व्हाट्सएप में वैश्विक स्तर पर आई दिक्कत, फोटो-वीडियो भेजने में परेशानी; कई देशों के यूजर्स प्रभावित

नई दिल्ली। मेटा के स्वामित्व वाले लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप के कई यूजर्स ने सोमवार को सेवा में बाधा (आउटेज) की शिकायत की। इस तकनीकी समस्या का असर खासतौर पर फोटो, वीडियो, स्टिकर्स, गिफ्स (जीआईएफ) और अन्य मीडिया फाइलों को भेजने एवं प्राप्त करने पर देखा गया। भारत समेत कई देशों के यूजर्स ने सोशल मीडिया और आउटेज ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म पर इसकी जानकारी साझा की। आउटेज मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म डाउनडिटेक्टर के अनुसार, सोमवार सुबह से ही बड़ी संख्या में यूजर्स ने व्हाट्सएप में समस्या की रिपोर्ट करनी शुरू कर दी थी। दर्ज शिकायतों में लगभग 41 प्रतिशत समस्याएं मैसेजिंग, 40 प्रतिशत ऐप के संचालन और करीब 13 प्रतिशत नोटिफिकेशन से संबंधित थीं। यूजर्स के अनुसार, सामान्य टेक्स्ट मैसेजिंग सेवा कई मामलों में काम कर रही थी, लेकिन फोटो और वीडियो जैसी मल्टीमीडिया फाइलों को भेजने में दिक्कत आ रही थी। कई लोगों ने बताया कि तस्वीरें चैट विंडो में दिखाई तो दे रही थीं, लेकिन अपलोडिंग प्रक्रिया पूरी नहीं हो रही थी और वे लंबे समय तक ‘सेंडिंग’ स्थिति में अटकी रहती थीं। कुछ उपयोगकर्ताओं ने यह भी शिकायत की कि फोटो और वीडियो अपलोड करते समय लगातार लोडिंग आइकन दिखाई देता रहा या फिर सिस्टम बार-बार रीट्राई करने का संदेश दे रहा था। इसी तरह, स्टिकर्स और गिफ्स भेजने में भी समस्याएं सामने आईं, जिससे यूजर्स का मानना है कि तकनीकी गड़बड़ी मुख्य रूप से व्हाट्सएप की मल्टीमीडिया सेवाओं से जुड़ी थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बड़ी साइज की मीडिया फाइलों पर इसका असर और अधिक देखने को मिला। कई मामलों में ऐसी फाइलें अपलोड ही नहीं हो सकीं या उन्हें भेजने में काफी अधिक समय लगा। यह समस्या केवल किसी एक देश या क्षेत्र तक सीमित नहीं रही। भारत के अलावा ब्रिटेन, फ्रांस, ब्राजील, कनाडा, मेक्सिको, स्पेन और कोलंबिया सहित कई देशों से भी ऐसी शिकायतें सामने आईं। विभिन्न देशों से एक जैसी रिपोर्ट मिलने से संकेत मिला कि यह कोई स्थानीय नेटवर्क या डिवाइस संबंधी समस्या नहीं थी, बल्कि प्लेटफॉर्म स्तर पर तकनीकी बाधा हो सकती है। दिक्कत आने के बाद कई उपयोगकर्ताओं ने अपने स्तर पर समस्या दूर करने की कोशिश भी की। उन्होंने स्मार्टफोन रीस्टार्ट किया, वाई-फाई और मोबाइल डेटा के बीच नेटवर्क बदला तथा कुछ ने ऐप को दोबारा इंस्टॉल भी किया। हालांकि अधिकांश यूजर्स ने बताया कि इन उपायों से समस्या का समाधान नहीं हुआ, विशेषकर फोटो और वीडियो भेजने में परेशानी बनी रही। डाउनडिटेक्टर के अनुसार, रविवार को भी व्हाट्सएप सेवाओं में कुछ व्यवधान की शिकायतें दर्ज की गई थीं। हालांकि खबर लिखे जाने तक व्हाट्सएप या उसकी मूल कंपनी मेटा की ओर से इस तकनीकी समस्या को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था।
शिकागो में फायरिंग के अलग-अलग मामलों में तीन की मौत, दस घायल

न्यूयॉर्क। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सप्ताहांत में हुई कई गोलीबारी की घटनाओं में अमेरिका के शिकागो में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई और 10 अन्य घायल हो गए। सीबीएस शिकागो की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार सुबह 8:22 बजे तक शहर में कुल आठ गोलीबारी की घटनाएं हुईं। सिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, इन घटनाओं में तीन लोगों की जान चली गई और नौ अन्य घायल हुए। घायलों में से दो की हालत गंभीर बताई गई है। इसके अलावा, शनिवार तड़के एक 35 वर्षीय व्यक्ति के सिर में गोली लगी। उसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। रिपोर्ट के अनुसार, इन गोलीबारी की घटनाओं में अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। आंकड़ों के मुताबिक, 7 अप्रैल तक समाप्त हुए 12 महीनों के दौरान शिकागो में बंदूक हिंसा के 1,878 पीड़ित दर्ज किए गए, जिनमें से 356 लोगों की मौत हो गई। इससे पहले, अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना राज्य के कैसवेल काउंटी में एक ग्रामीण इलाके में स्थित घर में सामूहिक गोलीबारी की घटना हुई थी, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई। यह जानकारी नॉर्थ कैरोलिना स्टेट ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन ने दी। पुलिस को बुधवार सुबह स्थानीय समयानुसार 8 बजे से ठीक पहले घटना की सूचना मिली। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने कई लोगों को गोली लगने की हालत में पाया। नॉर्थ कैरोलिना स्टेट ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन ने एक बयान में यह जानकारी दी। बयान में कहा गया कि गोली लगने से घायल एक व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाया गया, जबकि कई अन्य लोगों की मौत हो चुकी थी। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कैसवेल काउंटी के शेरिफ टोनी डर्डन ने बताया कि एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत हुई, जिनमें कथित हमलावर भी शामिल था। परिवार के एक अन्य सदस्य को अस्पताल में भर्ती कराया गया। अमेरिका कई दशकों से बंदूक हिंसा की समस्या से जूझ रहा है और हर साल वहां सैकड़ों सामूहिक गोलीबारी की घटनाएं दर्ज की जाती हैं। इससे पहले दो अगस्त को अमेरिका के ओरेगन राज्य के पोर्टलैंड शहर के एक मोहल्ले में हुई फायरिंग में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और पांच अन्य लोग घायल हो गए थे।
ईरान की संसदीय समिति ने होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए सुरक्षा कार्य योजना को दी मंजूरी

तेहरान। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति ने होर्मुज जलडमरूमध्य और खाड़ी की “सुरक्षा और टिकाऊ प्रगति सुनिश्चित करने” के लिए एक रणनीतिक कार्य योजना की रूपरेखा को मंजूरी दे दी है। सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए ने कमेटी के प्रवक्ता हसन कशकावी के हवाले से बताया कि इस प्लान पर कमेटी की बैठक में चर्चा हुई और इसे बिना किसी विरोध के मंजूरी दे दी गई। सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, कशकावी ने कहा कि प्लान के सामान्य ढांचे को मंजूरी देने से पहले सांसदों ने ईरान की संबंधित संस्थाओं से मिली जानकारियों की समीक्षा की। आईआरएनए के अनुसार, यह कानून 13 जुलाई को औपचारिक रूप से संसद में पेश किया गया था। ईरान ने 28 फरवरी को जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली थी और इजरायल और अमेरिका के जहाजों या उनसे जुड़े जहाजों के सुरक्षित गुजरने पर रोक लगा दी थी। यह कदम ईरानी क्षेत्र पर उनके संयुक्त हमलों के बाद उठाया गया था। जून में ईरान और अमेरिका ने लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करने के लिए एक समझौते (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) पर हस्ताक्षर किए थे। दोनों पक्षों को अंतिम समझौते पर पहुंचने के लिए 60 दिनों के भीतर बातचीत करनी थी, लेकिन हाल ही में इलाके में तनाव बढ़ने से बातचीत का भविष्य अनिश्चित हो गया है। जुलाई में अमेरिकी सेना ने ईरान के ठिकानों पर कई बार हमले किए। उनका कहना था कि ये हमले जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) में जहाजों पर ईरान के हमलों के जवाब में और “व्यावसायिक जहाजों के लिए खतरा पैदा करने की ईरान की क्षमता को कम करने” के मकसद से किए गए थे। इसके जवाब में ईरान ने इलाके में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सुविधाओं पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए। ईरान और ओमान कुछ हफ्तों से जलडमरूमध्य में सुरक्षित समुद्री आवाजाही के लिए एक नया रास्ता तय करने के समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। इससे पहले, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने कहा था कि अभी अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं चल रही है। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ‘तस्नीम’ की रिपोर्ट के अनुसार, विदेश मंत्री ने यह बात विदेश मंत्रालय के ‘सेंटर फॉर पॉलिटिकल एंड इंटरनेशनल स्टडीज’ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कही। अरागची ने कहा, “अभी अमेरिका के साथ हमारी कोई बातचीत नहीं हो रही है। बातचीत फिर से शुरू करने के रास्ते खोजने के लिए मध्यस्थ अभी भी कोशिश कर रहे हैं। हमारे नजरिए से जब तक अमेरिका ‘मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ का उल्लंघन बंद नहीं करता और अपने किए गए उल्लंघनों की भरपाई नहीं करता, तब तक बातचीत फिर से शुरू नहीं हो सकती।
टाइफून नंबर 15 को लेकर जापान में हाई अलर्ट, पीएम तकाइची ने दी सावधानी बरतने की सलाह

नई दिल्ली। जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची ने खराब होते मौसम को लेकर आमजन को आगाह करते हुए सावधानी बरतने की अपील की। पीएम तकाइची ने टाइफून नंबर 15 के चलते भारी बारिश, भूस्खलन, बाढ़ और तेज हवाओं की आशंका के बीच लोगों से समय रहते सुरक्षित स्थानों पर जाने और मौसम संबंधी ताजा जानकारी पर नजर रखने को कहा है। प्रधानमंत्री सनाए तकाइची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बताया कि टाइफून नंबर 15 इस समय जापान के पूर्वी हिस्से के समुद्र में उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ रहा है। आशंका है कि यह कल, यानी 11 तारीख को, दक्षिणी तोहोकू और उत्तरी कांटो क्षेत्रों के काफी करीब पहुंच सकता है और संभव है कि तट से भी टकराए। पीएम तकाइची ने कहा कि सरकार प्रधानमंत्री कार्यालय के संकट प्रबंधन केंद्र में स्थापित ‘सूचना समन्वय कक्ष’ के माध्यम से लगातार स्थिति पर नजर रख रही है और जरूरी जानकारियां जुटा रही है। इसके साथ ही जरूरत पड़ने पर व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा और आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी कदम पूरी तैयारी के साथ उठाए जाएंगे। तकाइची ने कहा कि तोहोकू क्षेत्र के प्रशांत महासागर वाले हिस्से में 11 तारीख की देर सुबह से लेकर देर रात तक भारी बारिश होने की संभावना है। इसलिए भूस्खलन जैसी घटनाओं को लेकर बेहद सावधान रहें। साथ ही निचले इलाकों में जलभराव, नदियों के जलस्तर बढ़ने और उनके उफान पर आने के खतरे पर भी नजर रखें। इसके अलावा, 11 तारीख को सुबह से शाम तक तेज हवाओं के कारण इमारतों को नुकसान पहुंचने और यातायात बाधित होने की आशंका है। समुद्री इलाकों में देर सुबह से देर रात तक ऊंची लहरों और समुद्री उफान के कारण जहाजों तथा तटीय सुविधाओं को नुकसान पहुंच सकता है, इसलिए विशेष सतर्कता बरतें। प्रधानमंत्री ने कहा कि कांटो-कोशिन क्षेत्र में भी 11 तारीख को लगभग दोपहर से देर रात तक ऊंची लहरों, निचले इलाकों में जलभराव और नदियों के जलस्तर बढ़ने या उनके उफान पर आने का खतरा बना रह सकता है। लोगों से सावधानी बरतने की अपील की गई है। उन्होंने कहा कि देश के लोगों से अनुरोध है कि वे पहले से ही अपने इलाके के खतरे वाले स्थानों, सुरक्षित निकासी केंद्रों और वहां तक पहुंचने के रास्तों की जानकारी हासिल कर लें। रेडियो, टीवी, इंटरनेट और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी मौसम और आपदा संबंधी ताजा सूचनाओं पर लगातार ध्यान दें। उन्होंने कहा कि अगर आपको थोड़ा भी खतरा महसूस हो, तो बिना देर किए तुरंत सुरक्षित जगह पर चले जाएं। अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए समय रहते कदम उठाना सबसे जरूरी है।
तकनीक कभी भी कला की जगह नहीं ले सकती : अभिनेत्री तेजस्वी प्रकाश

मुंबई। अभिनेत्री तेजस्वी प्रकाश इन दिनों वेब गेमिंग रियलिटी शो ‘प्लेग्राउंड’ के 5वें सीजन में जज और मेंटोर के रूप में नजर आ रही हैं। अभिनेत्री का मानना है कि एआई किसी भी इंसानी चीजों की जगह नहीं ले सकता है। गेमिंग शो के प्रमोशन के दौरान मुंबई में अभिनेत्री ने आईएएनएस के साथ बातचीत की। इस दौरान अभिनेत्री से पूछा गया कि क्या तकनीक कला को खत्म कर रही है। इस सवाल का जवाब अभिनेत्री ने बड़ी सहजता से दिया। उन्होंने कहा, “तकनीक कभी भी असली आर्ट को रिप्लेस नहीं कर सकती है और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कितने भी ऐसे शो हों, जिनमें एआई का इस्तेमाल किया गया हो। हमने अपने शो में एक एआई कॉन्सेप्ट भी शामिल किया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम इस शो में एआई को मेंटर बना देंगे, मुझे नहीं लगता कि ऐसा कभी हो सकता है।” हालांकि, अभिनेत्री ने भी माना कि कुछ हद तक, विज़ुअल एंटरटेनमेंट में, एआई बेहतर बनाने के लिए एक कारगर टूल हो सकता है। बता दें कि अभिनेत्री इन दिनों अरुष भोला, एल्विश यादव के साथ गेमिंग रियलिटी शो में मेंटोर के रूप में नजर आ रही हैं। ये तीनों इस सीजन में अलग-अलग टीमों का नेतृत्व करते नजर आएंगे। इसके अलावा, इस शो के मुख्य फाउंडर्स और निर्माताओं (जैसे कैरी मिनाटी, मोर्टल और ट्रिगर इनसान) भी अलग-अलग रूपों में इस सीरीज से जुड़े हुए हैं। शो की बात करें, तो यह भारत का पहला गेमिंग और ई-स्पोर्ट्स रियलिटी शो है, जो एंटरटेनमेंट, कंपटीशन और इन्फ्लुएंसर कल्चर को एक साथ मिलाकर बना शो है। यह शो वर्चुअल प्लेग्राउंड के कॉन्सेप्ट पर बना हुआ है। इसमें यंग क्रिएटर्स, गेमर्स और इंटरनेट की मशहूर हस्तियां एक साथ आती हैं। इसमें अलग-अलग चैलेंज में हिस्सा लिया जाता है और साथ ही दोस्ती, दुश्मनी और टीम वर्क को भी मैनेज किया जाता है। यह शो प्रमुख ओटीटी प्लेटफॉर्म अमेजन एमएक्स प्लेयर पर स्ट्रीम किया जा रहा है।

मुंबई। मुंबई की सांताक्रूज पुलिस ने बिहार के दरभंगा जिले के एक गांव से 26 वर्ष के एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। उस पर बॉलीवुड अभिनेत्री और ‘बिग बॉस 2016’ की सेकंड रनर-अप लोपामुद्रा राउत (32) के घर से 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की चोरी का आरोप है। पुलिस के गिरफ्त में आए आरोपी चंदन मुखिया ने कथित तौर पर पांचवीं मंजिल की बालकनी तक पहुंचने के लिए बांस की लाठी का इस्तेमाल किया था। दरवाजा तोड़ने के बाद वह कीमती सामान चुराने के लिए अभिनेत्री के बेडरूम में घुसा था। सांताक्रूज पुलिस के अनुसार, आरोपी के पास से लगभग 51 लाख रुपए का चोरी का सामान बरामद किया गया, जिसमें एक लग्जरी घड़ी, सोने के दो बिस्कुट और नकद पैसे शामिल हैं। पुलिस ने स्थानीय पुलिस की मदद से दरभंगा जिले के गोठ मिट्टी गांव के रहने वाले चंदन मुखिया का पता लगाया और उसे गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, जुलाई में चंदन मुखिया ने कथित तौर पर राउत के घर की रेकी (निगरानी) की और यह पक्का किया कि घर में कोई नहीं है, फिर वह वेंटिलेटर के ज़रिए घर में घुसा। वह मुंबई में बंद घरों की तलाश करता था और चोरी करने के बाद उसी दिन ट्रेन से बिहार लौट जाता था। मुखिया ने कथित तौर पर ऐसी ही एक रेकी के दौरान अभिनेत्री लोपामुद्रा राउत के सांताक्रूज वाले घर को देखा और बाद में मौका मिलने पर वहां चोरी की घटना को अंजाम दिया। पुलिस ने टेक्निकल इंटेलिजेंस (मोबाइल फोन की डिटेल और लोकेशन-आधारित जानकारी) का इस्तेमाल करके उसका पता लगाया। जांच में दरभंगा का नाम सामने आने के बाद, मुंबई पुलिस की एक टीम वहां गई और दरभंगा पुलिस की मदद से सोनकी पुलिस स्टेशन के इलाके में एक जगह पर छापेमारी की। पुलिस ने कहा कि अभी पूरी चोरी की रकम और बाकी कीमती सामान बरामद नहीं हुआ है। जांच करने वाले अब बाकी सामान का पता लगाने और यह पता करने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या इसमें और लोग भी शामिल थे। पुलिस को शक है कि उसने चोरी के कुछ पैसों से अपनी बहन के नाम पर जमीन खरीदी थी।
युगल सैनी की धमाकेदार पारी, सेंट्रल दिल्ली ने साउथ दिल्ली सुपरस्टार्स को 4 विकेट से हराया

नई दिल्ली। दिल्ली प्रीमियर लीग (डीपीएल) 2026 के 19वें मैच में सेंट्रल दिल्ली किंग्स ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए साउथ दिल्ली सुपरस्टार्स को 4 विकेट से हराया। सेंट्रल दिल्ली किंग्स ने साउथ दिल्ली से मिले 221 रनों के लक्ष्य को 2 गेंद शेष रहते हुए 6 विकेट खोकर हासिल किया। हालांकि, विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी सेंट्रल दिल्ली की शुरुआत अच्छी नहीं रही और कप्तान यश धुल सिर्फ एक रन बनाकर आउट हुए। सिद्धार्थ जून अच्छी शुरुआत का फायदा उठाने में नाकाम रहे और 14 गेंदों में 26 रन बनाने के बाद आउट हुए। जोंटी सिद्धू ने 13 गेंदों में 5 चौकों की मदद से 24 रन बनाए। केशव डब्बास अच्छी लय में दिखाई दिए और उन्होंने 27 गेंदों का सामना करते हुए 39 रनों की महत्वपूर्ण पारी खेली। नंबर तीन पर बल्लेबाजी करने उतरे युगल सैनी एक छोर को संभालकर खड़े रहे और उन्होंने महज 45 गेंदों का सामना करते हुए 91 रनों की आतिशी पारी खेली। अपनी इस पारी में उन्होंने 9 चौके और 6 छक्के लगाए। हालांकि, युगल अपने शतक से चूक गए। वंश बेदी ने 13 गेंदों में 4 चौकों की मदद से 21 रन बनाए और टीम को जीत दिलाकर लौटे। गेंदबाजी में साउथ दिल्ली की तरफ से अंशुमन हुड्डा ने सर्वाधिक 3 विकेट चटकाए। इससे पहले, साउथ दिल्ली सुपरस्टार्स ने 20 ओवर में 6 विकेट खोकर स्कोरबोर्ड पर 220 रन लगाए। टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही और अनमोल शर्मा 6 रन बनाकर आउट हुए। सनत सांगवान ने 23 गेंदों में 3 चौके और तीन छक्कों की मदद से 38 रन बनाए। कप्तान आयुष बदोनी ने महज 25 गेंदों का सामना करते हुए 44 रनों की दमदार पारी खेली। उन्होंने अपनी इस पारी में 6 चौके और 2 छक्के लगाए। प्रणव पंत 19 गेंदों में 29 रन बनाए। तेजस्वी दहिया ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए एक चौके और 8 छक्कों की मदद से 31 गेंदों में 69 रनों की धमाकेदार पारी खेली। वहीं, करन गर्ग ने 9 गेंदों में नाबाद 19 रन बनाकर टीम को बड़े लक्ष्य तक पहुंचाया। गेंदबाजी में सेंट्रल दिल्ली की ओर से मनी ग्रेवाल ने 26 रन देकर 2 विकेट चटकाए, जबकि गवनीश खुराना ने भी दो विकेट अपने नाम किए।
ममता बनर्जी पर हमले को दिलीप घोष ने बताया उनके कामों का नतीजा, बोले-पुलिस करेगी कार्रवाई

न्यूटाउन। पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर कानून व्यवस्था को लेकर निशाना साधा है। उन्होंने राज्य में कानून-व्यवस्था, उपद्रवी गतिविधियों को लेकर कहा कि पहले की सरकार के मुकाबले अब काफी सुधार हो रहा है। कानून-व्यवस्था के सवाल पर पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि जो भी कानून के खिलाफ काम करेगा, पुलिस उससे निपटेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में कुछ लोगों ने माहौल खराब किया और सवाल उठाया कि उन्हें ऐसा करने के लिए किसने उकसाया था। दिलीप घोष ने कहा कि ये लोग प्रभाव में काम कर रहे थे और उनकी गतिविधियां असामाजिक तथा राष्ट्र-विरोधी थीं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि ऐसे मामलों में क्या किसी को सजा मिली और क्या किसी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस इन घटनाओं के दौरान केवल देखती रही। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के काफिले पर हमले को लेकर पूछे गए सवाल पर घोष ने कहा कि यह सब उनके कामों का नतीजा है। कानून के खिलाफ काम करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ पुलिस को कार्रवाई करनी चाहिए। ममता बनर्जी पर हुए हमलों के मुद्दे पर दिलीप घोष ने कहा कि यदि कोई कानून तोड़ता है तो पुलिस कार्रवाई करेगी। हालांकि उन्होंने राजनीतिक माहौल और पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ सामने आ रहे विरोध को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। घोष ने कहा कि अभी तक किसी ने उन पर हाथ नहीं उठाया है, लेकिन भविष्य में सबूत सामने आने की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि ममता बनर्जी के महिला होने को उनके लिए “प्लस पॉइंट” बताया। दिलीप घोष ने ममता बनर्जी को लेकर अपनी टिप्पणी में कहा कि वह किसी व्यक्ति पर व्यक्तिगत आरोप नहीं लगा रहे हैं, लेकिन तृणमूल कांग्रेस नेता कुणाल घोष द्वारा पूर्व में ममता बनर्जी के खिलाफ की गई टिप्पणियों का भी उन्होंने जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पूर्व में ममता बनर्जी को लेकर की गई कई टिप्पणियां रिकॉर्ड पर हैं और मीडिया में भी उनके वीडियो सामने आए हैं। वहीं, आरजी कर रेप और मर्डर मामले को लेकर दिलीप घोष ने कहा कि केवल वर्षों की संख्या गिनने से कुछ हासिल नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार के सत्ता में आने के बाद याचिका मिलने पर मामले की फाइल दोबारा खोली गई और नई जांच के आदेश दिए गए हैं। जांच के दौरान जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे निश्चित रूप से सजा मिलेगी।
अमेरिका में खसरे के मामले पिछले 35 सालों में सर्वाधिक स्तर पर, माता-पिता बच्चों को लगवाएं टीके : एनआईएच प्रमुख

वॉशिंगटन। नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ (एनआईएच) के डायरेक्टर डॉ. जे भट्टाचार्य ने रविवार को अमेरिकी माता-पिता से अपील की कि वे अपने बच्चों को स्टैंडर्ड टीके लगवाएं, जिनमें खसरे से बचाव का टीका भी शामिल है, क्योंकि अमेरिका में पिछले 35 सालों में खसरे के सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं। भट्टाचार्य, जो कुछ समय के लिए सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) का नेतृत्व करने में भी मदद कर रहे हैं, ने कहा कि बच्चों को रोकी जा सकने वाली बीमारियों से बचाने का सबसे अच्छा तरीका टीकाकरण ही है। भट्टाचार्य ने सीबीएस न्यूज के प्रोग्राम “फेस द नेशन” में कहा, “अपने बच्चों को खसरे से बचाने का सबसे अच्छा तरीका खसरे का टीका लगवाना है।” उन्होंने कहा कि माता-पिता को बच्चों के लिए स्टैंडर्ड टीके लगवाने चाहिए, जिनमें खसरा, डिप्थीरिया, टेटनस और पर्टुसिस (काली खांसी) से बचाव वाले टीके शामिल हैं। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि माता-पिता के लिए – ज्यादातर बच्चों के मामले में, खासकर खसरे, डीटीपी और बचपन के सभी स्टैंडर्ड टीकों के लिए – यह बहुत जरूरी है कि वे अपने बच्चों को टीका लगवाएं।” भट्टाचार्य ने कहा कि उन्होंने खुद अपने बच्चों को टीके लगवाए हैं। उन्होंने परिवारों से बच्चों को स्कूल भेजने का भी आग्रह किया और कहा कि संक्रमण के डर से उन्हें क्लासरूम से दूर नहीं रखना चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर आप अपने बच्चों को उन बीमारियों से बचाना चाहते हैं जिन्हें रोका जा सकता है, तो उन्हें टीका लगवाएं। किसी भी स्थिति में, बच्चों को स्कूल भेजना बेहतर है क्योंकि इसी तरह आप उन्हें स्वस्थ रख सकते हैं।” सीबीएस एंकर मार्गरेट ब्रेनन ने कहा कि खसरे के मामले पिछले 35 सालों में सबसे ज्यादा स्तर पर हैं। उन्होंने कहा कि केवल 10 राज्य ही 95 प्रतिशत टीकाकरण के उस स्तर तक पहुंचे हैं जिसे बीमारी के लगातार फैलने को रोकने के लिए जरूरी माना जाता है। भट्टाचार्य ने कहा कि साउथ कैरोलिना, टेक्सास, एरिजोना और यूटा में बीमारी के फैलने की समस्या को सुलझा लिया गया है। उन्होंने कहा कि वर्जीनिया में मामले तेजी से कम हो रहे हैं, जबकि पेंसिल्वेनिया में कुछ खास समुदायों पर अभी भी ज्यादा खतरा बना हुआ है। एनआईएच डायरेक्टर ने टीकाकरण की घटती दरों को आंशिक रूप से कोविड-19 महामारी के बाद पब्लिक हेल्थ अधिकारियों पर लोगों का भरोसा कम होने से जोड़ा। उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता भरोसा फिर से कायम करना है। भट्टाचार्य ने उन खबरों पर भी बात की जिनमें कहा गया था कि व्हाइट हाउस टीकों और ऑटिज्म पर एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर तैयार कर रहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी खास बातों के बारे में पता नहीं है और उन्हें लगता है कि ऑर्डर अभी पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने ब्रेनन से कहा, “मुझे ठीक-ठीक नहीं पता कि इस एग्जीक्यूटिव ऑर्डर में क्या है और आपको भी नहीं पता।” भट्टाचार्य ने कहा कि एनआईएच से मदद पाने वाले रिसर्चर ऑटिज्म के मामलों में बढ़ोतरी की कई संभावित वजहों की जांच कर रहे थे। ‘ऑटिज्म डेटा साइंस इनिशिएटिव’ में शामिल एक दर्जन से ज्यादा टीमों के शुरुआती नतीजे कुछ हफ्तों में आने की उम्मीद थी। उन्होंने कहा, “हमें नहीं पता – अगर आप एक साइंटिस्ट के तौर पर मुझसे पूछें कि क्या मुझे पता है कि ऑटिज्म के मामलों में यह बढ़ोतरी क्यों हुई है? तो मैं कहूंगा कि मुझे इस सवाल का जवाब नहीं पता।
सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत ‘तमिल थाई वाजथु’ गीत से होनी चाहिए, सीएम विजय विधानसभा में विशेष प्रस्ताव करेंगे पेश

चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय सोमवार को राज्य विधानसभा में एक विशेष प्रस्ताव पेश करने वाले हैं। इस प्रस्ताव का मकसद यह अनिवार्य बनाना है कि सभी सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत राज्य के प्रार्थना गीत ‘तमिल थाई वाजथु’ से हो। यह प्रस्ताव ऐसे समय में राजनीतिक महत्व रखता है, जब गवर्नर की मौजूदगी वाले सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के गायन को लेकर विवाद चल रहा है। इस मुद्दे ने राज्य में विरोध-प्रदर्शन और राजनीतिक बहस को जन्म दिया है। इस प्रस्ताव के जरिए विजयन सरकार एक समान प्रोटोकॉल लागू करना चाहती है, जिसके तहत राज्य सरकार और उसके नियंत्रण वाले संस्थानों द्वारा आयोजित सरकारी कार्यक्रमों में ‘तमिल थाई वाजथु’ को प्राथमिकता दी जाएगी। प्रस्तावित प्रोटोकॉल के शैक्षिक संस्थानों, सरकारी कार्यालयों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और राज्य द्वारा संचालित अन्य प्रतिष्ठानों में आयोजित कार्यक्रमों पर लागू होने की उम्मीद है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ऐसे कार्यक्रमों की शुरुआत में ‘तमिल थाई वाजथु’ का गायन किया जाएगा। यह कदम गवर्नर के शामिल होने वाले कार्यक्रमों में अपनाए जाने वाले औपचारिक प्रोटोकॉल को लेकर मतभेदों के बीच उठाया गया है। कुछ कार्यक्रमों में ‘तमिल थाई वाजथु’ से पहले ‘वंदे मातरम’ गाए जाने पर राजनीतिक हलकों से आपत्तियां आई हैं। आलोचकों का तर्क है कि राज्य के प्रार्थना-गीत (इनवोकेशन) से जुड़ी स्थापित परंपरा का सम्मान किया जाना चाहिए। उम्मीद है कि इस विशेष प्रस्ताव के जरिए आधिकारिक कार्यक्रमों में ‘तमिल थाई वाजथु’ को दिए जाने वाले महत्व को औपचारिक रूप से दोहराया जाएगा और औपचारिक गीतों को गाए जाने के क्रम को लेकर मौजूद अस्पष्टता को दूर किया जाएगा। जब मुख्यमंत्री विधानसभा में यह प्रस्ताव पेश करेंगे तो विभिन्न राजनीतिक दलों के सदस्यों के चर्चा में भाग लेने की उम्मीद है। उम्मीद है कि सदन में प्रस्ताव को मंजूरी के लिए पेश करने से पहले विधायक अपनी-अपनी पार्टियों का रुख साफ करेंगे। तमिलनाडु में ‘तमिल थाई वाजथु’ के सांस्कृतिक और राजनीतिक महत्व को देखते हुए सरकार सभी पार्टियों के बीच आम सहमति बनाने की कोशिश कर सकती है। उम्मीद है कि बहस के बाद प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी मिल जाएगी, जिससे यह साफ हो जाएगा कि विधानसभा का सामूहिक समर्थन इस बात के लिए है कि राज्य सरकार के कार्यक्रमों में औपचारिक प्रोटोकॉल के तहत तमिल प्रार्थना गीत को पहला स्थान दिया जाए। इस कदम से भविष्य के सरकारी कार्यक्रमों के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश तय हो सकते हैं और सरकारी आयोजनों में प्रार्थना गीतों के क्रम को लेकर होने वाले विवादों को रोका जा सकता है।