युवाओं और विपक्ष की बात सुननी होगी, देश में तानाशाही नहीं चलेगी : पृथ्वीराज चव्हाण

मुंबई। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने मानसून सत्र में संसद की कार्यवाही बाधित होने को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सही सवाल उठा रहे हैं और विपक्षी दलों का रुख भी सही दिशा में है। उन्होंने कहा कि युवाओं और विपक्ष की बात सरकार को सुननी होगी तथा देश में तानाशाही नहीं चल सकती। मुंबई में आईएएनएस से बातचीत में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने दिल्ली में संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जिस तरह की कार्रवाई की गई, वह किसके आदेश पर हुई, इसका जवाब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को देना चाहिए। दिल्ली पुलिस तो उनके अधीन है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी भी यही मांग कर रहे हैं कि सरकार सदन में आकर इस मुद्दे पर जवाब दें लेकिन गृह मंत्री सदन में जवाब देने के लिए सामने नहीं आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने बिल्कुल सही सवाल उठाया है। पैलेट गन का इस्तेमाल तब तक नहीं किया जाता, जब तक उचित स्तर से आदेश न दिया जाए। हमारे प्रोटोकॉल में साफ कहा गया है कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पैलेट गन का इस्तेमाल केवल विशेष परिस्थितियों में ही किया जाता है। चव्हाण ने कहा कि यदि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत छात्रों से बातचीत कर रहे हैं और उनकी भाषा में उनसे जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं, तो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी छात्रों और विपक्ष के सवालों का जवाब देना चाहिए। मोहन भागवत से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि वे अमित शाह को कहे कि वे संसद में जाकर इन सवालों का जवाब दें। यह ड्रामा कब तक चलेगा? अमित शाह संसद में आएं और माफी मांगें। युवा पीढ़ी अब यहां से शांत नहीं होगी। लोकतंत्र में जनता और विपक्ष की आवाज सुनी जानी चाहिए। जनतंत्र में भरोसा रखना होगा। तानाशाही की सरकार इस देश में नहीं चलेगी। महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े बिलों पर पृथ्वीराज चव्हाण ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि इस पूरी कवायद के पीछे असली मकसद संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत हासिल करना है। सदन में उन्हें दो-तिहाई बहुमत मिल जाएगा तो वे संविधान में बड़े बदलाव करने और कई प्रावधानों को बदलने में सक्षम हो जाएंगे। यही उनका अंतिम लक्ष्य है। चव्हाण ने सवाल उठाया कि क्या सरकार महिला आरक्षण का बहाना बनाकर परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, महिला आरक्षण और परिसीमन दो अलग-अलग मुद्दे हैं। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण की अवधारणा कांग्रेस लेकर आई थी और 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था। उन्होंने कहा कि जब वह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे, तब राज्य में महिलाओं के लिए आरक्षण को बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया गया था। चव्हाण ने कहा कि मौजूदा सरकार जब महिला आरक्षण से जुड़ा विधेयक लेकर आई थी, तब कांग्रेस ने उसका स्वागत किया था, लेकिन इसे परिसीमन के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा को पता है कि वह 2029 का लोकसभा चुनाव नहीं जीत पाएगी, इसलिए वह संविधान में बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि भले ही इन बिलों के जरिए उनका मकसद हिंदू राष्ट्र बनाने का हो, लेकिन, संविधान में बड़े बदलाव के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की जेनजी के साथ बातचीत पर भी पृथ्वीराज चव्हाण ने तंज कसते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर जिस तरह से सीजेपी के तत्वावधान में प्रदर्शन हुआ, ऐसे प्रदर्शन की उम्मीद भाजपा और संघ को भी नहीं थी। चव्हाण ने कहा कि पहले किसानों के आंदोलन सहित कई आंदोलनों को सरकार ने दबाने या उनसे निपटने में सफलता हासिल की, लेकिन छात्रों का यह आंदोलन अलग है। उनके मुताबिक, यह आंदोलन किसी विशेष जाति, राज्य, आयु वर्ग या आर्थिक हित से जुड़ा नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर था। इसीलिए छात्र सड़कों पर आए और अपने हक की बात की। भाजपा इस आंदोलन को लेकर पैनिक मोड में चली गई। चव्हाण ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रात में वीडियो जारी कर छात्रों से संवाद करने की कोशिश की और इसके बाद संघ प्रमुख ने भी छात्रों तक पहुंचने का प्रयास किया। मोहन भागवत के छात्रों से संवाद का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि संघ प्रमुख ने जेन जी की भाषा में बात करने की कोशिश की और यह दिखाने का प्रयास किया कि वे जेनजी के साथ हैं। पृथ्वीराज चव्हाण ने भागवत के एंटी-नेशनल वाले बयान पर सवाल करते हुए कहा कि जिन नेताओं ने छात्रों के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं और उन्हें राष्ट्रविरोधी बताया, क्या वे उन नेताओं के बारे में भी कुछ कहेंगे। प्रधानमंत्री को संसद में आकर छात्रों से जुड़े मुद्दों पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार जनता के सवालों से भाग नहीं सकती, जवाब देना होगा। बंगाल में पूर्व सीएम ममता बनर्जी के काफिले पर हुए हमले को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि मेरे पास इस बारे में कोई सीधी जानकारी नहीं है। हालांकि, अगर आप ऐसा कह रहे हैं, तो यह सच ही होगा। उन्होंने कहा कि विपक्ष को अपनी राजनीतिक गतिविधियां चलाने का पूरा अधिकार है और यह उसका संवैधानिक अधिकार भी है। उन्होंने कहा कि यदि सत्ताधारी पार्टी अपनी ताकत और धन का गलत इस्तेमाल कर विपक्ष को खत्म करने के लिए डराने-धमकाने या बाहुबल का सहारा लेती है, तो ऐसे व्यवहार को स्वीकार या उसका समर्थन नहीं किया जा सकता।

डीपीएल 2026: ‘हाई स्कोरिंग’ मुकाबले में ‘किंग्स’ की जीत, ‘स्ट्राइकर्स’ ने ‘टाइगर्स’ को 7 विकेट से रौंदा

नई दिल्ली। दिल्ली प्रीमियर लीग (डीपीएल) 2026 में रविवार को नॉर्थ दिल्ली स्ट्राइकर्स ने न्यू दिल्ली टाइगर्स के खिलाफ 7 विकेट से जीत हासिल की। वहीं, सेंट्रल दिल्ली किंग्स ने ‘हाई स्कोरिंग’ मैच में साउथ दिल्ली सुपरस्टार्स को 4 विकेट से हराया। यह दोनों मुकाबले अरुण जेटली स्टेडिमय में खेले गए। सेंट्रल दिल्ली किंग्स 6 में से 5 मैच जीतकर प्वाइंट्स टेबल में शीर्ष पर है, जबकि 4 में से 2 मैच जीतकर नॉर्थ दिल्ली स्ट्राइकर्स तीसरे पायदान पर है। न्यू दिल्ली टाइगर्स ने 5 में से 4 मैच गंवा दिए हैं। यह टीम सातवें स्थान पर है, जबकि 5 में से 3 मैच गंवाने के बाद साउथ दिल्ली सुपरस्टार्स छठे पायदान पर है। दिन के पहले मैच में टॉस गंवाकर बल्लेबाजी करने उतरी न्यू दिल्ली टाइगर्स ने 8 विकेट खोकर 161 रन बनाए। इस टीम के लिए ऋतिक शौकीन ने सर्वाधिक 35 रन बनाए, जबकि सलामी बल्लेबाज अतुल्य पांडे ने 32 रन का योगदान दिया। इनके अलावा, आर्यन शर्मा ने 25 रन टीम के खाते में जोड़े। विपक्षी खेमे से विकास दीक्षित ने 28 रन देकर सर्वाधिक 3 विकेट हासिल किए। इसके जवाब में नॉर्थ दिल्ली स्ट्राकर्स ने 19.1 ओवरों में जीत हासिल कर ली। कप्तान सार्थक रंजन ने वैभव कांडपाल के साथ पहले विकेट के लिए 70 गेंदों में 102 रन की साझेदारी करते हुए जीत की नींव रखी। वैभव 36 गेंदों में 2 छक्कों और 3 चौकों के साथ 41 रन बनाकर आउट हुए, जबकि सार्थक ने 5 छक्कों और 3 चौकों की मदद से 65 रन की पारी खेली। इनके अलावा, भरत सिंधवानी ने नाबाद 24 रन, जबकि यश डबास ने नाबाद 14 रन टीम के खाते में जोड़े। विपक्षी खेमे से रेवंत राक्यान ने 2 विकेट निकाले। रविवार के दूसरे मुकाबले में सेंट्रल दिल्ली किंग्स ने जीत दर्ज की। टॉस गंवाकर बल्लेबाजी के लिए उतरी साउथ दिल्ली सुपरस्टार्स ने 20 ओवरों में 6 विकेट खोकर 220 रन कूटे। सनत सांगवान (38) ने कप्तान आयुष बडोनी (44) के साथ दूसरे विकेट के लिए 39 गेंदों में 72 जोड़े, जबकि प्रणव पंत (29) ने तेजस्वी दहिया के साथ चौथे विकेट के लिए 39 गेंदों में 77 रन की साझेदारी की। तेजस्वी 31 गेंदों में 8 छक्कों और 1 चौके के साथ 69 रन बनाकर आउट हुए। विपक्षी खेमे से मोनी ग्रेवाल और गवनीश खुराना ने 2-2 विकेट निकाले। विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी सेंट्रल दिल्ली किंग्स ने 19.4 ओवरों में मैच अपने नाम कर लिया। टीम ने 62 के स्कोर तक अपने 3 विकेट गंवा दिए थे। यहां से युगल सैनी ने केशव डबास के साथ चौथे विकेट के लिए 55 गेंदों में 96 रन की साझेदारी करते हुए टीम को 158 के स्कोर तक पहुंचाया। केशव 27 गेंदों में 5 बाउंड्री की मदद से 39 रन बनाकर आउट हुए, जिसके बाद युगल ने वंश बेदी के साथ पांचवें विकेट के लिए 19 गेंदों में 48 रन जुटाकर टीम को 200 के पार पहुंचा दिया। युगल 45 गेंदों में 6 छक्कों और 9 चौकों के साथ 91 रन बनाकर आउट हुए, जिसके बाद वंश बेदी (नाबाद 21) ने टीम को जीत दिलाई। विपक्षी खेमे से अंशुमन हूडा ने सर्वाधिक 3 विकेट निकाले, जबकि ऋषभ शर्मा ने 2 विकेट अपने नाम किए।

ईडी प्रमुख राहुल नवीन को अगस्त 2027 तक एक वर्ष का सेवा विस्तार मिला

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के निदेशक राहुल नवीन को 13 अगस्त से एक वर्ष का सेवा विस्तार दिया है। कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय द्वारा जारी एक परिपत्र में कहा गया कि कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने आईआरएस अधिकारी राहुल नवीन को प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक के रूप में 13 अगस्त के बाद एक वर्ष के लिए यानी 13 अगस्त, 2027 तक, उनकी सेवानिवृत्ति की तिथि यानी 31 जुलाई, 2027 के बाद तक या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, सेवा विस्तार को मंजूरी दे दी है। 1956 में स्थापित ईडी ने 1 मई, 2026 को अपने 70 वर्ष पूरे किए। प्रमुख वित्तीय जांच एजेंसी के रूप में ईडी को विदेशी मुद्रा प्रबंधन से संबंधित कानूनों को लागू करने और मनी लॉन्ड्रिंग की रोकथाम का दायित्व सौंपा गया है। इससे पहले 70वें प्रवर्तन दिवस समारोह में बोलते हुए वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने एजेंसी को वित्तीय अपराधों से राष्ट्र की रक्षा करने वाली ढाल बताया। राज्य मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि ईडी को दी गई शक्तियां मनी लॉन्ड्रिंग, हवाला लेनदेन, बेनामी संपत्तियों और कॉरपोरेट धोखाधड़ी जैसे वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए हैं, न कि व्यक्तियों को निशाना बनाने के लिए। कठोर प्रवर्तन की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे अपराध अर्थव्यवस्था और आम नागरिक के लिए गंभीर खतरा हैं। राज्य मंत्री ने यह भी बताया कि इस वर्ष 31 मार्च तक ईडी ने लगभग 23 लाख करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की थी, जिसमें से 63,000 करोड़ रुपए से अधिक की राशि बैंकों, निवेशकों और घर खरीदारों सहित उनके वास्तविक मालिकों को वापस कर दी गई है। उभरती चुनौतियों का जिक्र करते हुए राज्य मंत्री चौधरी ने कहा कि साइबर धोखाधड़ी और ऑनलाइन वित्तीय अपराध बढ़ती चिंता का विषय हैं और इनसे प्रभावी ढंग से निपटने के लिए केंद्रीय एजेंसियों के बीच मजबूत सहयोग का आह्वान किया। राज्य मंत्री ने दोहराया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टोलरेंस की नीति अपनाती है। केंद्रीय मंत्री चौधरी ने इस अवसर पर ईडी के जयपुर क्षेत्रीय कार्यालय का भी उद्घाटन किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ईडी निदेशक राहुल नवीन ने कहा कि वित्तीय अपराधों का स्वरूप बैंक धोखाधड़ी और कॉरपोरेट घोटालों से हटकर क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी, साइबर-आधारित अपराध, आतंकवाद वित्तपोषण और मादक पदार्थों की तस्करी की ओर मुड़ गया है। उन्होंने कहा कि ईडी ने इन उभरते खतरों के प्रति सक्रिय रूप से अनुकूलन किया है और आपराधिक नेटवर्कों को उनके वित्तीय स्रोतों को निशाना बनाकर बाधित करने की एक केंद्रित रणनीति अपनाई है। वैश्विक सहयोग पर प्रकाश डालते हुए राहुल नवीन ने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी प्रयासों में भारत की भूमिका मजबूत हुई है, और ईडी अंतरराष्ट्रीय ढांचों और संपत्ति वसूली नेटवर्कों में योगदान दे रही है।

सीडब्ल्यूजी 2026: ‘उनकी सफलता कई युवाओं को प्रेरित करेगी,’ पदकवीरों से मिले पीएम मोदी, उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सराहा

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ग्लासगो में ऐतिहासिक प्रदर्शन करने वाले भारत के कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के पदक विजेताओं से नई दिल्ली स्थित अपने आधिकारिक आवास 7, लोक कल्याण मार्ग पर मुलाकात की। इस मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर शेयर करत हुए पीएम मोदी ने लिखा, “7, लोक कल्याण मार्ग पर कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के हमारे शानदार मेडल विजेताओं की मेजबानी करके बहुत खुशी हुई। गेम्स के दौरान उनके अनुभवों के बारे में सुना। उन सभी ने अपने बेहतरीन प्रदर्शन से देश का मान बढ़ाया है। उनकी सफलता कई युवाओं को प्रेरित करेगी।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘एक्स’ अकाउंट पर इस मुलाकात का एक वीडियो भी शेयर किया, जिसकी शुरुआत विमेंस 51 किलोग्राम भार वर्ग में गोल्ड जीतने वाली बॉक्सर साक्षी चौधरी ने की। इस वीडियो में साक्षी ने कहा, “हैलो फ्रैंड्स, मैं साक्षी चौधरी… आज हम सभी कॉमनवेल्थ गेम्स मेडलिस्ट को आदरणीय प्रधानमंत्री सर ने बुलाया है। हमें इस पर काफी गर्व महसूस हो रहा है। हमें प्रधानमंत्री से मिलकर बहुत खुशी हुई। वह बहुत विनम्र हैं।” इसके बाद पीएम मोदी ने कहा, “जो खेलेगा, वो खिलेगा, ऑलवेज चियर फोर भारत।” अपनी बात समाप्त करते हुए पीएम मोदी ने खिलाड़ियों के साथ ‘भारत माता की जय’ का उद्घोष किया। भारत ने पदक तालिका में 39 पदकों (13 गोल्ड, 17 ​​सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज) के साथ चौथा स्थान हासिल किया, जबकि प्रतियोगिता का कार्यक्रम काफी छोटा कर दिया गया था और इसमें कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, हॉकी और शूटिंग जैसे ज्यादा पदक वाले खेल शामिल नहीं थे। भारतीय बॉक्सिंग टीम ग्लासगो से सात गोल्ड और तीन सिल्वर मेडल लेकर लौटी। वहीं, जूडो टीम ने भी कॉमनवेल्थ गेम्स में अपना अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन करते हुए चार मेडल जीते। इनमें दो गोल्ड, एक सिल्वर और एक ब्रॉन्ज शामिल रहे। एथलेटिक्स में भारत को 10 मेडल मिले, जिनमें पांच सिल्वर और पांच ब्रॉन्ज शामिल थे। गुलवीर सिंह एक ही कॉमनवेल्थ गेम्स में दो व्यक्तिगत मेडल जीतने वाले पहले भारतीय ट्रैक एंड फील्ड एथलीट बने; जिन्होंने पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में सिल्वर और 5,000 मीटर दौड़ में ब्रॉन्ज मेडल जीता।

बोलीविया की ओर भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ, आठ मीट्रिक टन जीवनरक्षक और आवश्यक दवाइयों की खेप भेजी

नई दिल्ली। भारत के विदेश मंत्रालय (एमईए) ने रविवार को बताया कि भारत ने बोलीविया की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आठ मीट्रिक टन जीवनरक्षक और आवश्यक दवाइयों की खेप भेजी है। विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर ल‍िखा, “ग्लोबल साउथ के एक साझेदार देश की मदद के लिए भारत आगे आया है। भारत ने बोलीविया की सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षमता को समर्थन देने के लिए आठ मीट्रिक टन जीवनरक्षक और जरूरी दवाइयों की खेप भेजी है। भारत हमेशा एकजुटता और साझा प्रगति के जरिए सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए तैयार रहता है।” बोलीविया के उपराष्ट्रपति एडमंड लारा मोंटानो इस साल फरवरी में भारत आए थे। नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान उन्होंने भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं ने सौर ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, डिजिटलीकरण, उच्च शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की थी। बैठक के बाद उपराष्ट्रपति कार्यालय ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “बोलीविया के उपराष्ट्रपति एडमंड लारा मोंटानो ने आज नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति भवन में भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात की। यह मुलाकात इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान हुई।” पोस्ट में आगे कहा गया, “दोनों नेताओं ने भारत और बोलीविया के बीच लगातार मजबूत हो रहे द्विपक्षीय संबंधों पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने सौर ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, डिजिटलीकरण, उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की। साथ ही, बहुपक्षीय और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग को और मजबूत करने के बारे में भी विचारों का आदान-प्रदान किया।” बैठक में दोनों पक्षों ने सौर ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों, डिजिटलीकरण, उच्च शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने के उपायों पर विशेष रूप से चर्चा की। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत ने पिछले वर्ष जुलाई में भी दक्षिण अमेरिकी देश बोलीविया को तीन लाख खुराक एमआर (खसरा और रूबेला) वैक्सीन दान की थीं। इनके साथ टीकाकरण के लिए जरूरी अन्य चिकित्सा सामग्री भी भेजी गई थी। बोलीविया में भारत के राजदूत रोहित वाधवाना ने बोलीविया की प्रशासनिक राजधानी ला पाज के एल आल्टो हवाई अड्डे पर आयोजित एक समारोह में इस खेप को औपचारिक रूप से सौंपा था। इस अवसर पर बोलीविया की विदेश मंत्री सेलिंडा सोसा लुंडा, स्वास्थ्य एवं खेल मंत्री मारिया रेने कास्त्रो क्विसिकैंकी और उपमंत्री मैक्स एनरिकेज नावा भी मौजूद थे।

एकता कपूर की चमक कम नहीं हुई, वह समय के साथ बदलना जानती हैं : तेजस्वी प्रकाश

मुंबई। टीवी की दुनिया में अब डेली सोप्स के मुकाबले रियलिटी शोज, गेमिंग शोज और अलग तरह के कंटेंट को ज्यादा पसंद किया जा रहा है। ऐसे समय में मशहूर प्रोड्यूसर और ‘टेलीविजन की क्वीन’ कही जाने वाली एकता कपूर ने खुद को सिर्फ टीवी सीरियल्स तक सीमित नहीं रखा और रियलिटी शो के क्षेत्र में कदम बढ़ाया। इस कड़ी में एकता कपूर की तारीफ करते हुए अभिनेत्री तेजस्वी प्रकाश ने कहा कि वह समय के साथ खुद को बदलना जानती हैं। दरअसल, तेजस्वी प्रकाश इन दिनों गेमिंग रियलिटी शो ‘प्लेग्राउंड’ के पांचवें सीजन को लेकर चर्चा में हैं। आईएएनएस से बात करते हुए उन्होंने कहा, ”एकता कपूर हमेशा से टेलीविजन की क्वीन रही हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ टीवी की निर्माता के तौर पर देखना सही नहीं होगा। वह एक बेहतरीन रणनीतिकार होने के साथ-साथ बहुत समझदार बिजनेसवुमन भी हैं। उन्हें पता है कि इस समय दर्शकों के बीच क्या चल रहा है और किस तरह का कंटेंट लोगों को पसंद आ रहा है। इसलिए वह अपने काम को समय की मांग के हिसाब से बदलती रहती हैं।” तेजस्वी ने कहा, ”एकता ने अपने आसपास कई ऐसे लोगों को देखा है, जो अपने काम करने के तरीके में बदलाव नहीं करना चाहते। ऐसे लोग चाहे उनका तरीका काम करे या न करे, उसी रास्ते पर चलते रहते हैं। इसकी वजह से वे आगे नहीं बढ़ पाते और एक जगह पर ही रुक जाते हैं। समय के साथ खुद में बदलाव करना बेहद जरूरी है और उन्होंने अपने जीवन में इस बात को महसूस किया है।” तेजस्वी ने कहा, “एकता कपूर ने अपनी गलतियों को समझा है और उन गलतियों से सीखने के बाद अपने काम करने के तरीके में जरूरी बदलाव किए हैं। जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए यह समझना जरूरी है कि कब अपने तरीके को बदलने की जरूरत है।” तेजस्वी का एकता कपूर के साथ काम करने का अनुभव भी रहा है। वह एकता कपूर के चर्चित शो ‘नागिन 6’ में नजर आई थीं। रियलिटी शो ‘लॉक अप’ को लेकर भी तेजस्वी ने एकता कपूर की टीम की तारीफ की। उन्होंने कहा, ”शो के दूसरे सीजन की सफलता से मैं बेहद खुश और गर्व महसूस कर रही हूं। मैं खुद भी ‘लॉक अप’ का हिस्सा रह चुकी हूं। भले ही मेरा जुड़ाव शो से छोटे स्तर पर रहा हो, लेकिन उस शो का हिस्सा बनना और उसके मंच पर मौजूद रहना मेरे लिए बेहद मजेदार अनुभव था।” तेजस्वी ने आखिर में कहा, ”एकता कपूर की पहचान सिर्फ टेलीविजन तक सीमित नहीं है। वह फिल्ममेकर भी हैं और फिल्मों के क्षेत्र में भी काम कर रही हैं। उनके पास आने वाले समय के लिए कुछ नए और शानदार प्रोजेक्ट्स हैं। ऐसे में मुझे नहीं लगता कि एकता कपूर की चमक कम हो रही है।

ममता बनर्जी के काफिले पर पथराव, पूर्व सीएम का आरोप-पुलिस के सामने हुआ सब कुछ

बैरकपुर। पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के हलीशहर में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के काफिले को विरोध का सामना करना पड़ा। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने उनके काफिले को रोककर उनकी गाड़ी पर कीचड़, पानी की बोतलें और जूते-चप्पल फेंके। ममता बनर्जी ने दावा किया कि पुलिस की मौजूदगी में यह सब हुआ है। ममता बनर्जी एक दिवंगत टीएमसी कार्यकर्ता के परिवार से मिलने जा रही थीं। इसी दौरान हलीशहर में पहले से मौजूद प्रदर्शनकारियों ने उनके काफिले को रोक दिया। देखते ही देखते प्रदर्शन उग्र हो गया और भीड़ ने उनकी गाड़ी को चारों ओर से घेर लिया। प्रदर्शनकारियों ने ममता बनर्जी के खिलाफ नारेबाजी भी की। घटना के बाद ममता बनर्जी ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि असामाजिक तत्वों ने पुलिस के सामने ही मेरी कार पर बड़े-बड़े पत्थर फेंके। गाड़ी पर हमला इतना जबरदस्त था कि अगर खिड़कियां खुली होतीं तो मेरा सिर फट जाता। हम सब मारे जा सकते थे। यह सब पुलिस के सामने हुआ। मैंने ऐसा कुछ कभी नहीं देखा। यह क्या हो रहा है? उन्होंने पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाए और कहा कि पुलिस भाजपा को सुरक्षा दे रही है। ममता बनर्जी ने इस घटना को लेकर राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए। जानकारी के मुताबिक ममता बनर्जी, जिस टीएमसी कार्यकर्ता के परिवार से मिलने जा रही थीं, उसकी शुक्रवार को पुलिस कस्टडी में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। इसी मामले को लेकर इलाके में पहले से तनाव का माहौल था। पूर्व सीएम का काफिला जैसे ही हलीशहर पहुंचा, वहां मौजूद गुस्साई भीड़ ने वाहनों को आगे बढ़ने से रोक दिया। प्रदर्शनकारियों ने ममता बनर्जी की गाड़ी पर कीचड़, पानी की बोतलें और जूते-चप्पल फेंके। ममता बनर्जी का आरोप है कि इसी दौरान पत्थर और ईंटें भी फेंकी गईं। गौर करने वाली बात यह है कि जब से बंगाल में सत्ता परिवर्तन हुआ है, तब से टीएमसी नेताओं को निशान बनाया जा रहा है। टीएमसी सांसदों और विधायकों के बाद अब टीएमसी प्रमुख को निशाना बनाया गया है, जिस दौरान यह हमला हुआ, ममता बनर्जी के साथ पार्टी के अन्य सांसद भी मौजूद थे।

दोनों प्रधानमंत्री आपसी बातचीत से सुलझा लेंगे भारत-बांग्लादेश के कई मसले: दिनेश त्रिवेदी

ढाका। बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी को पूरा विश्वास है कि पीएम तारिक रहमान और भारत के प्रधानमंत्री मिलकर दोनों देशों के विभिन्न मसलों का हल सुगमता से निकाल लेंगे। त्रिवेदी ने इसकी वजह भी बताई। उन्होंने कहा दोनों ही पीएम जनता के प्रिय हैं। उम्मीद जताई कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भारत यात्रा के बाद द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। ढाका में पत्रकारों से बातचीत में भारत के उच्चायुक्त ने ये बातें कही। उन्होंने कहा, “मैंने पीएम तारिख रहमान को कई बार भाषण देते सुना है। हमारे प्रधानमंत्री मोदी की तरह ही वो भी जनता के पीएम है। जब दो नेता मिलते हैं तो बहुत सारी समस्याओं का समाधान हो जाता है। इसको लेकर नकारात्मकता नहीं, सकारात्मकता का होना जरूरी है।” दैनिक द ढाका ट्रिब्यून के अनुसार, त्रिवेदी ने ये बातें रविवार को इंडियन वीजा एप्लिकेशन सेंटर (आईवीएसी) के चिल्ड्रेन प्लेइंग एरिया के उद्घाटन समारोह के दौरान कही। उनक यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत और बांग्लादेश दोनों देश द्विपक्षीय संबंधों को फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। भारत-बांग्लादेश के बीच लंबित मुद्दों, खासकर तीस्ता जल बंटवारा और गंगा जल संधि के नवीनीकरण चर्चा में हैं। भारत ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण दिया था। उन्हें यह निमंत्रण ‘बिम्सटेक’ (बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी-सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन) के मौजूदा अध्यक्ष के रूप में दिया गया है। ‘बिम्सटेक’ बंगाल की खाड़ी के आसपास और उससे जुड़े क्षेत्रों के सात सदस्य देशों का एक समूह है। विदेश मंत्रालय (एमईए) के अनुसार, यह दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण मंच है। इसके पांच सदस्य दक्षिण एशिया के बांग्लादेश, भूटान, भारत, नेपाल और श्रीलंका से हैं। वहीं, दो सदस्य दक्षिण-पूर्व एशिया के म्यांमार और थाईलैंड से हैं। नई दिल्ली में आयोजित विदेश मंत्रालय की नियमित प्रेस ब्रीफिंग में मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया था कि फरवरी 2026 में प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद ही तारिक रहमान को भारत आने का औपचारिक निमंत्रण भेज दिया गया था। जायसवाल ने कहा, “बांग्लादेश के प्रधानमंत्री को फरवरी 2026 में पद संभालने के बाद भारत आने का औपचारिक निमंत्रण दिया गया था। जहां तक ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का सवाल है, भारत ने उन्हें बिम्सटेक के वर्तमान अध्यक्ष के रूप में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र में शामिल होने के लिए अलग से आमंत्रित किया है। यह सम्मेलन नई दिल्ली में आयोजित होगा। यह निमंत्रण ब्रिक्स की आउटरीच बैठकों की सामान्य परंपरा के तहत दिया गया है। इसी तरह अन्य क्षेत्रीय संगठनों के प्रमुखों को भी आमंत्रित किया गया है।\

सीडब्ल्यूजी 2026: उपलब्धि के बाद पीएम मोदी से मिलने का इंतजार, खिलाड़ियों में उत्साह

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार शाम 4 बजे ‘कॉमनवेल्थ गेम्स 2026’ में देश का मान बढ़ाने वाले भारतीय एथलीट्स से मुलाकात करेंगे, जिसे लेकर खिलाड़ियों में काफी उत्साह नजर आ रहा है। पैरा-एथलीट और कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मेंस शॉट पुट एफ57 के सिल्वर मेडलिस्ट शुभम जुयाल ने ‘आईएएनएस’ से कहा, “जब कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए मेरा चयन हुआ, तो मुझे बहुत अच्छा लगा। मुझे भरोसा था कि भारत को दो मेडल मिलेंगे—एक सोमण राणा को और एक मुझे। कॉमनवेल्थ गेम्स का अनुभव भी मेरे लिए बहुत अच्छा रहा, क्योंकि यह मेरा पहला बड़ा इवेंट था। मैंने इस अनुभव से बहुत कुछ सीखा। मुझे यकीन है कि जो मैंने इस बार सीखा है, वह भविष्य की प्रतियोगिताओं में मेरी मदद करेगा।” उन्होंने कहा, “अनुशासन, निरंतरता और सही इरादा आपको हमेशा मदद करता है। मुझे लगता है कि हमें सरकार से काफी मदद और समर्थन मिला है। अगर आप इस साल टूटे नेशनल रिकॉर्ड्स की संख्या को देखें, तो यह वाकई काबिल-ए-तारीफ है।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात को लेकर शुभम जुयाल कहते हैं, “कॉमनवेल्थ गेम्स के बाद हमारा शेड्यूल काफी व्यस्त था, और अब मुझे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का मौका मिला है। मुझे लगता है कि यह बहुत अच्छा अवसर है, क्योंकि बहुत कम लोगों को अपने देश के प्रधानमंत्री से मिलने का मौका मिलता है। ऐसी उपलब्धि के बाद, यह मुलाकात और भी खास हो जाती है। प्रधानमंत्री को खेलों में भी बहुत दिलचस्पी है।” 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में विमेंस डिस्कस थ्रो की ब्रॉन्ज मेडलिस्ट सीमा कालीरमन ने कहा, “प्रत्येक एथलीट का सपना होता है कि उसे ऐसा अनुभव मिले। हमारे प्रधानमंत्री हर तरह से एथलीट्स का समर्थन करते हैं और हर मामले में हमारा हौसला बढ़ाते हैं। वह समय-समय पर हमारा हाल-चाल भी पूछते रहते हैं। जैसे ही हमने मेडल जीता, उन्होंने हमें बधाई भी दी। उनका तहेदिल से धन्यवाद। पीएम मोदी बहुत विनीत स्वभाव के हैं।” ग्लासगो में 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में मेंस शॉट पुट एफ57 में गोल्ड मेडल जीतने वाले पैरा-एथलीट सोमन राणा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात को लेकर कहा, “मैं सेना से हूं। आज प्रधानमंत्री से मिलने का मौका पाकर बहुत खुश हूं। कॉमनवेल्थ गेम्स में जीत के बाद उनसे मिलना और उनका आशीर्वाद पाना मेरे लिए बहुत प्रेरणादायक और उत्साह बढ़ाने वाला रहा है। मुझे बहुत गर्व महसूस हो रहा है। पीएम हमारा हौसला बढ़ाते रहें। हम देश के लिए मेडल जीतते रहेंगे।

सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर भारत के खिलाफ अफवाह फैला रहीं देशविरोधी ताकतें : सीएम योगी

लखनऊ। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत आपसी फूट, षडयंत्र के कारण गुलाम हुआ था। क्षेत्र, जाति व भाषा के नाम पर भारत को कमजोर करने वाली ताकतें आज भी फूट डाल रही हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म षड्यंत्र का माध्यम हो गया है। देशविरोधी ताकतें इसका दुरुपयोग कर भारत के खिलाफ अफवाहें फैला रही हैं। षड्यंत्र के तहत समाज को गुमराह करने करने का प्रयास हो रहा है। सीएम योगी ने रविवार को काकोरी ट्रेन एक्शन के 101वें वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में काकोरी शहीद स्मारक पर आयोजित शताब्दी समारोह कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रनायकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि आज काकोरी ट्रेन एक्शन की 101वीं तिथि है। भारत माता के महान सपूतों ने ब्रिटिश हुकूमत की चूलें हिलाकर चुनौती दी थी कि भारत की धरती गुलामी को हरगिज नहीं बर्दाश्त करेगी। इन क्रांतिकारियों ने 1857 के प्रथम स्वातंत्र्य समर से लेकर 1942 के ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ आंदोलन तक संघर्ष की लंबी श्रृंखला खड़ी की थी। अंग्रेज भारत के लोगों की गाढ़ी कमाई लूटकर ब्रिटेन ले जाना चाहते थे, लेकिन इसी स्थान पर 9 अगस्त 1925 को पं. राम प्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह, अशफाक उल्ला खां, चंद्रशेखर आजाद, राजेंद्र नाथ लाहिड़ी जैसे क्रांतिकारियों ने खजाने को अपने कब्जे में लेकर आजादी की लड़ाई को नई ऊंचाइयां प्रदान की थीं। मुख्यमंत्री ने क्रांतिकारी शचींद्र नाथ बख्शी व मन्मथ नाथ गुप्ता का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वे काशी में पैदा हुए थे। उन्हें आजीवन कारावास की सजा मिली। अंग्रेजों ने उनकी जागीर को जब्त कर लिया था। शचींद्र नाथ सान्याल भी काशी में पैदा हुए और उन्होंने अंतिम सांस गोरखपुर में ली। पं. रामप्रसाद बिस्मिल, राजेंद्र नाथ लाहिड़ी, अशफाक उल्ला खां, ठाकुर रोशन सिंह को फांसी दी गई। चंद्रशेखर आजाद ने कहा था कि आजाद हमेशा आजाद रहेगा, अंतिम दम तक अंग्रेजों से लड़ते-लड़ते वह प्रयागराज की धरती पर शहीद हुए। इन क्रांतिकारियों का उद्देश्य भारत मां की आजादी के साथ ही गुलामी की बेड़ियों को तोड़कर अंग्रेजों को भारत से भगाना और देश को आजाद कराना था। सीएम योगी ने कहा कि महान क्रांतिकारी शचींद्र नाथ बख्शी व मन्मथ नाथ गुप्ता को आजादी के बाद जो सम्मान मिलना चाहिए था, नहीं मिला। इन्हें सजा कराने का पाप वकालत करने वाले तत्कालीन कांग्रेसी नेताओं ने किया था। जिन लोगों ने आमजन को अपने नायकों, क्रांतिकारियों से दूर रखा, उन्होंने भारत की युवा पीढ़ी से अन्याय किया। नायकों पर गौरव की अनुभूति का अवसर न देना नौजवान पीढ़ी को आदर्श, गौरव और प्रेरणा से विमुख करने जैसा है। आजादी के बाद जिन लोगों ने सत्ता संभाली, उन लोगों ने क्रांतिकारियों को अपमानित करने का पाप किया। काकोरी के शहीदों के अलावा चंद्रशेखर आजाद, वीर सावरकर, भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, रानी लक्ष्मीबाई, वीरांगना उदा देवी पासी, अवंती बाई, झलकारी बाई के नाम पर कोई स्मारक न बने, लोग इनका नाम भी न जानने पाएं, इसलिए इन क्रांतिकारियों के नाम पर संस्थाओं का नाम नहीं रखा गया। आजादी के बाद भी इसके लिए लगातार साजिशें की गईं। मुख्यमंत्री ने पीएम मोदी का आभार जताते हुए कहा कि 2014 में सत्ता संभालने के बाद उन्होंने आजादी के नायकों को सम्मान दिया। बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर से जुड़े पंच तीर्थ, वीर सावरकर, रामप्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह, अशफाक उल्ला खां के स्मारक को बढ़ाया गया। काकोरी की घटना को काकोरी ट्रेन एक्शन नाम देकर क्रांतिकारियों को सम्मान दिया। इन क्रांतिकारियों के नाम पर अब डाक टिकट जारी हो रहे और संस्थाओं के नाम रखे जा रहे हैं। वरना आजादी के बाद एक ही परिवार/खानदान के नाम पर सभी योजनाओं का नामकरण होता था। मुख्यमंत्री ने आमजन का आह्वान किया कि हम सभी क्रांतिकारियों को खोजें। हमारे गांव, क्षेत्र, जनपद आदि में अनेक गुमनाम नायक होंगे, जिन्होंने ‘तेरा वैभव अमर रहे मां, हम दिन चार रहें न रहें’ के भाव के साथ आजादी के लिए सर्वस्व समर्पित किया। आजादी के बाद सत्तालोलुप लोगों ने अपने वैभव को देखा। क्रांतिकारियों को भुला दिया गया, उन्हें पाठ्यक्रमों में स्थान नहीं दिया गया। देश, समाज के खिलाफ खूब षड्यंत्र हुआ और फिर से बांटने की साजिश प्रारंभ कर दी गई। सीएम ने अपील की कि क्रांतिकारियों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों से जुड़ी बिखरी सामग्री को एकत्र करें। उनसे जुड़े स्मारकों की मरम्मत-सौंदर्यीकरण से जुड़ें और पुष्पांजलि देकर उनके प्रति सम्मान व्यक्त करें। क्रांतिकारियों के लिए देश की आजादी की लड़ाई सर्वोपरि थी। उनकी स्मृति को जीवंत बनाए रखने के लिए काकोरी में शताब्दी महोत्सव का आयोजन किया गया। एक वर्ष में क्रांतिकारियों की स्मृतियों में अनेक कार्यक्रम किए गए। काकोरी ट्रेन एक्शन से जुड़े परिवारों की वर्तमान पीढ़ी और देश की सुरक्षा के लिए बलिदान देने वाले वीर सैनिकों के परिजनों को भी सम्मान दिया गया है।