भारत ने नेपाल के मंत्री को राहत और बचाव का सामान सौंपा

काठमांडू। भारत की ओर से भेजे गए राहत और बचाव के सामान, जिसमें टनल (सुरंग) में बचाव कार्य और फॉरेंसिक जांच के लिए ज़रूरी चीज़ें शामिल हैं, बुधवार को नेपाल के विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार मंत्री महावीर पुन को सौंपे गए।नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर कहा, “राहत और बचाव के सामान (जिसमें टनल में बचाव और फॉरेंसिक जांच का सामान शामिल है) को लेकर भारत की आठवीं उड़ान काठमांडू पहुंची और यह सामान नेपाल के विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार मंत्री महावीर पुन को सौंपा गया।भारत ने 26 अगस्त से आठ विशेष उड़ानों के ज़रिए नेपाल को राहत सामग्री, उपकरण और विशेषज्ञ कर्मी भेजने का काम तेज़ कर दिया है।विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा, “भारत विनाशकारी अचानक आई बाढ़ (फ्लैश फ्लड) के बाद चल रहे बचाव और राहत कार्यों में मदद के लिए नेपाल को मानवीय सहायता देना जारी रखे हुए है। मानवीय सहायता लेकर भारतीय वायु सेना की आठवीं उड़ान आज काठमांडू पहुंची।विदेश मंत्रालय के अनुसार, नेपाल को 130 टन से ज़्यादा राहत सामग्री भेजी गई है। इसके अलावा, नेपाल में चल रहे बचाव, राहत और फॉरेंसिक कार्यों में मदद के लिए भारत से 54 विशेषज्ञ कर्मियों को भी तैनात किया गया है।विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “सामान्य राहत सामग्री (जैसे अस्थायी शेल्टर, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप और दवाएं) के अलावा, भारत ने कुछ खास तरह के सामान और उपकरण भी उपलब्ध कराए हैं, जैसे: (i) टनल और कीचड़ में बचाव कार्य के उपकरण – इनमें मड रेस्क्यू सूट, गैस डिटेक्टर, ब्रीदिंग अपैरेटस, इन्फ्लेटेबल वॉकवे आदि शामिल हैं; (ii) DNA प्रोफाइलिंग के लिए DNA किट, रिएजेंट और उपकरण; और (iii) पोर्टेबल जेनसेट, लाइटिंग टावर और डीवॉटरिंग पंप जैसी चीज़ें।”भारत की विशेष टनल रेस्क्यू टीम ने शुरुआत में नेपाल में दो जगहों – चिलिमे और लांगटांग – पर नेपाली सेना के साथ मिलकर अपना काम शुरू किया था।विदेश मंत्रालय ने बताया, “अभी खोज अभियान मुख्य रूप से चिलिमे में चल रहा है, जहां ऊबड़-खाबड़ ज़मीन, मुश्किल रास्तों और टनल की ढलान की वजह से चुनौतियां आ रही हैं। भारतीय टनल रेस्क्यू टीम लगातार अपना काम कर रही है और मैन्युअल कोशिशों व नई तकनीकों के इस्तेमाल से अच्छी प्रगति सुनिश्चित की है।”मंत्रालय ने कहा कि काम में तेज़ी लाने के लिए एक अस्थायी रास्ता बनाया जा रहा है, जिससे खुदाई करने वाली भारी मशीनें (जैसे एक्सकेवेटर) टनल तक पहुंच सकें। इस ट्रैक के निर्माण में भी अच्छी प्रगति हो रही है और उम्मीद है कि यह अगले दो-तीन दिनों में पूरा हो जाएगा।मंत्रालय ने कहा, “भारतीय फोरेंसिक टीम काठमांडू की दो प्रयोगशालाओं में नेपाल के अधिकारियों के विशेषज्ञों के साथ मिलकर DNA सैंपल की जांच और विश्लेषण का काम कर रही है। भारत की ओर से उपलब्ध कराए जा रहे फोरेंसिक प्रयोगशाला उपकरण, DNA किट और रिएजेंट इन प्रयासों में मदद करेंगे।”

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