जापान की पिच स्पिनरों के लिए मददगार हो सकती है: वरुण चक्रवर्ती

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम जापान में होने वाले एशियन गेम्स 2026 में हिस्सा लेने के लिए तैयार है। टीम इंडिया के स्टार स्पिनर वरुण चक्रवर्ती ने कहा है कि स्पिनर एशियन गेम्स में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि मौसम के बदलते हालात ही तय करेंगे कि टूर्नामेंट के दौरान पिचें कैसा बर्ताव करेंगी। एएसआईसीएस इंडिया की तरफ से आईएएनएस के साथ एक खास बातचीत में चक्रवर्ती ने कहा, “हर मैच और हर टूर्नामेंट के लिए तैयारी की जरूरी होती है। हमें वो करना ही होगा। यह हर दूसरे टूर्नामेंट की तरह ही है। हम अच्छी तैयारी करेंगे और जो भी हमारे रास्ते में आएगा, हम उसे हराएंगे। गेंदबाजी यूनिट को वहां की स्थिति के मुताबिक ढलना होगा।” उन्होंने कहा, “मैंने देखा है कि पिचें थोड़ी कम तैयार हो सकती हैं। इसलिए स्पिन को मदद मिल सकती है। मुझे नहीं पता कि जापान का मौसम पिचों के बर्ताव पर क्या असर डालेगा। हम बस हर तरह के हालात का सामना करने की तैयारी कर रहे हैं।” टी20 विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे चक्रवर्ती ने कहा, “अब तक का सफर बहुत अच्छा रहा है। हमने इस बार वर्ल्ड कप जीता। मेरी चोट की वजह से मुझे दिक्कत हुई थी, लेकिन मैं वापस आ गया हूं और ज्यादा फिट महसूस कर रहा हूं। मैंने बहुत सारी स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और रनिंग की है। इसका श्रेय सीओई को जाता है। यहां मैंने बहुत ट्रेनिंग की है।” उन्होंने कहा, “मैंने क्रिकेट बहुत देर से शुरू किया। 28 साल की उम्र में इंडिया के लिए खेला। मैं बहुत देर से आया हूं। अभी क्रिकेट में सात से आठ साल हो गए हैं और मैं कहूंगा कि मैं अपने करियर के पहले हाफ में हूं। अभी बहुत लंबा रास्ता तय करना है और अब तक यह एक अलग तरह का सफर रहा है और मुझे लगता है कि यह और भी ऐसा ही होने वाला है।” अपनी कला को बेहतर बनाने के बारे में बात करते हुए, चक्रवर्ती ने बताया कि वह पर्दे के पीछे लगातार नए वेरिएशन जोड़ने पर काम करते हैं, लेकिन अपने मौजूदा स्किल सेट को बेहतर बनाना उनका मुख्य मकसद है। अपनी मिस्ट्री गेंदों को हाई-टेक कैमरों और तकनीकी विश्लेषकों से बचाने के सवाल पर चक्रवर्ती ने कहा, “दबाव में गेंदों को सही जगह डालना तकनीक से ज्यादा जरूरी है। अब कोई सीक्रेट नहीं है क्योंकि हर जगह बहुत सारे वीडियो विश्लेषक हैं। आप जो कुछ भी करते हैं वह रिकॉर्ड हो रहा है।” उन्होंने कहा, “क्रिकेट में बस एक ही चीज है, वह है ह्यूमन टच, जहां बल्लेबाज को पता नहीं होता कि मैं उन्हें क्या गेंद डालने वाला हूं। यह मुझे तय करना होता है। मुझे नहीं लगता कि कोई एआई या वीडियो विश्लेषक इसका अंदाजा लगा सकता है। हमें इसी के साथ खेलना होगा।” करियर के लक्ष्यों से जुड़े सवाल पर वरुण ने कहा, “मैं लंबी अवधि के बजाय कम अवधि के गोल सेट करता हूं क्योंकि मुझे नहीं लगता कि मैं पांच साल बाद की योजना बना पाऊंगा। मैं अगले छह महीनों में जो करना चाहता हूं उसकी योजना ही बना पाऊंगा। मैं शॉर्ट-टर्म गोल पर ज्यादा फोकस करता हूं।
पितृपक्ष 2026 कब से शुरू होगा? जानिए पूरी श्राद्ध तिथियां और धार्मिक मान्यताएं

नई दिल्ली। सनातन धर्म में पितृपक्ष पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता और श्रद्धा प्रकट करने का 16 दिनों का एक पवित्र काल है। इस अवधि में पितरों की आत्मा की शांति के लिए मुख्य रूप से तर्पण, श्राद्ध और पिंड दान किया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इन दिनों पितर पृथ्वी लोक पर आते हैं और अपने वंशजों से अन्न व जल ग्रहण करने की कामना रखते हैं। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से पितृपक्ष की शुरुआत होती है। इस अवधि को श्राद्ध पक्ष भी कहते हैं। इस दौरान पितरों की आत्मशांति और तृप्ति के लिए घरों में श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। इस दौरान पिंडदान का भी विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, विधि-विधान से पिंडदान और श्राद्ध कर्म करने से पितृदोष से मुक्ति मिल जाती है। पंचांग के अनुसार, इस साल पितृपक्ष की शुरुआत 26 सितंबर, शनिवार से हो रही है। पितृ पक्ष का समापन 10 अक्टूबर, शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या के दिन होगा। 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध, 27 को प्रतिपदा श्राद्ध, 28 को द्वितीया श्राद्ध, 29 को तृतीया श्राद्ध, 30 को चतुर्थी और पंचमी श्राद्ध होगा। वहीं, अक्टूबर में 1 तारीख को षष्ठी श्राद्ध, 2 को सप्तमी श्राद्ध, 3 को अष्टमी श्राद्ध, 4 को नवमी श्राद्ध, 5 को दशमी श्राद्ध, 6 को एकादशी श्राद्ध, 7 को द्वादशी श्राद्ध, 8 त्रयोदशी श्राद्ध और 9 को चतुर्दशी श्राद्ध होगा। 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या पितृ पक्ष का आखिरी दिन होगा। इस दिन सर्वपितृ अमावस्या या महालय अमावस्या रहेगी। जिन पितरों की श्राद्ध तिथि मालूम नहीं है, उनके लिए इस दिन श्राद्ध करने की परंपरा है। किसी कारण से तय तिथि पर श्राद्ध नहीं हो पाया हो, तब भी सर्वपितृ अमावस्या का दिन महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता के अनुसार, जिस तिथि को किसी व्यक्ति का निधन हुआ हो, उसी तिथि में पितृ पक्ष के दौरान उसका श्राद्ध किया जाता है। इसलिए केवल अंग्रेजी कैलेंडर की तारीख देखकर श्राद्ध की तिथि तय नहीं की जाती। हिंदू तिथि को देखा जाता है। अगर किसी परिजन की मृत्यु की तिथि पता नहीं है, श्राद्ध का समय और विधि स्थानीय पंचांग और परिवार की परंपरा के अनुसार तय करना उचित माना जाता है। श्रद्धा और श्रद्धा के साथ संपन्न संपूर्ण अनुष्ठान में संकल्प, तर्पण, पिंडदान, सात्विक भोजन पकाना और अर्पित करना, गाय, कौवे और कुत्ते के लिए अलग रखा गया भाग और दान शामिल हैं। पितृ पक्ष के दौरान अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और तृप्ति के लिए जल में काले तिल, जौ और कुशा घास मिलाकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों को तर्पण दिया जाता है। इसके अलावा पूर्वजों की मृत्यु तिथि पर पिंडदान किया जाता है।
चुप्पी नहीं, संवेदनशील बातचीत जरूरी! आत्महत्या रोकथाम पर बदलें अपना नजरिया

नई दिल्ली। कई बार इंसान बाहर से बिल्कुल सामान्य नजर आता है, लेकिन उसके भीतर क्या चल रहा है, यह किसी को पता नहीं होता। उस मुस्कुराते चेहरे के पीछे चिंता, अकेलापन, निराशा या गहरा भावनात्मक दर्द छिपा हो सकता है। ऐसे में किसी की परेशानी को नजरअंदाज करने के बजाय उसकी बात सुनना और उसे समझने की कोशिश करना बेहद जरूरी है। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस का संदेश भी यही है कि चुप्पी नहीं, बातचीत बदलाव की शुरुआत हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की मानें तो हर साल दुनिया में 7.2 लाख से ज्यादा लोग आत्महत्या के कारण अपनी जान गंवाते हैं। हर एक मौत सिर्फ एक व्यक्ति को नहीं खोती, बल्कि परिवार, दोस्तों, सहकर्मियों और पूरे समुदाय पर गहरा भावनात्मक और सामाजिक असर छोड़ती है। इसका आर्थिक प्रभाव भी पड़ता है। इसलिए आत्महत्या को केवल व्यक्तिगत समस्या मानने के बजाय इसे एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में समझना जरूरी है। साल 2026 में “आत्महत्या के बारे में सोच बदलना” थीम का तीसरा और अंतिम वर्ष है। इसका उद्देश्य है कि आत्महत्या को लेकर बने डर, गलत धारणाओं और सामाजिक कलंक को कम किया जाए। किसी व्यक्ति के मानसिक संघर्ष को कमजोरी समझने के बजाय संवेदनशीलता से देखा जाए और उसे मदद लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। अक्सर लोग यह सोचकर चुप रह जाते हैं कि कहीं आत्महत्या जैसे विषय पर बात करने से स्थिति और खराब न हो जाए। लेकिन जरूरत इस बात की है कि ऐसे विषयों पर बिना जज किए, शांत और संवेदनशील तरीके से बातचीत की जाए। अगर कोई व्यक्ति लगातार निराश दिखाई दे, खुद को लोगों से अलग करने लगे, व्यवहार में अचानक बदलाव आए या जीवन को लेकर बहुत नकारात्मक बातें करे, तो उसकी बात को गंभीरता से लेना चाहिए। हर संकेत का मतलब एक जैसा नहीं होता, लेकिन परेशान व्यक्ति तक पहुंचने और उसकी बात सुनने में देर नहीं करनी चाहिए। यह भी समझना जरूरी है कि आत्महत्या के पीछे केवल मानसिक बीमारी ही जिम्मेदार नहीं होती। कई बार व्यक्तिगत संकट, सामाजिक परिस्थितियां, आर्थिक परेशानी, रिश्तों में तनाव, अकेलापन और दूसरी परिस्थितियां भी किसी व्यक्ति की मानसिक स्थिति को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए समाधान भी सिर्फ एक स्तर पर नहीं, बल्कि परिवार, समाज, स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकार- सभी की साझा जिम्मेदारी से संभव है। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस की शुरुआत वर्ष 2003 में आत्महत्या रोकथाम के लिए अंतर्राष्ट्रीय संघ ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के साथ मिलकर की थी। हर साल 10 सितंबर को दुनिया भर में इस दिन के जरिए आत्महत्या की रोकथाम के लिए जागरूकता बढ़ाई जाती है और यह संदेश दिया जाता है कि आत्महत्याओं को रोकने के लिए मिलकर प्रयास किए जा सकते हैं।
टीबी के खिलाफ जंग तेज, डब्ल्यूएचओ के साउथ-ईस्ट एशिया क्षेत्र के देशों ने मिलकर उठाए ठोस कदम

नई दिल्ली। डब्ल्यूएचओ के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के सदस्य देशों ने बुधवार टीबी को खत्म करने के लिए एक ठोस कदम उठाया है, जिसके तहत बीमारी की जल्द पहचान, रोकथाम और इलाज की बेहतर सुविधा, परिवारों के लिए आर्थिक मदद और नई टीबी वैक्सीन की तैयारियों पर जोर दिया जाएगा। डब्ल्यूएचओ के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के प्रभारी अधिकारी डॉ. नीलेश बुद्धा ने डब्ल्यूएचओ क्षेत्रीय समिति के 79वें सत्र में कहा, “टीबी का इलाज संभव है और इसे रोका भी जा सकता है, फिर भी हमारे क्षेत्र में हर साल लाखों लोगों की जान इससे चली जाती है और कई परिवार गरीबी में चले जाते हैं। हमारे पास इसे बदलने के साधन हैं। जरूरत इस बात की है कि ये साधन जरूरतमंद हर व्यक्ति तक समय पर, बराबरी से और अच्छी प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा के तहत पहुंचें।” डब्ल्यूएचओ के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में दुनिया की लगभग एक चौथाई आबादी रहती है लेकिन साल 2024 में दुनिया में टीबी के कुल नए मामलों में से लगभग 34 प्रतिशत मामले यहीं से थे। अनुमान है कि यहां करीब 36.8 लाख नए मामले सामने आए और लगभग 4.33 लाख लोगों की मौत हुई हैं। करीब 1.5 लाख लोगों में मल्टीड्रग और रिफाम्पिसिन-रेजिस्टेंट टीबी पाई गई, जो दुनिया के कुल मामलों का 38 प्रतिशत से ज्यादा है। देशों ने इस बात पर सहमति जताई है कि टीबी के मरीजों की जल्द और पूरी तरह से पहचान के लिए नियमित स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाएगा, ज्यादा जोखिम वाले और वंचित लोगों की व्यवस्थित जांच और सक्रिय रूप से मरीजों की खोज की जाएगी। इसके साथ ही डब्ल्यूएचओ द्वारा सुझाई गई तेज जांच तकनीकों, जैसे मॉलिक्यूलर टेस्ट और डिजिटल तकनीक का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने टीबी केयर को ज्यादा लोगों पर केंद्रित बनाने का भी वादा किया, जिसमें ड्रग-रेसिस्टेंट टीबी के लिए बेहतर क्वालिटी का इलाज, न्यूट्रिशन और कम्युनिटी-बेस्ड सपोर्ट और लोगों को केयर पाने से रोकने वाली सामाजिक, फाइनेंशियल, ज्योग्राफिक और दूसरी रुकावटों को दूर करने के लिए पूरी कार्रवाई शामिल है। रोकथाम को मजबूत करने के लिए घर में टीबी मरीज के संपर्क में आए लोगों और ज्यादा जोखिम वाले लोगों को टीबी से बचाव का इलाज मुहैया कराय जाएगा, संक्रमण की रोकथाम को बेहतर किया जाएगा और कुपोषण, डायबिटीज और तंबाकू के सेवन जैसे बड़े कारणों पर भी ध्यान दिया जाएगा। क्षेत्रीय मॉडल के अनुसार, टीबी के मामलों और मौतों में सबसे ज्यादा कमी तक आ सकती है, जब बेहतर इलाज और सरकारी-निजी भागीदारी, तेज जांच, लक्षित रोकथाम, ज्यादा जोखिम वाले लोगों में सक्रिय जांच और टीबी वैक्सीन का इस्तेमाल एक साथ किया जाए। इसलिए वैक्सीन लाने की तैयारी बहुत जरूरी है। 2015 के बाद से इस क्षेत्र में अच्छी प्रगति हुई है। अब इलाज की पहुंच 85 प्रतिशत से ज्यादा हो गई है और इलाज में सफलता की दर डब्लयूएचओ के सभी क्षेत्रों में सबसे ज्यादा है। नए टीबी मामलों की दर में 16 प्रतिशत की कमी आई है, जो वैश्विक औसत 12 प्रतिशत से ज्यादा है और टीबी से होने वाली मौतों में 23 प्रतिशत की गिरावट आई है लेकिन ये सुधार अभी 2030 तक एंड टीबी स्ट्रेटजी के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए काफी नहीं हैं। इसके तहत 2015 की तुलना में टीबी के मामलों में 80 प्रतिशत और मौतों में 90 प्रतिशत तक कमी लाना है। टीबी जैसी बीमारी का बोझ पूरे परिवारों पर आर्थिक रूप से भी भारी देखने को मिलता है। लगभग 44 प्रतिशत टीबी प्रभावित परिवारों को भारी खर्च का सामना करना पड़ रहा है और दवा-प्रतिरोधी टीबी से पीड़ित परिवारों में यह आंकड़ा 80 प्रतिशत से भी ज्यादा है। टीबी के लिए मिलने वाली आर्थिक मदद जरूरत से बहुत कम है। साल 2024 में क्षेत्र में टीबी से निपटने के लिए लगभग 90 करोड़ अमेरिकी डॉलर उपलब्ध थे, जबकि जरूरत करीब 300 करोड़ डॉलर की है। यह समझते हुए कि टीबी को खत्म करने के लिए सिर्फ स्वास्थ्य क्षेत्र ही नहीं बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी काम करना होगा, देशों ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा और सभी के लिए स्वास्थ्य कवरेज के अंदर टीबी सेवाओं को और बेहतर तरीके से जोड़ने पर जोर दिया है। टीबी के लिए फाइनेंसिंग अभी भी अनुमानित जरूरत से काफी कम है, इसलिए सदस्य देशों ने मजबूत घरेलू रिसोर्स जुटाने, उपलब्ध रिसोर्स का कुशल इस्तेमाल, पूल्ड प्रोक्योरमेंट और क्षेत्रीय सहयोग पर जोर दिया ताकि क्वालिटी-एश्योर्ड दवाओं, डायग्नोस्टिक्स और दूसरी ज़रूरी चीज़ों तक पहुँच बेहतर हो सके, खासकर उन देशों और हेल्थ सिस्टम के लिए जिनकी प्रोक्योरमेंट कैपेसिटी सीमित है। डब्ल्यूएचओ साउथ-ईस्ट एशिया रीजन के ऑफिसर-इन-चार्ज डॉ. नीलेश बुद्ध ने कहा, “टीबी को खत्म करने के लिए हेल्थ सिस्टम, कम्युनिटी सिस्टम और उससे भी आगे मजबूत क्षेत्रीय एकजुटता और एक्शन की जरूरत होगी। इक्विटी को सेंटर में रखकर, सस्टेनेबल रिस्पॉन्स में इन्वेस्ट करके, इनोवेशन को अपनाकर और यह पक्का करके कि कोई पीछे न छूटे, हम उन गैप को कम कर सकते हैं जो हमारे और 2030 तक टीबी को खत्म करने के लक्ष्य के बीच बने हुए हैं।
भारत की एफआईयू ने पीएमएलए के गैर-अनुपालन को लेकर 15 क्रिप्टो प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी किए

नई दिल्ली। भारत की फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (एफआईयू) ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के गैर-अनुपालन के लिए 15 वर्चुअल डिजिटल एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स को नोटिस जारी किए हैं। यह जानकारी बुधवार को जारी बयान में दी गई। वित्त मंत्रालय के अनुसार, एफआईयू-इंडिया के डायरेक्टर ने उन संस्थाओं के खिलाफ अनुपालन कार्रवाई के तहत ये नोटिस जारी किए हैं, जो जरूरी शर्तों को पूरा किए बिना काम कर रही थीं। इन संस्थाओं में वीक्स, ब्लोफिन, रेजोरेक्स, बिटयूनिक्स , डिजीफाइनेंस, टूबीट, एक्सटी.कॉम, लाटोकन, वू एक्स, पायनिक्स, चेंज नाउ, सिंपल स्वैप, फिक्स्डफ्लोट, व्हाइटबीआईटी और गार्डेरियन शामिल हैं। मंत्रालय ने बताया कि एफआईयू डायरेक्टर ने भारत के सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत नोडल ऑफिसर के तौर पर नोटिस जारी किए हैं। इन नोटिस में 15 संस्थाओं से जुड़े ऐप्स और यूआरएल को पब्लिक एक्सेस से हटाने के लिए कहा गया है। मंत्रालय ने आगे कहा कि ये प्लेटफॉर्म भारत के पीएमएलए से संबंधित नियमों का पालन किए बिना गैर-कानूनी तरीके से चल रहे थे। इसके अलावा, मार्च 2023 में वर्चुअल डिजिटल एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स को भारत के पीएमएलए और आतंकवाद के वित्तपोषण-रोधी ढांचे के दायरे में लाया गया था। भारत में काम करने वाले वीडीए सर्विस प्रोवाइडर्स (चाहे वे विदेशी हों या घरेलू) के लिए एफआईयू-इंडिया के साथ रिपोर्टिंग संस्थाओं के तौर पर रजिस्टर करना जरूरी है, अगर वे वर्चुअल डिजिटल एसेट्स को फिएट करेंसी के बदले एक्सचेंज करने, डिजिटल एसेट्स को ट्रांसफर करने या कस्टडी या एडमिनिस्ट्रेशन सर्विस देने जैसी गतिविधियां करते हैं। मंत्रालय ने कहा कि ये जिम्मेदारियां गतिविधियों पर आधारित हैं और ये तब भी लागू होती हैं, जब किसी कंपनी की भारत में कोई फिजिकल मौजूदगी न हो। इसके अलावा, रजिस्टर्ड वीडीए सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए पीएमएलए और उसके तहत बने नियमों के अनुसार रिपोर्टिंग, रिकॉर्ड रखने और दूसरी जिम्मेदारियों का पालन करना जरूरी है। साथ ही, वित्त मंत्रालय ने लोगों को यह भी चेतावनी दी कि क्रिप्टो प्रोडक्ट्स और नॉन-फंजिबल टोकन (एफएफटी) रेगुलेटेड नहीं हैं और इनमें बहुत ज्यादा जोखिम हो सकता है। मंत्रालय ने कहा, “ऐसे ट्रांजैक्शन से होने वाले किसी भी नुकसान के लिए कोई रेगुलेटरी उपाय नहीं है।
एनसी विधायक की कश्मीरी निवासियों के खिलाफ टिप्पणी की भाजपा और पीडीपी दोनों ने की आलोचना

श्रीनगर। सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक और पार्टी प्रवक्ता तनवीर सादिक की आपत्तिजनक टिप्पणी की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने कड़ी आलोचना की है। इस बयान को जम्मू और कश्मीर के सभी लोगों के लिए अपमानजनक माना जा रहा है। राष्ट्रीय कांग्रेस के संस्थापक शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की 44वीं पुण्यतिथि पर बोलते हुए तनवीर सादिक ने पत्रकारों से कहा था कि उनकी सरकार के सत्ता में आने से पहले कश्मीर के लोगों के पास पहनने के लिए एक जोड़ी पतलून तक नहीं थी। तनवीर ने मंगलवार को पत्रकारों से कहा था, “शेर-ए-कश्मीर (शेख मोहम्मद अब्दुल्ला) के सत्ता में आने से पहले पूरे इलाके में सिर्फ एक जोड़ी पतलून होती थी और लोग बारी-बारी से उसका इस्तेमाल करते थे।” भाजपा के प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने कहा कि ये टिप्पणियां अपमानजनक और बेहद निंदनीय थीं। अल्ताफ ठाकुर ने कहा, “उन्होंने हमारी संस्कृति, गरिमा और इतिहास के खिलाफ बात की है। यह बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।” उन्होंने कहा कि तनवीर सादिक ने जो कहा है, उसे किसी भी तरह से राजनीतिक बयान के रूप में नहीं लिया जा सकता है। उन्होंने आगे कहा, “यह सरासर अपमानजनक है। मेरा मानना है कि एनसी के प्रवक्ता को हमारे इतिहास, सूफी, संतों और विद्वानों के सदियों पुराने इतिहास की कोई जानकारी नहीं है।” ठाकुर ने कहा, “तनवीर सादिक को अपने शब्दों पर ध्यान देना चाहिए। आप केवल राजनीतिक बयान नहीं दे रहे हैं, आप कश्मीर के लोगों और उनकी विरासत का अपमान कर रहे हैं। इस तरह का अनादर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” भाजपा ने राष्ट्रीय कांग्रेस नेता से बयान वापस लेने और उस बयान के लिए सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की है। विपक्षी पीडीपी ने अपने एक्स हैंडल पर कहा, “क्या नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रवक्ता कश्मीरियों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों के लिए बिना शर्त माफी मांगेंगे?” तनवीर सादिक ने कश्मीर में उस अत्यधिक गरीबी का उल्लेख किया था, जो अनुपस्थित जमींदारी प्रथा के कारण पैदा हुई थी। उस दौर में, अनाज पैदा करने वाले किसानों को फसल का इतना हिस्सा भी नहीं मिल पाता था जिससे उनके परिवार का गुजारा हो सके। जब शेख 1947 में आजादी के बाद सत्ता में आए, तो उन्होंने भूमि जोतने संबंधी कानून पारित किए और इस तरह अनुपस्थित जमींदारी को समाप्त कर दिया।
लेबनान पर इजरायल का बढ़ता हमला निन्दनीय: यूएन महासचिव गुटेरेस

न्यूयॉर्क। दक्षिणी लेबनान में इजरायल के बढ़ते हमले और सैन्य अभियानों पर संयुक्त राष्ट्र ने फिक्र जाहिर की है। यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने बुधवार को इस पर दुख जताते हुए तेल अवीव से अपील की कि वो अपने ऑपरेशन पर विराम लगाए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एंटोनियो गुटेरेस ने लिखा, “मैं आम लोगों की मौत, लोगों को जगह खाली करने के आदेशों से होने वाली परेशानी और विस्थापन, तथा बड़े पैमाने पर हुई तबाही और बर्बादी के दृश्यों को देख दुखी हूं और इसकी निंदा करता हूं।” गुटेरेस ने “लड़ाई को तुरंत रोकने” की अपील करते हुए इजरायल से अपील की कि वो लेबनान के इलाके से अपनी सेना हटा ले। उन्होंने आगे लिखा, “ताकत का इस्तेमाल करने का अधिकार सिर्फ लेबनान की सरकार के पास होना चाहिए। मैं सभी पक्षों से अपील करता हूं कि वे लेबनान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करें।” आम नागरिकों और नागरिक ठिकानों की हर समय सुरक्षा की जानी चाहिए। वे हमले का लक्ष्य नहीं होना चाहिए और उन पर किए गए हमले स्वीकार्य नहीं हैं। शांति अपील करते हुए उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र हिंसा खत्म करने, नागरिकों की सुरक्षा करने और इस संघर्ष का स्थायी समाधान खोजने के प्रयासों में सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। पिछले काफी अरसे से हिज्बुल्लाह के खिलाफ एक्शन की बात करते हुए दक्षिणी लेबनान को इजरायल टारगेट करता आया है। वहीं, बुधवार को भी गोला बारूद से हमले की खबर आई है। इजरायली सेना ने नबातीह प्रांत के दक्षिणी लेबनानी कस्बों, कफर रेमन और कफर तेबनित पर तोपों से गोले दागे। लेबनान की नेशनल न्यूज एजेंसी के अनुसार, स्थानीय लोगों ने बिंत जबील जिले के हद्दाथा कस्बे में जोरदार धमाकों की जानकारी दी। अमेरिका की मध्यस्थता में हुए “युद्धविराम” के बावजूद, इजरायल रोजाना हमले कर रहा है और दक्षिण में उसका कब्जा भी बना हुआ है। दूसरी ओर ईरान भी लगातार कहता रहा है कि जब तक लेबनान पर इजरायली हमले नहीं रुकेंगे वो भी पीछे नहीं हटेगा।
भारत में मैन्युफैक्चरिंग लीजिंग में जबरदस्त उछाल, 2021 से 49 प्रतिशत की सीएजीआर दर्ज

नई दिल्ली। भारत का विनिर्माण क्षेत्र तेजी से विस्तार के दौर से गुजर रहा है और इसका सीधा असर औद्योगिक रियल एस्टेट बाजार पर दिखाई दे रहा है। वाणिज्यिक रियल एस्टेट सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनी जेएलएल की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2021 के बाद से भारत में सकल मैन्युफैक्चरिंग लीजिंग बढ़कर 6.9 करोड़ वर्ग फुट तक पहुंच गई है। इस दौरान क्षेत्र ने 49 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) दर्ज की है, जो देश में विनिर्माण गतिविधियों के तेजी से विस्तार को दर्शाती है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का विनिर्माण क्षेत्र एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है और वर्ष 2030 तक औद्योगिक रियल एस्टेट बाजार में मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़कर 40 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। इस तेजी के साथ विनिर्माण क्षेत्र अब थर्ड पार्टी लॉजिस्टिक्स (3पीएल) के बाद औद्योगिक परिसंपत्तियों का दूसरा सबसे बड़ा उपयोगकर्ता बन गया है। इसे भारत के औद्योगिक रियल एस्टेट ढांचे में एक महत्वपूर्ण संरचनात्मक बदलाव माना जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में सकल अवशोषण 1.92 करोड़ वर्ग फुट तक पहुंच गया था, जबकि 2026 की पहली छमाही में ही यह 1.02 करोड़ वर्ग फुट दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 19 प्रतिशत अधिक है। बढ़ती मांग यह संकेत देती है कि देश में विनिर्माण कंपनियां नए उत्पादन केंद्र और आधुनिक औद्योगिक सुविधाएं तेजी से स्थापित कर रही हैं। रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि वर्ष 2030 तक मैन्युफैक्चरिंग लीजिंग अवशोषण लगभग 4.6 करोड़ वर्ग फुट तक पहुंच सकता है। यह प्रवृत्ति भारत के वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने की दिशा में बढ़ते कदमों और विजन 2047 के लक्ष्यों के अनुरूप मानी जा रही है। जेएलएल इंडिया के औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक्स कारोबार के प्रबंध निदेशक योगेश शेवाड़े ने कहा कि विनिर्माण रियल एस्टेट क्षेत्र की वृद्धि दो अलग लेकिन एक-दूसरे की पूरक रणनीतियों के कारण हो रही है। एक ओर टियर-1 शहरों में निर्माता तेज बाजार पहुंच और कम पूंजीगत लागत की रणनीति के तहत तेजी से ग्रेड-ए औद्योगिक परिसंपत्तियों को लीज पर ले रहे हैं। वहीं दूसरी ओर टियर-2 शहरों में कंपनियां भूमि खरीदने को प्राथमिकता दे रही हैं ताकि उन्हें अधिक अनुकूलन और दीर्घकालिक परिचालन नियंत्रण मिल सके। उन्होंने कहा कि चाहे कंपनियां लीजिंग मॉडल अपनाएं या भूमि का स्वामित्व हासिल करें, दोनों ही स्थितियां भारत में विनिर्माण गतिविधियों के मजबूत विस्तार का संकेत हैं। इससे स्पष्ट होता है कि वैश्विक और घरेलू निर्माता भारत को अपने उत्पादन केंद्र के रूप में तेजी से चुन रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में कुल मैन्युफैक्चरिंग लीजिंग का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा ग्रेड-ए परिसंपत्तियों में दर्ज किया गया। यह दर्शाता है कि कंपनियां अब बेहतर गुणवत्ता वाले भवनों, उन्नत सुरक्षा मानकों, स्वच्छता प्रोटोकॉल और आधुनिक बुनियादी सुविधाओं से युक्त औद्योगिक परिसरों को प्राथमिकता दे रही हैं। इसके साथ ही कई उभरते औद्योगिक बाजारों में भी गतिविधियां तेज हुई हैं। लखनऊ, जयपुर, चंडीगढ़ ट्राइसिटी, भुवनेश्वर, गुवाहाटी, सूरत, नागपुर, नासिक, गोवा, इंदौर, संभाजीनगर, तूतीकोरिन, कोयंबटूर और विशाखापत्तनम जैसे लगभग 14 उभरते शहरों में निर्माता लीजिंग की बजाय भूमि खरीद को अधिक महत्व दे रहे हैं। यह विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय आवश्यकताओं और परिचालन रणनीतियों के अनुसार अपनाए जा रहे अलग-अलग कारोबारी मॉडलों को दर्शाता है।
सत्य निकेतन हादसा: इमारत गिरने के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश, एमसीडी अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप

नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में गिरी इमारत के बाद नगर निगम (एमसीडी) अधिकारियों ने बगल की बिल्डिंग को भी तोड़ने की कार्रवाई की है। हालांकि, इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों और छात्रों में अभी भी एमसीडी अधिकारियों के खिलाफ आक्रोश है। एक छात्रा ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि इस हादसे के बाद डर लगता है, क्योंकि यह घटना बड़ी थी। हमारी सरकार से यही मांग है कि सुरक्षा रखी जानी चाहिए। वहीं, एक छात्र ने कहा कि एमसीडी ने जो कार्रवाई अभी की है, उसके लिए पहले कदम उठाए जाने चाहिए थे। नोटिस एक महीने पहले दिया गया था, इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं की गई। हादसे के बाद ही एक्शन लिया जाता है। कुछ नेता उसको विवाद बनाकर राजनीति कर रहे हैं। छात्र ने एमसीडी अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के भी आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कुछ पैसों के चक्कर में छात्रों की जान से खिलवाड़ की जाती है। अभी एमसीडी कमिश्नर को अपना इस्तीफा दे देना चाहिए और पीजी माफियाओं पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। एक स्थानीय महिला ने कहा, “हमारा मानना है कि जितनी भी अवैध और जर्जर इमारतें हैं, उन्हें सील किया जाए और तोड़ा जाए। अन्यथा भविष्य में ऐसी घटनाएं फिर होंगी और बच्चे दबेंगे।” उन्होंने कहा कि हादसे के बाद कई बच्चे बेघर घूम रहे हैं। उनके पास खाना भी नहीं है। वे गुरुद्वारे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारी और नेता अपनी कुर्सियां बचा रहे हैं, इन बच्चों की कोई मदद नहीं कर रहा है। एक स्थानीय नागरिक ने कहा, “आज इन इमारतों को गिराया जा रहा है, लेकिन जब ये बनती हैं, तब कोई नहीं आता है। असलियत यह है कि कानून सिर्फ किताबों में सिमट कर रह गया है। अपनी जान बचाने के लिए अब एमसीडी के लोग सर्वे में लगे हुए हैं।” एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “जो जर्जर इमारतें हैं, उन्हें तोड़ा ही जाना चाहिए। फिलहाल, हमें बगल की इमारत को तोड़े जाने की जानकारी यहां पहुंचने के बाद मिली, क्योंकि वहां बैरिकेडिंग की गई है।
यूएस ओपन: बेन शेल्टन ने किया बड़ा उलटफेर, क्वार्टर फाइनल मुकाबले में अल्काराज को हराया

नई दिल्ली। बेन शेल्टन ने बुधवार को यूएस ओपन 2026 में बड़ा उलटफेर किया। रोमांच से भरे क्वार्टर फाइनल मुकाबले में शेल्टन ने मौजूदा चैंपियन कार्लोस अल्काराज को 6-7(5), 6-1, 6-3, 1-6, 7-6(10/7) से हराकर टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता दिखाया। शेल्टन ने चार घंटे 28 मिनट तक चले इस मुकाबले में अपने करियर की सबसे बड़ी जीत के साथ ही मेजर टूर्नामेंट्स में स्पेनिश खिलाड़ी की लगातार 18 जीत का सिलसिला भी तोड़ दिया। यह मैच यूएस ओपन के इतिहास का सबसे देर तक चलने वाला मुकाबला रहा। मैच के आखिर में बेन शेल्टन ने 146 मील प्रति घंटे की रफ्तार से ऐस सर्विस लगाकर अपनी जीत पक्की की। इससे पहले सबसे देर से खत्म होने वाले मैच का रिकॉर्ड कार्लोस अल्काराज के नाम था। दो साल पहले उन्होंने क्वार्टर फाइनल में यानिक सिनर को पांच सेटों के रोमांचक मुकाबले में हराया था। मॉन्ट्रियल में अपना दूसरा एटीपी मास्टर्स 1000 खिताब जीतने वाले बेन शेल्टन ने अल्काराज को हराकर पहली बार हार्ड कोर्ट मेजर टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में जगह बनाई है। कार्लोस अल्काराज चोट के कारण करीब चार महीने बाद किसी बड़े टूर्नामेंट में खेल रहे थे। इसके बावजूद उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया और क्वार्टर फाइनल तक पहुंचने के दौरान सिर्फ एक सेट गंवाया था। हालांकि, बेन शेल्टन ने उनका खिताब का बचाव करने का अभियान रोक दिया। अल्काराज इस बार अपना आठवां ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने और यूएस ओपन का खिताब लगातार दूसरी बार जीतने की कोशिश कर रहे थे। अगर वह ऐसा कर लेते, तो रोजर फेडरर के बाद यूएस ओपन ट्रॉफी सफलतापूर्वक बचाने वाले पहले पुरुष खिलाड़ी बन जाते। यह स्पेनिश खिलाड़ी अपना आठवां मेजर खिताब जीतने और रोजर फेडरर के बाद यूएस ओपन का खिताब बचाने वाले पहले पुरुष खिलाड़ी बनने की कोशिश कर रहा था। अल्काराज मेजर टूर्नामेंट्स में लगातार 18 जीत के सिलसिले के साथ क्वार्टर फाइनल मुकाबले में उतरे थे। यह उनका अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था, जिसमें 2025 यूएस ओपन की जीत और इस साल ऑस्ट्रेलियन ओपन का खिताब जीतना शामिल था। ऑस्ट्रेलियन ओपन जीतकर वे करियर ग्रैंड स्लैम पूरा करने वाले सबसे युवा पुरुष खिलाड़ी बने थे। शेल्टन अब सेमीफाइनल में 11वीं वरीयता प्राप्त फ्रांसिस टियाफो का सामना करेंगे। दोनों खिलाड़ी अपने पहले मेजर फाइनल में पहुंचने की कोशिश करेंगे। टियाफो के साथ मुक़ाबलों में शेल्टन 3-1 से आगे हैं। दोनों के बीच अब तक चार मुकाबले हुए हैं, जिनमें से दो यूएस ओपन के हार्ड कोर्ट पर खेले गए हैं। 2023 में क्वार्टर फाइनल मुकाबला शेल्टन ने जीता था, जबकि 2024 में तीसरे दौर के मुकाबले में टियाफो ने जीत दर्ज की थी।