कैलिफोर्निया में चुनावी रिकॉर्ड जब्त करना अब गंभीर अपराध, मध्यावधि चुनावों से पहले नए विधेयकों को मंजूरी

लॉस एंजिल्स। कैलिफोर्निया के गवर्नर गैविन न्यूसम ने नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों की निष्पक्षता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 13 नए विधेयकों को मंजूरी दी है। इनका उद्देश्य मतपत्रों की सुरक्षा करना, डाक के जरिए होने वाली वोटिंग में बाधा रोकना, चुनावी रिकॉर्ड और वोटिंग मशीनों से छेड़छाड़ रोकना, चुनाव से जुड़े डेटा को सुरक्षित रखना और किसी भी तरह के दबाव, धमकी या गैरकानूनी हस्तक्षेप को रोकना होगा। अमेरिका में मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति चुनावों के बीच आयोजित किए जाते हैं। चुनावी प्रक्रियाओं का संचालन मुख्य रूप से राज्यों के कानूनों के तहत होता है, जबकि संघीय कानून देशभर के लिए कुछ मानक निर्धारित करते हैं। सिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, नए कानूनों में शामिल असेंबली बिल 282 के तहत चुनाव परिणामों के आधिकारिक प्रमाणन से पहले मतपत्रों, चुनावी रिकॉर्ड या प्रमाणित मतदान तकनीक को जब्त करना फेलोनी (गंभीर अपराध) माना जाएगा। वहीं सीनेट बिल 259 किसी अधिकारी या प्रभावशाली पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा किसी को डाक मतपत्र की डिलीवरी या उसे वापस भेजने की प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने के निर्देश देने को भी फेलोनी अपराध घोषित करता है। इसके अलावा, असेंबली बिल 1664 स्थानीय एजेंसियों और चुनाव अधिकारियों को यह अनिवार्य करता है कि चुनावी रिकॉर्ड या प्रमाणित मतदान तकनीक से जुड़े किसी भी निर्दिष्ट कानून-प्रवर्तन कार्रवाई की जानकारी वे तुरंत राज्य प्रशासन को दें। यह विधायी कदम कैलिफोर्निया और ट्रंप प्रशासन के बीच संघीय चुनावी नीतियों को लेकर चल रहे विवाद के बीच उठाया गया है। मार्च में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश जारी कर संघीय एजेंसियों को मतदान आयु के सत्यापित नागरिकों की सूची राज्यों को उपलब्ध कराने और डाक मतपत्रों से संबंधित नए मानकों पर नियम बनाने का निर्देश दिया था। कैलिफोर्निया समेत कई राज्यों ने इस आदेश को संघीय अदालत में चुनौती दी थी। बाद में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने नए प्रतिबंधों को नवंबर के मध्यावधि चुनावों से पहले लागू करने के प्रयास पर रोक लगा दी। कैलिफोर्निया ने राज्यव्यापी मतदाता पंजीकरण डेटा साझा करने की संघीय मांगों का भी विरोध किया है। गवर्नर गैविन न्यूसम, राज्य सचिव शर्ली वेबर और अटॉर्नी जनरल रॉब बोंटा ने कहा कि नया कानून पैकेज राज्य की चुनावी व्यवस्था को संघीय हस्तक्षेप से सुरक्षित रखने में मदद करेगा। शर्ली वेबर ने कहा, “यह विधायी पैकेज सुनिश्चित करेगा कि कैलिफोर्निया के मतदाताओं को न तो डराया जाएगा और न ही उनकी आवाज दबाई जाएगी।” वहीं गैविन न्यूसम ने कहा कि ये नए कानून कैलिफोर्निया की चुनावी प्रक्रिया की सुरक्षा के लिए पहले से बनाए गए सुरक्षा ढांचे को और मजबूत करेंगे।

अयोध्या में चंद्रशेखर आजाद का सरकार पर हमला, बोले-‘बम से सरेआम हत्या और अब तक आरोपी नहीं पकड़े गए’

अयोध्या। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के अध्यक्ष एवं सांसद चंद्रशेखर आजाद रविवार को अयोध्या सर्किट हाउस से थाना पूरा कलंदर क्षेत्र में मृतक राम लगन मौर्य के परिजनों से मुलाकात करने के लिए रवाना हुए। राम लगन मौर्य और उनकी मां की बीते दिनों गोलीबारी और बमबाजी की घटना में मौत हुई थी। चंद्रशेखर आजाद ने घटना को बेहद दर्दनाक बताते हुए अब तक सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने पर सवाल उठाए। चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि उन्होंने फिल्मों में या बंगाल अथवा दूसरे देशों के संदर्भ में बम के इस्तेमाल और सरेआम हत्या की घटनाएं देखी-सुनी थीं, लेकिन अयोध्या जैसे शहर में इस तरह की घटना होना बेहद गंभीर है। उन्होंने कहा, “राम लगन जी के साथ जो हुआ, वह बहुत दर्दनाक है। हमने पिक्चरों में देखते थे या बंगाल या दूसरे देशों में यह सुनाई देता था कि बम का प्रयोग होता है, सरेआम हत्या कर दी जाती है। लेकिन यह हमने अपनी आँखों से यहाँ अयोध्या जिसे साकेत भी कहा जाता है और पूरी दुनिया में जिसकी पहचान है वहाँ अगर सरेआम बम से हत्या हो रही है, कई-कई बम दागे जा रहे हैं…” उन्होंने कहा कि घटना में केवल राम लगन मौर्य की ही जान नहीं गई, बल्कि उनकी मां भी गंभीर रूप से प्रभावित हुईं और करीब 15 दिन बाद उनकी भी मौत हो गई। चंद्रशेखर ने कहा कि परिवार के लोगों ने उनसे मुलाकात कर दुख में शामिल होने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा, “एक जनप्रतिनिधि होने के नाते मेरी भी यह जिम्मेदारी है, अगर किसी के यहाँ कुछ हुआ है… अब तो कार्रवाई पुलिस करेगी, लेकिन उस परिवार का दुख बाँटना, उनके विश्वास को कानून के प्रति, संविधान के प्रति मजबूत करना यह जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है।” चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि उन्होंने परिवार से मुलाकात कर उनकी बात सुनने और मामले को मीडिया के माध्यम से देश के सामने रखने का वादा किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा नियुक्ति पत्र वितरित किए जाने और नई भर्तियों की घोषणाओं को लेकर भी चंद्रशेखर आजाद ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नियुक्ति पत्र बांटे जाएंगे और नई रिक्तियों की घोषणा होगी, लेकिन पिछले साढ़े नौ वर्षों में हुई भर्तियों को लेकर भी सरकार को जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा, “अब नियुक्ति पत्र भी बटेंगे, नई वैकेंसी की घोषणाएं भी होंगी। नई जो है, सुविधा देने की बात भी होगी, लेकिन सच यह है कि पिछले साढ़े नौ साल में कितने नियुक्ति पत्र दिए हैं यह सब जानते हैं।” चंद्रशेखर आजाद ने 68,500 और 69,000 शिक्षक भर्ती के साथ पंचायत सहायकों, रोजगार सेवकों, आशा, आंगनबाड़ी, भोजन माताओं, पीआरडी जवानों और पुलिस भर्ती से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए सरकार से सवाल किए। उन्होंने कहा कि बीएड और बीटीसी अभ्यर्थियों के बीच भी रोजगार को लेकर असंतोष है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में बड़ी संख्या में पदों का बैकलॉग है और सवाल उठाया कि यदि पद खाली हैं तो अब तक उन्हें भरा क्यों नहीं गया। चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि 2027 में जनता की अदालत लगेगी और सरकार अब अपने कामकाज को लेकर जनता के सवालों का सामना करेगी। उन्होंने नियुक्ति पत्र वितरण और नई भर्तियों की घोषणाओं को लेकर आरोप लगाया कि यह चुनाव से पहले मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास है। उन्होंने कहा, “यह सब जो है, चुनाव में वोट अपने फेवर में प्रभावित करने का तरीका है। जनता सब जानती है।” उन्होंने बेरोजगारी को लेकर कहा कि प्रदेश का युवा पढ़-लिखकर डिग्री लेकर घूम रहा है और रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में पलायन कर रहा है। उन्होंने प्रयागराज में विभिन्न वर्गों के युवाओं के आंदोलनों का भी जिक्र किया। चंद्रशेखर आजाद ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हर वर्ष बाढ़ आने के बाद सरकारी स्तर पर दौरे किए जाते हैं, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में पर्याप्त काम नहीं होता। उन्होंने कहा कि बस्ती में बड़ी संख्या में लोग रोजगार के लिए दूसरे प्रदेशों में पलायन कर रहे हैं और वहां बिजली, पानी तथा सड़कों की समस्याएं भी गंभीर हैं। उन्होंने क्षेत्र में लगी एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर भी लोगों की परेशानियों का जिक्र किया और कहा कि इन समस्याओं के समाधान की जरूरत है। सांसद ने कहा कि आज का पढ़ा-लिखा युवा रोजगार चाहता है और सरकार की जिम्मेदारी है कि युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएं तथा शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पर्याप्त संख्या में योग्य शिक्षकों की भर्ती की जाए।

एशियन गेम्स: शेफाली वर्मा का पहला टी20 शतक, भारत ने बांग्लादेश को 196 रन का लक्ष्य दिया

निशिन। कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क में खेले जा रहे एशियन गेम्स 2026 में महिला क्रिकेट के दूसरे सेमीफाइनल में भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए बांग्लादेश के सामने 196 रन का लक्ष्य रखा है। भारत की तरफ से शेफाली वर्मा ने विस्फोटक शतक लगाया। भारतीय टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया था। कप्तान के फैसले को शेफाली वर्मा ने विस्फोटक शतक लगाते हुए सही साबित किया और टीम को एक सुरक्षित स्कोर तक पहुंचा दिया। भारत के लिए स्मृति मंधाना और शेफाली वर्मा पारी की शुरुआत करने उतरी थीं। दोनों ने पहले विकेट के लिए 6 ओवर में 72 रन की साझेदारी की। मंधाना 19 गेंदों पर 2 छक्कों और 5 चौकों की मदद से 37 रन बनाकर आउट हुईं। इसके बाद जी कमलीनी का विकेट भी जल्द गिर गया। वह 3 रन बनाकर आउट हुईं। चौथे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए आईं कप्तान हरमनप्रीत कौर ने शेफाली वर्मा के साथ तीसरे विकेट के लिए 94 रन की साझेदारी की और टीम का स्कोर 179 तक पहुंचाया। कौर 33 गेंदों पर 6 चौकों की मदद से 40 रन बनाकर आउट हुईं। इसके बाद विकेटकीपर बल्लेबाज ऋचा घोष भी 2 रन बनाकर आउट हुईं। गिरते विकेटों के बीच शेफाली वर्मा ने एक छोर संभाल कर रखा और अपने अंतरराष्ट्रीय टी20 करियर का पहला शतक लगाया। उनका शतक 49 गेंदों पर आया। यह भारतीय पारी की आखिरी गेंद थी। वर्मा 49 गेंदों पर 9 छक्के और 3 चौकों की मदद से 100 रन पर नाबाद लौटीं। इस शतक के साथ ही शेफाली ने मंधाना के सबसे तेज टी20 शतक के भारतीय महिला क्रिकेटर के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली। मंधाना ने 2018 में न्यूजीलैंड के खिलाफ 49 गेंदों में ही शतक लगाया था। वर्मा के साथ भारती फूलमाली 5 गेंदों पर 9 रन बनाकर नाबाद रहीं। भारत ने 20 ओवर में 4 विकेट के नुकसान पर 195 रन बनाकर बंग्लादेश को जीत के लिए 196 रन का लक्ष्य दिया है। बंग्लादेश के लिए मारूफा अख्तर, संजीदा अख्तर, राबिया खान और नाहिदा अख्तर ने 1-1 विकेट लिए।

सुखोई व राफेल के साथ दिखा जापान के एफ-2 लड़ाकू विमान का दम

नई दिल्ली। भारत के आसमान में इन दिनों भारत और जापान के लड़ाकू विमानों की गूंज सुनाई दे रही है। दोनों देशों की वायुसेनाएं संयुक्त हवाई अभ्यास ‘वीर गार्जियन 2026’ के तहत युद्ध जैसी परिस्थितियों में अपनी हवाई युद्धक क्षमताओं को परख रही हैं। अभ्यास अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। इस दौरान दोनों देशों के लड़ाकू विमानों ने एयर स्ट्राइक से जुड़े कई अभियानों का अभ्यास किया है। अभ्यास में भारतीय वायुसेना के स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) तेजस, सुखोई-30 एमकेआई और राफेल जैसे अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमानों शामिल रहे। वहीं जापानी वायुसेना ने अपने एफ-2ए लड़ाकू विमान के साथ शिरकत की। इस चौदह दिवसीय अभ्यास में भाग लेने वाले वायु सैनिक उन्नत परिचालन मिशनों को अंजाम दिया गया। जोधपुर में दोनों सेनाओं के बीच व्यापक पेशेवर संवाद हुए। इस युद्धाभ्यास में मिशन योजना सम्मेलन, विषय विशेषज्ञों के आदान-प्रदान, इंजीनियरिंग व अंतरिक्ष सुरक्षा के पहलुओं पर भी वार्ता हुई। इससे दोनों वायु सेनाओं के बीच गहन परिचालन तालमेल को बढ़ावा मिला है। जापानी एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स के एफ-2 लड़ाकू विमानों की मौजूदगी इस संयुक्त अभ्यास का खास आकर्षण रही। दरअसल ‘वीर गार्जियन 2026’ इसी महीने 9 सितंबर से शुरू हुआ था और 22 सितंबर तक चलेगा। इसका उद्देश्य भारत और जापान के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने के साथ दोनों वायुसेनाओं के बीच ऑपरेशनल तालमेल और आपसी समझ को बढ़ाना है। यह ‘वीर गार्जियन’ का दूसरा संस्करण है। इससे पहले 2023 में ‘वीर गार्जियन 23’ का आयोजन जापान में हुआ था। उस अभ्यास में भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने पहली बार जापान में इस संयुक्त हवाई अभ्यास में हिस्सा लिया था। वहीं, ‘वीर गार्जियन 2026’ जापान एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स के लड़ाकू विमानों का भारत में पहला संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास है। अभ्यास के दौरान दोनों देशों के वायु योद्धा अलग-अलग हवाई अभियानों और ऑपरेशनल गतिविधियों में हिस्सा ले रहे हैं। साथ ही, वे एक-दूसरे की संचालन प्रक्रियाओं और युद्धक तौर-तरीकों को समझ रहे हैं। संयुक्त अभियानों के दौरान बेहतर समन्वय विकसित करना भी अभ्यास का अहम हिस्सा है। ‘वीर गार्जियन 2026’ के जरिए दोनों देशों की वायुसेनाओं को वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में अपनी क्षमताओं को परखने और एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने का अवसर मिल रहा है।

एमसीडी सफाईकर्मी की आत्महत्या पर सियासत तेज, भाजपा का ‘आप’ दफ्तर के बाहर प्रदर्शन

नई दिल्ली। दिल्ली में एमसीडी के सफाई कर्मचारी दीपक की आत्महत्या के मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। आम आदमी पार्टी के पार्षद विजय कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने रविवार को आम आदमी पार्टी कार्यालय के बाहर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में शामिल भाजपा सांसद योगेंद्र चंदोलिया ने आप पार्षद पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या है। योगेंद्र चंदोलिया ने कहा, “सफाई कर्मचारी की हत्या के पीछे आम आदमी पार्टी का पार्षद मुख्य आरोपी है। केजरीवाल और सिसोदिया चुप हैं। मैं कुलदीप कुमार से पूछना चाहता हूं कि आपके अपने विधानसभा क्षेत्र में, एक वाल्मीकि सफाई कर्मचारी ने आत्महत्या क्यों की? क्योंकि आपके पार्षद ने उसका गला दबाया, लोन के नाम पर उसकी पासबुक और एटीएम कार्ड छीन लिया और उसे एक-एक रुपये के लिए बेबस छोड़ दिया।” उन्होंने आरोप लगाया कि पार्षद विजय कुमार ने सफाई कर्मचारी दीपक का आर्थिक शोषण किया और उसे लगातार प्रताड़ित किया, जिससे तंग आकर उसे आत्महत्या जैसा कदम उठाना पड़ा। भाजपा की मांग है कि आरोपी पार्षद के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। इस दौरान सांसद योगेंद्र चंदोलिया ने एक अन्य मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक कार्यक्रम के दौरान मंच से एक बुजुर्ग माता को कुर्सी देने के लिए कहने वाले बयान का कांग्रेस के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के मंच से मजाक उड़ाए जाने की घटना पर कड़ी आपत्ति जताई। चंदोलिया ने कहा, “राहुल गांधी जिस तरह बार-बार प्रधानमंत्री की मां के बारे में बात करते हैं। मैं राहुल गांधी को चुनौती देना चाहता हूं। आप लोकसभा में किसी की मां का अपमान करते हुए बोलते हैं लेकिन अगर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता सोनिया गांधी के चरित्र को उजागर करने लगें कि सोनिया गांधी इटली में क्या करती थीं, यह पूरी दुनिया जानती है, तो क्या होगा? पहले अपनी मां को देखिए और फिर प्रधानमंत्री की मां के बारे में बात कीजिए। राहुल गांधी को यह समझने की जरूरत है।

सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियां तेज, 31 अक्टूबर को नासिक-त्र्यंबकेश्वर में होगा ध्वजारोहण

नासिक। सिंहस्थ महाकुंभ के शुभारंभ की तैयारियों के तहत 31 अक्टूबर को होने वाले ध्वजारोहण कार्यक्रम को लेकर नासिक में कुंभ मेला प्रशासन और कुंभ मेला प्राधिकरण की महत्वपूर्ण तैयारी बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता पालकमंत्री एवं कुंभ मेला मंत्री गिरीश महाजन ने की। बैठक में साधु-संतों, महंतों, विभिन्न अखाड़ों के प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में 31 अक्टूबर को होने वाले ध्वजारोहण कार्यक्रम को धार्मिक परंपराओं के अनुरूप भव्य और सुव्यवस्थित तरीके से आयोजित करने को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा, यातायात, स्वच्छता, पार्किंग, आपातकालीन व्यवस्था और प्रशासनिक समन्वय जैसे विषयों पर अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श किया गया। सिंहस्थ महाकुंभ के ध्वजारोहण के लिए दो प्रमुख स्थान निर्धारित किए गए हैं। नासिक में रामकुंड घाट और त्र्यंबकेश्वर में कुशावर्त कुंड, त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर परिसर से जुड़े क्षेत्र में ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। मंत्री गिरीश महाजन ने बताया कि 31 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 2 मिनट पर नासिक और त्र्यंबकेश्वर में एक ही समय पर ध्वजारोहण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दोनों स्थानों पर एक साथ होने वाला यह कार्यक्रम सिंहस्थ महाकुंभ के औपचारिक शुभारंभ का महत्वपूर्ण चरण होगा। उन्होंने बताया कि एक स्थान पर महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के करकमलों से ध्वजारोहण होने की योजना है, जबकि दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में ध्वजारोहण किया जाएगा। इस अवसर पर केंद्र और राज्य सरकार के कई नेता भी उपस्थित रहेंगे। बैठक में गिरीश महाजन ने संबंधित अधिकारियों को ध्वजारोहण कार्यक्रम की सभी तैयारियां समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने साधु-संतों और अखाड़ों के प्रतिनिधियों के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखने तथा धार्मिक परंपराओं के अनुरूप कार्यक्रम आयोजित करने पर विशेष जोर दिया। साथ ही, अधिकारियों को दोनों आयोजन स्थलों पर संभावित भीड़ को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा, श्रद्धालुओं के लिए स्वच्छता, पार्किंग और आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई। बैठक में यह भी माना गया कि 31 अक्टूबर का ध्वजारोहण सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव होगा। नासिक और त्र्यंबकेश्वर में एक ही समय पर होने वाले कार्यक्रम के साथ कुंभ की तैयारियों को औपचारिक गति मिलने की उम्मीद है ।

सुपर लीग केरल सीजन 3 : कोम्बन्स एफसी ने नए सीजन से पहले जर्सी और टीम का अनावरण किया

तिरुवनंतपुरम। कोम्बन्स एफसी ने शनिवार को तिरुवनंतपुरम के कनककुन्नु पैलेस में आयोजित एक कार्यक्रम में सुपर लीग केरल (एसएलके) के तीसरे सीजन के लिए अपनी आधिकारिक जर्सी और टीम का अनावरण किया। केरल सरकार के परिवहन मंत्री सीपी जॉन ने फैंस और अदाणी-प्रायोजित कोम्बन क्लब के अधिकारियों की उत्साही भीड़ के सामने जर्सी का अनावरण किया और टीम का परिचय कराया। इस मौके पर मंत्री सीपी जॉन ने केरल फुटबॉल में कोम्बन्स एफसी की बढ़ती प्रतिष्ठा की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि क्लब का विस्तृत, बहुराष्ट्रीय स्क्वाड सुपर लीग केरल के प्रतिस्पर्धी स्तर को ऊपर उठाएगा। कार्यक्रम में 26 सदस्यीय टीम को फैंस के सामने पेश किया गया। क्लब के गठन के बाद पहली बार, कोम्बन्स एफसी ने वास्तव में एक बहुराष्ट्रीय स्क्वाड उतारा है, जिसमें ब्राजील, घाना, कोलंबिया और अंगोला के छह विदेशी पेशेवर खिलाड़ी शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के साथ-साथ केरल के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का एक मुख्य समूह भी शामिल है, जिसमें तिरुवनंतपुरम के खिलाड़ियों पर विशेष जोर दिया गया है, ताकि अंतरराष्ट्रीय अनुभव के साथ-साथ स्थानीय प्रतिभा को भी निखारा जा सके। कार्यक्रम में क्लब की तकनीकी टीम का भी प्रशंसकों और मीडिया से औपचारिक परिचय कराया गया। सीजन 3 के लिए डगआउट का नेतृत्व स्कॉटलैंड के हेड कोच इयान गिलन करेंगे, जिन्होंने क्लब के शुरुआती सीजन 1 अभियान में कालीकट एफसी को खिताब जिताया था। सहायक कोच सनुष राज टी. उनके सहायक होंगे, जबकि अभिलाष वीएस टीम मैनेजर होंगे। कोम्बन्स एफसी अपने सीजन 3 अभियान की शुरुआत 26 सितंबर को कोझिकोड (कालीकट) में कालीकट एफसी के खिलाफ ‘अवे’ मैच (दूसरे के मैदान पर) से करेगा। सीजन का पहला ‘होम’ मैच (अपने मैदान पर) 4 अक्टूबर को होगा, जिसमें मौजूदा चैंपियन कन्नूर एफसी की मेजबानी तिरुवनंतपुरम के चंद्रशेखरन नायर स्टेडियम में की जाएगी।

डूसू चुनाव 2026: एबीवीपी की तीन सीटों पर जीत, भाजपा ने कहा- राष्ट्रविरोधी ताकतों पर देशभक्ति की विजय

नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव 2026 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की तीन सीटों पर जीत हुई। चुनाव परिणाम के अनुसार, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष, सचिव और सह-सचिव पद पर जीत दर्ज की है। नतीजे को लेकर एबीवीपी ने कहा है कि हमने 3-0 से जीत दर्ज की है। इसने यह स्पष्ट कर दिया कि आज का युवा विकास और राष्ट्रवाद की सोच से जुड़ा हुआ है। दिल्ली विश्वविद्यालय को विविधताओं से भरे ‘मिनी-इंडिया’ के रूप में देखा जाता है। ऐसे में डूसू चुनाव का परिणाम छात्र राजनीति के साथ-साथ युवाओं के बीच विकास और राष्ट्रवाद जैसे मुद्दों को लेकर चर्चा का विषय बना है। एनएसयूआई, जिसके उम्मीदवारों ने पूरी कोशिश की, वे चुनाव में युवाओं को भ्रमित कर पाए, लेकिन, युवाओं ने दिखाया कि वह विकास और राष्ट्रवाद की सोच के साथ पूरी मजबूती के साथ खड़ा है। डूसू में एबीवीपी की यह जीत अपने आप में एक बड़ा संदेश है। इससे पता चलता है कि युवा और आगे बढ़ने की चाह रखने वाले ‘विकसित भारत’ और राष्ट्रवाद की सोच से जुड़ा है। कांग्रेस और उसके ‘नाराज फूफा’ जैसे लोगों ने युवाओं को गुमराह करने की पूरी कोशिश की। लेकिन युवा उनके झूठ के झांसे में नहीं आए। ‘झूठ की गूंज’ डीयू में सुनाई नहीं दी, जो कि एक ‘मिनी-इंडिया’ है। एनएसयूआई, जिसका पहले डूसू पर लंबे समय तक दबदबा था, अब जीरो पर है। बिल्कुल जीरो। कांग्रेस और युवा साथ नहीं चल सकते। युवा कांग्रेस की राजनीति के तरीके के खिलाफ हैं। माना जाता है कि नॉर्थ कैंपस में एबीवीपी का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा। इस कैंपस में एसआरसीसी, हिंदू, हंसराज, केएमसी, रामजस और लॉ फैकल्टी जैसे देश के कुछ बेहतरीन कॉलेज हैं। दूसरी ओर, डूसू चुनाव में तीन सीटों पर मिली शानदार जीत को एबीवीपी ने इसे राष्ट्रविरोधी ताकतों पर देशभक्ति की विजय बताया है। इस शानदार जीत पर भाजपा नेता वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि एबीवीपी ने तीन सीटों पर स्पष्ट रूप से जीत हासिल की है। यह दिखाता है कि आज का युवा क्या सोचता है, युवा भ्रमित नहीं है, युवा जानता है कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत सुरक्षित है। युवा एबीवीपी को समर्थन देता है और राहुल गांधी की ‘झूठ की गूंज’ ज्यादा दिनों तक नहीं चलेगी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी इवेंट करते रहिए, भारत का युवा पीएम मोदी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प के साथ है।

युवा धर्म संसद आत्मबोध का मंच है : आनंद रंगनाथन; कुलपति तिवारी बोले- अब गांवों की ओर लौटने का समय

उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन में शनिवार को आयोजित युवा धर्म संसद में वैज्ञानिक और लेखक आनंद रंगनाथन ने स्वामी मिथिलेश के ज्ञान को नमन करते हुए इसे अब तक का सबसे सार्थक आयोजन बताया। वहीं, एमसीयू के कुलपति विजय मनोहर तिवारी ने गांवों से शहरों की ओर हुए पलायन पर चिंता जताते हुए रिवर्स माइग्रेशन को समय की सबसे बड़ी जरूरत बताया। वैज्ञानिक, लेखक और स्तंभकार प्रो. आनंद रंगनाथन ने कहा, “जब मैं आया था और धर्म संसद में बात की, और अब जब कार्यक्रम खत्म हुआ है, तो मुझे लगता है कि मेरे पास सिर्फ 30 फीसदी ज्ञान था। बाकी का 70 फीसदी ज्ञान स्वामी मिथिलेश जी ने दिया है। उन्होंने जो कुछ भी बताया, मैं ईमानदारी से कहूंगा कि मैं अपने आप को बहुत छोटा महसूस कर रहा हूं। उनका जो मार्गदर्शन है, जिस गहराई में जाकर उन्होंने हर चीज का उल्लेख किया, वह अद्भुत है। मैंने जब टॉपिक देखा, तो मैंने ऋषि को ऋषि समझा, कृषि को कृषि समझा, लेकिन उन्होंने जो समझाया, उसका असली मतलब क्या है, उन शब्दों का इस्तेमाल क्यों किया गया है, यह उन्होंने बताया। जो ज्ञान उन्होंने दिया है, उसे सुनकर मैं वास्तव में स्तब्ध हूं, सच कहूं तो मेरे लिए यहां आना ही सार्थक हो गया, बाकी लोगों के बारे में मुझे नहीं पता।” उन्होंने कहा, “बहुत सारे ऐसे कार्यक्रम होते हैं, हर हफ्ते एक लिटरेचर फेस्टिवल होता है। इस संसद का असली मतलब क्या है, वो स्वामी जी ने समझाया। सिर्फ आना और भाषण देना या 15 मिनट तक बोलना, भले ही वह बहुत अच्छा ज्ञान हो, वह मायने नहीं रखता। यह पहली बार है जब मुझे लग रहा है कि मैंने वास्तव में किसी कार्यक्रम में भाग लिया है। ईमानदारी से कहूं तो एक वक्ता के तौर पर नहीं, बल्कि एक प्रतिभागी के तौर पर मैं आज सबसे ज्यादा खुद को धन्य महसूस कर रहा हूं। मुझे लगता है कि जागरूकता हमेशा नीचे से ऊपर की ओर आती है, लेकिन कार्रवाई ऊपर से नीचे की ओर आती है। आप युवाओं को कितना भी जागरूक कर लीजिए, युवाओं को सब पता है कि समस्या क्या है और समाधान क्या है, लेकिन जब तक जिन्हें युवाओं ने चुना है, वे समाधान नहीं देंगे, तब तक हम भटकते रहेंगे।” उन्होंने आगे कहा, “मुझे इस बात का डर है कि जब तक आप 30 करोड़ किसानों को उत्पादक नहीं बनाएंगे, उन्हें सिर्फ वोट बैंक बनाकर रखा जाएगा, तब तक कोई समाधान नहीं निकल सकता। आप युवाओं को कितना भी जागरूक कर लें, इस समस्या का हल नहीं निकल सकता।” एमसीयू के कुलपति विजय मनोहर तिवारी ने कहा, “मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं कि मुझे दूसरी बार युवा धर्म संसद में आने का मौका मिला है। पहली बार मैं पिछली धर्म संसद में कांचीपुरम में शामिल हुआ था। आज का विषय ऋषि और कृषि से जुड़ा हुआ है, जो बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए जरूरी है क्योंकि पिछले 80 वर्षों में, भारत की स्वतंत्रता के बाद गांवों से शहरों की ओर जो एकतरफा पलायन हुआ है, उसने हमारे गांवों को पूरी तरह से वीरान कर दिया है। गांवों में अब कोई नहीं बचा है और वहां से जो आबादी एकतरफा बड़े शहरों में गई है, उससे शहरों का जीवन नरक बन गया है। शहर तबाह हो रहे हैं और रहने लायक नहीं बचे हैं।

यूपी: अखिलेश यादव 24 सितंबर को रायबरेली जाएंगे, विधायक राहुल लोधी के घर पिएंगे चाय

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव 24 सितंबर को रायबरेली जाएंगे। अखिलेश यादव यहां पार्टी विधायक राहुल लोधी के घर पर चाय पिएंगे और सियासी चर्चा करेंगे। माना जा रहा है कि सपा मुखिया पहली पार चुनाव के लिए बनाए गए पीडीए रथ से विधायक राहुल लोधी के घर पहुंचेंगे। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रायबरेली में सपा विधायक राहुल लोधी और पुलिस के बीच हुए विवाद के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष ने उनके घर जाने का ऐलान किया है। दरअसल, रायबरेली स्थित फिरोज गांधी डिग्री कॉलेज में 17 सितंबर को समाजवादी छात्र सभा और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी कार्यकर्ताओं के बीज मेंबरशिप कैंपेन को लेकर विवाद हो गया था। इस दौरान दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं के बीच जमकर कहासुनी हुई और धक्का-मुक्की हुई। हालांकि मौके पर पहुंचे पुलिस-प्रशासन ने मोर्चा संभालकर मामले को शांत कराया। इस बीच घटना शिकायत को लेकर समाजवादी पार्टी के छात्र सभा कार्यकर्ता और विधायक एसपी दफ्तर पहुंचे थे। सपा कार्यकर्ताओं ने यहां नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन भी किया था। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए लाठीचार्ज किया। इसी दौरान हरचंदपुर विधायक राहुल लोधी के साथ भी धक्का-मुक्की और मारपीट का आरोप लगाया गया। अब क्योंकि सपा मुखिया ने रायबरेली जाने की घोषणा की है तो इससे सियासी गलियारों में हलचल मच गई है। माना जा रहा है कि अखिलेश यादव का रायबरेली दौरा और विधायक राहुल लोधी के घर चाय पीने जाना लोधी समाज को साधने का प्रयास है। उत्तर प्रदेश में लोधी समाज का वोट बैंक एक करोड़ से ज्यादा है। ऐसे में अखिलेश यादव का राहुल लोधी के घर जाना सपा की ओर से इस मामले को लेकर राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।