दक्षिण कोरिया: 180 दिन की जांच के बाद स्पेशल काउंसल ने पूर्व राष्ट्रपति यून पर आरोप तय किए

सोल। दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक-योल से जुड़े तमाम मामलों की 180 दिन चली व्यापक विशेष जांच (स्पेशल काउंसल) सोमवार को समाप्त हो गई। विशेष जांचकर्ता क्वोन चांग-यंग की टीम ने जांच के दौरान यून समेत 58 लोगों के खिलाफ आरोप तय किए। विशेष जांच दल ने फरवरी में जांच शुरू की थी। इसका मकसद यून के 2024 के असफल मार्शल लॉ प्रयास, उनकी पत्नी किम कियोंग-ही से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों और 2023 में एक मरीन सैनिक की मौत समेत उन मामलों की दोबारा जांच करना था, जिनकी पिछली तीन विशेष जांच टीमों में पूरी तरह पड़ताल नहीं हो पाई थी। क्वोन की टीम ने यून पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाया। जांच के मुताबिक, उन्होंने अधिकारियों को अमेरिका और अन्य प्रमुख साझेदार देशों के सामने अपने असफल मार्शल लॉ कदम को सही ठहराने के लिए निर्देश दिए थे। पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिन वॉन-सिक और पूर्व प्रधान उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार किम ताए-ह्यो को भी इस मामले में आरोपी बनाया गया है। विशेष जांच दल ने यून की पत्नी किम कियोंग-ही के खिलाफ भी आरोप तय किए। उन पर 2022 में राष्ट्रपति भवन के स्थानांतरण से जुड़ी परियोजना में कथित रूप से अनुचित हस्तक्षेप करने का आरोप है। जांचकर्ताओं के अनुसार, उन्होंने निर्माण कार्य का ठेका ऐसी कंपनी को दिलाने के लिए हस्तक्षेप किया, जिसे वे अयोग्य मानते थे। जांच का कार्यकाल समाप्त होने के बाद विशेष जांच दल ने 150 लोगों से जुड़े 46 मामले पुलिस को आगे की जांच के लिए सौंप दिए। इसका मतलब है कि सभी मामलों में अंतिम कार्रवाई विशेष जांच दल के स्तर पर नहीं हुई और कुछ मामलों की जांच अब नियमित पुलिस एजेंसियां आगे बढ़ाएंगी। यह जांच फरवरी में शुरू हुई थी और बाद में इसकी अवधि बढ़ाकर 23 अगस्त तक की गई थी। राष्ट्रीय सभा ने जुलाई में जांच की अवधि 30 दिन बढ़ाने के साथ टीम में तैनात सरकारी अधिकारियों की अधिकतम संख्या 130 से बढ़ाकर 150 करने को मंजूरी दी थी। यून के खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई दक्षिण कोरिया की राजनीति में बेहद संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है। दिसंबर 2024 में उनके मार्शल लॉ लागू करने के असफल प्रयास के बाद देश में बड़ा राजनीतिक संकट पैदा हुआ था और अंततः उन्हें राष्ट्रपति पद से हटा दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा सांसद कृपानाथ के निर्वाचन के खिलाफ कांग्रेस नेता की चुनाव याचिका को किया बहाल

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को भाजपा सांसद कृपानाथ मल्लाह के निर्वाचन के खिलाफ कांग्रेस नेता हाफिज राशिद अहमद चौधरी की चुनाव याचिका को बहाल कर दिया। गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कृपानाथ मल्लाह के निर्वाचन के खिलाफ चुनाव याचिका रद्द कर दी थी। इसके खिलाफ अपील पर सोमवार को जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने याचिका बहाल की। जस्टिस चंद्रन ने फैसला सुनाते हुए कहा, “संविधान पीठ के पिछले फैसले के आधार पर हमने अपील मंजूर कर ली है।” चूंकि चुनावी याचिका को फिर से बहाल कर दिया गया है, इसलिए गुवाहाटी हाई कोर्ट इस पर नए सिरे से सुनवाई करेगा। कांग्रेस नेता हाफिज राशिद अहमद चौधरी ने चुनाव जीतने वाले उम्मीदवार के खिलाफ भ्रष्ट आचरण का आरोप लगाते हुए चुनाव याचिका दायर की थी। विजयी उम्मीदवार ने 18,360 मतों के अंतर से चुनाव जीता था। इससे पहले, गुवाहाटी हाईकोर्ट ने अप्रैल 2025 में याचिका को प्रक्रिया संबंधी खामियों के आधार पर खारिज किया था। हाईकोर्ट के समक्ष मल्लाह की ओर से याचिका की प्रस्तुति और दस्तावेजों के प्रमाणीकरण से जुड़े सवाल उठाए गए थे। मूल चुनाव याचिका में कांग्रेस नेता ने 47 मतदान केंद्रों पर बूथ कैप्चरिंग सहित मतदान प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप लगाए थे। उन्होंने मतदाता मतदान और गिनती के आंकड़ों में भी अंतर का दावा किया था। हाफिज राशिद अहमद चौधरी ने कांग्रेस के टिकट पर करीमगंज संसदीय क्षेत्र से कृपानाथ मल्लाह के खिलाफ 2024 का संसदीय चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में हाफिज राशिद को कुल 5,26,733 वोट मिले थे, जबकि भाजपा के उम्मीदवार के तौर पर कृपानाथ मल्लाह को 5,45,093 वोट मिले थे। दोनों के बीच हार-जीत का यह अंतर 18,360 वोटों का था। इस चुनाव में तीसरे स्थान पर ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के प्रत्याशी सहाबुल इस्लाम चौधरी थे, जिन्हें कुल 29,205 वोट हासिल हुए।
राहुल गांधी पर योगी का तीखा हमला, बोले-भारत की परंपरा और विरासत को कोसना जन्मसिद्ध अधिकार समझते हैं

रायबरेली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रायबरेली के सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के मनुस्मृति संबंधी बयान को लेकर उन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के रूप में देश को उनसे बहुत अपेक्षा नहीं है, लेकिन भारत की संसद में नेता प्रतिपक्ष के पद पर होने के नाते उनकी लोकतंत्र और संविधान के प्रति जवाबदेही है। इसके बावजूद वह भारत की परंपरा और विरासत को कोसना अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझते हैं। रायबरेली में वीर सेनानायक राणा बेनी माधव बख्श सिंह की जयंती पर आयोजित भाव समर्पण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने पिछले दिनों महाराष्ट्र में राहुल गांधी का एक बयान पढ़ा, जिसमें उन्होंने कहा था कि महिलाएं मनुस्मृति के बंधन को तोड़कर बाहर आएं। योगी ने कहा, “राहुल जी, राहुल गांधी के रूप में देश आपसे बहुत अपेक्षा नहीं करता लेकिन भारत की संसद में नेता प्रतिपक्ष के रूप में आपको देश के लोकतंत्र के प्रति जवाबदेह बनाता है।” उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने संविधान की शपथ ली है, लेकिन इसके बावजूद वह भारत की परंपरा और विरासत को कोसना अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझते हैं। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी उत्तर प्रदेश से बाहर जाते हैं तो प्रदेश को लांछित और अपमानित करते हैं और भारत से बाहर जाते हैं तो देश का अपमान करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की सेना जब सीमाओं पर दुश्मनों से लड़ती है तो राहुल गांधी सेना के जवानों से प्रमाण मांगते हैं। आतंकवाद के खिलाफ देश की लड़ाई में भी वह देशद्रोही तत्वों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रोत्साहित करते हैं। योगी ने कहा कि अयोध्या में प्रभु श्रीराम के अस्तित्व पर भी कांग्रेस की ओर से प्रश्न खड़े किए गए। उन्होंने राहुल गांधी की लोकतंत्र के प्रति निष्ठा पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश 1975 में आपातकाल की काली छाया देख चुका है। मुख्यमंत्री ने मनु और भारतीय परंपरा के संदर्भ में कहा कि यदि राहुल गांधी को मनु के बारे में जानना है तो उन्हें अथर्ववेद, शतपथ ब्राह्मण और मत्स्य पुराण पढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा और मूल्यों को विस्मृत करने वाला समाज अपने भविष्य का निर्माण नहीं कर सकता। योगी ने कहा कि आज देश जिस आजादी का अनुभव कर रहा है, उसके पीछे अनगिनत लोगों का बलिदान है। इसी बलिदानी परंपरा में वीर सेनानायक राणा बेनी माधव बख्श सिंह का महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने कहा कि जो चिंगारी बैरकपुर में मंगल पांडेय ने जलाई, उसे मेरठ में धनसिंह गुर्जर ने आगे बढ़ाया और नाना साहब व तात्या टोपे ने कानपुर के बिठूर से उसे नई ज्वाला का रूप दिया। उन्होंने कहा कि झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने इस संघर्ष को आगे बढ़ाया और अवध में इस लड़ाई का नेतृत्व राणा बेनी माधव ने किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र ने जनता को इतनी ताकत दी है कि जो सरकार जनभावनाओं का अनादर करती है, जनता उसे सत्ता से अपदस्थ करने की शक्ति रखती है। उन्होंने कहा कि देश की स्वतंत्रता के लिए असंख्य लोगों ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया और आज की पीढ़ी का दायित्व है कि वह उनके संघर्ष, त्याग और मूल्यों को विस्मृत न होने दे।
सुदेश बेरी की नई फैमिली कॉमेडी ‘हे भगवान बचा ले’ जल्द होगी रिलीज, रिश्तों की अहमियत बताएगी फिल्म

मुंबई। हिंदी सिनेमा में परिवार और रिश्तों पर बनी फिल्मों का अपना अलग प्रभाव रहा है। इस कड़ी में अभिनेता सुदेश बेरी अब एक नई फैमिली कॉमेडी फिल्म ‘हे भगवान बचा ले’ के साथ बड़े पर्दे पर नजर आने वाले हैं। फिल्म में कॉमेडी के साथ भावनाओं और पारिवारिक रिश्तों को भी कहानी का अहम हिस्सा बनाया गया है। फिल्म की कहानी एक ऐसे परिवार पर आधारित है, जिसके सदस्य हमेशा किसी न किसी बात को लेकर आपस में उलझते रहते हैं, लेकिन एक अनोखी घटना के बाद उन्हें अपने रिश्तों की असली कीमत समझ आती है। ‘हे भगवान बचा ले’ में सुदेश बेरी के साथ अनिल धवन, सोनिका गिल, क्षितिज पंवार, शालिनी ठाकुर, जनार्दन झा, मीनाक्षी, कुंदन कुमार, प्रमोद सैनी और शिव कुमार शर्मा नजर आएंगे। फिल्म का मकसद सिर्फ दर्शकों को हंसाना नहीं, बल्कि हंसी और भावनाओं के जरिए यह बताना भी है कि जिंदगी में परिवार और अपने रिश्ते सबसे बड़ी दौलत होते हैं। फिल्म की कहानी एक ऐसे परिवार से शुरू होती है, जिसके सदस्य एक-दूसरे से प्यार तो करते हैं, लेकिन उनके बीच अक्सर झगड़े होते रहते हैं। छोटी-छोटी बातों पर होने वाली बहस और मतभेद ने घर के माहौल को ऐसा बना दिया है कि परिवार के लोग एक-दूसरे के साथ होते हुए भी खुश नहीं हैं। इसी बीच उनकी जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आता है, जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी। कहानी में परिवार का सामना भगवान से होता है और उन्हें अपनी एक इच्छा मांगने का मौका मिलता है। अब सवाल यह है कि जब किसी इंसान को भगवान से अपनी मनचाही चीज मांगने का मौका मिले तो वह क्या मांगेगा? फिल्म में इस सवाल का जवाब काफी दिलचस्प तरीके से दिया गया है। शुरुआत में ऐसा लग सकता है कि परिवार के लोग करोड़ों रुपए, कीमती हीरे या कोई लग्जरी चीज मांगेंगे। लेकिन कहानी यहां दर्शकों को चौंका देती है। परिवार के सदस्य दौलत और कीमती सामान की जगह अपनों को मांगते हैं। यही फिल्म का सबसे बड़ा संदेश है। फिल्म यह समझाने की कोशिश करती है कि जिंदगी में असली ‘हीरे’ हमारे परिवार के लोग हैं। इसी सोच को फिल्म की लाइन ‘हमारे असली हीरे हमारा परिवार हैं’ के जरिए सामने रखा गया है। कहानी यह बताती है कि कई बार इंसान अपने ही लोगों की कीमत तब समझता है, जब उन्हें खोने का डर सामने आता है। फिल्म का निर्देशन मनोज सिंह ने किया है। फिल्म का निर्माण रवि खन्ना ने किया है, जबकि रश्मिता दास को-प्रोड्यूसर और अख्तर खान एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर हैं। फिल्म की कहानी, स्क्रीनप्ले और डायलॉग तपन भट्ट ने लिखे हैं। सिनेमैटोग्राफी धर्मेंद्र बिस्वास ने संभाली है और एडिटिंग नितेश टैंक ने की है। एवरीबडी प्रोडक्शन के बैनर तले बनी फिल्म की शूटिंग मुंबई की अलग-अलग लोकेशंस पर हुई है। अब यह फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है। हालांकि मेकर्स ने अभी फिल्म की रिलीज डेट की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
अजय राय के मछली दावत पर सियासत जारी, एनडीए के नेता बोले-मानसिक दिवालियापन

नई दिल्ली। सावन के महीने में अयोध्या के तरुन इलाके के अर्पित मैरिज लॉन में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के स्वागत समारोह के दौरान मछली की दावत को लेकर विवाद खड़ा हो गया। कार्यक्रम में मछली पकाए जाने का एक वीडियो सामने आने के बाद भाजपा और एनडीए के नेताओं ने आलोचना करते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी। अजय राय के स्वागत समारोह के दौरान आयोजित मछली दावत पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने आईएएनएस से कहा, “वे खुद को हिंदू बताने की कोशिश कर रहे हैं, इसीलिए वे अयोध्या जाते हैं, लेकिन वे भूल जाते हैं कि यह सावन का महीना है। सावन के दौरान मांस और मछली से दूर रहना चाहिए। लहसुन और प्याज से भी दूर रहना चाहिए, लेकिन ये नए तरह के सनातनी हैं, जो दिखावे के लिए सनातन का काम करना चाहते हैं, दिखावे के लिए मंदिर जाते हैं, लेकिन सनातन परंपराओं का पालन नहीं करते हैं।” अजय राय पर पलटवार करते हुए भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, “पवित्र श्रावण मास में अयोध्या में मछली दावत देना मानसिक दिवालियापन को दर्शाता है। सनातन के प्रति असहिष्णुता, अराजकता और उदंडता के जरिए खुद को सेक्ल्युरिज्म का सियासी सूरमा साबित करने में लगे हुए हैं, इससे उनका सूपड़ा साफ हो जाएगा।” यूपी सरकार के मंत्री नरेंद्र कश्यप ने कहा, “अयोध्या धाम भगवान श्री राम की जन्मभूमि है और दुनिया भर के लोगों की आस्था इससे जुड़ी है। कांग्रेस नेताओं को खुद यह समझना चाहिए कि ऐसे धार्मिक शहर में अगर हो सके तो, किसी का स्वागत मांसाहारी भोजन से करने से बचना चाहिए। किसी का स्वागत करने के और भी कई तरीके हो सकते हैं।” डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा, “यह बहुत दुखद है। अयोध्या धाम हमारा पवित्र स्थल है, यह भगवान राम लला का निवास स्थान है और वहां इस तरह की दावत का आयोजन, वह भी सावन के महीने में यह कांग्रेस की संस्कृति को दर्शाता है।” अजय राय के मछली दावत पर मंत्री संजय निषाद ने कहा, “कांग्रेस से पूछा जाना चाहिए कि ऐसा क्यों? वे मंदिरों में भी जाएंगे और मछली भी खाएंगे। हमारा कहना है कि निषाद सर्वाहारी है। वे गरीब और विस्थापित हैं। मछली खाना उनकी परंपरा है, वे हमेशा मछली खाएंगे। असल मुद्दा यह है कि निषाद गरीब क्यों हैं और वे अशिक्षित क्यों हैं? कांग्रेस जाल फेंककर और मछली खिलाकर निषादों को फंसाना चाहती है।” छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम अरुण साव ने कहा, “कांग्रेस पार्टी ने बार-बार भगवान राम के प्रति अपनी भावनाएं जाहिर की हैं। अजय राय बार-बार इस तरह की राजनीति करते हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
रेलवे ने स्वच्छ पीने के पानी की सुविधाओं के लिए विशेष अभियान शुरू किया

नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने अपने नेटवर्क पर एक विशेष सफाई अभियान शुरू किया है। इसका उद्देश्य रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों के लिए सुरक्षित और साफ पीने का पानी लगातार उपलब्ध कराना है, जिसके लिए पीने के पानी की टंकियों और फिल्ट्रेशन सिस्टम की सफाई और उन्हें कीटाणु-मुक्त करने का काम किया जा रहा है। यह जानकारी एक आधिकारिक बयान में सोमवार को दी गई। यह पहल इंडियन रेलवे में पीने के पानी की क्वालिटी मैनेजमेंट को बेहतर बनाने के लिए एक बड़े एक्शन प्लान का हिस्सा है। इसमें सिर्फ आखिरी पॉइंट पर पानी की टेस्टिंग करने के बजाय, पूरे पीने के पानी के सिस्टम की बार-बार जांच और रखरखाव पर जोर दिया गया है। साथ ही, पानी के सोर्स और इस्तेमाल की जगह, दोनों ही जगहों पर पानी की क्वालिटी की टेस्टिंग करने पर भी ध्यान दिया जाएगा। इस अभियान के दौरान, जोनल रेलवे पानी के सोर्स, ट्रीटमेंट और फिल्टरेशन प्लांट, जमीन के नीचे और ऊपर बने टैंक, पीवीसी टैंक, वॉटर बूथ, नल और पानी निकालने वाली जगहों की पूरी जांच करेगी। पीने के पानी के सभी टैंक खाली किए जाएंगे, उनकी गाद निकाली जाएगी, उन्हें रगड़कर साफ किया जाएगा और कीटाणु-मुक्त किया जाएगा। बयान में कहा गया है कि टैंक के ढक्कन कसकर बंद हों और वेंट व ओवरफ्लो पॉइंट को पक्षियों, जानवरों और काई से बचाने के लिए जरूरी उपाय भी किए जाएंगे। इस अभियान में उन कमियों की भी पहचान की जाएगी जिन्हें ठीक करने की जरूरत है। जहां भी जरूरत होगी, वहां खराब टैंक, पाइपलाइन और फिल्टर की मरम्मत की जाएगी या उन्हें बदला जाएगा। साथ ही, यह भी पक्का किया जाएगा कि पीने लायक और पीने लायक न होने वाले पानी के सिस्टम के बीच कोई क्रॉस-कनेक्शन न हो। पीने के पानी के सिस्टम से जुड़ी सभी पाइपलाइनों में लीकेज की जांच की जाएगी और पानी की बर्बादी रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। उन जगहों पर खास ध्यान दिया जाएगा जहां पीने का पानी निकालने के लिए हैंड पंप और बोरवेल का इस्तेमाल हो रहा है। जोनल रेलवे यह पक्का करेगा कि ऐसे सिस्टम से मिलने वाला पानी दूषित न हो और पीने के लिए सुरक्षित हो। रेलवे बोर्ड ने जोनल रेलवे को वॉटर कूलर और पानी साफ करने वाले सिस्टम की अच्छी तरह से जांच करने का निर्देश दिया है। कूलर में लगे पानी के टैंकों की अच्छी तरह सफाई की जाएगी, कूलर, पाइपलाइन और नल में लीकेज को तुरंत ठीक किया जाएगा और वॉटर-कूलर से पानी लेने वाली जगहों के आस-पास पूरी तरह साफ-सफाई बनाए रखी जाएगी। वॉटर कूलर के लिए यूवी/आरओ प्यूरिफिकेशन सिस्टम ठीक से काम कर रहे हैं या नहीं, इसकी जांच की जाएगी और जहां जरूरत होगी, वहां इन्हें लगाया जाएगा। जहां भी जरूरी होगा, वहां तय समय पर मेंटेनेंस, सर्विसिंग, ओवरहॉलिंग और फिल्टर कैंडल व अन्य पुर्जों को समय पर बदलने का काम किया जाएगा। सिस्टम की हालत और जरूरत के आधार पर, नए यूवी/आरओ सिस्टम लगाने या पुराने सिस्टम को बदलने का काम भी तेजी से (मिशन मोड में) किया जाएगा। सफाई, प्यूरिफिकेशन और क्वालिटी की निगरानी के लिए तय नियम वॉटर वेंडिंग मशीनों पर भी लागू होंगे, ताकि यह पक्का किया जा सके कि इन मशीनों से मिलने वाला पीने का पानी सुरक्षा और साफ-सफाई के जरूरी मानकों को पूरा करता हो। अधिकारी चुनिंदा जगहों से पानी के सैंपल की फिजिकल, केमिकल और बैक्टीरियोलॉजिकल जांच करेंगे। इन जगहों में पानी के स्रोत, ट्रीटमेंट के बाद निकलने वाली जगह (आउटलेट), टैंक, कूलर, वेंडिंग मशीन और कुछ खास नल या बूथ शामिल होंगे, जहां भी ऐसा करना मुमकिन हो। रोजाना पानी में बचे क्लोरीन (रेसिडुअल-क्लोरीन) की निगरानी भी की जाएगी और जरूरत पड़ने पर तुरंत दोबारा क्लोरीन मिलाया जाएगा या कोई और जरूरी कदम उठाया जाएगा। रेलवे बोर्ड ने जोनल रेलवे को यह भी निर्देश दिया है कि वे नए ओवरहेड और अंडरग्राउंड टैंक बनाने और पुराने टैंक बदलने के लिए पहले से मंजूर हो चुके कामों की निगरानी करें और उन्हें तेजी से पूरा करें। इन मंजूर कामों का ब्यौरा तैयार किया जाएगा और जहां भी जरूरत होगी, नए कामों की मंजूरी की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जोनल रेलवे स्टेशन के हिसाब से उन कमियों का ब्यौरा और उन्हें ठीक करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देंगे। इस व्यवस्था से कमियों की व्यवस्थित निगरानी में मदद मिलेगी और यह पक्का हो सकेगा कि स्पेशल ड्राइव के दौरान पहचानी गई समस्याओं को तय समय के भीतर हल किया जाए। बयान में कहा गया है कि इस एक्शन प्लान में रेलवे कॉलोनियों और काम करने की जगहों पर पीने के पानी की सुविधाओं के लिए भी ऐसे ही उपाय करने की योजना है, ताकि यात्रियों के लिए बनी जगहों के अलावा सुरक्षित और साफ-सुथरे पीने के पानी पर भी ध्यान दिया जा सके।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने लॉन्च किया ‘बिहार विद्या साथी’, 75 हजार शिक्षक देंगे ऑनलाइन सहयोग

पटना। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को राज्य के 38 जिलों के 700 सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल विद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए 24 घंटे उपलब्ध रहने वाले ‘बिहार विद्या साथी’ ऐप की शुरुआत की। लोक सेवक आवास स्थित ‘संकल्प’ सभागार से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से शुरू किए गए इस डिजिटल प्लेटफॉर्म से करीब तीन लाख विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की दिशा में ‘बिहार विद्या साथी’ महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से विद्यार्थी जब चाहें और जहां से चाहें, पढ़ाई से जुड़ी अपनी समस्याओं का समाधान प्राप्त कर सकेंगे। कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए 24 घंटे लाइव शिक्षक उपलब्ध रहेंगे। उन्होंने बताया कि विद्यार्थी अपनी आवश्यकता और पसंद के अनुसार शिक्षक का चयन कर वन-टू-वन संवाद के माध्यम से पढ़ाई कर सकेंगे। इसके लिए करीब 75 हजार शिक्षक विद्यार्थियों को व्यक्तिगत शैक्षणिक सहयोग उपलब्ध कराएंगे। पढ़ाई के दौरान पाठ से संबंधित किसी समस्या का त्वरित और नि:शुल्क समाधान भी इस मंच के माध्यम से मिल सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कक्षा 9वीं और 10वीं के विद्यार्थियों को सभी विषयों के लिए लाइव ट्यूटर सपोर्ट मिलेगा, जबकि कक्षा 11वीं और 12वीं के विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों के लिए बिहार बोर्ड के साथ जेईई और नीट की तैयारी के लिए डिजिटल अध्ययन सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि आधुनिक एआई आधारित टूल्स के माध्यम से विद्यार्थियों की अवधारणात्मक समझ को मजबूत किया जाएगा। विद्यार्थियों को असीमित अध्ययन और अभ्यास की सुविधा भी मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि 700 विद्यालयों से शुरू की जा रही यह व्यवस्था आगे राज्य के अन्य विद्यालयों तक भी विस्तारित की जाएगी। सम्राट चौधरी ने विद्यार्थियों से अपील की कि वे इस सुविधा का भरपूर लाभ उठाएं और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान कर ज्ञान एवं कौशल को मजबूत करें। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि विद्यार्थी जहां भी हों और जब भी पढ़ें, उनके सवालों का जवाब और शिक्षक का सहयोग हमेशा उपलब्ध रहे। कार्यक्रम के दौरान ‘बिहार विद्या साथी’ ऐप पर आधारित एक लघु फिल्म दिखाई गई। राजकीय कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय, शास्त्रीनगर की छात्राओं जाह्नवी और जिया ने ऐप के उपयोग का प्रदर्शन किया तथा इससे मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी दी। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, उप मुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, शिक्षा विभाग के सचिव राजीव रौशन और बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष डॉ. त्यागराजन एस.एम. समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी जिलों के जिलाधिकारी और विद्यार्थी भी जुड़े।
रीढ़ को बनाना है लचीला और मन को शांत, ‘हाफ कैमल पोज’ है रामबाण उपाय

नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में घंटों एक ही जगह बैठकर काम करना हमारी आदत का हिस्सा बन गया है। इसका असर हमारी रीढ़ की हड्डी, कंधों और गर्दन पर पड़ता है। ऐसे में अर्द्धउष्ट्रासन एक ऐसा उपाय है, जो शरीर को लचीला बनाने के साथ-साथ मन को भी शांत रखता है। ‘अर्द्धउष्ट्रासन’ के नाम से ही ज्ञात होता है कि यह उष्ट्रासन, यानी ऊंट के समान दिखने वाले आसन का आधा रूप है। इसे ‘हाफ कैमल पोज’ के नाम से भी जाना जाता है, जो पूर्ण उष्ट्रासन का एक कम तीव्र रूप है। यह आसन रीढ़ को लचीला बनाने, तनाव को कम करने और शरीर को ऊर्जावान रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आयुष मंत्रालय ने इस आसन के प्रभावशाली फायदों पर रोशनी डाली है। उनके अनुसार, यह पीठ और गर्दन की ताकत को बढ़ाता है। ज्यादातर लोग लंबे समय तक बैठने या मोबाइल देखने की वजह से गर्दन और पीठ दर्द से परेशान रहते हैं। यह आसन उनके लिए राहत देने वाला योगासन है। साथ ही, यह आसन ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है, जिससे शरीर के सभी अंगों को पर्याप्त खून और ऑक्सीजन मिलती है, जिससे शरीर तरोताजा और ऊर्जावान महसूस करता है। इसके अलावा, अर्ध उष्ट्रासन कब्ज और कमर दर्द से राहत देने में भी मददगार है। जब हम इस आसन को नियमित करते हैं, तो पेट की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं और पाचन तंत्र मजबूत होता है। इससे कब्ज जैसी समस्याएं दूर होती हैं और पेट हल्का महसूस होता है। इस योगासन से मानसिक तनाव भी कम होता है। जब शरीर ठीक रहता है तो हमारा मन भी खुश और शांत रहता है। आयुष मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अगर आपको कमर या घुटनों में कोई तकलीफ है तो बिना डॉक्टर से सलाह लिए इस आसन को न करें। अर्द्धउष्ट्रासन एक ऐसा योगासन है, जो सरल होने के साथ-साथ अनेक लाभ प्रदान करता है। इसे योग प्रशिक्षक की देखरेख में शुरू करने से सही तकनीक और सुरक्षा सुनिश्चित होती है। इस आसन को अपनी दिनचर्या में शामिल कर स्वस्थ, लचीला और ऊर्जावान जीवन जिया जा सकता है।
नोएडा में सावन के आखिरी सोमवार पर मंदिरों में उमड़ा आस्था का सैलाब

नोएडा। सावन के आखिरी सोमवार के अवसर पर सोमवार को नोएडा और आसपास के क्षेत्रों के शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह तड़के से ही श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए मंदिरों में पहुंचने लगे। कई प्रमुख मंदिरों के बाहर सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारों से मंदिर परिसर और आसपास का वातावरण भक्तिमय नजर आया। सावन के अंतिम सोमवार को देखते हुए मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और भगवान शिव के जलाभिषेक की व्यवस्था की गई। श्रद्धालुओं ने शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर भगवान शिव की आराधना की। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। महिलाओं और युवाओं के साथ बड़ी संख्या में बुजुर्ग श्रद्धालु भी पूजा-अर्चना के लिए मंदिरों में पहुंचे। भक्तों की भीड़ को देखते हुए मंदिर समितियों की ओर से व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए। श्रद्धालुओं के लिए कतारबद्ध तरीके से दर्शन कराने, पेयजल उपलब्ध कराने और मंदिर परिसर में भीड़ को नियंत्रित करने की व्यवस्था की गई। कई स्थानों पर स्वयंसेवकों को भी तैनात किया गया, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो। सुरक्षा को लेकर भी स्थानीय स्तर पर विशेष सतर्कता बरती गई। सावन के आखिरी सोमवार को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। सुबह के समय मंदिरों में भीड़ सबसे अधिक रही। कई भक्तों ने व्रत रखा और पूरे दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने का संकल्प लिया। मंदिरों में विशेष शृंगार और धार्मिक अनुष्ठानों का भी आयोजन किया गया। कहीं भजन-कीर्तन तो कहीं शिव आराधना के विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। धार्मिक मान्यता के अनुसार सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है और इस दौरान सोमवार का विशेष महत्व होता है। इसी वजह से सावन के प्रत्येक सोमवार को शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। सावन के अंतिम सोमवार को भक्तों में विशेष आस्था देखने को मिली। अब सावन का महीना 28 अगस्त को रक्षाबंधन पर्व के साथ समाप्त होगा। सावन के समापन से पहले आखिरी सोमवार को लेकर नोएडा में सुबह से ही धार्मिक उत्साह का माहौल बना रहा। मंदिरों में दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं ने पूरे श्रद्धाभाव के साथ भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया और सावन के अंतिम सोमवार को धार्मिक आस्था के साथ मनाया।
उत्तर कोरिया ने जापानी नेताओं के यासुकुनी दौरे पर कहा, ‘ये द्वीपीय देश में तबाही का तूफान लाएगा’

सोल। उत्तर कोरिया ने जापानी नेताओं और सांसदों के विवादित यासुकुनी युद्ध स्मारक दौरे और वहां धार्मिक चढ़ावे भेजने की कड़ी निंदा करते हुए इसे “नियो-मिलिटेरिज्म फ्रेंजी” (नए सैन्यवाद का उन्माद) करार दिया है। प्योंगयांग के मुताबिक रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी का दौरा द्वीपीय देश में तबाही का तूफान लेकर आएगा। योनहाप न्यूज एजेंसी ने बताया कि उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए में प्रकाशित एक टिप्पणी में जापानी राजनेताओं पर सैन्य महत्वाकांक्षाओं को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया। यह प्रतिक्रिया 15 अगस्त को जापान के द्वितीय विश्व युद्ध में आत्मसमर्पण की वर्षगांठ पर यासुकुनी श्राइन में जापानी नेताओं और सांसदों की गतिविधियों के बाद आई है। इसमें कहा गया है कि जापानी प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची की “अचानक की गई उपासना ” से देश भर में “फिर से हमले का माहौल बनाने की उनकी योजना” और “विदेशों में विस्तार की अपनी पुरानी इच्छा को पूरा करने” की उनकी कोशिशें जाहिर हुईं। केसीएनए ने कहा, “अपनी हार के मौके पर जापान की तरफ से भड़काया गया नया सैन्यवादी उन्माद इस द्वीपीय देश में तबाही का तूफान लाएगा।” यासुकुनी श्राइन जापान के युद्ध में मारे गए करीब 24.6 लाख लोगों को सम्मान देता है। इनमें द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान युद्ध अपराधों के लिए दोषी ठहराए गए 14 वर्ग-ए युद्ध अपराधी भी शामिल हैं। इसी वजह से दक्षिण कोरिया और चीन समेत जापान के पड़ोसी देश वहां जापानी नेताओं के दौरे को जापान के सैन्य अतीत को महिमामंडित करने की कोशिश के तौर पर देखते हैं। 15 अगस्त को जापानी प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने यासुकुनी श्राइन के लिए कुछ भेंट भेजी, लेकिन स्वयं वहां नहीं गईं। वहीं जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने श्राइन का दौरा किया। दक्षिण कोरिया ने भी इन दौरों पर कड़ी आपत्ति जताई थी। सोल ने जापान से अपने युद्धकालीन इतिहास का सामना करने और अतीत के लिए वास्तविक पश्चाताप दिखाने की अपील की थी। जापान अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने और राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्योंगयांग पहले भी जापान के सैन्य विस्तार और सुरक्षा नीतियों को ‘नव-सैन्यवाद’ बताते हुए उसकी आलोचना करता रहा है।