संजय दत्त के 67वें जन्मदिन पर बोलीं बहन प्रिया, ‘आपने मां-पिता दोनों की कमी को किया पूरा’

मुंबई,। बॉलीवुड के दमदार अभिनेता संजय दत्त बुधवार को अपना 67वां जन्मदिन मना रहे है। इस मौके पर उनके परिवार के हर सदस्य ने उन्हें खास अंदाज में शुभकामनाएं दीं। सबसे ज्यादा चर्चा उनकी बहन प्रिया दत्त के पोस्ट की हो रही है, जिसमें उन्होंने संजय दत्त को माता और पिता की तरह सपोर्ट करने वाला बड़ा भाई बताया। प्रिया दत्त ने इंस्टाग्राम पर एक पुराना वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने बताया कि माता-पिता के जाने के बाद संजय दत्त ने परिवार में मां और पिता दोनों की कमी को पूरा किया। उन्होंने कहा कि उस मुश्किल दौर में संजय ही परिवार की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आए। वीडियो में प्रिया कहती हैं, “उन्होंने मां और पिता, दोनों की कमी को बहुत खूबसूरती से पूरा किया। हम सभी छोटी बहनें थीं और भैया ही परिवार में कमाने वाले पहले सदस्य थे। हमें हर साल रक्षाबंधन का बेसब्री से इंतजार रहता था कि इस बार भैया हमें क्या गिफ्ट देंगे।” वीडियो के साथ प्रिया ने एक भावुक कैप्शन भी लिखा। उन्होंने कहा, “कुछ रिश्ते समय के साथ और भी मजबूत हो जाते हैं और हमारा रिश्ता भी ऐसा ही है। जिंदगी हमें जहां भी ले गई, परिवार हमेशा हमारी सबसे बड़ी ताकत रहा। मैं आभारी हूं कि हमने यह सफर हमेशा साथ तय किया।” उन्होंने आगे लिखा, “ऐसे ही मजबूत, ख्याल रखने वाले और हमेशा खुद के प्रति सच्चे रहने वाले भाई होने के लिए आपका धन्यवाद। मैं कामना करती हूं कि यह साल आपके लिए अच्छा स्वास्थ्य, ढेर सारी खुशियां, नई यादें और ढेर सारा प्यार लेकर आए, जिसके आप हकदार हैं। आपको जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं।” संजय दत्त के जन्मदिन पर उनके बच्चों ने भी उन्हें खास अंदाज में शुभकामनाएं दीं। उनके जुड़वां बेटे शहरान दत्त, बेटी इकरा दत्त और बड़ी बेटी त्रिशाला दत्त ने सोशल मीडिया पर अपने पिता के लिए प्यार भरे पोस्ट साझा किए। शाहरान दत्त ने अपने पिता के साथ एक तस्वीर पोस्ट की, जिसमें दोनों वाइट कलर के ट्रेडिशनल आउटफिट में नजर आ रहे हैं। संजय दत्त ने अपने लुक को सनग्लासेस के साथ पूरा किया और दोनों कैमरे के सामने मुस्कुराते हुए पोज देते दिखाई दिए। तस्वीर के साथ शाहरान ने लिखा, “दुनिया के सबसे बेहतरीन पापा को जन्मदिन की शुभकामनाएं। हर समय मेरा साथ देने, मेरा हौसला बढ़ाने और हर दिन मुझे प्रेरित करने के लिए आपका धन्यवाद। मैं आपके अच्छे स्वास्थ्य, ढेर सारी खुशियों और आने वाले कई शानदार वर्षों की कामना करता हूं। हमेशा आपसे प्यार करता हूं।” बेटे की इस पोस्ट पर संजय दत्त ने भी प्यार भरा जवाब दिया। उन्होंने लिखा, “आई लव यू और मैं हमेशा तुम्हारे साथ खड़ा रहूंगा, बेटे।” बता दें कि संजय दत्त ने साल 2008 में अभिनेत्री मान्यता दत्त से शादी की थी। अक्टूबर 2010 में दोनों जुड़वां बच्चों, बेटे शाहरान और बेटी इकरा के माता-पिता बने। मान्यता से शादी से पहले संजय दत्त की शादी अभिनेत्री ऋचा शर्मा से हुई थी। इस शादी से उनकी एक बेटी त्रिशाला दत्त हैं। साल 1996 में लंबे समय तक ब्रेन ट्यूमर से जूझने के बाद ऋचा शर्मा का निधन हो गया था।
कांवड़ यात्रा में पहचान छिपाकर प्रसाद बांटने वालों पर कार्रवाई हो: महामंडलेश्वर रामगोपाल दास

इंदौर। सावन माह और कांवड़ यात्रा को लेकर महामंडलेश्वर रामगोपाल दास ने शासन से कांवड़ यात्रा मार्गों पर मांस और शराब की दुकानों को बंद करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा एक धार्मिक और पवित्र यात्रा है, जिसमें श्रद्धालु पवित्र नदियों से जल लेकर भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। ऐसे में यात्रा मार्गों पर श्रद्धालुओं की आस्था और भावनाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए। महामंडलेश्वर रामगोपाल दास ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि सावन के महीने में सनातनी श्रद्धालु बड़ी श्रद्धा के साथ कांवड़ यात्रा निकालते हैं और भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। इस धार्मिक यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की ऐसी गतिविधि नहीं होनी चाहिए, जिससे श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हों। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग नाम बदलकर या अपनी पहचान छिपाकर कांवड़ यात्रियों को भोजन या प्रसाद उपलब्ध कराते हैं। उन्होंने शासन से ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति गलत पहचान के साथ श्रद्धालुओं को प्रसाद या भोजन कराता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। महामंडलेश्वर ने कहा कि हिंदू समाज के लोग कांवड़ यात्रियों और उनकी भोजन व्यवस्था का ध्यान रखने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति सेवा करना चाहता है तो वह अपने नाम और अपनी पहचान के साथ करे, लेकिन किसी भी तरह से भ्रम पैदा करने का प्रयास नहीं होना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसे मामले सामने आते हैं तो वह स्वयं मौके पर पहुंचकर एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई करेंगे। कांवड़ यात्रा मार्गों पर मांस-मदिरा की दुकानों को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि शासन से यह मांग पहले से ही की जाती रही है कि जहां से कांवड़ यात्रा निकलती है, वहां ऐसी दुकानों पर प्रतिबंध लगाया जाए। उन्होंने विशेष रूप से उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर और ओंकारेश्वर जाने वाले कांवड़ यात्रा मार्गों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन रास्तों पर श्रद्धालु धार्मिक भावना के साथ यात्रा करते हैं। इसलिए यात्रा मार्गों पर मांस, मदिरा और अन्य ऐसी दुकानों को सावन महीने के दौरान बंद किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांवड़िये पुण्य कार्य के लिए यात्रा करते हैं, इसलिए प्रशासन को उनकी धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए उचित व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने शासन से अपील की कि कांवड़ यात्रा मार्गों पर सुरक्षा, स्वच्छता और धार्मिक वातावरण बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
प्रियंका गांधी का प्रह्लाद जोशी पर तंज, कहा-सच बोलने के लिए सजा मिले तो भी उठाती रहूंगी आवाज

नई दिल्ली। संसद के मॉनसून सत्र के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के खिलाफ दिए गए अपने बयान को लेकर कहा कि उन्होंने कुछ भी असंसदीय नहीं कहा, बल्कि केवल सच रखा है। उन्होंने कहा कि अगर सच बोलने के लिए उन्हें दंडित किया जाता है, तो भी वह अपनी बात रखना जारी रखेंगी। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि उनके बयान को रिकॉर्ड से हटाए जाने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके द्वारा उठाए गए मुद्दे केवल एक घटना तक सीमित नहीं हैं बल्कि महिलाओं के प्रति सोच और व्यवहार को दर्शाते हैं। उन्होंने मंगलुरु के एक पब में महिलाओं पर हुए हमले का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि उस मामले से जुड़े व्यक्ति को भाजपा में किसने शामिल किया था, यह सवाल उठना चाहिए। उन्होंने कहा कि भले ही बाद में उसे पार्टी से हटा दिया गया हो, लेकिन उसके भाजपा में शामिल होने की तस्वीरें मौजूद हैं। प्रियंका गांधी ने कहा कि महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के मुद्दे पर सवाल उठाना जरूरी है। उन्होंने दोहराया कि संसद में कही गई उनकी बातों में ऐसा कुछ नहीं था जिसे असंसदीय माना जाए। उन्होंने कहा कि वह भविष्य में भी जनता से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाती रहेंगी। उधर, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा के दौरान सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि केवल सजा का प्रावधान करने से समस्या का समाधान नहीं होगा बल्कि पहले पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। शशि थरूर ने कहा कि यदि किसी ने छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है तो उसे सजा मिलनी चाहिए लेकिन कानून बनाने के साथ-साथ व्यवस्था को मजबूत करना भी जरूरी है। उन्होंने फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि न्याय व्यवस्था पर पहले से काफी दबाव है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2025 में फास्ट ट्रैक अदालतों में बड़ी संख्या में नए मामले आए लेकिन उनमें से सीमित मामलों में ही फैसले हो सके। उन्होंने कहा कि केवल कानून पारित कर देने से न्याय सुनिश्चित नहीं हो जाता, इसके लिए न्यायिक क्षमता और संसाधनों को बढ़ाना होगा। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने भी परीक्षा व्यवस्था और सरकार की जवाबदेही को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि परीक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा हो रही है लेकिन प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री सदन में मौजूद नहीं हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष की मांग है कि गृह मंत्री सदन में आकर जवाब दें, लेकिन उनकी अनुपस्थिति में जवाब कैसे दिया जा सकता है। गोगोई ने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर जवाब देने से बच रही है। उन्होंने कहा कि छात्रों और उनके अभिभावकों के साथ हुए अन्याय के खिलाफ विपक्ष ने प्रश्नकाल के दौरान अपनी आवाज उठाई है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी इस मुद्दे पर लोकसभा में अपनी बात रखेंगे। कांग्रेस सांसद के. सुरेश ने भी कहा कि विपक्ष छात्रों की चिंताओं को लेकर लगातार सरकार पर दबाव बना रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने परीक्षा व्यवस्था में खामियों और केंद्रीय परीक्षा कराने के सरकार के फैसले का विरोध किया है। उन्होंने बताया कि राहुल गांधी सदन में छात्रों और उनके अभिभावकों की समस्याओं को उठाएंगे और उनका भाषण महत्वपूर्ण होगा। वहीं, केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के एक ट्वीट से जुड़े सवाल पर के. सुरेश ने कहा कि ये सामान्य मामले हैं। उन्होंने बताया कि विजयन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था और राज्य सरकार पहले ही इन मामलों की जांच के निर्देश दे चुकी है।
गुरु पूर्णिमा पर पतंजलि योगपीठ में जुटे हजारों श्रद्धालु, बाबा रामदेव बोले- ज्ञान और संस्कार से बनेगा नया भारत

हरिद्वार, । गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर हरिद्वार स्थित पतंजलि योगपीठ में हजारों श्रद्धालु एकत्र हुए। इस अवसर पर योग गुरु बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने गुरु-शिष्य परंपरा का महत्व बताया और अपने गुरुओं को स्मरण किया। साथ ही अपने अनुयायियों को आशीर्वाद दिया। कार्यक्रम में योग, भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों और सनातन परंपराओं को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया। बाबा रामदेव ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं बल्कि गुरु के प्रति श्रद्धा, समर्पण और ज्ञान के सम्मान का अवसर है। उन्होंने बताया कि इस दिन हजारों लोग गुरु परंपरा में दीक्षित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्गों और समुदायों के लोग इस परंपरा का हिस्सा बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत की ऋषि परंपरा ज्ञान, संस्कार और मानव कल्याण की परंपरा रही है। उन्होंने यज्ञोपवीत संस्कार का उल्लेख करते हुए कहा कि यह ऋषि संस्कृति और सनातन परंपरा का प्रतीक है। आज सभी वर्गों के लोग इस संस्कार को धारण कर रहे हैं और वेदों तथा भारतीय ज्ञान परंपरा का अध्ययन कर रहे हैं। बाबा रामदेव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में ज्ञान प्राप्त करने का अधिकार सभी को है। महिलाएं भी वेदों का अध्ययन कर रही हैं और यज्ञोपवीत धारण कर रही हैं। उन्होंने कहा कि ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद सहित भारतीय शास्त्रों का अध्ययन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि नया भारत ऐसा होना चाहिए, जहां किसी प्रकार का भेदभाव न हो और सभी लोग समान भाव से आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि सभी मनुष्य एक परमपिता की संतान हैं और समाज को एकता, अखंडता तथा आपसी सहयोग के साथ आगे बढ़ना चाहिए। बाबा रामदेव ने कहा कि अलग-अलग धर्मों और मान्यताओं के बावजूद लोगों के पूर्वज एक हैं। देश की एकता और मानवता के लिए सभी को मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे अपने पूर्वजों के संस्कारों और मूल्यों को अपनाएं तथा राष्ट्र निर्माण में योगदान दें। उन्होंने पतंजलि विश्वविद्यालय, आचार्यकुलम और पतंजलि सिविल सर्विसेज अकादमी के विद्यार्थियों के यज्ञोपवीत और विद्यारंभ संस्कार का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में ये विद्यार्थी देश को बेहतर प्रशासनिक, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक नेतृत्व देने में सक्षम होंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि युवा पीढ़ी भारत को स्वस्थ, समृद्ध, संस्कारवान और शक्तिशाली बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इस दौरान बाबा रामदेव ने हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि लोकतंत्र में असहमति का अधिकार है, लेकिन विरोध का तरीका संवैधानिक और मर्यादित होना चाहिए। गाली-गलौज भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं है और लोगों को अपने बड़ों, माता-पिता और गुरुओं का सम्मान करना चाहिए। बाबा रामदेव ने कहा, “देश सड़कों से नहीं चलेगा, देश संसद से ही चलेगा। शिक्षा मंत्री कौन होगा या कौन नहीं होगा, यह सड़कों पर तय नहीं होगा, बल्कि देश के प्रधानमंत्री और संसद की लोकतांत्रिक प्रक्रिया से तय होगा।” उन्होंने कहा, “कुछ लोगों ने आजादी के नारे लगाए—’ब्राह्मणवाद से आजादी’, ‘आरएसएस से आजादी’ और जाति-पंथ से जुड़े अन्य नारे। यदि कोई व्यक्ति ब्राह्मण परिवार में पैदा हुआ है और उसने आरएसएस से राष्ट्रवाद की शिक्षा ली है, तो इसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।” उन्होंने कहा, “संविधान इस देश के हर नागरिक को समान अधिकार देता है। जो अधिकार दलित, शोषित और वंचित वर्गों को प्राप्त हैं, वही अधिकार ब्राह्मणों सहित सभी समुदायों को भी प्राप्त हैं। इसलिए किसी भी जाति या समुदाय के खिलाफ अपमानजनक भाषा का प्रयोग नहीं होना चाहिए। ब्राह्मणों को गाली देना भी असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक है, और किसी भी अन्य वर्ग या समुदाय का अपमान करना भी गलत है।”
कानून हाथ में लेने वाले छात्रों पर होगी कार्रवाई, छात्र लोकतांत्रिक तरीके से करें विरोध: दिलीप घोष

खड़गपुर। पश्चिम बंगाल में जारी छात्र आंदोलनों को लेकर मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि पश्चिम बंगाल में छात्र विरोध प्रदर्शन कोई नई बात नहीं है। यहां छात्र अक्सर विभिन्न मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतरते रहे हैं और यह राज्य की राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा बन चुका है। पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि छात्रों को लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने का पूरा अधिकार है, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो छात्र आंदोलनों को अपने हित के लिए हाईजैक करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग कानून अपने हाथ में लेते हैं या हिंसा जैसी गतिविधियों में शामिल होते हैं, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। छात्रों को छोड़कर आंदोलन में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जाएगी और दोषियों पर कानून के अनुसार कार्रवाई होगी। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि आंदोलन के नाम पर कानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए दिलीप घोष ने उन्हें “आदतन आंदोलनकारी” बताया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग हमेशा किसी न किसी मुद्दे की तलाश में रहते हैं ताकि आंदोलन शुरू किया जा सके। उनके अनुसार, अब जनता ऐसे लोगों की पहचान समझ चुकी है। वहीं भाजपा सांसद कंगना रनौत की टिप्पणी से जुड़े सवाल पर भी दिलीप घोष ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में छात्र सीजेपी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और जनता ऐसे मामलों में जवाबदेही तय करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिस के साथ दुर्व्यवहार किया गया और पुलिसकर्मियों पर हमला भी किया गया। इसके अलावा, खड़गपुर में विकास कार्यों को लेकर मंत्री ने कहा कि ‘विकसित भारत’ पहल के तहत नालियों के निर्माण, पुराने नालों और सीवरों की सफाई तथा जलभराव की समस्या के समाधान को परियोजनाओं में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि बंगाल में जलभराव एक गंभीर और बार-बार सामने आने वाली समस्या है। सरकार की योजना है कि इन कार्यों के माध्यम से लोगों को राहत दी जाए। उन्होंने बताया कि परियोजनाओं पर काम शुरू होने के बाद स्थानीय लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
यूक्रेन के बंदरगाह पर फंसे नाविकों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता: भारतीय दूतावास

कीव,। यूक्रेन स्थित भारतीय दूतावास ने बुधवार को कहा कि चोर्नोमोर्स्क बंदरगाह पर फंसे मालवाहक जहाज एमवी आमिर1 सवार भारतीय नाविकों की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और इस मामले को “सर्वोच्च प्राथमिकता” दी गई है। दूतावास ने कहा कि भारतीय अधिकारी संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं ताकि सभी नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। ‘फॉरवर्ड सीमेन्स यूनियन ऑफ इंडिया’ (एफएसयूआई) ने इस मामले की ओर ध्यान दिलाया था। यूनियन के अनुसार, चोर्नोमोर्स्क बंदरगाह पर फंसे इस मालवाहक जहाज के 15 सदस्यीय चालक दल में से 13 भारतीय नाविक शामिल हैं। ब्लैक सी (काला सागर) बंदरगाह के आसपास लगातार ड्रोन और मिसाइल हमले हो रहे हैं। भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पोस्ट में कहा, “एमवी आमिर1 पर भारतीय नाविकों से जुड़ी स्थिति हमारे संज्ञान में लाई गई है। हम इस मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहे हैं और सभी संबंधित पक्षों के साथ लगातार संपर्क में हैं ताकि जहाज पर मौजूद सभी भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।” एफएसयूआई ने चेतावनी दी कि चालक दल “बेहद भयावह और जानलेवा स्थिति” में फंसा हुआ है। यूनियन का कहना है कि जहाज पर मौजूद लोग इस डर में जी रहे हैं कि किसी भी समय जहाज पर सीधा हमला हो सकता है, क्योंकि रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष बंदरगाह के आसपास तेज बना हुआ है। नाविक संगठन ने भारतीय सरकार और अन्य संबंधित पक्षों से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। उसने सरकार, जहाज मालिकों, जहाज के ध्वज वाले देश (फ्लैग स्टेट) और अन्य संबंधित अधिकारियों से चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ ही उनकी शीघ्र निकासी और स्वदेश वापसी की व्यवस्था करने की मांग उठाई है। एफएसयूआई ने जहाज से कथित तौर पर रिकॉर्ड किया गया एक वीडियो भी साझा किया है, जिसमें नजदीकी इलाकों से धुएं के घने गुबार उठते दिखाई दे रहे हैं। इससे ब्लैक सी बंदरगाह पर बिगड़ती सुरक्षा स्थिति का पता चलता है। यह ताजा संकट ऐसे समय सामने आया है, जब हाल के दिनों में यूक्रेन के दक्षिणी तट के आसपास संचालित व्यापारी जहाजों पर कई हमले हुए हैं। इसके चलते ब्लैक सी क्षेत्र नागरिक जहाजरानी के लिए लगातार अधिक खतरनाक होता जा रहा है। हालिया हमलों के बाद भारत ने रूस और यूक्रेन, दोनों देशों के राजनयिकों को तलब कर नागरिक व्यापारी जहाजों पर बार-बार हो रहे हमलों को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। नई दिल्ली ने दोनों पक्षों से यह भी आग्रह किया है कि जारी संघर्ष के बीच अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में संचालित वाणिज्यिक जहाजों और नागरिक नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
केरल भाजपा अध्यक्ष ने सीजेपी प्रदर्शनकारियों पर निशाना साधा, उमर खालिद को लेकर सौरव दास का पुराना पोस्ट शेयर किया

नई दिल्ली। केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने बुधवार को छात्र प्रदर्शनकारियों के संदर्भ में बात करते हुए विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों से कहा कि वे सोच-समझकर तय करें कि किसका समर्थन करना है। चंद्रशेखर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के प्रवक्ता सौरव दास की उमर खालिद से जुड़ी एक पुरानी पोस्ट शेयर की। इसके साथ उन्होंने एक तस्वीर भी शेयर की, जिसमें सौरव दास और उमर खालिद साथ नजर आ रहे हैं। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, “उन वास्तविक छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए, जिन्होंने अपनी वास्तविक शिकायतों को लेकर प्रदर्शन किया, मैं कहूंगा कि इस तस्वीर और इसके संदेश को देखें और समझदारी से तय करें कि आप किसके साथ खड़े हैं।” चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि कुछ लोग विभाजनकारी विचारधारा को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने कहा, “अगर आपको लगता है कि आपका भविष्य ऐसे लोगों के हाथों बनेगा, जिनकी विचारधारा भारत को बांटना और तोड़ना है, तो आपको उनकी वास्तविकता समझने की जरूरत है।” भाजपा नेता ने कहा कि किसी भी स्थिति में हिंसक प्रदर्शन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। उन्होंने लिखा, “इस समूह के नेतृत्व में होने वाले प्रदर्शन और हिंसा को किसी भी नाम पर बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए और न ही किया जाएगा, चाहे उसे छात्र आंदोलन ही क्यों न कहा जाए।” देश की एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों का उल्लेख करते हुए चंद्रशेखर ने कहा, “जो भी व्यक्ति, कहीं भी, किसी भी नाम पर हमारे देश, हमारे लोकतंत्र और हमारी अखंडता को कमजोर करने की कोशिश करता है, उसका विरोध करना हम सभी भारतीयों की जिम्मेदारी है। हम एक राष्ट्र के रूप में इतनी दूर इसलिए नहीं आए हैं कि ऐसे लोग हमें कमजोर कर दें। ऐसा नहीं होगा।” पोस्ट के अंत में उन्होंने लिखा, “पीएस: अब मुझे भी इन ‘स्टूडेंट्स’ के बारे में समझ आने लगी है।” चंद्रशेखर ने जो पोस्ट शेयर की, वह सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास की एक पुरानी ‘एक्स’ पोस्ट थी, जिसमें सौरव दास ने उमर खालिद को सपोर्ट किया था। उन्होंने लिखा, “सबसे बहादुर उमर खालिद से मुलाकात हुई। झूठे और बेबुनियाद आरोपों में पांच साल जेल में रहना भारतीय न्यायपालिका पर हमेशा के लिए एक धब्बा है। उनके और उनके कभी न खत्म होने वाले साहस के लिए मेरे मन में बेहद सम्मान है।” चंद्रशेखर ने इसी पोस्ट और तस्वीर का हवाला देते हुए हाल के छात्र प्रदर्शनों से जुड़े कुछ लोगों की विचारधारा पर सवाल उठाए। उनकी यह टिप्पणी छात्र-नेतृत्व वाले प्रदर्शनों और विभिन्न एक्टिविस्ट समूहों की भूमिका को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच आई है, जिसमें विभिन्न राजनीतिक दल प्रदर्शन की प्रकृति और उसके उद्देश्य को लेकर एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं।
चीन की वाई-फाई रणनीति पर अमेरिका सतर्क, यूएस लॉ मेकर्स ने ट्रंप प्रशासन से मांगी विस्तृत योजना

वाशिंगटन। चीन में होने वाले वैश्विक रेडियो सम्मेलन से पहले अमेरिका में चिंता बढ़ गई है। अमेरिकी लॉ मेकर्स के एक द्विदलीय समूह ने ट्रंप प्रशासन से पूछा है कि वह इस अहम सम्मेलन के लिए क्या रणनीति बना रहा है। लॉ मेकर्स का कहना है कि चीन इस मंच का इस्तेमाल वैश्विक स्पेक्ट्रम नियमों को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश कर सकता है, जिसका सीधा असर वाई-फाई, 6जी और अन्य नई संचार तकनीकों के भविष्य पर पड़ेगा। कुल 19 अमेरिकी लॉ मेकर्स ने विदेश विभाग, वाणिज्य विभाग और फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (एफसीसी) को एक संयुक्त पत्र भेजा है। इस पहल का नेतृत्व प्रतिनिधि एप्रिल मैक्लेन डिलेनी और जे. ओबरनोल्टे ने किया। पत्र में 2027 में शंघाई में होने वाले वर्ल्ड रेडियोकम्युनिकेशन कॉन्फ्रेंस की तैयारियों पर विस्तृत जानकारी मांगी गई है। लॉ मेकर्स का कहना है कि इस सम्मेलन में लिए जाने वाले फैसले 6जी नेटवर्क, सैटेलाइट सिस्टम और एडवांस वाई-फाई तकनीक के अंतरराष्ट्रीय नियम तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसलिए अमेरिका को एकजुट रणनीति के साथ सम्मेलन में जाना चाहिए और अपने सहयोगी देशों के साथ मजबूत तालमेल बनाना चाहिए। एप्रिल मैक्लेन डिलेनी ने कहा, “जब चीन समेत अन्य देश वैश्विक स्पेक्ट्रम नीति को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं, तब अमेरिका को पीछे नहीं, बल्कि नेतृत्व करना चाहिए।” उन्होंने कहा कि संघीय एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और सहयोगी देशों के साथ करीबी साझेदारी अमेरिकी नवाचार, आर्थिक प्रतिस्पर्धा और भविष्य की तकनीकों में नेतृत्व बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है। यह पत्र आर्थिक मामलों के अवर विदेश मंत्री जैकब हेलबर्ग, नेशनल टेलीकम्युनिकेशंस एंड इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन की प्रमुख एरियल रोथ और एफसीसी चेयरमैन ब्रेंडन कैर को भेजा गया है। सांसदों ने प्रशासन से पूछा है कि सम्मेलन की तैयारियां वरिष्ठ स्तर पर किस तरह समन्वित की जा रही हैं। साथ ही उन्होंने स्टाफ, संसाधनों और सम्मेलन के लिए अमेरिकी राजदूत की नियुक्ति से जुड़ी जानकारी भी मांगी है। इस पूरे मामले का सबसे अहम मुद्दा 6 गीगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम बैंड है। लॉ मेकर्स का कहना है कि इस बैंड तक बिना लाइसेंस पहुंच बनाए रखना वाई-फाई की क्षमता बढ़ाने, तकनीकी नवाचार, और अमेरिका की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त के लिए बेहद जरूरी है। पत्र में कहा गया है कि अमेरिका में करीब 90 प्रतिशत स्मार्टफोन डेटा का इस्तेमाल वाई-फाई के जरिए होता है, हालांकि यह आंकड़ा ऑपरेटर के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त अनलाइसेंस्ड स्पेक्ट्रम उपलब्ध रहना जरूरी है। सांसदों ने आरोप लगाया कि चीन और उसके समर्थक देश ऊपरी 6 गीगाहर्ट्ज बैंड में केवल लाइसेंस आधारित मॉडल को बढ़ावा दे रहे हैं। उनका मानना है कि अगर ऐसा हुआ तो वैश्विक स्तर पर अनलाइसेंस्ड वाई-फाई के विस्तार को झटका लगेगा और कनेक्टिविटी सेक्टर में अमेरिका का प्रभाव भी कमजोर पड़ सकता है। पत्र में प्रशासन से यह भी पूछा गया है कि समान सोच वाले देशों का गठबंधन बनाने के लिए क्या योजना है। खास तौर पर मेक्सिको और ब्राजील के साथ बातचीत की जानकारी मांगी गई है, क्योंकि सांसदों के अनुसार इन दोनों देशों ने पहले 6 गीगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम के मुद्दे पर कुछ मामलों में चीन का समर्थन किया था। द इंटरनेट एंड टेलीविजन एसोसिएशन ने भी सांसदों की इस पहल का स्वागत किया है। संगठन का कहना है कि पूरे 6 गीगाहर्ट्ज बैंड तक लगातार पहुंच बनाए रखना अगली पीढ़ी के वाई-फाई, उपभोक्ताओं और कारोबारों के हित में है। लॉ मेकर्स ने ट्रंप प्रशासन से 22 अगस्त तक इस पूरे मामले पर लिखित जवाब देने को कहा है। इस पत्र पर राजा कृष्णमूर्ति, डॉन बेकन, कैथी कास्टर, डेबी डिंगेल, सारा एलफ्रेथ, जोश गॉटहाइमर, क्रिसी हूलाहन और डैरिन ला हूड सहित कई अन्य लॉ मेकर्स ने भी हस्ताक्षर किए हैं। बता दें कि वर्ल्ड रेडियोकम्युनिकेशन कॉन्फ्रेंस का आयोजन इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन द्वारा किया जाता है।