एसआईटी से वीरमणि के पॉक्सो मामले से जुड़ी टिप्पणियों को लेकर सीएम विजय और दो मंत्रियों से पूछताछ करने की मांग

चेन्नई। डीएमके ने जेम ग्रुप के चेयरमैन आर. वीरमणि के खिलाफ यौन शोषण के मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी से) से कहा है कि वह मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और दो मंत्रियों से उन आरोपों के बारे में पूछताछ करे, जिनमें कहा गया है कि पार्टी ने उन्हें बचाया था। डीएमके के कोषाध्यक्ष और सांसद टी.आर. बालू ने एसआईटी को एक याचिका सौंपी, जिसमें मुख्यमंत्री विजय, मंत्री अधव अर्जुन और कानून मंत्री सीटीआर निर्मल कुमार के बयानों के पीछे के सबूत मांगे गए। याचिका में कहा गया कि ये दावे जांच के लिए अहम हैं। नाबालिगों के यौन शोषण के आरोपों से जुड़े एक मामले में वीरमणि को गिरफ्तार किया गया है। इस मामले ने राजनीतिक बयानबाजी और निष्पक्ष जांच की मांग को हवा दी है। बालू की याचिका के अनुसार, मुख्यमंत्री विजय ने 25 सितंबर को आरोप लगाया कि डीएमके वीरमणि को बचा रही थी। याचिका में कहा गया है कि उसी दिन अधव अर्जुन ने दावा किया कि पार्टी ने वीरमणि को बचाया और उनके खिलाफ पहले से चल रहे एक मामले को गलत तरीके से बंद कर दिया। याचिका के मुताबिक, निर्मल कुमार ने 26 सितंबर को आरोप लगाया कि डीएमके को वीरमणि को बचाने के बदले 500 करोड़ रुपये मिले थे। डीएमके ने इन दावों को मानहानिपूर्ण बताया। बालू ने कहा कि जांचकर्ताओं को इन बयानों की जांच करनी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि हो सकता है कि इन तीनों नेताओं के पास मामले से जुड़े ऐसे सबूत हों जो उन्होंने अभी तक पुलिस को नहीं दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हो सकता है कि उन्हें जांच से जुड़ी गोपनीय जानकारी मिली हो, जिसमें केस डायरी की सामग्री भी शामिल हो सकती है और उन्होंने उसे सार्वजनिक कर दिया हो। उन्होंने एसआईटी से यह पता लगाने को भी कहा कि क्या ये आरोप बेबुनियाद हैं। याचिका में जांचकर्ताओं से आग्रह किया गया कि वे मुख्यमंत्री और दोनों मंत्रियों को बुलाएं, उनके बयान दर्ज करें और उनके दावों का समर्थन करने वाले कोई भी दस्तावेज या अन्य सामग्री हासिल करें। इसमें यह भी पूछा गया कि मामले से जुड़े सबूत जांच अधिकारियों को पहले क्यों नहीं सौंपे गए और क्या बिना इजाजत के गोपनीय रिकॉर्ड देखे या उजागर किए गए। बालू ने एसआईटी से कहा कि वह तुरंत सबूत इकट्ठा करे और उन्हें छिपाने या नष्ट होने से रोके। उन्होंने कहा कि अगर जांच में यह पता चलता है कि जानकारी छिपाई गई थी, जांच से जुड़ी सामग्री गलत तरीके से उजागर की गई थी, या आरोप जानबूझकर झूठे थे, तो ‘बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम’ (पोक्सो) और ‘भारतीय न्याय संहिता’ के संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। डीएमके ने कहा कि कथित अपराधों में शामिल किसी भी व्यक्ति को, चाहे उसका पद कुछ भी हो, कानून का सामना करना चाहिए और सार्वजनिक दावों की निष्पक्ष जांच से एसआईटी की जांच पर भरोसा बढ़ेगा।
यूपी : एक लाख विद्यार्थियों को सीएम योगी ने दी स्टडी टेबल, बच्चों ने निराले अंदाज में जताया आभार

लखनऊ। किसी ने फूलों से चिट्ठी सजाई, किसी ने अपनी नई स्टडी टेबल का चित्र बनाया तो किसी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीर के साथ ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का संदेश उकेरा। देवीपाटन मंडल में एक लाख बच्चों को मिली स्टडी टेबल अब उनके घर में पढ़ाई का अपना छोटा सा कोना बन रही है। इस पहल से खुश बच्चों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपने हाथों से पत्र लिखकर धन्यवाद दिया है। इन मासूम चिट्ठियों में सरकारी योजना के आंकड़ों से इतर बच्चों की वह खुशी दिखाई देती है, जो घर में पढ़ाई के लिए अपनी स्टडी टेबल मिलने से उनके जीवन में आई है। स्टडी टेबल पाने वाली स्वाति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे अपने पत्र में खुशी जाहिर की है। उसने लिखा कि उसे स्टडी टेबल और पढ़ने की सामग्री दी गई है, जिसके लिए वह दिल से धन्यवाद करती है। स्वाति ने बताया कि वह प्रतिदिन स्टडी टेबल पर पढ़ाई करती है और मिली सामग्री का उपयोग करती है। उसने अपने पत्र को फूलों से सजाने के साथ नीचे स्टडी टेबल, किताब और पेंसिल का चित्र भी बनाया है। कक्षा छह की छात्रा सबा की चिट्ठी स्टडी टेबल से उसकी रोजमर्रा की पढ़ाई में आए बदलाव को बयां करती है। मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हुए सबा ने लिखा कि पहले उसे घर पर पढ़ाई करने में बहुत असुविधा होती थी। अब स्टडी टेबल मिलने से उसे पढ़ने में सहूलियत हुई है। अपनी मासूम भाषा में उसने लिखा कि अब उसकी पीठ भी दर्द नहीं करती। पत्र के साथ सबा ने स्टडी टेबल का चित्र भी बनाया और ‘सब पढ़ें-सब बढ़ें’ का संदेश लिखा। कक्षा सात की नुजहत फातिमा ने मुख्यमंत्री के नाम नीले चार्ट पेपर पर ‘आभार पत्र’ तैयार किया। नुजहत ने लिखा कि स्टडी टेबल मिलने से उसे पढ़ाई का अच्छा वातावरण मिला है। इससे पढ़ाई में उसकी रुचि बढ़ी है और वह पहले की तुलना में अधिक एकाग्र होकर पढ़ पा रही है। उसने यह भी लिखा कि गृहकार्य पूरा करने और पढ़े हुए पाठ को दोहराने में वह स्टडी टेबल का इस्तेमाल कर रही है। पत्र में रंगीन पेंसिलों के साथ पढ़ती हुई छात्रा का चित्र बनाकर उसने मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया। बच्चों के आभार पत्र केवल शब्दों तक सीमित नहीं हैं। कई छात्र-छात्राओं ने पूरी रचनात्मकता के साथ पोस्टर तैयार किए हैं। एक बच्चे ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बड़ा चित्र बनाया और दोनों ओर ‘बेटी बचाओ’ और ‘बेटी पढ़ाओ’ लिखा। नीचे स्टडी टेबल प्राप्त करती छात्रा का चित्र बनाया गया है। एक अन्य पोस्टर में स्कूल के गेट पर छात्रा को टेबल सौंपते दिखाते हुए लिखा गया ‘बेटी पढ़ेगी, आगे बढ़ेगी, उत्तर प्रदेश का नाम बढ़ाएगी।’ एक बच्चे ने बड़े अक्षरों में ‘थैक्यू’ लिखकर मुख्यमंत्री, छात्रा और स्टडी टेबल को एक साथ चित्रित किया। मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने बताया कि देवीपाटन मंडल के चार जिलों में ‘शिक्षा की उड़ान’ स्टडी टेबल वितरण अभियान के तहत एक लाख टेबल बांटने का लक्ष्य रखा गया था, जिसे शत-प्रतिशत पूरा किया गया है। अभियान का उद्देश्य घर पर अनुशासित पढ़ाई की संस्कृति विकसित करने के साथ सरकारी विद्यालयों में शैक्षणिक उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करना है। मेधावी विद्यार्थियों को स्टडी टेबल उपलब्ध कराकर कक्षा के बाहर भी निरंतर और एकाग्र अध्ययन के लिए जगह उपलब्ध कराने की पहल की गई है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण परिवेश के बच्चों को स्टडी टेबल दी गई है, जो अब उनका पर्सनल स्टडी स्पेस बन चुका है। मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल के अनुसार अभियान में सबसे अधिक बहराइच में 34,260 टेबल दी गईं। इसके बाद गोंडा में 27,650, बलरामपुर में 26,984 और श्रावस्ती में 11,106 स्टडी टेबल का वितरण किया गया। इस तरह मंडल ने एक लाख टेबल का निर्धारित लक्ष्य पूरा किया। उन्होंने बताया कि ‘शिक्षा की उड़ान’ अभियान में सरकारी विद्यालयों के सर्वोच्च प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को स्टडी टेबल देने की व्यवस्था की गई। इसके साथ ही कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की सभी छात्राओं को लाभार्थियों में शामिल किया गया है। इसे सतत अभियान के रूप में तैयार किया गया है, ताकि भविष्य में भी टॉपर विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया जा सके।
महाराष्ट्र में बाढ़ से कटे भामरागढ़ में तीन गंभीर मरीजों को हेलीकॉप्टर से पहुंचाया गया अस्पताल

गढ़चिरौली। महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के भामरागढ़ तहसील में लगातार बारिश और बाढ़ की स्थिति के बीच गंभीर मरीजों तक समय पर चिकित्सा सुविधा पहुंचाने के लिए प्रशासन ने तात्कालिक कदम उठाया है। भामरागढ़ तहसील के तीन गंभीर मरीजों को हेलीकॉप्टर की मदद से हेडरी स्थित अस्पताल पहुंचाया गया। जिलाधिकारी अविश्यांत पंडा के मार्गदर्शन और निर्देश पर यह तत्काल राहत एवं चिकित्सा सहायता अभियान चलाया गया। बाढ़ और अतिवृष्टि के कारण भामरागढ़ तहसील के कई दुर्गम क्षेत्रों में आवागमन प्रभावित हुआ है। ऐसे हालात में गंभीर मरीजों को सामान्य मार्ग से अस्पताल तक पहुंचाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। इसी परिस्थिति को देखते हुए प्रशासन ने मरीजों को समय पर उच्चस्तरीय उपचार उपलब्ध कराने के लिए हेलीकॉप्टर की व्यवस्था की। जानकारी के अनुसार, बिनागुंडा गांव से एक दिन पहले लाहेरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराई गई 7 वर्षीय संगीता चुक्कू उसेंडी की तबीयत गंभीर थी। उसकी स्थिति को देखते हुए उसे रविवार को लाहेरी से हेलीकॉप्टर के माध्यम से हेडरी ले जाया गया, जहां आगे का उपचार किया जा रहा है। इसी तरह, अपेक्षा ऋषी आलाम और रोशन चिना मडावी नामक दो अन्य मरीजों को भी गंभीर स्थिति को देखते हुए आगे के उपचार के लिए हेडरी स्थानांतरित किया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन मरीजों में सिकलसेल से पीड़ित मरीज भी शामिल है, जिसके लिए समय पर उचित चिकित्सा उपचार मिलना आवश्यक था। इस आपात स्थिति में चिकित्सा सहायता के लिए क्षेत्र में उपलब्ध लॉयड्स मेटल्स कंपनी के हेलीकॉप्टर का उपयोग किया गया। प्रशासन ने उपलब्ध संसाधनों का तत्काल उपयोग करते हुए मरीजों को सुरक्षित और जल्द से जल्द हेडरी पहुंचाने की व्यवस्था की। पूरे अभियान के दौरान आदिवासी विकास परियोजना के परियोजना अधिकारी अमर राऊत और भामरागढ़ के तहसीलदार किशोर बागडे ने आवश्यक व्यवस्था और समन्वय किया। मरीजों के साथ निर्मला आलाम और चिना कुडयामी भी मौजूद रहे। भामरागढ़ जैसे दुर्गम और बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में आपातकालीन स्थिति के दौरान मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में हेलीकॉप्टर के माध्यम से तीन गंभीर मरीजों को सुरक्षित रूप से हेडरी पहुंचाया जाना राहत कार्य की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। प्रशासन की त्वरित कार्रवाई के कारण तीनों मरीजों को समय पर आगे के उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाने में सफलता मिली।
रेलवे की तमिलनाडु सरकार से मांग, पटरियों के पास की 43 शराब दुकानें शिफ्ट की जाएं

चेन्नई। दक्षिण रेलवे ने तमिलनाडु सरकार से चेन्नई और आसपास के जिलों में स्टेशनों और पटरियों के पास मौजूद टैसमैक शराब की 43 दुकानों को दूसरी जगह शिफ्ट करने को कहा है। रेलवे ने इसके लिए पटरियों पर अनाधिकृत रूप से चलने से होने वाली मौतों, दुर्घटनाओं और यात्रियों की ओर से लगातार मिल रही शिकायतों का हवाला दिया है। टैसमैक तमिलनाडु सरकार के स्वामित्व वाली एक कंपनी है, जिसका राज्य में शराब के थोक और खुदरा व्यापार पर पूरा नियंत्रण (एकाधिकार) है। रेलवे सूत्रों के मुताबिक, चेन्नई रेलवे डिवीजन ने सबसे पहले सितंबर 2024 में और फिर मई 2025 में राज्य सरकार द्वारा संचालित शराब विक्रेता को पत्र लिखा था। कोई जवाब न मिलने पर, इस साल जुलाई में यह मामला मुख्य सचिव के सामने उठाया गया। जिन आउटलेट्स की पहचान की गई है, वे चेन्नई, तिरुवल्लूर, वेल्लोर, तिरुपत्तूर, रानीपेट और कांचीपुरम जिलों में स्थित हैं। रेलवे अधिकारियों ने रॉयपुरम, कोरुकुपेट, पेराम्बुर, जोलारपेट, विल्लीवक्कम, अवादी, एन्नोर, तिरुवलंगडु और नंदीअम्बक्कम जैसी जगहों की पहचान की है। अधिकारियों का कहना है कि दुकानों के पास शराब पीने वाले लोग कभी-कभी रेलवे की प्रॉपर्टी में घुस जाते हैं, खतरनाक जगहों पर पटरियां पार करते हैं, ट्रेनों में खतरनाक तरीके से यात्रा करते हैं या प्लेटफॉर्म और कोच के अंदर सो जाते हैं। उन्होंने महिला यात्रियों के साथ छेड़छाड़, रेलवे कर्मचारियों को परेशान करने, गंदगी फैलाने, चोरी करने और तांबे के सिग्नल वायर जैसी रेलवे की चीजों के साथ छेड़छाड़ की भी शिकायतें की हैं। यात्री प्रतिनिधियों ने बताया कि अम्बाटुर, तिरुवल्लुर, अवादी और ताम्बरम सैनिटोरियम स्टेशनों के पास यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। अंबत्तूर में कुछ ग्राहक लोकल ट्रेनों में शराब ले जाते हैं और कोच के फर्श पर बैठ जाते हैं। खबरों के मुताबिक, तिरुवल्लूर का सब-वे शराब पीने की जगह बन गया है, जिससे महिलाएं अंधेरा होने के बाद इसका इस्तेमाल करने से कतराती हैं। अवाडी में स्टेशन रोड पर एक आउटलेट के पास जमा होने वाले लोगों के समूहों की वजह से स्टेशन, अस्पताल और मंदिर तक आने-जाने में परेशानी होती है। हालांकि, टैसमैक अधिकारियों का कहना है कि दूसरी जगह ढूंढना मुश्किल है। कॉर्पोरेशन ने तमिलनाडु में 100 से ज्यादा आउटलेट को दूसरी जगह शिफ्ट करने पर विचार किया है लेकिन कई प्रस्तावित जगहों पर स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई या वे जगहें सही नहीं पाई गईं। हाल के महीनों में रेलवे प्रतिष्ठानों के पास कम से कम सात दुकानें बंद कर दी गई हैं या दूसरी जगह शिफ्ट कर दी गई हैं। टीवीके सरकार ने हाल ही में शिक्षण संस्थानों, पूजा स्थलों और बस स्टैंड के 500 मीटर के दायरे में आने वाले 717 टैसमैक आउटलेट बंद कर दिए हैं। टैसमैक के एक अधिकारी ने बताया कि शराब की दुकानों और रेलवे ट्रैक के बीच की दूरी को लेकर कोई खास नियम नहीं है। अधिकारी ने कहा कि कई राज्य इस बारे में गाइडलाइंस बनाने पर विचार कर रहे हैं क्योंकि देश भर में 17,000 से ज्यादा शराब की दुकानें रेलवे ट्रैक के पास स्थित हैं। टैसमैक कर्मचारी संघ के एक अधिकारी ने सुझाव दिया कि रेलवे बोर्ड को सही नियमों के बारे में कोर्ट से निर्देश लेने चाहिए। रेलवे चाहता है कि व्यस्त यात्री कॉरिडोर के आस-पास जोखिम कम करने के लिए इन आउटलेट्स को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाए।
नेपाल की हिमलुंग हिमाल पर्वत चोटी पर हिमस्खलन, दस पर्वतारोहियों की तलाश में अभियान जारी

काठमांडू। नेपाल में रविवार सुबह हुए हिमलुंग हिमाल पर्वत चोटी पर हुए हिमस्खलन में पर्वतारोही अभियान दल के दस सदस्य लापता हो गए। नेपाल के मनांग जिले के नार फू इलाके में 7,126 मीटर ऊंची पर्वत चोटी पर हिमलुंग हिमाल बेस कैंप पर यह हिमस्खलन हुआ। इनकी तलाश में अभियान जारी है। द काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, हिमलुंग हिमाल बेस कैंप में रविवार सुबह हिमस्खलन हुआ। घटना के बाद पर्वतारोहियों और उनकी मदद करने वाले स्टाफ समेत दस लोग लापता हैं। एक्सपीडिशन ऑपरेटर्स एसोसिएशन नेपाल के महासचिव ऋषि भंडारी ने घटना की पुष्टि की। रिपोर्ट के अनुसार, भंडारी ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में बने मौसम तंत्र के कारण हुई भारी बर्फबारी की वजह से ज्यादातर टीमें नीचे लौट गईं थीं। मौसम एजेंसियों की ओर से भारी बारिश, बर्फबारी और हिमस्खलन के बढ़ते खतरे की चेतावनी के बाद ज्यादातर पर्वतारोही और सहयोगी कर्मचारी कम ऊंचाई वाले इलाकों में चले गए थे। रविवार तड़के जब यह हादसा हुआ, तब कुछ लोग बेस कैंप पर ही मौजूद थे। काठमांडू पोस्ट के अनुसार, जिन दस लोगों का पता नहीं चल रहा है, उनमें से दो लोग इमैजिन नेपाल प्राइवेट लिमिटेड और आठ हिमालयन हॉलिडेज नेपाल से जुड़े हैं। नेपाल के पर्यटन विभाग के महानिदेशक राम कृष्ण लामिछाने ने बताया कि नेपाल के पहाड़ी जिलों में लगातार बारिश और बर्फबारी हो रही है। विभाग की टीम लापता लोगों की लगातार तलाश कर रही है। घटना के बाद अधिकारियों ने तत्काल यात्रा चेतावनी जारी की है और प्रमुख हिमालयी मार्गों पर सभी पर्वतारोहियों और ट्रेकर्स को सलाह दी है कि जब तक स्थिति सामान्य नहीं हो जाती, तब तक वे अपना अभियान रोक दें।
तमिलनाडु सरकार का बड़ा फैसला, कानून-व्यवस्था विंग को आरटीआई के दायरे से किया बाहर

चेन्नई। तमिलनाडु सरकार ने अपने पब्लिक डिपार्टमेंट के कानून-व्यवस्था विंग को सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून से छूट देने का आदेश जारी किया है। इससे पुलिसिंग, विरोध-प्रदर्शन और सुरक्षा से जुड़े कई तरह के रिकॉर्ड तक आम लोगों की पहुंच सीमित हो जाएगी। सरकार ने इस विंग को इंटेलिजेंस और सुरक्षा के काम में लगी संस्था के तौर पर वर्गीकृत किया है। इस आदेश का मतलब है कि अब आवेदक सामान्य आरटीआई अनुरोधों के जरिए इस विंग के पास मौजूद कई रिकॉर्ड हासिल नहीं कर पाएंगे। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सरकार के पास मौजूद कानून-व्यवस्था से जुड़ी हर जानकारी उपलब्ध नहीं होगी। जिन रिकॉर्ड्स पर इसका असर पड़ेगा, उनमें कानून-व्यवस्था से जुड़ी घटनाओं, सांप्रदायिक और जातीय झड़पों, पुलिस की गिरफ्तारी और हिरासत, कैदियों की मौत और पुलिस जांच रिपोर्ट मिलने से जुड़ी जांच कमिशन की नियुक्तियों के कागजात शामिल हैं। इसमें मुख्य सचिव के निर्देशों पर होने वाली कानून-व्यवस्था की मासिक समीक्षा बैठकों और खास हालात से निपटने के लिए बुलाई गई विशेष बैठकों के रिकॉर्ड भी शामिल हैं। ऐसी बैठकों में अधिकारी अशांति का आकलन करने, पुलिसिंग व्यवस्था की समीक्षा करने और प्रशासन को क्या कदम उठाने चाहिए, इस पर फैसला लेने के लिए एक साथ आ सकते हैं। यह आदेश लोकसभा और राज्यसभा में कानून-व्यवस्था से जुड़े सवालों के जवाब के लिए तैयार की गई सामग्री पर भी लागू होता है। इसमें छात्रों, किसानों और राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के प्रदर्शनों से जुड़े रिकॉर्ड के साथ-साथ मानहानि करने वाले लेख, समाचार क्लिपिंग और भाषण भी शामिल हैं, जिनकी जांच यह विंग करती है। सरकार का कहना है कि कानून-व्यवस्था से जुड़ी सभी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती। सरकार के इस फैसले से विंग को उन रिकॉर्ड्स के लिए अनुरोधों को अस्वीकार करने का व्यापक आधार मिल गया है, जिन्हें वह संभालती है; इसमें ऐसी घटनाओं से जुड़ी सामग्री भी शामिल है जिन्होंने जनता का ध्यान आकर्षित किया है। आरटीआई एक्ट के तहत इस छूट की भी सीमाएं हैं। धारा 24(4) राज्य सरकार को अधिसूचना के माध्यम से किसी खुफिया या सुरक्षा संगठन को छूट देने की अनुमति देती है लेकिन भ्रष्टाचार या मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोपों से जुड़ी जानकारी को इसमें शामिल नहीं किया गया है। मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़े अनुरोधों के लिए राज्य सूचना आयोग की मंजूरी जरूरी है और उनका जवाब एक्ट में बताई गई समय-सीमा के अंदर दिया जाना चाहिए। इस नोटिफिकेशन को राज्य विधानसभा के सामने भी पेश किया जाना चाहिए। इसका असल असर इस बात पर निर्भर करेगा कि विभाग अलग-अलग अनुरोधों पर इस आदेश को कैसे लागू करता है। उदाहरण के लिए, हिरासत में हुई मौतों या पुलिस के बर्ताव के बारे में जानकारी चाहने वाले आवेदक, मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन से जुड़े एक्ट के प्रावधानों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसलिए, जब ऐसे अनुरोधों पर फैसला लिया जाएगा, तो इस नोटिफिकेशन का दायरा विवाद का विषय बन सकता है।
सरकार ने कैप्टिव कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को उपलब्ध पूरी क्षमता पर चलाने का दिया निर्देश

नई दिल्ली। बिजली की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बिजली मंत्रालय ने बिजली अधिनियम की धारा 11 लागू करते हुए 50 मेगावाट और उससे अधिक क्षमता वाले कैप्टिव कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को अधिकतम बिजली उत्पादन करने का निर्देश दिया है। मंत्रालय ने कहा कि यह निर्णय मौजूदा मांग-आपूर्ति की स्थिति और बिजली की खपत में संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए लिया गया है। मंत्रालय के अनुसार, देशभर के उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न कदम उठाए जा रहे हैं। बिजली अधिनियम की धारा 11 के तहत सरकार को असाधारण परिस्थितियों में बिजली उत्पादन कंपनियों को आधिकारिक निर्देशों के अनुरूप अपने बिजली संयंत्र संचालित करने का निर्देश देने का अधिकार है। इन शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए मंत्रालय ने पात्र कैप्टिव कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को अपनी उपलब्ध क्षमता का अधिकतम उपयोग करते हुए बिजली उत्पादन करने को कहा है। मंत्रालय ने कहा कि देश में बिजली की कुल उपलब्धता को बेहतर बनाने के लिए कैप्टिव बिजली संयंत्रों समेत बिजली उत्पादन के सभी स्रोतों की क्षमता का पूरी तरह उपयोग करना जरूरी है। निर्देशों के अनुसार, बिजली उत्पादकों को अपनी कैप्टिव जरूरतें पूरी करने के बाद बची हुई बिजली को लागू बाजार नियमों और प्रक्रियाओं के तहत पावर एक्सचेंजों पर बेचने की पेशकश करनी होगी। इस कदम से बाजार में बिजली की उपलब्धता बढ़ने और पीक डिमांड को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है। यह आदेश 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक लागू रहेगा। इस अवधि के दौरान बिजली उत्पादन कंपनियों को पर्याप्त कोयला भंडार बनाए रखने का भी निर्देश दिया गया है, ताकि ईंधन की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित हो और अधिकतम बिजली उत्पादन जारी रखा जा सके। निगरानी को सुगम बनाने के लिए मंत्रालय ने बिजली उत्पादकों को केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) को साप्ताहिक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। इन रिपोर्टों में बिजली उत्पादन, कैप्टिव खपत, पावर एक्सचेंजों और अन्य स्वीकृत माध्यमों से बिजली की बिक्री, उपलब्ध उत्पादन क्षमता तथा कोयला भंडार के स्तर की जानकारी शामिल होगी। सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से देशभर में बिजली की उपलब्धता बढ़ेगी और साल की अंतिम तिमाही में बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी। इसके तहत अतिरिक्त कैप्टिव बिजली उत्पादन क्षमता को ग्रिड में लाया जाएगा।
बिहार : गयाजी में पितृपक्ष की आस्था अब पर्यावरण से जुड़ी, पितृवाटिका में ‘एक पेड़ पूर्वजों के नाम’ की पहल

गयाजी। ‘मोक्षस्थली’ के रूप में चर्चित बिहार के गयाजी में पितृपक्ष केवल धार्मिक अनुष्ठानों और पिंडदान तक सीमित नहीं रह गया है। पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और स्मरण की इस परंपरा को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने की एक अनोखी पहल शुरू की गई है। इसी सोच के साथ जिला प्रशासन और वन विभाग, गया की ओर से पितृवाटिका में ‘एक पेड़ पूर्वजों के नाम’ अभियान चलाया जा रहा है। ब्रह्मयोनि पहाड़ी क्षेत्र में विकसित की जा रही पितृवाटिका श्रद्धा, स्मृति और प्रकृति संरक्षण को एक साथ जोड़ने का प्रयास है। पितृपक्ष महासंगम-2026 के अवसर पर शनिवार को पितृवाटिका के निर्धारित स्थल खटकाचक में पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान परिसर में कुल 41 पौधे लगाए गए। इन पौधों को केवल हरियाली बढ़ाने के साधन के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इन्हें पूर्वजों की स्मृति को जीवित रखने और आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति के प्रति जिम्मेदार बनाने के प्रतीक के तौर पर विकसित करने की योजना है। गयाजी में हर वर्ष देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने पूर्वजों के मोक्ष और उनकी आत्मा की शांति के लिए पिंडदान तथा तर्पण करने पहुंचते हैं। धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण ब्रह्मयोनि पहाड़ी क्षेत्र भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में इसी क्षेत्र में पितृवाटिका की अवधारणा पितृपक्ष की परंपरा को एक नए पर्यावरणीय संदेश से जोड़ती है। इसका उद्देश्य यह संदेश देना है कि पूर्वजों का स्मरण केवल धार्मिक कर्मकांड तक सीमित न रहे, बल्कि उनकी स्मृति में प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा का संकल्प भी लिया जाए। गया के जिलाधिकारी शशांक शुभंकर ने बताया कि ‘एक पेड़ पूर्वजों के नाम’ की अवधारणा के तहत श्रद्धालुओं और आम नागरिकों को अपने पूर्वजों की स्मृति में पौधा लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि यदि पितृपक्ष के दौरान गया आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु अपने पूर्वजों की स्मृति में एक पौधा लगाने तो आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र हरियाली के बड़े केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है। पितृवाटिका की यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ भावनात्मक जुड़ाव भी पैदा करती है। आमतौर पर पौधारोपण को पर्यावरणीय गतिविधि के रूप में देखा जाता है, लेकिन पूर्वजों की स्मृति से इसे जोड़ने से इसके साथ व्यक्तिगत और पारिवारिक भावनाएं भी जुड़ जाती हैं। लगाया गया पौधा परिवार के लिए पूर्वजों की याद का प्रतीक बन सकता है और उसकी देखभाल आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का एहसास करा सकती है। गया में पितृपक्ष के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी को देखते हुए इस पहल को पर्यावरण जागरूकता के व्यापक अभियान के रूप में भी देखा जा रहा है। श्रद्धालुओं के बीच पौधारोपण और उसके संरक्षण का संदेश पहुंचाकर धार्मिक पर्यटन के साथ पर्यावरणीय चेतना को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। जिला प्रशासन की ओर से नागरिकों और श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे अपने पूर्वजों की स्मृति में कम से कम एक पौधा जरूर लगाएं। प्रशासन का कहना है कि पितृपक्ष की परंपरा को पर्यावरणीय जिम्मेदारी से जोड़ना आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्थायी विरासत तैयार करने की दिशा में सार्थक कदम है। ‘एक पेड़ पूर्वजों के नाम’ का संदेश केवल एक पौधा लगाने तक सीमित नहीं है। यह उस विचार को आगे बढ़ाता है कि पूर्वजों की स्मृति को प्रकृति की हरियाली के साथ जोड़ा जाए और श्रद्धा का यह भाव आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, हरा-भरा और सुरक्षित पर्यावरण छोड़ने के संकल्प में बदल सके। बता दें कि गयाजी की पहचान में ब्रह्मयोनि पहाड़ का विशेष स्थान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पितृ पक्ष के दौरान यहां दर्शन और पूजा-अर्चना का अपना महत्व है। पहाड़ की ऊंचाई से गयाजी का विस्तृत दृश्य दिखाई देता है और यह क्षेत्र प्राकृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में ब्रह्मयोनि पहाड़ी क्षेत्र में पितृवाटिका विकसित करने की पहल धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण को जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यहां लगाए जा रहे पौधे आने वाले समय में क्षेत्र की हरियाली बढ़ाने के साथ श्रद्धालुओं के लिए पूर्वजों की स्मृति और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का स्थायी संदेश भी देंगे।
पीएम मोदी के लिए लिखे लता मंगेशकर के उस खत की कहानी, जिसमें भेजी थी मंगल-मूर्ति

नई दिल्ली। “नाम गुम जाएगा, चेहरा ये बदल जाएगा। मेरी आवाज ही पहचान है, गर याद रहें।” यह कहानी है, हिंदुस्तान की सबसे मशहूर आवाज रहीं लता मंगेशकर की, जिन्हें हर किसी ने प्यार से ‘लता दीदी’ बुलाया। ‘स्वर साम्राज्ञी’ और ‘भारत की कोकिला’ जैसे विशेषण लता मंगेशकर के लिए गढ़े गए। संगीत उनके खून में बसा था। उनके गाने न सिर्फ भारत में, बल्कि पाकिस्तान और बांग्लादेश समेत कई अन्य देशों में भी सुने और पसंद किए जाते थे। उनके गाए कई सदाबहार गीत आज भी हर पीढ़ी की जुबान पर रहते हैं। 28 सितंबर 1929 को इंदौर में जन्मी लता मंगेशकर ने 1940 के दशक से अपने करियर की शुरुआत की और 36 से अधिक भाषाओं में हजारों गाने गाए। कला के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए साल 2001 में उन्हें ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया था, हालांकि संगीत की दुनिया से इतर लता मंगेशकर का राजनीतिक संबंध भी रहा और उससे भी दिलचस्प यह कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनके संबंध मधुर रहे। पिछले एक दशक या उससे अधिक समय में वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी भाजपा के समर्थन में काफी मुखर रहीं। भाजपा के समर्थन से मंगेशकर नवंबर 1999 में राज्यसभा के लिए चुनी गईं। वह 2005 तक वहां रहीं। 2013 में उन्होंने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद के लिए समर्थन दिया था। इसके बाद कई अवसर ऐसे रहे, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लता दीदी के बीच रिश्ते परिवार जैसे दिखाई दिए। लता मंगेशकर प्रधानमंत्री को ‘नरेंद्र भाई’ कहकर बुलाती थीं। दोनों के बीच भाई-बहन जैसा रिश्ता था। हर साल रक्षाबंधन पर वे पीएम मोदी को राखी भेजती थीं। किताब ‘मोदी@20: ड्रीम्स मीट डिलीवरी’ में लता मंगेशकर की लिखी प्रस्तावना शामिल है, जिसमें उन्होंने पीएम मोदी के साथ अपनी मुलाकातों का जिक्र किया। इसमें लता मंगेशकर ने बताया कि उन्होंने नरेंद्र ‘भाई’ को एक पारंपरिक राजनेता के तौर पर नहीं, बल्कि इरादे और काम करने वाले नेता के तौर पर देखा। उन्होंने कहा था, “स्वभाव से, नरेंद्र भाई ऐसे राजनेता नहीं हैं जिनकी हम आम तौर पर कल्पना करते हैं। उनसे हुई कई बातचीत से मुझे यह एहसास हुआ है कि उनके मकसद अलग हैं। उन्हें सत्ता का कोई मोह नहीं है। उनका लक्ष्य बड़ा है। भारत के लोगों के लिए कुछ कर पाना। उनका जुनून इस बात में है कि वे चाहते हैं कि हमारे देश के हर व्यक्ति के लिए विकास की कहानी सार्थक हो।” प्रस्तावना में लता मंगेशकर ने 2013 में पीएम मोदी के साथ हुई अपनी मुलाकात का भी जिक्र किया, जो धीरे-धीरे भाई-बहन जैसे रिश्ते में बदल गई। दोनों के मधुर रिश्तों का किस्सा यह है कि 2013 में, जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उनको पुणे में दीनानाथ मंगेशकर को समर्पित एक सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल का उद्घाटन करने के लिए आमंत्रित किया गया था। पीएम मोदी से मिलने पर लता मंगेशकर ने कहा था- ‘मैं ईश्वर से प्रार्थना करती हूं कि हम नरेंद्र भाई को प्रधानमंत्री के रूप में देखें। अपनी प्रस्तावना में उन्होंने कहा था, “मैं एक बहुत खास पल का जिक्र करना चाहूंगी जिससे नरेंद्र भाई के साथ मेरा जुड़ाव बना। 2013 में जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब हमारे बुलावे पर नरेंद्र भाई ने अपने व्यस्त कार्यक्रम से समय निकालकर पुणे में हमारे दीनानाथ मंगेशकर सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का उद्घाटन किया था। बहुत सहजता से हमारे बीच भाई-बहन का सच्चा रिश्ता बन गया और यह हमारे रिश्ते के हर पल में झलकता है। मैं हमारे इस रिश्ते को बहुत महत्व देती हूं और हमेशा देती रहूंगी।” उन्होंने कहा था, “नरेंद्र भाई इसलिए खास हैं, क्योंकि लोग उन पर भरोसा करते हैं। लोग जानते हैं कि चाहे चुनौती कितनी भी मुश्किल क्यों न हो, वह पूरी ईमानदारी और नेक नीयत से काम करेंगे और उसका समाधान निकालेंगे। नीयत और काम में ऐसा भरोसा ही एक नेता को दूसरों से अलग बनाता है। मुझे यह कहने में कोई हिचकिचाहट नहीं है कि देश के हर हिस्से में लोग उन्हें परिवार के सदस्य की तरह मानते हैं, जो ऐसे मुद्दों पर बात करते हैं जिनसे लोग जुड़ाव महसूस करते हैं।” उसी कार्यक्रम के दौरान मोदी ने उस चिट्ठी का जिक्र किया जो उन्होंने 6 महीने पहले उन्हें लिखी थी। उनके शब्दों में यह ‘उनके जीवन के सबसे बड़े उपहारों में से एक’ था। जनवरी 2014 में, नरेंद्र मोदी ने लता मंगेशकर को उनके मशहूर गाने ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ की 51वीं वर्षगांठ के मौके पर सम्मानित किया। उस समय पीएम मोदी ने बताया कि कैसे इस गाने ने 1962 के शहीदों के बलिदान को भारतीयों के दिलों में हमेशा के लिए जिंदा रखकर ‘सेवा’ का काम किया। 2014 में लता मंगेशकर ने नरेंद्र ‘भाई’ को हाथ से लिखा एक पत्र भेजा था, जिसमें उन्होंने भारत के 15वें प्रधानमंत्री के तौर पर उनके शपथ ग्रहण समारोह में शामिल न हो पाने के लिए माफी मांगी थी। उन्होंने अपनी शुभकामनाएं देने के लिए पत्र के साथ ‘मंगल-मूर्ति’ गणेश की एक मूर्ति भी उपहार के तौर पर भेजी थी। उन्होंने उस पत्र में लिखा था, “आदरणीय नरेंद्रभाई, सस्नेह नमस्कार। आपका निमंत्रण मिलने के बाद भी मेरी तबीयत ठीक नहीं होने के कारण आपको न कहते हुए बहुत दुख हो रहा है। मुझे आशा है कि आप मेरी मजबूरी समझेंगे। पूरे देश ने आपका जो भव्य स्वागत किया है, वो अवर्णनीय है। हमारी मातृभूमि की बागडोर, आप जैसे महान व्यक्ति के पवित्र हाथों में जनता ने सौंपी है। आज का दिवस संपूर्ण राष्ट्र के लिए एक आनंदोत्सव है। इस मंगल अवसर पर श्री मंगलमूर्ती आपको भेंट कर रही हूं। आपका बहुत बहुत अभिनंदन।” यह रिश्ते महज औपचारिक नहीं थे, बल्कि पारिवारिक रिश्तों जैसे मजबूत थे। इसीलिए विदेश यात्रा पर निकलने से पहले पीएम मोदी भी 2019 में मंगेशकर को फोन कर जन्मदिन की बधाई देना नहीं भूले। एक भावुक बातचीत में लता मंगेशकर ने कहा, “आप खुद नहीं जानते कि आप क्या हैं। मुझे पता है कि आपके आने के बाद भारत की तस्वीर बदलने लगी है, जिससे मुझे बहुत खुशी होती है।” उसी बातचीत में परिवार के सदस्य की तरह लता मंगेशकर ने पीए मोदी से यह भी पूछ लिया था कि
पीएम मोदी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मुस्लिम समाज ने मुंबई में किया रक्तदान

मुंबई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के उपलक्ष्य पर चल रहे भाजपा के सेवा संकल्प अभियान के तहत भाजपा मुंबई अल्पसंख्यक मोर्चा की ओर से विशेष रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर की मुख्य विशेषता मुस्लिम समुदाय के लोगों की बड़ी संख्या में भागीदारी रही, जिन्होंने बढ़-चढ़कर रक्तदान किया। रक्तदान शिविर में भाजपा विधायक कालिदास कोलंबकर शामिल हुए। भाजपा नेता वसीम खान ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “विश्व के सबसे लोकप्रिय नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन है। इस मौके पर सेवा संकल्प अभियान के तहत हम 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक सेवा के कार्य कर रहे हैं। इसी के अंतर्गत वडाला में भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा की ओर से हमारे उपाध्यक्ष इलियास मुनव्वर ने ब्लड डोनेशन कैंप का आयोजन किया है। शिविर में बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज की महिलाओं ने रक्तदान किया है।” वसीम खान ने कहा, “रक्तदान शिविर के साथ मेडिकल कैंप भी लगाया गया है। इस कैंप में डायबिटीज, कैंसर समेत अन्य बीमारियों की जांच की गई और चिकित्सों ने उचित सलाह दी।” भाजपा नेता वसीम खान ने धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटाने की कार्रवाई पर कहा, “यह कार्रवाई किसी एक धार्म के स्थलों पर नहीं हुई। पिछले दिनों जब लाउडस्पीकर उतारने की बात आई तो उसमें दूसरे धार्मिक स्थलों, गुरुद्वारा, चर्च, मस्जिद के भी उतारे गए। हर चीज को हिंदू मुस्लिम के चश्मे से देखना गलत है। यदि कोई चीज अवैध है तो कानून का काम उस पर नजर रखना है। कानून को अपना काम करने देना चाहिए।” भाजपा नेता ने कहा, “मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आज मुसलमान विकास की धारा से जुड़ रहा है, इसलिए अब हिंदू-मुस्लिम चलने वाला नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कभी एक समुदाय और एक देश की सिर्फ बात नहीं की। उन्होंने 140 करोड़ भारतीयों की बात की। देशवासियों की भलाई के लिए लगातार प्रधानमंत्री काम कर रहे हैं।