बादशाह ने रिलीज किया पहला मराठी हिप-हॉप गाना ‘चिमना’, बोले- ये महाराष्ट्र के नाम लव लेटर है

मुंबई। रैपर बादशाह ने अपना पहला मराठी हिप-हॉप सॉन्ग ‘चिमना’ सोमवार को रिलीज कर दिया है। इस गाने में पारंपरिक मराठी लोक संगीत को नए और मॉडर्न अंदाज में पेश किया गया है। ताकि हर उम्र के लोग इसे पसंद करें। यह गाना दरअसल आगामी मराठी फिल्म ‘गोंधळ’ का एक पारंपरिक लोकगीत ‘एक चिमणा चिवचिवला’ है। बादशाह ने इस मराठी ग्रामीण लोकगीत को आधुनिक रैप और दमदार बीट्स के साथ एक ग्लोबल तड़का दिया है। गाने की शुरुआत मशहूर ग्रामीण हुकलाइन ‘एक चिमणा चिवचिवला / माझा सजण जागा झाला हो/ सूर्य उगवला’ से होती है। इसके बाद बादशाह अपने सिग्नेचर हिप-हॉप अंदाज में लोकल फ्लेवर जोड़ते हुए हिंदी-मराठी मिक्स वर्सेज (जैसे: डांस कर रही देखो मावशी मावशी) गाते हैं। अपने पहले मराठी गाने को और भी खास बनाने के लिए बादशाह ने कई बड़े कलाकारों के साथ काम किया है। मराठी अभिनेत्री नेहा खान भी नजर आ रही हैं। गाने में बॉलीवुड सिंगर दिव्या कुमार और मशहूर मराठी लोक गायक नागेश मोरवेकर ने आवाज दी है। म्यूजिक प्रोड्यूसर हितेन ने इसे बनाया है, जिसमें देसी लोक संगीत और बादशाह के हिट स्टाइल का शानदार मेल है। इस गाने का म्यूजिक वीडियो महाराष्ट्र के कोल्हापुर की खूबसूरत गलियों और वहां की संस्कृति को ध्यान में रखकर फिल्माया गया है, जिसमें एक स्पेशल हल्दी सेरेमनी का वाइब भी है। वीडियो में बादशाह के साथ प्रसिद्ध मराठी अभिनेत्री नेहा खान थिरकती हुई नजर आ रही हैं। इस गाने को लेकर बादशाह ने साझा किया कि भारत का क्षेत्रीय संगीत एक खजाना है और वे देश के हर कोने के संगीत का जश्न मनाना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “भारत का क्षेत्रीय संगीत किसी खजाने से कम नहीं है और मैं इसके हर कोने को सेलिब्रेट करना चाहता हूं। ‘चिमना’ महाराष्ट्र की शानदार संस्कृति के लिए मेरी तरफ से एक प्रेम पत्र है। मैं बहुत खुश हूं कि यह प्रोजेक्ट इतना अच्छा बना है, और यह गाना मेरे सभी मराठी फैंस के लिए है जो शुरू से मेरे साथ हैं।
मायावती ने 2027 के लिए फूंका बिगुल, बोलीं-‘रेवड़ियों’ के सहारे चुनावी छलावे से रहें सावधान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के बीच बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) प्रमुख मायावती ने सोमवार को सियासी मोर्चा खोलते हुए विरोधी दलों की चुनावी रणनीति पर सीधा हमला बोला। ‘रेवड़ियों’, लुभावने वादों और चुनावी घोषणाओं को लेकर मतदाताओं को आगाह करते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले निजी लाभ का लालच देकर वोट प्रभावित करने की कोशिशों से जनता को सावधान रहना चाहिए। उन्होंने पार्टी के प्रदेश से लेकर बूथ स्तर तक के संगठन को चुनावी तैयारी में जुटने का निर्देश देते हुए 2027 में बीएसपी की पांचवीं बार सरकार बनाने का लक्ष्य सामने रखा। मायावती ने लखनऊ में पार्टी के प्रदेश, मंडल और सभी 75 जिलों के अध्यक्षों समेत वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ बैठक कर चुनावी तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में खास तौर पर पार्टी उम्मीदवारों के चयन की प्रगति, संगठन की स्थिति और पिछले दो बैठकों के बाद बूथ स्तर तक किए गए कार्यों की समीक्षा की गई। उन्होंने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से चुनावी तैयारियों को और तेज एवं प्रभावी बनाने का आह्वान किया। मायावती ने कहा कि विरोधी दलों के साम दाम, दंड और भेद जैसे हथकंडों का मुकाबला करते हुए उत्तर प्रदेश में बीएसपी की पांचवीं बार सरकार बनाने के लिए पूरी ताकत से काम करना होगा। मायावती ने चुनाव से पहले महिलाओं समेत मतदाताओं को निजी लाभ पहुंचाने वाली ‘रेवड़ियों’ तथा विभिन्न प्रकार के लुभावने वादों और घोषणाओं के जरिए चुनाव को प्रभावित करने की कोशिशों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद सरकार बनने पर वादाखिलाफी की स्थिति को देखते हुए उत्तर प्रदेश की जनता को ऐसे चुनावी छलावे से पहले ही सावधान करना जरूरी है। मायावती ने मतदाताओं से विरोधी पार्टियों के छलावे और विश्वासघात से बचने तथा अपनी मर्जी के मुताबिक स्वतंत्र और निष्पक्ष होकर मतदान करने की अपील की। बीएसपी प्रमुख ने कहा कि इसे केवल चुनावी मुद्दे के तौर पर नहीं, बल्कि देश और जनहित के लिहाज से भी गंभीरता से देखा जाना चाहिए। मायावती ने विभिन्न राज्यों में चुनाव के बाद सरकारों की कथित वादाखिलाफी, विश्वासघात और जनहित एवं जनकल्याण के प्रति गैर-जिम्मेदारी को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बीएसपी ऐसे जनविरोधी रवैये के खिलाफ संघर्ष कर रही है। उन्होंने कहा कि ‘जेन-जी’ और ‘जेन-अल्फा’ के लोग भी जनविरोधी रवैये और कार्यकलापों के कारण संघर्ष के लिए उतर रहे हैं और पुलिस मुकदमों जैसे सरकारी दमन का सामना कर रहे हैं। मायावती ने कहा कि सरकारों की जिम्मेदारी है कि वे जनहित और जनकल्याण को प्राथमिकता दें तथा संवैधानिक जिम्मेदारी के तहत हर वर्ष जनता के हित में काम करें। उनके मुताबिक, केवल चुनाव के समय किए जाने वाले वादे और घोषणाएं जनता की समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सकतीं। बीएसपी प्रमुख ने महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी और पिछड़ेपन को लेकर भी सरकारों को घेरा। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं के कारण उत्तर प्रदेश की जनता मजबूरी में लगातार दूसरे राज्यों में पलायन कर रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय सरकार की ओर से किए जाने वाले वादे और घोषणाएं अक्सर ‘झूठ के मुंह में जीरा’ साबित होती हैं और चुनावी छलावे से ज्यादा कुछ नहीं लगतीं। मायावती ने कहा कि सरकारों को चुनावी मौसम का इंतजार करने के बजाय पूरे कार्यकाल में जनता की समस्याओं के समाधान के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में बीएसपी की सरकारों ने किसी मुहूर्त या चुनाव की प्रतीक्षा किए बिना लगातार काम किया और सामाजिक परिवर्तन तथा आर्थिक मुक्ति से जुड़े कार्यों को अभूतपूर्व एवं ऐतिहासिक तौर पर करके दिखाया। मायावती ने कार्यकर्ताओं को 2027 के लिए स्पष्ट राजनीतिक लक्ष्य देते हुए कहा कि बीएसपी को उत्तर प्रदेश में पांचवीं बार सरकार बनाने के लिए पूरी ताकत से काम करना होगा। उन्होंने कहा कि पार्टी ऐसी सरकार बनाने के लिए काम करेगी जिसमें ‘कानून द्वारा कानून का बेहतर राज’ हो और शोषण, अत्याचार तथा भ्रष्टाचार से मुक्त व्यवस्था कायम की जाए। बैठक में बीएसपी संस्थापक एवं जन्मदाता मान्यवर कांशीराम की 9 अक्टूबर को पुण्यतिथि के कार्यक्रम की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। मायावती ने कार्यक्रम को पूरी मिशनरी भावना के साथ आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि इस वर्ष लखनऊ में वीआईपी रोड पर बीएसपी सरकार द्वारा पर्यटन स्थल के रूप में विकसित भव्य ‘बौद्ध स्मृति उपवन’ के सामने विशाल गुंबद के आकार के ‘मान्यवर श्री कांशीराम जी स्मारक स्थल’ में कार्यक्रम आयोजित होगा। उन्होंने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश समेत पूरे प्रदेश से लोग यहां एकत्र होंगे और कांशीराम के मिशन को आगे बढ़ाने का संकल्प लेते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। मायावती ने यूपी-दिल्ली सीमा पर बीएसपी सरकार द्वारा स्थापित ‘बहुजन प्रेरणा केंद्र’ में रख-रखाव का सरकारी कार्य चलने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वहां बड़ी संख्या में लोगों के जुटने पर किसी दुर्घटना की आशंका को देखते हुए इस वर्ष पश्चिमी उत्तर प्रदेश, प्रदेश के अन्य क्षेत्रों और राजधानी लखनऊ में रहने वाले लोग ‘मान्यवर श्री कांशीराम जी स्मारक स्थल’ पर श्रद्धा-सुमन अर्पित करेंगे। मायावती ने पड़ोसी देश नेपाल में बाढ़ से हुई भारी जान-माल की क्षति पर गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में भी बाढ़ की विभीषिका को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारों को प्रभावित लोगों की हर संभव मदद के लिए तत्काल आगे आना चाहिए। उन्होंने खास तौर पर पूर्वांचल की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि गरीबी, भूख और कर्ज के शोषण के कारण वहां के लोगों का जीवन और कठिन हो सकता है। उन्होंने आपदा से संबंधित योजनाओं का लाभ तत्काल जरूरतमंद लोगों और परिवारों तक पहुंचाने की मांग की।
जम्मू-कश्मीर में एमबीबीएस-बीडीएस इंटर्न डॉक्टरों का प्रदर्शन, स्टाइपेंड को 30 हजार रुपये करने की मांग

जम्मू। जम्मू-कश्मीर में एमबीबीएस और बीडीएस इंटर्न डॉक्टरों का लंबित स्टाइपेंड बढ़ोतरी की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि मौजूदा समय में उन्हें महज 12,300 रुपये मासिक स्टाइपेंड दिया जा रहा है, जो देश के कई अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की तुलना में काफी कम है। डॉक्टरों ने सरकार से स्टाइपेंड बढ़ाकर 30 हजार रुपये प्रतिमाह करने और भविष्य में समय-समय पर इसका संशोधन सुनिश्चित करने की मांग की है। प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने अपनी मांग को लेकर प्रशासन के सामने कई बार अपनी बात रखी और उपलब्ध कानूनी एवं प्रशासनिक माध्यमों का भी इस्तेमाल किया, लेकिन करीब तीन साल बीत जाने के बावजूद उनकी मांग पर अंतिम फैसला नहीं हुआ। डॉक्टरों के मुताबिक, स्टाइपेंड बढ़ोतरी से जुड़ी फाइल और प्रस्ताव लंबे समय से लंबित है। एक इंटर्न डॉक्टर ने आईएएनएस को बताया कि पहले प्रस्ताव में स्टाइपेंड को 12,300 रुपये से बढ़ाकर करीब 26 हजार रुपये करने की सिफारिश की गई थी। इस प्रस्ताव को बने हुए करीब तीन साल हो चुके हैं, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि उनकी मांग अब केवल फाइल आगे बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्टाइपेंड को बढ़ाकर 30 हजार रुपये किए जाने की है। डॉ. तनिष ने कहा कि उनकी दो प्रमुख मांगें हैं। पहली मांग है कि मौजूदा 12,300 रुपये के स्टाइपेंड को बढ़ाकर 30 हजार रुपये किया जाए, ताकि जम्मू-कश्मीर के इंटर्न डॉक्टरों को देश के दूसरे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के समान भुगतान मिल सके। दूसरी मांग स्टाइपेंड के नियमित और समयबद्ध संशोधन की है। डॉ. तनिष के मुताबिक, महंगाई लगातार बढ़ रही है, ऐसे में स्टाइपेंड में भी समय-समय पर बदलाव होना चाहिए। उनका कहना है कि अगर सरकार समय-समय पर समीक्षा की व्यवस्था बना देती है तो भविष्य में आने वाले जूनियर डॉक्टरों को इसी तरह आंदोलन करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों ने पहले बातचीत और प्रशासनिक स्तर पर समाधान निकालने की पूरी कोशिश की। कई अधिकारियों से मुलाकात की गई और अपनी मांगें रखी गईं, लेकिन जब कोई समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को आखिरी विकल्प के तौर पर चुना गया। वहीं, प्रदर्शन कर रहे डॉ. शाहनवाज ने जम्मू-कश्मीर के स्वास्थ्य मंत्री, उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह पूरे जम्मू-कश्मीर के लिए चिंता की बात है कि डॉक्टरों को अपनी जायज मांगों के लिए सड़क पर बैठना पड़ रहा है। डॉ. शाहनवाज ने दूसरे राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में भी पहले स्टाइपेंड जम्मू-कश्मीर के मुकाबले अधिक था और अब वहां इसमें और बढ़ोतरी की गई है। ऐसे में जम्मू-कश्मीर के इंटर्न डॉक्टरों को भी समान स्तर का स्टाइपेंड मिलना चाहिए। प्रदर्शनकारी डॉक्टरों का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में मरीजों का दबाव काफी अधिक है और डॉक्टरों पर काम की जिम्मेदारी भी बड़ी है। इसके बावजूद इंटर्न डॉक्टरों को मिलने वाला स्टाइपेंड उनकी मेहनत और जिम्मेदारियों के मुकाबले बेहद कम है। उनका कहा कि उन्हें विरोध प्रदर्शन का रास्ता पसंद नहीं है। वे मरीजों की सेवा करना चाहते हैं और अपनी ड्यूटी को गंभीरता से निभाना चाहते हैं। इस समय उन्हें वार्ड, ओपीडी और अस्पतालों में मरीजों की देखभाल करनी चाहिए थी, लेकिन सरकार की ओर से मांग पर कार्रवाई नहीं होने के कारण वे अपनी ड्यूटी छोड़कर प्रदर्शन करने को मजबूर हुए हैं।
राजस्थान: भाजपा ने जयपुर नगर निगम चुनाव के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की, पूर्व महापौर को मिला टिकट

जयपुर। भाजपा ने सोमवार को जयपुर नगर निगम चुनाव 2026 के लिए नामांकन दाखिल करने के अंतिम दिन अपने उम्मीदवारों की घोषणा की। पार्टी के सामने 150 से अधिक वार्डों में टिकट वितरित करने की बड़ी चुनौती थी क्योंकि असंतुष्ट उम्मीदवारों के बगावत करके निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने की आशंका थी। भाजपा के राज्य कार्यालय में रविवार देर रात तक बैठकों का सिलसिला जारी रहा, जिसमें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, राज्य अध्यक्ष मदन राठौर और जयपुर की देखरेख करने वाले पार्टी के वरिष्ठ नेता शामिल हुए। विभिन्न राजनीतिक समीकरणों को संतुलित करने के लिए लंबे विचार-विमर्श और प्रयासों के बाद पार्टी ने अंतिम समय में अपने चयनित उम्मीदवारों को आधिकारिक फॉर्म-बी दस्तावेज और चुनाव चिन्ह सौंपे। भाजपा ने अनुभवी पार्टी कार्यकर्ताओं, समर्पित नेताओं, महिला मोर्चा की पदाधिकारियों और कांग्रेस छोड़कर हाल ही में भाजपा में शामिल हुए पूर्व पार्षदों को मिलाकर उम्मीदवार उतारे हैं। उम्मीदवारों की सूची में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम वार्ड स्तर के पार्षद चुनाव में पूर्व जयपुर मेयर ज्योति खंडेलवाल को उम्मीदवार बनाना है। खंडेलवाल, जो पहले जयपुर की पहली महिला महापौर रह चुकी हैं और बाद में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में लोकसभा चुनाव लड़ीं, उन्हें अब 2026 के जयपुर नगर निगम चुनावों में पार्षद सीट के लिए भाजपा का टिकट दिया गया है। खंडेलवाल ने पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गई थीं। वार्ड स्तर पर पूर्व महापौर को उम्मीदवार बनाने के भाजपा के फैसले ने जयपुर के राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा पैदा कर दी है। उनका राजनीतिक सफर अब एक तरह से पूरा हो चुका है। खंडेलवाल ने कांग्रेस वार्ड पार्षद के रूप में अपना करियर शुरू किया, फिर जयपुर की महापौर बनीं और बाद में जयपुर लोकसभा सीट से उम्मीदवार भी रहीं। भाजपा में शामिल होने के बाद वह एक बार फिर पार्षद चुनाव लड़ेंगी, जो उनके राजनीतिक करियर में एक नए चरण की शुरुआत है। जहां कुछ राजनीतिक विश्लेषक इसे खंडेलवाल के लिए भाजपा में जमीनी स्तर से अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर मानते हैं, वहीं उनके समर्थक इसे पार्टी और शहर की सेवा करने का एक और मौका बताते हैं। भाजपा की सूची में आदर्श नगर विधानसभा क्षेत्र और जयपुर के कई अन्य प्रमुख क्षेत्रों के उम्मीदवार शामिल हैं। नीरज अग्रवाल को वार्ड 121 से दोबारा मनोनीत किया गया है। पूर्व पार्षद अग्रवाल ने हाल ही में कांग्रेस छोड़कर भाजपा ज्वाइन की है। भाजपा महिला मोर्चा की राज्य उपाध्यक्ष अनुराधा माहेश्वरी को भी टिकट दिया गया है और वह वार्ड 107 से चुनाव लड़ेंगी। टिकटों के बंटवारे ने भाजपा के भीतर काफी आंतरिक प्रतिस्पर्धा को जन्म दिया। कई वार्डों में एक ही सीट के लिए 10 से 15 मजबूत दावेदार पार्टी टिकट पाने की होड़ में थे। भाजपा नेतृत्व की प्रमुख चिंताओं में से एक यह सुनिश्चित करना था कि जिन उम्मीदवारों को टिकट नहीं मिला, वे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल न करें या प्रतिद्वंद्वी पार्टियों में शामिल न हो जाएं। परिणामस्वरूप पार्टी ने उम्मीदवारों की पूरी सूची पहले से सार्वजनिक रूप से जारी न करने का विकल्प चुना। इसके बजाय, फॉर्म-बी दस्तावेज और पार्टी के प्रतीक चिन्ह नामांकन की अंतिम तिथि से कुछ समय पहले ही चयनित उम्मीदवारों को सीधे सौंप दिए गए, जिसका उद्देश्य विद्रोह की संभावना को सीमित करना था। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भाजपा की चुनाव मशीनरी ने अपना ध्यान पार्टी के भीतर असंतोष को संभालने और असंतुष्ट नेताओं और कार्यकर्ताओं को अपना नामांकन वापस लेने के लिए राजी करने पर केंद्रित कर दिया है। पार्टी की तात्कालिक प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि बागी उम्मीदवार 2 सितंबर की समय सीमा से पहले चुनाव से हट जाएं।
तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष का बड़ा फैसला, करुप्पैया की जल्लीकट्टू संबंधी टिप्पणियां रिकॉर्ड से हटाईं

चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा के अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर ने सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) के विधायक करुप्पैया द्वारा जल्लीकट्टू को लेकर की गई विवादास्पद टिप्पणियों को सदन की आधिकारिक कार्यवाही से हटाने का आदेश दिया है। करुप्पैया शोलावंदन विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। पिछले गुरुवार को विधानसभा में की गई करुप्पैया की टिप्पणियों की अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कझगम (एआईएडीएमके) और अम्मा मक्कल मुनेत्र कझगम (एएमएमके) सहित कई राजनीतिक दलों ने तीखी आलोचना की। एआईएडीएमके ने 3 सितंबर को विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है, जिसमें विधायक पर तमिल संस्कृति और परंपराओं से गहराई से जुड़े जल्लीकट्टू का अपमान करने का आरोप लगाया गया है। यह निर्णय पारंपरिक खेल से जुड़े संगठनों और व्यक्तियों के बढ़ते राजनीतिक दबाव और विरोध प्रदर्शनों के बीच आया है। करुप्पैया ने पहले अपने बयान की व्याख्या के तरीके पर खेद व्यक्त किया था। अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए विधायक ने कहा कि उनका इरादा जल्लीकट्टू को कमतर आंकना या तमिल शौर्य के प्रतीक के रूप में इसके महत्व पर सवाल उठाना नहीं था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणियां स्पेन जैसे यूरोपीय देशों में बुलफाइटिंग से जुड़े स्थलों की तर्ज पर बने एक स्थायी स्टेडियम में नियमित रूप से पारंपरिक आयोजन करने की प्रथा पर लक्षित थीं। करुप्पैया ने कहा कि इस तरह के माहौल में जल्लीकट्टू का आयोजन करना तमिल खेल के सांस्कृतिक चरित्र और पारंपरिक भावना के अनुरूप नहीं हो सकता। विधायक ने छात्रों पर बार-बार होने वाले जल्लीकट्टू आयोजनों के प्रभाव को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पोंगल त्योहार के दौरान अलंगनल्लूर और पलामेडु में आयोजित होने वाली प्रसिद्ध प्रतियोगिताओं के अलावा पिछली डीएमके सरकार के कार्यकाल के दौरान इस क्षेत्र में बार-बार जल्लीकट्टू कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। करुप्पैया के अनुसार, इस तरह के आयोजनों ने कुछ स्कूल और कॉलेज के छात्रों को नियमित रूप से अपनी पढ़ाई जारी रखने के बजाय प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया है। उन्होंने कहा कि विधानसभा में उनका हस्तक्षेप युवाओं का मार्गदर्शन करने और उन्हें शिक्षा को अधिक महत्व देने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से था। करुप्पैया ने कहा कि वह चाहते हैं कि छात्र अपनी शिक्षा पूरी करें, डिग्री हासिल करें और एक बेहतर भविष्य सुरक्षित करें। उन्होंने दोहराया कि उनका भाषण युवा पीढ़ी के प्रति चिंता से प्रेरित था, न कि जल्लीकट्टू के प्रति अनादर से। हालांकि टीवीके विधायक ने कहा कि यदि उनके शब्दों से युवाओं, जल्लीकट्टू समर्थकों या व्यापक तमिल समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं, तो वह इसके लिए क्षमा चाहते हैं।
पटना में चार युवकों की संदिग्ध हालात में मौत पर तेजस्वी ने सरकार पर साधा निशाना, कहा-गरीबों की जा रही जान

पटना। बिहार के पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल में संदिग्ध परिस्थितियों में चार युवकों की मौत के मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए राज्य सरकार और प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि बिहार में इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं और इनमें गरीब तथा वंचित वर्ग के लोग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। मीडिया से बातचीत में राजद के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने कहा, “यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। यह कोई पहली घटना नहीं है, जिसमें जहरीली शराब से लोगों की मृत्यु हुई है। इससे पहले भी कई बार इस तरह की घटनाएं हुई हैं। इसमें प्रशासन को देखना चाहिए। प्रशासन पूरी तरीके से लापरवाह है और बिहार में कानून-व्यवस्था भी पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है।” उन्होंने कहा कि अगर इस तरह की घटनाएं लगातार हो रही हैं तो यह गंभीर चिंता का विषय है। आखिर ऐसी घटनाएं कैसे हो रही हैं और इन्हें रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं, इसका जवाब प्रशासन को देना चाहिए। तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि ऐसी घटनाओं में लगातार गरीब तबके के लोगों की जान जा रही है। उन्होंने कहा, “लगातार गरीब ही मारा जा रहा है, खासतौर पर दलित समुदाय या अति पिछड़े समाज के लोग। जेल में भी उन्हीं लोगों को भेजा जा रहा है। जो घटना हुई है, इसकी जांच होनी चाहिए।” नेता प्रतिपक्ष ने घटना की निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को पूरे मामले की गंभीरता से जांच करनी चाहिए और यह स्पष्ट करना चाहिए कि चारों युवकों की मौत किन परिस्थितियों में हुई। दरअसल, रविवार को पटना के बाढ़ अनुमंडल में संदिग्ध परिस्थितियों में चार युवकों की मौत के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। घटना बाढ़ थाना क्षेत्र के बेढ़ना गांव की है। ग्रामीणों का आरोप है कि चारों युवकों ने कथित तौर पर जहरीली शराब का सेवन किया था, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। बताया गया कि चारों युवकों की अचानक तबीयत खराब होने के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में अफरा-तफरी मच गई। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनकी मौत हो गई। हालांकि, पुलिस ने अभी तक चारों युवकों की मौत की वजह के रूप में जहरीली शराब की पुष्टि नहीं की है। पुलिस का कहना है कि मौत के वास्तविक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य जांच के बाद ही चल सकेगा। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है।
‘कोर्ट पर मेरा अनुभव बहुत बुरा था’, यूएस ओपन से पहले ही राउंड में बाहर होने पर बोले जोकोविच

न्यूयॉर्क। 24 बार के ग्रैंड स्लैम चैंपियन नोवाक जोकोविच ने सोमवार को यूएस ओपन में अर्जेंटीना के मारियानो नवोन से पहले राउंड में मिली चौंकाने वाली हार के बाद कोर्ट पर अपने समय को बहुत बुरा अनुभव बताया। सर्बिया के स्टार टेनिस खिलाड़ी ने बताया कि लगातार शारीरिक समस्याओं – जैसे उल्टी, ऐंठन और दर्द – ने मैच खत्म करने की उनकी क्षमता पर बहुत बुरा असर डाला। एटीपी के अनुसार, हार के बाद जोकोविच ने कहा, “मुझे लगता है कि यह साफ था कि कोर्ट पर मेरे लिए अनुभव बहुत बुरा था। दुर्भाग्य से, इस साल लगभग हर मैच में मुझे इस समस्या का सामना करना पड़ा है। उल्टी होना एक गंभीर समस्या है। फिर मेरा पूरा शरीर जवाब देने लगता है, खासकर ऐंठन और दर्द के कारण। हां, आखिर में मेरी पीठ और कंधे ने साथ छोड़ दिया, और मैं मैच जीत नहीं सका।” इस हार ने जोकोविच के ग्रैंड स्लैम रिकॉर्ड में एक बड़ा बदलाव ला दिया। इस मैच से पहले 39 साल के इस खिलाड़ी को 2006 के ऑस्ट्रेलियन ओपन के बाद से किसी बड़े टूर्नामेंट के शुरुआती राउंड में हार का सामना नहीं करना पड़ा था। उन्हें ग्रैंड स्लैम में पहली बार हार 2005 के ऑस्ट्रेलियन ओपन में मिली थी। हालांकि, शारीरिक परेशानी होने के बावजूद नोवाक जोकोविच ने मैच में वापसी करते हुए खुद को जीत की मजबूत स्थिति में पहुंचा लिया था। वे दो सेट जीत चुके थे और एक सेट से आगे थे। चौथे सेट में भी उन्होंने एक ब्रेक की बढ़त बना ली थी, लेकिन इसके बाद उनकी दिक्कतें बढ़ने लगीं और मैच का रुख बदल गया। जोकोविच ने कहा, “मैं चौथे सेट में एक ब्रेक से आगे था, लेकिन मैच के चौथे गेम से ही मुझे लगातार संघर्ष करना पड़ रहा था। फिर भी, मैं उनकी जीत का श्रेय कम नहीं करना चाहता। उन्हें बधाई। वे एक अच्छे इंसान और फाइटर हैं। हालांकि, मुझे खेलने में मजा नहीं आया।” सर्बियाई खिलाड़ी ने माना कि अपनी हालत की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने मैच से हटने के बारे में भी सोचा था। हालांकि, ठीक होने के कुछ पल और हार न मानने के उनके जज्बे ने उन्हें खेलते रहने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा, “हां, मैंने ऐसा किया। मैंने एक सेट जीता और फिर तीसरा भी। तब मुझे लगा, ठीक है, शायद कोई मौका है। हां, मैं चौथे या पांचवें सेट में हार नहीं मानना चाहता था। मैं मैच खत्म करना चाहता था।” मैच के आखिर में इस मौके का भावनात्मक असर भी साफ दिखा। निर्णायक सेट में 1-3 से पीछे चल रहे जोकोविच को न्यूयॉर्क में दर्शकों से जबरदस्त समर्थन मिला। उन्हें प्रोत्साहित करने की भीड़ की कोशिशों ने सर्बियाई खिलाड़ी को साफतौर पर भावुक कर दिया। चार बार के यूएस ओपन चैंपियन ने कहा, “वे (दर्शक) बहुत अच्छे थे। ऐसा अनुभव पाकर मैं बहुत आभारी हूं। जहां तक मैच और मेरे शरीर व खेल के साथ मेरे अनुभव की बात है, तो यह बिल्कुल भी सुखद नहीं था। कोर्ट पर बिताए हर पल से मुझे नफरत-सी हो रही थी। हालांकि, भीड़ और समर्थन के नजरिए से देखें तो शुरुआत से ही यह अविश्वसनीय था। वे अहम पलों में मेरा हौसला बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे, और मुझे बहुत अफसोस है कि मैं उतना अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाया जितना मुझे करना चाहिए था, या कर सकता था, या उनके लिए करना चाहता था। हालांकि, आखिर में उन्होंने जो प्यार और सराहना दी, उसने सच में मेरा दिल छू लिया।
भारत एक करीबी मित्र और साझेदार के रूप में नेपाल के साथ खड़ा हैः राजनाथ सिंह

नई दिल्ली। नेपाल में 26 अगस्त को अचानक आई विनाशकारी बाढ़ से हुई भारी जनहानि और तबाही हुई है। भारत ने एक बार फिर अपने पड़ोसी देश के साथ खड़े होने का भरोसा दिया है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि भारत एक करीबी मित्र और साझेदार के रूप में नेपाल के साथ खड़ा है। राजनाथ सिंह सोमवार को नई दिल्ली के बाराखंभा रोड स्थित नेपाल दूतावास पहुंचे। रक्षामंत्री ने नेपाल के साथ सुख-दुख के साथी का रिश्ता दोहराया। यहां उन्होंने इस त्रासदी पर गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने दूतावास की शोक पुस्तिका में संदेश लिखकर अपनी श्रद्धांजलि दी। राजनाथ सिंह ने कहा कि उन्होंने नई दिल्ली स्थित नेपाल दूतावास जाकर शोक पुस्तिका में संदेश लिखकर अपनी संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ से नेपाल में लोगों की जानें गईं और बड़े पैमाने पर तबाही हुई। इस प्राकृतिक आपदा ने नेपाल के नागरिकों के साथ-साथ कई विदेशी नागरिकों को भी प्रभावित किया है, जिनमें भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। रक्षा मंत्री ने भारत सरकार और देश की जनता की ओर से नेपाल की जनता और वहां की सरकार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस त्रासदी में जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया है, भारत की संवेदनाएं और प्रार्थनाएं उनके परिवारों के साथ हैं। उन्होंने बाढ़ में घायल लोगों के जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की। रक्षा मंत्री ने नेपाल के साथ भारत के रिश्तों को केवल पड़ोसी देशों के संबंधों तक सीमित नहीं बताया, बल्कि इसे ‘सुख-दुख के साथी’ का रिश्ता बताया। उन्होंने कहा कि एक करीबी मित्र और साझेदार के रूप में भारत हमेशा नेपाल के साथ खड़ा रहा है। इस कठिन समय में भी भारत अपने नेपाली भाइयों और बहनों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारत नेपाल में चल रहे खोज, बचाव और पुनर्वास के प्रयासों में सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। दरअसल 26 अगस्त की बाढ़ ने नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई थी। अचानक आई बाढ़ से बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और व्यापक स्तर पर संपत्ति एवं बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा। आपदा की चपेट में नेपाली नागरिकों के अलावा कई विदेशी नागरिक भी आए हैं। ऐसे समय में नेपाल के दूतावास पहुंचकर रक्षा मंत्री की ओर से संवेदना व्यक्त करना भारत की ओर से पड़ोसी देश के प्रति एकजुटता और मानवीय समर्थन का संदेश है। इस दौरान भारत का संदेश साफ है कि नेपाल की इस मुश्किल घड़ी में अकेला नहीं है। खोज और बचाव से लेकर राहत तथा पुनर्वास तक, भारत नेपाल के साथ खड़ा है।
ओवैसी के बयान पर भाजपा का पलटवार, पीएम को मिला उज्बेकिस्तान का सम्मान हर भारतीय के लिए गर्व की बात

नई दिल्ली। उज्बेकिस्तान द्वारा भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना सर्वोच्च सम्मान दिए जाने पर एनडीए नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। भाजपा नेताओं ने इसे भारत के लिए गौरव का क्षण बताया है। वहीं एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी द्वारा इसे ‘बाबर के देश से अवार्ड’ कहने पर एनडीए नेताओं ने पलटवार भी किया है। पुणे में सांसद किरीट सोमैया ने कहा, “नरेंद्र मोदी ने हिंदुत्व को इतनी ऊंचाई पर पहुंचाया है कि पूरी दुनिया उनका सम्मान करती है।” रायपुर में राज्यसभा सदस्य लक्ष्मी वर्मा ने कहा, “ओवैसी के बयान अक्सर देश के हितों के खिलाफ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को पूरी दुनिया में मान्यता मिली है। उन्हें 36 देशों सहित कई देशों से सर्वोच्च सम्मान मिले हैं, जो एक वैश्विक नेता के रूप में उनके कद को दर्शाता है।” पटना में बिहार सरकार के मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा, “दुनिया के सभी देश सम्मानित नरेंद्र मोदी की विदेश नीति से प्रभावित हैं। पीएम मोदी जहां भी जाते हैं, हर देश में उनका स्वागत होता है। इससे देश का गौरव बढ़ता है।” भोपाल में भाजपा नेता नरोत्तम मिश्रा ने कहा, “यह सिर्फ भारतीय जनता पार्टी के लिए ही नहीं, बल्कि हर भारतीय नागरिक के लिए गर्व की बात है। मोदी जी एक विश्व नेता और भारत के प्रधानमंत्री हैं, जिन्हें दुनियाभर के कई देशों ने सम्मानित किया है। हम सभी को उन पर गर्व है।” भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन ने कहा, “एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी को प्रधानमंत्री को मिला सम्मान पसंद नहीं आ रहा है। वह कह रहे हैं कि बाबर यहीं से आया था। अगर बाबर आया था, तो वह देश अलग है। अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उस देश का सर्वोच्च सम्मान मिला है, तो यह सिर्फ पीएम मोदी का सम्मान नहीं है, बल्कि भारत का सम्मान है। पूरी दुनिया में चाहे वह राष्ट्रमंडल देश हो या कोई इस्लामिक देश, सभी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना सर्वोच्च सम्मान दिया है।” मुंबई में शिवसेना प्रवक्ता शाइना एनसी ने कहा, “असदुद्दीन ओवैसी, आपको हर चीज में बाबर ही दिखता है। यही आपकी समस्या है। उज्बेकिस्तान प्रधानमंत्री का सम्मान करता है और आपको इससे दिक्कत होती है, इसलिए आप बाबर का जिक्र ले आते हैं। शायद बाबर आपके डीएनए में है और इसीलिए आप उससे आगे सोच ही नहीं पाते। आपकी सोच वहीं से शुरू और वहीं खत्म होती है। जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ राष्ट्रवाद और दुनिया को एक समुदाय मानने की बात करता है, तब भी आपको लगता है कि बाबर ही आपका आदर्श है।
पश्चिम बंगाल: डेंगू के मामलों को लेकर पांच संवेदनशील जिलों की पहचान, स्वास्थ्य विभाग की बढ़ी चिंता

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य विभाग की ओर से डेंगू को लेकर सबसे अधिक संवेदनशील पांच जिलों की पहचान की गई है। अधिकारियों ने सोमवार को जानकारी दी कि पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के पांच जिलों की पहचान डेंगू के सबसे ज्यादा जोखिम वाले जिलों के तौर पर की है। लगातार मौसम के बदलने और बारिश की वजह से राज्य के स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। कुछ जिलों में डेंगू के मामले और उससे होने वाली मौतों के मामले बढ़े हैं। पिछले महीने और मौजूदा मॉनसून के दौरान डेंगू से प्रभावित लोगों की संख्या को देखते हुए, राज्य स्वास्थ्य विभाग ने पांच जिलों की पहचान डेंगू के लिहाज से सबसे ज्यादा संवेदनशील इलाकों के तौर पर की है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से राजधानी कोलकाता, हावड़ा, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना और मुर्शिदाबाद की संवेदनशील इलाकों के तौर पर पहचान की गई है। राज्य स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने कहा, “डेंगू के अलावा, इन जिलों से ‘प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम’ के मामले भी सामने आए हैं। यह मलेरिया का सबसे खतरनाक रूप है जो किडनी पर बुरा असर डाल सकता है।” इस बीच, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सभी अस्पतालों के अधिकारियों और डॉक्टरों को साफ निर्देश दिए हैं कि वे डेंगू से प्रभावित लोगों की संख्या को सही-सही बताएं, न कि उसे छिपाएं या कम करके दिखाएं। पिछली ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान ऐसी शिकायतें आम थीं। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा, “सभी संबंधित लोगों को बीमारी का सही नाम बताने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। डेंगू या मलेरिया के मामलों को ‘अज्ञात बुखार’ बताने की कोई जरूरत नहीं है। पिछली राज्य सरकार हमेशा प्रभावित लोगों या मरने वालों की संख्या कम करके बताती थी, और अस्पतालों के अधिकारियों व डॉक्टरों को डेंगू के मामलों को ‘अज्ञात बुखार’ के तौर पर रिपोर्ट करने के लिए मजबूर किया जाता था। लेकिन हम उनसे कुछ भी न छिपाने के लिए कह रहे हैं। छिपाने के लिए क्या है? अगर डेंगू है, तो निश्चित रूप से उसका इलाज किया जाएगा। डॉक्टरों के डेंगू लिखने से डरने की कोई वजह नहीं है। अगर डेंगू है, तो वे डेंगू लिखेंगे। अगर नहीं है, तो वे नहीं लिखेंगे।