जयपुर के सीए के खिलाफ एफआईआर दर्ज, 23,956 करोड़ के विदेशी लेनदेन का मामला

जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में वित्तीय गड़बड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है। इनकम टैक्स विभाग ने चार्टर्ड अकाउंटेंट अभिषेक जैन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि उन्होंने बिना सही दस्तावेजों की जांच के 3,168 फॉर्म 15सीबी सर्टिफिकेट जारी किए। शिकायत के मुताबिक, इन सर्टिफिकेट्स के आधार पर करीब 23,956 करोड़ रुपए विदेश भेजे गए। यह मामला 18 अगस्त को इनकम टैक्स विभाग की जांच शाखा द्वारा किए गए सर्वे के बाद सामने आया। इस दौरान जयपुर के पत्रकार कॉलोनी इलाके में सीए अभिषेक जैन के ऑफिस की भी जांच की गई। विभाग की शिकायत के अनुसार, सर्वे के दौरान मिले दस्तावेजों में विदेशी लेनदेन से जुड़े फॉर्म 15सीबी सर्टिफिकेट का ब्योरा मिला। सर्वे के बाद इनकम टैक्स विभाग के डिप्टी डायरेक्टर मिंटू लाल मीणा ने पत्रकार कॉलोनी थाने में शिकायत दी, जिसके आधार पर जैन के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। एफआईआर के मुताबिक, यह लेनदेन वित्तीय वर्ष 2021-22, 2022-23 और 2023-24 के दौरान हुआ। विभाग ने 3,168 सर्टिफिकेट्स के आधार पर लगभग 23,956 करोड़ रुपए विदेश भेजे जाने का आरोप लगाया है। विभाग ने इस लेनदेन से जुड़े कई लोगों और कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर भी सवाल उठाए हैं। शिकायत में कहा गया है कि इनमें से कुछ ने तो इनकम टैक्स रिटर्न भी दाखिल नहीं किया था या उनकी कोई बड़ी बिजनेस गतिविधि या आय नहीं थी, फिर भी उनके नाम पर बड़ी रकम विदेश भेजी गई। एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि सर्टिफिकेट जारी करने से पहले जरूरी दस्तावेजों की ठीक से जांच नहीं की गई। विदेशी भुगतान के लिए फॉर्म 15सीबी सर्टिफिकेशन में लेनदेन और उससे जुड़े टैक्स और वित्तीय दस्तावेजों की जांच करना जरूरी होता है। विभाग ने एग्रीमेंट, अकाउंट से जुड़े दस्तावेज, टैक्स रेजिडेंसी सर्टिफिकेट और फॉर्म 10एप के वेरिफिकेशन पर सवाल उठाए हैं। शिकायत में कहा गया है कि जरूरी जांच प्रक्रिया का ठीक से पालन नहीं किया गया। आरोप है कि करीब 40 फर्मों, कंपनियों और ट्रस्टों के जरिए विदेशी रकम भेजी गई, जिन्हें विभाग ने संदिग्ध या फर्जी बताया है। एफआईआर में एक व्यक्ति के नाम पर लगभग 8,788 करोड़ रुपएऔर दूसरे व्यक्ति के नाम पर करीब 9,775 करोड़ रुपए के लेनदेन का जिक्र है। इनकम टैक्स विभाग ने इन लेनदेन और इससे जुड़ी कंपनियों की आगे जांच की मांग की है। हालांकि, ये सभी आरोप शिकायत में लगाए गए हैं और जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही साबित हो पाएंगे। सीए अभिषेक जैन को एफआईआर में मुख्य आरोपी बनाया गया है। शिकायत के अनुसार, इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4), 234, 229 और 35 लगाई गई हैं। पुलिस अब बैंक खातों, विदेशी लेनदेन के रिकॉर्ड, फॉर्म 15सीबी सर्टिफिकेट और कंपनियों से जुड़े दस्तावेजों की जांच करेगी। जांच एजेंसियां यह भी देखेंगी कि लेनदेन शुरू करने वाले लोगों और किसी बिचौलिए या अन्य शामिल लोगों की क्या भूमिका थी। जांच से ही पता चलेगा कि यह गड़बड़ी सिर्फ सर्टिफिकेट जारी करने तक सीमित थी या यह किसी बड़े वित्तीय नेटवर्क का हिस्सा थी। फिलहाल आरोपों की जांच चल रही है और जांच पूरी होने तक आरोपी की दोषी होने के बारे में कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। बता दें कि 15सीबी सर्टिफिकेट किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा जारी किया जाने वाला एक आधिकारिक प्रमाण पत्र है, जिसका उपयोग भारत से विदेश में धन भेजने के दौरान टैक्स और टीडीएस की स्थिति को सत्यापित करने के लिए किया जाता है।
टीएमसी के बागी सांसदों को लेकर अभिषेक बनर्जी की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी की उस याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें उन्होंने लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला को निर्देश देने की मांग की है। लोकसभा स्पीकर की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए और अपना पक्ष रखा। अभिषेक बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि वह लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला को निर्देश दें कि वह उन 20 बागी टीएमसी सांसदों की सदस्यता खत्म करने की याचिकाओं पर जल्द फैसला लें, जिन्होंने पार्टी से अलग होने की कोशिश की है। टीएमसी के 20 सांसद पार्टी से अलग हो गए हैं। इन सांसदों ने लोकसभा में खुद को एक अलग राजनीतिक समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की है। टीएमसी का कहना है कि ये सभी सांसद टीएमसी के चुनाव चिह्न पर चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे थे, इसलिए किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी और गठन के साथ जाना दल-बदल विरोधी कानून के तहत आता है और उनकी सदस्यता रद्द होनी चाहिए। जस्टिस बागची ने इस मामले की सुनवाई करते कहा कि हम संवैधानिक संस्था को कोई निर्देश नहीं देना चाहते लेकिन यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि ऐसे फैसले समय से हो। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अभी हम लोकसभा स्पीकर को नोटिस नहीं जारी कर रहे हैं। बाकी पक्षकारों को नोटिस जारी कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने से पहले अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को पत्र लिखकर अयोग्यता याचिकाओं के शीघ्र निपटारे की मांग की थी। इससे पहले अभिषेक बनर्जी, महुआ मोइत्रा और कल्याण बनर्जी सहित टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं ने स्पीकर से मुलाकात कर 20 बागी सांसदों को तत्काल अयोग्य घोषित करने का आग्रह किया था। बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद टीएमसी के 20 लोकसभा सांसद पार्टी छोड़कर नेशनल सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया में शामिल हो गए हैं। इसके बाद टीएमसी ने इन सांसदों के खिलाफ दल-बदल कानून के तहत अयोग्यता याचिकाएं दायर की थीं।
केंद्र की एथेनॉल पॉलिसी पर प्रियांक खड़गे ने उठाए सवाल, कहा- सस्ते में चावल बेचना कौन-सी नीति?

बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने मंगलवार को केंद्र सरकार की एथेनॉल नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार टैक्सपेयर्स के पैसे से खरीदा गया चावल एथेनॉल बनाने वाली कंपनियों को उसकी लागत से करीब 40 फीसदी कम दाम पर बेच रही है। प्रियांक खड़गे ने कहा, “भारत का एथेनॉल का गणित ही समझ नहीं आता।” उन्होंने खाने के लिए रखे गए अनाज को इथेनॉल बनाने में इस्तेमाल करने के पीछे के आर्थिक तर्क पर सवाल उठाया। उन्होंने बताया कि सरकार किसानों से धान टैक्स के पैसे से खरीदती है और फिर उसके भंडारण और ढुलाई पर भी खर्च करती है। इतना खर्च करने के बाद भी वही चावल भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के जरिए इथेनॉल उत्पादकों को उसकी खरीद कीमत से काफी कम दाम पर बेच दिया जाता है। प्रियांक खड़गे ने पूछा, “यह किस तरह की आर्थिक नीति है? इस पूरी व्यवस्था से आखिर फायदा किसे हो रहा है?” उन्होंने कहा, “अनाज पर टैक्सपेयर्स के पैसे से सब्सिडी दी जाती है, सरकार खरीद, भंडारण और ढुलाई का खर्च उठाती है और फिर वही अनाज डिस्काउंट पर एथेनॉल कंपनियों को बेच दिया जाता है। तो इस पूरी व्यवस्था से असल में फायदा किसे हो रहा है?” प्रियांक खड़गे ने यह भी सवाल उठाया कि क्या बड़ी मात्रा में अनाज को एथेनॉल बनाने के लिए इसलिए डायवर्ट किया जा रहा है ताकि तेजी से बनाई गई एथेनॉल फैक्ट्रियों को कच्चा माल मिल सके। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा सस्ते दाम पर अनाज देकर फिर उन्हीं कंपनियों से महंगे दाम पर एथेनॉल खरीदकर पेट्रोल में मिलाने की नीति पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा, “अगर अनाज सस्ते में दिया जा रहा है और फिर उसी इंडस्ट्री से एथेनॉल महंगे में खरीदा जा रहा है, तो आम उपभोक्ता को इसका क्या फायदा हो रहा है?” प्रियांक खड़गे ने यह भी पूछा कि क्या एथेनॉल मिलाने से पेट्रोल के दाम कम हुए हैं और क्या गाड़ियों के माइलेज और मेंटेनेंस पर इसके असर का ठीक से आकलन किया गया है। उन्होंने कहा, “कौन किसे सब्सिडी दे रहा है? इस सिस्टम के असली फायदेमंद कौन हैं? केंद्र को इसका साफ जवाब देना चाहिए।” उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार खाने की सुरक्षा के लिए रखे गए अनाज को एथेनॉल उत्पादन में लगाने के आर्थिक, सामाजिक और जनहित से जुड़े असर का हिसाब पारदर्शी तरीके से जनता के सामने रखे।
ओपन-एंडेड’ सवालों के जरिए जातियों की सही गिनती संभव नहीं, राहुल गांधी और खड़गे ने पीएम मोदी को लिखा पत्र

नई दिल्ली। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी को संयुक्त पत्र लिखकर जाति जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया पर गंभीर चिंता जताई है। इसके साथ ही मौजूदा प्रश्नावली रद्द करने और जातियों की प्रमाणित सूची के आधार पर नई प्रश्नावली बनाने की मांग की है। मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट में कहा, “ओपन-एंडेड (खुला-समाप्त) सवालों के जरिए जातियों की सही गिनती संभव नहीं है। एक ही जाति अलग-अलग नामों और उपजातियों में दर्ज हुई तो आंकड़े बिखरेंगे और सबसे बड़ा नुकसान ओबीसी, अति पिछड़े और वंचित समुदायों को होगा। हमारी मांग स्पष्ट है कि मौजूदा प्रश्नावली रद्द हो, जातियों की प्रमाणित सूची के आधार पर नई प्रश्नावली बने और राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों व जनता से व्यापक परामर्श किया जाए। तेलंगाना और बिहार के जाति सर्वेक्षणों की तरह, पहले से तैयार और प्रमाणित जाति सूची के आधार पर गणना इसका व्यावहारिक समाधान है। जाति जनगणना सिर्फ होनी नहीं चाहिए, सही भी होनी चाहिए।” प्रधानमंत्री को संबोधित पत्र में राहुल गांधी और खड़गे ने लिखा, “भारत में सामाजिक न्याय की नीतियां सही आंकड़ों के बिना पूरी नहीं हो सकतीं। अलग-अलग जातियों की संख्या और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सही आकलन तभी संभव है, जब जातियों की गिनती सही तरीके से हो। आपकी सरकार ने जनगणना में जाति की जानकारी दर्ज करने के लिए खुला-समाप्त प्रश्न का तरीका चुना है, जो भ्रामक है। इसमें प्रत्येक व्यक्ति अपनी जाति का जो नाम बताएगा, वही नाम दर्ज कर लिया जाएगा।” कांग्रेस नेताओं ने पत्र में लिखा, “भारत में एक ही जाति अलग-अलग क्षेत्रों में अलग नामों, उपजातियों और भाषाओं से जानी जाती है। ऐसे में यदि एक ही जाति के लोग जनगणना में अलग-अलग नामों से दर्ज होंगे, तो एक जाति हजारों नामों में बंट जाएगी। देश में लाखों जातियों के नाम निकलेंगे और जाति जनगणना से हासिल पूरा आंकड़ा ही अनुपयोगी हो जाएगा। जब किसी समुदाय की सही संख्या ही दर्ज नहीं होगी, तो उसकी स्थिति का आकलन भी गलत होगा। इसका नुकसान पिछड़े, अति पिछड़े और अन्य वंचित समुदायों को होगा। साथ ही शिक्षा, रोजगार, योजनाओं व सामाजिक न्याय से जुड़े फैसले भी प्रभावित होंगे। इससे यह भी पता नहीं चलेगा कि भारत में ओबीसी की आबादी कितनी है क्योंकि इस जनगणना में “पिछड़ा वर्ग” शब्द तक शामिल नहीं है।” उन्होंने लिखा, “इसका आसान समाधान पहले से मौजूद है। जातियों की एक ड्रॉप-डाउन सूची बनाई जाए। अनुसूचित जाति और जनजाति की गणना में यही तरीका अपनाया जाता है। यह सूची मौजूदा सरकारी सूचियों जैसे सामाजिक व शैक्षणिक पिछड़ा वर्ग सूची और भारतीय मानवशास्त्र सर्वेक्षण के आधार पर आसानी से बनाई जा सकती है। तेलंगाना और बिहार के जाति सर्वेक्षणों में भी यही तरीका अपनाया गया था। संदर्भ के लिए दोनों सर्वेक्षणों की जाति सूचियां पत्र के साथ संलग्न हैं। इस तरीके से की जा रही जाति जनगणना को हम स्वीकार नहीं करते। सरकार मौजूदा प्रश्नावली रद्द कर राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और जनता से बातचीत कर नई प्रश्नावली तैयार करे ताकि हर जाति और समुदाय की सही संख्या सामने आए और जाति जनगणना सटीक, सार्थक और लाभकारी हो।
जन्मदिन के मौके पर चचेरे भाई जतिन पृथ्वीराज ने किया राजीव कपूर को याद, बोले- ‘हर किसी को अपना दोस्त बना लेते थे’

मुंबई। अभिनेता-फिल्ममेकर राजीव कपूर की जयंती पर उनके चचेरे भाई जतिन पृथ्वीराज कपूर ने उन्हें याद करते हुए कई किस्से साझा किए। उन्होंने कहा कि राजीव बेहद नेकदिल, उदार और बड़े दिल वाले इंसान थे। उनके करीब आने वाला हर व्यक्ति खुद को खास महसूस करता था। वह किसी के लिए भी मन में नाराजगी नहीं रखते थे और हर किसी के साथ गर्मजोशी से पेश आते थे। इंस्टाग्राम पर यादें साझा करते हुए जतिन ने कहा, ”राजीव का जन्मदिन हमेशा खास तरीके से मनाया जाता था। कई बार जश्न उनके जन्मदिन से एक दिन पहले शुरू हो जाता था और अगले दिन तक चलता था। हमारे लिए राजीव का जन्मदिन सिर्फ एक तारीख नहीं है, बल्कि परिवार के साथ मिलकर खुशी मनाने का मौका है।” जतिन ने राजीव के स्वभाव के बारे में बात करते हुए कहा, ”वह बहुत ही नेकदिल इंसान थे। उनके करीब आने वाले हर व्यक्ति के साथ वह बेहद प्यार और गर्मजोशी से पेश आते थे। राजीव की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि वह किसी के लिए भी मन में खटास नहीं रखते थे। उनके लिए हर मिलने वाला इंसान दोस्त जैसा था। वह लोगों को खुश रखने की कोशिश करते थे और जब भी कहीं बाहर जाते, तो सभी से बहुत अपनापन दिखाते थे।” राजीव के एक जन्मदिन का किस्सा जतिन ने खास तौर पर याद किया। उन्होंने बताया, ”परिवार उनके जन्मदिन पर माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए गया था। हम सुबह दिल्ली से जम्मू पहुंचे और फिर सड़क के रास्ते कटरा गए। इसके बाद सभी लोग कटरा से पैदल माता वैष्णो देवी के मंदिर पहुंचे। राजीव का जन्मदिन मंदिर में ही मनाया गया था। यह उन यादों में से एक है, जिसे मैं जिंदगी भर नहीं भूल सकता।” जतिन ने आगे कहा, ”राजीव भगवान में विश्वास रखते थे और परिवार के बड़े-बुजुर्गों का सम्मान करते थे। वह अपने बारे में कम और दूसरों के बारे में ज्यादा सोचते थे। उन्होंने अपने जीवन को राजा की तरह जिया। उनके अंदर दूसरों को खुश रखने की खास क्षमता थी।” जतिन ने बताया, ”राजीव खुद भले ही कुछ न मांगते हों, लेकिन दूसरों को खुशी देने में कभी पीछे नहीं हटते थे। किसी इंसान को इस तरह दूसरों की खुशी का ख्याल रखने के लिए बहुत बड़े दिल की जरूरत होती है और राजीव में यह खूबी थी।” अपने पोस्ट के आखिर में जतिन ने राजीव को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा, ”मैं राजीव के साथ बिताए समय के लिए हमेशा आभारी रहूंगा।” राजीव कपूर हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और फिल्ममेकर राज कपूर और कृष्णा कपूर के सबसे छोटे बेटे थे। उन्होंने साल 1983 में फिल्म ‘एक जान हैं हम’ से बतौर अभिनेता अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद वह ‘राम तेरी गंगा मैली’, ‘मेरा साथी’, ‘लवर बॉय’ और ‘हम तो चले परदेस’ जैसी फिल्मों में नजर आए। अभिनय के बाद उन्होंने फिल्म निर्माण की ओर भी कदम बढ़ाया और ‘प्रेम ग्रंथ’ का निर्माण किया, जिसमें उनके भाई ऋषि कपूर और माधुरी दीक्षित मुख्य भूमिकाओं में थे। राजीव कपूर का 9 फरवरी 2021 को 58 साल की उम्र में निधन हो गया था।
दिल्ली एयरपोर्ट पर 150 मिलियन डॉलर के निवेश से इंटीग्रेटेड एयर कार्गो हब बनाएगी फेडएक्स

नई दिल्ली। ग्लोबल लॉजिस्टिक्स कंपनी फेडएक्स ने मंगलवार को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे स्थित जीएमआर क्रागो सिटी में एक इंटीग्रेटेड एयर कार्गो हब विकसित करने के लिए लगभग 150 मिलियन डॉलर के निवेश की घोषणा की। फेडएक्स ने बताया कि प्रस्तावित सुविधा करीब 2.30 लाख वर्ग फुट क्षेत्र में फैली होगी। इसमें अंतरराष्ट्रीय गेटवे और पिकअप-एंड-डिलीवरी ऑपरेशन को एक ही छत के नीचे लाया जाएगा, जिससे शिपमेंट की आवाजाही तेज होगी और परिचालन दक्षता बढ़ेगी। इस परियोजना के भूमिपूजन समारोह में नागर विमानन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू भी शामिल हुए। कंपनी के अनुसार, पूरी तरह ऑटोमेटेड यह हब शुरू होने के बाद 5,000 पैकेज प्रति घंटा प्रोसेस करने की क्षमता रखेगा। मांग बढ़ने के साथ इसकी क्षमता को और बढ़ाने की भी गुंजाइश होगी। इस सुविधा में एडवांस ऑटो-सॉर्टर, नई पीढ़ी की एक्स-रे मशीनें, बेहतर सुरक्षा प्रणालियां और स्मार्ट पैकेज-हैंडलिंग तकनीक शामिल होंगी। कंपनी ने कहा कि इन तकनीकों से शिपमेंट प्रोसेसिंग में सुधार, नेटवर्क की मजबूती और ग्राहकों के अनुभव को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। फेडएक्स के मध्य पूर्व, भारतीय उप महाद्वीप और अफ्रीका (एमईआईएसए) के अध्यक्ष कामी विश्वनाथन ने कहा कि भारत कंपनी के वैश्विक नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण बाजार है। उत्तर और पूर्वी भारत देश की बढ़ती व्यापारिक और आर्थिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। विश्वनाथन ने कहा, “दिल्ली में अपनी मौजूदगी मजबूत करने से इन बाजारों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी और कारोबार के विस्तार में कंपनियों को सहायता मिलेगी। यह भारत में हमारे दीर्घकालिक भरोसे और देश की बदलती व्यापारिक जरूरतों को पूरा करने के लिए आवश्यक क्षमता और क्षमताओं में निवेश की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।” प्रस्तावित हब जीएमआर क्रागो सिटी में बनाया जाएगा। यह दिल्ली एयरपोर्ट पर विकसित किया जा रहा एक एकीकृत कार्गो और लॉजिस्टिक्स प्रोजेक्ट है। जीएमआर क्रागो सिटी करीब 50 एकड़ में फैली है और इसमें कुल लगभग 15-20 लाख वर्ग फुट विकास की क्षमता है। इसके पहले चरण में करीब 30 एकड़ क्षेत्र में लगभग 10 लाख वर्ग फुट का विकास किया जाएगा। जीएमआर एयरपोर्ट्स ने बताया कि पहले चरण का विस्तृत डिजाइन तैयार हो चुका है और शुरुआती तैयारियां शुरू हो गई हैं। निर्माण कार्य जल्द शुरू होने की उम्मीद है। जीएमआर एयरपोर्ट्स लिमिटेड के प्रेसिडेंट और सीईओ (कमर्शियल एंड ग्रोथ) राजेश अरोड़ा ने कहा कि फेडएक्स का जीएमआर क्रागो सिटी में अपना इंटीग्रेटेड हब स्थापित करने का फैसला दिल्ली एयरपोर्ट की वैश्विक लॉजिस्टिक्स गेटवे के रूप में बढ़ती भूमिका की पुष्टि करता है। उन्होंने कहा कि यह सुविधा उत्तर और पूर्वी भारत के कारोबारों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने में मदद करेगी। साथ ही, इससे देश के बढ़ते व्यापार, ई-कॉमर्स और एक्सप्रेस लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों को भी मजबूती मिलेगी।
नेवाडा-कैलिफोर्निया सीमा पर ‘हॉक फायर’ का कहर, 15 सौ एकड़ में फैली आग, सात लोग घायल

नेवाडा। अमेरिका के नेवाडा और कैलिफोर्निया की सीमा के पास स्थित उत्तर-पश्चिमी नेवाडा के शहर रेनो की ओर तेजी से बढ़ रही एक भीषण जंगल की आग के कारण कई घर नष्ट या क्षतिग्रस्त हो गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, इस आग में कम से कम सात लोग घायल हुए हैं। ‘हॉक फायर’ नाम की यह आग शनिवार (स्थानीय समयानुसार) शुरू हुई थी। स्थानीय अग्निशमन अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि आग अब तक 15,000 एकड़ (लगभग 60.7 वर्ग किलोमीटर) से अधिक क्षेत्र में फैल चुकी है और इस पर 27 प्रतिशत तक काबू पाया जा सका है। ट्रकी मीडोज फायर प्रोटेक्शन डिस्ट्रिक्ट के प्रमुख रिचर्ड एडवर्ड्स ने सोमवार दोपहर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि आग से कम से कम 32 घर पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं, जबकि छह अन्य घरों को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने बताया कि इस आग में चार आम नागरिक और तीन अग्निशमन कर्मी घायल हुए हैं। सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, इंटरएजेंसी ऑल-हैज़र्ड इंसिडेंट इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम ‘इंसीवेब’ के अनुसार, लगभग 90,000 लोग ऐसे इलाकों में रह रहे हैं जहां निकासी के आदेश या चेतावनियां जारी की गई हैं। रेनो पुलिस विभाग ने सोमवार को फेसबुक पोस्ट में बताया कि आसपास के कुछ इलाकों में स्थिति में सुधार हुआ है। वहां निकासी आदेशों को ‘तुरंत क्षेत्र खाली करें’ से घटाकर ‘निकासी के लिए तैयार रहें’ कर दिया गया है। हालांकि, अधिकारियों ने चेतावनी दी कि स्थिति अभी भी तेजी से बदल रही है और हालात किसी भी समय बिगड़ सकते हैं। प्रभावित क्षेत्रों के लोगों से अपील की गई है कि वे सतर्क रहें, आधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखें और जरूरत पड़ने पर तुरंत सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए तैयार रहें। रेनो, वाशो काउंटी का मुख्यालय और वहां का सबसे बड़ा शहर है। नेवाडा के गवर्नर जो लोम्बार्डो ने शनिवार रात वॉशो काउंटी में आपातकाल घोषित कर दिया था। उन्होंने बयान में कहा, “यह स्थिति लगातार बदल रही है और बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है। मैं प्रभावित क्षेत्रों के सभी लोगों से अपील करता हूं कि वे सतर्क रहें और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।” उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पूरी तरह सक्रिय है और स्थानीय अधिकारियों तथा बचाव दलों के साथ मिलकर उपलब्ध हर संसाधन का इस्तेमाल कर रही है, ताकि लोगों की जान बचाई जा सके, समुदायों की सुरक्षा की जा सके और नेवादा के निवासियों को खतरे से दूर रखा जा सके। गवर्नर लोम्बार्डो ने रविवार सुबह सोशल मीडिया पर भी चेतावनी देते हुए कहा कि यह आग अभी भी तेजी से बदलती और फैलती हुई स्थिति बनी हुई है। अगर आप प्रभावित क्षेत्रों में हैं, तो सतर्क रहें और ताजा जानकारी पर लगातार नजर बनाए रखें।
ट्रंप की चेतावनी के बाद अमेरिका पर जवाबी टैरिफ लगाएगा कनाडा, आज हो सकता है ऐलान

टोरंटो। अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक तनाव चरम पर है। दोनों ओर से जुबानी जंग छिड़ी हुई है। कनाडा मंगलवार को अमेरिका के खिलाफ जवाबी टैरिफ की घोषणा करने की तैयारी में है। यह कदम दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता विफल होने और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से कनाडा को “फॉल इन लाइन” (मेरे निर्देश का पालन करें) की चेतावनी दिए जाने के बाद उठाया जा रहा है। ट्रंप ने कनाडाई नेताओं को चेतावनी दी कि यदि वे अमेरिकी मांगों के अनुरूप नहीं आते हैं तो उन्हें मौजूदा टैरिफ से भी “कहीं ज्यादा गंभीर” परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। उन्होंने कनाडा से आयात होने वाली कारों, ऑटो पार्ट्स और स्टील पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की धमकी भी दी है। प्रस्तावित नए शुल्क अगले साल 1 जनवरी से लागू किए जाने की बात कही गई है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिकी रुख को खारिज करते हुए कहा, “उनका देश ऐसा कोई समझौता स्वीकार नहीं करेगा जिसमें कनाडा को अमेरिका की अधीनस्थ इकाई की तरह व्यवहार करना पड़े।” उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी प्रस्ताव कनाडा के ऑटो, स्टील और एल्युमीनियम जैसे प्रमुख उद्योगों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। कार्नी ने यह भी संकेत दिया कि कनाडा अब अमेरिका के हर टैरिफ का “डॉलर-फॉर-डॉलर” जवाब देने के बजाय “लक्षित जवाबी शुल्क” लगाने की रणनीति अपना सकता है। इसका उद्देश्य कनाडाई कारोबार और कर्मचारियों पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करना है। कनाडाई मीडिया आउटलेट सीबीसी न्यूज के अनुसार, कनाडा के वित्त मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शैंपेन समेत कई मंत्री मंगलवार को प्रभावित कर्मचारियों के लिए सरकारी सहायता उपायों की भी घोषणा करने वाले हैं। विवाद के बीच ओंटारियो के प्रीमियर डग फोर्ड ने भी ट्रंप के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने संकेत दिया कि कनाडा अमेरिका को बिजली और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति जैसे विकल्पों का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए कर सकता है। अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक आपूर्ति श्रृंखलाएं बेहद गहराई से जुड़ी हैं, खासकर ऑटोमोबाइल क्षेत्र में। इसलिए लंबे समय तक चलने वाला टैरिफ विवाद दोनों देशों के उद्योगों, श्रमिकों और उपभोक्ताओं के लिए लागत बढ़ा सकता है।
यूरोप में रिकॉर्डतोड़ गर्मी का कहर: 4 हीटवेव बनी 35,000 अतिरिक्त मौतों की वजह

नई दिल्ली। यूरोप में इस साल लगातार आई चार रिकॉर्डतोड़ हीटवेव करीब 35,000 अतिरिक्त मौतों का कारण बनी हैं। यह आंकड़ा अभी अधूरा है और अगस्त के आंकड़े शामिल होने के बाद मृतकों की संख्या में और बढ़ोतरी की आशंका है। प्रारंभिक राष्ट्रीय आंकड़ों के अनुसार, जर्मनी, फ्रांस और स्पेन में ही 25,000 से अधिक अतिरिक्त मौतें दर्ज की गई हैं। जर्मनी की पब्लिक हेल्थ एजेंसी रॉबर्ट कोच इंस्टिट्यूट (आरकेआई) के आंकड़ों के मुताबिकअप्रैल से अगस्त के बीच अनुमानित 14,000 लोगों की गर्मी से मौत हुई, जो देश में अब तक की सबसे बड़ी संख्या है। अकेले 22 से 28 जून के एक सप्ताह में करीब 9,600 मौतें दर्ज की गईं। स्पेन के कार्लोस III हेल्थ इंस्टिट्यूट के मोर्टेलिटी मॉनिटरिंग सिस्टम के अनुसार, देश में मई से अगस्त के बीच गर्मी से जुड़ी 4,947 मौतों का अनुमान है। यह देश में अब तक का सबसे घातक गर्मी का मौसम है और 2022 में दर्ज 4,520 मौतों के आंकड़े से भी अधिक है। फ्रांस में जुलाई के अंत तक करीब 7,300 अतिरिक्त मौतें दर्ज की गई थीं। द गार्डियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गर्मी का असर अन्य यूरोपीय देशों में भी दिखाई दिया है। बेल्जियम में 18 से 29 जून के बीच सामान्य से 1,222 अधिक मौतें दर्ज हुईं, जबकि नीदरलैंड में 22 जून से 5 जुलाई के बीच कम से कम 900 अतिरिक्त मौतें हुईं। पोलैंड में जून के अंत की हीटवेव के दौरान करीब 1,070 अतिरिक्त मौतों का अनुमान है। स्विट्जरलैंड में भी इसी अवधि में करीब 220 अतिरिक्त मौतें दर्ज की गईं। इस साल यूरोप में मई से लगातार रिकॉर्ड तापमान दर्ज किए गए। जर्मनी में जून के अंत में लगातार तीन दिनों तक तापमान के रिकॉर्ड टूटे और 46 मौसम केंद्रों पर तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया। स्पेन में कई स्थानों पर तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहा। विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक गर्मी का असर केवल सीधे लू लगने से होने वाली मौतों तक सीमित नहीं है। तेज गर्मी पहले से मौजूद हृदय और सांस संबंधी बीमारियों को गंभीर कर सकती है, जिससे मृत्यु का जोखिम बढ़ जाता है। इसलिए गर्मी से संबंधित वास्तविक मौतों का आंकड़ा अक्सर आधिकारिक मृत्यु प्रमाणपत्रों में सीधे दिखाई नहीं देता। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मई में कहा था कि यूरोपीय क्षेत्र में गर्मी से संबंधित मृत्यु दर पिछले दो दशकों में 30 प्रतिशत से अधिक बढ़ी है। जलवायु परिवर्तन और यूरोप की बढ़ती बुजुर्ग आबादी के कारण आने वाले वर्षों में यह समस्या और गंभीर होने की आशंका है।
‘इंग्लैंड टीम में कंपकंपी दौड़ जाए’, ब्रायडन कार्स विवाद पर माइकल वॉन ने की सख्त सजा की मांग

नई दिल्ली। ब्रायडन कार्स के शराब पीने के विवाद में शामिल होने के बाद इंग्लैंड क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान माइकल वॉन ने ऐसी सजा की मांग की है जिससे पूरी इंग्लैंड क्रिकेट टीम में कंपकंपी दौड़ जाए। वॉन ने कहा, “किसी को ऐसी सजा मिलनी चाहिए जिससे पूरी इंग्लैंड क्रिकेट टीम को सिहरन हो, ताकि सभी को पता चले कि अगर आप गलत व्यवहार करते हैं या इस टीम के साथ किसी भी तरह की बदनामी करते हैं, तो आपको पता है कि क्या होने वाला है। यह एकमात्र ऐसी सजा है जिससे खिलाड़ियों को सच में दुख होगा।” पूर्व कप्तान ने कहा कि अगर पिछले साल की दूसरी घटनाओं के बाद कार्स को एक उदाहरण बनाया जाता है तो उन्हें उनके लिए बुरा लगेगा। मुझे उम्मीद है कि कार्स को अपने आस-पास अच्छा समर्थन मिल रहा है। वह एक ऐसा कैरेक्टर है कि अगर आप उसे थोड़ी छूट देंगे तो वह बहुत ज्यादा झेल लेगा। उसे अपने आस-पास ऐसे लोगों की जरूरत है जो उसे बेहतर सलाह दे सकें। उन्होंने कहा, “अगर पिछले नौ महीनों में जो कुछ हुआ है, उसके लिए कार्स को जिम्मेदार ठहराया जाता है, तो मुझे दुख होगा, लेकिन कहीं न कहीं, किसी न किसी तरह, कुछ ऐसा करना होगा जिससे एक मिसाल बने कि वे अब उस तरह का बर्ताव बर्दाश्त नहीं करेंगे।” कार्स पाकिस्तान के खिलाफ घरेलू मैदान पर तीन में से दो टेस्ट मैचों के लिए इंग्लैंड टीम का हिस्सा थे, लेकिन लीड्स में पहले मैच में नहीं चुने जाने के बाद उन्हें काउंटी चैंपियनशिप में डरहम के लिए खेलने के लिए छोड़ दिया गया था। घरेलू टीम की जीत के बाद एक वायरल वीडियो में कार्स को पुलिस एक नाइट क्लब के बाहर हथकड़ी पहनाकर पकड़े दिखी। उन्हें कुछ देर के लिए गिरफ्तार किया गया था। मामला सामने आने के बाद ईसीबी ने घटना की अपने स्तर से जांच शुरू की। कार्स का मामला इंग्लैंड क्रिकेट की नाइट क्लब घटनाओं की सूची में सबसे नया है। पिछले अक्टूबर में, इंग्लैंड के व्हाइट-बॉल कप्तान हैरी ब्रूक को न्यूजीलैंड के वेलिंगटन में एक नाइट क्लब के बाहर एक बाउंसर ने घूंसा मारा था, उस समय टीम के साथी जैकब बेथेल और जोश टंग भी मौजूद थे। ऑस्ट्रेलिया के एशेज टूर के दौरान, ओपनर बेन डकेट को नूसा में इंग्लैंड की छुट्टियों के दौरान नशे में फिल्माया गया था। जून में, पूर्व टेस्ट कप्तान बेन स्टोक्स और तेज गेंदबाज गस एटकिंसन ने टीम कर्फ्यू तोड़ा और वे तब मौजूद थे जब लंदन के एक नाइट क्लब में इंग्लैंड के सुरक्षा स्टाफ के एक सदस्य को सारासेन्स रग्बी प्लेयर ने घूंसा मारा था। ईसीबी ने कहा कि यह तेज गेंदबाज गुरुवार को लॉर्ड्स में पाकिस्तान के खिलाफ दूसरे टेस्ट के लिए चयन के लिए उपलब्ध नहीं रहेगा। उनकी जगह टीम में हैम्पशायर के दाएं हाथ के तेज गेंदबाज सोनी बेकर को शामिल किया जाएगा।