एशियन गेम्स: बांग्लादेश और चीन महिला क्रिकेट टीम के बीच होने वाला मैच रद्द

निशिन। एशियन गेम्स 2026 के तहत महिला क्रिकेट में बांग्लादेश और चाइना के बीच होने वाला मुकाबला रद्द कर दिया गया है। दोनों ही टीमों को 1-1 अंक दिए गए हैं। बांग्लादेश और चाइना महिला क्रिकेट टीम के बीच गुरुवार को भारतीय समयानुसार सुबह 5:30 से कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क में मुकाबला होना था। इस क्वार्टर फाइनल मुकाबले पर एशिया के क्रिकेट फैंस की नजर थी। बारिश के कारण आउआउट गिला होने की वजह से मैच के लिए टॉस भी नहीं हो सका और इसे रद्द कर दिया गया। अंपायरों ने आउटफिल्ड ठीक होने का इंतजार किया। लंबे समय तक इंतजार के बाद भी जब मैच के लिए परिस्थितियां अनुकूल नहीं हुईं, तो मैच रद्द कर दिया गया और दोनों ही टीमों के बीच 1-1 अंक बांट दिया गया। मैच रद्द होने का नुकसान कहीं न कहीं बांग्लादेश को हुआ है। बांग्लादेश की टीम तुलनात्मक रूप से चीन की टीम से मजबूत है। मैच होने की स्थिति में बांग्लादेश की जीत की संभावना ज्यादा थी। ऐसे में मैच का न होना और चाइना की टीम के साथ 1 अंक साझा करना बांग्लादेश के लिए नुकसानदायक है। बांग्लादेश महिला टीम: दिलारा अख्तर, जुएरिया फिरदौस, सोभाना मोस्टरी, निगार सुल्ताना (विकेटकीपर), शोरना अख्तर, शर्मिन अख्तर, फहीमा खातून, राबेया खान, नाहिदा अख्तर, सुल्ताना खातून, मारूफा अख्तर, सरमिन सुल्ताना, संजीदा अख्तर मेघला, फरिहा त्रिसना। चीन की महिला टीम: झेंग लिली, सुन मेंग याओ, मिंगुए झू, हान ली, झांग जियांग, जी मे (विकेटकीपर), हांग झुआओ (कप्तान), यांग यु जुआन, चेन जिनू, मेंगटिंग लियू, जू कियान, वेंनजिंग यीन, झी जिंयू। एशियन गेम्स में महिला क्रिकेट का दूसरा क्वार्टर फाइनल पाकिस्तान और थाइलैंड के बीच होना है। यह मुकाबला भी कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क में ही होना है। इसलिए इस मुकाबला पर भी संशय है। मुकाबला होने की स्थिति में पाकिस्तान के पास जीत का अवसर है।

योगी आदित्यनाथ और मोहन यादव समेत कई मुख्यमंत्रियों ने पीएम मोदी को दी जन्मदिन की बधाई, बताया विकसित भारत का शिल्पी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन के अवसर पर देशभर से उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी जा रही हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, पश्चिम बंगाल के सीएम सुवेंदु अधिकारी और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी समेत कई ताओं ने पीएम मोदी को जन्मदिन की बधाई दी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर पोस्ट किया, “145 करोड़ भारतीयों के जीवन में सुख, समृद्धि, सुरक्षा एवं स्वाभिमान का नवप्रभात लाने हेतु अविराम राष्ट्रयज्ञ में समर्पित, विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय राजनेता, ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के स्वप्नद्रष्टा, ‘नए भारत के शिल्पी’ और हमारे मार्गदर्शक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई।” उन्होंने लिखा, “‘नेशन फर्स्ट’ के पावन संकल्प, कर्मनिष्ठा एवं लोक-कल्याण के प्रति आपका समर्पित जीवन ‘विकसित भारत’ के ध्येय को साकार करने का प्रेरणास्रोत है। आपके नेतृत्व में भारत आत्मनिर्भरता, सुशासन, सांस्कृतिक पुनर्जागरण तथा वैश्विक प्रतिष्ठा के नवीन कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि आपको उत्तम स्वास्थ्य एवं सुदीर्घ व यशस्वी जीवन प्रदान करें।” उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लिखा, “मां भारती के अनन्य साधक, युवा, किसान और गरीब कल्याण हेतु सदैव समर्पित, विश्व पटल पर भारत का गौरव बढ़ाने वाले यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।” धामी ने कहा, “आपके मार्गदर्शन में भारत ने आत्मविश्वास, नवाचार और विकास की नई ऊंचाइयों को छुआ है। आपके कुशल नेतृत्व में करोड़ों देशवासियों के जीवन में नई आशा और नए अवसरों का संचार हुआ है। बाबा केदार से आपके दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और मंगलमय जीवन की प्रार्थना करता हूं। आपके नेतृत्व में भारत प्रगति पथ पर निरंतर नए कीर्तिमान स्थापित करता रहे, यही कामना है।” पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। राष्ट्र-निर्माण के प्रति आपका अथक समर्पण, दूरदर्शी नेतृत्व और अटूट संकल्प दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रेरित करता रहता है। आपके गतिशील मार्गदर्शन में भारत प्रगति, गौरव और आत्मनिर्भरता की नई ऊंचाइयां छू रहा है। आपकी अच्छी सेहत, लंबी उम्र और असीम शक्ति के लिए प्रार्थना करता हूं, ताकि आप हमारी मातृभूमि को एक उज्ज्वल भविष्य की ओर ले जाते रहें।” ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन के अवसर पर मैं ओडिशा की पूरी जनता की ओर से उन्हें हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। विकसित भारत के दूरदर्शी, राष्ट्र के स्वाभिमान और जन-सेवा के अद्वितीय प्रतीक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके 76वें जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं। पीएम मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व ने आज पूरे देश में जागृति का एक नया अध्याय लिखा है।” उन्होंने कहा, “ओडिशा और यहां के लोगों के प्रति उनके गहरे स्नेह तथा राज्य में बुनियादी ढांचे के विकास में उनके अपार सहयोग के लिए हम सदैव उनके आभारी रहेंगे। इस यादगार अवसर पर जन-कल्याण के प्रति मोदी के आदर्शों से प्रेरित होकर हम ‘सेवा संकल्प पर्व’ मना रहे हैं। हम समर्पित जन-सेवा, गरीबों के कल्याण और समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े हर व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान लाकर एक समृद्ध, सशक्त और विकसित ओडिशा के निर्माण के लिए पुनः संकल्पित हैं।” माझी ने कहा, “मैं महाप्रभु श्री जगन्नाथ के श्रीचरणों में पीएम मोदी के दीर्घायु, स्वस्थ और रोग-मुक्त जीवन तथा उन पर अपार कृपा बनाए रखने की प्रार्थना करता हूं। जीवन और सेवा की उनकी यह लंबी और समर्पित यात्रा सदैव भारत राष्ट्र को नई दिशा प्रदान करती रहे। पीएम मोदी के कुशल नेतृत्व में ‘विकसित भारत’ का सपना साकार हो और हमारा भारत विश्व में एक विजयी राष्ट्र के रूप में निरंतर आगे बढ़ता रहे।” दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने कहा, “पीएम मोदी को जन्मदिन की हृदयपूर्वक शुभकामनाएं। दिल्ली को आपका स्नेह और मार्गदर्शन निरंतर मिलता रहा है। आपके नेतृत्व में आज राजधानी नई गति, नए सामर्थ्य और नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही है। शहर का स्वरूप बदल रहा है और उसके साथ लोगों के जीवन में भी नई सुविधाएं, नए अवसर और नई आशाएं जुड़ रही हैं। हमारी बहनें हों, युवा साथी हों, श्रमिक परिवार हों, वरिष्ठ नागरिक हों या भविष्य के सपने संजोए हमारे बच्चे, विकसित दिल्ली की यात्रा का केंद्र जन-जन का जीवन है।” उन्होंने कहा, “आज दिल्ली को इस बात का गौरव है कि वह अपने बढ़ते सामर्थ्य के साथ विकसित भारत के विराट संकल्प में अपनी शक्ति जोड़ रही है। प्रधानमंत्री, मां भारती की सेवा के प्रति आपका समर्पण और राष्ट्र को निरंतर आगे ले जाने का आपका संकल्प हम सभी के लिए प्रेरणा है। बाबा काशी विश्वनाथ का आशीर्वाद सदैव आप पर बना रहे। समस्त दिल्लीवासियों की ओर से जन्मदिन की अनंत शुभकामनाएं।” मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, “जनसेवा की अविराम साधना से राष्ट्र के नवनिर्माण को नई दिशा देने वाले, जन-आकांक्षाओं के संकल्प को साकार करने वाले यशस्वी प्रधानमंत्री मोदी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। ज्ञान को राष्ट्रशक्ति का आधार बनाकर आपने भारत के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी है। ‘विकसित भारत’ का आपका स्वप्न आज करोड़ों देशवासियों का प्रण बन चुका है। बाबा सोमनाथ से आपके उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की मंगलकामना है।

18 सितंबर का पंचांग: संतान की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए रखें संतान सप्तमी का व्रत

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है। 18 सितंबर 2026 (शुक्रवार) को भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि दोपहर 1:01 बजे तक है। इसके बाद अष्टमी तिथि शुरू हो जाएगी। इस दिन संतान की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतान सप्तमी का व्रत के अवसर पर भगवान शिव व मां पार्वती की पूजा करना फलदाई रहेगा। शुक्रवार होने की वजह से मां संतोषी की पूजा जाती है। शुक्रवार सुबह 6:18 बजे सूर्योदय और शाम 6:24 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं, दोपहर 12:42 चंद्रोदय और रात 11:18 बजे चंद्रास्त होगा। पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्य हस्त नक्षत्र में स्थित रहेगा। शुक्रवार को दोपहर 1:34 बजे तक प्रीति योग प्रभावी रहेगा, इसके बाद आयुष्मान योग शुरू हो जाएगा। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:56 से दोपहर 12:45 बजे तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है। अमृत काल दोपहर 12:53 से 2:41 बजे तक रहेगा। वहीं, राहुकाल सुबह 10:50 बजे से 12:21 बजे और गुलिक काल सुबह 7:48 से 9:19 बजे तक रहेगा। इसके अलावा, यमगंड काल दोपहर 3:22 से 4:53 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय में नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए क्योंकि इन्हें अशुभ समय माना जाता है। शुक्रवार को इस दिन सूर्य कन्या राशि में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा धनु राशि में स्थित रहेगा। पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु के मुताबिक, इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि यात्रा करना अनिवार्य हो, तो कुछ विशेष ज्योतिषीय उपायों को अपनाकर प्रस्थान किया जा सकता है।

सुरक्षित भारत ही समृद्ध भारत की पहली शर्त, प्रधानमंत्री मोदी ने सिद्ध कर दिखाया: अमित शाह

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शुभकामनाएं दी हैं। शाह ने पीएम मोदी को अथक परिश्रम, त्याग और दूरदर्शिता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि कर्म को साधना और राष्ट्रसेवा को जीवन का ध्येय बनाकर चलने वाले मोदी जी का जीवन तप, त्याग और अटूट संकल्प की गाथा है। सेवा और समर्पण से भरी उनकी यात्रा करोड़ों देशवासियों के लिए प्रेरणा है। अमित शाह ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में देश ने पहली बार आतंकवाद के विरुद्ध ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को धरातल पर उतरते देखा। धारा 370 का अंत, सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर, इन निर्णयों ने दुनिया को बता दिया कि अब भारत केवल निंदा नहीं करता, निर्णायक जवाब देता है। नक्सलवाद समाप्त हो चुका है, पूर्वोत्तर में दशकों पुराने विवाद शांति समझौतों से सुलझे हैं और सीमाएं सुरक्षित हैं। सुरक्षित भारत ही समृद्ध भारत की पहली शर्त है, मोदी जी ने इसे सिद्ध कर दिखाया है। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में कभी विकास की बात तक नहीं होती थी, मोदी जी के नेतृत्व में वहां आज विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा है। कश्मीर में दुनिया का सबसे ऊंचा चिनाब रेलवे ब्रिज, पूर्वोत्तर में सड़कों और पुलों का जाल, वंदे भारत ट्रेनें और सेमीकंडक्टर यूनिट, ये नए भारत के प्रतीक हैं। शाह ने कहा कि जिस भारत को कभी ‘फ्रैजाइल फाइव’ कहा गया, वह आज मोदी जी के नेतृत्व में विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में है और हमारा पासपोर्ट सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। 36 देशों की ओर से मोदी जी को दिया गया सर्वोच्च सम्मान वस्तुतः सभी भारतीयों का सम्मान है। गृह मंत्री ने कहा कि मोदी जी के नेतृत्व की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उनके शासन के केंद्र में हमेशा समाज का अंतिम व्यक्ति रहा है। जब कोई मां अपने पक्के घर की चौखट पर खड़े होकर आशीर्वाद देती है, या कोई बहन बताती है कि आयुष्मान कार्ड ने उसके परिवार को बचा लिया, तब इन योजनाओं का असली अर्थ समझ आता है। तीन तलाक से मुक्ति और नारी शक्ति वंदन अधिनियम ने महिलाओं को नया आत्मविश्वास दिया, वहीं स्टार्टअप इंडिया, स्किल इंडिया और नई शिक्षा नीति से युवाओं के लिए अवसरों के द्वार खुले। करोड़ों लोगों के जीवन में आया यह बदलाव ही मोदी जी की सबसे बड़ी पूंजी है। अमित शाह ने कहा कि एक सामान्य स्वयंसेवक से मुख्यमंत्री और फिर देश के प्रधानमंत्री तक मोदी जी की यात्रा इस बात का प्रमाण है कि जब जीवन का लक्ष्य राष्ट्रसेवा हो, तो कठिन से कठिन संकल्प भी सिद्ध किए जा सकते हैं। उन्होंने सत्ता को साध्य नहीं, बल्कि गरीब कल्याण और राष्ट्र निर्माण का साधन मान कर कार्य किया। मेरे जैसे कार्यकर्ता सौभाग्यशाली हैं, जिन्हें उनकी हर भूमिका में उनके साथ काम करने का अवसर मिला।

राष्ट्रपति मुर्मु ने पीएम मोदी को दी जन्मदिन की शुभकामनाएं, कहा- ‘आपने स्थापित किए सुशासन के नए प्रतिमान’

नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके जन्मदिन पर बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि वे सांस्कृतिक गौरव की भावना के साथ आधुनिक प्रगति के मार्ग पर चलते हुए हमारे देशवासी, विरासत और विकास के समन्वय को साकार कर रहे हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं। विगत 25 वर्षों में मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के कार्यकाल में आपने सुशासन के अनेक नए प्रतिमान स्थापित किए हैं व समावेशी विकास को अभूतपूर्व गति और नई दिशा प्रदान की है।” उन्होंने आगे लिखा, “सांस्कृतिक गौरव की भावना के साथ आधुनिक प्रगति के मार्ग पर चलते हुए हमारे देशवासी, विरासत और विकास के समन्वय को साकार कर रहे हैं। मैं ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य व दीर्घायु की प्रार्थना करती हूं, ताकि आप जन-सेवा और राष्ट्र-निर्माण के अपने अभियान को निरंतर आगे बढ़ाते रहें।” विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “आइए, देश और दुनिया के साथ मिलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सफलता, अच्छे स्वास्थ्य और देशवासियों की सेवा में उनके लंबे कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं दें। आप अपने विचारों और उपलब्धियों से दुनिया भर में लोगों को प्रेरित करते रहते हैं।” केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी प्रधानमंत्री मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। इस चुनौतीपूर्ण समय में भी आप हमारे देश को ‘विकसित भारत’ की ओर मजबूती से आगे ले जा रहे हैं। आपने हर कदम पर राष्ट्र को सर्वोपरि रखा है। सरकारी खजाने से खर्च होने वाले हर पैसे से जन-कल्याण सुनिश्चित किया है। मैं प्रार्थना करती हूं कि आप मां भारती की सेवा करते हुए दीर्घायु हों और स्वस्थ जीवन व्यतीत करें।” भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने लिखा, “राष्ट्रसेवा और समर्पण के पर्याय, 140 करोड़ देशवासियों के नेतृत्वकर्ता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। ‘नेशन फर्स्ट’ के संकल्प के साथ आपकी यह यात्रा सेवा, सुशासन और जनकल्याण की एक प्रेरक गाथा रही है। यह यात्रा किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि देशवासियों के उस सामूहिक स्वप्न की भी यात्रा है, जिसे आपने अपने कर्म और साधना से दिशा दी है।” उन्होंने लिखा, “आपके मार्गदर्शन में भारत विकास और आत्मनिर्भरता के नए आयाम गढ़ रहा है तथा विश्व पटल पर अपनी नई पहचान और सामर्थ्य के साथ निरंतर आगे बढ़ रहा है। ईश्वर से प्रार्थना है कि आपको उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और निरंतर राष्ट्रसेवा की शक्ति प्रदान करें।

गाजा में इजरायली बमबारी में क्षतिग्रस्त बहुमंजिला इमारत गिरी, 11 बच्चों समेत 21 लोगों की मौत

गाजा। पश्चिमी गाजा शहर में एक रिहायशी इमारत गिरने से मरने वालों की संख्या बढ़कर 21 हो गई है। मृतकों में 11 बच्चे और 6 महिलाएं शामिल हैं। इस हादसे में 25 से अधिक लोग घायल भी हुए हैं। नागरिक सुरक्षा विभाग के प्रवक्ता महमूद बासल ने बताया कि ‘अल-सादा’ नाम की छह मंजिला इमारत बुधवार तड़के ढह गई। यह इमारत पहले इजरायली बमबारी में क्षतिग्रस्त हो चुकी थी। यह इमारत निकट पूर्व में फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी (यूएनआरडब्ल्यूए) के मुख्यालय के पास स्थित थी। इस इमारत में लगभग 100 विस्थापित लोग रह रहे थे। स‍िन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, बासल ने कहा कि बचाव टीमों ने 16 घंटे तक चले अभियान के दौरान 45 लोगों को सुरक्षित निकाला और 21 शव बरामद किए। उन्होंने बताया कि 35 अन्य लोग खुद ही निकलने में सफल रहे। इमारत के मलबे के बाहर दर्जनों शोकाकुल परिजन इकट्ठा हुए। कई लोग अपने हाथों से ही मलबा हटाकर अपने प्रियजनों को खोजने की कोशिश करते दिखाई दिए। 54 वर्षीय लुआय अल-अजला ने इस हादसे में अपने परिवार के लगभग 10 लोगों को खो दिया। फिलिस्तीनी अधिकारियों ने आरोप लगाया कि बचाव कार्यों के लिए जरूरी भारी मशीनों और उपकरणों को लाने पर इजरायल की पाबंदियों के कारण राहत कार्य प्रभावित हो रहे हैं। गाजा में हमास की ओर से संचालित मीडिया कार्यालय ने एक बयान में कहा कि पूरे गाजा पट्टी में 8,500 से अधिक लापता लोग अब भी मलबे के नीचे दबे हुए हैं। बयान के अनुसार, भारी मशीनरी और बचाव उपकरणों की कमी के कारण उन्हें निकालना मुश्किल हो रहा है। कार्यालय ने हजारों क्षतिग्रस्त इमारतों को टाइम बम जैसा खतरा बताया। महमूद बासल ने चेतावनी दी कि सर्दियों के करीब आने के साथ 2,000 से अधिक रिहायशी इमारतों के गिरने का खतरा बना हुआ है। उन्होंने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ और युद्धविराम की गारंटी देने वाले देशों से अपील की कि बचाव उपकरणों को गाजा में आने की अनुमति दिलाई जाए।ऐसा न होने पर ‘कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।’ यह इमारत ऐसे समय में गिरी है जब युद्धविराम के उल्लंघन की घटनाएं जारी हैं। अक्टूबर 2025 में लागू हुए युद्धविराम समझौते के बावजूद, हमास और इजरायल के बीच चल रही बातचीत में अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।

सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल डिग्री और रजिस्ट्रेशन के धोखाधड़ी-रोधी वेरिफिकेशन की मांग वाली PIL खारिज की

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। इस याचिका में देश भर में मेडिकल योग्यता और रजिस्ट्रेशन के लिए एक समान और धोखाधड़ी-रोधी वेरिफिकेशन सिस्टम बनाने के निर्देश देने की मांग की गई थी।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने वकील नरेंद्र कुमार गोस्वामी की याचिका खारिज कर दी और उन्हें सुप्रीम कोर्ट में बार-बार PIL दाखिल करने से बचने की सलाह दी।जस्टिस नरसिम्हा की अगुवाई वाली बेंच ने टिप्पणी की, “आप हर हफ़्ते एक PIL दाखिल करते हैं। आप किस तरह की याचिकाएं तैयार करते हैं? आपने इसे एक फ़ैक्ट्री बना दिया है। बस यही है, हर हफ़्ते आप एक रिट याचिका दाखिल करते हैं। जैसे ही कोई ख़बर देखते हैं, आप याचिका तैयार कर लेते हैं। अपनी मांगों को तो देखिए। क्या आप कभी अपना दिमाग भी लगाते हैं?”बेंच ने यह भी सवाल किया कि क्या ऐसी याचिकाएं पब्लिसिटी के लिए दाखिल की जा रही हैं। उन्होंने कहा, “आप ऐसा क्यों करते हैं? सिर्फ़ इसलिए कि रिट याचिका दाखिल करना आसान है और कोई भी इसे दाखिल करके पब्लिसिटी पा सकता है? हमें इस तरह की याचिकाओं से परेशान न करें।खुद पेश हुए गोस्वामी ने समझाने की कोशिश की कि PIL में मेडिकल योग्यता और रजिस्ट्रेशन के वेरिफिकेशन से जुड़े अहम सवाल उठाए गए हैं। उन्होंने कथित फ़र्ज़ी मेडिकल डिग्री के बारे में याचिका में दिए गए आंकड़ों का भी ज़िक्र किया।हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया और उसे खारिज कर दिया।संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल इस PIL में अनुच्छेद 14 और 21 के तहत मौलिक अधिकारों को लागू करने और नेशनल मेडिकल कमीशन एक्ट, 2019 के तहत कानूनी ढांचे को लागू करने के निर्देश देने की मांग की गई थी।याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में सुरक्षित और कुशल मेडिकल इलाज का अधिकार भी शामिल है और जिन लोगों के पास फ़र्ज़ी, संदिग्ध या बिना वेरिफ़ाई की गई योग्यताएं हैं, उन्हें मेडिकल पेशे में आने या बने रहने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।याचिका में मेडिकल योग्यता और रजिस्ट्रेशन के लिए एक “भरोसेमंद, ऑडिट-योग्य, धोखाधड़ी-रोधी और उचित प्रक्रिया का पालन करने वाला” वेरिफिकेशन सिस्टम बनाने की मांग की गई थी। इसमें शुरुआती रजिस्ट्रेशन, रिन्यूअल, योग्यता जोड़ने और प्रैक्टिस करने के लाइसेंस को जारी रखने से पहले वेरिफिकेशन शामिल था। इसमें कहा गया था कि नेशनल मेडिकल रजिस्टर सिर्फ़ एक इलेक्ट्रॉनिक डेटाबेस नहीं है, बल्कि एक कानूनी आधार है जिस पर मरीज़, अस्पताल, सरकारी अधिकारी और समाज यह भरोसा करते हैं कि कोई मेडिकल प्रैक्टिशनर सही ढंग से योग्य और रजिस्टर्ड है। याचिका में नकली एजुकेशनल और प्रोफेशनल क्वालिफिकेशन से जुड़ी कई घटनाओं का ज़िक्र करते हुए कहा गया है कि ऐसे मामले रेगुलेटरी चिंता का विषय हैं।इसमें मई 2025 में हापुड़ की मोनाड यूनिवर्सिटी में उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स की रेड का ज़िक्र किया गया, जहाँ कथित तौर पर 1,372 नकली डिग्रियाँ/मार्कशीट और 262 नकली सर्टिफ़िकेट बरामद किए गए थे; इसके बाद पिछले साल नवंबर में एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने भी तलाशी ली थी।याचिकाकर्ता ने केरल पुलिस द्वारा जांचे गए नकली सर्टिफ़िकेट नेटवर्क, दिल्ली एंटी-करप्शन ब्रांच द्वारा जांचे गए नकली फ़ार्मेसी रजिस्ट्रेशन रैकेट और मार्च 2026 में राजस्थान पुलिस स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप द्वारा जांचे गए नकली फ़ॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन सर्टिफ़िकेट और फ़र्ज़ी मेडिकल रजिस्ट्रेशन से जुड़े रैकेट का भी ज़िक्र किया।याचिका में साफ़ किया गया कि याचिकाकर्ता इन मामलों में किसी आपराधिक दोष के फ़ैसले की मांग नहीं कर रहा था, बल्कि यह तर्क दे रहा था कि मेडिकल रजिस्ट्रेशन सिस्टम में मज़बूत वेरिफिकेशन सुरक्षा उपाय शामिल होने चाहिए।याचिकाकर्ता ने 26 फ़रवरी 2026 को केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय और नेशनल मेडिकल कमीशन को एक रिप्रेजेंटेशन सौंपा था, और फिर 31 मई 2026 को एक रिमाइंडर भेजा था, जिसमें मेडिकल क्वालिफिकेशन और रजिस्ट्रेशन के वेरिफिकेशन के लिए उपाय करने की मांग की गई थी।याचिका में दावा किया गया कि रिप्रेजेंटेशन का कोई जवाब नहीं मिला और भरोसेमंद वेरिफिकेशन सिस्टम की कमी के कारण उन्हें सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाना पड़ा।याचिकाकर्ता ने किसी व्यक्तिगत रजिस्ट्रेशन को रद्द करने, आपराधिक जांच की निगरानी करने या मेडिकल लापरवाही के दावों पर फ़ैसला करने के बजाय एक स्ट्रक्चरल और प्रिवेंटिव मैंडमस (संरचनात्मक और निवारक आदेश) की मांग की थी। याचिका में यह भी मांग की गई कि कोई भी वेरिफिकेशन, ऑडिट या प्रतिकूल कार्रवाई क़ानून के अनुसार, नोटिस देने, सुनवाई का मौका देने और तर्कपूर्ण आदेश के बाद की जाए, जो वैधानिक उपायों के अधीन हो।

ब्रिक्स समिट के घोषणापत्र में मल्टीलेटरलिज़्म (बहुपक्षवाद) के प्रति मज़बूत प्रतिबद्धता ‘भरोसा दिलाने वाली’: UN प्रमुख

संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने बुधवार को नई दिल्ली में वीकेंड पर अपनाए गए ब्रिक्स घोषणापत्र का स्वागत किया, जिसमें “मल्टीलेटरलिज़्म (बहुपक्षवाद) के प्रति मज़बूत प्रतिबद्धता” जताई गई थी।गुटेरेस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह “महत्वपूर्ण” है कि ब्रिक्स समिट से “एक साझा घोषणापत्र निकला, जिसमें सभी देशों ने मल्टीलेटरलिज़्म और संयुक्त राष्ट्र के प्रति मज़बूत प्रतिबद्धता जताई।UN प्रमुख ने कहा, “इस नज़रिए से, यह भरोसा दिलाने वाली बात है कि दुनिया की कई अहम ताकतें मानती हैं कि मल्टीलेटरलिज़्म ही संकटों से निपटने का तरीका है, और UN को इसमें केंद्र में होना चाहिए।उन्होंने कहा कि UN सुरक्षा परिषद के सभी देश समिट में मौजूद नहीं थे – जिसमें उन्होंने खुद हिस्सा लिया था – लेकिन “अहम ताकतों” की मौजूदगी महत्वपूर्ण थी।चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, जिनके देश UN सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य हैं, ने समिट में हिस्सा लिया।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जिन्होंने समिट की अध्यक्षता की, और ब्राज़ील के विदेश मंत्री मौरो विएरा ने उन दो देशों का प्रतिनिधित्व किया जो स्थायी सदस्यता के इच्छुक हैं और जिन्हें इसके लिए UN सदस्यों का व्यापक समर्थन प्राप्त है।अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन समिट में शामिल नहीं थे क्योंकि ब्रिक्स उभरती हुई आर्थिक ताकतों का प्रतिनिधित्व करता है, जो अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में ज़्यादा बड़ी भूमिका की मांग करती हैं; इन संस्थानों पर पश्चिमी देशों का बहुत ज़्यादा दबदबा है।राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाला अमेरिका मुख्य देश है जो मल्टीलेटरलिज़्म का विरोध करता है, क्योंकि वह यूनिलैटरलिज़्म (एकतरफावाद) की अपनी नीति अपनाता है और UN व अन्य संस्थानों की भूमिका को कम करने की कोशिश करता है।उन्होंने ब्रिक्स का विरोध किया है क्योंकि वे इसे अमेरिका के दबदबे वाले एकतरफा वैश्विक शक्ति ढांचे को थोपने की अपनी कोशिश के लिए चुनौती मानते हैं।12 सितंबर को राजधानी में आयोजित 18वें ब्रिक्स समिट में अपनाए गए ‘नई दिल्ली घोषणापत्र 2026’ में वैश्विक स्वास्थ्य पहलों में सहयोग को और गहरा करने का स्वागत किया गया। साथ ही, मज़बूत, समावेशी और लोगों पर केंद्रित तरीकों से यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (सभी के लिए स्वास्थ्य सेवा) को आगे बढ़ाने के लिए समूह की प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया गया। घोषणापत्र में कहा गया, “हम ब्रिक्स सदस्यों के बीच लगातार सहयोग के महत्व और ब्रिक्स देशों में स्वास्थ्य के नतीजों को बेहतर बनाने के लिए बहुमूल्य अनुभवों, इनोवेशन और बेहतरीन तौर-तरीकों को साझा करने की ज़रूरत को समझते हैं। हम स्वास्थ्य के क्षेत्र में बहुपक्षीय सहयोग को बनाए रखने और मज़बूत करने के अपने साझा विश्वास को दोहराते हैं और विश्व स्वास्थ्य संगठन की अहम समन्वयकारी भूमिका पर ज़ोर देते हैं।

अरुणाचल के गवर्नर का कहना है कि नॉर्थ-ईस्ट को NERIST से बहुत उम्मीदें हैं

ईटानगर । अरुणाचल प्रदेश के गवर्नर लेफ्टिनेंट जनरल के.टी. परनाइक (रिटायर्ड) ने बुधवार को नॉर्थ ईस्टर्न रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (NERIST) कैंपस का दौरा किया। उन्होंने कहा कि पूरा नॉर्थ-ईस्ट क्षेत्र शिक्षा, रिसर्च और तकनीकी विकास में संस्थान के योगदान को लेकर बहुत उम्मीदें रखता है।गवर्नर ने कैंपस में NERIST के डीन और विभागों के प्रमुखों से बातचीत की। उन्होंने संस्थान को शानदार विरासत और अपार संभावनाओं वाला एक प्रमुख तकनीकी संस्थान बताया और कहा कि अरुणाचल प्रदेश और पूरे नॉर्थ-ईस्ट के लोग इस संस्थान से बहुत उम्मीदें रखते हैं।इस बात पर ज़ोर देते हुए कि टेक्नोलॉजी ही मानवता के भविष्य को आकार देगी, गवर्नर ने कहा कि तेज़ी से बदलते वैश्विक माहौल में मौके और चुनौतियां दोनों हैं। उन्होंने NERIST के एकेडमिक लीडर्स से कहा कि वे समय से आगे रहें और छात्रों को उभरती तकनीकी, आर्थिक और सामाजिक ज़रूरतों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए तैयार करें।लेफ्टिनेंट जनरल परनाइक (रिटायर्ड) ने कहा कि भविष्य उन्हीं का है जो नई चीज़ें बनाते हैं (इनोवेट करते हैं), बदलते हालात के हिसाब से ढलते हैं और असल दुनिया की समस्याओं का समाधान निकालते हैं। NERIST सोसाइटी के प्रेसिडेंट के तौर पर गवर्नर ने ज़ोर दिया कि संस्थान को ऐसे ग्रेजुएट तैयार करने की कोशिश करनी चाहिए जो तकनीकी रूप से सक्षम, इनोवेटिव और सामाजिक रूप से ज़िम्मेदार हों। उन्होंने कहा कि युवा दिमागों को मौके पैदा करने वाले, एंटरप्रेन्योर, रिसर्चर और लीडर बनना चाहिए जो अरुणाचल प्रदेश और देश की तरक्की में योगदान दे सकें।गवर्नर ने डीन और विभागों के प्रमुखों को प्रोत्साहित किया कि वे छात्रों को उभरते क्षेत्रों, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एडवांस्ड टेक्नोलॉजी, रिसर्च और इनोवेशन में बेहतरीन काम करने के लिए प्रेरित करें।कैंपस में हाल की कुछ नकारात्मक घटनाओं का ज़िक्र करते हुए, गवर्नर ने ईमानदारी, पारदर्शिता और सामूहिक ज़िम्मेदारी के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि NERIST परिवार के हर सदस्य को ईमानदारी, समर्पण और संस्थान के विकास के लिए साझा प्रतिबद्धता के साथ काम करना चाहिए।उन्होंने ज़ोर देकर कहा, “हमारा अंतिम लक्ष्य NERIST को उत्कृष्टता और राष्ट्रीय महत्व की नई ऊंचाइयों तक ले जाना होना चाहिए।अपना अटूट समर्थन दोहराते हुए, गवर्नर ने संस्थान को भरोसा दिलाया कि वे NERIST को तकनीकी उत्कृष्टता, इनोवेशन और राष्ट्र-निर्माण के केंद्र के रूप में मज़बूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और मदद करेंगे।बैठक में NERIST के डायरेक्टर प्रो. नरेंद्रनाथ एस और NERIST के इंचार्ज रजिस्ट्रार प्रो. सारसिंग गाओ भी मौजूद थे।

भारतीय इलाकों को लेकर चीन और पाकिस्तान के बीच किसी भी तरह का ‘सीमा सहयोग’ पूरी तरह से अस्वीकार्य है: MEA

नई दिल्ली। भारत ने बुधवार को चीन और पाकिस्तान द्वारा बनाए गए सीमा संयुक्त आयोग को खारिज कर दिया। भारत ने दोहराया कि उसने 1963 के तथाकथित ‘चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते’ को कभी मान्यता नहीं दी है और हमेशा इसे अवैध और अमान्य माना है। भारत ने कहा कि भारतीय इलाकों को लेकर चीन और पाकिस्तान के बीच किसी भी तरह का तथाकथित सीमा सहयोग “पूरी तरह से अस्वीकार्य” होगा।विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने तथाकथित ‘पाकिस्तान-चीन सीमा संयुक्त आयोग’ पर मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा, “हमने इस संबंध में खबरें देखी हैं। इस मामले पर हमारा रुख स्पष्ट और सुसंगत रहा है। पाकिस्तान और चीन के बीच कोई सीमा नहीं है। हम तथाकथित संयुक्त आयोग को खारिज करते हैं, जिसका कोई कानूनी आधार नहीं है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा रहे हैं, हैं और हमेशा रहेंगे। पाकिस्तान को अपने अवैध और जबरन कब्जे वाले भारतीय इलाकों के संबंध में कोई भी समझौता करने का कोई अधिकार नहीं है।MEA प्रवक्ता ने आगे कहा, “हम इन कब्जे वाले इलाकों की स्थिति बदलने या अवैध कब्जे को वैध बनाने की किसी भी कोशिश का दृढ़ता से विरोध और खंडन करते हैं, क्योंकि इससे भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर असर पड़ता है। भारतीय इलाकों को लेकर चीन और पाकिस्तान के बीच किसी भी तरह का तथाकथित सीमा सहयोग पूरी तरह से अस्वीकार्य होगा और इन इलाकों पर भारत की संप्रभुता पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। ऐसे दिखावे में पड़ने के बजाय, हम पाकिस्तान से मांग करते हैं कि वह अपने अवैध और जबरन कब्जे वाले इलाकों को तुरंत खाली करे।इससे पहले दिन में, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान-चीन सीमा संयुक्त आयोग के “काम शुरू करने” को पाकिस्तान-चीन संबंधों के लिए एक “महत्वपूर्ण मील का पत्थर” बताया था। मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्षों ने बुधवार को सीमा प्रबंधन, संयुक्त सीमा सर्वेक्षण, व्यापार प्रवाह और लोगों के बीच संपर्क को बढ़ाने के लिए सहयोग का आधार तैयार किया।पिछले महीने, भारत ने अपने सहयोगियों और हितधारकों से पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) के लिए ‘सही नाम’ का इस्तेमाल करने का आग्रह किया था। MEA के प्रवक्ता ने कहा, “हमारा रुख़ बिल्कुल साफ़ है कि जम्मू-कश्मीर का पूरा इलाका और जम्मू, कश्मीर व लद्दाख के केंद्र-शासित प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा हैं।” यह बात उन्होंने तब कही जब उनसे विदेशी मीडिया द्वारा PoJK (पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर) के कानूनी दर्जे को गलत तरीके से पेश करने के बारे में पूछा गया, जबकि वे इस इलाके में पाकिस्तानी सेना द्वारा की जा रही हिंसा और अत्याचारों की रिपोर्टिंग कर रहे थे।उन्होंने आगे कहा, “ये इलाके भारत का हिस्सा थे, हैं और हमेशा रहेंगे। हम अपने सभी सहयोगियों और संबंधित पक्षों से आग्रह करेंगे कि वे इस इलाके का सही नाम इस्तेमाल करें, जैसा कि हम इसे समझते हैं।29 जुलाई को, अमेरिका में भारतीय दूतावास ने PoJK के बारे में ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ (NYT) की रिपोर्ट की हेडलाइन पर आपत्ति जताई और इसे “गुमराह करने वाला और गलत” बताया। दूतावास ने कहा कि पाकिस्तान ने इन इलाकों पर अवैध रूप से कब्ज़ा कर रखा है और वह वहां के लोगों के ख़िलाफ़ हिंसा का इस्तेमाल कर रहा है।अमेरिका में भारतीय दूतावास ने X पर पोस्ट किया, “द न्यूयॉर्क टाइम्स की हेडलाइन गुमराह करने वाली और गलत है। कोई ‘पाकिस्तानी कश्मीर’ नहीं है, सिर्फ़ ‘पाकिस्तान के कब्ज़े वाला कश्मीर’ (PoJK) है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र-शासित प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा रहे हैं, हैं और हमेशा रहेंगे। पाकिस्तान ने इन इलाकों के कुछ हिस्सों पर अवैध रूप से कब्ज़ा कर रखा है और अब वह कब्ज़े वाले इलाकों के लोगों के ख़िलाफ़ हिंसा कर रहा है।