यूसीसी में आस्था पर कोई प्रहार नहीं, यह व्यवस्था में सुधार की कोशिश है: मुख्तार अब्बास नकवी

नई दिल्ली। भाजपा के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के यूसीसी पर दिए बयान का समर्थन करते हुए कहा कि यूसीसी में आस्था पर कोई प्रहार नहीं, यह व्यवस्था में सुधार की कोशिश है। नई दिल्ली में आईएएनएस से बातचीत में नकवी ने कहा कि अमित शाह ने संवैधानिक प्रतिबद्धता को दोहराया है। संविधान के अनुच्छेद 44 में संविधान निर्माताओं ने दिशा-निर्देश दिया है कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह समान नागरिक संहिता की दिशा में आगे बढ़े। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश को इस दिशा में तैयार किया गया है और एनडीए की राज्य सरकारें भी यूसीसी को लेकर आगे बढ़ रही हैं। समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सामाजिक व्यवस्था में सुधार करना है। यूसीसी को लेकर सांप्रदायिकता का भ्रम फैलाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। इसमें आस्था पर किसी भी तरह का वार या प्रहार नहीं है, लेकिन हां, व्यवस्था में सुधार जरूर है। ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर राहुल गांधी के बयान पर भी मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि वैश्विक स्तर पर जारी तनाव और चुनौतियों के बीच ब्रिक्स सम्मेलन से जिस तरह के समाधान सामने आए हैं, वह भारत और दुनिया के लिए गर्व की बात है। कुछ लोगों की निराशा समय-समय पर सामने आती रहती है। उन्होंने ब्रिक्स सम्मेलन की सफलता का जिक्र करते हुए विपक्ष पर कटाक्ष किया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नाराज लोगों को लेकर टिप्पणी की है कि नाराज फूफा कभी खुश नहीं होते। एशिया कप की ट्रॉफी भारतीय महिला क्रिकेट टीम द्वारा पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के प्रमुख मोहसिन नकवी से लेने से इनकार करने के सवाल पर मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि ट्रॉफी चोरी करने और सीनाजोरी करने वालों से कौन ट्रॉफी लेगा। खिलाड़ियों को मैदान के अंदर खेलना चाहिए और मैदान के बाहर से बाउंसर मारने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। ऐसी परिस्थितियों में अपमान का घूंट पीना पड़ता है। वंदे मातरम के मुद्दे पर नकवी ने कहा कि दशकों तक इसे लेकर असहिष्णुता का दौर रहा और लोगों के बीच भ्रम एवं भय का माहौल बनाने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि आज अलग-अलग जगहों पर वंदे मातरम के साथ राष्ट्रवाद का संदेश गूंज रहा है, जो अच्छी बात है। अवैध मदरसों के मुद्दे पर मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि जहां मदरसे नियमों के दायरे से बाहर संचालित हो रहे हैं, वहां वैध स्कूल और कॉलेज खोले जाने चाहिए। कई मदरसों में मुख्यधारा की शिक्षा नहीं होती और वहां विभिन्न प्रकार की अनियमितताएं देखने को मिलती हैं। बच्चों को ऐसी शिक्षा व्यवस्था मिलनी चाहिए, जिससे वे मुख्यधारा से जुड़ सकें और उनके भविष्य के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध हों।

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