गाजियाबाद उप निर्वाचन अधिकारी ने ईआरओ और एईआरओ के साथ की बैठक

गाजियाबाद। गाजियाबाद जनपद से संबंधित 53-लोनी,54-मुरादनगर, 55-साहिबाबाद, 56-गाजियाबाद, 57-मोदीनगर विधानसभा निर्वाचक नामावलियों में विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण-2026 के बाद मात्र जेण्डर रेशियों 791 होने के कारण तथा जनपद के जेण्डर रेशियों 878 तक या उससे अधिक बढ़ाये जाने के संबंध में उप जिला निर्वाचन अधिकारी अंजनी कुमार सिंह की अध्यक्षता में संबंधित विधानसभा क्षेत्रो के ईआरओ और एईआरओ के साथ बैठक की गयी। उप जिला निर्वाचन अधिकारी उक्त बैठक में जेण्डर रेशियो कमी वाले बूथों का चिन्हित कर तत्काल महिला मतदाताओं के फॉर्म-6 भरवाये जाने के निर्देश दिये गये। इसके अतिरिक्त सभी ईआरओ को ईपी रेश्यो एज कोहर्ट के साथ वर्तमान में पेंडिंग फॉर्म को निस्तारित करने के भी निर्देश दिए गए। बैठक की उपस्थित सभी एईआरओ को भी निर्देशित किया गया कि अपने बूथ से संबंधित सुपरवाइजर बीएलओ के साथ बैठ कर दिए गए निर्देशों को अनुपालन कारए एमएलसी चुनाव में स्नातक एवं शिक्षक खंड के जो भी फार्म प्राप्त हो रहे हैं उसको समय से पोर्टल पर अपलोड कराने हेतु भी निर्देशित किया गया।
स्किल है नई करेंसी और इनोवेशन है नई इकोनामी : सीएम मोहन यादव

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि वर्तमान दौर में स्किल नई करेंसी है और इनोवेशन नई इकोनामी । मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय कॉन्क्लेव “कंट्रीब्यूशन ऑफ सेंट्रली फंडेड इंस्टीट्यूशंस फॉर समृद्ध मध्यप्रदेश 2047” का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर नारियल एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर मुख्यमंत्री का सम्मान किया गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि आज के समय में जब हमारे लिए स्किल नई करेंसी और इनोवेशन नई इकोनॉमी है, ऐसे समय में हमारे संस्थानों को कौशल, शोध, नवाचार एवं उद्यमिता का केंद्र बनाने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री यादव ने नदी जोड़ो योजना की चर्चा करते हुए कहा कि केन-बेतवा लिंक परियोजना मध्यप्रदेश की पहली ऐतिहासिक नदी जोड़ो परियोजना है। इसके माध्यम से नदियों को जोड़कर जल का बेहतर प्रबंधन होगा, सिंचाई का क्षेत्र बढ़ेगा और किसानों को पर्याप्त जल उपलब्ध होगा। साथ ही, बाढ़ जैसी आपदाओं के प्रभाव को कम करने में भी यह परियोजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसी क्रम में पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना के माध्यम से मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच लंबे समय से चले आ रहे जल-विवाद का समाधान हुआ है। इससे राजस्थान के 15 और मध्यप्रदेश के 15 जिलों को पर्याप्त जल की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। आज का समय स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का है। जब राज्य आगे बढ़ेगा, तब देश भी आगे बढ़ेगा। अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान द्वारा वन इंस्टिट्यूट – वन प्रॉमिस थीम पर आयोजित इस कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री यादव ने कहा भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन दर्शन में राष्ट्रसेवा और अंत्योदय था, उनके कार्य और विचारों को अटल बिहारी वाजपेयी संस्थान आत्मसात करते हुए आगे बढ़े, यही कामना है। इस मौके पर मध्यप्रदेश के समग्र एवं संतुलित विकास के लिए केंद्रीय संस्थानों के प्रमुखों द्वारा विशेषज्ञता, तकनीकी सहयोग एवं नवाचारों के प्रभावी उपयोग को लेकर प्रस्तुतियां दी गईं। मुख्यमंत्री यादव ने “समृद्ध मध्यप्रदेश-2047” स्मारिका का विमोचन किया।
भारत-पाकिस्तान सीमा के पास जोधपुर में गरज सकते हैं अमेरिकी एफ-35, तरंग शक्ति 2026 में हो सकती है एंट्री

नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना के साल के सबसे बड़े मल्टीनेशनल अभ्यास ‘तरंग शक्ति 2.0’ की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। तरंग शक्ति के दूसरे एडिशन में इस बार सबकी नजरें होंगी पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट पर। अमेरिका अपने एफ-35 के साथ इस अभ्यास में शिरकत करने की तैयारी कर रहा है। यह पहली बार होगा कि भारत में एफ-35 किसी सैन्य अभ्यास का हिस्सा बन सकता है। इससे पहले एयरो इंडिया में पहली बार एफ-35 शामिल हुआ था। रक्षा अधिकारी के मुताबिक, अभी तक तरंग शक्ति 2026 के लिए अमेरिका के शेड्यूल में एफ-35 लड़ाकू विमान मौजूद हैं। रक्षा अधिकारी के मुताबिक, इस अभ्यास में कुल आठ देश अपने एयरक्राफ्ट के साथ हिस्सा ले सकते हैं, जिसमें अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, यूएई, ग्रीस, फ्रांस, जर्मनी, श्रीलंका के साथ-साथ बांग्लादेश भी शामिल है। इसके अलावा 30 से ज्यादा देश ऑब्जर्वर के तौर पर शामिल होंगे। यह अभ्यास 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक जोधपुर एयरबेस पर आयोजित किया जाएगा। दो हफ्ते से ज्यादा समय तक चलने वाले इस अभ्यास में पाकिस्तान सीमा के करीब मित्र देशों के लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना के साथ साझा युद्धाभ्यास करेंगे। इससे पहले भारतीय वायुसेना ने साल 2024 में अपने सबसे बड़े मल्टीनेशनल वायु सैन्य अभ्यास ‘तरंग शक्ति’ की शुरुआत की थी। तरंग शक्ति का पहला संस्करण दो चरणों में आयोजित किया गया था। पहला चरण तमिलनाडु के सुलूर एयरबेस में और दूसरा चरण राजस्थान के जोधपुर एयरबेस में आयोजित हुआ था। सुलूर एयरबेस पर आयोजित पहले चरण में फ्रांस के राफेल, जर्मनी, स्पेन और ब्रिटेन के यूरोफाइटर टाइफून लड़ाकू विमान शामिल हुए थे। वहीं, भारतीय वायुसेना के लगभग सभी प्रमुख प्लेटफॉर्म- राफेल, सुखोई, मिराज-2000, जैगुआर, तेजस, मिग-29 और प्रचंड- ने अपनी ऑपरेशनल क्षमता का प्रदर्शन किया था। दूसरा चरण जोधपुर में आयोजित किया गया था। इस चरण में ऑस्ट्रेलिया का ईए-18जी ग्रोलर, ग्रीस का एफ-16, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) का एफ-16 तथा अमेरिका के ए-10 और एफ-16 सहित कुल 27 लड़ाकू विमान शामिल हुए थे। इसके अलावा दो एयर-टू-एयर रीफ्यूलर, दो एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम और तीन स्पेशल फोर्स एयरक्राफ्ट भी इस अभ्यास का हिस्सा बने थे। तरंग शक्ति 2026 के आयोजन से ठीक पहले जोधपुर में भारत और जापान की वायुसेना के बीच द्विपक्षीय वायु सैन्य अभ्यास ‘वीर गार्जियन’ का आयोजन किया जा रहा है। यह अभ्यास 9 सितंबर से 22 सितंबर तक जारी रहेगा। रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, भारतीय वायुसेना के सुखोई एसयू-30एमकेआई और जापान एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स के एफ-2 लड़ाकू विमान इसमें हिस्सा लेने जा रहे हैं। जापान एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स के फाइटर जेट पहली बार भारत आएंगे और इस अभ्यास में हिस्सा लेंगे। भारत और जापान के बीच सामरिक रिश्ते तेजी से नया आकार ले रहे हैं। 20 अगस्त को ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी के बीच दिल्ली में द्विपक्षीय बैठक हुई। इस बैठक के बाद एक साझा बयान जारी किया गया था। उस बयान में दोनों मंत्रियों ने जापान और भारत के बीच आयोजित द्विपक्षीय सैन्य अभ्यासों के लगातार विस्तार का स्वागत किया, जिनमें जापान-भारत आर्मी अभ्यास ‘धर्म गार्जियन’ और जापान-भारत नौसैन्य अभ्यास “जेएआईएमईएक्स” शामिल हैं। उन्होंने खास तौर पर इस साल आयोजित होने वाले जापान-भारत एयर एक्सरसाइज “वीर गार्जियन 26” की तैयारियों में हो रही प्रगति का स्वागत किया। भारत और जापान के बीच ‘वीर गार्जियन’ अभ्यास का पहला एडिशन साल 2023 में जापान के हयाकुरी एयरबेस पर आयोजित किया गया था। उस दौरान भारतीय वायुसेना की ओर से सुखोई एसयू-30एमकेआई, सी-17 और आईएल-78 मिड-एयर रीफ्यूलर विमान शामिल हुए थे, जबकि जापान की ओर से चार एफ-2 और चार एफ-15 लड़ाकू विमानों ने भाग लिया था।
एम्स-गुवाहाटी में 63 फैकल्टी पदों पर भर्ती जारी, उम्मीदवारों के पास 15 सितंबर तक आवेदन का मौका

दिसपुर। मेडिकल क्षेत्र से जुड़े जो लोग अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में नौकरी करने की इच्छा रखते हैं, उनके लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। दरअसल, एम्स-गुवाहाटी ने अपने विभिन्न विभागों में फैकल्टी पदों (ग्रुप-ए) पर सीधी भर्ती के लिए एक आधिकारिक अधिसूचना जारी करके उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। एम्स-गुवाहाटी की ओर से फैकल्टी पोस्ट के लिए जारी 63 रिक्तियों में प्रोफेसर के 17, एडिशनल प्रोफेसर के 16, एसोसिएट प्रोफेसर के 13 और असिस्टेंट प्रोफेसर के 17 पद शामिल हैं। एम्स-गुवाहाटी ने अपने जिन विभागों में फैकल्टी के 63 पदों पर भर्ती निकाली है, उनमें प्रोफेसर के 17 पदों में एनेस्थीसिया में 1, कार्डियोलॉजी में 1, फोरेंसिक मेडिसिन और टॉक्सिकोलॉजी में 1, जनरल मेडिसिन में 1, जनरल सर्जरी में 2, माइक्रोबायोलॉजी में 1, न्यूक्लियर मेडिसिन में 1, ऑब्स्टेट्रिक्स और गायनेकोलॉजी में 1, ऑप्थल्मोलॉजी में 1, ऑर्थोपेडिक्स में 1, पीडियाट्रिक्स में 1, फार्माकोलॉजी में 1, पल्मोनरी मेडिसिन में 1, रेडियोथेरेपी में 1, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन और ब्लड बैंक में 1 और ट्रॉमा और इमरजेंसी मेडिसिन में 1 पद शामिल हैं। एडिशनल प्रोफेसर के 16 पदों में बर्न और प्लास्टिक सर्जरी में 1, एंडोक्रिनोलॉजी में 1, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी में 1, जनरल सर्जरी में 1, हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन में 1, माइक्रोबायोलॉजी में 1, नियोनेटोलॉजी में 1, नेफ्रोलॉजी में 1, न्यूरोसर्जरी में 1, न्यूक्लियर मेडिसिन में 1, ऑब्स्टेट्रिक्स और गायनेकोलॉजी में 1, ऑर्थोपेडिक्स में 1, पीडियाट्रिक सर्जरी में 1, पैथोलॉजी में 1, पल्मोनरी मेडिसिन में 1 और यूरोलॉजी में 1 पद शामिल हैं। एसोसिएट प्रोफेसर के 13 पदों में कार्डियोलॉजी में 1, एंडोक्रिनोलॉजी में 1, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी में 1, जनरल मेडिसिन में 2, जनरल सर्जरी में 1, हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन में 1, नेफ्रोलॉजी में 1, न्यूक्लियर मेडिसिन में 1, ऑप्थल्मोलॉजी में 1, फिजिकल मेडिसिन और रिहैबिलिटेशन में 1, पल्मोनरी मेडिसिन में 1 और सर्जिकल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी में 1 पद शामिल हैं। असिस्टेंट प्रोफेसर के 17 पदों में एनेस्थीसिया में 1, कार्डियोथोरेसिक और वैस्कुलर सर्जरी में 1, एंडोक्रिनोलॉजी में 1, फोरेंसिक मेडिसिन और टॉक्सिकोलॉजी में 1, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी में 1, जनरल मेडिसिन में 1, जनरल सर्जरी में 1, मेडिकल ऑन्कोलॉजी/हेमेटोलॉजी में 1, नेफ्रोलॉजी में 1, न्यूरोसर्जरी में 1, न्यूक्लियर मेडिसिन में 1, ऑर्थोपेडिक्स में 1, पल्मोनरी मेडिसिन में 1, रेडियोलॉजी में 2, सर्जिकल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी में 1 और ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन और ब्लड बैंक में 1 पद शामिल हैं। इन सभी पोस्ट के लिए ऑनलाइन माध्यम से आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है और अप्लाई करने की अंतिम तिथि 15 सितंबर तक की गई है। ऐसे में जो पात्र और इच्छुक उम्मीदवार इन पदों पर नियुक्ति के लिए एप्लीकेशन फॉर्म भरना चाहते हैं, वे एम्स-गुवाहाटी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर तय अंतिम तिथि तक या उससे पहले अपनी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। सफलतापूर्वक ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया पूरी करने के बाद कैंडिडेट्स को अपने रजिस्ट्रेशन फॉर्म की हार्ड कॉपी सभी संबंधित डॉक्यूमेंट्स के साथ ‘प्रशासनिक अधिकारी, ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, सिलभराल, चांगसारी, गुवाहाटी, असम – 781101’ पते पर 30 सितंबर तक या उससे पहले डाक के माध्यम से पहुंचाना होगा। आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय से एमडी/एमएस या सर्जिकल सुपर स्पेशलिटीज के लिए एमसीएच और मेडिकल सुपर स्पेशलिटीज के लिए डीएम या इसके बराबर मान्यता प्राप्त योग्यता होनी चाहिए। वहीं, नॉन-मेडिकल उम्मीदवारों के लिए पोस्ट-ग्रेजुएट योग्यता और संबंधित विषय में डॉक्टरेट की डिग्री होनी चाहिए। इसके अलावा, कैंडिडेट्स के पास पोस्ट के अनुसार प्रासंगिक क्षेत्र में निर्धारित वर्षों का अनुभव होना भी जरूरी है। आवेदकों की अधिकतम आयु प्रोफेसर/एडिशनल प्रोफेसर पोस्ट के लिए 58 वर्ष और एसोसिएट प्रोफेसर/असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए 50 वर्ष तय की गई है, जिसकी गणना आवेदन की अंतिम तिथि के आधार पर की जाएगी। वहीं, आरक्षित श्रेणी से आने वाले कैंडिडेट्स को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी। योग्य अभ्यर्थियों का चयन आवेदनों की स्क्रीनिंग, शॉर्टलिस्टिंग, इंटरव्यू, आदि चरणों के आधार पर किया जाएगा, जिसके बाद चयनित कैंडिडेट्स की सैलरी प्रोफेसर के लिए 1,68,900 रुपए, एडिशनल प्रोफेसर के लिए 1,48,200 रुपए, एसोसिएट प्रोफेसर के 1,38,300 रुपए और असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए 1,01,500 रुपए प्रति माह होगी। इसके अलावा कैंडिडेट्स को अन्य लाभ और भत्ते भी दिए जाएंगे। आवेदन पत्र भरते समय उम्मीदवारों को अपने वर्ग अनुसार निर्धारित आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा, जो अनारक्षित/ओबीसी/ईडब्ल्यूएस के लिए 1,500 रुपए तय किया गया है। वहीं, एससी/एसटी/पीडब्ल्यूबीडी और महिला उम्मीदवारों को रजिस्ट्रेशन फीस में छूट दी गई है।
कर्नाटक में मीडिया कवरेज पर भेदभाव का आरोप, आर. अशोक ने स्पीकर को लिखा पत्र

बेंगलुरु। कर्नाटक विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान मीडिया कवरेज में भेदभाव का आरोप लगा है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने सोमवार को स्पीकर जीएस पाटिल को पत्र लिखकर इस मामले में दखल देने की मांग की है। आर. अशोक ने मीडिया को जारी अपने पत्र में कहा कि 13 अगस्त से शुरू हुए मानसून सत्र में एक ऐसी प्रथा देखी जा रही है, जहां विधानसभा की कार्यवाही के दौरान विपक्ष के नेता और विधायकों के बयान, फोटो और वीडियो कथित तौर पर जारी नहीं किए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कथित रोक के कारण विपक्षी सदस्यों के फोटो और वीडियो प्रिंट मीडिया में नहीं छप रहे हैं और टीवी चैनलों पर प्रसारित नहीं हो रहे हैं। इसके उलट, अशोक ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री, मंत्रियों और सत्ताधारी पार्टी के विधायकों के बयान, फोटो और वीडियो लगातार जारी किए जा रहे हैं, जिससे सत्तापक्ष को ज्यादा दिखावा मिल रहा है। अपने पत्र में उन्होंने लिखा, “विधानसभा की कार्यवाही की कवरेज में ऐसा भेदभाव पहले कभी नहीं हुआ।” उन्होंने स्पीकर से अनुरोध किया कि वे तुरंत सूचना विभाग के संबंधित अधिकारियों को विधानसभा से मीडिया सामग्री जारी करने में इस असमानता को ठीक करने का निर्देश दें। आर. अशोक ने चेतावनी दी कि अगर इस मुद्दे को ठीक नहीं किया गया तो विपक्ष संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाएगा। उन्होंने पत्र में कहा, “इसलिए मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि आप तुरंत सूचना विभाग के संबंधित अधिकारियों को इस भेदभाव को ठीक करने का निर्देश दें। अन्यथा संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव लाया जाएगा।” भाजपा नेता का यह आरोप ऐसे समय में आया है जब मानसून सत्र चल रहा है और विपक्ष कांग्रेस सरकार के खिलाफ कई मुद्दे उठा रहा है और उसके कई फैसलों पर सवाल खड़ा कर रहा है। आर. अशोक के पत्र में स्पीकर से यह सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप की मांग की गई है कि सदन के दोनों पक्षों के सदस्यों को मीडिया में बराबर जगह मिले। उन्होंने कहा कि विधानसभा से जुड़ी मीडिया सामग्री तक बराबर पहुंच निष्पक्ष जन प्रतिनिधित्व के लिए जरूरी है।
बीजिंग पहुंचे एनएसए अजीत डोभाल, भारत-चीन सीमा पर स्थिरता और द्विपक्षीय संबंधों पर होगी अहम चर्चा

नई दिल्ली। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल सोमवार को दो दिन की यात्रा पर बीजिंग पहुंचे। वे भारत-चीन सीमा विवाद स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव्स की बातचीत के 25वें दौर में हिस्सा लेने गए हैं। भारत-चीन सीमा मुद्दे पर भारत के स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव अजीत डोभाल चीन के विदेश मंत्री वांग यी के निमंत्रण पर बीजिंग पहुंचे। विदेश मंत्रालय (एमईए) के अनुसार, डोभाल और चीन के स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव वांग यी मंगलवार को भारत-चीन सीमा विवाद पर विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता के 25वें दौर में बातचीत करेंगे। अपनी यात्रा के दौरान अजीत डोभाल चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से भी मुलाकात करेंगे। इससे पहले, 6 अगस्त को भारत और चीन ने सीमा निर्धारण, सीमा प्रबंधन, विभिन्न समन्वय तंत्रों के निर्माण और सीमा पार सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की थी। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में बताया कि यह बातचीत नई दिल्ली में भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए बने कार्य तंत्र (डब्ल्यूएमसीसी) की 36वीं बैठक के दौरान हुई थी। विदेश मंत्रालय ने कहा, “दोनों पक्षों के बीच खुलकर चर्चा हुई और वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) की स्थिति की समीक्षा की गई। यह भी दोहराया गया कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना दोनों देशों के संबंधों के समग्र विकास के लिए बेहद जरूरी है।” बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव (पूर्वी एशिया) सुजीत घोष ने किया, जबकि चीनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व चीन के विदेश मंत्रालय के सीमा और समुद्री मामलों के विभाग की महानिदेशक होउ यानकी ने किया। बैठक के दौरान दोनों देशों के अधिकारियों ने इस बात पर सहमति जताई कि वे लंबित मुद्दों को सुलझाने और एलएसी पर किसी भी तरह की गलतफहमी या गलत आकलन से बचने के लिए मौजूदा कूटनीतिक और सैन्य संवाद के रास्तों का इस्तेमाल जारी रखेंगे। इनमें डब्ल्यूएमसीसी, स्थानीय कमांडर स्तर की बैठकों और पहले से तय अन्य तंत्र शामिल हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा, “24वें विशेष प्रतिनिधि वार्ता दौर के नतीजों के बाद, दोनों पक्षों ने सीमा निर्धारण, सीमा प्रबंधन, तंत्र निर्माण और सीमा पार सहयोग से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।” भारतीय पक्ष ने सीमा पार बहने वाली नदियों से जुड़े ‘एक्सपर्ट लेवल मैकेनिज्म’ की अगली बैठक जल्द बुलाने की जरूरत दोहराई। साथ ही, भारत ने ऊपरी क्षेत्रों में चल रही परियोजनाओं से जुड़ी तकनीकी जानकारी साझा करने के महत्व पर भी जोर दिया।
हनुमानगढ़ी में दर्शन के बाद मछली की दावत उड़ाते हैं और फिर राम-राम चिल्लाते हैं’, सीएम योगी का अजय राय पर तंज

रायबरेली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को रायबरेली में कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को निशाने पर लिया। उन्होंने अजय राय पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस के नेता हनुमानगढ़ी में दर्शन करने जाते हैं, बाहर निकलकर मछली की दावत उड़ाते हैं और फिर राम-राम चिल्लाते हैं। सीएम योगी ने कहा, “बेशर्मी की भी एक सीमा होती है, इनके सामने तो गिरगिट भी शरमा जाए।” रायबरेली में 879 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करने पहुंचे मुख्यमंत्री ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर परिवारवाद की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इन दलों की राजनीति केवल अपने परिवारों तक सीमित रही है और उन्होंने देश के क्रांतिकारियों तथा महान नायकों को वह सम्मान नहीं दिया, जिसके वे हकदार थे। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर अयोध्या में राम मंदिर का विरोध करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस की राजनीति में विरोधाभास साफ दिखाई देता है। एक तरफ कांग्रेस के नेता मंदिर में दर्शन करते हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके आचरण और बयानों में विरोधाभास नजर आता है। कांग्रेस को यह समझना चाहिए कि भारत की आस्था और परंपरा किसी राजनीतिक दल की जागीर नहीं है। देश की जनता अपने महापुरुषों, धार्मिक आस्थाओं और सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करना जानती है। सीएम योगी ने कहा कि जो समाज अपने पूर्वजों को भूल जाता है, उसका कोई भविष्य नहीं होता। भारत की परंपरा, संस्कृति और आदर्शों को भुलाकर देश के खिलाफ षड्यंत्र करने का कुछ लोगों ने ठेका ले रखा है। उन्होंने मंगल पांडेय, नाना साहब, तात्या टोपे और रानी लक्ष्मीबाई के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वतंत्रता संग्राम की उसी ज्वाला को रायबरेली में राना बेनी माधव बख्श सिंह ने आगे बढ़ाया था। यही कारण है कि आज भी लोग उन्हें सम्मान के साथ याद करते हैं। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति के रूप में राहुल गांधी से देश को कोई अपेक्षा नहीं है, लेकिन नेता प्रतिपक्ष के रूप में वह संसद और लोकतंत्र के प्रति जवाबदेह हैं। राहुल गांधी ने संविधान की शपथ ली है, लेकिन भारत की परंपरा और विरासत को कोसना अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी उत्तर प्रदेश के बाहर जाकर यूपी को बदनाम करते हैं और देश के बाहर जाकर भारत का अपमान करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राहुल गांधी देश विरोधी तत्वों को प्रोत्साहित करने का काम करते हैं। सीएम योगी ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इन दलों की सोच रही है कि सम्मान केवल उनके परिवारों को मिले। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इन दलों ने भारत के महान क्रांतिकारियों और राष्ट्रनायकों को सम्मान देने के लिए क्या किया? उन्होंने कहा कि देश का इतिहास किसी एक परिवार तक सीमित नहीं है। भारत की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक व्यवस्था के निर्माण में असंख्य लोगों का योगदान रहा है और नई पीढ़ी को उनके संघर्ष और बलिदान से परिचित कराना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने वर्ष 1975 के आपातकाल का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि देश ने आपातकाल की ‘काली छाया’ देखी है। ऐसे में लोकतंत्र और संविधान की बात करने वालों को अपने अतीत को भी याद रखना चाहिए। उन्होंने जंतर-मंतर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित अभद्र भाषा के इस्तेमाल का भी जिक्र किया। सीएम योगी ने कहा कि बाद में संबंधित युवती और उसके माता-पिता ने स्वीकार किया कि उनकी ओर से गलत बात कही गई थी। उन्होंने सवाल किया कि कुछ लोग देश को ‘अर्बन नक्सलियों’ के हाथों क्यों सौंपना चाहते हैं। जब भारतीय सेना सीमा पर दुश्मनों से मुकाबला करती है तो कुछ लोग उससे सवाल पूछते हैं। वहीं, अयोध्या में भगवान श्रीराम के अस्तित्व पर सवाल उठाने वालों की राजनीति भी देश देख चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा, आस्था और सांस्कृतिक विरासत के मुद्दों पर दोहरे मापदंड नहीं चल सकते। उन्होंने कहा कि रायबरेली की धरती स्वतंत्रता संग्राम के महानायक राना बेनी माधव बख्श सिंह की कर्मभूमि रही है और इस ऐतिहासिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना सभी की जिम्मेदारी है।
सिंटा विवाद पर पूनम ढिल्लो और पद्मिनी कोल्हापुरे बोलीं-‘तानाशाही होती तो 8 लोगों की सहमति क्यों जरूरी होती’

मुंबई। सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (सिंटा) के भीतर चल रहा विवाद अब और गहराता जा रहा है। संस्था की अध्यक्ष पूनम ढिल्लो और वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद्मिनी कोल्हापुरे ने पूर्व महासचिव उपासना सिंह की ओर से लगाए गए आरोपों पर खुलकर जवाब दिया है। उपासना ने दोनों वरिष्ठ अभिनेत्रियों पर संस्था को कथित तौर पर तानाशाही और गैर लोकतांत्रिक तरीके से चलाने का आरोप लगाया था। अब पूनम और पद्मिनी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन आरोपों को खारिज करते हुए अपना पक्ष रखा। जहां पूनम ने कहा कि आरोपों से सिंटा की छवि को नुकसान पहुंचा है, वहीं पद्मिनी ने सवाल किया कि अगर संस्था पर उनका और पूनम का पूरा नियंत्रण होता तो एग्जीक्यूटिव कमेटी में मौजूद इतने वरिष्ठ कलाकारों के बीच फैसले कैसे लिए जाते। सिंटा की प्रेस कॉन्फ्रेंस में पद्मिनी कोल्हापुरे ने सबसे पहले उस आरोप पर जवाब दिया, जिसमें उन्हें और पूनम ढिल्लो को संस्था में तानाशाही चलाने वाला बताया गया था। पद्मिनी ने कहा, ”सिंटा की एग्जीक्यूटिव कमेटी में फैसले किसी एक व्यक्ति की मर्जी से नहीं लिए जाते। किसी भी बैठक को शुरू करने के लिए पहले आठ सदस्यों का कोरम पूरा होना जरूरी है। इसके बाद ही बैठक शुरू होती है और अगर किसी मुद्दे पर फैसला लेना हो तो उसे बहुमत के आधार पर तय किया जाता है।” उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, ”मैं सिंटा में अकेले खड़ी होकर यह फैसला भी नहीं कर सकती कि हमें प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी है। इस तरह के फैसले भी कमेटी की बैठक में चर्चा के बाद लिए जाते हैं।” इसके बाद पद्मिनी ने उन आरोपों पर सवाल उठाया, जिनमें कहा गया था कि कमेटी के सदस्य पूनम या उनके दबाव में काम करते हैं। उन्होंने सिंटा से जुड़े वरिष्ठ कलाकारों का नाम लेते हुए कहा, ”क्या पिंटू जी, राकेश बेदी, यशपाल शर्मा जैसे अनुभवी कलाकार किसी के कहने पर आंख बंद करके चल सकते हैं? इतने वरिष्ठ कलाकारों वाली कमेटी में क्या दो लोग तानाशाही चला सकते हैं।” पद्मिनी ने सिंटा की मौजूदा कमेटी की वैधता को लेकर कहा, ”मैं एक बार फिर स्पष्ट करना चाहती हूं कि यह कमेटी पूरी तरह कानूनी है। कमेटी को भंग नहीं किया गया है। इसे खत्म नहीं किया गया है और हम संविधान के अनुसार काम कर रहे हैं। इस कमेटी से जुड़े सभी लोगों का उद्देश्य सिंटा के सदस्यों के हित में काम करना है। हम सभी यहां सिंटा के सदस्यों के लिए अच्छा काम करने आए हैं।” वहीं, सिंटा की अध्यक्ष पूनम ढिल्लो ने भी उपासना सिंह के आरोपों पर गहरी नाराजगी और दुख जताया। पूनम ने कहा, ”पिछली कमेटी और उसकी महासचिव की ओर से सिंटा के बारे में जिस तरह की बातें की गईं, उससे संस्था की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। संस्था के इतिहास में पहले कभी उसके बारे में इस तरह की गलत बातें नहीं कही गईं, इसलिए मैं इस बात से बहुत दुखी हूं।” उन्होंने कहा, ”हमें कुछ चीजें साफ करनी हैं क्योंकि जब तक सही पक्ष लोगों तक नहीं पहुंचता, तब तक लोग यही सोचेंगे कि जो बातें कही जा रही हैं, वही सच हैं।” दरअसल, यह विवाद इस महीने उस समय तेज हो गया जब सिंटा की 21 सदस्यीय एग्जीक्यूटिव कमेटी के 11 सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया। इनमें आठ निर्वाचित सदस्य थे। इस्तीफा देने वालों में हेमंत पांडे, मुकेश ऋषि, साहिला चड्ढा, हेतल परमार, पुनीत इस्सर, विंदू दारा सिंह, विकास वर्मा और दीपक पराशर शामिल थे। इस्तीफा देने वाले सदस्यों ने संस्था के कामकाज पर भरोसा कम होने की बात कही और नए चुनाव कराने की मांग उठाई। उस समय सिंटा की महासचिव रहीं उपासना सिंह ने इस्तीफों की पुष्टि करते हुए दावा किया था कि सदस्यों ने पूनम ढिल्लो और पद्मिनी कोल्हापुरे के खिलाफ शिकायतें की हैं। इन शिकायतों में पदों के कथित दुरुपयोग, फैसले लेने में निष्पक्षता की कमी और एग्जीक्यूटिव कमेटी से पर्याप्त सलाह न लेने जैसे आरोप शामिल थे। आधिकारिक बातचीत और वित्त से जुड़े मामलों को संभालने के तरीके पर भी सवाल उठाए गए थे। उपासना सिंह ने पूनम और पद्मिनी पर संस्था को कथित तौर पर गैर-लोकतांत्रिक तरीके से चलाने का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया कि जो सदस्य दोनों वरिष्ठ अभिनेत्रियों से सहमत नहीं होते या उनके सामने ‘यस मैडम’ नहीं कहते, उन्हें कारण बताओ नोटिस दिए जाते थे। उपासना और सिंटा के पूर्व कोषाध्यक्ष दीपक पराशर ने यह भी आरोप लगाया कि संस्था के नेतृत्व की ताकत धीरे-धीरे पूनम और पद्मिनी के आसपास केंद्रित हो गई थी।
तमिलनाडु: सरकार ने 13 लाख परिवारों के लिए सालाना तीन मुफ्त एलपीजी सिलेंडर देने की घोषणा की

चेन्नई। तमिलनाडु सरकार ने एक बड़े घरेलू सहायता कार्यक्रम की घोषणा की है, जिसके तहत राज्य के पात्र परिवारों को प्रति वर्ष तीन मुफ्त एलपीजी सिलेंडर प्रदान किए जाएंगे। “अन्नपूर्णी सुपर सिक्स” योजना के नाम से शुरू की गई इस पहल से लगभग 13 लाख परिवारों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इसे जनवरी में पोंगल त्योहार से लागू किया जाएगा। सरकार का अनुमान है कि इस कार्यक्रम के लिए प्रति वर्ष लगभग 4000 करोड़ रुपये के आवंटन की आवश्यकता होगी। इस योजना के तहत लाभार्थी मौजूदा वितरण प्रणाली के माध्यम से एलपीजी सिलेंडर खरीदेंगे। प्रतिवर्ष तीन सिलेंडरों की लागत सीधे उनके पंजीकृत बैंक खातों में जमा कर दी जाएगी। प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण तंत्र का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वित्तीय सहायता पात्र परिवारों तक बिना किसी देरी या मध्यस्थों की भागीदारी के पहुंचे। जिन परिवारों की वार्षिक आय 25 लाख रुपये तक है, वे इस योजना के लिए आवेदन करने के पात्र होंगे। यह योजना मुख्य रूप से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों, छोटे और सीमांत किसानों, दिव्यांगजनों के परिवारों और समाज के अन्य कमजोर वर्गों को कवर करेगी। सरकार ने तमिलनाडु विधानसभा में नियम 110 के तहत इस पहल की घोषणा की, जो मुख्यमंत्री को सार्वजनिक महत्व के मामलों पर बयान देने की अनुमति देता है। योजना के लागू होने से पहले आवेदन प्रक्रिया, लाभार्थियों के सत्यापन और धनराशि के वितरण के संबंध में विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए जाने की उम्मीद है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य घरेलू खाना पकाने के ईंधन के खर्चों के कारण होने वाले वित्तीय बोझ को कम करना है, विशेष रूप से कम आय वाले परिवारों के बीच। घरेलू खर्चों में वृद्धि के कारण कई परिवारों के लिए एलपीजी रिफिल कराना मुश्किल हो गया है, जिससे उन्हें कभी-कभी खरीदारी स्थगित करनी पड़ती है या खाना पकाने के लिए पारंपरिक ईंधनों पर निर्भर रहना पड़ता है। सरकार द्वारा प्रति वर्ष तीन सिलेंडरों का खर्च वहन करके एलपीजी के निरंतर उपयोग को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ परिवारों को प्रत्यक्ष वित्तीय राहत प्रदान करने की उम्मीद है। इस उपाय से महिलाओं को भी लाभ होने की संभावना है, जो अक्सर उन मामलों में सबसे अधिक प्रभावित होती हैं, जहां परिवार खाना पकाने के लिए लकड़ी और अन्य धुआं पैदा करने वाले ईंधन पर निर्भर रहते हैं। राज्य सरकार को पात्र लाभार्थियों की पहचान करने और उनके एलपीजी उपभोक्ता विवरण को बैंक खातों से जोड़ने के लिए बड़े पैमाने पर सत्यापन अभियान चलाना होगा। कार्यक्रम के सुचारू कार्यान्वयन के लिए राजस्व अधिकारियों, नागरिक आपूर्ति अधिकारियों, बैंकों और तेल विपणन कंपनियों के बीच समन्वय आवश्यक होगा। पंजीकरण, आवश्यक दस्तावेजों और सब्सिडी हस्तांतरण के कार्यक्रम के बारे में अधिक जानकारी पोंगल से पहले घोषित किए जाने की संभावना है।
भारत और मोरक्को द्विपक्षीय व्यापार व बाजार पहुंच बढ़ाने और निवेश के नए अवसर विकसित करने पर दे रहे जोर: जितिन प्रसाद

नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने सोमवार को कहा कि भारत और मोरक्को द्विपक्षीय व्यापार को नए क्षेत्रों तक विस्तारित करने, बाजार पहुंच बढ़ाने और निवेश व औद्योगिक सहयोग के नए अवसर विकसित करने की दिशा में मिलकर काम कर रहे हैं। राज्य मंत्री जितिन प्रसाद, जो 24 से 25 अगस्त तक मोरक्को की आधिकारिक यात्रा पर हैं, मोरक्को के उद्योग एवं व्यापार मंत्री के विदेश व्यापार मामलों के राज्य सचिव उमर हेजीरा के साथ भारत-मोरक्को संयुक्त आयोग (जॉइंट कमीशन) के 7वें सत्र की सह-अध्यक्षता करेंगे। इस बैठक में दोनों देशों के बीच वर्तमान आर्थिक और वाणिज्यिक सहयोग की समीक्षा की जाएगी तथा भविष्य में सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान की जाएगी। बैठक में व्यापार और बाजार पहुंच, उर्वरक उत्पादन एवं आपूर्ति, निवेश, औद्योगिक सहयोग, सीमा शुल्क, कृषि एवं खाद्य सुरक्षा, दवा और स्वास्थ्य सेवा, ऊर्जा एवं खनन, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल परिवर्तन, परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स, आयुष, पर्यटन, शिक्षा और कौशल विकास समेत कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर चर्चा होने की उम्मीद है। यात्रा के दौरान भारत और मोरक्को के बीच खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। यह समझौता मोरक्को के राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कार्यालय (ओएनएसएसए) और भारत के भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के बीच होगा। इस समझौते के तहत आयातित खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा, खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं, विश्लेषणात्मक विधियों तथा आयात प्रक्रियाओं, गुणवत्ता नियंत्रण, नमूना परीक्षण, पैकेजिंग और लेबलिंग से जुड़े विषयों पर सहयोग बढ़ाया जाएगा। साथ ही दोनों देशों के बीच तकनीकी जानकारी और विशेषज्ञता का आदान-प्रदान भी किया जाएगा। संयुक्त आयोग की बैठक में 2026-2030 के लिए भारत-मोरक्को सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम पर भी हस्ताक्षर होने की संभावना है। इस कार्यक्रम के तहत कलाकारों, सांस्कृतिक विशेषज्ञों और पेशेवरों के आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके अलावा, दोनों देशों के संग्रहालयों, पुस्तकालयों और अभिलेखागार संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने, विरासत संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक आयोजनों में सहभागिता को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। भारत और मोरक्को के बीच लंबे समय से मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं और व्यापारिक सहयोग की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं। वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय वस्तु व्यापार लगभग 4 अरब डॉलर रहा। भारत मोरक्को को मुख्य रूप से परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पाद, दवाइयां, वाहन, सिंथेटिक वस्त्र, खाद्य उत्पाद और मसालों का निर्यात करता है। वहीं मोरक्को भारत को मुख्य रूप से फॉस्फेट और उर्वरकों की आपूर्ति करता है, जो भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। मोरक्को यात्रा के दौरान जितिन प्रसाद कई वरिष्ठ मोरक्को नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। वह भारत-मोरक्को संयुक्त व्यापार मंच में भी भाग लेंगे और राजधानी रबात में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। इन बैठकों का उद्देश्य व्यापार, निवेश, संयुक्त उद्यमों और नई कारोबारी साझेदारियों के अवसर तलाशना है। दोनों देश अफ्रीका, यूरोप और एशिया को जोड़ने वाले रणनीतिक व्यापारिक मार्गों का लाभ उठाकर आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाई देने की दिशा में काम कर रहे हैं।