होर्मुज स्ट्रेट से मालवाहक जहाजों का गुजरना हुआ कम, आईएमएफ चीफ बोलीं- ‘विकासशील देशों को होगा ज्यादा नुकसान’

सिंगापुर/वाशिंगटन। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से बुधवार को केवल छह कमोडिटी जहाज गुजरे। यह संख्या एक दिन पहले के 11 जहाजों के मुकाबले काफी कम है और पिछले 10 दिनों के करीब 13 जहाज प्रतिदिन के औसत से भी नीचे है। इस बीच अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) चीफ क्रिस्टालिना जॉर्जिवा ने इस स्थिति से होने वाले नुकसान की ओर दुनिया का ध्यान दिलाया है। शिप-ट्रैकिंग कंपनी केप्लर के ताजा आंकड़ों का हवाला देते हुए रॉयटर्स ने बताया कि बुधवार को जलडमरूमध्य से गुजरने वाले छह जहाजों में दो बहुत बड़े गैस कैरियर, दो लॉन्ग-रेंज टैंकर, एक सुप्रामैक्स टैंकर और एक पैनामैक्स टैंकर शामिल थे। जहाजों की आवाजाही में यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव फिर बढ़ गया है। अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई ने क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम मार्ग है। केप्लर के आंकड़े प्रारंभिक हैं और इनमें बदलाव संभव है। इसकी वजह यह है कि कुछ जहाज यात्रा के दौरान अपने ट्रांसपोंडर बंद कर देते हैं, जिससे उनका वास्तविक आवागमन तत्काल शिप-ट्रैकिंग आंकड़ों में दर्ज नहीं हो पाता। हालांकि, लगातार कम होती जहाज आवाजाही इस बात का संकेत है कि होर्मुज से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों के लिए सुरक्षा जोखिम बढ़ गया है। ईरान ने हाल में कई जहाजों को अपनी ब्लैकलिस्ट में भी शामिल किया है, जिससे तेल और गैस कारोबार के लिए जोखिम बढ़ा है। आईएमएफ प्रमुख ने चेतावनी दी है कि होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से दुनिया भर में कर्ज लेने की लागत बढ़ रही है और विकासशील देशों की कर्ज से जुड़ी प्रगति खतरे में पड़ रही है। क्रिस्टालिना जॉर्जिवा ने कहा कि कुल कर्ज के बढ़ते स्तर के साथ-साथ, अभी भी बंद पड़े इस जलमार्ग के कारण महंगाई का दबाव भी बॉन्ड यील्ड को ऊपर ले जा रहा है। उन्होंने अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना राज्य में जी20 बैठक के दौरान रॉयटर्स समाचार एजेंसी को बताया, “यह सिर्फ कम आय वाले विकासशील देशों की समस्या नहीं है। विकसित अर्थव्यवस्थाओं में कर्ज का ऊंचा स्तर और लगातार बनी हुई महंगाई, कम आय वाले देशों, उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं सहित सभी के लिए कर्ज चुकाने की लागत बढ़ा सकती है।

पीएम मोदी ने हॉकी विश्व कप के भव्य आयोजन के लिए बेल्जियम के प्रधानमंत्री को दी बधाई

नई दिल्ली। बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत दौरे पर हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बार्ट डी वेवर के नेतृत्व वाली बेल्जियम प्रतिनिधिमंडल के साथ हैदराबाद हाउस में गुरुवार को मुलाकात की। इस दौरान पीएम मोदी ने अपने समकक्ष डी वेवर को हॉकी विश्व कप 2026 के सफल आयोजन के लिए बधाई भी दी। पीएम मोदी ने कहा, “पिछले महीने बेल्जियम और नीदरलैंड ने मिलकर हॉकी विश्व कप का आयोजन किया था। इस विश्व कप के भव्य आयोजन के लिए मैं आपको बहुत बहुत बधाई देता हूं। मैं अपने खिलाड़ियों की मेहनत और प्रदर्शन के लिए भी उनकी सराहना करता हूं।” बेल्जियम और नीदरलैंड की सह-मेजबानी में एफआईएच हॉकी विश्व कप 2026 का आयोजन हुआ। विश्व कप पुरुष और महिला दोनों वर्ग में आयोजित हुआ था। विश्व कप का आयोजन 15 अगस्त से 30 अगस्त के बीच हुआ था। पुरुष वर्ग का खिताब जर्मनी ने स्पेन को 1-0 से हराकर जीता था, जबकि महिला वर्ग का खिताब अर्जेंटीना ने 1-1 से ड्रॉ के बाद पेनल्टी शूटआउट में नीदरलैंड को 3-1 से हराकर जीता था। भारतीय पुरुष और महिला टीम ने भी हॉकी विश्व कप में हिस्सा लिया था, लेकिन दोनों टीमें अंतिम चार में जगह बनाने में सफल नहीं रही थीं। हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी वाली भारतीय पुरुष हॉकी टीम दूसरे राउंड से ही बाहर हो गई और टूर्नामेंट में आठवें स्थान पर रही। भारतीय टीम के निराशाजनक प्रदर्शन ने 1975 के बाद विश्व कप में पदक जीतने के इंतजार को और बढ़ा दिया। हालांकि, कप्तान हरमनप्रीत ने अपने प्रदर्शन से प्रभावित किया। हरमनप्रीत ने 8 गोल दागे और दक्षिण अफ्रीका के मुस्तफा कैसिएम के साथ संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर रहे। भारतीय महिला हॉकी टीम विश्व कप 2026 में पांचवें स्थान पर रही थी। महिला टीम ने जर्मनी को 3-1 से हराकर पांचवां स्थान हासिल किया था।

पाकिस्तान में प्राचीन हिंदू मंदिर तोड़े जाने पर भड़के जगतगुरु परमहंस आचार्य, कहा-फिर से बनवाया जाए मंदिर

अयोध्या। पाकिस्तान में 125 साल से अधिक पुराने हिंदू मंदिर को तोड़े जाने की घटना पर अयोध्या के संत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगतगुरु परमहंस आचार्य ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर यह मंदिर फिर से नहीं बनाया गया, तो पाकिस्तान दुनिया के नक्शे से मिट जाएगा। जगतगुरु परमहंस आचार्य ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा, “जब कुछ कारणों से भारत के हिस्से अलग हुए, तो पाकिस्तान और बांग्लादेश ने खुद को इस्लामिक देश घोषित कर दिया और वहां शरिया कानून लागू किया गया। इसके उलट, भारत की इंसानियत और दरियादिली के कारण, बंटवारे के बावजूद यहां अल्पसंख्यकों को बराबर या उससे भी ज्यादा अधिकार दिए गए।” उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा, “लेकिन पाकिस्तान में लगातार हो रही बर्बरता को देखते हुए – जहां हिंदुओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है, हिंदू आस्था को कुचला जा रहा है और मंदिरों को तोड़ा जा रहा है – अगर यह मंदिर फिर से नहीं बनाया गया, तो पाकिस्तान दुनिया के नक्शे से मिट जाएगा। यह भारत की ओर से पाकिस्तान को चेतावनी है। जितना जल्दी हो जो मंदिर तोड़ा है उसे बनवा दिया जाए।” वहीं, इस दौरान परमहंस आचार्य ने राम मंदिर में प्रशासनिक बदलाव पर खुशी भी जाहिर की। उन्होंने कहा, “यह बहुत अच्छी खबर है कि भारतीय वायु सेना के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी जितेंद्र मिश्रा को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम लल्ला मंदिर का पहला सीईओ नियुक्त किया गया है। इस बारे में, लंबे समय से हमारी भी यही इच्छा थी कि भारतीय सशस्त्र बलों का कोई अधिकारी राम मंदिर में कोई पद संभाले। इसलिए, यह बहुत अच्छी बात है।” उन्होंने हाल की चढ़ावा चोरी की घटना पर कहा, “हाल के दिनों में हुई वित्तीय अनियमितताओं को दूर करने के लिए जो सकारात्मक कदम उठाए गए हैं, वे बहुत अच्छे हैं।

स्वरा भास्कर के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग, कहा-24 घंटे में माफी मांगो वरना पूरे देश में होगा आंदोलन

पटना। अभिनेत्री स्वरा भास्कर इन दिनों जौहर को लेकर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर भारी विवाद का सामना कर रही हैं। गुरुवार को पटना में सामाजिक संगठनों ने इस पर काफी नाराजगी जताई। उन्होंने अभिनेत्री की तस्वीर पर कालिख भी पोती। सामाजिक संगठनों ने आईएएनएस के साथ बातचीत में अभिनेत्री को माफी मांगने के लिए कहा है। उनका कहना है कि अगर स्वरा भास्कर ऐसा नहीं करती हैं तो वे देशभर में भारी प्रदर्शन करेंगे। वहां मौजूद प्रदर्शनकारी कृष्ण कुमार (कल्लू) ने कहा, “अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने जिस तरह क्षत्राणी महिलाओं के लिए अपमानित शब्द इस्तेमाल किए हैं, वह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण हैं। इसलिए हमने स्वरा भास्कर की तस्वीर पर कालिख पोतकर विरोध जताया है। अगर 24 घंटे के अंदर वे माफी नहीं मांगेगी, तो पूरे देश में आंदोलन किया जाएगा।” प्रदर्शनकारी भाई चंदन ने कहा, “स्वरा भास्कर को इस तरह हमारी क्षत्राणी महिलाओं के लिए आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी। जिन मां-बहनों और भारत के लिए कुर्बानी देने वालों के लिए उन्होंने यह बात कही है, आज हम उनकी वजह से ही यहां खड़े हैं। वे कहती हैं कि अगर क्षत्राणी महिलाओं को ऐसा नहीं करना चाहिए था। अगर मैं होती तो उनके हरम में चली जाती तो मैं यह कहता हूं कि तुम्हें जाना है तुम जाओ। वे महिलाएं और कुर्बानी देने वाले लोग हमारे लिए अमर हैं, हमारे लिए पूजनीय है। उनकी वजह से हम लोग खुली हवा में सांस ले रहे हैं।” सीमा कर्ना ने कहा, “स्वरा भास्कर का बयान अपमानजनक है। क्षत्रिय महिलाओं ने हमारे लिए जौहर किया था, उनके लिए ऐसे गंदे शब्दों का वो कैसे इस्तेमाल कर सकती हैं। उन्हें इतनी बुद्धि तो होनी चाहिए। आखिर वह भी एक महिला है। इस लिहाज से तो वे इज्जत दे ही सकती हैं।” उन्होंने कहा, “एक महिला होने के नाते स्वरा भास्कर का पहला काम दूसरी महिला को इज्जत देना होना चाहिए। पहली बात तो आपने इज्जत नहीं दी और ऊपर से कह रही हैं कि जौहर करने वाली क्षत्राणी गलत थीं। हम होते तो ऐसा नहीं करते, तो इनको कोई बताओ कि जौहर और शौहर में फर्क होता है। हालांकि इनको वो फर्क समझ नहीं आता है और उसी को दिखाने के लिए कालिख पोती गई है।

कर्नाटक: स्कूल की छत गिरने पर राहुल गांधी पर बरसे आर. अशोक, बोले- रैलियां छोड़िए, प्रभावित छात्रों की आवाज सुनिए

बेंगलुरु। कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता और वरिष्ठ भाजपा नेता आर. अशोक ने गुरुवार को कर्नाटक के बागलकोट में एक स्कूल की छत गिरने की घटना को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा और उन्हें प्रभावित स्कूल में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम आयोजित करने और छात्रों की बात सुनने की चुनौती दी। आर. अशोक ने इस संबंध में एक वीडियो भी साझा किया। सोशल मीडिया पर एक बयान में उन्होंने कहा कि जब स्कूल की छत गिरी तब बच्चे कक्षाओं में थे। उन्होंने कांग्रेस सरकार के शासन और कल्याणकारी गारंटियों के दावों पर सवाल उठाया। आर. अशोक ने कहा कि यह घटना महज एक आंकड़ा नहीं है क्योंकि ये बच्चे हैं और सवाल उठाया कि ‘न्याय’ की बात करने वाली सरकार छात्रों के लिए सुरक्षित कक्षाएं सुनिश्चित करने में कैसे विफल हो सकती है। अशोक ने कहा, “जो पार्टी भारत को न्याय का उपदेश देती है, वह सुरक्षित कक्षा की गारंटी नहीं दे सकती। जो सरकार गारंटी के वादे करती है। वह बच्चे के सिर पर छत की गारंटी भी नहीं दे सकती।” उन्होंने राहुल गांधी से आग्रह किया कि वे राजनीतिक भाषण और रैलियां करने के बजाय कर्नाटक का दौरा करें, प्रभावित स्कूल में जाएं, छात्रों से मिलें और उनकी चिंताओं को सुनें। आर.अशोक ने कहा, “मंच को भूल जाओ। नारों को भूल जाओ। पहले से तैयार भाषणों को भूल जाओ। कर्नाटक आओ। इस स्कूल में खड़े हो जाओ। बच्चों को देखो। उनकी आवाज सुनो। उन्होंने कांग्रेस सांसद पर तंज कसते हुए कहा, “आपने हमें खटाखट दिया। कर्नाटक ने आपको जवाब दिया है खटाखट – छत गिर गई।” भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के शासनकाल में कर्नाटक में सरकारी स्कूलों की हालत खराब हो गई है। उन्होंने बागलकोट तालुक के मुगोलोली टांडा में कक्षा में पढ़ रहे बच्चों पर स्कूल की छत गिरने की घटना का उदाहरण दिया। अशोक ने कहा कि यह घटना बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा के प्रति सरकार की कथित उपेक्षा का सबूत है और उन्होंने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से कांग्रेस सरकार की गारंटी के बारे में सवाल किया। आर. अशोक ने कहा, कांग्रेस सरकार के शासनकाल में सरकारी स्कूलों की हालत इतनी खराब हो गई है कि बागलकोट तालुक के मुगोलोली टांडा में कक्षा में पढ़ रहे बच्चों पर स्कूल की छत गिर गई। यह घटना ही स्थिति का प्रमाण है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्यभर में बच्चों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें जूते और मोजे की कमी, पाठ्यपुस्तकों की कमी, स्कूलों तक पहुंचने के लिए अपर्याप्त बस सेवाएं और बुनियादी ढांचे की कमी शामिल है।

केंद्र ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास एनएच-327 के 31.02 किलोमीटर के हिस्से को फोरलेन में बदलने की दी मंजूरी

मुंबई। केंद्र सरकार ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास मौजूद एनएच-327 के 31.02 किलोमीटर के हिस्से को फोरलेन में बदलने की मंजूरी दे दी है। इसके लिए 2,077.18 करोड़ रुपए के फंड को मंजूरी दी गई। यह जानकारी केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की ओर से गुरुवार को दी गई। केंद्रीय मंत्री गडकरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा, “हमने पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में एनएच-327 के 31.02 किलोमीटर लंबे बागडोगरा-पानीटंकी-खारीबाड़ी-गलगलिया खंड को फोरलेन में बदलने के लिए 2,077.18 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं। इस प्रोजेक्ट में 3 बड़े पुल, 1 रोड ओवर ब्रिज (आरओबी), 5 एलिफेंट अंडरपास और दोनों तरफ सर्विस रोड बनाना शामिल है। इससे कनेक्टिविटी बेहतर होगी और लोगों व जंगली जानवरों, दोनों के लिए सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित होगी। रणनीतिक रूप से अहम सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास स्थित यह प्रोजेक्ट पूर्वोत्तर भारत के साथ कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा और नेपाल, भूटान व बांग्लादेश तक पहुंच को बेहतर बनाएगा। फोनलेन सड़क बनने से बागडोगरा, नक्सलबाड़ी, खारीबाड़ी और पानीटंकी में भीड़ कम होगी, बागडोगरा एयरपोर्ट और इलाके के मुख्य केंद्रों तक कनेक्टिविटी बेहतर होगी, और कृषि, बागवानी, चाय और दूसरी स्थानीय उपज को बड़े बाजारों तक तेजी से पहुंचाना आसान हो जाएगा। यह घोषणा ऐसे समय में की गई है जब पश्चिम बंगाल सरकार उत्तर बंगाल में इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है। इस साल मई में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी की सरकार के सत्ता में आने के बाद से ही इस पर काम हो रहा है। अधिकारी ने बार-बार कहा है कि उत्तर बंगाल में कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। उनका कहना है कि पिछली लेफ्ट फ्रंट और तृणमूल कांग्रेस सरकारों के दौरान इस इलाके को नजरअंदाज किया गया और अब इस पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने उत्तर बंगाल में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की जरूरत पर भी जोर दिया है, जिसमें खास तौर पर चाय, लकड़ी और पर्यटन (जिन्हें “ट्रिपल-टी” सेक्टर कहा जाता है) पर ध्यान दिया जा रहा है।

तमिलनाडु: मुख्यमंत्री विजय का बड़ा ऐलान, चेन्नई में 20 लाख वर्गफुट में बनेगा नया सचिवालय

चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय की ओर से चेन्नई में 20 लाख वर्गफुट में नया सचिवालय बनाने की घोषणा की गई है। विधानसभा में बोलते हुए सीएम ने कहा कि अगली सदी की प्रशासनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए चेन्नई में विधानसभा और सचिवालय वाला एक नया बिल्डिंग कॉम्प्लेक्स बनाया जाएगा, जिसकी अनुमानित लागत 1,200 करोड़ रुपए होगी। उन्होंने कहा कि फोर्ट सेंट जॉर्ज का निर्माण शुरू हुआ और 1644 में पूरा हुआ। 1652 में इसे प्रेसीडेंसी का दर्जा मिला और यह ब्रिटिश शासन के दौरान सत्ता का आधिकारिक केंद्र रहा। आजादी के बाद से इस भवन को लगातार तमिलनाडु सरकार के सचिवालय के तौर पर जाना जाता है। लगभग 400 साल से यह तमिलनाडु सरकार के प्रशासनिक केंद्र और राज्य की शासन विरासत के प्रतीक के तौर पर खड़ा है। लगभग 12 एकड़ में फैले इस कैंपस में सचिवालय के कामकाज के लिए तमिलनाडु सरकार के सीधे नियंत्रण में केवल 4 एकड़ जमीन उपलब्ध है। सीएम विजय ने कहा कि क्योंकि बाकी हिस्सा भारत के रक्षा मंत्रालय और आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) के नियंत्रण में आता है, इसलिए सुविधाओं का विस्तार या अपग्रेड करना संभव नहीं है। अभी सचिवालय दो इमारतों से काम करता है। मुख्य सचिवालय की इमारत, जिसे मूल रूप से गवर्नर के आवास के तौर पर बनाया गया था, में अभी विधानसभा, मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के कार्यालय, वित्त विभाग और प्रशासन के अन्य महत्वपूर्ण विभाग स्थित हैं। यह कॉम्प्लेक्स 2,07,000 वर्ग फुट के इलाके में फैला हुआ है। सीएम ने कहा कि प्रशासनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए 1978 में 3,75,000 वर्ग फुट में ‘नमक्कल कविग्नार मालिगई’ का निर्माण किया गया, जिसमें ग्राउंड फ्लोर और 10 ऊपरी मंजिलें हैं। इन इमारतों से 30 से ज्यादा सरकारी विभाग, सचिव, अधिकारी और 6,000 से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं। जगह की भारी कमी और जन-प्रशासन के हित को देखते हुए, पहले ओमंदुरार सरकारी एस्टेट में एक नया सचिवालय बनाया गया था। हालांकि बाद में उस इमारत को मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में बदल दिया गया, इसलिए सचिवालय फोर्ट कैंपस से ही काम करता रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 40 वर्षों में सचिवालय के सभी विभागों में कर्मचारियों की संख्या और प्रशासनिक जिम्मेदारियां काफी बढ़ गई हैं। फिर भी मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर में ज्यादा बदलाव न होने के कारण यह ठहराव की स्थिति में पहुंच गया है। इसके अलावा चूंकि फोर्ट सेंट जॉर्ज के अंदर बची हुई जमीन रक्षा विभाग और एएसआई की है, इसलिए यहां अतिरिक्त निर्माण और आधुनिकीकरण नहीं किया जा सकता है। सीएम ने कहा कि हालाँकि फोर्ट सेंट जॉर्ज तमिलनाडु की प्रशासनिक विरासत का एक गौरवशाली प्रतीक है, फिर भी तमिलनाडु के भविष्य के प्रशासनिक विकास को सहारा देने, कुशल शासन सुनिश्चित करने और विश्व-स्तरीय जन-प्रशासन इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए एक एकीकृत नए सचिवालय कॉम्प्लेक्स का निर्माण जरूरी हो गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस नए कॉम्प्लेक्स में, सभी सरकारी विभागों को एक ही एकीकृत प्रशासनिक छत के नीचे लाया जाएगा। यहां आधुनिक प्रशासनिक सुविधाएं बनाई जाएंगी जो अग्नि सुरक्षा प्रोटोकॉल, दिव्यांगजनों के लिए पूर्ण पहुंच मानकों और ग्रीन बिल्डिंग नियमों का पालन करेंगी। इसमें अत्याधुनिक कॉन्फ्रेंस हॉल, नागरिक सेवा केंद्र और अधिकारियों के लिए आधुनिक कार्यस्थल होंगे। साथ ही, फोर्ट सेंट जॉर्ज की ऐतिहासिक इमारतों को ऐतिहासिक स्मारकों के रूप में संरक्षित किया जाएगा ताकि उनकी विरासत का मूल्य बना रहे और आने वाली पीढ़ियां उनकी सराहना कर सकें। इसके साथ ही सीएम ने कहा कि तमिलनाडु में एक ‘ओलंपिक सिटी’ बनाई जाएगी और इसे तेजी से विकसित किया जाएगा। इसमें आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाएं होंगी, जैसे कि वर्ल्ड-क्लास स्पोर्ट्स एरिना, अत्याधुनिक स्पोर्ट्स इक्विपमेंट, हाई परफॉर्मेंस ट्रेनिंग सेंटर, स्पोर्ट्स साइंस और स्पोर्ट्स मेडिसिन यूनिट्स, और एथलीटों व कोचों के लिए रहने की सुविधा। उन्होंने कहा कि यह कैंपस एक प्रमुख इंटीग्रेटेड ग्लोबल स्पोर्ट्स हब के तौर पर काम करेगा, जो नेशनल और इंटरनेशनल स्पोर्ट्स टूर्नामेंट की मेजबानी करने में मदद करेगा। साथ ही ओलंपिक मेडल जीतने में सक्षम टैलेंटेड एथलीटों को तैयार करेगा। सीएम ने कहा कि तमिलनाडु आज मोटर रेसिंग के क्षेत्र में भी एक अग्रणी राज्य है। यहां एक मजबूत ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम मौजूद है। तमिलनाडु में ग्लोबल-लेवल की रेस कारों के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट और उनसे जुड़ी सहायक इंडस्ट्रीज लगाने के लिए आदर्श माहौल है। वर्ल्ड-क्लास मोटरस्पोर्ट रेसिंग सर्किट बनाने से टूरिज्म, खास तरह की गाड़ियों के मैन्युफैक्चरिंग, रोजगार पैदा करने और आर्थिक विकास के लिए बड़े मौके खुलेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्पोर्ट्स टूरिज्म को बढ़ावा देने, तमिलनाडु के युवाओं में मोटरस्पोर्ट्स के प्रति बढ़ते जुनून को पोषित करने, उन्हें जरूरी ट्रेनिंग देने और तमिलनाडु को मोटरस्पोर्ट्स के लिए एक प्रमुख इंटरनेशनल हब के तौर पर स्थापित करने के लिए राज्य में एक नई ‘मोटरस्पोर्ट्स सिटी’ बनाई जाएगी। यह मोटरस्पोर्ट्स सिटी टैलेंट की खोज करेगी, ट्रेनिंग और कॉम्पिटिटिव प्लेटफॉर्म देगी, नेशनल और इंटरनेशनल रेसर तैयार करेगी और स्पोर्ट्स टूरिज्म को काफी आगे बढ़ाएगी।

‘दिल्ली की चड्ढी पहनेंगे तो पंजाब में कैसे रहेंगे’, पंजाब की मतदाता सूची से राघव चड्ढा का नाम कटने पर बोला विपक्ष

नई दिल्ली। पंजाब में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम कटने पर राजनीतिक बयानबाजी जारी है। राघव चड्ढा ने इसमें राजनीतिक बदले का आरोप लगाया है। हालांकि, आम आदमी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने इस पर राज्यसभा सांसद को घेरा है। आम आदमी पार्टी की प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने आईएएनएस से कहा, “सब जानते हैं कि एसआईआर प्रक्रिया को चुनाव आयोग के जरिए भाजपा सरकार चला रही है। इसमें राज्य सरकार की कोई भूमिका नहीं है। ऐसा बयान देना सिर्फ उनकी ओछी राजनीति को दिखाता है।” प्रियंका कक्कड़ ने कहा, “उन्हें यह सवाल भाजपा से पूछना चाहिए और उन्हें लोगों को बताना चाहिए कि वे असल में पंजाब, दिल्ली या मुंबई में से कहां रहते हैं। मुझे लगता है कि राघव चड्ढा तो कम से कम सांसद हैं। जब उनका नाम कटा तो यह इतनी बड़ी खबर बन गई और इस पर इतनी चर्चा हो रही है। लेकिन उन अनगिनत, बेजुबान लोगों के बारे में सोचिए जिनके नाम आपकी जानकारी के बिना ही हटा दिए जाते हैं।” वहीं, पंजाब के पटियाला से कांग्रेस सांसद धर्मवीर गांधी ने कहा, “मैं राघव चड्ढा के बारे में कुछ नहीं कहूंगा। आप भी शायद उनके बारे में सब कुछ जानते होंगे। वह लंबे समय तक आम आदमी पार्टी का हिस्सा रहे और जल्द ही इसके अहम सदस्य बन गए। अपने राजनीतिक फायदे के लिए उन्होंने आम आदमी पार्टी छोड़ दी और पांच-छह अन्य लोगों के साथ भाजपा में शामिल हो गए।” समाजवादी पार्टी के सांसद रमाशंकर राजभर ने कहा, “अब राघव चड्ढा तो चड्ढी हो गए हैं। अब वो दिल्ली की चड्ढी पहनेंगे, तो पंजाब में कैसे चड्ढा रहेंगे।” उन्होंने कहा, “एसआईआर से भारतीय जनता पार्टी का बड़ा नुकसान हो गया है, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी का मतदाता, प्रबुद्ध मतदाता होता है, संपन्न मतदाता होता है। अवसर प्राप्त लोग होते हैं, अवसर प्राप्त लोग, एक जगह, दो जगह, तीन जगह, अपना नाम चढ़वा लिए। भारतीय जनता पार्टी कुछ जात-वर्गों का नाम काटने के लिए एसआईआर लाई। बंगाल में तो सफल हो गए, लेकिन महाराष्ट्र में, पंजाब में और यूपी में सफल नहीं हुए। क्योंकि यहां तो उल्टा पड़ गया, अब उल्टा यह पड़ गया कि इनके मतदाता जो तीन-तीन जगह से वोटर थे, वो एक जगह बच गए।” उन्होंने कहा, “हर विधानसभा में 15-20 हजार का नुकसान भारतीय जनता पार्टी को हुआ है और अब इन्हीं के पार्टी का सांसद भी साबित करें कि वो इस देश के हैं कि नहीं। क्योंकि यहां तो गजब हो गया ना, सेना नायकों को भारत का निवासी साबित नहीं कर पा रहे हैं और बड़े-बड़े नेता साबित नहीं कर पा रहे हैं, तो ये भारतीय जनता पार्टी अपने ही जाल में फंस चुकी है। अब भारतीय जनता पार्टी का शिखर समाप्त हो गया, जितनी ऊंचाई पर चढ़नी थी चढ़ चुकी है, अब इनको इनकी अवनति होनी है।” इससे पहले, राघव चड्ढा ने कहा, “पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार अब अपनी बदले की राजनीति को वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट तक ले आई है। मैं पंजाब से राज्यसभा का मौजूदा सांसद हूं और मेरा वोटर आईडी पंजाब के मोहाली में रजिस्टर्ड है। फिर भी, वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट में मेरा नाम ‘शिफ्टेड’ दिखाया गया है। यह सिर्फ कोई क्लर्क की गलती नहीं लगती। यह साफ तौर पर राजनीतिक बदले की भावना का मामला है।

जेपीएससी में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति कब तक होगी, 10 सितंबर तक बताए सरकार : झारखंड हाईकोर्ट

रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में वन विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी के मामले में स्वत: संज्ञान से दर्ज याचिका पर गुरुवार को सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से पूछा है कि झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति कितने समय में पूरी की जाएगी। अदालत ने सरकार को 10 सितंबर तक इस संबंध में स्पष्ट जानकारी देने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ में सुनवाई के दौरान जेपीएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल और अधिवक्ता प्रिंस कुमार ने अदालत को बताया कि असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (एसीएफ) और रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर (आरएफओ) की नियुक्ति के लिए चल रही परीक्षा प्रक्रिया सरकार की ओर से रद्द कर दी गई है। इस पर अदालत ने सरकार से जेपीएससी में रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया की समय-सीमा बताने को कहा। अदालत पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि जेपीएससी एक संवैधानिक संस्था है और इसका अध्यक्ष पद लंबे समय तक रिक्त नहीं रखा जा सकता। पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने सरकार के अधिवक्ता को सरकार से निर्देश लेकर यह बताने को कहा था कि जेपीएससी के अध्यक्ष की नियुक्ति कब तक कर दी जाएगी। अदालत ने वन विभाग में रिक्त पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए आयोग के कामकाज को सुचारु रखना जरूरी माना था। पिछली सुनवाई में जेपीएससी की ओर से अदालत को बताया गया था कि वन विभाग में रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। एसीएफ और आरएफओ के लिए प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा पूरी हो चुकी थी। मुख्य परीक्षा का परिणाम भी जारी किया गया था और शारीरिक दक्षता परीक्षा की तारीख घोषित की गई थी। आयोग की ओर से अदालत को बताया गया था कि एसीएफ और आरएफओ की परीक्षा प्रक्रिया ही सरकार की ओर से रद्द कर दी गई है। इससे वन विभाग में लंबे समय से खाली पदों को भरने की प्रक्रिया को लेकर स्थिति बदल गई है।

कर्नाटक: ‘बेल्लारी चलो’ पदयात्रा के दौरान बी.वाई. विजयेंद्र बोले, किसान आत्महत्याओं पर जवाब दे सरकार

रायचूर। भाजपा की ‘बेल्लारी चलो’ पदयात्रा गुरुवार को तीसरे दिन में प्रवेश कर गई। इसमें राज्य भाजपा अध्यक्ष और विधायक बी.वाई. विजयेंद्र ने कर्नाटक सरकार पर हमला करते हुए आरोप लगाया कि दलितों के कल्याण के लिए आवंटित धनराशि को गारंटी योजनाओं के वित्तपोषण में लगाया जा रहा है और सरकार किसानों के बीच बढ़ती परेशानी को दूर करने में विफल रही है। विजयेंद्र ने रायचूर में तीसरे दिन की पदयात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। मीडियाकर्मियों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा का अभियान पूरे राज्य में ध्यान आकर्षित कर रहा है और इसका उद्देश्य सरकार की विफलताओं और भ्रष्टाचार के साथ-साथ किसानों और आम लोगों द्वारा सामना की जाने वाली समस्याओं को उजागर करना है। विजयेंद्र ने आरोप लगाया, “कांग्रेस दलितों और शोषित समुदायों का इस्तेमाल सिर्फ वोट बैंक के तौर पर कर रही है। दलितों के विकास के लिए आवंटित एससीएसपी-टीएसपी निधि का इस्तेमाल गारंटी योजनाओं के लिए किया जा रहा है।” विजयेंद्र ने कहा कि उन्होंने बुधवार को दलित नेताओं के साथ एक बैठक की थी, जिसमें शोषित समुदायों से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की गई थी और मांग की थी कि दलित विकास के लिए आवंटित धनराशि का उपयोग विशेष रूप से उनके कल्याण के लिए किया जाए। विजयेंद्र ने राज्य में कृषि संकट के बावजूद किसानों के प्रति कम चिंता दिखाने के लिए सरकार पर आरोप भी लगाया। कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि पिछले तीन वर्षों में 3,655 किसानों ने आत्महत्या कर ली है, जिनमें कल्याणा कर्नाटक क्षेत्र के 937 किसान शामिल हैं। उन्होंने आगे कहा कि इन आंकड़ों में कलबुर्गी में 295, रायचूर में 169, बीदर में 220 और कोप्पल में 80 से अधिक मौतें शामिल हैं। उन्होंने कहा, “ये आंकड़े सरकार के किसान विरोधी रवैये को दर्शाते हैं। प्रियांक खड़गे को इस तथ्य पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए कि अकेले कलबुर्गी जिले में 295 किसानों ने आत्महत्या कर ली है। सरकार को किसानों की दुर्दशा के प्रति चिंता दिखानी चाहिए और उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए।” विजयेंद्र ने तत्काल राहत की मांग करते हुए सरकार से सूखाग्रस्त क्षेत्रों के किसानों के 5 लाख रुपये तक के फसल ऋण माफ करने का आग्रह किया। उन्होंने दावा किया कि 190 से अधिक तालुकों में सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है और प्रभावित किसानों के लिए फसल ऋण माफी की मांग की। उन्होंने समर्थन मूल्य पर खरीदी गई मक्का के लिए किसानों को कथित तौर पर लंबित लगभग 145 करोड़ के तत्काल भुगतान की भी मांग की और दुग्ध उत्पादकों को देय प्रोत्साहन राशि जारी करने की मांग की। विजयेंद्र ने कहा, “बी.एस. येदियुरप्पा के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान दूध उत्पादकों को प्रोत्साहन राशि दी गई थी। अब वह प्रोत्साहन राशि भी जारी नहीं की जा रही है। सरकार किसानों के जीवन से खिलवाड़ कर रही है।” भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार से किसानों की समस्याओं पर चर्चा करने और कृषि संकट का समाधान खोजने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की। उन्होंने तुंगभद्रा बांध पर गाद निकालने का काम शुरू करने का भी आह्वान किया और सरकार से जल भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए नवाली जलाशय परियोजना को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। केपीसीसी अध्यक्ष आर.बी. हरिप्रसाद द्वारा भाजपा की पदयात्रा के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं से काले झंडे प्रदर्शित करने के आह्वान पर प्रतिक्रिया देते हुए विजयेंद्र ने कहा कि सरकार को भाजपा के विरोध को बाधित करने के प्रयास के बजाय किसानों की समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर आप चाहें तो पदयात्रा रोक दें। अगर आप हमें फांसी भी दे दें तो भी कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन पहले किसानों की समस्याओं का समाधान करें।” बी.वाई. विजयेंद्र ने कहा, “हरिप्रसाद और डी.के. शिवकुमार को भाजपा की पदयात्रा को काले झंडे दिखाने के बजाय किसानों के आंसू पोंछने चाहिए। किसान आत्महत्या कर रहे हैं और कृषि समुदाय संकट में है। इन समस्याओं का समाधान करना सरकार की जिम्मेदारी है। जनता सब कुछ देख रही है और उचित समय पर जवाब देगी।