॉलीवुड में भी समय-समय पर पहनावे को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संस्थागत अनुशासन के बीच संतुलन कैसे कायम हो तथा क्या किसी व्यक्ति के पहनावे और खान-पान को सार्वजनिक बहस का विषय बनाया जाना चाहिए? इन्हीं मुद्दों पर बॉलीवुड के वरिष्ठ अभिनेता रजा मुराद ने बेबाक राय रखी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन इसके साथ आत्म-संयम भी जरूरी है। उनका कहना है कि विवाद पैदा कर चर्चा में रहने के बजाय लोगों को अपने काम, प्रदर्शन और समाजसेवा के जरिए पहचान बनानी चाहिए। आईएएनएस की रजा मुराद से हुई बातचीत के प्रमुख अंश: सवाल: ड्रेस को लेकर एक अलग तरह की बहस चल रही है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। आप इस पूरे मामले को किस नजरिए से देखते हैं? जवाब : देखिए, इलाहाबाद हाईकोर्ट का एक ऑर्डर आया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि यूनिफॉर्म में हिजाब नहीं पहनना चाहिए। अब देखिए, ये प्रजातंत्र है। जिस बच्ची ने पिटीशन दायर की थी, वह चाहे तो सुप्रीम कोर्ट जा सकती है। कई बार हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया है। अगर उसे लगता है कि उसके साथ इंसाफ नहीं हुआ है, तो सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे उसके लिए खुले हैं और सुप्रीम कोर्ट का जो भी निष्पक्ष फैसला होगा, उसे हमें मानना चाहिए। आपको अपनी बात कहने और जायज बात को मनवाने का हक है। सवाल: क्या आपको लगता है कि हम लोगों के पहनावे को जरूरत से ज्यादा सार्वजनिक बहस का विषय बना रहे हैं? जवाब : विवादित बात करेंगे तो विवाद फैलता जाएगा। विवाद को फैलाना आजकल एक रिवाज बन गया है। ऐसी विवादित बात करो जिससे आप चर्चा में रहो। मैं ऐसी बातों में विश्वास नहीं रखता। अगर चर्चा में रहना है तो काम, परफॉर्मेंस और समाजसेवा के जरिए चर्चा में रहें, बजाय इसके कि किसी की बुराई करके या किसी के लिबास पर बात करके करके चर्चा में आया जाए। यह निजी मामला है कि कौन क्या पहने। सवाल: आपने निजी पसंद की बात कही। क्या पहनावा और खान-पान किसी व्यक्ति के निजी जीवन का हिस्सा होना चाहिए? जवाब : मैं क्या पहनता हूं, मैं क्या खाता हूं, ये मेरा निजी ख्याल है, मेरी निजी जिंदगी है और इसे जीने का मुझे पूरा हक है। मेरे घर में क्या पक रहा है, ये मेरी चारदीवारी का मामला है। मैं क्या पहन रहा हूं, ये मेरा निजी मामला है। आपको जो पहनना है, पहनिए, लेकिन उसमें अश्लीलता नहीं होनी चाहिए। अब किसी को लिबास में अश्लीलता दिखाई देती है, किसी को फैशन दिखाई देता है। इन बातों से जितना दूर रहें, उतना बेहतर है। सवाल: बीते दिनों बॉलीवुड में भी ड्रेस को लेकर कई विवाद सामने आए। कृति सेनन और कंगना रनौत से जुड़ा विवाद भी चर्चा में रहा। आप इनको किस नजरिए से देखते हैं? जवाब : कुछ विवाद पैदा हो जाते हैं, कुछ विवादों को पैदा किया जाता है। कुछ लोगों को मालूम होता है कि हम यह बात करेंगे तो इस पर विवाद होगा और विवाद होगा तो उनकी चर्चा होगी। हर इंसान को अपनी बात कहने का हक है। हमारे मुल्क में प्रजातंत्र है, फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन है, लेकिन खुद अपनी एक हद और सेल्फ-सेंसरशिप होनी चाहिए कि हमें कहां तक कहना है। कोई ऐसी बात नहीं होनी चाहिए जिससे सुनने वाला या जिसके बारे में कहा जा रहा है, वह आहत महसूस करे। हर एक्शन का रिएक्शन होता है। सवाल: तो क्या आपको लगता है कि आज विवाद में बने रहना, काम के जरिए चर्चा में रहने से आसान रास्ता बन गया है? जवाब : अपना काम कीजिए देश के प्रति, देशवासियों के प्रति। अपना कर्तव्य निभाइए और चर्चा में रहिए। इन बातों का कोई मतलब नहीं है कि किसने क्या पहना है और कौन क्या खा रहा है। इस पर निशाना नहीं साधना चाहिए।

‘विकसित भारत’ की यात्रा हर मोहल्ले, हर बस्ती और हर परिवार तक पहुंचनी चाहिए : राजनाथ सिंह

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि ‘विकसित भारत’ की यात्रा बड़े शहरों से शुरू होकर हर मोहल्ले, हर बस्ती और हर परिवार तक पहुंचनी चाहिए। बदलाव केवल इमारतों में नहीं होना चाहिए, हमारी पहचान में भी होना चाहिए। रक्षा मंत्री का कहना था कि आज भारत विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, ” विकसित भारत का अर्थ केवल बड़ी-बड़ी परियोजनाएं और आधुनिक इमारतें नहीं हैं। विकसित भारत का अर्थ है कि जब बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा मिले, जब किसी परिवार के घर में साफ पानी पहुंचे, जब किसी युवा को खेलने और अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिले और जब किसी दिव्यांग बच्चे को यह महसूस न हो कि वह समाज से पीछे है। यही विकास है।” राजनाथ सिंह ने रविवार को लखनऊ कैंटोनमेंट में विकास से जुड़ी अनेक परियोजनाओं के शिलान्यास समारोह को संबोधित किया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि लखनऊ छावनी में हो रहा यह विकास केवल ईंट, सीमेंट, और मशीनों का विकास नहीं है; यह लोगों के जीवन को बेहतर बनाने का प्रयास है। कहीं घर तक पानी पहुंचाने का प्रयास है, कहीं बच्चे को शिक्षा और अवसर देने का प्रयास है, कहीं जरूरतमंद को इलाज उपलब्ध कराने का प्रयास है, और कहीं युवाओं को खेल तथा भविष्य की नई दिशा देने का प्रयास है। राजनाथ सिंह ने कहा कि लखनऊ छावनी परिषद ने ब्रिटिश काल से चले आ रहे कुछ बाजारों के नाम बदलकर उन्हें भारत के स्वतंत्रता संग्राम, सामाजिक चेतना और राष्ट्रसेवा से जुड़े महान व्यक्तित्वों के नाम दिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा, ”आज का दिन लखनऊ छावनी के लिए बड़ा महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि आज हम लगभग 101 करोड़ रुपये की लागत से 12 विकास परियोजनाओं का शिलान्यास कर रहे हैं। ये 12 परियोजनाएं 12 संकल्प हैं, एक बेहतर छावनी का संकल्प, एक स्वच्छ छावनी का संकल्प, बेहतर जलापूर्ति का संकल्प, बच्चों के बेहतर भविष्य का संकल्प, युवाओं को खेल के बेहतर अवसर देने का संकल्प, सम्मानजनक नागरिक सुविधाओं का संकल्प और आधुनिक तकनीक के साथ आगे बढ़ती हुई छावनी का संकल्प।” रक्षामंत्री ने कहा कि उन्हें प्रसन्नता है कि उत्तर प्रदेश सरकार, रक्षा मंत्रालय, और उद्योग जगत मिलकर विकास के इस कार्य को आगे बढ़ा रहे हैं। जब केंद्र और राज्य सरकार की सोच एक दिशा में चलती है, तो विकास की गति कई गुना बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि वह लखनऊ छावनी परिषद की पूरी टीम की सराहना करना चाहते हैं। लखनऊ छावनी परिषद के अधिकारियों और कर्मचारियों ने यह दिखाया है कि यदि सोच स्पष्ट हो, लक्ष्य स्पष्ट हो और काम करने की इच्छा हो, तो सीमित संसाधनों के बीच भी बड़े परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। उन्होंने अपेक्षा की कि यही गति आगे भी बनी रहेगी।

ऑस्ट्रेलिया में आव्रजन-विरोधी मार्च, राजनीतिक हलचल बढ़ी

सिडनी। ऑस्ट्रेलिया की राजनीति में आव्रजन (इमिग्रेशन) का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में है। देश के प्रमुख शहरों में रविवार को ‘मार्च फॉर ऑस्ट्रेलिया’ के बैनर तले जुटी भीड़ ने बड़े पैमाने पर प्रवासन का विरोध किया। आयोजकों ने दावा किया कि पिछले साल से चल रहे इन प्रदर्शनों ने देश में आव्रजन-विरोधी राजनीति को नई ऊर्जा दी है और इसका सीधा फायदा दक्षिणपंथी ‘वन नेशन’ को मिला है। सिडनी के बेलमोर पार्क में आयोजित ‘फ्री स्पीच’ रैली में 300 से अधिक लोग जुटे। किसी संभावित तनाव को देखते हुए 70 से ज्यादा पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। इनमें दंगा नियंत्रण दस्ते के जवान और घुड़सवार पुलिसकर्मी भी शामिल थे। रैली के विरोध में हाइड पार्क में काउंटर-प्रोटेस्ट भी आयोजित किया गया। राष्ट्रवादी समूह ‘रिवाइव ऑस्ट्रेलिया’ के संस्थापक ब्रायन मार्लो ने रैली का नेतृत्व किया। उन्होंने दावा किया कि अगस्त 2025 में शुरू हुए ‘मार्च फॉर ऑस्ट्रेलिया’ आंदोलन ने लोगों को आव्रजन और राष्ट्रीय पहचान जैसे मुद्दों पर लामबंद किया। मार्लो ने ‘वन नेशन’ के हालिया चुनावी प्रदर्शन को इसी राजनीतिक माहौल से जोड़ते हुए कहा कि पार्टी उपचुनावों में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही है। उन्होंने पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के सीक्रेट उपचुनाव में ‘वन नेशन’ की जीत का भी जिक्र किया। हालांकि, यहां एक दिलचस्प विरोधाभास भी दिखाई देता है। रैली में ‘वन नेशन’ समर्थक मौजूद थे और कुछ लोगों ने पार्टी की टी-शर्ट भी पहन रखी थी, लेकिन आयोजकों के सोशल मीडिया मंचों पर हाल के दिनों में वन नेशन की नीतियों की आलोचना भी हुई है। सबसे बड़ा मतभेद प्रवासन की संख्या को लेकर है। वन नेशन की ओर से सालाना शुद्ध प्रवासन के लिए 1.30 लाख का लक्ष्य स्वीकार करने के संकेत दिए गए हैं, जबकि रैली में शामिल कई लोग इससे कहीं अधिक सख्त रुख की मांग कर रहे थे। भीड़ ने ‘रीमाइग्रेशन’ और बड़े पैमाने पर प्रवासन खत्म करने जैसे नारों का समर्थन किया। आव्रजन अब केवल आर्थिक नीति का विषय नहीं रह गया है। यह रोजगार, आवास, जनसंख्या वृद्धि, सामाजिक सेवाओं और राष्ट्रीय पहचान से जुड़े सवालों के साथ राजनीतिक बहस का हिस्सा बन चुका है। ‘वन नेशन’ का बढ़ता समर्थन इसी असंतोष को राजनीतिक रूप देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।