पीयूष गोयल ने ब्रिक्स देशों से बाजारों को खोलने और निर्बाध व्यापार सुनिश्चित करने की अपील की

नई दिल्ली। ब्रिक्स देशों के बीच आर्थिक एकीकरण को और गहरा करने पर जोर देते हुए वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि सदस्य देशों को अपने बाजारों को और खोलना चाहिए, नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाना चाहिए और व्यापारिक खेपों की तेज मंजूरी की सुविधा प्रदान करनी चाहिए। राष्ट्रीय राजधानी में ‘ब्रिक्स बिजनेस फोरम’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने सेवा क्षेत्र के बाजारों को अधिक खोलने पर जोर दिया। गोयल ने ब्रिक्स देशों के सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा, “आइए, हम वास्तव में एक-दूसरे के लिए अपने सेवा बाजारों को खोलें।” गोयल ने कहा, “संयुक्त नवाचार एक नया मानदंड बनना चाहिए। हमें एक-दूसरे के उत्पादों के लिए अपने बाजार खोलने चाहिए।” उन्होंने ब्रिक्स देशों के कृषि-तकनीक (एग्री-टेक) स्टार्टअप्स के बीच अधिक सहयोग का आह्वान किया, ताकि किसानों के लिए समाधान विकसित किए जा सकें और लोगों की खाद्य सुरक्षा को मजबूत किया जा सके। वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि ब्रिक्स देशों की आर्थिक ताकत को ठोस कारोबारी परिणामों में बदलना बेहद जरूरी है। उन्होंने बिजनेस फोरम में कहा, “हमारी प्राथमिकताओं में बड़े पैमाने पर प्रौद्योगिकी और नवाचार को बढ़ावा देना, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना, सदस्य देशों के बीच संतुलित व्यापार सुनिश्चित करना और सेवा क्षेत्र में साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाना शामिल है।” भारत की 2026 की अध्यक्षता के तहत नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी की जा रही है। भारत की अध्यक्षता का मार्गदर्शन “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” थीम से हो रहा है। यह थीम मौजूदा उपलब्धियों और संस्थागत प्रभावशीलता को मजबूत करने पर भारत के फोकस को दर्शाती है। इसमें विकास, स्थिरता और नवाचार को एजेंडे के केंद्र में रखा गया है। यह ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को भी रेखांकित करता है। भारत ब्रिक्स को एक रचनात्मक और समाधान-केंद्रित मंच के रूप में और मजबूत करना चाहता है। वर्तमान में ब्रिक्स का विस्तार 11 देशों तक हो चुका है, जिसमें ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) शामिल हैं। सामूहिक रूप से ये देश दुनिया की 49.5 प्रतिशत आबादी, 40 प्रतिशत वैश्विक जीडीपी और 26 प्रतिशत वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं।

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