नीट यूजी पेपर लीक मामला : सीबीआई की चार्जशीट कोर्ट में पेश, अगली सुनवाई 3 अगस्त को

नई दिल्ली। नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बुधवार को राऊज एवेन्यू कोर्ट को बताया कि इस मामले में दाखिल की गई चार्जशीट करीब 20,000 पेज की है। कोर्ट ने चार्जशीट को रिकॉर्ड पर ले लिया है लेकिन उससे जुड़े एनेक्स्चर (संलग्न दस्तावेज) दाखिल करने के लिए सीबीआई को अतिरिक्त समय दिया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने नोट किया कि चार्जशीट के साथ दस्तावेजों, गवाहों के बयानों और जब्त की गई वस्तुओं की सूची संलग्न की गई है। हालांकि, कोर्ट ने सीबीआई से पूछा कि चार्जशीट में जिन बयानों और अन्य दस्तावेज़ों का हवाला दिया गया है, वे रिकॉर्ड पर कहां हैं। इस पर सीबीआई ने अदालत को बताया कि चार्जशीट से जुड़े करीब 20,000 पेज के एनेक्स्चर दस्तावेज अभी स्कैन किए जा रहे हैं। इसी कारण उन्हें दाखिल करने के लिए कुछ और समय की जरूरत है। अदालत ने सीबीआई की इस मांग को स्वीकार करते हुए दस्तावेज दाखिल करने के लिए समय दे दिया। अब इस बहुचर्चित मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को राउज एवेन्यू कोर्ट में होगी। उम्मीद है कि तब तक सीबीआई चार्जशीट के सभी एनेक्स्चर भी अदालत के समक्ष पेश कर देगी। इसी बीच, इस मामले में अभियोजन पक्ष को और मजबूत करने के लिए सीबीआई ने महत्वपूर्ण नियुक्तियां भी की हैं। एडवोकेट वीके पाठक और एडवोकेट अर्जुन आनंद को नीट पेपर लीक मामले में सीबीआई की ओर से राऊज एवेन्यू कोर्ट की स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट में ‘लोक अभियोजक’ नियुक्त किया गया है। नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामला देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। मामले की जांच सीबीआई कर रही है और अदालत में दाखिल की गई 20 हजार पेज की चार्जशीट को इस जांच का एक अहम चरण माना जा रहा है। अब सभी की नजर 3 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी है।

पीओके के हालात बेकाबू, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 40 निर्दोषों की मौत

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने भारी बल का इस्तेमाल किया। उनकी कार्रवाई में 40 लोगों के मारे जाने और दर्जनों के घायल होने का दावा किया गया है। यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) ने बुधवार को रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि 27 और 28 जुलाई के बीच रावलाकोट, मीरपुर और अन्य क्षेत्रों में करीब 40 नागरिकों की मौत हुई, जबकि कई अन्य घायल हुए और मनमाने ढंग से गिरफ्तार किए गए। संगठन ने गहरी चिंता जताते हुए दावा किया कि 5 जून से अब तक 100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, सैकड़ों घायल हुए और सैकड़ों लोगों को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा कथित तौर पर जबरन लापता किया गया है। यूकेपीएनपी ने पाकिस्तानी बलों की कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा, “शांतिपूर्ण नागरिकों के खिलाफ अत्यधिक या गैरकानूनी बल का प्रयोग अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का गंभीर उल्लंघन है और यह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपराध की श्रेणी में आ सकता है।” संगठन ने संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की। उसने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, घटनाओं की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच कराने और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दायित्वों का सम्मान सुनिश्चित करने की मांग की। इस बीच, जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के नेता सरदार अम्मान खान ने बुधवार को आरोप लगाया कि पाकिस्तानी बलों ने पिछले दो दिनों में दर्जनों प्रदर्शनकारियों की “बेरहमी से हत्या” की है। उन्होंने इस कार्रवाई को “निहत्थे नागरिकों का नरसंहार” करार दिया। अम्मान खान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “सिर्फ दो दिनों में पाकिस्तानी बलों ने 38 शांतिपूर्ण कश्मीरी प्रदर्शनकारियों की बेरहमी से हत्या कर दी। यह कानून लागू करना नहीं, बल्कि अपने बुनियादी अधिकारों की मांग कर रहे निहत्थे नागरिकों का नरसंहार है।” उन्होंने आरोप लगाया कि पीओके में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और पाकिस्तानी प्रशासन शांतिपूर्ण आवाजों का जवाब घातक बल प्रयोग से दे रहा है। अम्मान खान ने हिंसा तत्काल रोकने, मृतकों के लिए न्याय सुनिश्चित करने और घटनाओं की स्वतंत्र जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि “निर्दोष नागरिकों की मौत पर दुनिया चुप नहीं रह सकती।” पीओके में जारी ये प्रदर्शन इस्लामाबाद के लंबे समय से चले आ रहे नियंत्रण को खुली चुनौती के रूप में देखे जा रहे हैं। आरोप है कि इसके जवाब में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने व्यापक दमन अभियान चलाया है, जिसमें निर्दोष लोगों की हत्याएं की गई हैं, कई घायल हुए हैं और बड़े पैमाने पर उत्पीड़न का दौर जारी है। पूरे क्षेत्र में कई दिनों से कड़ी नाकेबंदी, कर्फ्यू और संचार सेवाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लागू है।

मधुमेह, कब्ज और तनाव में लाभकारी ‘अर्ध मत्स्येन्द्रासन’, जाने इसके लाभ

नई दिल्ली। शरीर, मन और आत्मा के संतुलित विकास के लिए योग संस्कृति में अनेकों आसनों का वर्णन मिलता है। ‘अर्ध मत्स्येन्द्रासन’ उन्हीं प्रमुख आसनों में से एक है। यह रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने, पाचन तंत्र को सुदृढ़ करने तथा शरीर की मांसपेशियों को सक्रिय रखने में सहायक माना जाता है। यह आसन हठ योग की प्राचीन परंपरा का अंग है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने इसे लेकर सटीक जानकारी दी है, जिसके अनुसार ‘अर्ध मत्स्येन्द्रासन’ का नियमित अभ्यास करने से एड्रिनल ग्रंथि की स्थिति में सुधार होता है। साथ ही, यह कब्ज, दमा और पाचन संबंधी समस्याओं से निजात भी दिलाता है। मधुमेह रोगियों के लिए भी यह एक अच्छा विकल्प है। साथ ही यह आसन पेनक्रियाज को एक्टिव करता है। यह मांसपेशियों को लचीला बनाता है और ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर करता है और शरीर को डिटॉक्स करता है। इस आसन को करने के लिए सबसे पहले योगा मैट बिछा लें। इसके बाद दंडासन की मुद्रा में बैठ जाएं और रीढ़ को सीधा रखते हुए अपने दाएं पैर के घुटने को मोड़ते हुए बाहर की ओर निकालें। इसके बाद बाएं पैर का तल जमीन पर पूरी तरह टिका होना चाहिए। सिर को दाईं ओर घुमाएं और कंधे की दिशा में देखें। इस दौरान सामान्य गहरी सांस लेनी चाहिए। इसको लगभग 30 सेकंड तक करने के बाद सामान्य स्थिति में ले आएं, लेकिन इस बात का ध्यान रहे कि इसे करने के दौरान ध्यान रीढ़ की हड्डी और सांस पर केंद्रित करना चाहिए। शुरुआती अभ्यास में बहुत अधिक जोर न लगाएं और अभ्यास की अवधि धीरे-धीरे बढ़ाएं। यह आसन करने से पहले योग विशेषज्ञ से परामर्श करना बेहद महत्वपूर्ण है, ताकि सही तरीके से आसन करने की सलाह मिल सके। योग का अहम सूत्र है कि इसे दोपहर में न करें। आसन सूर्योदय या सूर्यास्त के समय करें। गर्मी जब सिर पर हो यानी चरम हो तो दोपहर के सत्र से बचें और एक अहम बात, कुशल योग प्रशिक्षक से सलाह जरूर लें।

50 साल से ज्यादा उम्र के कर्मचारियों में नींद की समस्या आम, काम का तनाव बना बड़ी वजह

नई दिल्ली। 50 साल से अधिक उम्र के कर्मचारियों में नींद से जुड़ी परेशानियां उम्मीद से कहीं ज्यादा आम हैं। एक नए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि काम से जुड़ा तनाव, असंतुलित जीवनशैली और नौकरी से जुड़ी परेशानियां न सिर्फ नींद को प्रभावित कर रही हैं, बल्कि लोगों की मानसिक और शारीरिक सेहत पर भी असर डाल रही हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि करीब 70 प्रतिशत प्रतिभागियों को लगातार ऐसी नींद की समस्या थी, जो चिकित्सकीय रूप से गंभीर मानी जा सकती है। खास बात यह है कि इनमें से किसी भी व्यक्ति का पहले से कोई ज्ञात स्लीप डिसऑर्डर का इतिहास नहीं था। वहीं, करीब 92 प्रतिशत लोगों में अध्ययन के दौरान कम से कम एक बार नींद संबंधी समस्या के मानक पूरे पाए गए। शोधकर्ताओं का कहना है कि इन समस्याओं का संबंध केवल उम्र बढ़ने से नहीं है, बल्कि काम के दबाव और तनाव का भी इसमें बड़ा योगदान है। जिन लोगों ने बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस और नौकरी से संतुष्टि की बात कही, उनमें मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य भी बेहतर पाया गया। वहीं, जो लोग काम के दौरान तनाव, चिड़चिड़ापन या उदासी महसूस करते थे, उनमें स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां ज्यादा देखने को मिलीं। इस अध्ययन में 50 से 66 वर्ष की उम्र के 45 कर्मचारियों को शामिल किया गया। ये लोग अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहे थे। शोधकर्ताओं ने करीब एक साल तक इन लोगों की निगरानी की। इस दौरान उन्होंने प्रतिभागियों से स्वास्थ्य, काम और जीवनशैली से जुड़े सवाल पूछे। इसके अलावा स्मार्टवॉच और अन्य पहनने वाले सेंसर के जरिए उनकी नींद का भी रिकॉर्ड तैयार किया गया। अध्ययन में सामने आया कि ज्यादातर लोग रात में 6.5 से 8 घंटे तक सो रहे थे, लेकिन इसके बावजूद उन्हें सुबह उठने के बाद पूरी तरह आराम महसूस नहीं होता था। इसकी वजह कम सोना नहीं, बल्कि रात में बार-बार नींद टूटना और नींद की गुणवत्ता खराब होना थी। शोधकर्ताओं ने बताया कि कई लोग अपनी खराब नींद का कारण पर्याप्त समय न मिलना मानते हैं, लेकिन स्मार्टवॉच से मिले आंकड़ों ने दिखाया कि असली समस्या बार-बार नींद में खलल पड़ना थी। करीब 90 प्रतिशत प्रतिभागियों में अध्ययन के दौरान नींद में रुकावट देखी गई। शोध में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से यह पता लगाने की कोशिश की गई कि कौन से कारण नींद और स्वास्थ्य पर सबसे ज्यादा असर डालते हैं। इसमें काम से जुड़े अनुभव सबसे महत्वपूर्ण कारणों में सामने आए। इससे संकेत मिलता है कि नौकरी का तनाव नींद और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करने वाला बड़ा कारक हो सकता है। यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग बिजनेस स्कूल की डॉ. बेलिंडा स्टेफन ने कहा कि उम्र बढ़ने के साथ होने वाले बदलावों के अलावा आर्थिक चिंता, परिवार की जिम्मेदारियां और काम का तनाव भी नींद को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि नींद को अब कार्यस्थल की सेहत और कर्मचारियों के कल्याण से जोड़कर देखने की जरूरत है।

भारत के पूर्व सहायक कोच टेन डोशेट की हुई नाइट राइडर्स में वापसी, मिली अहम जिम्मेदारी

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व सहायक कोच रयान टेन डोशेट को नाइट राइडर्स स्पोर्ट्स ने एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। नीदरलैंड के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज को फ्रेंचाइजी का ‘हेड ऑफ क्रिकेट स्ट्रैटेजी’ नियुक्त किया गया है। इस नई भूमिका के साथ टेन डोशेट एक बार फिर नाइट राइडर्स परिवार का हिस्सा बन गए हैं। अब वह फ्रेंचाइजी की अलग-अलग टीमों के लिए खिलाड़ियों की खोज, टीम तैयार करने की रणनीति और भविष्य की योजनाओं पर काम करेंगे। टेन डोशेट की नई जिम्मेदारी काफी अहम होगी। वह खिलाड़ियों की स्काउटिंग, टीम चयन, स्क्वाड प्लानिंग और खिलाड़ियों के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए रणनीति तैयार करेंगे। इसके अलावा वह नाइट राइडर्स की सभी टीमों में एक जैसी क्रिकेट सोच और योजना लागू करने के लिए कोचिंग स्टाफ के साथ मिलकर काम करेंगे। नाइट राइडर्स ग्रुप की कई टीमें दुनिया की अलग-अलग टी20 लीग में हिस्सा लेती हैं। टेन डोशेट को कैरेबियन प्रीमियर लीग (सीपीएल) में ट्रिनबागो नाइट राइडर्स, यूएई की इंटरनेशनल लीग टी20 (आईएलटी20) में अबू धाबी नाइट राइडर्स और मेजर लीग क्रिकेट (एमसीएल) में लॉस एंजिल्स नाइट राइडर्स के लिए असिस्टेंट कोच की भूमिका भी निभानी होगी। अपनी नई जिम्मेदारी मिलने पर टेन डोशेट ने खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि नाइट राइडर्स के साथ दोबारा जुड़ना उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने बताया कि इस भूमिका में उन्हें फ्रेंचाइजी की कोचिंग और विश्लेषण टीमों के साथ काम करने, खिलाड़ियों के विकास की व्यवस्था को मजबूत करने और लंबे समय की क्रिकेट रणनीति बनाने का मौका मिलेगा। टेन डोशेट का नाइट राइडर्स के साथ रिश्ता काफी पुराना है। वह साल 2011 में खिलाड़ी के तौर पर कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) से जुड़े थे। उन्होंने 2012 और 2014 में आईपीएल खिताब जीतने वाली केकेआर टीम का हिस्सा रहते हुए अहम योगदान दिया था। इसके बाद साल 2022 में वह फ्रेंचाइजी के कोचिंग स्टाफ से जुड़े और 2024 में केकेआर के तीसरे आईपीएल खिताब जीतने के दौरान सपोर्ट स्टाफ का हिस्सा रहे। नाइट राइडर्स स्पोर्ट्स के सीईओ वेंकी मैसूर ने टेन डोशेट की वापसी पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि टेन डोशेट को फ्रेंचाइजी की सोच और काम करने के तरीके की गहरी समझ है। उनका अनुभव नाइट राइडर्स के भविष्य के विकास में काफी मददगार साबित होगा। गौरतलब है कि 2024 टी20 विश्व कप जीतने के बाद भारतीय टीम के मुख्य कोच बने गौतम गंभीर की टीम में टेन डोशेट को भी सपोर्ट स्टाफ में शामिल किया गया था। सहायक कोच के तौर पर उन्होंने भारतीय टीम के साथ बल्लेबाजी और फील्डिंग विभाग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके कार्यकाल के दौरान भारतीय टीम ने सीमित ओवर क्रिकेट में कई बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं। भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी 2025 और पुरुष टी20 विश्व कप जीता, जबकि 2026 में अपने खिताब का सफलतापूर्वक बचाव भी किया। हालांकि, उनका कार्यकाल टेस्ट टीम के बदलाव के दौर में एक मुश्किल समय से भी गुजरा। इस दौरान टीम को घरेलू मैदान पर न्यूजीलैंड से 0-3 से सीरीज हार का सामना करना पड़ा, दक्षिण अफ्रीका से 0-2 से हार मिली और ऑस्ट्रेलिया में 2025/26 बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में भी हार का सामना करना पड़ा। टेन डोशेट का भारतीय टीम के साथ अनुबंध जून में समाप्त हो गया था। हालांकि, वह इंग्लैंड के खिलाफ व्हाइट-बॉल सीरीज तक टीम के साथ जुड़े रहे। इस सीरीज में भारत को टी20 और वनडे दोनों में हार का सामना करना पड़ा। टेन डोशेट के भारतीय टीम सेटअप से अलग होने का एक मुख्य कारण टीम के साथ लंबी यात्राएं थीं, जिनके कारण उन्हें लंदन में रहने वाले अपने छोटे बच्चों और परिवार से दूर रहना पड़ता था।

सीडब्ल्यूजी 2026: सदन में लोकसभा अध्यक्ष ने हरजिंदर-गुलवीर समेत मेडल जीतने वाले भारतीय खिलाड़ियों को दी बधाई

नई दिल्ली। स्कॉटलैंड के ग्लासगो में जारी कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों को सदन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बधाई दी है। उन्होंने सदन में प्रश्नकाल की शुरुआत से पहले मंगलवार को सिल्वर मेडल जीतने वाले गुलवीर सिंह और हरजिंदर कौर के प्रदर्शन की तारीफ की। लोकसभा अध्यक्ष ने सदन में कहा, “23वें कॉमनवेल्थ गेम्स में हरजिंदर कौर और गुलवीर सिंह ने सिल्वर मेडल जीतकर देश का गौरव बढ़ाया है। मैं सदन की ओर से देश का मान बढ़ाने वाले सभी खिलाड़ियों, उनके कोच और टीम इंडिया को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूं।” लोकसभा अध्यक्ष द्वारा खिलाड़ियों को बधाई दिए जाने के तुरंत बाद विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया, जिसके चलते सदन की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा। महिला वेटलिफ्टर हरजिंदर कौर ने 69 किलोग्राम वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 227 किलो का भार उठाकर सिल्वर मेडल जीता। उन्होंने स्नैच राउंड में 101 किलो का वजन उठाया। इसके बाद क्लीन एंड जर्क राउंड में उन्होंने 126 किलो का भार उठाकर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। सिल्वर मेडल जीतने के बाद हरजिंदर ने आईएएनएस के साथ बातचीत करते हुए बताया कि वह अपने प्रदर्शन से काफी खुश हैं। उन्होंने कहा कि वह इस बार सोचकर आई थीं कि उन्हें अपने मेडल का रंग बदलना है। दूसरी ओर, गुलवीर सिंह ने 10 हजार मीटर की दौड़ में सिल्वर मेडल अपने नाम किया। उन्होंने रेस को 27:49.78 सेकंड में पूरा करके दूसरा स्थान हासिल किया। वह इस प्रतियोगिता में भारत के लिए मेडल जीतने वाले पहले खिलाड़ी भी बने। भारत का प्रदर्शन कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में अब तक शानदार रहा है। भारत इस टूर्नामेंट में कुल 12 मेडल जीत चुका है, जिसमें 2 गोल्ड, 7 सिल्वर और 3 ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं। देश को पहला गोल्ड मेडल मीराबाई चानू ने वेटलिफ्टिंग में दिलाया। मीराबाई ने 48 किलोग्राम वर्ग में कुल 190 किलो का वजन उठाकर गोल्ड जीता। वहीं, पैरा एथलीट शर्मिला धनखड़ ने एफ57 शॉट पुट में गोल्ड मेडल जीता है।

आईटीआर फाइलिंग: अब तक 4.7 करोड़ लोगों ने दाखिल किया आयकर रिटर्न, 31 जुलाई है आखिरी तारीख

नई दिल्ली। आखिरी तारीख 31 जुलाई नजदीक आने से पहले आयकर रिटर्न दाखिल करने वाले करदाताओं की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है और बुधवार सुबह 11 बजे तक असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए करीब 4.70 करोड़ आयकर रिटर्न दाखिल हो चुके हैं। यह जानकारी आयकर विभाग की वेबसाइट पर दी गई। आयकर विभाग के मुताबिक, असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए दाखिल हुए आईटीआर में से 4.40 करोड़ वेरीफाई हो चुके हैं, जबकि करीब 2.34 करोड़ प्रोसेस हो चुके हैं। वहीं, आयकर विभाग भी करदाताओं को जल्द से जल्द आईटीआर दाखिल करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। आयकर विभाग ने सोशल मीडिया पर की एक पोस्ट में कहा कि आईटीआर भरने को कल पर न टालें और आखिरी तारीख का इंतजार न करें। जल्द से जल्द असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए आईटीआर-1 और आईटीआर-2 फाइल करें। आयकर विभाग ने करदाताओं को यह भी सलाह दी कि वे अपना आयकर रिटर्न दाखिल करने से पहले सभी संबंधित दस्तावेजों का मिलान कर लें। इसमें फॉर्म 16, वार्षिक सूचना विवरण (एआईएस), फॉर्म 26एएस, बैंक स्टेटमेंट और आय से जुड़े अन्य रिकॉर्ड की जांच करना शामिल है, ताकि आईटीआर में दी गई जानकारी पूरी तरह सही और सटीक हो। आईटीआर फाइल करने के लिए अंतिम तारीख 31 जुलाई उन लोगों के लिए है, जिन्हें टैक्स ऑडिट की आवश्यकता नहीं होती। इसमें वेतनभोगी कर्मचारी, पेंशनभोगी, छात्र और अन्य शामिल होते हैं। आईटीआर-1 (सहज) उन व्यक्तिगत करदाताओं के लिए है जिनकी कुल आय वेतन या पेंशन, एक मकान से आय और अन्य स्रोतों (जैसे ब्याज) से होती है। इसे वही व्यक्ति भर सकता है जिसकी कुल वार्षिक आय निर्धारित सीमा 50 लाख के भीतर हो और जिसे व्यवसाय या पेशे से आय, पूंजीगत लाभ (कैपिटल गेन) या एक से अधिक मकानों से आय न हो। सरल आय वाले अधिकांश वेतनभोगी कर्मचारी इसी फॉर्म का उपयोग करते हैं। आईटीआर-2 उन व्यक्तिगत करदाताओं और हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएल) के लिए है जिनकी व्यवसाय या पेशे से आय नहीं होती, लेकिन उन्हें वेतन के अलावा पूंजीगत लाभ, एक से अधिक मकानों से आय, विदेशी संपत्तियों या विदेशी आय और अन्य जटिल आय स्रोतों से आय प्राप्त होती है। जिन लोगों को शेयर, म्यूचुअल फंड या संपत्ति की बिक्री से पूंजीगत लाभ हुआ हो या जिनकी आय का ढांचा अधिक जटिल हो, उन्हें सामान्यतः आईटीआर-2 दाखिल करना पड़ता है।

यूक्रेन के पास ब्लैक सी हमलों के बीच फंसे 13 भारतीय नाविक, समुद्री संगठन ने जताई चिंता

नई दिल्ली/कीव। फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया (एफएसयूआई) के अनुसार, यूक्रेन के चोर्नीमोरस्क बंदरगाह पर एक मालवाहक जहाज पर फंसे 15 चालक दल के सदस्यों में कम से कम 13 भारतीय नाविक शामिल हैं, क्योंकि रणनीतिक काला सागर बंदरगाह के आसपास ड्रोन और मिसाइल हमले जारी हैं। संगठन के अनुसार, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ब्लैक सी बंदरगाह के आसपास ड्रोन और मिसाइल हमले लगातार जारी हैं, जिससे जहाज पर मौजूद चालक दल की जान को गंभीर खतरा बना हुआ है। नाविकों के संगठन ने चेतावनी दी है कि चालक दल एक “भयानक और जानलेवा स्थिति” में फंसा हुआ है। संगठन का कहना है कि रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के कारण जहाज पर मौजूद लोग हर समय इस डर में जी रहे हैं कि किसी भी समय कोई हमला सीधे जहाज को निशाना बना सकता है। एफएसयूआई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से भारत सरकार और अन्य संबंधित पक्षों से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है, ताकि जहाज पर फंसे चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। एफएसयूआई ने अपनी पोस्ट में कहा, “एम.वी. अमीर-1 जो वर्तमान में यूक्रेन के चोर्नोमोर्स्क बंदरगाह पर 15 चालक दल के सदस्यों के साथ मौजूद है, जिनमें 13 भारतीय नाविक शामिल हैं, एक भयानक और जीवन के लिए खतरा पैदा करने वाली स्थिति में फंसा हुआ है।” संगठन ने आगे कहा, “जहाज के बिल्कुल आसपास बार-बार ड्रोन और मिसाइल हमलों की कोशिश की जा रही है। चालक दल हर समय इस डर में रह रहा है कि किसी भी क्षण कोई हमला सीधे जहाज पर हो सकता है।” एफएसयूआई ने भारत सरकार, जहाज के मालिकों, जहाज के पंजीकृत ध्वज वाले देश और अन्य संबंधित अधिकारियों से तुरंत कदम उठाने की मांग की है। संगठन ने चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ उन्हें जल्द से जल्द वहां से निकालने और स्वदेश वापस भेजने की व्यवस्था करने की अपील की है। एफएसयूआई ने एक वीडियो भी साझा किया है, जिसके बारे में दावा किया गया है कि यह जहाज के अंदर से रिकॉर्ड किया गया है। वीडियो में जहाज के आसपास के इलाकों से धुएं के घने गुबार उठते दिखाई दे रहे हैं। यह वीडियो ब्लैक सी बंदरगाह क्षेत्र में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति को दर्शाता है। फिलहाल इस घटना को लेकर भारत के विदेश मंत्रालय या जहाज का संचालन करने वाली कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। यह संकट ऐसे समय सामने आया है जब हाल के दिनों में यूक्रेन के दक्षिणी तट और उसके आसपास काम कर रहे वाणिज्यिक जहाजों पर कई हमले हुए हैं। रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष के कारण ब्लैक सी क्षेत्र नागरिक जहाजों और समुद्री कर्मचारियों के लिए तेजी से खतरनाक क्षेत्र बनता जा रहा है। 18 जुलाई को एमवी ओमोर्फी नामक जहाज पर ब्लैक सी में रूसी क्षेत्रीय जल सीमा के भीतर हमला हुआ था। इस जहाज पर 10 चालक दल के सदस्य मौजूद थे, जिनमें तीन भारतीय नागरिक शामिल थे। इस हमले में एक भारतीय नाविक की मौत हो गई थी। घटना के बाद रूस में भारतीय दूतावास संबंधित अधिकारियों के संपर्क में रहा था। नई दिल्ली ने अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में काम कर रहे वाणिज्यिक जहाजों और नागरिक नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की है। भारत ने कहा है कि मौजूदा संघर्ष के बीच समुद्री परिवहन और नाविकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

जर्मन राजदूत एकरमैन से मिले विदेश मंत्री, भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने में योगदान को सराहा

नई दिल्ली। विदेश मंत्री (ईएएम) एस. जयशंकर ने बुधवार को जर्मनी के राजदूत फिलिप एकरमैन को विदा किया। उन्होंने भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत बनाने में उनके महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की और उनके भविष्य के दायित्वों के लिए शुभकामनाएं दीं। विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए लिखा, “जर्मनी के राजदूत फिलिप एकरमैन के विदा करने से पहले की मुलाकात अच्छी रही।” उन्होंने आगे कहा, “मैंने भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने में उनके बहुमूल्य योगदान की सराहना की। भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।” भारत और जर्मनी अपनी द्विपक्षीय साझेदारी के तहत रणनीतिक, आर्थिक, तकनीकी और कूटनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को लगातार मजबूत कर रहे हैं। भारत स्थित जर्मन मिशन की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, फिलिप एकरमैन ने बॉन, हीडलबर्ग और उट्रेक्ट विश्वविद्यालयों से कला इतिहास और अर्थशास्त्र की पढ़ाई की। वर्ष 1993 में उन्होंने कला इतिहास में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की और उसी वर्ष जर्मन विदेश सेवा में शामिल हुए। अपने कूटनीतिक करियर के दौरान एकरमैन ने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उन्होंने मोरक्को के रबात और न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र में जर्मनी के स्थायी मिशन में भी सेवाएं दीं। वर्ष 2006-07 के दौरान उन्होंने अफगानिस्तान के कुंदुज में जर्मन प्रांतीय पुनर्निर्माण दल का नेतृत्व किया। इसके बाद 2007 से 2010 तक वह नई दिल्ली स्थित जर्मन दूतावास में राजनीतिक सलाहकार रहे। यह भारत में उनकी शुरुआती प्रमुख कूटनीतिक नियुक्तियों में से एक थी। बर्लिन में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने 2002 से 2006 तक जर्मनी के पूर्व विदेश मंत्रियों जोश्का फिशर और फ्रैंक-वाल्टर स्टाइनमायर के कार्यालयों में भी कार्य किया। वर्ष 2010 से 2014 तक एकरमैन जर्मन विदेश मंत्रालय में अफगानिस्तान-पाकिस्तान टास्क फोर्स के प्रमुख रहे और अफगानिस्तान तथा पाकिस्तान के लिए उप-विशेष प्रतिनिधि की जिम्मेदारी भी निभाई। इसके बाद, 2014 से 2016 तक, वह वाशिंगटन स्थित जर्मन दूतावास में उप-मिशन प्रमुख रहे। भारत में जर्मनी के राजदूत बनने से पहले, उन्होंने पांच वर्षों तक जर्मन विदेश मंत्रालय में अफ्रीका, लैटिन अमेरिका तथा निकट और मध्य पूर्व मामलों के महानिदेशक के रूप में कार्य किया। इस महीने की शुरुआत में आईएएनएस को दिए एक विशेष साक्षात्कार में फिलिप एकरमैन ने कहा था कि भारत और जर्मनी नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) के क्षेत्र में सतत विकास के लिए मिलकर काम कर रहे हैं और आने वाले समय में यह साझेदारी और मजबूत होगी। उन्होंने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के मद्देनजर दोनों देशों के लिए ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किसी एक क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता कम करना महत्वपूर्ण है।

जापान में भूकंप के बाद सोनी का कुमामोटो सेमीकंडक्टर प्लांट हुआ बंद

नई दिल्ली। सोनी सेमीकंडक्टर सॉल्यूशंस ने बुधवार को कहा कि जापान के कुमामोटो क्षेत्र में आए शक्तिशाली भूकंप के बाद उसने कुमामोटो टेक्नोलॉजी सेंटर में परिचालन फिलहाल बंद कर दिया गया है। कंपनी प्लांट और उत्पादन लाइनों को हुए संभावित नुकसान का आकलन कर रही है। सोनी ने बताया कि उसके नागासाकी, ओइता और कागोशिमा टेक्नोलॉजी सेंटरों में किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। साथ ही, भूकंप के समय इन केंद्रों पर मौजूद किसी भी कर्मचारी के घायल होने की खबर नहीं है। कंपनी के अनुसार, मंगलवार को स्थानीय समयानुसार शाम 4:27 बजे आए भूकंप के तुरंत बाद किकुयो कस्बे स्थित सोनी सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कॉर्पोरेशन के प्लांट में उत्पादन रोक दिया गया था। कंपनी ने कहा कि कुमामोटो प्लांट की इमारतों और उत्पादन उपकरणों पर भूकंप के प्रभाव का आकलन जारी है। हालांकि, परिचालन दोबारा कब शुरू होगा, इसकी कोई समय-सीमा नहीं बताई गई है। यह व्यवधान मंगलवार को जापान के कुमामोटो क्षेत्र में आए 7.1 तीव्रता के भूकंप के बाद पैदा हुआ। जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची के अनुसार, इस भूकंप में 13 लोगों की मौत हो गई। ताकाइची ने पत्रकारों से कहा, “अब भी कई लोग बचाव का इंतजार कर रहे हैं। हम अधिक से अधिक लोगों को बचाने और राहत पहुंचाने के लिए उपलब्ध सभी संसाधनों का इस्तेमाल करेंगे।” इस बीच, बचाव दल ढही हुई इमारतों के मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटे रहे, जबकि अधिकारी भूकंप से हुए नुकसान का आकलन कर रहे हैं। सोनी सेमीकंडक्टर सॉल्यूशंस कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और औद्योगिक क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाले इमेज सेंसर और अन्य सेमीकंडक्टर कंपोनेंट्स की प्रमुख आपूर्तिकर्ता है। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी इस भूकंप पर चिंता जताई। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “जापान के कुमामोटो प्रांत में आए भूकंप की खबर से गहरी चिंता हुई। इस कठिन समय में हम जापान की सरकार और वहां के लोगों के साथ एकजुटता और समर्थन व्यक्त करते हैं। भूकंप से प्रभावित लोगों की सुरक्षा और शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करते हैं।