बेटे विहान के बर्थडे पर अभिनेत्री स्नेहा का खास पोस्ट, लिखा-हर कामयाबी, गलती, खुशी के पल में तुम्हारे साथ रहूंगी

मुंबई। साउथ सिनेमा की लोकप्रिय अभिनेत्री स्नेहा ने मंगलवार को अपने बेटे विहान के जन्मदिन पर उसके लिए प्यारा नोट शेयर किया। अभिनेत्री ने इस पोस्ट के जरिए बेटे को भगवान का सबसे बड़ा आशीर्वाद बताया। अभिनेत्री स्नेहा ने इंस्टाग्राम पर बेटे की कुछ तस्वीरें पोस्ट कीं। इसमें अभिनेत्री के बेटे विहान की तस्वीरें हैं, जबकि कुछ में वे अपने दोनों बच्चों के साथ नजर आ रही हैं। अभिनेत्री स्नेहा ने लिखा, “हैप्पी 11 बर्थडे विहान, तुम मेरे दिल और सबसे बड़ी खुशी हो। 11 साल पहले तुम मेरी जिंदगी में आए और मुझे ऐसा प्यार दिया, जिसका अहसास मुझे पहले कभी नहीं हुआ था। तुम्हें बड़ा होते, सीखते, हंसते और इतना अच्छा बच्चा बनते देखना मेरी सबसे बड़ी खुशी और गर्व की बात है।” अभिनेत्री ने लिखा, “मेरी बस यही दुआ है, तुम दयालु बनो, बहादुर बनो, मजबूत बनो, अपने सपने पूरे करो और कभी कोशिश करने से मत डरो। हर कामयाबी, गलती, खुशी के पल में मैं तुम्हारे साथ रहूंगी। मेरे बच्चे, मैं तुमसे इतना प्यार करती हूं, जिसे मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकती हूं। तुम हमेशा मेरे दिल का एक टुकड़ा रहोगे, जो बाहर चलता-फिरता है।” इस साल की शुरुआत में पॉपुलर तमिल एक्ट्रेस स्नेहा ने पति एक्टर प्रसन्ना के लिए शादी की 14वीं सालगिरह पर एक प्यारा सा पोस्ट लिखा था। स्नेहा का असली नाम सुहासिनी राजाराम है। उन्होंने साल 2012 में अभिनेता प्रसन्ना से शादी की। उनके दो बच्चे बेटा विहान और एक बेटी आद्या। वह अपने परिवार के साथ चेन्नई में रहती हैं। अभिनेत्री की बात करें तो उन्होंने तमिल और तेलुगु फिल्मों के साथ-साथ मलयालम और कन्नड़ फिल्मों में भी अपने अभिनय का जलवा बिखेरा है। उन्हें उनकी मनमोहक मुस्कान के कारण ‘पुन्नगई अरसी’ (मुस्कान की रानी) भी कहा जाता है। फिल्मों के अलावा उन्होंने कुछ तमिल डांस और रियलिटी शो में जज की भूमिका भी निभाई है।

ममता बनर्जी पर हमला लोकतंत्र पर सीधा आघात: ‘सामना’ शिवसेना (यूबीटी)

मुंबई। शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे (यूबीटी) ने मंगलवार को दावा किया कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी पर हुआ हमला केवल एक व्यक्तिगत राजनीतिक हस्ती पर हमला नहीं है, यह हमारे गणतंत्र के लोकतांत्रिक ताने-बाने पर सीधा प्रहार है। पार्टी ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में कहा, “पत्थरों, लाठियों और लोहे की छड़ों से लैस एक भीड़ ने उनके वाहन को घेर लिया, जिसका स्पष्ट उद्देश्य एक सशक्त विपक्षी आवाज को खत्म करना प्रतीत होता था। उनका बच जाना महज संयोग की बात है, लेकिन इस घटना से एक भयावह सच्चाई सामने आती है, पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा की स्थिति सभी स्वीकार्य सीमाओं को पार कर चुकी है।” ‘सामना’ के संपादकीय में कहा गया है कि राज्य में हाल ही में हुए राजनीतिक समीकरणों में बदलाव के बाद से तृणमूल कांग्रेस के नेताओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। जिनमें अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी जैसे सांसद और विधायक शामिल हैं, सत्ताधारी दल के रवैये में यह विरोधाभास साफ तौर पर दिखाई देता है। उन्होंने आगे लिखा कि जहां केंद्रीय नेतृत्व दलबदलुओं का गर्मजोशी से स्वागत करता है, वहीं राज्य में राजनीतिक आधार तैयार करने वाले नेता जानलेवा हमलों के शिकार हो रहे हैं। जब केंद्र सरकार ने पहले पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था के पतन का हवाला देकर अपने हस्तक्षेपों को उचित ठहराया था, तो यह सवाल उठता है, क्या अनियंत्रित शत्रुता और राज्य द्वारा स्वीकृत मनमानी का यह मौजूदा माहौल ही उनके लिए कानून व्यवस्था की परिभाषा है? संपादकीय में आगे कहा गया कि विधानसभा चुनावों के दौरान, केंद्र प्रशासन ने निष्पक्ष प्रक्रिया सुनिश्चित करने और व्यवस्था बनाए रखने के बहाने लाखों केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को तैनात किया था। आज, जब लक्षित राजनीतिक हिंसा बढ़ रही है, तो वह तत्परता स्पष्ट रूप से गायब हो गई है। शांति बहाल करने के लिए आवश्यक केंद्रीय बलों को तैनात करने में अनिच्छा एक चिंताजनक दोहरे मापदंड को उजागर करती है। जब पूर्व मुख्यमंत्री, मौजूदा सांसद और निर्वाचित प्रतिनिधि बार-बार सड़क हिंसा का शिकार होते हैं, तो यह संस्थागत शासन के पूर्ण पतन को दर्शाता है।” संपादकीय में आगे कहा कि राज्य में विपक्षी नेतृत्व की आधिकारिक प्रतिक्रिया भी उतनी ही चिंताजनक है। एक वरिष्ठ राजनीतिक हस्ती पर हुए हिंसक हमले को महज ‘जनता और एक राजनीतिक दल के बीच की लड़ाई’ बताकर पेश करना गैर-जिम्मेदाराना और खतरनाक दोनों है। इस तरह की बयानबाजी भीड़ हिंसा को तर्कसंगत ठहराती है और राज्य की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने का संकेत देती है। इस गलत तर्क के आधार पर, जंतर-मंतर पर युवाओं के विरोध प्रदर्शन सहित किसी भी सार्वजनिक प्रदर्शन या शिकायत को नागरिकों और प्रधानमंत्री के बीच व्यक्तिगत संघर्ष के रूप में गलत तरीके से पेश किया जा सकता है, जिससे राज्य अपने व्यवस्था बनाए रखने के मूलभूत कर्तव्य से विमुख हो जाता है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने तर्क दिया कि एक कार्यशील लोकतंत्र में चुनावी जीत-हार मतपेटी में तय होती है। राजनीतिक सत्ता के लिए संयम, जवाबदेही और संवैधानिक मानदंडों की रक्षा के प्रति प्रतिबद्धता आवश्यक है। शिवसेना ने कहा कि वर्तमान स्थिति जहां असहमति को अत्यधिक बल प्रयोग से दबाया जाता है, छात्र आंदोलनों को कुचला जाता है और विपक्षी नेताओं को लगातार शारीरिक धमकियों का सामना करना पड़ता है। एक ऐसे वातावरण की ओर इशारा करती है जहां गैर-सरकारी संगठन राजनीतिक इच्छाशक्ति को लागू करने के लिए बेखौफ महसूस करते हैं। ठाकरे खेमे का दावा था कि यदि विपक्ष को शासन का एक अनिवार्य स्तंभ मानने के बजाय शारीरिक रूप से समाप्त किए जाने वाले शत्रु के रूप में देखा जाए तो लोकतंत्र जीवित नहीं रह सकता। हिंसक तत्वों को बिना किसी दंड के सक्रिय रहने देना शक्ति का प्रदर्शन नहीं है; यह अराजकता की ओर ले जाने वाला संकेत है जो अंततः राष्ट्र को बनाए रखने के लिए गठित संस्थाओं को ही कमजोर कर देगा।

पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से कीमती धातुओं ने पकड़ी रफ्तार, सोने-चांदी में 2 प्रतिशत से ज्यादा तक की बढ़ोतरी

नई दिल्ली, 11 अगस्त (आईएएनएस)। अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ते तनाव के बीच हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को घरेलू कमोडिटी मार्केट में कीमती धातुओं की कीमतों (सोने-चांदी) में तेजी देखने को मिली। शुरुआती कारोबारी में पीले धातु (सोने) की कीमतों में 1.5 प्रतिशत यानी 2,000 रुपए से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि चांदी की कीमतों में 2 प्रतिशत से ज्यादा यानी 5,000 रुपए से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई। मंगलवार को अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना अपने पिछले बंद 1,53,099 रुपए से 1.04 प्रतिशत यानी 1,600 रुपए की बढ़त के साथ 1,54,699 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला। वहीं सत्र के दौरान इसने 2,338 रुपए यानी 1.52 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,55,437 रुपए का इंट्रा-डे हाई टच किया। हालांकि खबर लिखे जाने तक पीली धातु 895 रुपए यानी 0.58 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,53,994 रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करते हुए नजर आई। वहीं, सितंबर डिलीवरी वाली चांदी अपने पिछले बंद 2,36,867 रुपए से 3,132 रुपए यानी 1.32 प्रतिशत की उछाल के साथ 2,39,999 रुपए प्रति किलोग्राम पर खुली और दिन के दौरान इसने 5,132 रुपए यानी 2.16 प्रतिशत का उच्चतम स्तर छुआ। हालांकि खबर लिखे जाने तक यह सफेद धातु 371 रुपए यानी 0.16 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,36,496 रुपए प्रति किलोग्राम पर ट्रेड करती नजर आई। दरअसल, सोने और चांदी की कीमतों पर वैश्विक व्यापक आर्थिक बदलावों, भू-राजनीतिक जोखिमों और घरेलू मांग में परिवर्तन का गहरा प्रभाव पड़ रहा है। अमेरिका की उदार मौद्रिक नीति की उम्मीदें बढ़ने से सोने की कीमतों में नई मजबूती आई है, वहीं डॉलर के कमजोर होने से इसकी मांग और भी बढ़ गई है। वहीं, सिल्वर में निवेश में रुचि और उपभोक्ताओं की बदलती प्राथमिकताओं के समर्थन से इसकी कीमतों को सपोर्ट मिला। हालांकि, मुद्रास्फीति के आंकड़ों और केंद्रीय बैंक के संकेतों के प्रति दृष्टिकोण संवेदनशील बना हुआ है, जिससे कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव की संभावना है। साथ ही, सोने की ऊंची कीमतों का असर व्यापक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। इन सभी कारकों के संयोजन से आने वाले दिनों में कीमती धातुओं के बाजार की दिशा तय होने की उम्मीद है।

‘कभी अलविदा ना कहना’ ने पूरे किए 20 साल, मेकर्स ने शेयर किए फिल्म से जुड़े अनदेखे क्लिप

मुंबई। करण जौहर की फिल्मों में एक जादू होता है। वो ऐसी कहानियां बनाते हैं जो सीधे दिल को छू जाती हैं। ‘कभी अलविदा ना कहना’ भी ऐसी ही एक फिल्म थी। मंगलवार को इस फिल्म ने अपने रिलीज के 20 साल पूरे कर लिए। फिल्म के मेकर्स ने इंस्टाग्राम पर फिल्म के कुछ क्लिप का मोंटाज वीडियो पोस्ट किया, जो फिल्म से जुड़ी कहानी की झलक देता है। मेकर्स ने लिखा, “एक ऐसी कहानी जिसे आप कभी अलविदा नहीं कह सकते। फिल्म ‘कभी अलविदा न कहना’ के रिलीज को 20 साल पूरे हो गए। यह सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि प्यार, दिल टूटने, तड़प और सीख से भरा एक इमोशन है।” करण जौहर द्वारा निर्देशित रोमांटिक ड्रामा फिल्म ‘कभी अलविदा ना कहना’ विवाहेतर संबंधों (एक्सट्रा मैरिटल अफेयर), भावनात्मक असंतोष और जटिल रिश्तों के संवेदनशील विषय पर आधारित है। इस फिल्म में शाहरुख खान, रानी मुखर्जी, अभिषेक बच्चन, प्रीति जिंटा और अमिताभ बच्चन जैसे दिग्गज कलाकार मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। फिल्म की कहानी दो विवाहित कपल के इर्द-गिर्द घूमती है। इसमें देव (शाहरुख खान) और माया (रानी मुखर्जी) दोनों अलग-अलग लोगों से विवाहित हैं, लेकिन अपने-अपने वैवाहिक जीवन में असंतुष्ट और दुखी हैं। एक समय पर दोनों की मुलाकात होती है और वे अपनी बेमेल शादियों का दर्द एक-दूसरे से साझा करते हैं। धीरे-धीरे वे दोस्त बन जाते हैं और अपने रिश्तों में खालीपन के कारण एक-दूसरे के करीब आ जाते हैं, जिसके बाद उनका विवाहेतर संबंध शुरू होता है। सच्चाई सामने आने पर उनके पुराने रिश्ते टूट जाते हैं और वे अपने जीवनसाथियों से अलग हो जाते हैं, जो मानवीय भावनाओं की जटिलता को दर्शाता है। फिल्म का संगीत शंकर-हसान-लॉय ने दिया था और इसके गाने (जैसे शीर्षक गीत ‘कभी अलविदा ना कहना’) बेहद लोकप्रिय हुए थे। रिलीज के समय इसकी कहानी पारंपरिक पारिवारिक मूल्यों से हटकर होने के कारण दर्शकों के बीच काफी विवादास्पद और बंटी हुई प्रतिक्रिया का विषय रही थी।

‘उम्र कम होने से कोई नेता नहीं बन जाता’, आकाश आनंद के ‘अंकल’ वाले बयान पर कांग्रेस का पलटवार

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती के भतीजे और पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद की ओर से राहुल गांधी को ‘अंकल’ कहे जाने और संविधान को लेकर की गई टिप्पणी पर कांग्रेस ने तीखा पलटवार किया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं प्रवक्ता अंशु अवस्थी ने आकाश आनंद को निशाने पर लेते हुए कहा कि केवल उम्र कम होने से कोई युवाओं और छात्रों का नेता नहीं बन जाता। युवाओं के मुद्दों पर बोलने और उनके लिए संघर्ष करने से ही नेतृत्व साबित होता है। अंशु अवस्थी ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि अगर आकाश आनंद खुद को युवाओं और छात्रों का नेता मानते हैं तो उन्हें पेपर लीक, बेरोजगारी और छात्रों-युवाओं पर कथित लाठीचार्ज और गोली चलाए जाने जैसे मुद्दों पर भी बोलना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इन मुद्दों पर आकाश आनंद चुप रहते हैं। उन्होंने कहा कि बहुजन समाज पार्टी लंबे समय तक बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर और कांशीराम के विचारों को अपना आधार बताती रही है। ऐसे में बाबा साहब आंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान को लेकर अपमानजनक टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए। कांग्रेस नेता अंशु अवस्थी ने कहा कि कम से कम भारत के संविधान का अपमान मत करिए। कांग्रेस और राहुल गांधी के बहाने संविधान को अपमानित मत करिए। उन्होंने दावा किया कि संविधान की रक्षा के लिए राहुल गांधी खड़े हुए और जब भाजपा पर संविधान बदलने की कोशिश के आरोप लगे, तब कांग्रेस ने इसके खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने आकाश आनंद से सवाल किया कि यदि वह भी भाजपा पर संविधान बदलने का आरोप लगाने वालों की तरह ही बात कर रहे हैं, तो फिर बसपा और भाजपा के बीच अंतर क्या रह जाता है? राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन संविधान और उसके मूल्यों का सम्मान सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है। अंशु अवस्थी ने कहा कि युवाओं की राजनीति केवल उम्र के आधार पर नहीं होती, बल्कि उनके सवालों को उठाने और उनके हक के लिए संघर्ष करने से होती है। उन्होंने आकाश आनंद पर निशाना साधते हुए कहा कि युवाओं के वास्तविक मुद्दों से दूरी बनाकर केवल राहुल गांधी और कांग्रेस पर टिप्पणी करने से कोई युवा नेतृत्व स्थापित नहीं होता। ज्ञात हो कि बसपा नेता आकाश आनंद ने हाल ही में राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए दोनों को ‘अंकल’ बताया था और कहा था कि वे युवाओं के नेता नहीं रह गए हैं।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पदक जीतने वाले शर्मिला, लवलीना, और झंडू ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में मेहमान बनेंगे

मुंबई। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पदक जीतने वाली शर्मिला धनखड़, लवलीना बोरगोहेन और झंडू कुमार टेलीविजन के लोकप्रिय क्विज शो कौन बनेगा करोड़पति में मेहमान बनेंगे। आईएएनएस को मिली जानकारी के मुताबिक, तीनों पदक विजेताओं को बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन के सामने ‘हॉट सीट’ पर बैठने का मौका मिलेगा। ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स के पदक विजेताओं वाला विशेष एपिसोड 15 अगस्त के बाद प्रसारित होने की उम्मीद है। पैरा एथलीट धनखड़ ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में एफ57 शॉट पुट इवेंट में स्वर्ण पदक जीता था। जीत के बाद धनखड़ पूरे देश में खासकर, महिलाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत के रूप में उभरी हैं। घरेलू हिंसा से बचने से लेकर कॉमनवेल्थ गेम्स में देश के लिए पदक जीतने तक उनकी कहानी देश के लिए प्रेरणादायी है। बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन भी महिलाओं की 75 किग्रा कैटेगरी में रजत पदक जीता था। वहीं, पैरा-पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने पुरुषों के हैवीवेट इवेंट में कांस्य पदक जीता था। झंडू ने 190 किग्रा के बेस्ट लिफ्ट, जो 130.9 पॉइंट्स के बराबर था, की मदद से बीते खेलों में देश को पहला पदक दिलाया था। केबीसी के ताजा सीजन का 10 अगस्त को सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन पर प्रीमियर हुआ, जिसमें यह स्पोर्ट्स तिकड़ी आइकॉनिक हॉट सीट पर अपने संघर्ष और उपलब्धियों की कहानियां लेकर आई है। तीनों पदक विजेताओं की कहानियां निश्चित रूप से देश के युवाओं को अपने सपने को हासिल करने की हिम्मत और प्रेरणा देगी। ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का प्रदर्शन अच्छा रहा था। भारतीय टीम कुल 39 पदक जीतकर पदकतालिका में चौथे स्थान पर रही थी। इन पदकों में 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदक थे। कुश्ती, शूटिंग और हॉकी जैसे खेलों के न होने के बावजूद भारत का शानदार प्रदर्शन एथलेटिक्स में देश के बेहतर भविष्य का संकेत है। भारत के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 मुक्केबाजी के लिहाज से बेहद यादगार रहा। भारतीय मुक्केबाजों ने कुल 7 स्वर्ण जीते। यह कॉमनवेल्थ गेम्स के किसी भी एक संस्करण में मुक्केबाजी में सर्वाधिक स्वर्ण जीतने का रिकॉर्ड है। भारत ने मुक्केबाजी में 7 स्वर्ण के अलावा 3 रजत सहित कुल 10 पदक जीते।

लोकसभा और राज्यसभा में फिर हंगामा, दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित

नई दिल्ली। राज्यसभा और लोकसभा में मंगलवार को एक बार फिर हंगामा व नारेबाजी हुई। संसद में जारी गतिरोध और हंगामे के कारण राज्यसभा व लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के कुछ देर बाद ही स्थगित करनी पड़ी। लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई, वहीं राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। कार्यवाही स्थगित किए जाने से पहले, राज्यसभा में हंगामे के बीच नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे बोलने के लिए सदन में खड़े हुए। हालांकि राज्यसभा में जारी हंगामे के कारण वह अपनी बात नहीं रख सके। दरअसल राज्यसभा में सदन की कार्यवाही शुरू होने के कुछ देर तक शांति बनी रही। इस दौरान संसद की विभिन्न समितियों से जुड़ी कई रिपोर्टों व पेपर सदन में रखे गए। कई सदस्यों ने यहां अपनी अपनी समितियों से जुड़ी रिपोर्ट व पेपर सदन में प्रस्तुत किए। इस कार्यवाही के बाद राज्यसभा में शून्यकाल की कार्यवाही शुरू की जानी थी। लेकिन तभी विपक्षी सांसदों ने जमकर नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्ष के कई सांसद दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस बल के उपयोग का मुद्दा सदन में उठाना चाहते है। वहीं कई सांसद राम मंदिर चढ़ावे का मुद्दा उठा रहे हैं। इसको लेकर सदन में लगातार हंगामा व नारेबाजी होती रही। राज्यसभा व लोकसभा दोनों ही सदनों में मंगलवार को यह हंगामा जारी रहा। लोकसभा में सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही प्रारंभ होने के साथ ही सदन में हंगामा शुरू हो गया। लोकसभा में विपक्षी सांसदों की नारेबाजी को देखते हुए कार्यवाही शुरू होने के कुछ देर बाद ही सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। वहीं राज्यसभा में भारी हंगामे व नारेबाजी के बीच कुछ देर के लिए सदन की कार्यवाही संचालित की गई। लेकिन कुछ ही देर बाद कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दिया गया। गौरतलब है कि संसद में लगातार हंगामा व गतिरोध बना हुआ है जिससे विधायी कार्य प्रभावित हो रहे हैं। दोनों सदनों में विशेष उल्लेख शून्यकाल व प्रश्न काल जैसी महत्वपूर्ण कार्यवाही प्रभावित हुई हैं। मानसून सत्र के दौरान लगातार यह स्थिति बनी हुई है।

अमित शाह के समर्थन में एनडीए सांसदों ने निकाला मार्च, झारखंड मुद्दे पर विपक्ष पर साधा निशाना

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के समर्थन और विपक्ष के विरोध में एनडीए सांसदों ने मंगलवार को संसद के मकर द्वार की ओर मार्च किया। उन्होंने झारखंड में प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से जवाब मांगा। भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने कहा, ‘हम सब हर चर्चा के लिए तैयार हैं, उसके बाद भी राहुल गांधी चर्चा नहीं होने दे रहे हैं। हर बार सदन की कार्यवाही को रोक रहे हैं, इसलिए हम लोग उनके खिलाफ मार्च कर रहे हैं।” भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा,”झारखंड के युवाओं के साथ न्याय हो। उन पर जिस तरह से अत्याचार किया गया ये राहुल गांधी की सोच दिखाती है कि उनके समर्थक राज्य में कैसे युवाओं के साथ अत्याचार हो रहा है और न्याय नहीं हो रहा है। दूसरी ओर वे गृह मंत्री से जवाब मांगते हैं और खुद सदन में नहीं आते हैं। गृह मंत्री जवाब देने को तैयार हैं, लेकिन राहुल गांधी केवल सुर्खियों में बने रहने के लिए झूठे बयान दे रहे हैं।” झारखंड में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को लेकर एनडीए सांसदों ने संसद परिसर में मार्च निकाला। भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा, “कांग्रेस पार्टी ‘झूठ की दुकान’ बन गई है। कांग्रेस छात्रों का इस्तेमाल करके राजनीति करने की कोशिश करती है, लेकिन जब छात्रों को न्याय दिलाने की बात आती है तो राहुल गांधी, कांग्रेस और उनके सहयोगी पीछे हट जाते हैं।” भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने कहा, “रांची में जिस तरह से उनकी सरकार है और जिस तरह से पुलिस ने लाठीचार्ज किया है, वाटर कैनन चलाए हैं आज वे चुप हैं? यहां पर हंगामा है। आज उनकी चुप्पी से वे देश के सामने बेनकाब हो रहे हैं।” केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा, “जिस तरह से विपक्ष पूरे सत्र को बाधित करता रहा। आज जब सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है तो विपक्ष गोलपोस्ट बदलता रहता है। कभी कहता है कि वे एक मुद्दा उठाना चाहते हैं, तो कभी दूसरे पर जवाब मांग रहे हैं। गोलपोस्ट बदलते रहने की विपक्ष और राहुल (गांधी) की इस प्रवृत्ति ने सदन के कामकाज को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है।” भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा, “झारखंड में राहुल गांधी विपक्ष के नेता की तरह जवाब दे रहे हैं। वह जो कहते हैं उसे टाल देते हैं। वह भूल रहे हैं कि झारखंड में छात्र जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। राहुल गांधी शायद भूल रहे हैं कि उनकी पार्टी झारखंड में सरकार में भागीदार है। छात्र बयान नहीं चाहते, वे कार्रवाई चाहते हैं।” भाजपा सांसद निशिकांत दूबे ने कहा, “ये जो राहुल गांधी का दोहरा चरित्र है जिस तरह से मोदी विरोध की उनकी आग है जिसमें देश तोड़ने वाले तत्वों के साथ वो हमेशा शामिल रहते हैं, उनके लिए संदेश है कि अपनी दोहरी मानसिकता को बंद करें। आप छात्रों के साथ आएं और उनको न्याय दिलाएं।” झारखंड में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन पर भाजपा सांसद अशोक मित्तल ने कहा, “छात्रों के साथ हिंसा हुई है। उन्हें पीटा गया और विधानसभा परिसर के अंदर हम पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए। यह बेहद निंदनीय है और वहां की सरकार की ओर से किया गया शर्मनाक काम है, जिसमें कांग्रेस पूरी तरह शामिल है। छात्रों को जिस तरह से पीटा गया, वह बहुत निंदनीय है। दिल्ली में तो उनका दोहरा रवैया रहता था, लेकिन अब वहां पहुंचने पर क्या हो गया है? छात्रों पर लाठीचार्ज किया जा रहा है। मैं इसकी निंदा करता हूं और कहना चाहता हूं कि यही कांग्रेस का असली चेहरा है। हमें इससे खुद को बचाना होगा। छात्रों को इससे बचाना होगा।

हर घर तिरंगा अभियान के तहत प्रयागराज में निकाली गई मोटरसाइकिल रैली

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में स्वतंत्रता दिवस से पहले ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत मंगलवार को तिरंगा यात्रा निकाली गई। सिविल डिफेंस के चीफ वार्डन अनिल गुप्ता ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “हर घर तिरंगा अभियान के तहत मोटरसाइकिल रैली निकाली गई। सुभाष चौक से लेकर शेखर आजाद पार्क तक निकाली जा रही रैली में सिविल डिफेंस, भारत स्काउट, होमगार्ड और पुलिस के जवान शामिल हुए। रीजनल आर्काइव्स ऑफिसर राकेश कुमार वर्मा ने कहा, “पूरे देश में ‘हर तिरंगा अभियान’ के तहत रैलियां निकाली जा रही है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा से पूरे प्रयागराज में विभिन्न तरह की रैलियां निकाली जा रही हैं। तिरंगा मोटरसाइकिल रैली नेता सुभाष चंद्र पार्क से निकलकर चंद्रशेखर शहीद स्थल तक जाएगी। इसी के साथ कई सांस्कृतकि कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।” वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार ने ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को प्रदेश के सभी मदरसों तक पहुंचाने की तैयारी शुरू कर दी है। अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ एवं हज विभाग के राज्यमंत्री दानिश अंसारी ने प्रमुख सचिव, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को सभी मदरसों में अभियान से जुड़े कार्यक्रम आयोजित कराने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने के निर्देश दिए हैं। हर घर तिरंगा भारत सरकार की संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत ‘मेरी सरकार’ के सहयोग से शुरू की गई एक पहल है, जिसका उद्देश्य नागरिकों और भारतीय राष्ट्रीय ध्वज, तिरंगे के बीच एक व्यक्तिगत जुड़ाव को बढ़ावा देना है। यह अभियान प्रत्येक भारतीय को तिरंगे को अपने घर लाने और गर्व से फहराने के लिए प्रोत्साहित करता है, जिससे ध्वज के साथ संबंध एक औपचारिक प्रतीक से बदलकर राष्ट्रीय गौरव की एक भावपूर्ण अभिव्यक्ति बन जाता है। यह अभियान आजादी का अमृत महोत्सव का एक हिस्सा है, जो भारत की स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने का एक व्यापक उत्सव है। यह महोत्सव देशभक्ति गतिविधियों में नागरिकों की भागीदारी को प्रोत्साहित करते हुए देश के इतिहास, संस्कृति और उपलब्धियों को उजागर करता है। हर घर तिरंगा नागरिकों को स्वतंत्रता और एकता का जश्न मनाने में सीधे तौर पर शामिल करने का एक मंच प्रदान करता है।