नई दिल्ली। स्मार्टफोन, स्टार्टअप, ग्लोबल महत्वाकांक्षाओं और तेज़ी से आत्मविश्वास से भरे भारत के माहौल में पली-बढ़ी पीढ़ी के लिए सबसे अहम सवाल यह नहीं है कि देश कैसे बदला है बल्कि यह है कि क्या युवा भारतीयों को उस बदलाव को आकार देने का आत्मविश्वास दिया गया है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे होने पर बीजेपी के प्रचार का मुख्य केंद्र यही बदलाव है: युवाओं को सिर्फ़ सरकारी योजनाओं का लाभार्थी मानने के बजाय उन्हें देश की तरक्की का सारथी (ड्राइवर) मानने की सोच।बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के अनुसार, पीएम मोदी के शासनकाल में भारतीय महत्वाकांक्षाओं का दायरा बढ़ाने की कोशिश की गई है इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग से लेकर स्टार्टअप, टेक्नोलॉजी, खेल, अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्र शामिल हैं। यह संदेश खास तौर पर उस पीढ़ी के लिए है जो सिर्फ़ नौकरी खोजने के बजाय खुद कुछ बनाना चाहती है।स्टार्टअप इकोसिस्टम इस बदलाव का मुख्य प्रतीक बन गया है। बीजेपी का तर्क है कि भारत के युवा उद्यमी तेज़ी से ‘नौकरी चाहने वालों’ से ‘नौकरी देने वालों’ की ओर बढ़ रहे हैं, जहाँ स्टार्टअप और इनोवेशन आर्थिक अवसरों और देश की तरक्की का ज़रिया बन रहे हैं।यह सोच सिर्फ़ उद्यमिता तक ही सीमित नहीं है। ‘खेलो इंडिया’ और ‘फिट इंडिया’ जैसी पहलों का मकसद खेल, फिटनेस और युवाओं की भागीदारी को सरकारी नीतियों की मुख्यधारा के करीब लाना रहा है। ‘जेन ज़ी’ (Gen Z) के लिए, जो सफलता को ग्लोबल स्तर पर मापने की आदी है, मुख्य संदेश यह है कि भारत को ग्लोबल मंच पर मुकाबला करना चाहिए और जीतना भी चाहिए।शासन की इस कहानी में टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को भी केंद्र में रखा गया है। छात्रों, स्टार्टअप्स, प्रोफेशनल्स और युवा इनोवेटर्स के लिए प्रस्तावित ‘सेवा फर्स्ट – इनोवेशन चैलेंज’ का मकसद राजनीतिक संदेश को भारत की उभरती इनोवेशन संस्कृति से जोड़ना है।लेकिन बीजेपी का तर्क नौकरियों और टेक्नोलॉजी से कहीं आगे जाता है। उसका कहना है कि पीएम मोदी के शासन ने आम भारतीयों की आकांक्षाओं को बदला है बातचीत को बुनियादी सुविधाओं और कल्याणकारी योजनाओं से आगे बढ़ाकर अवसर, उद्यम और नेतृत्व की ओर ले गए हैं।यही सोच महिलाओं के मामले में भी अपनाई गई है। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ से लेकर ‘लखपति दीदी’ और फ़ैसले लेने की प्रक्रिया में ज़्यादा भागीदारी तक, बीजेपी महिलाओं को सिर्फ़ विकास का लाभार्थी नहीं, बल्कि उसकी अगुआ (लीडर) के तौर पर पेश करती है। दावा यह है कि शासन ने ऐसा भारत बनाने की कोशिश की है जहाँ कोई युवा सिर्फ़ अवसर का इंतज़ार न करे—बल्कि उससे खुद अवसर पैदा करने की उम्मीद की जाए। और यही वह संदेश है जो पीढ़ी-विशेष को संबोधित करता है। बीजेपी के एक नेता का कहना है, “2047 तक विकसित भारत का निर्माण सिर्फ़ सरकारें नहीं कर सकतीं। इसे देश के युवाओं की महत्वाकांक्षा, विचारों और उद्यमशीलता से बनाया जाएगा।