हल्द्वानी शुद्धिकरण मामले पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज किया जाना अच्छी बात : संजय राउत

नागपुर। शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने तीन अलग-अलग मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने हल्द्वानी शुद्धिकरण मामले में एफआईआर, कर्नाटक में मंत्री सतीश जारकीहोली पर ईडी की छापेमारी और गरबा में मुस्लिम प्रवेश पर चल रहे विवाद को लेकर बात की। हल्द्वानी शुद्धिकरण मामले में हल्द्वानी पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने पर संजय राउत ने कहा, “यह अच्छी बात है। मैंने सुना था कि यह लोग राहुल गांधी को ही आरोपी बना रहे हैं। जनता का जो दबाव बना, तो जिसने भी यह सामाजिक विघटन का काम किया है, उसके खिलाफ अगर एफआईआर दर्ज हुई है तो यह अच्छा है।” प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा कर्नाटक के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) मंत्री सतीश जारकीहोली के ठिकानों पर छापेमारी पर संजय राउत ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “राम मंदिर चढ़ावा मामले के लिए कहां है ईडी? आज भी जहां कांग्रेस की सरकारें हैं, जहां कांग्रेस के नेता हैं, या हमारे जैसे लोग हैं, उनके घर तक ही ईडी पहुंचती है।” बता दें कि ईडी ने बुधवार सुबह कर्नाटक के आबकारी विभाग में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में यह कार्रवाई की है। जानकारी के मुताबिक, ईडी ने बेंगलुरु, बेलगावी और गोवा में करीब 15 जगहों पर एक साथ सर्च ऑपरेशन चलाया। बेंगलुरु के डॉलर्स कॉलोनी स्थित जारकीहोली के निजी आवास, बेलगावी स्थित उनके घर और बेंगलुरु में सरकार द्वारा आवंटित सरकारी आवास पर भी तलाशी ली गई। अधिकारियों के अनुसार, 25 से ज्यादा ईडी अधिकारियों की टीम करीब 18 गाड़ियों में बुधवार सुबह 7 बजे पहुंची और तलाशी शुरू की। इस दौरान सुरक्षा के लिए सीआरपीएफ के जवान भी मौजूद रहे। वहीं, नवरात्रि से पहले गरबा और डांडिया आयोजनों में मुस्लिमों के प्रवेश पर रोक लगाने के विवाद के बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने समावेशी दृष्टिकोण का समर्थन किया है। उन्होंने साफ कहा था कि “अगर कोई मुस्लिम व्यक्ति वहां आता है और उत्सव का सही तरीके से आनंद लेता है, तो उन्हें इसमें कोई समस्या नजर नहीं आती। त्योहार सभी को साथ लेकर चलने के लिए होते हैं।” इस पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय राउत ने कहा, “देश के प्रधानमंत्री विदेश में जाकर वहां के इस्लामिक राज्य प्रमुख से गले मिलते हैं, उनको माय ब्रदर बोलते हैं, तो यहां भी हमारे बिरादर हैं।
राजौरी में महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनीं फौजिया शहनाज, केंद्र सरकार की योजना से शुरू किया जिम सेंटर

राजौरी। जम्मू-कश्मीर के राजौरी में महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की एक प्रेरणादायक मिसाल सामने आई है। यहां फोजिया शहनाज ने केंद्र सरकार की एक योजना का लाभ उठाकर अपना फिटनेस सेंटर शुरू किया है और रोजगार का एक स्थायी जरिया बनाया है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत लागू एक योजना से राजौरी के फतेहपुर की फोजिया को कम ब्याज दर पर आर्थिक मदद मिली और उन्होंने ‘सांझा जिम सेंटर’ की शुरुआत की। यह सेंटर अब आसपास के इलाकों की महिलाओं और युवाओं को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। यह उन्हें अपनी सेहत और फिटनेस पर ध्यान देने की सुविधा तो देता ही है, साथ ही फोजिया को अच्छी मासिक आय कमाने में भी मदद करता है। केंद्र सरकार और एनआरएलएम विभाग का आभार जताते हुए फोजिया ने कहा कि ऐसी योजनाएं बेरोजगार महिलाओं के लिए फायदेमंद साबित हो रही हैं। ये उन्हें अपना कारोबार शुरू करने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ने में मदद करती हैं। उन्होंने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “मैंने यहां अपना काम शुरू किया है। हमने इसका नाम ‘सांझा जिम सेंटर’ रखा है। मैं केंद्र सरकार और एनआरएलएम विभाग की बहुत-बहुत शुक्रगुजार हूं, जिन्होंने हमें यहां तक पहुंचाया और हमारा काम शुरू हुआ।” फोजिया शहनाज ने बताया कि यहां अभी 40 से 45 लोग जिम करने आते हैं। सुरक्षाबल के जवान भी आते हैं। उन्होंने बताया कि अभी जिम से आमदनी सही हो रही है। इस जिम सेंटर से हम योजना के अनुसार लोन के पैसे को भी दे रहे हैं और अपना खर्चा भी चला रहे हैं। स्थानीय महिलाओं और युवाओं ने भी इस पहल की तारीफ की। उनका कहना है कि इस फिटनेस सेंटर की वजह से उन्हें अपने घर के पास ही सुविधाएं मिल रही हैं। एक स्थानीय महिला ने कहा, “हमें पहले राजौरी जाना पड़ता था। बच्चे भी इसी तरह दूर क्षेत्र में फिटनेस सेंटर जाते थे। फतेहपुर में बच्चे और लड़कियां भी जिम करने के लिए आ रही हैं। हम बहुत शुक्रगुजार हैं कि हमें यहां नजदीक में यह सुविधा मिल रही है। छोटे-बड़े लोग यहां आते हैं और उनकी सेहत भी अच्छी रहती है। केंद्र सरकार और एनआरएलएम विभाग का भी हम धन्यवाद करते हैं।” एक स्थानीय युवक ने कहा कि यहां पहले कोई जिम सेंटर नहीं था। दूर शहर में जिम जाने में परेशानी होती थी। फतेहपुर में जब से जिम सेंटर खुला है, लोग आ रहे हैं।
‘परिणाम मायने रखता है, लेकिन मानसिकता उससे ज्यादा अहम’: फुलहम कोच अल्वारो अर्बेलोआ

नई दिल्ली। फुलहम को प्रीमियर लीग 2026-27 सीजन में अभी एक भी पॉइंट नहीं मिला है। हेड कोच अल्वारो अर्बेलोआ ने साफ कर दिया है कि खराब नतीजों से उनके खिलाड़ियों से उम्मीद का स्तर नहीं बदलेंगे। उन्होंने कहा कि हम क्रेवन कॉटेज में एक अटैकिंग पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं। स्पेन के अर्बेलोआ का मानना है कि उनकी सोच यह तय करेगी कि वे उनके कार्यकाल की मुश्किल शुरुआत को कैसे संभालते हैं। आर्बेओला ने जियोस्टार से कहा, “मेरा हमेशा से मानना है कि परिणाम मायने रखते हैं, लेकिन दृष्टिकोण सबसे ज्यादा मायने रखता है। आप हर स्थिति में कैसे प्रतिक्रिया देते हैं, चाहे हालात कैसे भी हों, यह आपको एक टीम के तौर पर दिखाता है। आपको फाइनल व्हिसल तक लड़ते रहना होगा। इस मानसिकता से कोई समझौता नहीं हो सकता। मैं हर मैच में अपने खिलाड़ियों से यही उम्मीद करता हूं। चाहे हम जीत रहे हों, हार रहे हों, या मुश्किलों का सामना कर रहे हों, अप्रोच वही रहना चाहिए। हम पिच पर होने वाली हर चीज को नियंत्रित नहीं कर सकते, लेकिन अपनी कोशिश और अपनी मानसिकता को कर सकते हैं। यही हमें पूरे सीजन में आगे ले जाएगा।” उन्होंने कहा, “अगर हम महत्वाकांक्षी बनना चाहते हैं, तो हमें ऐसे खिलाड़ियों को साइन करना होगा जो स्क्वॉड को बेहतर बना सकें। हमने पिछले सीजन में कुछ अच्छे खिलाड़ी खो दिए थे, इसलिए हमें उन्हें बदलना पड़ा। हमने क्वालिटी प्लेयर्स को लाकर वह लक्ष्य दिखाया जो हमारे विचार और हमारे खेलने के तरीके से फिट बैठते हैं। वे जितनी जल्दी सेट हो जाएं, उतना ही अच्छा है। हमारा फोकस इस ग्रुप से बेस्ट निकलवाने पर है। यह एक मजबूत यूनिट बनाने, एक-दूसरे के मूवमेंट को समझने और यह पक्का करने के बारे में है कि हर कोई एक ही पेज पर हो। कड़ी मेहनत अभी से शुरू होती है।” आर्बेओला ने कहा, “मुझे एक ऐसी टीम चाहिए जिसकी एक स्पष्ट पहचान हो। मैं एक ऐसी टीम देखना चाहता हूं जो हिम्मत और विशेष प्रभाव के साथ खेले। हम एक बहुत ही अटैकिंग टीम बनना चाहते हैं, गेंद के साथ बहुत बहादुर, और जब हम इसे खो दें तो आक्रामक, और अटैक करने के लिए तैयार। मुझे लगता है कि हमें हर मैच में वह पैशन, वह लक्ष्य दिखाने और अपना सब कुछ देने की जरूरत है।
डीआरआई की बड़ी कार्रवाई: 15 दिनों में 740 किलो मादक पदार्थ जब्त, 13 आरोपी गिरफ्तार

नई दिल्ली। राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने पिछले पखवाड़े के दौरान देशभर में चलाए गए आठ बड़े अभियानों में करीब 740 किलोग्राम गांजा और चरस जब्त की है। वित्त मंत्रालय द्वारा बुधवार को जारी बयान के अनुसार, इन कार्रवाइयों के दौरान 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया। जब्त मादक पदार्थों में 709.6 किलोग्राम गांजा, 24.5 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाली हाइड्रोपोनिक कैनबिस और 5 किलोग्राम चरस शामिल है। डीआरआई को प्राप्त खुफिया सूचना के आधार पर अधिकारियों ने विशाखापट्टनम से आ रहे दो ट्रकों को रायपुर के निकट ओल्ड धमतरी रोड पर रोका। तलाशी के दौरान ट्रकों के लोडिंग क्षेत्र में रखी गई 10 बोरियों के भीतर छिपाए गए 61 पैकेट बरामद हुए। जांच में इनमें 375.95 किलोग्राम गांजा पाया गया। अधिकारियों ने गांजा और दोनों ट्रकों को एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के तहत जब्त कर लिया तथा इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया। वहीं, 5 और 6 सितंबर को विशेष सूचना के आधार पर डीआरआई ने पटना के निकट औरंगाबाद-पटना राजमार्ग पर एक ट्रक को रोका। मंत्रालय के अनुसार, कार्रवाई के दौरान अधिकारियों पर हमला किया गया जिसमें एक अधिकारी घायल हो गया, जबकि ट्रक चालक मौके से फरार हो गया। तलाशी में ट्रक से 90 पैकेट बरामद हुए, जिनमें 140.5 किलोग्राम गांजा मिला। गांजा और वाहन को जब्त कर लिया गया है और मामले की जांच जारी है। वित्त मंत्रालय ने बताया कि इससे पहले 26 अगस्त 2026 को डीआरआई अधिकारियों ने रायपुर के पास एक ट्रक से छिपाकर ले जाया जा रहा लगभग 124 किलोग्राम गांजा बरामद किया था। इस मामले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा, 3 सितंबर 2026 को डीआरआई ने गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर अमरनाथ एक्सप्रेस के सामान्य डिब्बे में यात्रा कर रहे तीन लोगों को रोका। व्यक्तिगत तलाशी के दौरान करीब 5 किलोग्राम चरस (हशीश) बरामद हुई। जांच में पता चला कि दो यात्रियों ने चरस को घुटने के सपोर्ट जैसी बनावट में अपनी जांघों के आसपास छिपाया हुआ था और उसे साड़ियों के भीतर रखा गया था। प्रारंभिक जांच से संकेत मिले हैं कि यह चरस नेपाल से तस्करी कर भारत लाई गई थी। बरामद चरस को एनडीपीएस अधिनियम के तहत जब्त कर लिया गया तथा तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। बयान में आगे कहा गया कि पिछले 15 दिनों के दौरान डीआरआई ने हनोई (वियतनाम) और बैंकॉक (थाईलैंड) से आने वाले तीन यात्रियों को हैदराबाद और बेंगलुरु हवाईअड्डों पर पकड़ा। इन यात्रियों के पास से कुल मिलाकर लगभग 24.6 किलोग्राम उच्च क्षमता वाली कैनबिस बरामद की गई। अधिकारियों ने मादक पदार्थ जब्त कर आगे की जांच शुरू कर दी है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, हालिया कार्रवाई देशभर में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है। डीआरआई ने कहा कि अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क पर नजर रखी जा रही है और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
यूक्रेन पर रूसी हमले जारी, रिहायशी इमारत पर ड्रोन से किया हमला, दो की मौत

कीव। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने बताया कि बुधवार सुबह कीव में एक रूसी ड्रोन ने रिहायशी इमारत को निशाना बनाया, जिसमें 4 लोग घायल हुए। वहीं ओडेसा में मोल्दोवा सीमा पर स्थित अंतरराष्ट्रीय चौकी पर रातभर हुए हमले में दो लोगों की मौत और तीन घायल हुए हैं। जेलेंस्की ने कहा कि रूस रोजाना हमले कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया बेहद कम है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट पर हमले की जानकारी साझा की। जेलेंस्की ने पोस्ट में लिखा, ”आज सुबह कीव में एक रूसी ड्रोन ने एक रिहायशी बहुमंजिला इमारत को निशाना बनाया। इस हमले में चार लोग घायल हो गए। हमेशा की तरह, हमारे बचावकर्मी तुरंत मौके पर पहुंचे और अब आग पर काबू पा लिया गया है।” उन्होंने बताया कि रातभर ओडेसा ओब्लास्ट में मोल्दोवा की सीमा पर स्थित अंतरराष्ट्रीय सीमा चौकी ‘स्टारोकोजाचे’ पर हमला किया गया। वहां का संचालन फिलहाल रोक दिया गया है। दुर्भाग्य से इस हमले में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य घायल हो गए। बचावकर्मियों ने 16 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। मैं उन लोगों के परिवारों और प्रियजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं जिन्होंने अपनी जान गंवाई है। यूक्रेनी राष्ट्रपति ने बताया कि रूस के हमलों के बाद निप्रो, मायकोलाइव, जापोरिज्जिया, खार्किव ओब्लास्ट, जाइटॉमिर ओब्लास्ट और कीव ओब्लास्ट में भी नुकसान की स्थिति से निपटने का काम जारी है। जेलेंस्की ने कहा कि दुर्भाग्य से, इन हमलों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया बहुत कम रही है, जबकि ये हमले लगभग हर दिन लोगों की जान ले रहे हैं। इसका जवाब दिया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस आक्रामकता को यहीं और अभी रोकना होगा, ताकि यह और आगे न फैले। मॉस्को को यह नहीं सोचना चाहिए कि मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए आतंक फैलाने पर उसे कोई सजा या परिणाम नहीं भुगतने पड़ेंगे। राष्ट्रपति ने कहा कि जो सहयोगी देश मदद कर सकते हैं, उन्हें अच्छी तरह पता है कि हर दिन किस तरह की सहायता की जरूरत है। और जो भी लोग अपनी क्षमता के अनुसार हमारी मदद कर रहे हैं, मैं उन सभी का दिल से धन्यवाद करता हूं।
एवीसी मेंस वॉलीबॉल एशियन चैंपियनशिप: ओमान पर बहरीन की जीत से भारत को मिला क्वार्टर फाइनल का टिकट

फुकुओका (जापान)। भारत एवीसी मेंस वॉलीबॉल एशियन चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल में पहुंच गया है। भारतीय टीम पूल में तीसरे स्थान पर रहने वाली दो सबसे अच्छी रैंकिंग वाली टीमों में से एक के तौर पर आगे बढ़ी है। बुधवार को ओमान पर बहरीन की 3-0 से जीत ने भारत की अंतिम आठ में जगह पक्की कर दी। 2019 के बाद से भारत इस महाद्वीपीय टूर्नामेंट में पहली बार क्वार्टर फाइनल में पहुंचा है। फुकुओका में हो रहा यह टूर्नामेंट लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक खेलों और 2027 एफआईवीबी मेेंस वॉलीबॉल वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफिकेशन इवेंट है।भारत ने मंगलवार को एवीसी मेंस वॉलीबॉल एशियन चैंपियनशिप में अपनी पहली जीत दर्ज की, जिससे क्वार्टर फाइनल में बची हुई आखिरी जगह पाने की उनकी उम्मीदें बनी रहीं। मंगलवार के शुरुआती मैच में, भारत ने पूल बी में तीसरे स्थान के लिए हुए निर्णायक मुकाबले में न्यूजीलैंड को 3-0 (25-22, 25-18, 25-21) से हराया। इस जीत से भारतीय टीम पूल में तीसरे स्थान पर रहने वाली दो सबसे अच्छी रैंकिंग वाली टीमों में से एक के तौर पर क्वार्टर फाइनल की दौड़ में बनी रही। भारत के ऑपोजिट और कप्तान जेरोम विनिथ चार्ल्स ने टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई और मैच में सबसे ज्यादा 19 प्वाइंट हासिल किए, जिसमें दो ‘किल ब्लॉक’ भी शामिल थे। आउटसाइड हिटर चिराग यादव (तीन ऐस, एक ब्लॉक) और अमित बलवान सिंह (दो ब्लॉक) ने क्रमशः 14 और 13 प्वाइंट जोड़े। क्वार्टर फाइनल के लिए भारत का क्वालिफिकेशन पूल ए की दो अन्य टीमों ओमान और बहरीन के बीच बुधवार को होने वाले मैच के नतीजे पर निर्भर था। स्थिति यह थी कि अगर ओमान बहरीन के खिलाफ तीन प्वाइंट हासिल कर लेता, तो वह क्वार्टर फाइनल की दौड़ में भारत से आगे निकल जाता। बहरीन की ओमान पर जीत से वह और भारत प्वाइंट अनुपात (प्वाइंट रेश्यो) की स्थिति में आ जाते। बाकी सभी स्थितियों में भारत अंतिम आठ में जगह बना लेता। जापान ने ऑस्ट्रेलिया को 3-0 (25-20, 25-13, 25-21) से हराकर बिना कोई मैच हारे पूल में शीर्ष स्थान हासिल किया, जबकि ऑस्ट्रेलिया 2-1 के जीत-हार रिकॉर्ड के साथ दूसरे स्थान पर रहा। दोनों टीमें पहले ही क्वार्टर फाइनल के लिए क्वालिफाई कर चुकी थीं।
जीएमसीएच-चंडीगढ़ में प्रोजेक्ट नर्स सहित कई पदों पर नौकरी का अवसर, 14 सितंबर अंतिम तिथि

चंडीगढ़। देश के किसी प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में नौकरी करने की इच्छा रखने वाले युवाओं के लिए एक शानदार मौका सामने आया है। दरअसल, सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल (जीएमसीएच), चंडीगढ़ ने प्रोजेक्ट नर्स सहित विभिन्न 9 पदों पर योग्य और इच्छुक उम्मीदवारों की नियुक्ति के लिए एक आधिकारिक अधिसूचना जारी करके आवेदन मांगे हैं। जीएमसीएच-चंडीगढ़ की ओर से जारी 9 रिक्तियों में प्रोजेक्ट टेक्निकल सपोर्ट-III का 1, प्रोजेक्ट नर्स-III (भर्ती) के 6, प्रोजेक्ट नर्स-III (फ़ॉलो-अप) का 1 और प्रोजेक्ट नर्स-III (क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट) का 1 पद शामिल हैं। इन सभी पोस्ट के लिए ऑफलाइन माध्यम से आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है और अप्लाई करने की अंतिम तिथि 14 सितंबर तक तय की गई है। ऐसे में एप्लीकेशन फॉर्म भरने के इच्छुक उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे तय अंतिम तिथि की शाम 5 बजे तक या उससे पहले अपनी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर लें। आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय से पद से संबंधित क्षेत्र के अनुसार फुल-टाइम ग्रेजुएट/डिप्लोमा/पीजी होनी चाहिए। वहीं, सभी पोस्ट के लिए आवेदकों की अधिकतम आयु 35 वर्ष तय की गई है। हालांकि, आरक्षित श्रेणी से आने वाले कैंडिडेट्स को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी। योग्य अभ्यर्थियों का चयन योग्यता और अनुभव के आधार पर शॉर्टलिस्टिंग, स्क्रीनिंग परीक्षा (जरूरत पड़ने पर), बातचीत और/या इंटरव्यू के आधार पर किया जाएगा, जिसके बाद चयनित कैंडिडेट्स की सैलरी सभी पदों के लिए 33,600 रुपए प्रति माह होगी। आवेदन करने के लिए उम्मीदवार सबसे पहले जीएमसीएच-चंडीगढ़ की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। होमपेज पर जाने के बाद संबंधित पोस्ट के लिए जारी अधिसूचना लिंक पर क्लिक करें। इसके बाद नोटिफिकेशन में दिए गए एप्लीकेशन फॉर्म को डाउनलोड कर उसका प्रिंट आउट निकाल लें। फिर फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारियों को दर्ज करें। सभी संबंधित डॉक्यूमेंट्स को आवेदन के साथ अटैच करें। इसके बाद सभी को एक लिफाफे में डालकर डाक के माध्यम से ‘नियोनेटोलॉजी विभाग, लेवल-4, ब्लॉक डी,सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल, सेक्टर 32, चंडीगढ़’ पते पर तय समय सीमा के अंदर पहुंचा दें। कैंडिडेट्स ध्यान दें कि उम्मीदवारों के चयन का शेड्यूल, शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों की सूची और सभी नतीजे जीएमसीएच की वेबसाइट पर पब्लिश किए जाएंगे। किसी को भी फोन या ईमेल से कोई व्यक्तिगत सूचना नहीं भेजी जाएगी। वहीं, जीएमसीएच-चंडीगढ़ की ओर इन पदों पर शुरुआती नियुक्ति छह महीने के लिए होगी, जिसे उम्मीदवारों की संतोषजनक प्रदर्शन, फंड की उपलब्धता और प्रोजेक्ट की जरूरतों के आधार पर और बढ़ाया जा सकता है। इसी के साथ यह नियुक्ति अस्थायी आधार पर होगी और प्रोजेक्ट के साथ ही समाप्त हो जाएगी।
बागेश्वर बाबा के खिलाफ कांग्रेस की शिकायत पर सियासी घमासान, भाजपा ने किया पलटवार

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन और उसकी बिक्री पर रोक लगाने की अपील को लेकर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री विवादों में घिर गए हैं। उनके इस बयान के बाद पश्चिम बंगाल कांग्रेस ने उनके खिलाफ कोलकाता के भवानीपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई है। कांग्रेस की इस शिकायत के बाद अब इस मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है और भाजपा नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पटना में बिहार सरकार के मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने कांग्रेस की शिकायत पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, “कांग्रेस को देश विरोधी काम करने में आनंद आता है। देश के संत-महात्माओं को अपमानित करने में आनंद आता है। भारतीय संस्कृति का अपमान करने में आनंद आता है। जहां भी देशभक्ति की बात होती है, उन्हें दिक्कत होती है।” चंद्रवंशी ने कहा कि बाबा बागेश्वर ने तो सिर्फ मां दुर्गा की पूजा की पवित्रता बनाए रखने की बात कही थी, इसमें गलत क्या है। कांग्रेस तुष्टिकरण के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। पश्चिम बंगाल के जगतदल में मंत्री अर्जुन सिंह ने भी कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने कहा, “जहां तक कांग्रेस की बात है, उन्होंने तो उन संतों और साधुओं पर भी गोलियां चलवाई थीं जो गोहत्या के विरोध में प्रदर्शन करने गए थे। इसलिए, कांग्रेस को छोड़िए। उनके लिए हम बस इतना ही कह सकते हैं: भगवान उन्हें सद्बुद्धि दे।” रांची में बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने कहा, “बाबा बागेश्वर के साथ कांग्रेस का हमेशा से प्यार-नफरत वाला रिश्ता रहा है। वे एक बाबा हैं। जब भी किसी सनातनी बाबा की बात आती है, तो कांग्रेस का इतिहास हमेशा ऐसा ही रहा है।” प्रतुल शाह देव ने कहा, “जब चंद्रास्वामी जैसे चमत्कारी बाबा होते थे, तो वे सरकारें चलाते थे। कांग्रेस के शासनकाल में सनातन धर्म की प्रमुख हस्तियों, जिनमें बाबा और धार्मिक गुरु शामिल हैं, को लगातार निशाना बनाया गया है। क्या कांग्रेस में इतनी हिम्मत है कि वह किसी मुस्लिम धार्मिक नेता के बारे में भी वही बात कहे जो वह बाबा बागेश्वर के बारे में कह रही है।” उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सनातन धर्म को निशाना बनाकर वोट बैंक की राजनीति कर रही है लेकिन जनता सब देख रही है।
राहुल गांधी पर मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट का जल्द सुनवाई से इनकार, सीजेआई बोले-हमारे सामने सब बराबर

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में जल्द सुनवाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इंकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे सामने सब बराबर हैं। सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता को मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन दाखिल करने को कहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने भरोसा दिया कि आवेदन मिलने के बाद उस पर विचार किया जाएगा। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि राहुल गांधी इस मामले में कोई वीआईपी नहीं हैं और उनकी अपील करीब पांच महीने से सुनवाई के लिए लंबित है। उन्होंने कहा कि मामला कई बार सूची में आया लेकिन किसी कारण से सुनवाई नहीं हो सकी। गौरव भाटिया ने दलील दी कि बार-बार मामले की सुनवाई टलना संस्थान के लिए भी उचित नहीं है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मामले में तय प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। आवेदन मिलने के बाद वह उस पर विचार करेगा। बता दें कि यह मामला दिसंबर 2022 में राहुल गांधी की ओर से दिए गए एक बयान से जुड़ा है। भारत-चीन सीमा पर हुई झड़प को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने दावा किया था कि चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना के जवानों को पीट रहे हैं। उनके इस बयान पर बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के पूर्व डायरेक्टर उदय शंकर श्रीवास्तव ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी का बयान भारतीय सेना के लिए अपमानजनक है और इससे सेना की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। इसी मामले में लखनऊ की अदालत ने राहुल गांधी को पेश होने के लिए समन जारी किया था। समन को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने पहले मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाई थी।
जम्मू-कश्मीर के स्वास्थ्य मंत्री से आश्वासन मिलने के बाद मेडिकल इंटर्न ने हड़ताल खत्म की

श्रीनगर। जम्मू और कश्मीर की स्वास्थ्य मंत्री सकीना इत्तू से स्टाइपेंड में 30 दिनों के अंदर बदलाव का भरोसा मिलने के बाद मेडिकल इंटर्न 9 दिन बाद बुधवार को अपनी ड्यूटी पर लौट आए। सरकार के साथ बातचीत में गतिरोध इसलिए पैदा हुआ था, क्योंकि मेडिकल इंटर्न मांग कर रहे थे कि सरकार उन्हें औपचारिक आश्वासन दे। सकीना इत्तू ने मंगलवार शाम को विरोध कर रहे मेडिकल इंटर्न के प्रतिनिधियों को बातचीत के एक नए दौर के लिए बुलाया। बैठक के बाद यह तय हुआ कि सरकार, स्टाइपेंड बढ़ाने वाली समिति की सिफारिशों के अनुसार, 30 दिनों के भीतर इंटर्न के स्टाइपेंड में संशोधन करेगी। स्वास्थ्य मंत्री के साथ हुई इस बैठक में मेडिकल इंटर्न के प्रतिनिधियों, गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के प्रिंसिपल और कश्मीर के डायरेक्टर हेल्थ सर्विसेज का प्रतिनिधित्व करने वाले डिप्टी डायरेक्टर (प्लानिंग) शामिल हुए। जम्मू-कश्मीर के एमबीबीएस और बीडीएस इंटर्न ने अपनी हड़ताल खत्म करने का फैसला तब किया जब सरकार ने “लिखित” आश्वासन दिया कि स्टाइपेंड का मुद्दा एक महीने के भीतर सुलझा लिया जाएगा। इस आश्वासन के बाद इंटर्न ने अपनी हड़ताल खत्म कर दी और काम पर लौट आए। श्रीनगर में बेमिना मेडिकल कॉलेज के बाहर भूख हड़ताल पर बैठे मेडिकल इंटर्न ने भी अपना अनशन खत्म कर दिया और काम पर लौटने का फैसला किया। मेडिकल इंटर्न अपने मासिक स्टाइपेंड को 12,300 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये करने की मांग कर रहे थे। विरोध कर रहे इंटर्न का तर्क था कि रहने-सहने का खर्च कई गुना बढ़ जाने के बावजूद स्टाइपेंड 2019 से उतना ही बना हुआ था। मेडिकल इंटर्न इमरजेंसी, ओपीडी, ऑपरेशन थिएटर में काम करते हैं और अस्पताल में भर्ती मरीजों की देखभाल करते हैं। वे जम्मू-कश्मीर में हेल्थकेयर सिस्टम का एक अहम हिस्सा हैं। सीनियर डॉक्टरों ने मेडिकल इंटर्न की मांग का समर्थन किया था। डॉक्टर्स एसोसिएशन कश्मीर (डीएके), जम्मू-कश्मीर डॉक्टर्स कोऑर्डिनेशन कमेटी (जेकीडीसीसी) जैसे संगठनों और राजनीतिक हस्तियों ने लंबे समय तक काम करने और रहने-सहने के बढ़ते खर्च का हवाला देते हुए इस आंदोलन का समर्थन किया।