उत्तरी आयरलैंड में 28 साल बाद ‘ऑरेंज ऑर्डर मार्च’, पोर्टाडाउन में सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने रास्ता रोका

पोर्टाडाउन। उत्तरी आयरलैंड के ऐतिहासिक शहर पोर्टाडाउन में रविवार को एक प्रोटेस्टेंट मार्च को लेकर तनाव बढ़ गया। जिसका कारण इस मार्च को मिली अनुमति और इस अनुमति के खिलाफ प्रदर्शन था। करीब 28 साल बाद पहली बार ऑरेंज ऑर्डर को मुख्य रूप से राष्ट्रवादी इलाके की गारवाघी रोड से मार्च की अनुमति मिलने के बाद सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने सड़क को जाम कर दिया। पुलिस दोनों पक्षों के बीच मौजूद रही और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश करती दिखी, और देर रात प्रदर्शनकारी धीरे-धीरे वहां से जाते दिखे। विवादित मार्च ड्रमक्री परेड के नाम से जाना जाता है। ऑरेंज ऑर्डर का यह मार्च 1998 के बाद से गारवाघी रोड से प्रतिबंधित था। यह इलाका मुख्य रूप से कैथोलिक और राष्ट्रवादी आबादी वाला है, जबकि पोर्टाडाउन का व्यापक क्षेत्र प्रोटेस्टेंट और यूनियनिस्ट प्रभाव वाला माना जाता है। 1990 के दशक में इसी मार्ग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों और हिंसक झड़पों ने उत्तरी आयरलैंड के संघर्ष के दौर में तनाव बढ़ाया था। इस बार मार्च की अनुमति को लेकर कई दौर की कानूनी लड़ाई चली। शुक्रवार को परेड्स कमीशन ने कुछ शर्तों के साथ मार्च को मंजूरी दी थी। इसमें मार्च में अधिकतम 35 लोगों के शामिल होने, सुबह 8 बजे शुरू करने और बिना संगीत के शांतिपूर्ण तरीके से मार्च करने जैसी शर्तें थीं। शनिवार को हाई कोर्ट की जस्टिस पेट्रीसिया स्मिथ ने इस फैसले पर अस्थायी रोक लगाते हुए कहा था कि लंबे समय से चला आ रहा विवाद पूरे उत्तरी आयरलैंड में तनाव बढ़ा सकता है। इसके बाद ऑरेंज ऑर्डर ने इस फैसले को चुनौती दी। रविवार तड़के अपील अदालत ने परेड्स कमीशन के मूल फैसले को बरकरार रखा, जिससे मार्च का रास्ता साफ हो गया। अदालत की सुनवाई रात करीब 2.15 बजे खत्म हुई और इसके कुछ ही घंटे बाद मार्च शुरू करने का समय निर्धारित था। सुबह गारवाघी रोड पर बड़ी संख्या में राष्ट्रवादी प्रदर्शनकारी जमा हो गए। कई प्रदर्शनकारियों ने हाथों में हाथ डालकर सड़क को घेर लिया। पुलिस ने लाउडस्पीकर के जरिए चेतावनी दी कि अनधिकृत विरोध प्रदर्शन में शामिल होने पर गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी सड़क से हटने को तैयार नहीं हुए। ऑरेंज ऑर्डर के करीब 35 सदस्य ड्रमक्री चर्च के पास मौजूद रहे। वे मार्च शुरू करने की अनुमति का इंतजार करते रहे, लेकिन गारवाघी रोड पर प्रदर्शनकारियों के जमावड़े के कारण स्थिति गतिरोध में बदल गई। आयरिश समाचार एजेंसी पीए ने बताया कि इस विरोध प्रदर्शन में सिन फेन की अध्यक्ष मैरी लू मैकडोनाल्ड और उत्तरी आयरलैंड की प्रथम मंत्री मिशेल ओ’नील भी मौजूद थीं। मैकडोनाल्ड ने मार्च की अनुमति पर सवाल उठाते हुए कहा कि इलाके के लोग अतीत की ओर लौटना नहीं चाहते। ओ’नील ने कहा कि इस घटनाक्रम से उत्तरी आयरलैंड की शांति प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए हैं। दूसरी ओर, डेमोक्रेटिक यूनियनिस्ट पार्टी (डीयूपी) नेताओं ने प्रदर्शन को अदालत और कानून की अवहेलना बताया। तो वहीं, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की। आयरलैंड के प्रधानमंत्री माइकल मार्टिन ने भी तनाव कम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि कई वर्षों की शांति और मेल-मिलाप की प्रक्रिया के बाद स्थिति को पुराने विभाजन की ओर लौटने से रोकना जरूरी है। ड्रमक्री विवाद उत्तरी आयरलैंड के इतिहास में बेहद संवेदनशील माना जाता है। 1990 के दशक में इस मार्ग से मार्च को लेकर कई बार हिंसा हुई थी। 1998 में परेड्स कमीशन के गठन के बाद विवादित मार्चों को नियंत्रित करने की व्यवस्था बनाई गई थी और ड्रमक्री मार्च को लगातार प्रतिबंधित किया जाता रहा। 2026 में अदालत के फैसलों के बाद पहली बार इसे फिर से अनुमति मिली है।
एआई को लेकर बिल गेट्स ने चेताया, खतरनाक ताकत ले सकती है एक अरब लोगों की जान

वॉशिंगटन। माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की ताकत को खतरनाक बताते हुए चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के कराण ऐसी घटनाएं हो सकती हैं, जिनमें एक अरब लोगों की जान जा सकती है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका में इस बात पर तेज बहस चल रही है कि एडवांस एआई के लिए सरकार को सख्त नियम बनाने चाहिए या ऐसे नियमों से बचना चाहिए, जो चीन के साथ एआई की दौड़ में अमेरिका की रफ्तार धीमी कर सकते हैं। एनबीसी के ‘मीट द प्रेस’ कार्यक्रम में गेट्स ने कहा कि एआई पहले की तकनीकी तरक्की से अलग है और आने वाले कुछ वर्षों में यह इंसानों से कई गुना ज्यादा बुद्धिमान हो सकती है। गेट्स ने कहा, “यह वास्तव में विकास की एक बहुत बड़ी घटना है। हमने एक ऐसी बुद्धिमान तकनीक बनाई है, जो कई मामलों में पहले ही हमसे ज्यादा समझदार है और अगले कुछ सालों में बहुत तेजी से आगे बढ़ते हुए हमसे कई गुना ज्यादा बुद्धिमान हो सकती है।” जब उनसे पूछा गया कि क्या एआई मानवता के अंत का कारण बन सकती है, तो गेट्स ने कहा, “एआई निश्चित तौर पर इतनी ताकतवर है कि वह ऐसी घटनाओं को बढ़ावा दे सकती है, जिनमें एक अरब लोगों की जान जा सकती है।” उन्होंने आगे कहा कि गलत इरादा रखने वाले लोगों के हाथ में सबसे नए एआई टूल्स का होना इतना ताकतवर खतरा है, जितना पहले कोई हथियार नहीं रहा। गेट्स ने कहा कि सरकारों के पास अभी इतनी विशेषज्ञता नहीं है कि वे एआई से जुड़े खतरनाक स्तर और जैविक हमलों, साइबर हमलों तथा टेक्नोलॉजी के दूसरे संभावित गलत इस्तेमाल को पूरी तरह समझ सकें। उन्होंने कंपनियों की ओर से स्वेच्छा से अपनाए जाने वाले सुरक्षा उपायों पर निर्भर रहने की बात को खारिज कर दिया। गेट्स ने कहा कि कोई भी यह नहीं मानता कि कंपनियों का खुद अपने लिए नियम बनाना काफी है। उन्होंने ऐसे कानून बनाने की मांग की, जिनके तहत एआई सिस्टम में सुरक्षा उपाय और निगरानी की व्यवस्था रखना जरूरी हो। गेट्स ने माना कि इससे एआई कंपनियों की लागत कुछ बढ़ सकती है, लेकिन इससे टेक्नोलॉजी का विकास बहुत ज्यादा धीमा नहीं होगा। उन्होंने कहा, “हर एआई सिस्टम में ये सुरक्षा उपाय और निगरानी की क्षमता जरूरी न करना पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना होगा।” गेट्स की यह चेतावनी ऐसे समय आई है, जब कैलिफोर्निया से डेमोक्रेट सांसद रो खन्ना ने अमेरिका और चीन के बीच एक ऐसे समझौते की मांग की है, जिसकी जांच और पुष्टि की जा सके और जो खुद अपनी क्षमताओं को लगातार बेहतर करने वाले एआई सिस्टम पर रोक लगाए। खन्ना ने कहा कि सीनेटर बर्नी सैंडर्स और सांसद ग्रेग कैसर के समर्थन वाला प्रस्ताव ऐसे रिकर्सिव सेल्फ-इम्प्रूविंग एआई पर तब तक रोक लगाएगा, जब तक उसके लिए जरूरी सुरक्षा उपाय तैयार नहीं हो जाते। खन्ना ने एनबीसी से कहा, “यह मूल रूप से ऐसा एआई है, जिसे अब इंसान ट्रेन नहीं कर रहे होते। वह खुद को ट्रेन कर सकता है। इसमें इंसानों का नियंत्रण खोने का वास्तविक खतरा है।” खन्ना ने कहा कि अमेरिका और चीन को टेक्नोलॉजी विशेषज्ञों का एक साझा वर्किंग ग्रुप बनाना चाहिए और दोनों देशों को मिलकर कुछ सामान्य पाबंदियों पर बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि खुद को बार-बार बेहतर करने वाले एआई पर रोक लगाना कोई विवाद की बात नहीं होनी चाहिए। मेरा मानना है कि अमेरिका ऐसे समझौते की अगुवाई कर सकता है, जिसे लागू भी किया जा सके और जिसकी जांच भी हो सके। इसके तहत इस तरह के एआई पर रोक लगाई जाए और सबसे एडवांस एआई लैब्स की कुछ निगरानी भी हो।” संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बैठक के बाद अमेरिका और चीन सुपरइंटेलिजेंस पर बातचीत शुरू करने के लिए सहमत हुए हैं। वॉल्ट्ज ने सीएनएन से कहा कि इस बातचीत में विशेषज्ञों को साथ लाया जाएगा, जो जैविक हथियारों से जुड़ी रिसर्च और परमाणु सिस्टम जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में एआई के लिए सुरक्षा नियमों पर बात करेंगे। उन्होंने कहा कि सबसे एडवांस एआई मॉडल के मामले में अमेरिका और चीन बाकी दुनिया से काफी आगे हैं। मुझे लगता है कि दुनिया को इस बातचीत को एक सकारात्मक कदम के रूप में देखना चाहिए। हालांकि, अमेरिकी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने ऐसे नियमों के खिलाफ चेतावनी दी, जो एआई के क्षेत्र में अमेरिका की प्रतिस्पर्धा करने की ताकत को कमजोर कर सकते हैं। उन्होंने एबीसी से कहा कि अमेरिका के मौजूदा आपराधिक और सिविल कानून पहले से ही अधिकारियों को ऐसे लोगों और कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करने की इजाजत देते हैं, जो एआई का इस्तेमाल करके अपराध करते हैं। ब्लैंच ने कहा, “हर समस्या का जवाब ज्यादा कानून, ज्यादा कानून और ज्यादा कानून बनाना नहीं होता।” जब एआई सिस्टम में कोई समस्या सामने आती है, तो कंपनियां अपने सिस्टम को रोक या उनमें बदलाव कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि समाधान यह नहीं है कि अचानक इसे इस तरह से नियंत्रित करना शुरू कर दिया जाए कि इस क्षेत्र में दुनिया की अगुवाई करने के बजाय अमेरिका दूसरे या तीसरे स्थान पर पहुंच जाए।
मान और केजरीवाल ने बदला लेने के लिए एलपीयू के छात्रों को मोहरा बनाया, गुंडे बुलाकर आंदोलन को भड़कायाः मजीठिया

चंडीगढ़। फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) में विरोध-प्रदर्शन और हिंसा पर महासचिव शिरोमणि अकाली दल बिक्रम सिंह मजीठिया ने पंजाब सरकार पर सवाल उठाए हैं। इसके साथ ही आरोप लगाया कि आप नेताओं ने बदला लेने के लिए छात्रों को मोहरा बनाया है। बिक्रम सिंह मजीठिया ने एक्स पर लिखा, “गुरु-दोखी मुख्यमंत्री भगवंत मान, अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने बदला लेने के लिए एलपीयू के छात्रों को मोहरा बनाया। अशोक मित्तल भाजपा में आए तो एलपीयू बंद करवाने की घिनौनी चाल चली गई। बाहर से गुंडे लाकर आंदोलन भड़काया और हिंसक बनाया क्योंकि अशोक मित्तल ने अरविंद केजरीवाल से अपनी दिल्ली स्थित कोठी को खाली करवा लिया था और मनीष सिसोदिया के बच्चों की फीस जो भरी जा रही थी, वह बंद करवा दी गई थी।” बिक्रम मजीठिया ने कहा, “आंदोलन भड़काने के वीडियो सबूत हैं, जिसमें दिख रहा है कि हाथों में वाकीटॉकी सेट, बैट-हथियार लिए उपद्रव किए जा रहे हैं। रात में दिल्ली वाले गुंडे कथित तौर पर पकड़े और छोड़े, ये कौन सी पुलिस है? पहले पुलिस की ढीली-ढाली नीति, फिर सख्त कार्रवाई से स्टूडेंट्स भड़के, उनकी आड़ में कथित बाहरी तत्वों से आग लगवाई-तोड़फोड़ करवाई और फिर उन्हीं छात्रों पर लाठीचार्ज- यही है तेरी कानून-व्यवस्था?” मजीठिया ने कहा, “हजारों का रोजगार, लाखों बच्चों की पढ़ाई दांव पर, क्या इससे पंजाब में निवेश आएगा? सिर्फ अपनी निजी खुंदक निकालने के लिए ये काम किया गया। सरकारी कोठियों वाले कांड और गायत्री बिश्नोई मामले से ध्यान भटकाना ही असली मकसद था। बता दें कि एक छात्रा से कथित दुष्कर्म की सूचना के सोशल मीडिया ग्रुप्स में वायरल होने के बाद शनिवार देर रात लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) में छात्रों ने भारी हंगामा किया। गुस्साए छात्रों ने पहले गर्ल्स हॉस्टल के पास प्रदर्शन शुरू किया और फिर देखते ही देखते यह प्रदर्शन उग्र हो गया। छात्रों ने यूनिवर्सिटी कैंपस के अंदर भारी तोड़फोड़ की और एक कैंपस में आग भी लगा दी। हंगामा इतना बढ़ गया कि प्रदर्शन करते हुए छात्र यूनिवर्सिटी के गेट के बाहर आ गए। गेट पर भी छात्रों ने तोड़फोड़ की और उसके बाद चंडीगढ़-अमृतसर राष्ट्रीय राजमार्ग पर धरना लगा दिया। छात्रों ने हाईवे को बंद कर दिया, जिससे वहां जाम लग गया और आने-जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं, रविवार शाम को भी एलपीयू में हिंसा भड़क उठी। इस दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों और पुलिस के बीच झड़प हुई। इतना ही नहीं पत्थरबाजी के साथ कई पुलिस वाहनों को आग लगा दी गई।
खेल महाकुंभ 2026: गुजरात में स्कूल से राज्य स्तर तक प्रतिभा दिखाने का मौका, 76 लाख युवाओं ने किया रजिस्ट्रेशन

गांधीनगर। गुजरात सरकार राज्य की युवा खेल प्रतिभाओं को स्पोर्ट्स प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हर साल की तरह इस बार भी ‘खेल महाकुंभ-2026’ का आयोजन कर रही है। इसको लेकर छात्र और युवा खासे उत्साहित हैं और बेसब्री से इस आयोजन का इंतजार कर रहे हैं। गांधीनगर की रहने वाली प्रतिभागी करिश्मा ने बताया कि उन्होंने ‘2026 खेल महाकुंभ’ में एथलेटिक्स खेल में रजिस्ट्रेशन कराया है। वह खेल महाकुंभ का बहुत उत्सुकता से इंतजार कर रही हैं। खेल महाकुंभ में उन्हें अपनी प्रतिभा और मेहनत को एक नया प्लेटफॉर्म देने का अवसर मिलेगा। प्रतिभागी ध्रुवी सोलंकी ने कहा, “मैंने 2026 खेल महाकुंभ में जूडो गेम में भाग लिया है। मैं खेल महाकुंभ के माध्यम से गुजरात का नाम रोशन करना चाहती हूं।” वहीं प्रतिभागी महिमा चौधरी ने कहा, “खेल महाकुंभ मेरे लिए केवल एक प्रतियोगिता ही नहीं है, बल्कि मेरी प्रतिभा और मेहनत को आगे बढ़ाने का एक बड़ा मंच है।” राज्य के खेल विभाग ने ‘खेल महाकुंभ-2026’ के लिए 29 अगस्त को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू किया था, जो 22 सितंबर की शाम तक खुला रहा। रजिस्ट्रेशन करने वाले खिलाड़ियों ने तैयारी भी शुरू कर दी है और अपने-अपने कोच के मार्गदर्शन में खेल को निखारने में जुट गए हैं। श्री जीएम चौधरी सार्वजनिक कन्या विद्यालय के एथलेटिक कोच जीवन जी ठाकुर ने कहा कि खेल महाकुंभ को लेकर बच्चों में बहुत उत्साह देखने को मिल रहा है। ग्रामीण स्कूलों के बच्चे को मौका मिल रहा है और वे राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। श्री जीएम चौधरी सार्वजनिक कन्या विद्यालय के जूडो कोच हेतल ठाकुर ने कहा कि 2010 से लगातार हर साल खेल महाकुंभ का आयोजन हो रहा है और इसके माध्यम से विभिन्न गांवों के बच्चों को एक अच्छा प्लेटफॉर्म उपलब्ध हो रहा है। आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए साल 2010 में ‘खेल महाकुंभ’ की शुरुआत की थी, जो आज मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में लोकप्रियता के शिखर पर पहुंच गया है। इसका अंदाजा इस वर्ष खेल महाकुंभ के लिए हुए रिकॉर्ड रजिस्ट्रेशन से समझा जा सकता है। आंकड़ों पर गौर करें तो इस बार एथलेटिक्स, बैडमिंटन, आर्चरी, बॉक्सिंग, बास्केटवॉल, फुटबाल, जिम्नास्टिक, हॉकी, जूडो और वेटलिफ्टिंग जैसे 35 से अधिक खेल प्रतियोगिताओं के लिए कुल 76 लाख से ज्यादा खिलाड़ियों और युवाओं ने रजिस्ट्रेशन कराया है। इनमें 45 लाख से अधिक पुरुष और 30 लाख से ज्यादा महिला प्रतिभागी शामिल हैं। इसके अलावा विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं के लिए 3 लाख 49 हजार से अधिक टीमों का पंजीकरण हुआ है, जिनमें 2 लाख 21 हजार से ज्यादा पुरुष टीमें और 1 लाख 27 हजार से ज्यादा महिला टीमें शामिल हैं। जीएएस के एडिशनल डायरेक्टर अमित जी. गामित ने कहा कि हर साल की तरह इस साल भी ‘खेल महाकुंभ 2026’ का आयोजन किया जा रहा है। तालुका, जिला और राज्य स्तर पर विजेता खिलाड़ियों को डीबीटी के जरिए आरटीजीएस से नकद पुरस्कार का भी वितरण किया जाएगा। ‘खेल महाकुंभ’ के अंतर्गत अंडर-11 अंडर-14 वर्ग में भी प्रतिभाशाली खिलाड़ों का चयन किया जाएगा। गुजरात सरकार ‘खेल महाकुंभ-जमीनी स्तर से महानता तक’ मंत्र के साथ इस खेल महोत्सव का आयोजन कर रही है। खेल महाकुंभ-2026 के लिए गुजरात के सभी जिलों से बड़ी तादाद में खिलाड़ियों ने ऑनलाइन पंजीकरण कराया है। खेल महाकुंभ में राज्य के युवा खिलाड़ियों को जहां स्कूल से स्टेट लेवल पर होने वाले कॉम्पिटिशन में हिस्सा लेने और खुद को साबित करने का मौका मिलेगा, वहीं कॉम्पिटिटिव एक्सपीरियंस के साथ अपनी खेल प्रतिभा दिखाने का एक बड़ा प्लेटफॉर्म भी मिलेगा।
एशियन गेम्स 2026: शूटिंग से भारत की झोली में आया एक और मेडल, ईशा ने 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में जीता सिल्वर

टोयोटा। भारत की निशानेबाज ईशा सिंह ने सोमवार को एशियाई खेल 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में सिल्वर मेडल अपने नाम किया। अत्यधिक दबाव के बीच ईशा ने गजब के मानसिक संतुलन का परिचय दिया। प्रतियोगिता के दौरान उन्हें कई बार कठिन शूट-ऑफ का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपनी एकाग्रता नहीं खोई और दृढ़ संकल्प के साथ दूसरा स्थान हासिल कर देश को गौरवान्वित किया। एशियन गेम्स में ईशा का यह तीसरा सिल्वर मेडल है। इससे पहले उन्होंने हांग्जो 2023 में 10 मीटर एयर पिस्टल व्यक्तिगत और टीम स्पर्धाओं में सिल्वर मेडल जीता था। ईशा ने 580-22x के स्कोर के साथ आठवें स्थान पर रहते हुए मुश्किल से फाइनल के लिए क्वालीफाई किया था। हालांकि, मेडल राउंड शुरू होते ही भारतीय खिलाड़ी ने उस शुरुआती संघर्ष को पीछे छोड़ दिया और फाइनल की शुरुआत अपने पांच शॉट्स में पांच परफेक्ट हिट्स के साथ की। शुरुआती दौर में वह लीडर्स में बनी रहीं, लेकिन टॉप पर मुकाबला बार-बार कड़ा होता रहा। चीन की जिओ जियारुइक्सुआन लगातार परफेक्ट सीरीज के साथ आगे बढ़ गईं, जबकि उत्तर कोरिया की किम ह्योन सुक भी मेडल की दौड़ में मजबूती से बनी रहीं। एलिमिनेशन राउंड में और भी उतार-चढ़ाव आए। तीन हिट्स के बाद ईशा स्टैंडिंग में नीचे खिसक गईं, लेकिन उन्होंने शानदार वापसी करते हुए 5/5 का स्कोर किया और खुद को मुकाबले में बनाए रखा। जब वियतनाम की ट्रिन्ह थू विन्ह बाहर हुईं, तो भारतीय खिलाड़ी का मेडल पक्का हो गया। इसके बाद ब्रॉन्ज मेडल के लिए मुकाबला ईशा और किम के बीच शूट-ऑफ के एक असाधारण क्रम में बदल गया, क्योंकि दोनों 34 हिट्स पर बराबरी पर थीं। दोनों शूटर्स ने शुरुआत में तीन-तीन हिट्स किए, जिससे एक और शूट-ऑफ की स्थिति बन गई। एक तकनीकी रुकावट ने तनाव और बढ़ा दिया, जिसके बाद सिंगल-शॉट की स्थिति के साथ मुकाबला फिर से शुरू हुआ। आखिरकार ईशा ने बाजी मारी और ब्रॉन्ज मेडल की स्थिति पक्की की और गोल्ड के लिए जिओ से मुकाबला करने का हक हासिल किया। फाइनल मुकाबला भी उतना ही रोमांचक रहा। जिओ और ईशा के बीच सिर्फ एक हिट का अंतर था, तभी भारतीय खिलाड़ी ने चार हिट्स लगाकर एक और शूट-ऑफ की स्थिति बना दी। इसके बाद दोनों शूटर्स ने चार-चार हिट्स किए, जिससे मुकाबला एक और शूट-ऑफ में चला गया। गोल्ड मेडल बस मिलने ही वाला था कि ईशा ने दो हिट किए, जबकि शियाओ ने तीन हिट किए, जिससे भारतीय खिलाड़ी को सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा। उनके कुल स्कोर 38 तक पहुंचे, जो 2023 में हांग्जो एशियन गेम्स में चीन की लियू रुई द्वारा बनाए गए 38 हिट के गेम्स रिकॉर्ड के बराबर था। इस मेडल के साथ ईशा की तेजी से बढ़ती उपलब्धियों की सूची में एक और कामयाबी जुड़ गई है। भारतीय खिलाड़ी के नाम अभी महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल का वर्ल्ड रिकॉर्ड है। उन्होंने मई में म्यूनिख वर्ल्ड कप में 43 हिट किए थे और वह अभी वर्ल्ड नंबर एक भी हैं। ईशा का सिल्वर मेडल भारत के लिए शूटिंग रेंज में एक रोमांचक सुबह का समापन था, जो टीम फाइनल में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद आया। टीम फाइनल में एक जरूरी टारगेट चूकने के कारण भारतीय महिलाएं पांचवें स्थान पर रहीं। भारतीय टीम में दो बार की ओलंपिक मेडलिस्ट मनु भाकर, एशियन गेम्स की सिल्वर मेडलिस्ट ईशा सिंह और कई बार की एशियन गेम्स की मेडलिस्ट राही सरनोबत शामिल थीं। प्रिसिजन और रैपिड इवेंट्स में उनका कुल स्कोर 1727-56x रहा और एक और मेडल हाथ से निकल गया।
‘आने वाली पीढ़ी को सही ज्ञान देना जरूरी’, सुनील लहरी ने बताई परवरिश की अहमियत

मुंबई। अभिनेता सुनील लहरी सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते हैं और अक्सर अपने विचार साझा करते हैं। सोमवार को उन्होंने बच्चों पर माता-पिता की परवरिश के असर को लेकर बात की और बताया कि आने वाली पीढ़ी को बेहतर बनाने के लिए किस तरह के संस्कार देने चाहिए। अभिनेता ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने माता-पिता द्वारा दी गई अच्छी शिक्षा और गुण पर जोर दिया। वीडियो में वह कहते हैं, “सभी माता-पिता अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देना चाहते हैं। मुझे भी मेरे मेरे पिता माता ने अच्छी शिक्षा और गुण दिए हैं। बचपन में मेरे पिता जी हमेशा कहा करते थे कि जैसा खाए अन्न वैसा करे मन, जैसा पिए पानी वैसी बोले वाणी, जैसी होए संगत वैसी होए रंगत यानी कि अगर आप अच्छा सात्विक भोजन करेंगे, तामसिक भोजन से दूर रहेंगे तो आपके विचार अच्छे रहेंगे।” उन्होंने आगे कहा, “उसी तरह अगर आप शुद्ध पानी पिएंगे। इसका मतलब कि अगर आप शराब या नशीले पदार्थों से परहेज करेंगे तो आपकी वाणी अच्छी रहेगी और गलत शब्दों का इस्तेमाल नहीं करेंगे। अगर आपकी संगत अच्छी रहेगी यानी कि विद्वानों की संगत रहेगी, तो आपके अंदर अच्छे विचार आएंगे।” अभिनेता ने अपनी बात पूरी करते हुए कहा, “हमें आने वाली पीढ़ी को अच्छे विचारों से लोगों को अवगत करवाना चाहिए। उनका भविष्य उज्ज्वल बनाने में मदद करनी चाहिए। आप लोग खुश रहिए, स्वस्थ रहिए जय श्री राम। अभिनेता ने वीडियो पोस्ट कर कैप्शन लिखा, “सभी माता पिता अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा और गुण देना चाहते हैं, बचपन में पापा द्वारा कहीं एक बात मैं आप लोगों से शेयर करता हूं।” अभिनेता सुनील टेलीविजन इंडस्ट्री के लोकप्रिय अभिनेता हैं, जिन्होंने रामानंद सागर के ऐतिहासिक टीवी सीरियल ‘रामायण’ में ‘लक्ष्मण’ के किरदार से काफी लोकप्रियता हासिल की थी। वर्तमान समय में अभिनेता फिल्मों और टीवी से दूर हैं, लेकिन वे सोशल मीडिया के जरिए अपने फैंस से जुड़े रहते हैं। –आईएएनएस एनएस/एएस
शिवसेना (यूबीटी) ने चुनाव आयोग पर वोटिंग से वंचित करने का लगाया आरोप, ‘सामना’ में जन-आक्रोश की चेतावनी

मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) ने सोमवार को सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने और राजनीतिक फायदे के लिए अहम संवैधानिक संस्थाओं का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। यह आलोचना उन मीडिया रिपोर्ट्स के बाद आई है जिनमें चुनाव आयोग के अंदर वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (एसआईआर) को लेकर गंभीर अंदरूनी मतभेदों का खुलासा हुआ था। पार्टी ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़ी बातों के सामने आने के बाद लोगों में गुस्सा और राजनीतिक तनाव बढ़ा है, जिसके चलते भारत के बड़े शहरों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त के कथित पक्षपात की कड़ी निंदा करते हुए पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में ठाकरे गुट ने मौजूदा स्थिति को भारतीय लोकतंत्र पर सीधा हमला बताया। ‘सामना’ के संपादकीय में कहा गया है कि संवैधानिक पदों का इस्तेमाल पक्षपाती तरीके से किया जा रहा है। इसमें आरोप लगाया गया कि चुनाव के नतीजों को प्रभावित करने की रणनीति के तहत महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे अहम राज्यों में 13 करोड़ वोटरों को सुनियोजित तरीके से वोट देने के अधिकार से वंचित कर दिया गया। संपादकीय में कहा गया, “मुख्य चुनाव आयुक्त के कामों ने एक स्वायत्त संस्था की निष्पक्षता को नुकसान पहुंचाया है। लोकतंत्र के निष्पक्ष मध्यस्थ के तौर पर काम करने के बजाय, चुनाव आयोग राजनीतिक दबाव में काम कर रहा है।” इसमें शीर्ष अधिकारियों के तुरंत इस्तीफे और जवाबदेही की मांग की गई। संपादकीय में कहा गया कि इस विवाद ने लोगों में गुस्से की लहर पैदा कर दी है। इसमें दावा किया गया, “नई दिल्ली में वीकेंड पर हजारों प्रदर्शनकारी, छात्र समूह और राजनीतिक कार्यकर्ता जंतर-मंतर पर जमा हुए और सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।” संपादकीय के अनुसार, भारी पुलिस और सुरक्षा बल ने विरोध स्थल और सेंट्रल दिल्ली के अहम इलाकों को घेर लिया और कई गिरफ्तारियां कीं, जबकि प्रदर्शनकारी सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे थे। मुंबई में भी विरोध प्रदर्शन हुए, जहां प्रदर्शनकारी मेट्रो स्टेशनों, रेलवे प्लेटफॉर्म और सार्वजनिक जगहों पर जमा होकर कथित चुनावी गड़बड़ियों और प्रशासन की मनमानी के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर कर रहे थे। संपादकीय में कहा गया, “केरल के पूर्व मुख्य सचिव जिजी थॉमसन के इस खुलासे के बाद तनाव और बढ़ गया कि सीईसी ज्ञानेश कुमार ने, जब वे एक सीनियर नौकरशाह के तौर पर काम कर रहे थे, उन्हें भाजपा में शामिल होने और केरल से पार्टी के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए मनाने की कोशिश की थी, और जीतने पर केंद्र में मंत्री पद का वादा किया था।” उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने कहा कि इस राजनीतिक घटनाक्रम ने विपक्षी ताकतों को एकजुट कर दिया है। खबरों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और वामपंथी दलों से संपर्क किया है। उन्होंने ‘इंडिया’ गठबंधन के तहत एक संयुक्त मोर्चा बनाने का आग्रह किया है ताकि सरकार के खिलाफ एक मिली-जुली रणनीति बनाई जा सके और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की जा सके। वहीं, भाजपा के प्रवक्ताओं और भाजपा शासित राज्यों के नेताओं ने चुनाव आयोग का बचाव किया और इन आरोपों को सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी बताकर खारिज कर दिया। दूसरी ओर, विपक्षी नेताओं का कहना है कि जनता की नाराजगी तेजी से एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच रही है। संपादकीय में चेतावनी दी गई है कि जब तक संवैधानिक गरिमा बहाल नहीं की जाती, तब तक जनता का व्यापक असंतोष सरकार की वैधता के लिए चुनौती बना रहेगा।
दिल्ली की अदालत ने यौन उत्पीड़न मामले में बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को जारी किया नोटिस

नई दिल्ली। दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को कथित तौर पर यौन उत्पीड़न के मामले में भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को नोटिस जारी किया। इस मामले में बृजभूषण शरण सिंह को बरी किए जाने के फैसले को महिला पहलवानों ने चुनौती दी है। राऊज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज दिग्विजय सिंह ने सोमवार को चार महिला पहलवानों की याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान सेशन कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह के साथ डब्ल्यूएफआई के पूर्व सचिव विनोद तोमर को भी नोटिस भेजा। इस मामले में अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी। बृजभूषण शरण सिंह और महिला पहलवानों के बीच यह विवाद 2023 में सामने आया था। कई नामी महिला पहलवानों ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2016 से 2022 के बीच बृजभूषण शरण सिंह की ओर से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं, ट्रेनिंग कैंप, डब्ल्यूएफआई कार्यालय और अन्य स्थानों पर उनके साथ अनुचित व्यवहार और यौन उत्पीड़न किया गया। इस मामले में डब्ल्यूएफआई के पूर्व सचिव विनोद तोमर को सह-आरोपी बनाया गया। महिला पहलवानों की शिकायतों के आधार पर, पुलिस ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। 15 जून 2023 को पुलिस ने कई धाराओं के तहत अपराधों के लिए बृजभूषण के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की। ट्रायल कोर्ट ने 10 मई 2024 को मामले में बृजभूषण पर यौन उत्पीड़न व महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने के आरोप तय किए थे। 3 अगस्त को मामले में दिल्ली की मजिस्ट्रेट कोर्ट ने बृजभूषण सिंह और विनोद तोमर को बरी कर दिया। चार महिला पहलवानों ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के 3 अगस्त के आदेश के खिलाफ सेशन कोर्ट का रुख किया है। इस मामले में सह-आरोपी विनोद तोमर की बरी होने के आदेश को भी चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया कि मजिस्ट्रेट कोर्ट का आदेश कानून की नजर में टिकाऊ नहीं है और सबूतों का गलत व चुनिंदा तरीके से आकलन किया गया है। महिला पहलवानों का कहना है कि आदेश में पीड़िता के व्यवहार को लेकर पुरानी रूढ़िवादी सोच को आधार बनाया गया है। याचिका के अनुसार, ट्रायल कोर्ट ने गवाहों के समर्थन वाली पूरी तस्वीर देखने के बजाय छोटी-छोटी और गैर-जरूरी गलतियों पर ध्यान केंद्रित किया और उन्हीं के आधार पर बृजभूषण सिंह के खिलाफ पूरे मामले को खारिज कर दिया।
उज्जैन में शाही मस्जिद का हिस्सा हटाए जाने को लेकर बवाल; पत्थरबाजी के बीच छोड़े गए आंसू गैस के गोले

उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन में सोमवार सुबह तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई। ऐतिहासिक शाही मस्जिद के कुछ हिस्से को आंशिक रूप से हटाने के प्रस्ताव के विरोध में प्रदर्शन हिंसक हो गया। इस दौरान पत्थरबाजी की गई और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। सिंहस्थ 2028 कार्यक्रम की तैयारियों के बीच मस्जिद परिसर के आसपास भारी पुलिस बल तैनात है। यह विवाद कंथल स्क्वायर से गोपाल मंदिर तक लगभग 900 मीटर के रास्ते को चौड़ा करने के काम को लेकर है। अधिकारी इस रास्ते को 15 मीटर तक चौड़ा कर रहे हैं ताकि हिंदुओं के इस बड़े धार्मिक आयोजन के दौरान आने वाले भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ को संभाला जा सके। इस प्रोजेक्ट के रास्ते में कई धार्मिक ढांचे आते हैं। अधिकारियों का कहना है कि रास्ते में पड़ने वाले लगभग 60 ऐसे ढांचों में से ज्यादातर को पहले ही हटाया जा चुका है। हालांकि, शाही मस्जिद और ‘खड़े हनुमान मंदिर’ के पास स्थित एक मजार हाल के दिनों में विरोध का केंद्र बन गए हैं। शाही मस्जिद, जिसे समुदाय के लोग सदियों पुरानी वक्फ संपत्ति बताते हैं (कुछ जानकारियों के अनुसार यह लगभग 1390 की है), के कुछ हिस्सों जैसे प्रार्थना कक्ष, एक मीनार और उससे जुड़ी संरचनाओं, को आंशिक रूप से गिराने का प्रस्ताव है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पहले उज्जैन नगर निगम के नोटिस को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया था, जिसमें आने वाले सिंहस्थ के लिए जनहित और ट्रैफिक की जरूरतों का हवाला दिया गया था। इस मामले से जुड़ी अगली सुनवाई सोमवार को हाईकोर्ट की इंदौर पीठ में होनी थी। कार्रवाई की आशंका को देखते हुए अधिकारियों ने भारी मशीनरी (जिसमें अर्थ-मूविंग मशीनें भी शामिल थीं) के साथ लगभग 2,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया। मुस्लिम समुदाय के लोग शनिवार रात से ही शाही मस्जिद परिसर और आसपास की सड़कों पर इकट्ठा होने लगे और नारेबाजी करने लगे। यह विरोध रविवार रात तक जारी रहा। आवाजाही रोकने के लिए ‘कंथल-गोपाल मंदिर’ मार्ग पर बैरिकेड लगाए गए और ड्रोन कैमरों से निगरानी की गई। पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स की टुकड़ियों ने मजबूत मौजूदगी बनाए रखी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, सोमवार को जब हालात तनावपूर्ण बने हुए थे, तो कुछ युवाओं ने पुलिसकर्मियों पर पत्थरबाजी जारी रखी जबकि पुलिसकर्मियों द्वारा बार-बार आंसू गैस के गोले छोड़े जा रहे थे। भीड़ को तितर-बितर करने की कोशिश में 18 से ज्यादा आंसू गैस के गोले इस्तेमाल किए गए। हालात को सामान्य करने के लिए सुरक्षा बलों की कोशिशों के बीच मौके पर तनाव बना रहा। कानून-व्यवस्था बनाए रखने की ड्यूटी के दौरान एक घटना में क्राइम ब्रांच की टीआई पुष्पा पांचाल के हाथ में चोट लग गई। पुलिस के मुताबिक, विरोध-प्रदर्शन के दौरान महिलाओं का एक समूह आगे बढ़ रहा था। जब महिला पुलिस की टीम उन्हें सुरक्षित रूप से हटाने की कोशिश कर रही थी, तो अधिकारी उस समूह के पास पहुंचे जो खुद को छिपाने के लिए एक चादर का इस्तेमाल कर रहे थे। चादर के कोने से टीआई पांचाल का हाथ कट गया। उन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया और उनके हाथ पर पट्टी बांधी गई। पुलिस ने पुष्टि की कि विरोध कर रही महिलाओं में से कोई भी घायल नहीं हुईं और सभी सुरक्षित रहीं। प्रशासन ने इस बात पर जोर दिया है कि सड़क चौड़ी करने का काम ‘सिंहस्थ 2028’ के लिए बड़े पैमाने पर किए जा रहे बुनियादी ढांचे के सुधार का हिस्सा है। इस आयोजन में करोड़ों श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। शहर भर में कई अन्य धार्मिक और गैर-धार्मिक ढांचों के खिलाफ भी इसी तरह की कार्रवाई की गई है ताकि महाकालेश्वर मंदिर क्षेत्र जैसी अहम जगहों के पास भीड़-भाड़ कम की जा सके। समुदाय के प्रतिनिधियों ने मस्जिद को न हटाने की मांग की है जबकि अधिकारियों का कहना है कि यह काम कानूनी प्रक्रियाओं और विकास योजनाओं के तहत किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, मस्जिद के आसपास सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात है और हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान स्थिति को और बिगड़ने से रोकने पर ध्यान दिया जा रहा है।
राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं का संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करना एकमात्र एजेंडाः जेपी नड्डा

नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोपों पर राहुल गांधी और विपक्ष पर निशाना साधा है। केंद्रीय मंत्री ने सोमवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि राहुल गांधी समेत विपक्ष के नेताओं का एकमात्र एजेंडा देश की स्वतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम और उन्हें कमजोर करना है।” केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा, “आज जब 140 करोड़ भारतीय अपनी कड़ी मेहनत से विकसित भारत का संकल्प पूरा कर रहे हैं और दुनियाभर में भारत का नाम हो रहा है, तो दुख की बात है कि कांग्रेस और पूरा इंडी गठबंधन देश की इस तरक्की को देखकर निराश और हताश है। विपक्ष के सभी झूठे आरोप तथ्यों की कसौटी पर बार-बार गलत साबित हुए हैं। चुनाव आयोग से लेकर देश की सबसे बड़ी अदालतों तक, उनके हर झूठ की पोल खुल चुकी है। जब उनके पास कोई नीति या विजन नहीं होता, तो वे देश में भ्रम और अराजकता फैलाने के लिए नई-नई साजिशें रचते हैं। कुछ दिन पहले ही हमने देखा कि कैसे एक झूठी खबर पर पूरे देश में हंगामा खड़ा किया गया था। अब, जब चुनाव आयोग के सभी सदस्यों ने उनके लगाए हर झूठ का पर्दाफाश कर दिया है, तो वे फिर से माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।” राहुल गांधी कान खोलकर सुन लें! किसी झूठ को सौ बार दोहराने से वह सच नहीं बन जाता और न ही सच कभी हारता है। राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, अखिलेश यादव और ममता बनर्जी का एकमात्र एजेंडा देश की स्वतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करना और उन्हें कमजोर करना है।” यह वही ‘टूलकिट मानसिकता’ है जो देश के विकास को रोकने के लिए हर सुबह एक नई साजिश रचती है। नड्डा ने कहा, “आरोप लगाना, देश का माहौल खराब करना और भाग जाना, विपक्ष का काम करने का यही तरीका बन गया है। उन्हें देश की सुरक्षा, जन-कल्याण या देश के सम्मान और प्रतिष्ठा की कोई परवाह नहीं है। उनका एकमात्र मकसद सत्ता हासिल करना है, लोगों की सेवा करना नहीं बल्कि परिवारवाद की राजनीति को बढ़ावा देना और अपना निजी फायदा उठाना है। जनता ने अतीत में देश में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश करने वाली ताकतों को करारा सबक सिखाया है और भविष्य में भी ऐसा ही होगा। जनता की अदालत में उनकी हर गलतफहमी और साजिश चकनाचूर हो जाएगी।