‘सुख-दुख के साथी’: राजनाथ सिंह ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और श्रीलंका को रडार उपकरण सौंपे

कोलंबो। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को कोलंबो बंदरगाह पर INS उदयगिरी पर आयोजित एक कार्यक्रम में श्रीलंका को स्पेयर पार्ट्स और उपकरण सौंपे।रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर कहा, “श्रीलंका यात्रा के दौरान कोलंबो बंदरगाह पर INS उदयगिरी पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुआ। इस दौरान श्रीलंका के उप रक्षा मंत्री और अन्य वरिष्ठ सरकारी अधिकारी भी मेरे साथ थे। कार्यक्रम में मैंने श्रीलंकाई वायु सेना के लिए ‘इंद्रा MK-2’ रडार के स्पेयर पार्ट्स, SLN जहाज ‘सयुरा’ के स्पेयर पार्ट्स और इन्फ्लेटेबल टारगेट (हवा भरने योग्य लक्ष्य) श्रीलंकाई अधिकारियों को सौंपे। ये उपकरण श्रीलंकाई सशस्त्र बलों की क्षमता और ताकत को और बढ़ाने में मदद करेंगे।उन्होंने कहा कि विनाशकारी चक्रवात ‘दितवाह’ के दौरान INS उदयगिरी और INS विक्रम सबसे पहले मदद के लिए पहुंचने वाले जहाजों में शामिल थे और उन्होंने श्रीलंका में हमारे भाइयों-बहनों तक राहत सामग्री पहुंचाई थी।राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा, “श्रीलंका के सबसे करीबी पड़ोसी और सांस्कृतिक रूप से जुड़े देश के तौर पर, भारत हर हाल में श्रीलंका के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा। हम एक-दूसरे के ‘सुख-दुख के साथी’ हैं।डेक रिसेप्शन के दौरान रक्षा मंत्री ने कहा, “भारत और श्रीलंका न केवल लंबे समय से दोस्त और पड़ोसी हैं जो हमारी साझा सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और सभ्यतागत विरासत से जुड़े हैं, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी अहम साझेदार हैं।भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ (पड़ोसी पहले) नीति पर जोर देते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि पड़ोसी वही होता है जो न केवल कर्तव्य के नाते, बल्कि गहरी दोस्ती और स्नेह के कारण भी आपकी मदद के लिए आगे आता है।उन्होंने आगे कहा, “यह कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि एक प्रतिबद्धता और वादा है कि हम हर मुश्किल और अच्छी स्थिति में साथ रहेंगे, और हिंदी में हम इसे ‘सुख-दुख के साथी’ कहते हैं।उन्होंने कहा, “हमारे दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे रक्षा और समुद्री सहयोग में हमारा आपसी भरोसा और सम्मान भी दिखता है। द्विपक्षीय और बहुपक्षीय, दोनों ही स्तरों पर हमारी सेनाएं मिलकर काम करती हैं और एक-दूसरे के अनुभवों और संयुक्त अभ्यासों से लाभ उठाती हैं।

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