नई दिल्ली।दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने शहर में पीजी आवासीय भवनों एवं अन्य भवनों के विरुद्ध अपने निरीक्षण एवं प्रवर्तन अभियान को तेज कर दिया है। इस संबंध में की जा रही कार्रवाई का उल्लेख माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष विविध आवेदन (सिविल) डायरी संख्या 17103/2026 की कार्यवाही में भी हुआ है।माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश में एमिकस क्यूरी के इस कथन को दर्ज किया गया है कि “ऐसा प्रतीत होता है कि चीजें सही दिशा में आगे बढ़ रही हैं।” उन्होंने आगे प्रस्तुत किया कि यद्यपि दिल्ली उच्च न्यायालय ने पीजी हॉस्टल से जुड़ी दुखद घटना के बाद इस विषय का संज्ञान लिया था, तथापि संबंधित मुद्दों को वर्तमान कार्यवाही में समय-समय पर पारित आदेशों के अनुपालन में संबंधित प्राधिकरणों द्वारा की जा रही कार्रवाई तथा प्रस्तुत की जा रही रिपोर्टों के माध्यम से संबोधित किया जा रहा है।कार्यवाही में यह भी दर्ज है कि दिल्ली में निरीक्षण किए गए हैं, जिनमें दिल्ली में निर्देशों के अंतर्गत विशेष रूप से शामिल क्षेत्र लाजपत नगर, मालवीय नगर, साकेत और सरोजिनी नगरभी शामिल हैं।एमसीडी ने दिल्लीभर में पीजी आवासीय भवनों का व्यापक सर्वेक्षण पहले किया है। अब तक लगभग 1,355 ऐसे भवनों की पहचान की गई है, जहां पीजी सुविधाएं संचालित हो रही हैं तथा लगभग 27,000 निवासियों का विवरण दर्ज किया गया है। एमसीडी द्वारा निरीक्षण किए जा रहे हैं और जहां भी अनधिकृत निर्माण, परिसर के दुरुपयोग, भवन नियमों, अग्नि सुरक्षा तथा अन्य वैधानिक आवश्यकताओं से संबंधित उल्लंघन पाए जा रहे हैं, वहां प्रवर्तन कार्रवाई की जा रही है।एमसीडी आयुक्त संजीव खिरवार ने दोहराया कि निरीक्षण, सर्वेक्षण एवं प्रवर्तन अभियान दिल्लीभर में निरंतर और प्रभावी रूप से जारी रहेगा। एमसीडी भवन नियमों एवं वैधानिक प्रावधानों के कड़ाई से अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है तथा जनसुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।