भविष्य की जंग तकनीक से जीती जाएगी, नवाचार जरूरी: राजनाथ सिंह

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि भारत की रक्षा क्षमता को मजबूत बनाने और वैश्विक स्तर पर रणनीतिक बढ़त हासिल करने के लिए रक्षा, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) समेत सभी क्षेत्रों में नवाचार और तकनीकी प्रगति को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाकर और नवाचार को प्रोत्साहित कर भारत अपनी सुरक्षा तैयारियों को और मजबूत कर सकता है तथा भविष्य की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से मुकाबला कर सकता है। राजनाथ सिंह ने टेक्नोलॉजी को 21वीं सदी के सबसे शक्तिशाली साधनों में से एक बताते हुए कहा कि टेक्नोलॉजी में देश का भविष्य गढ़ने और उसे आत्मनिर्भर बनाने की क्षमता है। उन्होंने ये बातें मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित डीआरडीओ-इंडस्ट्री सिनर्जी मीट ‘विमर्श 2026’ को संबोधित करते हुए कहीं। इस कार्यक्रम की थीम ‘वार्ता से विकास’ रखी गई थी। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत में रक्षा क्षेत्र से जुड़े स्टार्टअप्स की नई लहर उभर रही है। ड्रोन तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में ये स्टार्टअप्स आधुनिक रक्षा परिदृश्य को नई दिशा दे रहे हैं। आज का नवाचार कल की सैन्य क्षमता है। उन्होंने ये भी कहा कि जो देश आज तकनीक के क्षेत्र में अग्रणी होगा, वह भविष्य के युद्धों में रणनीतिक बढ़त हासिल करेगा। राजनाथ सिंह ने युवाओं से आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित करने का आह्वान करते हुए कहा कि जिस देश के पास अपनी तकनीक होती है, वह अपने भविष्य को स्वयं आकार देने की ताकत रखता है। उन्होंने कहा, “भारत के स्टार्टअप्स और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, नवाचार के नए ध्वजवाहक बनकर उभरे हैं। डीप-टेक से लेकर भविष्य की अत्याधुनिक तकनीकों तक, ये संस्थान रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रहे हैं। अनुसंधान से लेकर विनिर्माण तक, आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में लघु एवं मध्यम उद्यम और स्टार्टअप्स की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।” रक्षा मंत्री ने रक्षा क्षेत्र में तकनीकी विकास को गति देने और आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए डीआरडीओ, उद्योग जगत और सशस्त्र बलों के बीच अधिक सहयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, “’विकसित भारत 2047′ के लक्ष्य को हासिल करने में रक्षा क्षेत्र की निर्णायक भूमिका है। जब डीआरडीओ की तकनीक, उद्योग जगत की विनिर्माण क्षमता, स्टार्टअप्स का नवाचार और युवाओं की आकांक्षाएं एक दिशा में आगे बढ़ेंगी, तब भारत की सैन्य शक्ति नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगी। यही ‘न्यू इंडिया’ की सामूहिक शक्ति है।

ब्रिक्स बैठक में मोदी का संदेश, आपसी हित और सम्मान से आगे बढ़ें भारत-चीन

नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि हाल ही में नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा हुई। नई दिल्ली में मंगलवार को साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पीएम मोदी ने बैठक के दौरान इस बात पर जोर दिया कि भारत और चीन को एक-दूसरे की मूल चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता दिखानी चाहिए और आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता से निर्देशित होना चाहिए। जब बैठक को लेकर चीनी पक्ष के बयान के बारे में पूछा गया, जिसमें कहा गया था कि ताइवान और तिब्बत से जुड़े मुद्दों पर भारत की नीति और स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है और वह अपनी धरती पर किसी भी ताकत को चीन विरोधी गतिविधियों में शामिल होने की अनुमति नहीं देगा, तो जायसवाल ने जवाब दिया, “चर्चा के दौरान कई मुद्दे सामने आए, और हमने आपको उनसे अवगत कराया है, जिनमें आपके सवाल में उल्लिखित मुद्दे भी शामिल हैं। प्रधानमंत्री ने भारतीय चिंताओं का भी जिक्र किया और इस बात पर जोर दिया कि दोनों पक्षों को एक-दूसरे की मूल चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता दिखानी चाहिए और तीन आपसी सिद्धांतों- आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता से निर्देशित होना चाहिए।” पीएम मोदी और शी जिनपिंग ने 12 सितंबर को नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर द्विपक्षीय बैठक की, जहां दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि “मतभेदों को विवाद नहीं बनना चाहिए” और इस बात की पुष्टि की कि दोनों देशों को अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखना चाहिए। बैठक के बाद विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया, “दोनों नेताओं ने अगस्त 2025 में तियानजिन में अपनी पिछली बैठक के बाद से भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों में स्थिर प्रगति का स्वागत किया। उन्होंने पुष्टि की कि दोनों देशों को अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखना चाहिए। मतभेदों को विवाद नहीं बनना चाहिए। प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि दोनों पक्षों को तीन आपसी सिद्धांतों- आपसी सम्मान, आपसी संवेदनशीलता और आपसी हित से निर्देशित होना चाहिए।” बैठक के दौरान पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर विकास के लिए एक आवश्यक आधार बनी हुई है। विदेश मंत्रालय के बयान में आगे कहा गया, “उन्होंने दोनों पक्षों की ओर से सीमा से जुड़े मुद्दों पर मौजूदा समझौतों और सहमतियों का पालन करने की आवश्यकता पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने अपने समग्र द्विपक्षीय संबंधों के राजनीतिक परिप्रेक्ष्य और दोनों देशों के लोगों के दीर्घकालिक हितों के आधार पर सीमा प्रश्न के निष्पक्ष, उचित और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की।” दोनों नेताओं ने लोगों के बीच आपसी संबंधों में हुई प्रगति पर भी गौर किया और दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान, व्यावसायिक संबंधों और अधिक आवाजाही को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। बयान में आगे कहा गया, “आर्थिक और व्यापारिक संबंधों पर, उन्होंने संरचनात्मक व्यापार असंतुलन और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े मुद्दों सहित एक-दूसरे की चिंताओं को दूर करने और सार्थक और पूर्वानुमानित बाजार पहुंच को सुगम बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।” विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि दोनों पक्षों को क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर साझा आधार का विस्तार करना जारी रखना चाहिए और चुनौतियों से निपटना चाहिए। इस बैठक में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।

लाल सागर क्षेत्र में हालात बिगड़ने पर भारत को गहरी चिंता : विदेश मंत्रालय

नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने मंगलवार को कहा कि यमन के हूती समूह और सऊदी अरब के बीच हाल ही में हुए हमलों के कारण लाल सागर क्षेत्र में बिगड़ते हालात को लेकर भारत को गहरी चिंता है। नई दिल्ली में मीडिया ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “हमारे विदेश मंत्री ने ब्रिक्स समिट के दौरान सऊदी अरब के विदेश मंत्री के साथ बैठक की। बैठक में उन्होंने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों समेत कई मुद्दों पर चर्चा की। इसमें हूती विद्रोहियों का मुद्दा भी शामिल था। हाल ही में सऊदी अरब पर हमला हुआ था, जिसकी हमने निंदा की है। हम लाल सागर इलाके में बिगड़ते हालात को लेकर भी बहुत चिंतित हैं।” उन्होंने कहा, “हमने सऊदी अरब के इलाके पर हुए हमलों की निंदा की है, जिनमें आम लोगों के बुनियादी ढांचे और आर्थिक संपत्तियों को निशाना बनाया गया। ऐसे हमले इलाके में स्थिरता को कमजोर करते हैं और बाब-अल-मंदब जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही की आजादी के लिए खतरा पैदा करते हैं। ये हरकतें हमारे लिए बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं हैं। हम उम्मीद करते हैं कि इलाके में जल्द ही शांति और स्थिरता बहाल होगी। हमें दुनिया के उस हिस्से से ऊर्जा की सप्लाई मिलती रहती है।” यमन के हूती समूह ने सोमवार को कहा कि उसने दक्षिण-पश्चिमी सऊदी अरब में एक बड़े मिलिट्री एयर बेस पर दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं। यह सीमा-पार बढ़ते टकराव में एक बड़ी तेजी को दिखाता है। हूती-संचालित अल-मसीराह टीवी पर जारी एक बयान में मिलिट्री प्रवक्ता याह्या सरी ने कहा कि समूह ने यमन की सीमा के पास दक्षिण-पश्चिमी सऊदी शहर खमीस मुशेत में किंग खालिद एयर बेस पर दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे। इस ऑपरेशन में बेस पर मौजूद फाइटर-जेट हैंगर, रडार सिस्टम, रनवे, गोला-बारूद डिपो और अन्य मिलिट्री सुविधाओं को निशाना बनाया गया। उन्होंने दावा किया कि हमले ‘सटीक और सीधे’ थे और इनसे भारी नुकसान हुआ। भारत ने पहले भी सऊदी अरब पर हूती हमलों की निंदा की है, खासकर आम नागरिकों और आर्थिक ठिकानों को निशाना बनाए जाने को ‘अस्वीकार्य’ बताया है।

अभियंता दिवस पर ओम बिड़ला और केंद्रीय मंत्रियों ने दी शुभकामनाएं, भारत रत्न विश्वेश्वरैया को किया नमन

नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला और केंद्रीय मंत्रियों ने राष्ट्रीय इंजीनियर्स (अभियंता) दिवस पर बधाई दी है। इसके साथ ही भारत रत्न डॉ. मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती पर उनको याद करते हुए नमन किया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने एक्स पर लिखा, “भारत के महान अभियंता, दूरदर्शी राष्ट्रनिर्माता और भारत रत्न डॉ. मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती पर उन्हें भावपूर्ण नमन, तथा उनकी स्मृति में मनाए जाने वाले राष्ट्रीय अभियंता (इंजीनियर) दिवस की शुभकामनाएं। डॉ. विश्वेश्वरैया ने अपने अद्भुत तकनीकी कौशल, अनुशासन और दूरदर्शिता से भारत के जल-संसाधन, सिंचाई और सार्वजनिक बुनियादी ढांचा के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि ज्ञान, नवाचार और कर्तव्यनिष्ठा को राष्ट्रहित से जोड़ दिया जाए तो असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।” ओम बिड़ला ने आगे कहा, “आज के दिन देश के उन लाखों इंजीनियर्स के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है, जो अपनी प्रतिभा और नवाचार से भारत के विकास की नई इबारत लिख रहे हैं। आज जब भारत सशक्त अवसंरचना, आधुनिक तकनीक, डिजिटल प्रगति, आत्मनिर्भरता और नवाचार के नए आयाम गढ़ रहा है, तब हमारे इंजीनियर्स की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। सड़क हो या सेतु, जल प्रबंधन हो या ऊर्जा, अंतरिक्ष हो या डिजिटल तकनीक; देश की प्रगति के पीछे हमारे इंजीनियर्स का ज्ञान, परिश्रम और समाधान की सोच निरंतर कार्य कर रही है। राष्ट्र निर्माण की एक सशक्त शक्ति हमारे इंजीनियर्स का पुनः अभिवादन।” केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक्स पोस्ट में कहा, “आधुनिक भारत के निर्माण में अपना संपूर्ण जीवन अर्पित करने वाले महान अभियंता ‘भारत रत्न’ डॉ. मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन! राष्ट्र सेवा में रत सभी कर्मशील अभियंताओं को ‘अभियंता दिवस’ की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं! इंजीनियरिंग के माध्यम से राष्ट्र व समाज सेवा के लिए आपने जो अप्रतिम कार्य किए, वह सदैव भावी पीढ़ियों को समर्थ देश व सशक्त समाज के निर्माण के लिए प्रेरित करते रहेंगे। मां भारती के गुणी सपूत के चरणों में प्रणाम।” केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने एक्स पर पोस्ट किया, “भारत के नवनिर्माण में अप्रतिम भूमिका का निर्वहन करने वाले महान अभियंता ‘भारत रत्न’ डॉ. मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती पर कोटिशः नमन एवं राष्ट्र सेवा में अपना महत्वपूर्ण योगदान देते समस्त कर्मठ अभियंताओं को ‘अभियंता दिवस’ की ढेरों बधाई व शुभकामनाएं।” केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक्स पर लिखा, “अभियंता दिवस पर पर हम भारत रत्न सर एम. विश्वेश्वरैया जी को याद करते हैं और उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं। उनकी अद्भुत दूरदर्शिता, अनुशासन और इंजीनियरिंग में उत्कृष्टता आज भी पीढ़ियों को प्रेरित करती है। उनका जीवन हमें याद दिलाता है कि इंजीनियरिंग का मतलब सिर्फ़ ढांचे बनाना नहीं, बल्कि एक मजबूत, लचीला और आत्मनिर्भर राष्ट्र का निर्माण करना है। उन सभी इंजीनियरों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं, जो विचारों को प्रगति में बदलते हैं।” केंद्रीय तेल और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एक्स पोस्ट में कहा, “महान इंजीनियर और विद्वान, भारत रत्न सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती पर मैं उत्कृष्टता, अनुशासन और राष्ट्र-सेवा की उनकी अमिट विरासत को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। इंजीनियरिंग और राष्ट्र-निर्माण में उनका अहम योगदान हमेशा प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। इस दिन, जिसे इंजीनियर्स के रूप में भी मनाया जाता है, मैं ऊर्जा क्षेत्र सहित उन सभी इंजीनियरों को हार्दिक बधाई देता हूं जो एक मजबूत, अधिक समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान दे रहे हैं।” केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने एक्स पर लिखा, “भारत रत्न सर एम. विश्वेश्वरैया की जयंती पर हम एक ऐसे दूरदर्शी व्यक्ति को याद कर रहे हैं जिनकी इंजीनियरिंग की कुशलता और राष्ट्र-निर्माण की भावना ने आधुनिक भारत को आकार देने में मदद की। उनकी विरासत हर उस इंजीनियर में जीवित है जो ज्ञान को इनोवेशन में और विज़न को स्थायी प्रगति में बदलते हैं। भारत की तरक्की में इंजीनियरों की प्रतिभा और योगदान को सलाम। सभी को गर्व और प्रेरणा देने वाले अभियंता दिवस की शुभकामनाएं!” विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक्स पर पोस्ट किया, “आज भारत रत्न सर एम. विश्वेश्वरैया की जयंती पर उन्हें याद करते हैं। उनका जीवन और काम हमेशा प्रेरणा देते रहेंगे। अभियंता दिवस पर राष्ट्र की प्रगति और विकास में हमारे इंजीनियरों के अहम योगदान को सलाम।

लोकतंत्र की शक्ति जनभागीदारी, समानता और स्वतंत्रता में निहितः अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस पर भाजपा नेताओं ने दी बधाई

नई दिल्ली। अतंरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा समेत अन्य नेताओं ने देश और प्रदेशवासियों को बधाई दी है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक्स पर पोस्ट किया, “लोकतंत्र हमारी शक्ति, पहचान और हमारे अधिकारों का आधार है। अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस के अवसर पर समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। आइए, इस अवसर पर लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक मर्यादाओं और नागरिक अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और अधिक सशक्त बनाने का संकल्प लें।” राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एक्स पोस्ट में कहा, “समस्त प्रदेशवासियों को अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं! विविधता में एकता, जनभागीदारी और संवैधानिक मूल्यों के प्रति हमारी अटूट आस्था ही भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति है। आइए, इस अवसर पर हम संविधान की भावना को सशक्त बनाने, नागरिक अधिकारों का सम्मान करने और लोकतांत्रिक मूल्यों को और समृद्ध करने का संकल्प लें।” दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक्स पर लिखा, “विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसके 140 करोड़ देशवासी हैं। हमारे लिए लोकतंत्र जन-जन की भागीदारी और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य का संस्कार है। अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस पर आप सभी को हार्दिक बधाई। जनविश्वास और जनभागीदारी की यह शक्ति और सशक्त हो तथा हम सब मिलकर विकसित भारत के संकल्प को सिद्ध करें।” दिल्ली सरकार में मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने एक्स पर पोस्ट किया, “लोकतंत्र की शक्ति जनभागीदारी, समानता और स्वतंत्रता में निहित है। अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस के अवसर पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। आइए, लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत करते हुए राष्ट्र की प्रगति में सक्रिय भागीदारी का संकल्प लें।” बिहार सरकार में मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने एक्स पर लिखा, “वैश्विक एवं क्षेत्रीय स्तर पर लोकतंत्र और लोकतांत्रिक मूल्यों की स्थापना एवं सुदृढ़ीकरण में सदैव अग्रणी भूमिका निभाने वाले भारत के समस्त नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। लोकतंत्र केवल शासन व्यवस्था नहीं, बल्कि जनभागीदारी, समानता, स्वतंत्रता, अधिकार और कर्तव्य के प्रति हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है। आइए, हम सभी लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करते हुए एक सशक्त, समावेशी एवं विकसित भारत के निर्माण में अपना योगदान दें।” उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने एक्स पर पोस्ट किया, “आप सभी को अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं! लोकतंत्र जनभागीदारी, समानता, स्वतंत्रता और अधिकारों में विश्वास की सशक्त अभिव्यक्ति है। हमारा लोकतंत्र नागरिकों की सक्रिय सहभागिता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता से निरंतर मजबूत होता है। आइए, लोकतांत्रिक मूल्यों, संविधान की गरिमा और कर्तव्यों के प्रति सजग नागरिक भावना को मजबूत करने का संकल्प लें तथा सशक्त लोकतंत्र के माध्यम से विकसित भारत के निर्माण में सहभागी बनें।

‘मनुष्य को ऐसे कर्म करने चाहिए जो हृदय में प्रेम, सौहार्द्र और सद्भाव को बढ़ाएं’, प्रधानमंत्री मोदी ने साझा किया सुभाषित

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सामाजिक सौहार्द और मानवीय मूल्यों का संदेश देते हुए सोशल मीडिया पर सुभाषित शेयर किया है। इस वैदिक मंत्र के माध्यम से उन्होंने प्रेम, सद्भाव और आपसी भाईचारे की भावना को मजबूत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज में ऐसे कर्म होने चाहिए जो लोगों के हृदयों को जोड़ें और परस्पर स्नेह को बढ़ावा दें। पीएम की ओर से सोशल मीडिया पर, “सहृदयं सांमनस्यमविद्वेषं कृणोमि वः। अन्यो अन्यमभि हर्यत वत्सं जातमिवाघ्न्या॥” मंत्र शेयर किया गया है। जिसका हिंदी अर्थ है कि मनुष्य को ऐसे कर्म करने चाहिए जो हृदय में प्रेम, सौहार्द्र और सद्भाव को बढ़ाएं। सभी को एक-दूसरे के प्रति उसी प्रकार से स्नेह और आत्मीयता रखनी चाहिए, जिस प्रकार गाय अपने नवजात बछड़े से प्रेम करती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर शेयर यह वैदिक मंत्र अथर्ववेद के तीसरे कांड के 30वें सूक्त का पहला मंत्र है। इस मंत्र के माध्यम से ईश्वर कहते हैं, “हे मनुष्यो! मैं तुम्हारे बीच ऐसे वचनों और कर्मों की स्थापना करता हूं जिससे तुम सहृदय (एक जैसा हृदय रखने वाले), सांमनस्य (समान मन वाले), और अविद्वेष (द्वेष या ईर्ष्या से रहित) बनो। तुम एक-दूसरे से इस प्रकार प्रेम करो, जैसे कोई गाय अपने नवजात बछड़े से अगाध स्नेह करती है।” यह मंत्र परिवार, समाज और राष्ट्र के लोगों के बीच मतभेद मिटाकर एक सूत्र में बंधने की प्रेरणा देता है। गाय और बछड़े के उदाहरण से समझाया गया है कि जैसे गाय बिना किसी स्वार्थ और शर्त के बछड़े से प्रेम करती है, वैसे ही मनुष्यों को भी एक-दूसरे से प्रेम करना चाहिए। इस मंत्र का मूल सार यही है कि सबका उद्देश्य और विचार एक-दूसरे के हित में हो। यही वैदिक प्रार्थना का मूल सार है।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने खार‍िज की ट्रंप की अपील, मेल-बैलेट में बदलाव की मंजूरी नहीं

वॉशिंगटन। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (स्थानीय समय के अनुसार) ट्रंप प्रशासन को नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों के लिए मेल बैलेट पर नए और व्यापक नियम लागू करने से रोक दिया। कोर्ट ने उस आपातकालीन अपील को खारिज कर दिया, जिसमें निचली अदालत की ओर से लगाए गए प्रतिबंध को हटाने की मांग की गई थी। यह प्रतिबंध अमेरिकी डाक सेवा के नए नियमों पर लगाया गया था। कोर्ट ने अपने बिना हस्ताक्षर वाले आदेश में कहा, “सरकार के लिए यह साबित करना मुश्किल है कि जिला अदालत के शुरुआती आदेश को चुनौती देने के मामले में उसकी जीत की संभावना मजबूत है।” कोर्ट ने कहा कि आपातकालीन राहत देने के लिए जिन बातों पर विचार किया जाता है, वे इस मामले में प्रतिबंध हटाने के पक्ष में नहीं हैं। हालांकि, इस फैसले से यह अंतिम रूप से तय नहीं हुआ है कि डाक सेवा भविष्य के चुनावों में ऐसे नियम लागू कर सकती है या नहीं। लेकिन फिलहाल यह सुनिश्चित हो गया है कि तीन नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनावों में इन नियमों का इस्तेमाल नहीं होगा। इन्हीं चुनावों में यह तय होगा कि प्रतिनिधि सभा और सीनेट पर किसका नियंत्रण रहेगा। वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, 2024 में लगभग एक-तिहाई अमेरिकी मतदाताओं ने डाक के जरिए मतदान किया था। वॉशिंगटन पोस्ट ने भी यह संख्या करीब एक-तिहाई बताई है। डाक सेवा ने अगस्त में ये नियम लागू किए थे। इससे पहले मार्च में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। इन नियमों के तहत राज्यों को मतपत्रों के लिफाफों का नया डिजाइन बनाना पड़ता। उन पर चुनावी डाक का लोगों, मशीन से पढ़े जा सकने वाले फीचर और हर मतदाता के लिए अलग विशेष बारकोड लगाना जरूरी होता। साथ ही राज्यों को इन डिजाइनों को संघीय मंजूरी के लिए भेजना पड़ता और मतदाताओं के नाम, पते तथा बारकोड की जानकारी एक नए डाक सेवा पोर्टल पर अपलोड करनी होती। जो डाक सामग्री इन नियमों का पालन नहीं करती, उसे स्वीकार नहीं किया जाता और वापस राज्य के चुनाव अधिकारियों को भेज दिया जाता। चुनाव अधिकारियों का कहना था कि मतदान शुरू होने के इतने करीब इस तरह के बदलाव लागू करना संभव नहीं है। नॉर्थ कैरोलिना और विस्कॉन्सिन पहले ही मतपत्र भेजना शुरू कर चुके थे। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, एक दर्जन से ज्यादा अन्य राज्य भी सप्ताह के अंत तक मतपत्र भेजने की तैयारी कर रहे थे। केवल नॉर्थ कैरोलिना में ही लगभग 3 लाख अनुपस्थित मतदाता बैलेट पहले ही भेजे जा चुके थे। नॉर्थ कैरोलिना के अटॉर्नी जनरल जेफ जैक्सन ने कहा, “मतदान शुरू हो चुका है। चुनाव के बीच में नियम नहीं बदले जा सकते।” दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों से जुड़े चुनाव अधिकारियों ने कोर्ट से 2026 के चुनाव के लिए इन नियमों को रोकने की मांग की थी। यूटा और मिशिगन के रिपब्लिकन अधिकारियों ने भी कोर्ट के फैसले का स्वागत किया और कहा कि इससे स्थिति स्पष्ट हो गई है। जस्टिस सैमुअल एलिटो और क्लेरेंस थॉमस ने इस फैसले से असहमति जताई। एलिटो ने कहा कि डाक सेवा के पास ‘डाक वितरण को नियंत्रित करने की व्यापक शक्ति’ है। उनका मानना था कि नियमों को चुनौती देने वाले लोग यह साबित नहीं कर पाए कि एजेंसी ने अपने अधिकारों की सीमा स्पष्ट रूप से पार की है। जस्टिस ब्रेट कैवनॉ बहुमत के फैसले के साथ थे, लेकिन उन्होंने कहा कि संभव है डाक सेवा के पास ऐसे नियम बनाने का अधिकार हो। उन्होंने लिखा, “कम से कम इतनी संभावना जरूर है कि अंतिम नियम डाक सेवा को कानून की ओर से दिए गए अधिकारों के दायरे में आते हों।” लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि इस साल इन नियमों को लागू करना ‘मनमाना और अनुचित’ होता, क्योंकि राज्य और स्थानीय अधिकारियों के पास चुनाव से पहले इन्हें सही तरीके से लागू करने के लिए पर्याप्त समय नहीं था। ट्रंप प्रशासन का कहना था कि ये नियम संविधान के अनुरूप हैं और इनका मकसद चुनाव प्रक्रिया की सुरक्षा और विश्वसनीयता बढ़ाना है। वहीं, डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व वाले राज्यों और मतदान अधिकारों से जुड़ी संस्थाओं का तर्क था कि डाक सेवा चुनावों को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है, जबकि अमेरिकी संविधान के अनुसार चुनावों का संचालन और नियमन मुख्य रूप से राज्यों की जिम्मेदारी होती है।

भारत और कनाडा के बीच व्यापार वार्ता का चौथा दौर शुरू

नई दिल्ली। भारत और कनाडा ने सोमवार को यहां प्रस्तावित ‘कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट’ (CEPA) के लिए बातचीत का चौथा दौर शुरू किया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दोनों देशों का लक्ष्य इस साल के अंत तक इस समझौते को अंतिम रूप देना है।पांच दिनों तक चलने वाली इस बातचीत में जिन मुद्दों पर चर्चा होगी, उनमें सामान और सेवाओं का व्यापार, ‘रूल्स ऑफ़ ओरिजिन’ (उत्पत्ति के नियम) और व्यापार में तकनीकी बाधाएं शामिल हैं। यह दौर जुलाई में ओटावा में हुई बातचीत के तीसरे दौर के बाद हो रहा है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इस साल मार्च में नई दिल्ली में हुई अपनी बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच CEPA के लिए बातचीत पूरी करने का लक्ष्य साल के अंत तक तय किया था। साथ ही, उन्होंने ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्रों में आपसी सहयोग को और गहरा करने पर सहमति जताई थी।दोनों नेताओं के बीच शिखर सम्मेलन के बाद जारी एक संयुक्त बयान के अनुसार, नेताओं ने भरोसा जताया कि एक व्यापक व्यापार ढांचा इस साझेदारी के लिए एक मजबूत आर्थिक आधार का काम करेगा। साथ ही, यह 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को (कनाडाई) $70 बिलियन (4.65 लाख करोड़ रुपये) तक बढ़ाने की साझा महत्वाकांक्षा को भी पूरा करने में मदद करेगा।2024-25 में भारत और कनाडा के बीच सामान का द्विपक्षीय व्यापार $8.66 बिलियन का था, जबकि कनाडा को भारत का निर्यात $4.22 बिलियन तक पहुंच गया था।कनाडा को भारत के निर्यात की प्रमुख वस्तुओं में फार्मास्युटिकल उत्पाद, मशीनरी के पुर्जे और मैकेनिकल उपकरण, लोहा और स्टील का सामान, इलेक्ट्रॉनिक सामान, ऑर्गेनिक रसायन, आभूषण, रत्न और कीमती पत्थर, कपड़े और टेक्सटाइल, समुद्री भोजन, इंजीनियरिंग का सामान और ऑटो पार्ट्स शामिल हैं। कनाडा से भारत के प्रमुख आयात में दालें, उर्वरक, खनिज ईंधन, लकड़ी की लुगदी, रत्न और कीमती पत्थर, विमान के पुर्जे, मशीनरी के पुर्जे और लोहा व एल्यूमीनियम का स्क्रैप शामिल हैं।कनाडा को सेवाओं के निर्यात में भारत के IT सेक्टर का मुख्य योगदान है।प्रधानमंत्री कार्नी की भारत यात्रा ने दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों में उल्लेखनीय सुधार की नींव रखी। इससे पहले, कनाडा के प्रधानमंत्री के तौर पर उनके पूर्ववर्ती जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल में ये संबंध बहुत खराब हो गए थे। ट्रूडो सरकार पर कनाडा में भारत-विरोधी एजेंडा चलाने के लिए सिख चरमपंथियों को बढ़ावा देने का आरोप लगता रहा था।

इज़राइल लेबनान में सुरक्षा क्षेत्र में आतंकवादी बुनियादी ढांचे को नष्ट करना जारी रखेगा: नेतन्याहू

यरूशलेम। इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को कहा कि इज़राइल ने हिज़्बुल्लाह पर एक और बड़ी जीत हासिल की है और लेबनान में सुरक्षा क्षेत्र में आतंकवादी बुनियादी ढांचे को नष्ट करने का काम जारी रहेगा।”हमने हिज़्बुल्लाह पर एक और बड़ी जीत हासिल की है: हमने ब्यूफोर्ट रिज और अली अल-ताहेर रिज पर उसके प्रमुख आतंकवादी गढ़ को नष्ट कर दिया है। हमारी नीति स्पष्ट है: हम लेबनान में सुरक्षा क्षेत्र में आतंकवादी बुनियादी ढांचे को नष्ट करना जारी रखेंगे। हम इज़राइल राज्य के लिए किसी भी खतरे को खत्म करना जारी रखेंगे,” इज़राइल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा।”और यहां से, मैं अपने दुश्मनों से कहता हूं: अगर आपने अब तक सबक नहीं सीखा है, और आप हम पर फिर से हमला करने का फैसला करते हैं, तो आपको और भी भारी मार झेलनी पड़ेगी। अभी भी काम पूरा करना बाकी है, और ईश्वर की मदद से, हम इसे पूरा करेंगे,” इसमें आगे कहा गया।पिछले महीने, लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने कहा था कि रोम में लेबनान और इज़राइल के बीच हालिया बातचीत के दौरान सीमा मुद्दों और कैदियों की वापसी पर प्रगति हुई है।लेबनान के राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, 7 अगस्त को कैबिनेट सत्र में बोलते हुए, आउन ने कहा कि रोम की बातचीत में चार मुख्य मुद्दों पर चर्चा हुई: युद्धविराम, घरों को गिराना और बुलडोज़र चलाना, सीमा, और कैदियों की वापसी और पायलट क्षेत्रों की पहचान।बयान में कहा गया है कि उन्होंने सीमा और कैदियों के मुद्दों पर “सकारात्मक प्रगति” का उल्लेख किया और उम्मीद जताई कि जल्द ही व्यावहारिक कदम उठाए जाएंगे।उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रशासन युद्धविराम और पायलट क्षेत्रों के शेष मुद्दों को हल करने के लिए काम करेगा, और कहा कि अमेरिकी जनरल जोसेफ क्लियरफील्ड इन मामलों पर आगे की कार्रवाई के लिए जल्द ही बेरूत पहुंचेंगे।स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, ये टिप्पणियां इज़राइली और लेबनामी अधिकारियों द्वारा रोम में तीन दिनों की बातचीत खत्म करने के एक दिन बाद आईं, जिसका उद्देश्य अपनी सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को आगे बढ़ाना और जून के अंत में वाशिंगटन में हुए फ्रेमवर्क समझौते को लागू करना था।शिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, हिज़्बुल्लाह द्वारा विरोध की गई यह बातचीत दोनों सरकारों के बीच बातचीत का सातवां दौर है।

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के सहयोगी BJP में शामिल हुए

चंडीगढ़। दिवंगत प्रकाश सिंह बादल के करीबी रिश्तेदार मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों बादल ने सोमवार को हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मौजूदगी और राज्य पार्टी अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया। उन्होंने पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री के पॉलिटिकल सेक्रेटरी के तौर पर 25 साल तक और 1997 से 2002 तक अकाली सरकार में मंत्री के तौर पर काम किया था।उनके पिता, दिवंगत गुरराज सिंह ढिल्लों बादल, 1952 से 1958 तक शिरोमणि अकाली दल की ओर से राज्यसभा सांसद रहे और प्रकाश सिंह बादल के शुरुआती राजनीतिक सफर में अहम भूमिका निभाई।मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों बादल ने भारतीय सेना में सेवा की और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। उन्होंने 1988 तक सेना में अपनी सेवाएं दीं।वे 1994 से चुनावी अभियानों से जुड़े रहे हैं और लांबी विधानसभा क्षेत्र के लोगों के साथ सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं, जिससे उस इलाके और वहां के लोगों के साथ उनका लंबे समय से संबंध बना हुआ है।उनके BJP में शामिल होने को पंजाब में, खासकर मालवा क्षेत्र में पार्टी की संगठनात्मक और राजनीतिक ताकत में एक अहम बढ़ोतरी के तौर पर देखा जा रहा है।सनौर विधानसभा क्षेत्र में BJP को एक और बड़ी मजबूती तब मिली जब आम आदमी पार्टी (AAP) की सनौर इकाई के अध्यक्ष, सनौर विधानसभा क्षेत्र के संगठन प्रभारी और SC विंग के राज्य सचिव प्रदीप जोशन अपने समर्थकों के साथ BJP में शामिल हो गए।उनके शामिल होने को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि प्रदीप जोशन के साथ सनौर के कई प्रमुख राजनीतिक नेता, पदाधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता भी BJP में शामिल हुए।BJP में शामिल होने वाले प्रमुख नेताओं में शिरोमणि अकाली दल के मालवा ज़ोन की SC विंग के अध्यक्ष स्वर्ण सिंह शामिल थे; रजत बतीश, नरोत्तम भटनागर, वरिंदर बतीश, रोहित वालिया, आशीष गौर, मानव, संजीव कुमार, दिनेश शर्मा, कमल वालिया, याह कुमार, विजय कुमार भारद्वाज और परमिंदर भारद्वाज।सनौर समाज कल्याण क्लब से जुड़े कई जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता भी बीजेपी में शामिल हुए। इनमें वरिंदर सिंह, हरमिंदर सिंह, जगदीप सिंह, गुरबीर सिंह, मनदीप सिंह, दविंदर सिंह, गुरवीर बट्टू और गुरविंदर सिंह शामिल थे।प्रदीप जोशन और अन्य नए सदस्यों का बीजेपी में स्वागत करते हुए ढिल्लों ने कहा कि जाने-माने राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं का पार्टी में शामिल होना बीजेपी की नीतियों और नेतृत्व में लोगों के बढ़ते भरोसे को दिखाता है।उन्होंने कहा कि बीजेपी पंजाब के विकास और समाज के हर वर्ग के कल्याण के लिए पूरी निष्ठा से काम करती रहेगी।प्रदीप जोशन और उनके बड़ी संख्या में समर्थकों के शामिल होने से सनौर विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी का संगठनात्मक आधार और ज़मीनी स्तर पर मौजूदगी और मज़बूत होने की उम्मीद है।