दिल्ली: एच1एन1 के बढ़ते मामले को लेकर एक्शन में स्वास्थ्य मंत्री, बुलाई उच्चस्तरीय बैठक

नई दिल्ली। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज सिंह ने सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) और वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम और नियंत्रण के लिए वर्तमान स्थिति और तैयारियों पर चर्चा करने के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। यह बैठक दोपहर 2 बजे दिल्ली सचिवालय में आयोजित होने वाली है और इसमें स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। बैठक के दौरान, स्वास्थ्य मंत्री द्वारा मौजूदा स्थिति और विभिन्न मौसमी और वेक्टर जनित रोगों के प्रसार को रोकने और नियंत्रित करने के लिए उठाए जा रहे उपायों की समीक्षा किए जाने की उम्मीद है। चर्चा में अस्पतालों की तैयारियों, निगरानी प्रणालियों और मामलों में संभावित वृद्धि से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग की तत्परता पर भी ध्यान केंद्रित किए जाने की संभावना है। इस बैठक में विशेष रूप से स्वाइन फ्लू, डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों के प्रसार को रोकने के लिए उठाए जा रहे कदमों और स्थिति की समीक्षा की जाएगी। डॉ. पंकज सिंह द्वारा दिल्ली भर में बीमारी की मौजूदा स्थिति के संबंध में अधिकारियों से विस्तृत जानकारी प्राप्त करने की उम्मीद है। वे जमीनी स्तर पर निगरानी को मजबूत करने और आने वाले दिनों में संभावित मामलों से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों को बढ़ाने के संबंध में निर्देश भी दे सकते हैं। दिल्ली में मानसून के मौसम के दौरान मौसमी और वेक्टर जनित बीमारियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस बीच, सफदरजंग अस्पताल ने कहा कि वह स्वाइन फ्लू (एच1एन1 इन्फ्लूएंजा) और अन्य मौसमी बीमारियों से पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए पूरी तरह से सुसज्जित है। अस्पताल ने बताया कि मरीजों के लिए आवश्यक दवाएं, उपचार सुविधाएं और सहायक देखभाल उपलब्ध हैं। दिल्ली में 20 अगस्त को इन्फ्लूएंजा के 159 नए मामले दर्ज किए गए, जिनमें एच1एन1 के 114 मामले शामिल हैं। इसके साथ ही 2026 में एच1एन1 के कुल मामलों की संख्या 1,777 हो गई है। इन्फ्लूएंजा ए के मामले भी बढ़कर 2,392 हो गए हैं। एच1एन1 इन्फ्लूएंजा ए का एक उपप्रकार है और इसे आमतौर पर स्वाइन फ्लू के नाम से जाना जाता है। राष्ट्रीय राजधानी में 2026 में अब तक इन्फ्लूएंजा के कुल 2,602 मामले सामने आए हैं, जिनमें इन्फ्लूएंजा ए के 2,392 और इन्फ्लूएंजा बी के 210 मामले शामिल हैं। 20 अगस्त को इन्फ्लूएंजा बी के चार नए मामले सामने आए, जिससे कुल संख्या 210 हो गई। एच1एन1 इन्फ्लूएंजा ए वायरस का एक उपप्रकार है, जो श्वसन संबंधी बीमारी का कारण बनता है। 2009 के इन्फ्लूएंजा महामारी के दौरान इसे व्यापक रूप से “स्वाइन फ्लू” के नाम से जाना जाने लगा और बाद में यह मनुष्यों में फैलने वाले मौसमी इन्फ्लूएंजा वायरसों में से एक बन गया। इन्फ्लूएंजा के सामान्य लक्षणों में बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, शरीर में दर्द, थकान और नाक बहना या बंद होना शामिल हैं। कई मामलों में लोग कुछ दिनों से लेकर लगभग एक सप्ताह के भीतर ठीक हो जाते हैं। हालांकि, इन्फ्लूएंजा कभी-कभी गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है। खासकर बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और कुछ गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त लोगों में। गंभीर श्वसन संबंधी लक्षण, लगातार तेज बुखार, सांस लेने में कठिनाई, सीने में तकलीफ, भ्रम या स्थिति के बिगड़ने पर तुरंत चिकित्सा जांच की आवश्यकता हो सकती है। इन्फ्लूएंजा मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बात करने पर निकलने वाली श्वसन बूंदों और कणों के माध्यम से फैलता है। हाथों की अच्छी स्वच्छता बनाए रखना, खांसते और छींकते समय मुंह ढकना और बीमार लोगों के निकट संपर्क से बचना संक्रमण के प्रसार को कम करने में सहायक हो सकता है। मौसमी इन्फ्लूएंजा का टीकाकरण भी एक महत्वपूर्ण निवारक उपाय है। खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें जटिलताओं का अधिक खतरा होता है।
27 अगस्त को होगा ‘खेलो इंडिया संवाद’ का आयोजन, पीएम मोदी करेंगे युवाओं को संबोधित

नई दिल्ली। राष्ट्रीय खेल दिवस के मौके पर 27 अगस्त को देश भर में एक बड़ा कार्यक्रम “खेलो इंडिया संवाद – खेल की बात, प्रधानमंत्री के साथ” आयोजित किया जाएगा। इस पहल के जरिए देश भर में 1,500 से ज्यादा जगहों पर युवाओं, खिलाड़ियों और शिक्षण संस्थानों को एक साथ लाया जाएगा। इस दौरान पीएम मोदी युवाओं को संबोधित करेंगे। इसके साथ ही खेल जगत की बड़ी हस्तियां भी युवाओं से सीधा संवाद करेंगी। आईआईटी, आईआईएम, एनआईटी, एम्स, प्रमुख मेडिकल कॉलेज और यूनिवर्सिटीज के साथ-साथ अन्य बड़े शिक्षण संस्थान भी इस देशव्यापी अभियान में हिस्सा लेंगे। यह कार्यक्रम खेल-प्रेमी युवाओं और भारत के नीति-निर्माताओं के बीच सीधी बातचीत कराने की एक बड़ी कोशिश है, जिससे युवाओं को अपने विचार, अनुभव और सुझाव साझा करने का मौका मिलेगा। युवा, खेल और युवाओं से जुड़े चार मुख्य विषयों पर अपने विचार, सुझाव और नए आइडिया साझा करेंगे। पहला, बेहतर सुविधाएं, कोचिंग और मौके जमीनी स्तर तक पहुंचाकर खेल इकोसिस्टम को मजबूत करना। दूसरा, वैज्ञानिक तरीके से टैलेंट की पहचान और एथलीट के विकास पर ध्यान देते हुए 2036 ओलंपिक के लिए टैलेंट को तैयार करना। तीसरा, युवा नेतृत्व को मजबूत करना और शासन-प्रशासन में युवाओं की भागीदारी बढ़ाना। चौथा, विकसित भारत के लिए युवाओं का सशक्तिकरण, जिसमें भविष्य के लिए जरूरी स्किल्स, वॉलंटियरिंग और राष्ट्र-निर्माण के मौके शामिल हैं। इस कार्यक्रम के जरिए मिले सुझाव सीधे पॉलिसी बनाने वालों और खेल इकोसिस्टम तक पहुंचाए जाएंगे, जिससे जमीनी स्तर के अनुभवों और युवाओं की उम्मीदों को पॉलिसी बनाने की प्रक्रिया से जोड़ने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे और देश भर के युवाओं को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम की शुरुआत ‘माई भारत’ के स्वयंसेवकों के स्वागत भाषण से होगी। इसके बाद एक खास वीडियो दिखाया जाएगा, जिसमें पिछले 12 वर्षों में भारत के खेल इकोसिस्टम में आए बड़े बदलावों को उजागर किया जाएगा। खेल और युवा शक्ति पर प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस संदेश की मुख्य बातें भी दिखाई जाएंगी। इसके बाद पीएम मोदी का वर्चुअल संबोधन होगा। प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद, देश भर में 1,500 से अधिक जगहों पर कार्यक्रम शुरू होंगे। मनिका बत्रा, दीपा कर्मकार, साइना नेहवाल, गगन नारंग, श्रीजेश, मैरी कॉम, बाइचुंग भूटिया, गोपीचंद, अंजू बॉबी जॉर्ज, कर्णम मल्लेश्वरी, मीराबाई चानू, पी. टी. उषा और जाने-माने क्रिकेटरों समेत भारत के प्रमुख खिलाड़ी और मेडल जीतने वाले लोग युवाओं से सीधे बातचीत करेंगे। खिलाड़ी युवा प्रतिभागियों के साथ अपनी यात्रा, चुनौतियों, नाकामियों, कामयाबियों और खेल से जुड़े अनुभवों को साझा करेंगे। इसका मकसद युवाओं में यह भरोसा जगाना है कि एक चैंपियन का सफर किसी बड़े स्टेडियम से नहीं, बल्कि एक छोटे से मैदान और पहली कोशिश से शुरू होता है। इस कार्यक्रम में सांसद, विधायक, केंद्रीय मंत्री, राज्य मंत्री और राज्यों के खेल मंत्री हिस्सा लेंगे। ये चुने हुए प्रतिनिधि और गणमान्य व्यक्ति युवाओं से बातचीत करेंगे और चार मुख्य विषयों पर उनके विचार और सुझाव जानेंगे। इस कार्यक्रम के तहत ‘विकसित भारत युवा लीडर संवाद’ क्विज आयोजित की जाएगी। युवाओं को ‘माई भारत’ पोर्टल पर रजिस्टर करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा। इसका मकसद युवाओं को सिर्फ एक दिन के कार्यक्रम से आगे ले जाकर, उन्हें लंबे समय तक चलने वाले राष्ट्रीय युवा जुड़ाव इकोसिस्टम का हिस्सा बनाना है।
अपने ही स्कूल में शिक्षक बने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार, छात्रों से बोले- जीवन में बहुत कुछ सिखाता है विद्यालय

लखनऊ। भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार सोमवार को अपने पुराने विद्यालय कॉल्विन तालुकदार्स कॉलेज पहुंचे तो बीते दिनों की यादें ताजा हो गईं। कभी इसी विद्यालय में विद्यार्थी बनकर पढ़ाई करने वाले ज्ञानेश कुमार इस बार शिक्षक की भूमिका में नजर आए। उन्होंने कक्षा 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों से सीधे संवाद किया और उन्हें लोकतंत्र, चुनाव, मताधिकार तथा जिम्मेदार नागरिक बनने का पाठ पढ़ाया। अपने छात्र जीवन की यादों को साझा करते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि कॉलेज ने उन्हें केवल किताबी ज्ञान नहीं दिया, बल्कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए अनुशासन, चुनौतियों से लड़ने का साहस और सही विचारों को आत्मसात करने की क्षमता भी दी। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि स्कूल और कॉलेज का समय जीवन का ऐसा दौर होता है, जब अच्छे शिक्षक, वातावरण और अनुभव व्यक्तित्व को गढ़ने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि यहां के शिक्षकों ने उन्हें बहुत कुछ दिया और विद्यालय से मिली सीख आगे चलकर उनके जीवन में बेहद काम आई। विद्यार्थियों से संवाद के दौरान उन्होंने कहा कि जिस तरह उन्हें अपने विद्यालय से बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला, उसी तरह आज के विद्यार्थियों को भी अपने शिक्षकों और विद्यालय के वातावरण से मिलने वाली सीख को ग्रहण करना चाहिए। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने विद्यार्थियों को लोकतंत्र में युवाओं की भूमिका से भी अवगत कराया। उन्होंने कहा कि मतदान महज एक अधिकार नहीं, बल्कि देश के भविष्य के निर्माण में भागीदारी का महत्वपूर्ण माध्यम है। जागरूक मतदाता ही मजबूत लोकतंत्र की आधारशिला रखते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने मताधिकार के साथ-साथ उससे जुड़ी जिम्मेदारियों को समझने के लिए प्रेरित किया। संवाद के दौरान विद्यार्थियों ने चुनाव प्रक्रिया, मतदाता बनने की पात्रता, मतदान और निष्पक्ष चुनाव से जुड़े कई सवाल पूछे। ज्ञानेश कुमार ने उनकी जिज्ञासाओं का जवाब देते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में युवा पीढ़ी की सक्रिय और जिम्मेदार भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि कक्षा 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के लिए यह समय खास है। इनमें से कई विद्यार्थी आने वाले समय में पहली बार मतदान करेंगे। ऐसे में उन्हें अभी से अपने अधिकारों, कर्तव्यों और लोकतांत्रिक मूल्यों को समझना चाहिए। कॉल्विन तालुकदार्स कॉलेज पहुंचने पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त अपने पुराने दिनों को याद कर भावुक भी नजर आए। उन्होंने कहा कि लखनऊ से उनका बहुत पुराना और गहरा नाता है। यहीं से शुरुआती शिक्षा हासिल करने के बाद वह उच्च शिक्षा के लिए आगे बढ़े। लंबे समय बाद अपने विद्यालय लौटकर विद्यार्थियों के बीच आना उनके लिए विशेष अनुभव रहा। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन में अलग-अलग दौर आते हैं। आज वे जिस दौर से गुजर रहे हैं, वह उनके व्यक्तित्व और भविष्य को आकार देने वाला समय है। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे अपने शिक्षकों की बातों, विद्यालय के वातावरण और यहां मिलने वाले अनुभवों से अधिक से अधिक सीखने का प्रयास करें। उन्होंने कहा, “इस कॉलेज ने जो-जो चीजें हमें सिखाईं, वे मेरे जीवन में आगे बहुत काम आईं। यहां के बच्चों से संवाद करते हुए मैंने उनसे यही कहा कि जीवन का यह समय ऐसा होता है, जब स्कूल बहुत सारी चीजें देता है। अच्छे शिक्षक और स्कूल का वातावरण बहुत कुछ सिखाते हैं। उन विचारों और सीख को ग्रहण करने वाला होना चाहिए।” ज्ञानेश कुमार ने विद्यार्थियों के साथ संवाद को सुखद अनुभव बताते हुए कहा कि उनके लिए यह मुलाकात एक तरह से अतीत और वर्तमान के बीच संवाद जैसी रही। एक दौर उनका था, जबकि दूसरा दौर आज इन विद्यार्थियों का है। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे समय में मुख्य निर्वाचन आयुक्त का उन विद्यार्थियों से संवाद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो आने वाले समय में मतदाता बनने जा रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान चुनावी साक्षरता और जागरूक मतदाता बनने का संदेश प्रमुखता से दिया गया।
पीयूष गोयल की जापानी कंपनियों से अपील, भारत में अपना परिचालन मजबूत करें; सुजुकी जैसी सफलता दोहराये

टोक्यो। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को जापानी कंपनियों से भारत में अपना परिचालन मजबूत करने की अपील करते हुए कहा कि वे सुजुकी जैसी सफलता को देश में दोहराये और हम भारत में काम कर रही जापानी कंपनियों में से 1,580 सुजुकी को उभरते हुए देखना चाहते हैं। जापान चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (जेसीसीआई) की जापान-भारत बिजनेस कंसल्टेटिव कमिटी (जेआईबीसीसी) और भारतीय दूतावास के साथ एक गोलमेज बैठक को संबोधित करते हुए, गोयल ने कहा कि भारत की युवा वर्कफोर्स, तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और लंबे समय की विकास की महत्वाकांक्षाएं जापानी व्यवसायों के लिए बड़े अवसर प्रदान करती हैं। गोयल ने देश में पिछले चार दशकों में सुजुकी के सफर का जिक्र करते हुए कहा, “आज हम भारत से कुछ सबसे बड़े और सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाले ऑपरेशन होते हुए देख रहे हैं।” केंद्रीय मंत्री ने कहा, “हम उन 1,580 कंपनियों के लिए ऐसा ही सफर देखना चाहते हैं जिनका आप प्रतिनिधित्व करते हैं। हम चाहते हैं कि भारत से 1,580 ‘सुजुकी’ जैसी कंपनियां उभरें।” गोयल ने कहा कि भारत और जापान को अपने राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ का इस्तेमाल व्यापारिक सहयोग को मजबूत करने और आने वाले दशक के लिए अपनी आर्थिक साझेदारी को आकार देने में करना चाहिए। उन्होंने कहा, “भारत में पहले से ही बड़ी संख्या में जापानी कंपनियां काम कर रही हैं। मेरा मानना है कि इस दशक में यह संख्या मौजूदा स्तर से दोगुनी हो जानी चाहिए।” केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत की कामकाजी उम्र की आबादी की औसत आयु 30 साल से कम है और उम्मीद है कि यह कई दशकों तक युवा बनी रहेगी, जिससे जापानी कंपनियों को बड़ी संख्या में कुशल लोगों और उपभोक्ता बाजार तक पहुंच मिलेगी। उन्होंने भारत के उस लक्ष्य पर भी जोर दिया जिसके तहत देश अपनी आजादी के 100 साल पूरे होने पर, यानी 2047 तक, मौजूदा 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था से बढ़कर 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना चाहता है। गोयल ने कहा, “यह एक बड़ा लक्ष्य है, लेकिन 1.4 अरब भारतीय इसे हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।” केंद्रीय मंत्री 24 अगस्त से 27 अगस्त के बीच जापान की चार दिवसीय यात्रा पर हैं और 200 से ज्यादा प्रतिनिधियों वाले भारतीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं।
5-दिवसीय बैंकिंग और पीएलआई योजना को लेकर बैंक यूनियनों का आंदोलन तेज, 11 सितंबर को देशव्यापी हड़ताल का ऐलान

नई दिल्ली। बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों के नौ प्रमुख संगठनों के संयुक्त मंच यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन तेज करने का फैसला किया है। यूनियनों ने 11 सितंबर को राष्ट्रव्यापी हड़ताल की घोषणा की है। यूएफबीयू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है तो 28 सितंबर से तीन दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल और उसके बाद 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी। इसके अलावा, यूएफबीयू ने कहा है कि सरकार और बैंक प्रबंधन द्वारा प्रमुख मांगों पर अपेक्षित प्रगति नहीं होने के कारण यह निर्णय लिया गया है। यह फैसला रविवार को आयोजित संगठन की बैठक में लिया गया। यदि प्रस्तावित हड़तालें लागू होती हैं, तो देशभर में विशेष रूप से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की सेवाओं पर व्यापक असर पड़ सकता है। बैंकिंग लेनदेन, शाखा सेवाएं, चेक क्लीयरिंग और अन्य नियमित कार्य प्रभावित होने की आशंका है। यूनियंस का कहना है कि पांच-दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था उनकी प्रमुख मांगों में शामिल है। यूएफबीयू के अनुसार, इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) ने 8 मार्च 2024 को हुए 12वें द्विपक्षीय समझौते और 9वें संयुक्त नोट के तहत इस प्रस्ताव पर सहमति जताई थी। प्रस्ताव के अनुसार, सोमवार से शुक्रवार तक प्रतिदिन कार्य अवधि में 40 मिनट की वृद्धि की जानी थी और शनिवार को अवकाश रखा जाना था। यूनियनों का आरोप है कि इस प्रस्ताव को सरकार के पास भेजे जाने के बावजूद दो वर्षों से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। यूनियंस ने बैंक अधिकारियों के लिए लागू की जा रही परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना का भी विरोध किया है। उनका कहना है कि सरकार द्वारा प्रस्तावित योजना और आईबीए के साथ हुई सहमति में अंतर है। यूएफबीयू के मुताबिक, सरकारी योजना के तहत स्केल-IV और उससे ऊपर के अधिकारियों को व्यक्तिगत प्रदर्शन के आधार पर 365 दिनों तक के मूल वेतन के बराबर पीएलआई मिल सकता है। वहीं कर्मचारी वर्ग और स्केल-III तक के अधिकारियों को अधिकतम 15 दिनों के मूल वेतन और महंगाई भत्ते के बराबर ही प्रोत्साहन राशि मिलेगी। यूनियनों का कहना है कि प्रोत्साहन प्रणाली बैंक के समग्र प्रदर्शन से जुड़ी होनी चाहिए और सभी कैडरों के लिए समानता सुनिश्चित करनी चाहिए। यूएफबीयू की अन्य प्रमुख मांगों में पेंशन का अद्यतन (पेंशन अपडेटेशन), पेंशनधारकों के लिए समान महंगाई भत्ता फॉर्मूला और राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना में स्विच करने का विकल्प शामिल हैं।
रांची में बिना ट्रेड लाइसेंस के चल रहे 20 कोचिंग संस्थानों पर नगर निगम का शिकंजा, तीन दिन में सीलिंग की दी चेतावनी

रांची। झारखंड की राजधानी रांची में नियमों को दरकिनार कर चलाए जा रहे कोचिंग सेंटरों के खिलाफ नगर निगम ने सख्त अभियान शुरू किया है। निगम की इंफोर्समेंट टीम ने बिना वैध ट्रेड लाइसेंस के चल रहे 20 बड़े कोचिंग संस्थानों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इन सभी संस्थानों को चेतावनी दी गई है कि वे 72 घंटे (तीन दिन) के भीतर कागजी प्रक्रिया दुरुस्त कर लाइसेंस प्राप्त करें, अन्यथा उनके परिसरों को अनिश्चितकाल के लिए सील कर दिया जाएगा। नगर निगम की ओर से कराए गए सर्वे के अनुसार, राजधानी में करीब 1,364 व्यावसायिक शैक्षणिक संस्थान सक्रिय हैं, जिनमें कोचिंग संस्थानों की संख्या 831 है। चौंकाने वाली बात यह है कि इतनी बड़ी संख्या के बावजूद केवल 68 कोचिंग सेंटरों ने ही नगर निगम से ट्रेड लाइसेंस ले रखा है। राजस्व की इस भारी चपत और गैर-कानूनी संचालन को गंभीरता से लेते हुए निगम प्रशासन ने अब पूरे शहर में बड़े पैमाने पर जांच अभियान छेड़ने का निर्णय लिया है। निगम ने पहले चरण में जिन कोचिंग सेंटरों को नोटिस जारी किया है, उनमें अमान्स मोशन एकेडमी, न्यूटन ट्यूटोरियल्स, सीएलएटी प्रेप, पाठशाला, करियर फाउंडेशन, एमएस लर्निंग रिसोर्सेज, डिजाइन क्वेस्ट, एमबीए अचीवर्स, ग्रैविटी एजुकेशन, नेशनल सीएलएटी एकेडमी, मास्टर माइंड्स, पेजेस लाइब्रेरी, द ब्लैक बोर्ड, एके एकेडमी और हिनू स्थित डी-क्यूब क्लासेज समेत कई अन्य नाम शामिल हैं। निगम ने स्पष्ट किया है कि बिना पूर्व अनुमति या वैधानिक अनुज्ञप्ति के व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन ‘झारखंड नगरपालिका अधिनियम, 2011’ की धारा 455 तथा ‘झारखंड नगरपालिका अनुज्ञप्ति नियमावली, 2017’ की कंडिका 19 एवं 20 का सीधा उल्लंघन है। जारी नोटिस के जरिए संस्थानों को निर्देश दिया गया है कि वे समय सीमा के भीतर कानूनी औपचारिकताएं पूरी करें और अपने परिसरों से अवैध होर्डिंग्स व प्रचार सामग्री हटाएं। नगर निगम के अनुसार, शहर के कोने-कोने में चल रहे अन्य शैक्षणिक व व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की भी सघन जांच होगी। निर्धारित समयावधि बीतने के बाद बिना लाइसेंस पाए जाने वाले संस्थानों पर बिना किसी रियायत के सीलिंग की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान की जोजरी नदी के किनारे से 100 मीटर के दायरे में निर्माण पर लगाई रोक

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राजस्थान की जोजरी नदी के किनारे से 100 मीटर के दायरे में सभी तरह के निर्माण और विकास कार्यों पर रोक लगा दी। यह रोक तब तक लागू रहेगी जब तक कि बाढ़ सीमा और पर्यावरण सुरक्षा क्षेत्र का वैज्ञानिक तरीके से निर्धारण और सीमांकन नहीं हो जाता। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने जोजरी समेत राजस्थान की नदियों में औद्योगिक प्रदूषण से जुड़े एक ‘सुओ मोटो’ मामले में यह आदेश दिया। कोर्ट ने आदेश दिया कि नदी की मौजूदा बाढ़ सीमा से दोनों तरफ 500 मीटर तक ऐसे किसी उद्योग या गतिविधि की अनुमति नहीं होगी, जिससे नदी में प्रदूषण, गंदगी या पर्यावरण को कोई दूसरा नुकसान होने की संभावना हो। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नदी और उसके आसपास के पर्यावरण को काफी नुकसान हुआ है। इसलिए जब तक वैज्ञानिक तरीके से नदी की बाढ़ सीमा और जरूरी पर्यावरण सुरक्षा क्षेत्र तय नहीं हो जाता, तब तक यह अंतरिम व्यवस्था लागू रहेगी। कोर्ट ने कहा, “हमारी राय है कि बाढ़ सीमा और जरूरी पर्यावरण सुरक्षा क्षेत्र तय करने और उनकी सीमा तय करने की वैज्ञानिक प्रक्रिया के दौरान नदी के इकोसिस्टम की ठीक से सुरक्षा के लिए एक अंतरिम, निश्चित और मापने योग्य सुरक्षा क्षेत्र बनाना जरूरी है। इसलिए, हम निर्देश देते हैं कि ऊपर बताई गई गाइडलाइंस के अनुसार, नदी के किनारे से 100 मीटर की दूरी के भीतर किसी भी तरह का निर्माण या विकास कार्य करने की अनुमति नहीं होगी।” कोर्ट के सामने यह ‘सुओ मोटो’ का मामला तब आया, जब एक डॉक्यूमेंट्री में जोजरी नदी के अंदर जोधपुर, पाली और बाड़मेर जिलों में भारी प्रदूषण का खुलासा हुआ। नवंबर 2025 में कोर्ट ने जोजरी, बांडी और लूनी नदियों की सफाई के लिए एनजीटी के 2022 के निर्देशों को फिर से लागू किया था और राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस संगीत लोढ़ा की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल इकोसिस्टम निगरानी समिति का गठन किया था।
सीमा सुरक्षा से लेकर जादवपुर हिंसा तक, टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने सीएम सुवेंदु अधिकारी पर साधा निशाना

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कई मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सीएम सुवेंदु अधिकारी के उस बयान पर पलटवार किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि पिछली सरकार ने सीमा सुरक्षा के लिए कोई काम नहीं किया था। इस पर सौगत रॉय ने आईएएनएस से कहा, “यह सही नहीं है। जो भी करने की जरूरत थी, पिछली सरकार ने पहले ही कर दिया था और सुवेंदु अधिकारी भी अब कुछ करने की कोशिश कर रहे हैं। उनको कोई जरूरत नहीं है पुरानी सरकार को बोलने का, अभी तो यह उनकी ही जिम्मेदारी है।” जादवपुर यूनिवर्सिटी में हालिया हिंसक झड़प और तोड़फोड़ की घटनाओं की जांच के लिए बनाई गई जांच समिति के प्रमुख प्रो. शुभा शंकर सरकार ने विवादों के बीच पद संभालने से इनकार करते हुए अपना इस्तीफा दे दिया है। इस पर सौगत रॉय ने कहा कि यूनिवर्सिटी में जो घटना हुई है, उस पर काफी सवाल हैं। इसकी ठीक से जांच होनी चाहिए। बता दें कि कोलकाता की जादवपुर यूनिवर्सिटी में वामपंथी छात्र संगठनों और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के समर्थकों के बीच जमकर हिंसक झड़प, तोड़फोड़ और आगजनी हुई थी। यह विवाद एक जनरल बॉडी मीटिंग को लेकर शुरू हुआ था, जिसमें दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर बाहरी लोगों को बुलाकर हमला करने का आरोप लगाया है। सीएम सुवेंदु ने कहा था कि अग्निवीर के लिए पुलिस में 20 प्रतिशत पोस्ट है। इस पर टीएमसी सांसद ने कहा कि अग्निवीर जब से शुरू हुआ है, तब से लोगों को इसको लेकर बहुत आपत्ति है, क्योंकि लोग चाहते हैं कि आर्मी में पक्की नौकरी होनी चाहिए। अग्निवीर को इधर लाएंगे, इसके बारे में बोलना मुश्किल है क्योंकि अग्निवीर का प्रोजेक्ट कितना सफल हुआ है, यह अभी साफ नहीं है।
मध्य प्रदेश के स्कूलों में मनाया जाएगा तीन दिवसीय श्री कृष्ण जन्मोत्सव

भोपाल। मध्य प्रदेश के स्कूलों में तीन दिवसीय श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर्व मनाया जाएगा।इस मौके पर लीलाओं के मंचन से लेकर नाटक और व्याख्यान भी होंगे। राज्य के लोक शिक्षण संचालनालय के अपर संचालक रविंद्र कुमार सिंह ने सभी जिला अधिकारियों को जन्माष्टमी पर्व मनाने का आदेश दिया है। इस आदेश में बताया गया है कि राज्य के संस्कृति विभाग द्वारा यह आयोजन के निर्देश दिए गए हैं। शिक्षा विभाग द्वारा तय की गई रूपरेखा के अनुसार तीन दिन तक श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर्व मनाया जाएगा। यह आयोजन एक सितंबर से तीन सितंबर तक चलेगा, इस आयोजन का उद्देश्य भारतीय संस्कृति, परंपराओ, नैतिक मूल्य एवं सामाजिक समरसता के प्रति विद्यार्थियों में समझ विकसित करना है। तीन दिवसीय इस आयोजन में विविध कार्यक्रम होंगे और प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जाएगा। इस दौरान भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का मंचन होगा, उनकी शिक्षाओं, गीता ज्ञान और उनसे जुड़े विभिन्न प्रसंगों का नाट्य तथा नृत्य मंचन होगा। इसके साथ ही भगवान श्री कृष्ण से जुड़े भ्रामक मिथकों को तोड़ने के लिए व्याख्यान भी होंगे। इस तीन दिवसीय आयोजन में सांदीपनि विद्यालयों में विशेष आयोजन किए जाएंगे, जिसमें सांदीपनि गुरु से जुड़े प्रसंग, गुरु- शिष्य परंपरा आदि पर परिचर्चा होगी और नाट्य मंचन भी किया जाएगा। स्कूलों में श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर मनाया जाने पर भाजपा नेताओं ने प्रसन्नता जाहिर की है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने कहा कि कृष्ण जन्मोत्सव पर सरकार का निर्णय स्वागत योग्य है, स्कूलों में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के आयोजन का मध्यप्रदेश सरकार का निर्णय हमारी सनातन संस्कृति, संस्कारों और श्रीकृष्ण के जीवन मूल्यों से नई पीढ़ी को जोड़ने वाला सराहनीय कदम है।भगवान श्रीकृष्ण किसी एक वर्ग की आस्था नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और हमारी गौरवशाली परंपरा के प्रतीक हैं।सरकार के इस निर्णय का हम स्वागत एवं समर्थन करते हैं। श्रीकृष्ण के संदेश—धर्म, कर्तव्य और सत्य को विद्यार्थियों तक पहुँचाना समय की आवश्यकता है।
असम ने प्रतिवर्ष 10 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया: हिमंता बिस्वा सरमा

गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोमवार को कहा कि राज्य सरकार ने प्रतिवर्ष 10 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है, जिससे किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि के साथ सुनिश्चित खरीद का लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि सरकार ने अपने कार्यकाल के पहले 100 दिनों के भीतर ही किसानों से सीधे दो लाख मीट्रिक टन से अधिक धान की खरीद कर ली है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और किसानों को उनकी उपज के लिए एक विश्वसनीय खरीद तंत्र उपलब्ध कराना है। 10 लाख मीट्रिक टन के वार्षिक लक्ष्य से असम में सरकार समर्थित धान की खरीद का दायरा काफी बढ़ने और किसानों को बेहतर मूल्य आश्वासन मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री सरमा की यह घोषणा राज्य सरकार द्वारा किसानों की आय बढ़ाने और सुनिश्चित बाजारों और बेहतर खरीद तंत्र के माध्यम से कृषि क्षेत्र को मजबूत करने पर केंद्रित प्रयासों के बीच आई है। किसानों से सीधे खरीद का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना भी है कि उत्पादकों को उनकी उपज के लिए घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का लाभ मिले। साथ ही, अनिश्चित बाजार कीमतों पर उनकी निर्भरता कम हो। मुख्यमंत्री ने पहले 100 दिनों के दौरान हासिल की गई खरीद को बड़े वार्षिक लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। अब सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वह 10 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य को प्राप्त करने और खरीद प्रक्रिया में किसानों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए राज्य भर में खरीद कार्यों को बढ़ाएगी। यह पहल असम सरकार द्वारा कृषि आजीविका में सुधार लाने और कृषि समुदाय को मजबूत आर्थिक सहायता प्रदान करने पर दिए जा रहे व्यापक प्रयासों का हिस्सा है।