इतिहास मनमोहन सिंह को सबसे अहम प्रधानमंत्री के तौर पर याद रखेगा: सोनिया गांधी

नई दिल्ली। कांग्रेस संसदीय दल (सीपीपी) की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मंगलवार को कहा कि इतिहास निश्चित रूप से पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को एक शांत, सौम्य और एक बेहद अहम प्रधानमंत्री के तौर पर अच्छे शब्दों में याद रखेगा। इंडियन एक्सप्रेस में लिखे एक कॉलम में सोनिया गांधी ने कहा, “इतिहास निश्चित रूप से डॉ. मनमोहन सिंह को अच्छे नजरिए से याद रखेगा। 29 जुलाई, 2026 की तारीख हमारे हालिया राजनीतिक इतिहास में एक अहम लेकिन नजरअंदाज किया गया दिन था। एक फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने कथित ‘कोल ब्लॉक आवंटन घोटाले’ में डॉ. मनमोहन सिंह को सीबीआई से मिली क्लीन चिट को सही ठहराया। इससे भी अहम बात यह है कि कोर्ट ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करने और बिना किसी ‘ठोस वजह’ के पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ नकारात्मक टिप्पणी करने के लिए ट्रायल कोर्ट को फटकार लगाई।” सोनिया गांधी ने आगे लिखा कि उनके खिलाफ लॉबी सुनियोजित और संगठित थी। उन्होंने लिखा, “इस फैसले से हमारे सार्वजनिक विमर्श के सबसे दुखद अध्यायों में से एक (डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ चलाए गए अभियान) का अंत हो गया है। डॉ. मनमोहन सिंह असाधारण ईमानदारी और सत्यनिष्ठा वाले व्यक्ति थे। उनके खिलाफ लॉबी सुनियोजित और संगठित थी, जिसमें नौकरशाही से लेकर मीडिया, न्यायपालिका, नागरिक समाज और निश्चित रूप से आरएसएस और भाजपा तक के लोग शामिल थे।” सोनिया गांधी ने आगे लिखा, “आज, उनकी झूठी मुहिम का अंत कुछ न हासिल होने के साथ हुआ है। डॉ. मनमोहन सिंह हर मामले में सही साबित हुए। ईमानदारी और जवाबदेही का उनका रिकॉर्ड नरेंद्र मोदी सरकार के काम करने के तरीके के बिल्कुल उलट था, जो अपराध और भ्रष्टाचार की जांच करने वाली एजेंसियों जैसे ईडी और सीबीआई का साफ तौर पर और बुरी तरह से दुरुपयोग करती रही हैं।” सोनिया गांधी ने आगे लिखा, “इसका मकसद राजनेताओं पर दबाव बनाना रहा है। नेताओं को या तो जबरदस्ती चुप करा दिया जाता है या चालाकी से भाजपा में शामिल कर लिया जाता है या, कुछ खास मामलों में, मंत्री पद का इनाम भी दिया जाता है। जब भ्रष्टाचार के विश्वसनीय आरोप सामने आते हैं, तो वर्तमान केंद्र सरकार उन्हें बस नजरअंदाज कर देती है। विपक्ष में रहने पर भ्रष्ट, लेकिन पाला बदलते ही अचानक पाक-साफ।” उन्होंने आगे लिखा कि यह कोई इत्तेफाक नहीं है कि प्रधानमंत्री भी डॉ. मनमोहन सिंह पर हमला करने वालों में सबसे आगे थे। उन्होंने लिखा, “राज्यसभा में 8 फरवरी 2017 को डॉ. मनमोहन सिंह पर की गई अमर्यादित और कटाक्षपूर्ण टिप्पणी कि “रेनकोट पहनकर नहाना प्रधानमंत्री को ही आता है”, हमारी संसदीय परंपरा का एक निम्नतम बिंदु थी। यदि नरेंद्र मोदी आज छात्रों को क्षमा कर रहे हैं, तो उन्हें डॉ. मनमोहन सिंह पर की गई अपनी इस अशोभनीय टिप्पणी के लिए स्वयं को भी क्षमा करना चाहिए।” सोनिया गांधी ने लिखा, “आत्म-मंथन, दान की तरह, घर से ही शुरू होना चाहिए। असल में, डॉ. मनमोहन सिंह पर हमला इसलिए किया गया था क्योंकि वे लोगों का ध्यान उनके शानदार गवर्नेंस रिकॉर्ड से हटाना चाहते थे। मनमोहन सिंह की सरकार ने जबरदस्त आर्थिक बदलाव की शुरुआत की, जिसमें विकास की अभूतपूर्व दरें और खपत व प्राइवेट इन्वेस्टमेंट में तेजी आई, जिससे हम मध्यम-आय वाले देशों की श्रेणी में शामिल हो गए।” सोनिया गांधी ने आगे लिखा कि 2008 में, जब ग्लोबल इकॉनमी उथल-पुथल और पतन का सामना कर रही थी, तब भारत ने अपनी मजबूती दिखाई। सोनिया गांधी ने लिखा, “उनके कार्यकाल के दौरान, रोजगार के पैटर्न में साफ बदलाव दिखा, जिसमें लाखों लोग ज्यादा प्रोडक्टिविटी वाले कामों की ओर बढ़े। हालांकि, पिछले दशक में यह बदलाव उलटा हो गया है। पिछली सरकार की ओर से शुरू किए गए प्रोग्राम और विकास दर में तेजी के कारण, भारत ने गरीबी और अभाव के खिलाफ लड़ाई में निर्णायक रूप से जीतना शुरू कर दिया था। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि भारत की जीडीपी की ग्रोथ की गणना के तरीके में बदलाव के बावजूद, यूपीए सरकार के 10 सालों में पिछले 12 सालों की तुलना में ज्यादा आर्थिक विकास हुआ, जिसके परिणामस्वरूप लाखों लोग गरीबी से बाहर निकले।” कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने आगे लिखा कि मनमोहन सिंह सरकार ने एक क्रांति को मुमकिन बनाया। उन्होंने लिखा, “सामाजिक रूप से, मनमोहन सिंह सरकार ने एक ऐसी क्रांति को मुमकिन बनाया जिसने सभी भारतीयों, खासकर हमारे समाज के सबसे वंचित वर्गों को अधिकार दिलाए। इसने ‘शिक्षा के अधिकार’ के संवैधानिक वादे को पूरा किया और आईआईटीज और आईआईएम जैसे केंद्र से फंड पाने वाले उच्च शिक्षा संस्थानों में ओबीसी रिजर्वेशन लागू करके सामाजिक न्याय का दायरा बढ़ाया। ‘वन अधिकार अधिनियम’ ने दशकों के संघर्ष के बाद हमारे आदिवासी और जंगल में रहने वाले समुदायों के पुश्तैनी अधिकारों को मान्यता दी।” सोनिया गांधी ने आगे लिखा कि वर्तमान सरकार ने हाल ही में ‘मनरेगा’ को खत्म कर दिया है, जबकि यह दुनिया भर में शुरू की गई सबसे असरदार सामाजिक सुरक्षा योजना थी। उन्होंने लिखा, “कोविड महामारी के दौरान, जब पूरी अर्थव्यवस्था बुरी तरह लड़खड़ा गई थी, तो ‘मनरेगा’ उन दो तरीकों में से एक था जिनसे सरकार समाज के गरीब और सबसे कमजोर वर्गों तक पहुंच पाई। दूसरा तरीका मनमोहन सिंह की सरकार की एक और बड़ी उपलब्धि (नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट, 2013) थी, जिसने करोड़ों परिवारों की पहचान की और उन्हें बुनियादी राशन मिलने की गारंटी दी। अब इसमें बदलाव करने की कोशिश की जा रही है। पद छोड़ने के तुरंत बाद ही उन्होंने चेतावनी दी थी कि अधिकारों पर आधारित इस कानून पर हमले होंगे, और दुख की बात है कि उनकी यह आशंका सच साबित हुई है।” कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री के तौर पर मनमोहन सिंह का दशक राज्य और नागरिक समाज के लोकतांत्रिक संस्थानों के विकास और मजबूती के लिए जाना जाता है। सोनिया गांधी ने लिखा, “डॉ. मनमोहन सिंह ने ऐतिहासिक ‘सूचना का अधिकार कानून’ (आरटीआई) के जरिए सरकार में पारदर्शिता का एक नया दौर शुरू किया, जिससे नागरिकों को सरकार के कामकाज को जानने का मौका मिला। आज आरटीआई पूरी तरह से कमजोर हो चुका है। उस समय स्वतंत्र मीडिया का तेजी से विस्तार हुआ और उसमें एक ऐसी निडरता थी जो आज की कमजोर

ओबेरॉय होटल्स की मालिक कंपनी ईआईएच का पहली तिमाही में मुनाफा 52 प्रतिशत घटा, राजस्व में भी आई 26 प्रतिशत की गिरावट

नई दिल्ली। ओबेरॉय ग्रुप की प्रमुख हॉस्पिटैलिटी कंपनी ईआईएच लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की 30 जून, 2026 को समाप्त पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के नतीजे जारी कर दिए हैं। इस दौरान, कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ (नेट प्रॉफिट) तिमाही आधार पर करीब 52 प्रतिशत घटकर 120.31 करोड़ रुपए रह गया, जो पिछले वित्त वर्ष की मार्च तिमाही में 249.10 करोड़ रुपए था। हालांकि सालाना आधार पर कंपनी के प्रदर्शन में सुधार देखने को मिला है। स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, जून 2026 तिमाही में कंपनी का परिचालन राजस्व (रेवेन्यू) 656.96 करोड़ रुपए रहा, जो मार्च 2026 तिमाही के 895.22 करोड़ रुपए की तुलना में 26.61 प्रतिशत कम है। हालांकि पिछले वर्ष की समान तिमाही में कंपनी का राजस्व 573.58 करोड़ रुपए था, जिसके मुकाबले इस बार अच्छी वृद्धि दर्ज की गई है। कंपनी का शुद्ध लाभ (पीएटी) भी सालाना आधार पर मजबूत रहा। जून 2025 तिमाही में ईआईएच का मुनाफा 36.88 करोड़ रुपए था, जो बढ़कर इस वर्ष 120.31 करोड़ रुपए हो गया। तिमाही के दौरान कंपनी की कुल आय घटकर 697.94 करोड़ रुपए रह गई, जबकि मार्च तिमाही में यह 953.95 करोड़ रुपए थी। हालांकि वर्ष-दर-वर्ष आधार पर यह 609.06 करोड़ रुपए से बढ़ी है, जो कंपनी के परिचालन में सुधार का संकेत देती है। वहीं, कंपनी के कुल खर्च जून तिमाही में 533.02 करोड़ रुपए रहे, जो मार्च तिमाही के 605.33 करोड़ रुपए से कम है, लेकिन एक साल पहले की समान अवधि के 452.95 करोड़ रुपए की तुलना में अधिक है। विशेष मदों, सहयोगी कंपनियों और संयुक्त उपक्रमों से प्राप्त लाभांश तथा कर से पहले कंपनी का लाभ 164.92 करोड़ रुपए रहा। यह पिछले मार्च तिमाही के 348.62 करोड़ रुपए की तुलना में काफी कम है, लेकिन जून 2025 तिमाही के 156.11 करोड़ रुपए से बेहतर है। इसी प्रकार, कर-पूर्व लाभ (पीबीटी) जून 2026 तिमाही में 169.31 करोड़ रुपए रहा, जबकि मार्च तिमाही में यह 368.34 करोड़ रुपए था। वहीं एक वर्ष पहले यह केवल 54.18 करोड़ रुपए था। कंपनी ने बताया कि चालू तिमाही में कोई असाधारण मद नहीं रही। इसके विपरीत, जून 2025 तिमाही में 110.49 करोड़ रुपए और मार्च 2026 तिमाही में 132.08 करोड़ रुपए की असाधारण मदें शामिल थीं, जिसका असर लाभ के आंकड़ों पर पड़ा था। कर व्यय भी तिमाही आधार पर घटकर 49 करोड़ रुपए रह गया, जबकि मार्च तिमाही में यह 119.24 करोड़ रुपए था। एक साल पहले इसी अवधि में कर व्यय 17.30 करोड़ रुपए था। इसके अलावा, कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि 31 मार्च 2026 को समाप्त तीन महीनों के आंकड़े ऑडिटेड वार्षिक परिणामों और 31 दिसंबर 2025 तक के नौ महीनों के प्रकाशित लेकिन सीमित समीक्षा वाले वित्तीय आंकड़ों के बीच संतुलनकारी आंकड़े हैं।

बिहार : दर्द से बेपरवाह बाबा की भक्ति में लीन सुबोध, घुटनों के बल तय कर रहे बाबाधाम का सफर

मुंगेर। बाबा बैद्यनाथ के दरबार तक पहुंचने के लिए श्रद्धालु अलग-अलग तरीके से आस्था का सफर तय करते हैं। कोई पैदल कांवड़ लेकर पहुंचता है तो कोई दंडवत यात्रा करता है। लेकिन लखीसराय के सुबोध कुमार सिंह की बाबाधाम यात्रा आस्था, संकल्प और हौसले की ऐसी कहानी है, जिसे देखकर हर कोई हैरान रह जाता है। सुबोध ने घुटनों के बल चलकर बाबा बैद्यनाथ के दरबार पहुंचने का संकल्प लिया है। वे प्रतिदिन एक से डेढ़ किलोमीटर की यात्रा कर पा रहे हैं। वे 18 किलोमीटर की यात्रा कर चुके है, इस दौरान उनके दोनों घुटनों की खाल तक निकल गई, गहरे जख्म हो गए और दर्द भी बढ़ता गया, लेकिन बाबा के दरबार तक पहुंचने की उनकी ललक कम नहीं हुई। लखीसराय निवासी सुबोध कुमार सिंह 28 जुलाई को सुल्तानगंज से गंगाजल उठाकर अपने बेटे और एक दोस्त के साथ बाबाधाम की यात्रा पर निकले। खास बात यह है कि उन्होंने पैदल चलने के बजाय घुटनों के बल चलकर देवघर पहुंचने का संकल्प लिया है। उनके लिए यह यात्रा किसी मनोकामना की पूर्ति नहीं, बल्कि बाबा बैद्यनाथ के प्रति अपनी आस्था और विश्वास को समर्पित एक अलग तरह की साधना है। सुबोध बताते हैं, “इससे पहले वह अपने गुरु के साथ 9 बार दंडवत यात्रा करते हुए बाबाधाम जा चुके हैं। वर्ष 2009 में उन्होंने अपने गुरु श्री श्री 108 दयाराम दास जी महाराज के साथ दंड यात्रा शुरू की थी। बीच में कुछ वर्षों तक यात्रा छूटी भी, लेकिन अब तक करीब 9 बार वह दंडवत यात्रा कर चुके हैं। इस बार उनके मन में कुछ अलग करने का विचार आया और उन्होंने घुटनों के बल बाबाधाम जाने का निर्णय लिया।” सुबोध के इस फैसले से उनके परिवार वाले भी नाराज हुए। उन्होंने बताया कि घरवालों ने इस यात्रा का विरोध किया, लेकिन उनका मन नहीं माना। इसके बाद उन्होंने अपने बेटे और दोस्त को साथ लिया और सुल्तानगंज से निकल पड़े। यात्रा के शुरुआती दो दिनों में उन्होंने पांच से छह किलोमीटर से अधिक दूरी तय कर ली। इसके बाद लगातार जमीन पर घुटनों के बल चलने के कारण दोनों घुटने बुरी तरह छिल गए। जख्म गहरे होते गए और दर्द भी बढ़ता गया। इसके बावजूद सुबोध ने यात्रा रोकने से इनकार कर दिया। वह कहते हैं कि उन्हें खुद नहीं पता कि बाबा बैद्यनाथ के दरबार तक पहुंचने में कितना समय लगेगा। सामान्य परिस्थितियों में 15 किलोमीटर की दूरी कुछ घंटों में पूरी की जा सकती है, लेकिन घुटनों के बल चलकर इतनी दूरी तय करना उनके लिए हर कदम पर परीक्षा जैसा है। फिर भी उनका कहना है कि मंजिल कितनी भी दूर हो, संकल्प बाबा के दरबार तक पहुंचने का है और यात्रा तब तक जारी रहेगी, जब तक बाबा के चरणों तक नहीं पहुंच जाते। सुबोध इसे ‘हठ योग’ बताते हैं। उनका कहना है कि इसके पीछे कोई खास मनोकामना नहीं है। उन्होंने कहा कि महादेव अंतर्यामी हैं और उनसे कुछ छिपा नहीं है। जिस तरह कोई धार्मिक कार्य करने का विचार पहले मन में आता है, उसी तरह इस बार उनके मन में घुटनों के बल बाबा के दरबार जाने की प्रेरणा आई। सुबोध को भरोसा है कि जिस तरह पहले दंडवत यात्राओं में बाबा ने उन्हें अपनी मंजिल तक पहुंचाया, उसी तरह इस बार भी बाबा बैद्यनाथ उनका रास्ता आसान करेंगे। घुटनों के गहरे जख्म के बावजूद उनके चेहरे पर विश्वास और आंखों में मंजिल तक पहुंचने का संकल्प साफ नजर आता है। उनके लिए यह यात्रा सिर्फ दूरी तय करने का नाम नहीं, बल्कि आस्था की उस शक्ति का प्रतीक है, जो दर्द और मुश्किलों के बीच भी इंसान को आगे बढ़ने का हौसला देती है।

पीएम मोदी संग एनडीए सांसदों की मंगल बैठक, तिरंगा लहराकर दिया एकजुटता का संदेश

नई दिल्ली। एनडीए सांसदों की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मंगल बैठक वंदे मातरम नारे के साथ शुरू हुई। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन और एनडीए के अन्य नेता तिरंगा लहराते नजर आए। नई दिल्ली में मंगलवार को संसद पुस्तकालय में आयोजित ‘मंगल मिलन’ कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तिरंगा ध्वज के साथ नजर आए। सांसद हाथ में पोस्टर लेकर सदन में प्रवेश करेंगे, जिनमें लिखा होगा सरकार छात्रों के प्रदर्शन पर चर्चा चाहती है, लेकिन कांग्रेस इसे चाहकर भी अब इससे भाग रही है। सांसदों के हाथों में झारखंड सरकार को लेकर भी पोस्टर होंगे। उन पोस्टरों पर झारखंड में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर अत्याचार का मुद्दा उठाया जाएगा। पिछले सप्ताह ‘मंगल मिलन’ बैठक के बाद भाजपा सांसदों ने पत्रकारों से बातचीत की थी। उन्होंने सरकार की उपलब्धियों, रोजगार, खेल, आर्थिक विकास और संसद की कार्यवाही को लेकर अपनी बात रखी थी। साथ ही, विपक्ष पर संसद की कार्यवाही को बाधित करने का आरोप भी लगाया था। भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने आईएएनएस से कहा था कि भारत तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है और रोजगार के क्षेत्र में देश की स्थिति लगातार मजबूत हुई है। रोजगार का अनुपात अन्य देशों की तुलना में बेहतर हुआ है और बेरोजगारी में भी कमी आई है। 25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं, जो सरकार की नीतियों का परिणाम है। भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने कहा था कि ‘मंगल मिलन’ कार्यक्रम में देश में हो रहे विभिन्न विकास कार्यों और सरकार की उपलब्धियों पर विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने आरोप लगाया था कि विपक्ष संसद में लगातार हंगामा कर रहा है और महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा नहीं होने दे रहा है। बैठक में सभी सांसदों ने यह तय किया कि संसद की कार्यवाही के दौरान उनकी उपस्थिति हर हाल में सुनिश्चित रहेगी, ताकि सरकार आवश्यक विधेयकों को पारित करा सके। भाजपा के राज्यसभा सदस्य अशोक मित्तल ने कहा था कि बैठक में खेलों के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने कहा था कि हाल में संपन्न ग्लासगो कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप सहित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के प्रदर्शन की तुलना यदि यूपीए सरकार के दस वर्षों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले पिछले दस वर्षों से की जाए तो सकारात्मक बदलाव स्पष्ट दिखाई देता है। खेलों के क्षेत्र में भारत की वैश्विक पहचान लगातार मजबूत हुई है। वहीं, भाजपा सांसद रवि किशन ने कहा था कि देश आर्थिक और सामाजिक विकास के रास्ते पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है। बैठक में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि, रोजगार और युवाओं के लिए बढ़ते अवसरों पर चर्चा हुई। रवि किशन ने भी विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि आखिर विपक्ष संसद को सुचारु रूप से क्यों नहीं चलने दे रहा है।

सिंकफील्ड कप: आर. प्रज्ञानंदा ने सेवियन के खिलाफ आसान ड्रॉ के साथ अभियान शुरू किया

सेंट लुइस। ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानंदा ने ग्रैंड चेस टूर के आखिरी से पहले इवेंट के शुरुआती राउंड में अपने अमेरिकी साथी सैमुअल सेवियन के खिलाफ आसान ड्रॉ के साथ अपने सिंकफील्ड कप कैंपेन की शुरुआत की। काले मोहरों से खेलते हुए, आर. प्रज्ञानंदा ने रुई लोपेज के आर्कान्जेस्क वेरिएशन ने काफी शांत मुकाबला किया। मुकाबले के दौरान भारतीय खिलाड़ी ज्यादा बेहतर और तैयारी लगे। खिलाड़ियों ने जल्दी ही मोहरों की अदला-बदली शुरू कर दी, और 11वीं चाल में ही रूक की एक जोड़ी बोर्ड से हट गई। आगे की अदला-बदली के बाद क्वीन-और-माइनर-मोहरे का एंडगेम हुआ जिसमें दोनों खिलाड़ियों के पास दो-दो घोड़े थे, जिससे दोनों में से किसी के भी जीतने का कोई खास मौका नहीं बचा। एक बार जब क्वींस ट्रेड हो गईं, तो नतीजा लगभग तय हो गया और गेम आखिरकार 48 चालों के बाद ड्रॉ पर समाप्त हुआ, हालांकि खिलाड़ी पहले पॉइंट बांटने पर सहमत हो सकते थे। टॉप सीड फैबियानो कारुआना 10 खिलाड़ियों वाले, नौ राउंड के टूर्नामेंट के शुरुआती राउंड में जीत दर्ज करने वाले अकेले खिलाड़ी थे। अमेरिकी खिलाड़ी ने नीदरलैंड्स के जॉर्डन वैन फॉरेस्ट को हराकर शुरुआती बढ़त हासिल की। कारुआना ने एक बार फिर दिखाया कि वह इस सीजन में ग्रैंड चेस टूर के सबसे अच्छे खिलाड़ी क्यों रहे हैं। उन्होंने शुरू में बराबरी की स्थिति से वैन फॉरेस्ट को हराया। डच खिलाड़ी की मिडिलगेम में एक रणनीतिक गलती की वजह से उन्हें एक पॉन गंवाना पड़ा, जिससे कारुआना को फायदा मिल गया। इसके बाद अमेरिकी खिलाड़ी ने 55 चालों के बाद खास तकनीक दिखाई। दूसरी तरफ, वर्ल्ड चैंपियनशिप के दावेदार उज्बेकिस्तान के जावोखिर सिंडारोव ने अर्मेनियाई से अमेरिकी बने लेवोन एरोनियन के साथ ड्रॉ खेला। सफेद मोहरों से खेलते हुए, सिंडारोव ने अनियमित क्वीन पॉन सेट-अप चुना और ऐसा लगा कि जब एरोनियन ने एक पॉन गिरा दिया तो उन्हें मौका मिल गया। हालांकि, इसके नतीजे में उलटे रंग के बिशप के एंडगेम में जीतने का कोई असली मौका नहीं मिला, और गेम आखिरकार ड्रॉ हो गया। जर्मनी के विंसेंट कीमर को भी अमेरिका के वेस्ली सो के खिलाफ आधे पॉइंट से ही संतोष करना पड़ा। कीमर ने सो के किंग के खिलाफ अटैक करने की कोशिश की, लेकिन अमेरिकन ने आराम से डिफेंड किया और खतरे को बेअसर कर दिया। नीदरलैंड के अनीश गिरी ने फ्रांस के मैक्सिम वाचियर-लाग्रेव के खिलाफ दिन का दूसरा ड्रॉ पूरा किया। गिरी कुछ खास प्रोग्रेस नहीं कर पाए और गेम आखिरकार रूक-एंड-पॉन्स एंडिंग पर पहुंच गया, जो आखिर तक चला, इससे पहले कि खिलाड़ी ड्रॉ पर सहमत हुए।

सीआरपीएफ ने श्रीनगर के लाल चौक पर निकाली तिरंगा रैली, बच्चों को बताया आजादी का महत्व

श्रीनगर। स्वतंत्रता दिवस से पहले सीआरपीएफ ने श्रीनगर के ऐतिहासिक लाल चौक पर छात्रों के साथ एक भव्य तिरंगा रैली का आयोजन किया। इस रैली का मकसद सिर्फ 15 अगस्त का जश्न मनाना नहीं था, बल्कि आने वाली पीढ़ी को देश की आजादी की कीमत और तिरंगे के सम्मान के बारे में बताना था। सीआरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंट प्रह्लाद सिंह ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने भारत की स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ पर लाल किले से “हर घर तिरंगा” अभियान की घोषणा की थी। उसी संदेश को आगे बढ़ाते हुए हर साल 15 अगस्त के उपलक्ष्य में यह रैली निकाली जाती है। उन्होंने कहा, “आज हमने इस तिरंगा रैली में पास के स्कूल के बच्चों को शामिल किया है, क्योंकि यही हमारे जम्मू-कश्मीर और भारत का भविष्य हैं। हम चाहते हैं कि ये बच्चे जानें कि हमारे देश की संस्कृति, हमारी धरोहर और हमारी आजादी किन परिस्थितियों में मिली है। आजादी मुफ्त में नहीं मिली। इसके लिए लोगों ने बलिदान दिया है। इसका सम्मान करना और इसे याद रखना हम सभी का कर्तव्य है।” रैली में शामिल छात्र आदित्य राज सिंह ने कहा कि इस तिरंगा रैली का महत्व बहुत ज्यादा है। इसका नाम ही “हर घर तिरंगा रैली” है, तो हर घर में तिरंगा लहराना चाहिए। उन्होंने कहा, “हर एक इंसान, जो इस देश में रह रहा है, उसे यहां के इतिहास का पता होनी चाहिए। आज अगर हम आजादी से जी रहे हैं तो उसकी बहुत बड़ी कीमत चुकाई गई है। हर एक इंसान को अपने देश पर गर्व होना चाहिए। उसे पता होना चाहिए कि इस तिरंगे की अहमियत क्या है?” टिंडेल बिस्को स्कूल में पढ़ने वाले 9वीं क्लास के छात्र नील ने कहा, “हमें तिरंगा रैलियों और सरकार व अन्य संस्थाओं द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में हिस्सा लेना चाहिए, ताकि हम अपने देश का मान बढ़ा सकें। यही संदेश है।” नील ने बताया कि यह दूसरी बार है जब वह इस रैली में शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा, “मैं पिछले साल भी यहां आया था। अनुभव काफी हद तक वैसा ही रहा है, लेकिन दोनों ही बार मुझे गर्व महसूस हुआ है और देश के लिए कुछ करने की भावना रही है क्योंकि हम यहां आए हैं।

ईरान की सैन्य कमान का व‍िस्‍तार, सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने छह शीर्ष पदों पर नए कमांडर नियुक्त क‍िए

नई द‍िल्‍ली। पूर्व इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) कमांडर मोहसिन रेजाई को सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (एसएनएससी) में अपना प्रतिनिधि नियुक्त करने के बाद इस्लामी क्रांति के नेता अयातुल्लाह सैय्यद मोजतबा हुसैनी खामेनेई ने अलग-अलग आदेश जारी कर छह सैन्य कमांडरों की नियुक्ति की। ईरान की मेहर न्‍यूज एजेंसी की र‍िपोर्ट के अनुसार, ईरान के सभी सशस्त्र बलों की कमान संभालने वाले इस्लामी क्रांति के नेता अयातुल्लाह सैयद मोजतबा हुसैनी खामेनेई ने सेना के छह शीर्ष पदों पर नई नियुक्तियां कीं, जिनमें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) के प्रमुख का पद भी शामिल है। मेहर न्‍यूज के अनुसार, सुप्रीम लीडर ने मेजर जनरल अली अब्दोल्लाही को ईरानी सशस्त्र बलों का चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्त किया। साथ ही ब्रिगेडियर जनरल कियमार्स हैदरी को ईरानी सशस्त्र बलों का डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ बनाया गया। उन्होंने मेजर जनरल अहमद वाहिदी को आईआरजीसी का मुख्य कमांडर नियुक्त किया। मेहर न्‍यूज के अनुसार, ईरानी सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर ने मेजर जनरल मुस्तफा इजादी को आईआरजीसी का डिप्टी कमांडर-इन-चीफ नियुक्त किया। सुप्रीम लीडर ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पोस्‍ट में ल‍िखा, ”अत्यंत दयालु और कृपालु ईश्वर के नाम पर…मेजर जनरल मुस्तफा इजादी, आपकी निष्ठा, क्षमता और बहुमूल्य अनुभव को देखते हुए और आईआरजीसी के कमांडर-इन-चीफ की सिफारिश पर मैं आपको आईआरजीसी के डिप्टी कमांडर-इन-चीफ के पद पर नियुक्त करता हूं।” इसके अलावा, उन्‍होंने रियर एडमिरल अली ओजमाई को आईआरजीसी नौसेना का कमांडर बनाया गया। सुप्रीम लीडर ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पोस्‍ट में ल‍िखा, ”रियर एडमिरल अली ओजमाई, रियर एडमिरल तंगसिरी की शहादत को देखते हुए और आपकी लगन, काबिलियत और अनुभव को ध्यान में रखते हुए, आईआरजीसी के कमांडर-इन-चीफ की सिफारिश पर, मैं आपको आईआरजीसी नेवी का कमांडर नियुक्त करता हूं।” इसके अलावा उन्‍होंने नेता ने हुसैन ताएब को आईआरजीसी की बसीज संगठन का प्रमुख नियुक्त किया। सुप्रीम लीडर ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पोस्‍ट में ल‍िखा, ”हुज्जत-उल-इस्लाम हुसैन ताएब, जायोनी-अमेरिकी दुश्मन के हाथों मेजर जनरल सुलेमानी की शहादत को देखते हुए और आपकी प्रतिबद्धता, काबिलियत व अनुभव को ध्यान में रखते हुए, आईआरजीसी के कमांडर-इन-चीफ की सिफारिश पर, मैं आपको आईआरजीसी बासिज संगठन का प्रमुख नियुक्त करता हूं।

ईरान को साइबर सुरक्षा और निष्क्रिय रक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत: उपराष्ट्रपति रजा आरिफ

नई द‍िल्‍ली। ईरान के उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने कहा क‍ि हमारे दुश्‍मन साज‍िशें रचेंगे और देश को नुकसान पहुंचाने का मौका तलाशते रहेंगे। इसल‍िए देश की साइबर सुरक्षा और निष्क्रिय रक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि विरोधियों की साजिशों से निपटने के लिए ईरान को पूरी तरह तैयार रहना होगा। इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी (आईआरएनए) की र‍िपोर्ट के अनुसार, तेहरान में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विकास मुख्यालय की बैठक में आरिफ ने दुश्मनों की साजिशों को नाकाम करने के लिए देश को साइबर सुरक्षा और निष्क्रिय रक्षा के क्षेत्र में अपनी स्थिति और मजबूत करनी होगी। उन्‍होंने कहा कि शहीद इस्लामी क्रांति के नेता की ओर से तय किए गए विकास दृष्टि कार्यक्रम के तहत ईरान को उन्नत तकनीकों के क्षेत्र में क्षेत्रीय स्तर पर अग्रणी स्थान हासिल करना चाहिए और वैश्विक स्तर पर भी एक प्रभावशाली भूमिका निभानी चाहिए। आईआरएनए के अनुसार, उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा को मजबूत करना एक जरूरी रणनीति है, क्योंकि दुश्मन ईरानी जनता के सामने हाल की अपनी हार के बावजूद साजिशें रचना बंद नहीं करेगा और हमारे देश को नुकसान पहुंचाने का मौका तलाशता रहेगा। हमें पूरी तरह तैयार रहते हुए विरोधियों की साजिशों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए और निष्क्रिय रक्षा पर भी ज्यादा ध्यान देना चाहिए। मोहम्मद रजा आरिफ ने कहा क‍ि अमेरिका और इजराइल ने जून 2025 में ईरान के खिलाफ अपना पहला युद्ध शुरू किया था, जो 12 दिन तक चला। इसके बाद उनका दूसरा सैन्य हमला इस वर्ष 2026 में 28 फरवरी को शुरू हुआ और 40 दिन के बाद अप्रैल की शुरुआत में रुक गया। मोहम्मद रजा आरिफ ने दावा क‍िया क‍ि दोनों युद्धों में ईरान के मजबूत प्रतिरोध और जवाबी सैन्य अभियानों ने विरोधियों को युद्धविराम स्वीकार करने पर मजबूर कर दिया।

यूक्रेन के ओडेसा क्षेत्र में मिग-29 लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त, म‍िशन के दौरान लगी आग

नई द‍िल्‍ली। यूक्रेन के ओडेसा क्षेत्र में सोमवार शाम यूक्रेनी वायु सेना का एक मिग-29 लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे के दौरान व‍िमान ओडेसा क्षेत्र में हवाई लक्ष्यों को नष्ट करने के मिशन पर था। हादसे में पायलट समय रहते इजेक्ट कर गया और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। रूसी समाचार एजेंसी ‘टास’ के अनुसार, वायु सेना ने अपने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म टेलीग्राम चैनल और फेसबुक पेज पर हादसे की जानकारी साझा की। यूक्रेनी वायु सेना ने बताया क‍ि एक मिग-29 लड़ाकू विमान दक्षिणी यूक्रेन के ओडेसा क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यूक्रेनी वायु सेना सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म ‘फेसबुक’ पोस्‍ट में ल‍िखा, ”10 अगस्त, 2026 की शाम को, एयर फोर्स का एक म‍िग-29 फाइटर एक कॉम्बैट मिशन करते समय खो गया। पायलट ओडेसा इलाके में दुश्मन के हवाई टारगेट को नष्ट करने के लिए एक कॉम्बैट मिशन कर रहा था। शुरुआती जानकारी के अनुसार, एक एयरक्राफ्ट मिसाइल के लॉन्च के दौरान एक इमरजेंसी सिचुएशन हुई, जिसके कारण प्लेन में आग लग गई और पायलट ने कंट्रोल खो दिया, हालांकि उसने विमान को बचाने की कोशिश की। पायलट सफलतापूर्वक इजेक्ट हो गया और उसे एक चिकित्सा केंद्र में ले जाया गया। घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है।” ‘टास’ के अनुसार, वायु सेना ने बताया क‍ि 10 अगस्त की शाम वायु सेना का एक मिग-29 लड़ाकू विमान लड़ाकू मिशन के दौरान खो गया। पायलट ओडेसा क्षेत्र में हवाई लक्ष्यों को नष्ट करने के मिशन पर था। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, मिसाइल दागने के दौरान किसी अज्ञात आपात स्थिति के कारण विमान में आग लग गई और वह नियंत्रण से बाहर हो गया। पायलट विमान को बचाने में सफल नहीं हो सका। ‘टास’ समाचार एजेंसी के अनुसार, यूक्रेनी सेना ने कहा क‍ि पायलट ने समय रहते सुरक्षित रूप से इजेक्ट कर लिया और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हादसे के कारणों की जांच की जा रही है।” पिछले दो सप्ताह से भी कम समय में यूक्रेन में इस तरह की यह दूसरी घटना है। यूक्रेनी वायु सेना ने 29 जुलाई को टेलीग्राम पर बताया था कि एक एफ-16 लड़ाकू विमान भी खो गया था, जब विमान में आई एक अज्ञात आपात स्थिति के कारण पायलट को इजेक्ट करना पड़ा था।

बराक ओबामा लेकर आ रहे हैं नया पॉडकास्ट, बताएंगे किन छह किताबों ने बदल डाली उनकी सोच

वॉशिंगटन। किताबों को यूं ही इंसानों का सच्चा दोस्त नहीं कहा जाता। जिंदगी जहां अटकती है, भटकाव आता है वहां ये संभालने का पूरा प्रयास करती हैं। ऐसा शायद अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा भी सोचते हैं। तभी तो अब राजनीति से इतर अपने एक और पसंदीदा शगल के जरिए लोगों से जुड़ने का मन बना चुके हैं। ओबामा एक नया पॉडकास्ट शुरू करने वाले हैं, जिसमें वे उन किताबों पर चर्चा करेंगे जिन्होंने उनके सोचने के तरीके, उनके विश्वास और दुनिया को देखने के नजरिए को प्रभावित किया। ‘अ ग्रेट बुक विद ओबामा’ नाम का यह छह एपिसोड वाला पॉडकास्ट 24 सितंबर से ऑडिबल पर उपलब्ध होगा। इसे ओबामा और उनकी पत्नी मिशेल ओबामा की प्रोडक्शन कंपनी हायर ग्राउंड और ऑडिबल मिलकर तैयार कर रहे हैं। पूर्व राष्ट्रपति ने एक तस्वीर के साथ ये जानकारी अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए साझा की। इस सीरीज में ओबामा छह ऐसी चर्चित किताबों को चुनकर उनके बारे में विस्तार से बात करेंगे, जो उनके जीवन और विचारों पर गहरा असर डाल चुकी हैं। इनमें टोनी मॉरिसन की ‘सॉन्ग ऑफ सोलोमन’, जेम्स बाल्डविन की ‘द फायर नेक्स्ट टाइम’, जॉन ले कैरे की ‘टिंकर टेलर सोल्जर स्पाई’, कॉर्मैक मैकार्थी की ‘ ऑल द प्रिटी हॉर्सेस’, मर्लिन रॉबिन्सन की ‘गिलियड’ और रॉबर्ट पेन वॉरेन की ‘ऑल द किंग्स मैन’ शामिल हैं। हर एपिसोड में ओबामा एक किताब को केंद्र में रखकर एक अतिथि के साथ बातचीत करेंगे। हालांकि, मेहमानों के नाम अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। ओबामा लंबे समय से किताबों के शौकीन माने जाते हैं। राष्ट्रपति पद पर रहने के दौरान भी उनकी पढ़ने की आदत और किताबों की पसंद अक्सर चर्चा में रही। वह हर साल अपनी पसंदीदा किताबों की सूची भी साझा करते हैं। हाल में जारी उनकी 2026 की समर रीडिंग लिस्ट में भी कई समकालीन लेखकों की किताबें शामिल थीं। इस नए पॉडकास्ट के पीछे ओबामा की सोच सिर्फ किताबों की सिफारिश करने तक सीमित नहीं है। उनका मानना है कि कुछ किताबें केवल कहानियां नहीं सुनातीं, बल्कि इंसान के दुनिया को देखने के नजरिए को बदल देती हैं। यही वजह है कि उन्होंने उन किताबों को चुना है जो परिवार, धर्म, नस्ल, राजनीति और अमेरिका जैसे विषयों पर उनके विचारों को आकार देने में महत्वपूर्ण रही हैं। ओबामा के लिए यह पॉडकास्ट उनकी सार्वजनिक जिंदगी का एक अलग पहलू सामने लाने का मौका भी है। राष्ट्रपति और राजनेता के रूप में उन्हें पूरी दुनिया ने देखा, लेकिन किताबों के जरिए उनकी व्यक्तिगत सोच और उन विचारों की जड़ों को समझने का यह एक अलग अवसर होगा। ऐसे समय में जब लोग तेजी से छोटे वीडियो और सोशल मीडिया कंटेंट की ओर बढ़ रहे हैं, ओबामा का किताबों पर केंद्रित पॉडकास्ट शुरू करना अपने आप में दिलचस्प है। यह इस बात की याद भी दिलाता है कि अच्छी किताब का असर पढ़ना खत्म होने के बाद भी लंबे समय तक बना रह सकता है। 24 सितंबर से श्रोता यह जान सकेंगे कि आखिर वे कौन-सी किताबें थीं जिन्होंने बराक ओबामा को एक लोकप्रिय और विचारशील व्यक्ति बनाया। एक ऐसा व्यक्ति जिसकी सुलझी सोच के कई लोग कायल हैं।