डीएमके में बड़ा संगठनात्मक बदलाव, 12 साल बाद बैलेट बॉक्स से होंगे आंतरिक चुनाव

चेन्नई। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) ने व्यापक संगठनात्मक पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसका समापन 12 वर्षों बाद पहली बार मतपेटियों (बैलेट बॉक्स) के जरिए पार्टी के आंतरिक चुनाव कराने के साथ होगा। इसे पार्टी पदाधिकारियों के चयन के लिए अधिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह फैसला हाल ही में हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में पार्टी को मिली हार के बाद लिया गया है। चुनावी हार के बाद डीएमके अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने पार्टी के संगठनात्मक ढांचे की समीक्षा करने और सभी स्तरों पर पार्टी को मजबूत बनाने के उपाय सुझाने के लिए 10 सदस्यीय समिति का गठन किया था। समिति ने अब अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, जिसमें पार्टी के पुनर्गठन के लिए विस्तृत रोडमैप पेश किया गया है। सिफारिशों के अनुसार, डीएमके के संगठनात्मक ढांचे में जमीनी स्तर की शाखाओं से लेकर विभाजन और संगठनात्मक सीमाओं का नए सिरे से निर्धारण शामिल है, ताकि कार्यकुशलता बढ़ाई जा सके और स्थानीय स्तर पर समन्वय अलावा, चुनावी टास्क फोर्स के पुनर्गठन और चुनाव अभियान की योजना तथा रणनीति की निगरानी के लिए पार्टी मुख्यालय तक व्यापक बदलाव किए जाएंगे। रिपोर्ट में पार्टी के सभी प्रकोष्ठों के पुनर्गठन की सिफारिश की गई है, ताकि उन्हें अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाया जा सके जिनमें युवा विंग और महिला विंग भी शामिल हैं। इसके अलावा, चुनावी टास्क फोर्स के पुनर्गठन और चुनाव अभियान की योजना तथा रणनीति की निगरानी के लिए एक स्थायी चुनाव प्रबंधन निकाय के गठन का भी सुझाव दिया गया है। व्यापक सुधारों के तहत समिति ने एक उच्चस्तरीय नीति एवं रणनीति थिंक टैंक स्थापित करने की भी सिफारिश की है, जो राजनीतिक कार्ययोजनाएं तैयार करेगा और पार्टी की दीर्घकालिक संगठनात्मक एवं चुनावी रणनीति का मार्गदर्शन करेगा। पुनर्गठन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद डीएमके संगठन के सभी स्तरों पर आंतरिक चुनाव कराएगी, जिनके माध्यम से कार्यकारी पदाधिकारियों का चुनाव किया जाएगा। जिन निर्वाचन क्षेत्रों या संगठनात्मक इकाइयों में किसी पद के लिए एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में होंगे, वहां पार्टी सदस्य मतपेटियों के जरिए मतदान कर सकेंगे। समिति ने यह भी सिफारिश की है कि जिन पदों पर मुकाबला हो, वहां नामांकन के आधार पर पदाधिकारियों के चयन की मौजूदा व्यवस्था समाप्त कर दी जाए। इसके बजाय पात्र पार्टी स्वयंसेवकों और सदस्यों की प्रत्यक्ष वोटिंग के जरिए पदाधिकारियों का चुनाव किया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य पार्टी के भीतर आंतरिक लोकतंत्र और पारदर्शिता को बढ़ावा देना है। समिति की रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद एम.के. स्टालिन ने पार्टी नेतृत्व को संगठनात्मक चुनाव की तैयारियां शुरू करने का निर्देश दे दिया है।

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