क्रिकेटर मोहम्मद शमी के दो भाइयों पर मुकदमा, महिला ने लगाए शारीरिक संबंध बनाने और धमकी देने के आरोप

लखनऊ। क्रिकेटर मोहम्मद शमी के भाई मोहम्मद कैफ और मोहम्मद हसीब के खिलाफ लखनऊ के आशियाना पुलिस थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है। एक तलाकशुदा महिला ने मोहम्मद कैफ के खिलाफ कथित तौर पर शादी का वादा करके संबंध बनाने और मोहम्मद हसीब पर जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाए हैं। फिलहाल, लखनऊ पुलिस मामले की जांच में जुटी है। लखनऊ पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 351 और 69 के तहत क्रिकेटर के भाई मोहम्मद कैफ और मोहम्मद हबीब पर मुकदमा दर्ज किया है। एफआईआर के अनुसार, महिला ने अपनी शिकायत में कहा है कि 2020 में एक दोस्त के जरिए मोहम्मद कैफ से उसकी मुलाकात हुई थी। परिचय होने के बाद दोनों की मुलाकातें बढ़ने लगी थीं। अगस्त 2023 में मोहम्मद कैफ ने उससे शादी का प्रस्ताव रखा था। महिला ने कहा कि उसने पहले ही मोहम्मद कैफ को बताया था कि वह तलाकशुदा है और उसका एक बेटा है। उस समय कैफ ने उससे बोला कि उसे उसके अतीत और बेटे से कोई आपत्ति नहीं है। महिला ने कहा कि शादी का विश्वास दिलाए जाने के वह उनकी बातों पर विश्वास करने लगी थी। इसके बाद कैफ ने उसके साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए। बाद में जब वह शादी के लिए बोलती थी तो कैफ उसके सामने कुरान की कसम खाते थे और उचित समय पर शादी की बात कहते थे। अपनी शिकायत में महिला ने यह भी बताया कि कैफ ने उससे आईपीएल 2025 के ऑक्शन के बाद निश्चित रूप से शादी करने के लिए कहा था। महिला ने मोहम्मद कैफ पर नौकरी छुड़वाने के भी आरोप लगाए हैं। महिला ने कहा कि दिसंबर में शादी नहीं करने के बाद उसने शमी के भाई मोहम्मद हसीब से बात की थी, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला था। महिला ने शिकायत में कहा कि उसके एक पॉडकास्ट के बाद मोहम्मद कैफ ने उससे फिर से शादी का वादा करते हुए उस पॉडकास्ट को रोकने के लिए बोला था और बाद में शारीरिक संबंध भी बनाए थे। एफआईआर के अनुसार, महिला ने कहा कि मोहम्मद हसीब ने उसे एक व्यक्ति बदरुद्दीन के जरिए अमरोहा बुलाया था, जहां उन्होंने उसे डराया और जान से मारने की धमकी दी। शिकायत के बाद लखनऊ पुलिस ने क्रिकेटर मोहम्मद शमी के भाई मोहम्मद कैफ और मोहम्मद हसीब के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

तूफान ने तमिलनाडु के इरोड में 10,000 से ज्यादा केले के पौधे नष्ट, किसानों को नुकसान

ईरोड। तमिलनाडु के ईरोड जिले में रविवार शाम से आधी रात तक तेज हवाओं के साथ हुई भारी बारिश के कारण 10,000 से अधिक केले के पौधे उखड़ गए, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ। अचानक हुई बारिश और तेज हवाओं के कारण अम्मापेट्टई के पास बूथपड़ी गांव और अन्ना नगर, पूनाची, केम्मियम्पट्टी, पटलूर और मुलियानूर सहित अन्य क्षेत्रों में केले के बागानों को व्यापक नुकसान पहुंचा है। किसानों ने बताया कि तेज हवाओं के कारण उन्हें अपनी खड़ी फसलों को बचाने का बहुत कम मौका मिला। सेंथिल कुमार (43), वेलुचामी (73), कावेरी (76), परिमाला (56), मूर्ति (62) और पूनाची ईसन सहित कई किसानों के खेत बुरी तरह प्रभावित हुए। तूफान थमने के बाद खेतों में हजारों केले के पौधे उखड़ गए या टूट गए। क्षतिग्रस्त पौधों में से अधिकांश नेन्द्रन किस्म के थे और इनकी खेती लगभग सात महीने से की जा रही थी। ये पौधे फल देने की अवस्था में पहुँच चुके थे, जिससे किसानों को अच्छी फसल की उम्मीद थी। फसल के इस महत्वपूर्ण चरण में नष्ट होने से प्रभावित किसान बेहद परेशान हैं। किसानों ने बताया कि उन्होंने जमीन तैयार करने, पौधे खरीदने, खाद और कीटनाशक डालने, सिंचाई सुविधाओं के रखरखाव और कृषि श्रमिकों को मजदूरी देने में काफी पैसा लगाया था। फसल पकने के करीब थी, इसलिए उन्हें उम्मीद थी कि वे अपने खर्चों की भरपाई कर लेंगे और फसल से अच्छा मुनाफा कमा लेंगे। हालांकि, भारी बारिश और तेज हवाओं ने प्रभावित गांवों में फैले खेतों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया। प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, 10,000 से अधिक केले के पौधे नष्ट हो गए, जिससे कुल मिलाकर लगभग 50 लाख रुपये का नुकसान हुआ। किसानों को आशंका है कि अंतिम क्षति आकलन में इससे भी अधिक आंकड़ा सामने आ सकता है। किसानों ने कहा कि वे पहले से ही बढ़ती खेती लागत, अस्थिर बाजार कीमतों और कृषि श्रमिकों की कमी से जूझ रहे हैं। हाल ही में हुई फसल की बर्बादी ने उनके वित्तीय बोझ को और बढ़ा दिया है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्होंने खेती के खर्चों को पूरा करने के लिए कर्ज लिया था। प्रभावित किसानों ने राजस्व और कृषि विभागों के अधिकारियों से क्षतिग्रस्त बागानों का तुरंत निरीक्षण करने और नुकसान का व्यापक आकलन करने का आग्रह किया। उन्होंने तमिलनाडु सरकार से बिना देरी किए पर्याप्त मुआवजा और अन्य राहत उपाय उपलब्ध कराने की अपील भी की, और कहा कि इस झटके से उबरने और खेती फिर से शुरू करने के लिए समय पर वित्तीय सहायता उनके लिए आवश्यक है।

रोज करें चक्रासन का अभ्यास, जानें करने का सही तरीका और फायदे

नई दिल्ली। योग भारतीय संस्कृति की प्राचीन धरोधर है, जो मन और आत्मा को संतुलित रखने का मार्ग दिखाता है। योग के अनेक आसनों में चक्रासन एक महत्वपूर्ण आसन है, जो न केवल शरीर को लचीला बनाता है बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। ‘चक्र’ का अर्थ है पहिया और ‘आसन’ का अर्थ है मुद्रा। इस आसन में शरीर को पीछे की ओर मोड़कर पहिए जैसा आकार दिया जाता है। यह पीठ, हाथ, पैर और पेट की मांसपेशियों को मजबूत करता है, साथ ही शरीर की लचीलापन और मुद्रा में सुधार करता है। योग विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित अभ्यास से यह आसन कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, चक्रासन से कमर-रीढ़ की समस्याएं दूर होती हैं, आंखों की रोशनी बढ़ती है, कब्ज से राहत मिलती है, और तनाव-चिंता कम होती है। यह मानसिक तनाव और चिंता को कम कर शांति देने में भी मददगार है। यह मांसपेशियों को मजबूत कर शरीर की सक्रियता बढ़ाता है। इसके अभ्यास के लिए सबसे पहले पीठ के बल जमीन पर लेट जाएं। अपने पैरों को घुटनों से मोड़ें और पैरों को कूल्हों के पास लाएं। दोनों हाथों को सिर के पास ले जाएं, हथेलियां जमीन पर और उंगलियां कंधों की ओर हों। इसके बाद सांस लेते हुए हथेलियों और पैरों पर जोर देकर शरीर को ऊपर उठाएं। सिर को आराम से पीछे की ओर लटकाएं। 10 से 20 सेकंड तक इस मुद्रा में बने रहना चाहिए और सामान्य रूप से सांस भी लेते रहना चाहिए। इसके बाद धीरे-धीरे स्थिति में वापस आना चाहिए। नियमित चक्रासन से न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर होता है। चक्रासन न सिर्फ रीढ़ की मज़बूती बढ़ाता है, बल्कि पूरे शरीर को ऊर्जावान बनाता है। रोजाना 5-10 मिनट का अभ्यास कमर दर्द को काफी हद तक नियंत्रित कर सकता है। अगर कोई भी अभ्यासकर्ता बैठे रहने की वजह से जकड़न महसूस कर रहे हैं, तो उन्हें अपनी दिनचर्या में चक्रासन शामिल करें।

पश्चिम बंगाल में डेंगू का कहर, 29 नगर पालिकाएं और 278 ग्राम पंचायतें हॉटस्पॉट घोषित

कोलकाता। इस साल अब तक पश्चिम बंगाल में डेंगू से प्रभावित लोगों की संख्या 5,000 से ज्यादा हो गई है। इसे देखते हुए राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने 29 नगर पालिकाओं, 85 कम्युनिटी डेवलपमेंट ब्लॉक और 278 ग्राम पंचायतों को हॉटस्पॉट के तौर पर पहचाना है। राज्य स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि विभाग के कर्मचारी इन नगर पालिकाओं, ब्लॉक और पंचायतों में ज्यादा गहन और रैंडम ब्लड सैंपल टेस्ट पर ध्यान दे रहे हैं, क्योंकि पिछले महीने डेंगू-पॉजिटिव मामलों की सबसे ज्यादा संख्या इन्हीं हॉटस्पॉट से सामने आई है। उनके अनुसार, विभाग ऐसे हॉटस्पॉट की पहचान करने के लिए एक खास फॉर्मूला अपना रहा है। अधिकारी ने कहा, “जिस ग्राम पंचायत में डेंगू के 10 या उससे ज्यादा मरीज होते हैं, उसे हॉटस्पॉट पंचायत माना जाता है। इसी तरह, अगर किसी कम्युनिटी ब्लॉक में 30 से ज्यादा लोगों को डेंगू है, तो उसे हॉटस्पॉट ब्लॉक माना जाता है। अगर किसी नगरपालिका के ज्यादातर वार्डों में डेंगू से प्रभावित पांच या उससे ज्यादा लोग हैं, तो उसे हॉटस्पॉट माना जाता है।” साथ ही, उन्होंने कहा कि विभाग इन हॉटस्पॉट पर बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान भी चला रहा है। लोगों से कहा जा रहा है कि अगर उनमें डेंगू के लक्षण दिखें – जैसे कि दो या उससे ज्यादा दिनों तक लगातार बुखार रहना – तो वे खुद आगे आकर ब्लड टेस्ट करवाएं। अधिकारी ने कहा, “हमें सबसे ज्यादा चिंता इस बात की है कि इनमें से कई हॉटस्पॉट में, दो या उससे ज्यादा दिनों तक बुखार रहने पर लोग अक्सर किसी डॉक्टर से सलाह लेने के बजाय खुद ही दवा ले लेते हैं। इससे संकट और बढ़ रहा है। इसलिए, हम बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चला रहे हैं और लोगों से अपील कर रहे हैं कि दो या उससे ज्यादा दिनों तक बुखार रहने पर खुद दवा न लें, बल्कि ब्लड टेस्ट के लिए नजदीकी हेल्थ सेंटर जाएं या किसी डॉक्टर से सलाह लें।” इसके साथ ही, स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी डेंगू को रोकने के लिए घर-घर जाकर निगरानी कर रहे हैं। “स्वास्थ्य कर्मचारी लोगों से कह रहे हैं कि वे घर की पानी की टंकियों और सिस्टर्न को ढंककर रखें। अगर ढक्कन नहीं है, तो उन्हें मच्छरदानी या जाली से ढंक देना चाहिए।” राज्य स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ने कहा, “छत पर रखे गमलों और बेकार पड़े डिब्बों में पानी जमा होने से रोकने के बारे में जागरूकता फैलाई जा रही है।” स्वास्थ्य विभाग तालाबों, नालियों, पूलों, सूखी नहरों, बेकार पड़े कुओं और कारखानों की भी निगरानी कर रहा है। गाइडलाइंस के मुताबिक लार्वा-मारने वाली दवाओं (लार्विसाइड्स) का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। रविवार को स्वास्थ्य विभाग ने अपना ताज़ा डेंगू बुलेटिन जारी किया, जिसमें 11 सितंबर तक 5,002 लोगों के प्रभावित होने की जानकारी दी गई। हालांकि, चिंता की बात यह है कि अगस्त में इसी तारीख तक डेंगू से प्रभावित लोगों की कुल संख्या 2,500 से कम थी। इसका मतलब है कि पिछले एक महीने में 2,500 और लोग डेंगू की चपेट में आए हैं। विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अब तक सबसे ज़्यादा प्रभावित लोग मुर्शिदाबाद जिले से हैं (1,072), इसके बाद कोलकाता (500) और नॉर्थ 24 परगना (450) का नंबर आता है।

गणेश चतुर्थी के मौके पर अभिजीत सावंत ने रिलीज किया ‘गण धाव रे’ गाना, बेटियों ने भी दी आवाज

मुंबई। ‘इंडियन आइडल’ के पहले सीजन से घर-घर में अपनी आवाज की पहचान बनाने वाले गायक अभिजीत सावंत ने गणेश चतुर्थी के मौके पर अपना नया गाना ‘गण धाव रे’ रिलीज किया है। इस गाने में उनकी बेटियां अहाना और समीरा भी जुड़ी हुई हैं। दोनों ने गाने में बैकग्राउंड वोकल्स दिए हैं। अभिजीत ने कहा, ”जब मैंने अपनी दोनों बेटियों के साथ ‘गण धाव रे’ रिकॉर्ड किया, तो वह पल मेरे लिए बेहद इमोशनल था। इस गाने में मेरी बेटियों का मेरे साथ होना बप्पा का दिव्य संयोग है। यह पहली बार है जब म्यूजिकल जर्नी में हम तीनों ने एक साथ किसी गाने के लिए अपनी आवाज दी है। यह गाना मेरे लिए बाकी प्रोजेक्ट्स से काफी अलग है।” उन्होंने सोशल मीडिया पर गाने को शेयर करते हुए लिखा, ”तीनों का यह पहला गाना है, जिसे खास तौर पर बप्पा के लिए बनाया गया है और इससे बड़ी बात मेरे लिए और क्या हो सकती है। हर इंसान का बप्पा के साथ अपना एक खूबसूरत रिश्ता होता है। कोई बप्पा को अपना दोस्त मानता है, कोई परिवार का हिस्सा और कोई मुश्किल समय में उनका सहारा देखता है।” अभिजीत ने कहा, ”’गण धाव रे’ के जरिए इसी खूबसूरत रिश्ते को दर्शक महसूस कर पाएंगे। गाने में बेटियों की आवाज जुड़ने से यह मेरे लिए सिर्फ एक भक्ति गीत नहीं, बल्कि परिवार के साथ संजोकर रखने वाली याद भी बन गई है।” अभिजीत सावंत की म्यूजिकल जर्नी की बात करें तो उन्होंने ‘इंडियन आइडल’ के पहले सीजन से जबरदस्त पहचान हासिल की थी। शो के जरिए वह दर्शकों के बीच इतने पॉपुलर हुए कि जल्द ही उनकी अपनी म्यूजिक जर्नी शुरू हो गई। साल 2005 में उनका पहला सोलो एल्बम ‘आपका अभिजीत सावंत’ रिलीज हुआ। इसी साल उन्होंने फिल्म ‘आशिक बनाया आपने’ के लिए प्लेबैक सिंगिंग भी की और ‘मर जावां मिट जावां’ गाना गाया। इसके बाद साल 2007 में उनका दूसरा एल्बम ‘जुनून’ रिलीज हुआ। करीब छह साल बाद 2013 में उन्होंने अपना तीसरा स्टूडियो एल्बम ‘फरीदा’ पेश किया। संगीत के साथ अभिजीत ने एक्टिंग की दुनिया में भी कदम रखा। साल 2009 में उन्होंने फिल्म ‘लॉटरी’ से एक्टिंग डेब्यू किया था। इसके बाद वह ‘तीस मार खान’ में भी एक छोटे से अपीयरेंस में नजर आए। हाल ही में अभिजीत एक बार फिर ‘इंडियन आइडल’ के मंच पर नजर आए। 4 जुलाई को शो के 75वें एपिसोड यानी डायमंड जुबली स्पेशल में पहले सीजन के कंटेस्टेंट्स की खास रीयूनियन हुई। इस दौरान अभिजीत सावंत और अमित सना करीब 22 साल बाद एक बार फिर मंच पर साथ आए।

अपने ब्लॉग की गलत व्याख्या पर मजाकिया अंदाज में अमिताभ बच्चन बोले- सच्चाई भाड़ में जाए, ये बिजनेस है

मुंबई। मेगास्टार अमिताभ बच्चन सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं और अक्सर ब्लॉग पर अपनी मन की बातें करते रहते हैं। अभिनेता ने हाल ही में मजाकिया अंदाज में तंज कसते हुए कहा कि उनके ब्लॉग पोस्ट को किस तरह से दर्शकों के सामने दिखाया जाता है और समझा जाता है। मेगास्टार ने अपने ब्लॉग में लिखा, “और काम जारी है, इस त्योहार की रौनक के बीच अपनों के घर जाने का न्योता जब वे ‘गणपति’ को घर लाते हैं। आशीर्वाद लेने के लिए और ब्लॉग पर लिखी बातों के अजीब-ओ-गरीब मतलब निकाले जाने की विसंगतियां, जो हंसी से भी परे हैं।” त्योहारों के जश्न के बीच गणपति का स्वागत करने वाले घरों में जाते हुए, अमिताभ बच्चन ने खबरों में ‘सबसे पहले’ बनने की होड़ पर बात की। उन्होंने कहा कि ध्याव पाने की इस दौड़ में कई बार सच्चाई को नरअंदाज कर दिया जाता है। उन्होंने आगे लिखा, “लोगों के बीच सबसे पहले आने की बेचैनी, ताकि उन्हें ध्यान और पैसा मिल सके, भले ही इसके लिए बात का गलता मतसब निकालना पडे या खबर देने वालों को ही भाष की सही समझ न हो। यही आज के दिन हंसी का बात है।” उन्होंने आगे लिखा, “इसे सच दिखाने के लिए फालतू और गलत बातें जोड़ देना, ताकि वह असली लगे, यह उस पल की कीमत पर किया गया बिजनेस है जो कभी हुआ ही नहीं था।” आखिर में उन्होंने लिखा, “खरीदा हुआ कंटेंट है, तो उसे अपनी लागत वसूल तो करनी ही है, यह बिजनेस है और सच्चाई भाड़ में जाए। आह मैं इंतजार कर रहा हूं कि मेरे इस ब्लॉग की बात को तोड़-मरोड़ कर क्या बनाया जाएगा और अब मैं आराम करता हूं।” मेगास्टार ने गणेश चतुर्थी के मौके पर शांति, खुशहाली और संपन्नता की भी कामना की। उन्होंने लिखा, “गणपति का आशीर्वाद हम सभी पर बना रहे। शांति, समृद्धि और खुशी के लिए।” गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश के जन्मदिन के तौर पर मनाया जाता है। इस त्योहार की शुरुआत गणेश की मूर्तियों की स्थापना से होती है, जो घरों में अकेले और बड़े पंडालों में सबके सामने होती हैं।

हिंदी दिवस पर इजरायल ने भारत को द‍ी बधाई, राजदूत रूवेन अजार ने हिंदी बोलकर दी शुभकामनाएं

नई द‍िल्‍ली। भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने ह‍िंदी द‍िवस के अवसर पर सभी भारतवास‍ियों को शुभकामनाएं दीं। खास बात यह रही क‍ि राजदूत रूवेन अजार ने यह बधाई संदेश ह‍िंदी में द‍िया। राजदूत रूवेन अजार ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पर पोस्‍ट में बधाई संदेश का वीड‍ियो साझा क‍िया। इस पोस्‍ट में उन्‍होंने ल‍िखा, ”हिंदी और ह‍िब्रू, यह दो प्राचीन भाषाएं, जो आज भी जीवंत हैं। ह‍िंदी द‍िवस के अवसर पर इजरायल की ओर से आप सभी को हार्द‍िक शुभकामनाएं।” वीड‍ियो संदेश में उन्‍होंने कहा, ”नमस्‍ते, मैं रूवेन अजार, भारत में इजरायल का राजदूत हूं। मैं दो वर्ष पहले भारत आया था और तभी से मैंने ह‍िंदी सीखनी शुरू कर दी थी। आज दो साल बाद ह‍िंदी द‍िवस के अवसर पर मैं आप सभी को हार्द‍िक शुभकामनाएं देता हूं।” इजरायल हमेशा ही भारत को अपना अच्‍छा दोस्‍त बताता है। भारत में होने वाले तमाम त्‍योहारों के मौके पर इजरायल खुद को शाम‍िल कर अपनी अच्‍छी प्रत‍िक्र‍िया देता है। इससे पहले भी रक्षाबंधन के मौके पर भी इजरायली दूतावास में राखी का त्‍योहार मनाया गया था। उस मौके पर इजरायली दूतावास में राजनीतिक सलाहकार और युवा राजनयिक नित्तई बेन-हाइम को भारतीय बहनों ने राखी बांधी थी। इजरायली दूतावास ने रक्षाबंधन के इस मौके को दोनों देशों के बीच एक मजबूत रिश्ते से जोड़ते हुए अच्‍छे संबंध की बात कही थी। इजरायली दूतावास ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पोस्‍ट में बहनों के राखी बांधने का व‍ीड‍ियो साझा करते हुए ल‍िखा, ”भारत + इजरायल = एक मजबूत और खूबसूरत दोस्ती का बंधन!

केरलः सीपीआई (एम) की बैठक में चुनाव में हार के लिए विजयन और एमवी गोविंदन पर उठे सवाल

कोझिकोड। सीपीआई (एम) के मजबूत गढ़ कन्नूर में ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की अप्रत्यक्ष रूप से आलोचना हो रही है। राज्य समिति की विस्तारित बैठक में प्रतिनिधियों ने पार्टी की करारी चुनावी हार का दोष आम कार्यकर्ताओं और निचले स्तर की समितियों पर मढ़ने की कोशिश पर सवाल उठाए हैं। बातचीत के पहले दिन के आखिर में कई लोगों को हैरानी इस बात से हुई कि पार्टी के राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन द्वारा पेश की गई सुधार रिपोर्ट के मसौदे की सबसे तीखी आलोचना कन्नूर के प्रतिनिधियों ने की। उन्होंने तर्क दिया कि पार्टी की नाकामियों के लिए आम कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, जबकि फैसले लेने की असली ताकत राज्य के नेतृत्व और अहम फैसले लेने वालों के पास थी। इसके बाद कोल्लम के प्रतिनिधियों ने भी इसी तरह की आलोचना की, जिससे पता चला कि नाराजगी सिर्फ कन्नूर तक ही सीमित नहीं थी। इसलिए, इस बातचीत ने पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और एम.वी. गोविंदन पर परोक्ष रूप से दबाव डाला है, भले ही आलोचना को पूरी तरह से व्यक्तिगत हमलों के तौर पर पेश नहीं किया गया था। प्रतिनिधियों ने पार्टी कार्यकर्ताओं से आत्मसुधार करने के लिए कहने के तर्क पर सवाल उठाए, जबकि शीर्ष पर बैठे लोग अपने फैसलों की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं थे। उन्होंने पार्टी के ऊंचे पदों पर बैठे लोगों की संसदीय महत्वाकांक्षाओं और लंबे समय तक सत्ता में रहने के दौरान पार्टी में पनपी व्यक्ति-केंद्रित राजनीति की भी आलोचना की। इस ड्राफ्ट रिपोर्ट की खास तौर पर इसलिए आलोचना की गई, क्योंकि इसमें हार की अधिकतर जिम्मेदारी संगठन के निचले स्तरों पर डाली गई थी। प्रतिनिधियों का तर्क था कि जिन समस्याओं का समाधान राज्य नेतृत्व को करना चाहिए था, उन्हें जमा होने दिया गया, जिससे आखिरकार पार्टी का पतन हुआ। रिपोर्ट में तालिपारम्बा में उम्मीदवार चयन से जुड़े विवाद का जिक्र न होने पर भी सवाल उठाए गए। हालांकि रिपोर्ट में उम्मीदवार चुनने में हुई गलतियों और पय्यानूर में मिली हार का जिक्र है, लेकिन प्रतिनिधियों ने सवाल उठाया कि तालिपारम्बा में मिली हार पर वैसा ध्यान क्यों नहीं दिया गया। बातचीत के दौरान के.के. शैलजा को दूसरी सीट पर भेजने के फैसले और ए.एन. शमसीर की उम्मीदवारी को संभालने के तरीके पर भी सवाल उठाए गए। कन्नूर के प्रतिनिधियों ने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी ने एक ऐसा सिस्टम बना लिया है, जिसमें नेताओं और आम कार्यकर्ताओं के लिए अलग-अलग नियम लागू होते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि नेतृत्व के करीबी लोगों का बचाव करने और दूसरों की आलोचना करने के चलन ने पार्टी की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाया है। बैठक में संगठन के बड़े संकट पर भी खास तौर पर चर्चा हुई। प्रतिनिधियों ने पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक के घटने, सक्रिय सदस्यों की संख्या में कमी और जन-संगठनों से मिलने वाले समर्थन के कमजोर होने की ओर इशारा किया। पार्टी नेताओं की लोगों से सीधे जुड़ने और पार्टी के राजनीतिक रुख को असरदार ढंग से समझाने में नाकामी पर भी जोर दिया गया। ड्राफ्ट रिपोर्ट में केंद्रीय एजेंसियों और प्रवर्तन निदेशालय (विजयन और उनके परिवार के खिलाफ) की जांच को पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती के तौर पर दिखाने की कोशिश की गई लेकिन इससे प्रतिनिधियों के बीच अधिक सहानुभूति नहीं बन पाई। इसके बजाय, चर्चाओं से यह संदेश मिला कि सीपीआई (एम) का मौजूदा संकट काफी हद तक अंदरूनी है। 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद से सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाला वाम मोर्चा कोई भी चुनाव नहीं जीत पाया है और हालिया विधानसभा चुनावों में उसे करारी हार का सामना करना पड़ा। प्रतिनिधियों का कहना था कि लगातार हार से मिली चेतावनियों को नजरअंदाज किया गया और मौजूदा संकट नेतृत्व की समय पर कार्रवाई न कर पाने का नतीजा है।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल फिलहाल भारत के लिए कोई व्यापक संकट नहीं; मजबूत फॉरेक्स रिजर्व और कम महंगाई बने सहारा

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है और ब्रेंट क्रूड 107-108 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा स्थिति भारत के लिए चिंता का विषय जरूर है, लेकिन इसे फिलहाल व्यापक आर्थिक संकट नहीं कहा जा सकता। बाजार विशेषज्ञों ने सोमवार को कहा कि भारत की स्थिति इस समय अपेक्षाकृत मजबूत है। देश में महंगाई नियंत्रित स्तर पर है, चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में चालू खाता घाटा (सीएडी) जीडीपी का लगभग 0.8 प्रतिशत रहा है और विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स रिजर्व) रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है। हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 785.7 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है, जो बाहरी झटकों से निपटने के लिए मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान करता है। हालांकि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं या पश्चिम एशिया से तेल आपूर्ति और समुद्री परिवहन में गंभीर व्यवधान आता है, तो भारत के सामने विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाना कठिन हो सकता है। भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 88.6 प्रतिशत आयात करता है, इसलिए ऊंची कीमतों का सीधा असर आयात बिल और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। विश्लेषकों का कहना है कि आरबीआई के एक अध्ययन के अनुसार, कच्चे तेल की कीमत में 10 डॉलर प्रति बैरल की वृद्धि होने पर खुदरा महंगाई लगभग 49 आधार अंक तक बढ़ सकती है। दूसरी ओर यदि सरकार उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए उत्पाद शुल्क घटाती है या सब्सिडी बढ़ाती है, तो राजकोषीय घाटे पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। तेल कीमतों में वृद्धि का प्रभाव परिवहन, खाद्य पदार्थों और विनिर्मित उत्पादों की लागत पर भी पड़ता है। पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी से घरेलू उपभोग प्रभावित हो सकता है और परिवारों की वास्तविक आय पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं यदि सरकार कीमतों का बोझ अपने ऊपर लेती है, तो सार्वजनिक वित्त और तेल विपणन कंपनियों की स्थिति प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों ने अनुमान लगाया है कि यदि औसत क्रूड ऑयल मूल्य 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना रहता है, तो वित्त वर्ष 2026-27 में भारत का चालू खाता घाटा बढ़कर जीडीपी के 1.9 से 2.2 प्रतिशत तक पहुंच सकता है, जबकि पहले इसका अनुमान 0.7 से 0.8 प्रतिशत के बीच था। ऊंचे कच्चे तेल का असर विभिन्न उद्योगों पर भी अलग-अलग होगा। एयरलाइंस, पेंट, रसायन, लॉजिस्टिक्स, सीमेंट, उपभोक्ता सामान और तेल विपणन कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। दूसरी ओर ओएनजीसी और ऑयल इंडिया जैसी तेल एवं गैस उत्पादक कंपनियों को ऊंची कीमतों से लाभ मिल सकता है। वहीं नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और घरेलू गैस आधारित क्षेत्रों में निवेशकों की रुचि और बढ़ सकती है। गौरतलब है कि सोमवार को ब्रेंट क्रूड नवंबर डिलीवरी के लिए 107.82 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) भी 103 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार करता देखा गया। बाजार की नजर पश्चिम एशिया और लाल सागर के समुद्री मार्गों की स्थिति पर बनी हुई है, जहां बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

रश्मिका के लिए खास है ‘राणाबली’, राहुल सांकृत्यायन ने मां के नाम पर रखा किरदार का नाम ‘जयम्मा’

हैदराबाद। विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना की जोड़ी जब भी पर्दे पर साथ आती है, फैंस की एक्साइटमेंट अपने आप बढ़ जाती है। ‘गीता गोविंदम’ और ‘डियर कॉमरेड’ में दोनों की केमिस्ट्री देखने के बाद अब फैंस इस जोड़ी को एक बार फिर बड़े पर्दे पर देखने का इंतजार कर रहे हैं। दोनों की अगली फिल्म ‘राणाबली’ इन दिनों चर्चा में है। फिल्म में रश्मिका का किरदार काफी खास बताया जा रहा है। अब फिल्म के लेखक और निर्देशक राहुल सांकृत्यायन ने इस किरदार से जुड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि रश्मिका के किरदार ‘जयम्मा’ का नाम उन्होंने अपनी मां के नाम पर रखा है। राहुल सांकृत्यायन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर रश्मिका के फिल्म वाले हिस्से की शूटिंग पूरी होने की जानकारी शेयर की। इसी पोस्ट में उन्होंने लिखा, ”मैं ‘राणाबली’ की कहानी लिखते समय अपनी पुरानी यादों में खो गया। जब मैंने फिल्म की महिला मुख्य किरदार को लिखना शुरू किया, तो मैंने एक बेहद निजी जुड़ाव महसूस किया। मैंने इस किरदार का नाम अपनी मां के नाम पर ‘जयम्मा’ रखा।” राहुल ने कहा, ”जयम्मा के किरदार को लिखते समय मैंने इस बात का खास ध्यान रखा कि वह भले ही एक अलग दौर की महिला हो लेकिन उसकी सोच और उसका हौसला आज की महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन सके। जयम्मा को सिर्फ उस समय की कहानी का हिस्सा बनाकर नहीं रखा गया है बल्कि उसके व्यक्तित्व में ऐसी खूबियां दिखाई जाएंगी, जो आज की महिलाओं को भी प्रभावित कर सकती हैं।” राहुल ने कहा, ”फिल्म में जयम्मा के लुक और उसकी पूरी दुनिया को भी उस दौर के हिसाब से तैयार किया गया है। टीम ने लुक के लिए खूबसूरत सिल्क और कॉटन के कपड़े, जरी, पुराने जमाने के रंग और एंटीक गोल्ड को शामिल किया है।” रश्मिका की तारीफ करते हुए निर्देशक ने कहा, ”उन्होंने सिर्फ जयम्मा के किरदार को निभाया नहीं बल्कि उसे पर्दे पर ऐसा जीवन दिया कि वह हमेशा के लिए याद रह सके। रश्मिका के हिस्से की शूटिंग पूरी हो चुकी है, अब पूरी टीम उन्हें मिस करेगी।” ‘राणाबली’ में विजय देवरकोंडा राणाबली की भूमिका में नजर आएंगे जबकि रश्मिका मंदाना उनकी पत्नी जयम्मा का किरदार निभा रही हैं। फिल्म में हॉलीवुड अभिनेता अर्नोल्ड वोस्लू भी नजर आएंगे। ‘द ममी’ में अपने काम के लिए पहचाने जाने वाले अर्नोल्ड फिल्म में विलेन सर थियोडोर हेक्टर का रोल निभा रहे हैं। राहुल सांकृत्यायन के निर्देशन में बन रही ‘राणाबली’ एक पीरियड एक्शन ड्रामा है, जिसकी कहानी ब्रिटिश दौर की पृष्ठभूमि में रखी गई है। फिल्म 19वीं सदी में हुई वास्तविक ऐतिहासिक घटनाओं से प्रेरित बताई जा रही है। कहानी में 1854 से 1878 के बीच हुए घटनाक्रम को आधार बनाया गया है और इसे बड़े स्तर पर पैन-इंडिया फिल्म के रूप में तैयार किया जा रहा है। ‘राणाबली’ पहले 11 सितंबर को रिलीज होने वाली थी लेकिन अब इसकी रिलीज डेट बदल दी गई है। यह फिल्म 16 अक्टूबर को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी।