यूपीएससी भर्ती 2026: साइंटिस्ट सहित 122 पदों पर आवेदन का मौका, अंतिम तिथि 22 सितंबर

नई दिल्ली। देश के लाखों युवा आज भी प्राइवेट सेक्टर की नौकरियों के मुकाबले सरकारी नौकरियों को प्राथमिकता देते हैं। अगर आप भी उन्हीं में से एक हैं, तो आपके लिए संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने विभिन्न मंत्रालयों में अलग-अलग कुल 122 पदों पर योग्य और इच्छुक उम्मीदवारों की नियुक्ति के लिए आवेदन मांगे हैं। इन पदों पर आवेदन की अंतिम तिथि 22 सितंबर तय की गई है। यूपीएससी की ओर से जिन मंत्रालयों में 122 पदों पर भर्ती निकाली गई है, उनमें भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, खान मंत्रालय में 111 और केंद्रीय भूजल बोर्ड, जल शक्ति मंत्रालय, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग में 16 पद शामिल हैं। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, खान मंत्रालय में जारी 111 रिक्तियों में भू-वैज्ञानिक (ग्रुप-ए) के 29, रसायनज्ञ (ग्रुप-ए) के 7, सहायक भू-वैज्ञानिक (ग्रुप-बी) के 34, सहायक भू-भौतिकीविद् (ग्रुप-बी) के 35 और सहायक रसायनज्ञ (ग्रुप-बी) के 6 पद शामिल हैं। वहीं, केंद्रीय भूजल बोर्ड, जल शक्ति मंत्रालय, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग में जारी 16 रिक्तियों में साइंटिस्ट ‘बी’ (हाइड्रोजियोलॉजी), ग्रुप ‘ए’ के 5, साइंटिस्ट ‘बी’ (केमिकल), ग्रुप ‘ए’ का 1, साइंटिस्ट ‘बी’ (जियोफिजिक्स), ग्रुप ‘ए’ का 1, असिस्टेंट हाइड्रोजियोलॉजिस्ट, ग्रुप ‘बी’ के 7, असिस्टेंट केमिस्ट, ग्रुप ‘बी’ का 1 और असिस्टेंट जियोफिजिसिस्ट, ग्रुप ‘बी’ का 1 पद शामिल हैं। इन सभी पोस्ट के लिए ऑनलाइन माध्यम से आवेदन प्रक्रिया 2 सितंबर से शुरू हो गई है और अप्लाई करने की अंतिम तिथि 22 सितंबर तय की गई है। ऐसे में जो उम्मीदवार इन पदों पर नियुक्त होने के लिए एप्लीकेशन फॉर्म भरना चाहते हैं, उन्हें सलाह दी जाती है कि वे आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर तय अंतिम तिथि के शाम 6 बजे तक या उससे पहले अपनी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर लें। आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय से संबंधित पद और क्षेत्र के अनुसार मास्टर या एमएससी की डिग्री होनी चाहिए। आवेदकों की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम आयु 32 वर्ष तय की गई है, जिसकी गणना 1 जनवरी 2026 के आधार पर की जाएगी। वहीं, आरक्षित श्रेणी से आने वाले कैंडिडेट्स को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी। योग्य अभ्यर्थियों का चयन संयुक्त भू-वैज्ञानिक (प्रारंभिक) परीक्षा (वस्तुनिष्ठ प्रकार), संयुक्त भू-वैज्ञानिक (मुख्य) परीक्षा (वर्णनात्मक प्रकार) और व्यक्तित्व परीक्षण/साक्षात्कार के आधार पर किया जाएगा। यूपीएससी की ओर से प्रारंभिक परीक्षा 10 जनवरी 2027 को और मुख्य परीक्षा 19 और 20 जून 2027 को आयोजित किए जाएंगे। आवेदन पत्र भरते समय उम्मीदवारों को अपने वर्ग अनुसार निर्धारित आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा, जो सामान्य/ओबीसी/ईडब्ल्यूएस के लिए 200 रुपए तय किया गया है। वहीं, महिलाएं/एससी/एसटी/बेंचमार्क दिव्यांगता वाले उम्मीदवार (पीडब्ल्यूबीडी) श्रेणी से आने वाले कैंडिडेट्स को रजिस्ट्रेशन फीस में छूट दी गई है। उम्मीदवारों को भर्ती, योग्यता, चयन प्रक्रिया, आदि से जुड़ी ज्यादा जानकारी के लिए यूपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर संबंधित पोस्ट के लिए जारी विस्तृत नोटिफिकेशन को चेक करने की सलाह दी जाती है।

पहला टी20: अभिषेक-ईशान की शतकीय साझेदारी, भारत ने अफगानिस्तान को 7 विकेट से रौंदा

नई दिल्ली। भारत ने रविवार को अरुण जेटली स्टेडियम में खेले गए टी20 सीरीज के पहले मैच में अफगानिस्तान को 7 विकेट से करारी शिकस्त दी। इसी के साथ टीम इंडिया ने तीन मुकाबलों की सीरीज में 1-0 से बढ़त हासिल कर ली है। शेष मुकाबले 15 और 17 सितंबर को इसी मैदान पर खेले जाने हैं। टॉस गंवाकर बल्लेबाजी करने उतरी अफगान टीम ने 8 विकेट खोकर 156 रन बनाए। टीम को महज 5 के स्कोर पर रहमानुल्लाह गुरबाज (0) के रूप में पहला झटका लगा। इसके बाद सेदीकुल्लाह अटल (13) ने कप्तान इब्राहिम जादरान (11) के साथ दूसरे विकेट के लिए 32 रन की साझेदारी करते हुए टीम को संभालने की कोशिश की, लेकिन इस जोड़ी के टूटने के बाद विकेटों का पतझड़ लग गया। अफगानिस्तान ने महज 43 रन तक अपने 5 विकेट गंवा दिए थे, जिसके बाद अजमतुल्लाह ओमरजई ने मोहम्मद नबी के साथ छठे विकेट के लिए 56 गेंदों में 83 रन की साझेदारी करते हुए टीम को 126 के स्कोर तक पहुंचा दिया। नबी 27 गेंदों में 4 बाउंड्री के साथ 33 रन बनाकर पवेलियन लौटे, जिसके बाद टीम ने 131 रन तक 8 विकेट खो दिए थे। इसके बाद अजमुतल्लाह ने मुजीब उर रहमान के साथ 9वें विकेट के लिए 9 गेंदों में 25 रन की अटूट साझेदारी करते हुए टीम को चुनौतीपूर्ण स्कोर तक पहुंचा दिया। ओमरजई 44 गेंदों में 4 चौकों और इतने ही छक्कों की मदद से 64 रन बनाकर आउट हुए। भारत की तरफ से अर्शदीप सिंह ने सर्वाधिक 3 विकेट निकाले। जसप्रीत बुमराह, अक्षर पटेल और वरुण चक्रवर्ती को 1-1 सफलता हाथ लगी। इसके जवाब में भारत ने सिर्फ 13.4 ओवरों में मुकाबला अपने नाम कर लिया। संजू सैमसन ने अभिषेक शर्मा के साथ पहले विकेट के लिए 18 रन की साझेदारी की। संजू 8 गेंदों में 2 चौकों के साथ 10 रन बनाकर आउट हुए। यहां से ईशान किशन ने अभिषेक शर्मा के साथ मोर्चा संभाला। दोनों खिलाड़ियों के बीच दूसरे विकेट के लिए 53 गेंदों में 121 रन की साझेदारी हुई, जिसने टीम को जीत की दहलीज पर पहुंचा दिया। अभिषेक 32 गेंदों में 82 रन बनाकर आउट हुए। उनकी इस पारी में 7 छक्के और इतने ही चौके शामिल रहे। कप्तान श्रेयस अय्यर (नाबाद 8) ने ईशान किशन के साथ 13 रन की साझेदारी की। किशन 33 गेंदों में 6 बाउंड्री के साथ 42 रन बनाकर आउट हुए, जिसके बाद कप्तान ने तिलक वर्मा (नाबाद 3) के साथ मिलकर टीम को आसान जीत दिलाई। अफगान खेमे से मोहम्मद नबी ने सर्वाधिक 2 विकेट चटकाए, जबकि अजमतुल्लाह ओमरजई ने 1 विकेट झटका।

मणिपुर: संदिग्ध उग्रवादी हमलों में चार की मौत, दो महिलाएं भी शामिल

इंफाल। मणिपुर के तामेंगलोंग और नोनी जिलों में रविवार को संदिग्ध उग्रवादियों के अलग-अलग हमलों में कुकी समुदाय के चार लोगों की मौत हो गई। मृतकों में दो महिलाएं भी शामिल हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, तामेंगलोंग जिले के कैमाई थाना क्षेत्र के टोलेन कुकी गांव में हुए हमले में एक महिला समेत दो लोगों की मौत हो गई। वहीं, नोनी जिले के नुंगबा थाना क्षेत्र के लोंगपी गांव में एक अन्य हमले में एक महिला सहित दो लोगों को गोली मारकर हत्या कर दी गई। टोलेन गांव में संदिग्ध उग्रवादियों ने ल्हिंगंगाई सिंगसित के घर पर हमला किया, जिसमें उनकी मौत हो गई। इस हमले में उनके पति सेइनेह सिंगसित और उनका शिशु पुत्र भी घायल हो गए। बाद में सेइनेह सिंगसित की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई। घायल परिवार को इलाज के लिए दक्षिणी असम के सिलचर ले जाया जा रहा था। घटना की जानकारी मिलते ही सुरक्षा बल गांव पहुंचे और घायलों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई। दूसरी घटना में लोंगपी गांव में हथियारबंद उग्रवादियों ने कथित तौर पर अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें जूली गंगटे और आर. गंगटे की मौत हो गई। अधिकारियों के अनुसार, चारों मृतक कुकी जनजातीय समुदाय से संबंधित थे। मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए निर्दोष लोगों की मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी बयान में कहा गया कि निर्दोष नागरिकों के खिलाफ इस तरह की कायरतापूर्ण हिंसा अस्वीकार्य है और सभ्य समाज में इसका कोई स्थान नहीं है। मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की तथा घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। कैमाई विलेज अथॉरिटी सहित कई संगठनों, विधायकों और नेताओं ने टोलेन गांव में हुए हमले की निंदा की है। उन्होंने इसे समुदायों के बीच विभाजन और असहजता पैदा करने की सोची-समझी कोशिश बताया। साथ ही निष्पक्ष जांच कर दोषियों को जल्द गिरफ्तार करने की मांग की। पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता एन. बीरेन सिंह ने भी इस हमले को बेहद दुखद और चिंताजनक बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि टोलेन कुकी गांव की यह घटना बेहद हृदयविदारक है और निर्दोष लोगों पर हमले किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और इस तरह की हिंसा केवल लोगों के दुख को बढ़ाती है तथा शांति बहाली के प्रयासों को कमजोर करती है। कई कुकी और नागा विधायकों ने भी इन हत्याओं की निंदा की। नागा पीपुल्स फ्रंट के विधायक अवांगबो न्यूमै ने कहा कि निहत्थे पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को निशाना बनाना कायरतापूर्ण कृत्य है, जिसका सभ्य समाज में कोई स्थान नहीं है। बता दें कि यह घटना ऐसे दिन हुई, जब मणिपुर में कुकी समुदाय हर वर्ष 13 सितंबर को ‘साहनीत नी’ (ब्लैक डे) मनाता है। यह दिन 1990 के दशक में हुए कुकी-नागा संघर्ष में मारे गए लोगों की याद में मनाया जाता है। यह ताजा हिंसा ऐसे समय में हुई है, जब मणिपुर में शांति बहाल करने के प्रयास जारी हैं। मई 2023 से मैतेई और कुकी समुदायों के बीच हुई जातीय हिंसा में अब तक 306 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं 49 लोग अब भी लापता हैं और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं।

ग्लोबल साउथ के सहयोग के लिए प्रमुख मंच बन रहा ब्रिक्स : विशेषज्ञ

नई दिल्ली। 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन व्यापार, निवेश, रणनीतिक सहयोग और बहुध्रुवीय विश्व की अवधारणा चर्चा के केंद्र में रही। विशेषज्ञों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने रविवार को ब्रिक्स को ग्लोबल साउथ के सहयोग के लिए लगातार महत्वपूर्ण होते जा रहे मंच के रूप में बताया। आईएएनएस से बातचीत में एसडब्ल्यूएफआई के चेयरमैन और आईब्रिक्स 2026 के लीड को-चेयर लक्ष्मी नारायणन ने कहा कि कई अर्थव्यवस्थाओं के सामने मौजूद टैरिफ संबंधी चुनौतियां ब्रिक्स देशों की वजह से पैदा नहीं हुई हैं, बल्कि ये व्यापक वैश्विक व्यापारिक परिस्थितियों का परिणाम हैं। इनमें अमेरिकी नीतियों का भी महत्वपूर्ण प्रभाव रहा है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों ने सामूहिक सहयोग और आर्थिक समन्वय के जरिए इन चुनौतियों से निपटने पर सहमति जताई है। नारायणन के अनुसार, शिखर सम्मेलन से तीन प्रमुख परिणाम सामने आए हैं। इनमें द्विपक्षीय और बहुपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के प्रयास, भारत और चीन के बीच सीमा से जुड़े मुद्दों के समाधान की दिशा में सकारात्मक प्रगति तथा भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक बढ़ाने की समझ शामिल है। उन्होंने कहा कि इन पहलों से ब्रिक्स देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को मजबूती मिल सकती है। उन्होंने आईब्रिक्स की भूमिका पर भी प्रकाश डाला और कहा कि यह ऐसा मंच है, जो चर्चाओं को निवेश, परियोजनाओं और कारोबारी अवसरों में बदलने पर केंद्रित है। वहीं, रक्षा विशेषज्ञ रंजीत राय ने शिखर सम्मेलन में अपनाई गई दिल्ली घोषणा को वैश्विक सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया। उन्होंने कहा कि इस आयोजन ने दुनिया के नेताओं को भारत को करीब से समझने का अवसर दिया और जलवायु परिवर्तन, सुरक्षा तथा आर्थिक विकास जैसे मुद्दों पर सामूहिक कार्रवाई की जरूरत को रेखांकित किया। राय ने आईएएनएस से कहा, “ब्रिक्स का मूल उद्देश्य बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को मजबूत करना है, जहां वैश्विक निर्णय लेने की प्रक्रिया कुछ देशों तक सीमित न रहे।” सेटू आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजशेखर जोशी ने कहा कि ब्रिक्स ग्लोबल साउथ के सहयोग के सबसे प्रभावशाली उदाहरणों में से एक बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि यह समूह दुनिया की आधी से अधिक आबादी और वैश्विक जीडीपी के करीब 40 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करता है। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भी भारत की ओर से शिखर सम्मेलन की मेजबानी की सराहना की। इंडो विंग्स प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ पारस जैन ने कहा कि भारत द्वारा आयोजन के कुशल प्रबंधन से देश की वैश्विक छवि मजबूत हुई है। वहीं, इंडोजीनियस के निक बुकर ने कहा कि दुनिया के प्रमुख नेताओं की भागीदारी अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और आर्थिक भागीदारी में भारत के बढ़ते महत्व को दर्शाती है।

पीएफआरडीए भर्ती: ऑफिसर के 30 पदों पर आवेदन का अवसर, युवाओं के पास 24 सितंबर तक मौका

नई दिल्‍ली। नौकरी की तलाश में जुटे लोगों के लिए एक बेहतरीन मौका सामने आया है। पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीएफआरडीए) ने विभिन्न स्ट्रीम के आधार पर ऑफिसर ग्रेड ‘ए’ (असिस्टेंट मैनेजर) के कुल 30 पदों पर पात्र उम्मीदवारों की नियुक्ति के लिए आवेदन मांगे हैं। इस पदों पर आवेदन के लिए योग्‍य युवाओं के पास 24 सितंबर तक मौका है। पीएफआरडीए की ओर से ऑफिसर ग्रेड ‘ए’ (असिस्टेंट मैनेजर) पोस्ट के लिए जारी 30 रिक्तियों में जनरल के 25, रिसर्च के 2, एक्चुअरी के 2 और आधिकारिक भाषा (राजभाषा) के 1 पद शामिल हैं। इन सभी पोस्ट के लिए ऑनलाइन माध्यम से आवेदन प्रक्रिया 3 सितंबर से शुरू हो गई है और अप्लाई करने की अंतिम तिथि 24 सितंबर तक तय की गई है। ऐसे में जो उम्मीदवार इन पदों पर नियुक्त होने के लिए एप्लीकेशन फॉर्म भरना चाहते हैं, वे पीएफआरडीए की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर तय अंतिम तिथि तक या उससे पहले अपनी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय से जनरल स्ट्रीम के लिए मास्टर डिग्री/कम से कम दो वर्ष पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा या लॉ में बैचलर डिग्री या इंजीनियरिंग में बैचलर डिग्री या आईसीएआई से एसीए/एफसीए या आईसीएसआई से एसीए/एफसीए या आईसीएमएआई से एसीएमए/एफसीएमए या सीएफए इंस्टीट्यूट से सीएफए होनी चाहिए। रिसर्च के लिए इकोनॉमिक्स/कॉमर्स/बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन/इकोनोमेट्रिक्स/क्वांटिटेटिव इकोनॉमिक्स/फाइनेंशियल इकोनॉमिक्स/मैथमेटिकल इकोनॉमिक्स/बिजनेस इकोनॉमिक्स/एग्रीकल्चरल इकोनॉमिक्स/इंडस्ट्रियल इकोनॉमिक्स/बिजनेस एनालिटिक्स में मास्टर डिग्री/कम से कम 2 वर्ष का पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा; या फाइनेंस/क्वांटिटेटिव फाइनेंस/मैथमेटिकल फाइनेंस/क्वांटिटेटिव टेक्नीक्स/इंटरनेशनल फाइनेंस/बिजनेस फाइनेंस/इंटरनेशनल और ट्रेड फाइनेंस/प्रोजेक्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस/एग्री-बिज़नेस फाइनेंस में मास्टर डिग्री/कम से कम 2 वर्ष का पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा; या स्टैटिस्टिक्स/मैथमेटिकल स्टैटिस्टिक्स/स्टैटिस्टिक्स और इंफॉर्मेटिक्स/एप्लाइड स्टैटिस्टिक्स और इंफॉर्मेटिक्स/डेटा साइंस/आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस/मशीन लर्निंग/बिग डेटा एनालिटिक्स में मास्टर डिग्री/कम से कम 2 वर्ष का पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा; या मैथमेटिक्स में मास्टर डिग्री और स्टैटिस्टिक्स या संबंधित विषय में एक वर्ष का पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा होना चाहिए। एक्चुअरी के लिए ग्रेजुएशन के साथ ही इंस्टीट्यूट ऑफ एक्चुअरीज ऑफ इंडिया (आईएआई) की परीक्षा के सभी सात ‘कोर प्रिंसिपल्स’ विषयों में पास होना या छूट प्राप्त होना चाहिए। वहीं, आधिकारिक भाषा (राजभाषा) के लिए हिंदी/हिंदी अनुवाद में मास्टर डिग्री, जिसमें बैचलर डिग्री स्तर पर अंग्रेजी एक विषय रहा हो; या संस्कृत/अंग्रेजी/अर्थशास्त्र/कॉमर्स में मास्टर डिग्री, जिसमें बैचलर डिग्री स्तर पर हिंदी एक विषय रहा हो; या अंग्रेजी और हिंदी/हिंदी अनुवाद दोनों में मास्टर डिग्री होना चाहिए। आवेदकों की अधिकतम आयु 30 वर्ष तय की गई है, जिसकी गणना 31 जुलाई 2026 के आधार पर की जाएगी। वहीं, आरक्षित श्रेणी से आने वाले कैंडिडेट्स को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी। योग्य अभ्यर्थियों का चयन आवेदनों की ऑनलाइन स्क्रीनिंग, ऑनलाइन परीक्षा (चरण-I और चरण-II) और इंटरव्यू के आधार पर किया जाएगा, जिसके बाद चयनित कैंडिडेट्स की सैलरी 62,500 से 1,26,100 रुपए के बीच प्रति माह होगी। इसके अलावा, कैंडिडेट्स को अन्य लाभ और भत्ते भी दिए जाएंगे। बता दें कि फेज-I ऑनलाइन परीक्षा 15 अक्टूबर 2026 को और फेज-II ऑनलाइन परीक्षा 20 नवंबर 2026 को आयोजित किए जाएंगे। आवेदन पत्र भरते समय उम्मीदवारों को अपने वर्ग अनुसार निर्धारित आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा, जो सामान्य/ओबीसी/ईडब्ल्यूएस के लिए 1,000 रुपए तय किया गया है। वहीं, एससी/एसटी/पीडब्ल्यूबीडी और पूर्व-सैनिक को रजिस्ट्रेशन फीस में छूट दी गई है।

पंजाब में लोगों को विकास और रोजगार चाहिए, मजाक नहीं: सीएम नायब सिंह सैनी

चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रविवार को पंजाब की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पंजाब की जनता को विकास, रोजगार, उद्योगों के लिए सुरक्षा और अपनी समस्याओं का समाधान चाहिए, न कि मजाक, प्रचार और विज्ञापन। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोगों में प्रतिभा और मेहनत की कभी कमी नहीं रही, लेकिन गलत नीतियों और नेतृत्व के कारण राज्य विकास की दौड़ में पीछे रह गया। पटियाला के ककराला गांव में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम सैनी ने कहा कि पंजाब और हरियाणा भले ही दो अलग-अलग राज्य हों, लेकिन दोनों की संस्कृति, विरासत और जड़ें एक समान हैं। उन्होंने कहा कि आज पंजाब की जनता यह सवाल पूछ रही है कि उपजाऊ भूमि, मेहनती लोगों और अपार संभावनाओं के बावजूद राज्य विकास के मामले में पीछे क्यों रह गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय पंजाब देश के सबसे समृद्ध राज्यों में गिना जाता था, लेकिन आज हरियाणा आर्थिक प्रगति के मामले में उससे काफी आगे निकल चुका है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2025-26 में हरियाणा की आर्थिक विकास दर 9.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि पंजाब की विकास दर 6.1 प्रतिशत है। इसी तरह 2026-27 में हरियाणा की अर्थव्यवस्था लगभग 15.18 लाख करोड़ रुपए और पंजाब की अर्थव्यवस्था लगभग 9.81 लाख करोड़ रुपए रहने का अनुमान है। सीएम सैनी ने कहा कि दोनों राज्यों की अर्थव्यवस्था के आकार में करीब 5.38 लाख करोड़ रुपए का अंतर है और यह सही नीतियों, स्पष्ट नीयत और जवाबदेह नेतृत्व का परिणाम है। उन्होंने यह भी कहा कि 2023-24 में देश की जीडीपी में हरियाणा की हिस्सेदारी 3.6 प्रतिशत और पंजाब की हिस्सेदारी 2.4 प्रतिशत थी। वहीं, हरियाणा की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत के 176.8 प्रतिशत के बराबर थी, जबकि पंजाब की 106.7 प्रतिशत थी। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी सरकार ने पंजाब को काम से ज्यादा प्रचार और परिणामों से ज्यादा विज्ञापन दिए हैं। उन्होंने कहा कि केवल बड़े-बड़े दावे करने से अर्थव्यवस्था मजबूत नहीं होती। अर्थव्यवस्था तब मजबूत होती है, जब उद्योगों को सुरक्षा मिले, युवाओं को रोजगार मिले, व्यापारियों में भरोसा बने और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले। उन्होंने कहा कि सरकार का दायित्व जनता के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनना और उनका समाधान करना है। “मजाक सिनेमा हॉल में चलता है, लेकिन जनता के बीच विकास, काम और समस्याओं के समाधान की बात होती है।” सीएम नायब सिंह सैनी ने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उसने भी पंजाब की जनता से बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन उन्हें पूरा नहीं किया। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी ने भी कई वादे किए, लेकिन वे केवल वादों तक ही सीमित रह गए और लोगों को उनकी समस्याओं से राहत नहीं मिली। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हरियाणा की भाजपा सरकार जनता से किए गए वादों को पूरा करने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि 2024 विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए 217 वादों में से 18 महीनों के भीतर 70 वादे पूरे किए जा चुके हैं। इस मौके पर पूर्व केंद्रीय मंत्री परणीत कौर, प्रो. मलकीत सिंह और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।/ कार्यक्रम के दौरान सैकड़ों लोगों ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की, जिनका मुख्यमंत्री ने पार्टी में स्वागत किया।

ओमान तट के पास कमर्शियल जहाज पर हमले के बाद एक भारतीय लापता: विदेश मंत्रालय

नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय ने रविवार को पुष्टि की कि ओमान के तट पर वाणिज्यिक जहाज एमटी अल गैया पर हुए हमले के बाद एक भारतीय नाविक लापता है। विदेश मंत्रालय ने कहा, “हम रविवार सुबह ओमान के तट पर वाणिज्यिक जहाज एमटी अल गैया पर हुए हमले की निंदा करते हैं। जहाज पर सवार 14 इंडियन क्रू मेंबर्स में से 13 भारतीयों को अब तक बचा लिया गया है। लापता भारतीय नागरिक के लिए तलाशी और बचाव अभियान जारी है।” मंत्रालय के अनुसार, ओमान में भारतीय दूतावास स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है और चल रहे तलाशी और बचाव अभियान में ओमानी अधिकारियों के साथ सक्रिय रूप से समन्वय कर रहा है। मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों को बचाने में सहयोग के लिए ओमानी अधिकारियों को धन्यवाद दिया। विदेश मंत्रालय ने कहा, “हम तनाव को तत्काल कम करने और क्षेत्र में शांति लाने के लिए बातचीत और कूटनीति को आगे बढ़ाने की अपनी मांग को दोहराते हैं। क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों, नाविकों, नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना अस्वीकार्य है। हम यह भी आग्रह करते हैं कि क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों के माध्यम से स्वतंत्र और सुरक्षित नेविगेशन और वाणिज्य के प्रवाह को जल्द से जल्द बहाल किया जाए।” ओमान में भारतीय दूतावास ने कहा कि मिशन भारतीय नागरिकों के लिए चल रहे सर्च एंड रेस्क्यू (एसएआर) ऑपरेशन पर कड़ी नजर रख रहा है। दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, “मिशन पनामा के झंडे वाले टैंकर एमटी अल गैया पर सवार 14 भारतीय नागरिकों के लिए चल रहे सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन पर कड़ी नजर रख रहा है। 13 भारतीय नागरिकों के लिए एसएआर ऑपरेशन पूरा कर लिया गया है, और उन्हें सुरक्षित रूप से किनारे पर पहुंचा दिया गया है। ओमानी अधिकारी एक लापता चालक दल के सदस्य के लिए एसएआर प्रयास जारी रखे हुए हैं। हम उनके निरंतर समर्थन और सहायता के लिए ओमानी अधिकारियों को धन्यवाद देते हैं।” पिछले महीने, विदेश मंत्रालय ने भारतीय ध्वज वाले वाणिज्यिक जहाज, एमएसवी फैजे नूरे ओलिया पर हुए हमले की निंदा की थी, जो यमन के तट के पास लाल सागर में डूब गया था। मंत्रालय ने पुष्टि की कि सभी 13 भारतीय नागरिकों को बचा लिया गया है, और रियाद में भारतीय दूतावास स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है और चालक दल की सुरक्षा के लिए यमनी अधिकारियों के साथ सक्रिय रूप से समन्वय कर रहा है। विदेश मंत्रालय ने कहा था, “हम भारतीय ध्वज वाले वाणिज्यिक जहाज, एमएसवी फैजे नूरे ओलिया पर हुए हमले की निंदा करते हैं, जो 4 अगस्त, 2026 को यमन के तट के पास लाल सागर में डूब गया था। सभी 13 भारतीय नागरिकों को बचा लिया गया है। रियाद में हमारा दूतावास स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है और चालक दल की सुरक्षा के लिए यमनी अधिकारियों के साथ सक्रिय रूप से समन्वय कर रहा है। हम उनके समर्थन के लिए यमनी अधिकारियों को धन्यवाद देते हैं।

इस्तेमाल किए गए कपड़े इकट्ठा करने के लिए दिल्ली मेट्रो के 10 और अर्पण सेंटर बनाने की योजना: सीएम रेखा गुप्ता

नई दिल्ली। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने रविवार को कहा कि दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन स्टेशनों पर बने ‘अर्पण केंद्रों’ ने 31 अगस्त तक 41 टन इस्तेमाल किए गए कपड़े जमा किए हैं और सरकार ऐसी 10 और सुविधाएं खोलने की योजना बना रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में जो लोग पुराने कपड़ों को रखने या उन्हें सही तरीके से ठिकाने लगाने को लेकर परेशान हैं, उनके लिए दिल्ली मेट्रो के ‘अर्पण सेंटर’ एक काम का विकल्प बनकर उभरे हैं। दिल्ली मेट्रो के 10 स्टेशनों पर बने इन सेंटरों में लोग वे कपड़े जमा कर सकते हैं जिनकी उन्हें अब जरूरत नहीं है या जिनका वे इस्तेमाल नहीं करते। मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि इन कपड़ों को दोबारा इस्तेमाल, अपसाइकिलिंग और रीसाइक्लिंग के जरिए काम की चीजों में बदला जाता है। मुख्यमंत्री गुप्ता ने बताया कि 31 अगस्त तक, कुल 3,940 लोगों ने 10 अर्पण सेंटरों पर 41,181.59 किलोग्राम कपड़े जमा किए थे। उन्होंने कहा, “बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल सेंटर पर सबसे ज्यादा 9,861.40 किलोग्राम कपड़े जमा हुए, इसके बाद शालीमार बाग सेंटर पर 9,761.03 किलोग्राम कपड़े जमा हुए।” एक सरकारी बयान में कहा गया, “पंजाबी बाग वेस्ट सेंटर पर 6,534.98 किलोग्राम कपड़े जमा हुए, जबकि शाहदरा सेंटर पर 6,386.08 किलोग्राम कपड़े जमा हुए। दूसरे सेंटरों पर जमा कपड़ों की मात्रा इस प्रकार थी: मयूर विहार-I में 5,189.40 किलोग्राम, हौज खास में 1,680.70 किलोग्राम, द्वारका-काकरोला में 689.40 किलोग्राम, मालवीय नगर में 467.40 किलोग्राम, लाजपत नगर में 395.70 किलोग्राम और मोहन एस्टेट में 215.50 किलोग्राम। पांच सेंटर 3 अगस्त को शुरू किए गए थे, जबकि बाकी सेंटर 12 और 17 अगस्त को चालू हुए।” अर्पण सेंटरों का दायरा बढ़ाने के लिए अब 10 और सेंटर खोलने का प्रस्ताव रखा गया है। ये सेंटर जनवरी 2027 में खोले जाने का प्रस्ताव है। इनमें मॉडल टाउन, आईएनए, आईपी एक्सटेंशन, पश्चिम विहार वेस्ट, राजेंद्र प्लेस, जनकपुरी वेस्ट, राजौरी गार्डन, ग्रेटर कैलाश, द्वारका सेक्टर 10 और छतरपुर मेट्रो स्टेशन शामिल हैं। अर्पण सेंटरों पर जमा किए गए कपड़ों को अलग-अलग कैटेगरी में बांटा जा रहा है और उनके इस्तेमाल के हिसाब से आगे की प्रोसेसिंग के लिए भेजा जा रहा है। मिले सामान का कुछ हिस्सा दोबारा इस्तेमाल और अपसाइकिलिंग के लिए अलग रखा गया, जबकि बड़ी मात्रा रीसाइक्लिंग के लिए भेजी गई। दी गई जानकारी के मुताबिक, 31 अगस्त तक लगभग 4,266 किलोग्राम सामान दोबारा इस्तेमाल/अपसाइकिलिंग के लिए और 29,424 किलोग्राम सामान रीसाइक्लिंग के लिए तय किया गया था। आधिकारिक बयान में कहा गया, “सेल्फ-हेल्प ग्रुप इन कपड़ों का इस्तेमाल करके गलीचे, फोल्डर, की-रिंग, पाउच, बैग और तोरण जैसी काम की चीजें बना रहे हैं। इन उत्पादों को अर्पण केंद्रों पर भी दिखाया जा रहा है। इस तरह, लोगों द्वारा दान किए गए पुराने कपड़ों को सिर्फ कचरा बनने के बजाय नई, काम की चीजों में बदला जा रहा है।” इसमें कहा गया, “पुराने कपड़ों से बने उत्पाद इन केंद्रों पर बेचे भी जा रहे हैं। 10 अर्पण केंद्रों में कुल 27,036 रुपए की बिक्री दर्ज की गई है।” इसमें आगे कहा गया, “इस पहल का एक अहम पहलू यह है कि पुराने कपड़ों को सिर्फ इकट्ठा ही नहीं किया जा रहा है, बल्कि उन्हें काम की चीजों में बदलकर बेचा भी जा रहा है। इससे पुराने कपड़ों का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए एक व्यावहारिक सिस्टम बनाने में मदद मिल रही है।” मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि अर्पण केंद्र एक अहम पहल है जो पुराने कपड़ों को सही ढंग से निपटाने की समस्या का व्यावहारिक समाधान देती है और साथ ही उन्हें दोबारा इस्तेमाल और रीसाइक्लिंग के जरिए काम की चीजों में बदलने में मदद करती है। उन्होंने कहा, “दिल्ली के निवासियों की भागीदारी इस सिस्टम को और बढ़ाने में मदद कर सकती है। हमारी कोशिश है कि लोग आसानी से पुराने कपड़े दान कर सकें और उनका ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल हो, जिससे दिल्ली को साफ़, सुंदर और हरा-भरा बनाने की कोशिशें और मजबूत हों।

भारतीय टीम ने जीता जूनियर विमेंस एशिया कप का खिताब, फाइनल मुकाबले में चीन को 1-0 से हराया

मोकी (चीन)। भारतीय टीम ने जूनियर विमेंस एशिया कप 2026 के खिताब को अपने नाम कर लिया है। फाइनल मुकाबले में भारत ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए मेजबान चीन को 1-0 से हराया। सानिका चंद्रकांत माने के 17वें मिनट में किए गए गोल की मदद से भारत ने खिताब अपने नाम किया और एफआईएच जूनियर वर्ल्ड कप में अपनी जगह पक्की की। भारतीय महिला टीम ने पिछले दो संस्करणों में भी एएचएफ जूनियर एशिया कप की ट्रॉफी जीती थी। टीम ने इस साल की शुरुआत में नियुक्त कोच टिम व्हाइट के मार्गदर्शन में एक व्यवस्थित ट्रेनिंग प्रोग्राम के तहत तैयारी की और रविवार को खिताब की हैट्रिक पूरी की। हॉकी इंडिया ने जूनियर एशिया कप में खिताब जीतने वाली महिला टीम के लिए नकद पुरस्कारों की घोषणा की है, जिसके तहत हर खिलाड़ी को 3 लाख रुपये और सपोर्ट स्टाफ के हर सदस्य को 1.5 लाख रुपये दिए जाएंगे। भारत और चीन के बीच शुरुआती क्वार्टर में कड़ी टक्कर देखने को मिली और कोई गोल नहीं हो सका। इसके बाद मैच के 17वे मिनट में भारत के लिए पहला गोल सानिका ने दागा और टीम को 1-0 की बढ़त दिलाई। भारतीय टीम इस बढ़त को हाफ टाइम तक बरकरार रखने में कामयाब रहीं। भारत ने तीसरे क्वार्टर में भी अपनी मामूली बढ़त बनाए रखी और मेजबान टीम को वापसी करने का कोई मौका नहीं दिया। उन्होंने आखिरी सीटी बजने तक अपनी बढ़त बनाए रखी और 1-0 से जीत हासिल करते हुए तीसरी बार एएचएफ महिला जूनियर एशिया कप की ट्रॉफी अपने नाम की। भारत ने क्वार्टर फाइनल में पाकिस्तान को 19-0 से हराने के बाद, साउथ कोरिया को 5-1 से हराकर फाइनल में जगह बनाई थी। इस जीत में ड्रैग-फ्लिक स्पेशलिस्ट सुप्रिया का अहम योगदान रहा था।भारत ने पूल स्टेज में तीन जीत और एक ड्रॉ के साथ 10 अंक हासिल किए और बिना कोई मैच हारे गोल अंतर के आधार पर एलीट पूल में शीर्ष स्थान प्राप्त किया था।

याद रखिए टूटने से बिखरेंगे, जुड़ने से निखरेंगे: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

नई दिल्ली। ‘याद रखिए टूटने से बिखरेंगे, जुड़ने से निखरेंगे’, यह बात रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कही। उन्होंने कहा कि कुछ लोग, अपने राजनैतिक हित साधने के लिए, लोगों को भड़काने की कोशिश करते हैं। कभी जाति के नाम पर, कभी धर्म के नाम पर, हमारे समाज में दरार पैदा करने की कोशिश करते हैं, लेकिन हमें यह संकल्प लेना है कि हम किसी के भड़कावे में नहीं आएंगे। किसी के बहकावे में नहीं आएंगे। समाज को बंटने नहीं देंगे। समाज में प्रेम हो, सहयोग हो, एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े होने की भावना हो, इसके लिए हम सभी मिलकर प्रयास करेंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रविवार को आगरा में आयोजित ‘खटिक समाज गर्जना सम्मेलन’ में बोल रहे थे। उन्होंने कहा, “जब समाज में समरसता बढ़ेगी, तब ही शांति बढ़ेगी। जब समाज में शांति बढ़ेगी, तब ही समृद्धि बढ़ेगी। जब समृद्धि बढ़ेगी, तब ही विकास और प्रगति के कार्य और तेज गति से आगे बढ़ेंगे और हमारा देश विकसित देश बनेगा। आज प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार अंत्योदय और सर्वोदय के भावना के साथ काम कर रही है। सर्वोदय यानी समाज में सभी लोगों का उत्थान होना चाहिए।” उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश यह है कि पैसों के अभाव किसी भी बच्चे की पढ़ाई न रुके। अवसर के अभाव के कारण कोई युवा पीछे न रहे और हर व्यक्ति शिक्षा, रोजगार और आत्मनिर्भरता के रास्ते पर आगे बढ़े। राजनाथ सिंह ने कहा कि इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग शुरू करने की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि आज देशभर में हमारी सरकार, विकास की मुख्यधारा में पीछे रह गए लोगों को, समान अवसर देने के लिए काम कर रही है। जैसे बच्चों की पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति दी जा रही है। उच्च शिक्षा और विदेश में पढ़ाई के लिए भी आर्थिक मदद की जा रही है। आज, बाबासाहेब अंबेडकर के मंत्र ‘शिक्षित बनो, संघर्ष करो और संगठित हो’ को याद करने की जरूरत है। डॉ. अंबेडकर ने दुनिया के सबसे अच्छे विश्वविद्यालयों से शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने संघर्ष का मार्ग चुना। साथ ही राजनाथ सिंह ने कहा, “आगरा के पेठे को कौन भूल सकता है। आगरा का पेठा अपनी मिठास के लिए मशहूर है। ‘एक जिला, एक उत्पाद’ योजना के तहत आगरा के पेठे को पूरी दुनिया में पहचान मिली है और विदेशों में भी लोग इसके स्वाद का लुत्फ उठा रहे हैं। आज उत्तर प्रदेश भी, डबल इंजन की सरकार के साथ, तेजी से विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। आप याद कीजिए, एक समय था जब उत्तर प्रदेश में माफिया राज चलता था। ऊबड़-खाबड़ सड़कें होती थीं। असुरक्षा का माहौल था। लोग भय में जी रहे थे। हर दिन दंगे होते थे।” वहीं, खटीक समाज पर बोलते हुए उन्होंने कहा, “1946 में जब डायरेक्ट एक्शन डे की घोषणा की गई और बंगाल में हिंदुओं का निशाना बनाना शुरू किया गया, तब गोपाल पाठा के नेतृत्व में खटिक जाति के बहुत से लोगों ने मोर्चा संभाला था और हिंदुओं की रक्षा करने का काम किया था। 1857 में, जब मेरठ में स्वतंत्रता की पहली लड़ाई लड़ी गई तब खटिक समाज के लोगों ने बहुत वीरता से अंग्रेजों का मुकाबला किया था। अंग्रेजों ने अपने शासनकाल में खटीकों का बहुत उत्पीड़न किया। लेकिन खटीकों ने भारत की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व दिया।