भारत-अमेरिका युद्ध अभ्यास में गरजी एम777 तोप, तबाह किए सभी लक्ष्य

नई दिल्ली। भारत और अमेरिका की सेनाएं अपनी तोपखाना क्षमता का जोरदार प्रदर्शन कर रही हैं। तोप की मारक क्षमता का यह प्रदर्शन भारत-अमेरिका के संयुक्त युद्धाभ्यास किया जा रहा है। भारत में जारी युद्धाभ्यास में एम777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर से फायरिंग की गई। एम777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर तोपों ने सीधे नजर आ रहे लक्ष्यों को डायरेक्ट फायरिंग पद्धति से निशाना बनाया। इस बीच भारतीय सेना ने ‘हर पल सतर्क। हर समय तैयार।’ का अपना संदेश दोहराया है। सेना जय से विजय मिशन पर काम कर रही है। भारतीय सेना के मुताबिक राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज एम777 की तोप टुकड़ियों ने बेहद सटीक निशाना साधा। सभी निर्धारित लक्ष्यों को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया। इस दौरान जवानों ने अपनी पेशेवर दक्षता, सटीकता और युद्ध के लिए तैयार रहने की क्षमता का प्रदर्शन किया। फायरिंग खत्म होने के बाद अमेरिकी सैन्य दल ने एम777 की तैनाती वाली जगहों का दौरा किया। अमेरिकी सैनिकों ने भारतीय तोप टुकड़ी के अधिकारियों और जवानों से बातचीत की। इस दौरान दोनों सेनाओं के बीच सैन्य अनुभव और बेहतर युद्धक प्रक्रियाओं को लेकर जानकारी का आदान-प्रदान हुआ। यह अभ्यास दोनों देशों के सैनिकों को बिलकुल युद्ध जैसी परिस्थितियों में अभ्यास का अवसर दे रहा है। दोनों देश अपनी क्षमताओं को परखने के साथ-साथ एक-दूसरे के अनुभवों से सीख रहे हैं। दोनों सेनाओं का यह अभ्यास 16 सितंबर को राजस्थान की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में हुआ था। फायरिंग से कुछ दिन पहले यहां एम-777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर की तैनाती से जुड़ी गतिविधियों व संचालन से जुड़े विभिन्न पहलुओं का प्रदर्शन किया था। इन गतिविधि के तहत एम-777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर की तैनाती पर व्याख्यान व प्रदर्शन किया गया। इसमें सैन्य कर्मियों की जिम्मेदारियों, तोप की तैनाती की प्रक्रिया और स्थानीय रक्षा के समन्वय से जुड़े पहलुओं को समझाया गया था। दोनों देशों के जवानों को जवाबी गोलाबारी की स्थिति में वैकल्पिक स्थानों पर स्थानांतरण की प्रक्रिया पर बताई गई थी। इसके साथ ही ‘शूट एंड स्कूट’ अभ्यास किया गया। इस प्रक्रिया में निर्धारित कार्रवाई के बाद तोप को तेजी से उसकी स्थिति से हटाने की क्षमता पर जोर दिया जाता है। इस गतिविधि ने भारतीय और अमेरिकी सेना के जवानों को एक-दूसरे के अनुभवों और कार्यप्रणालियों को समझने का अवसर दिया। दोनों पक्षों के सैन्य कर्मियों के बीच संवाद हुआ और सैन्य अभियानों से जुड़े बेहतर तौर-तरीकों का आदान-प्रदान किया गया। गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच युद्धाभ्यास का 22वां संस्करण उत्तराखंड के बर्फीले पहाड़ी क्षेत्र औली से लेकर राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज तक एक साथ जारी है। अभ्यास में भारत और अमेरिका के करीब 600-600 सैन्यकर्मी हिस्सा ले रहे हैं। इस अभ्यास में आधुनिक तकनीक भी केंद्र में है। सैनिक निगरानी और टोह लेने के लिए ड्रोन और स्वायत्त प्रणालियों का इस्तेमाल कर रहे हैं। महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आधुनिक हथियार प्रणालियों का प्रदर्शन किया जा रहा है।

नई दिल्ली : सड़क हादसे की जांच में चोरी की बाइक और बटनदार चाकू बरामद, 22 वर्षीय युवक गिरफ्तार

नई दिल्ली। नई दिल्ली के ज्योति नगर थाना पुलिस ने वाहन दुर्घटना की जांच के दौरान एक युवक को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से चोरी की मोटरसाइकिल और अवैध बटनदार चाकू बरामद किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान शुभम (22) के रूप में हुई है। वह जोहरीपुर की गली नंबर-1 का रहने वाला है। पुलिस के अनुसार, 19 सितंबर 2026 को दोपहर करीब 12:20 बजे ज्योति नगर थाने को वाहन दुर्घटना की सूचना मिली थी। सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम तत्काल मेन वजीराबाद रोड स्थित मीत नगर में टाटा शोरूम के सामने पहुंची। मौके पर स्कूटी और अपाचे मोटरसाइकिल के बीच दुर्घटना हुई थी। हादसे में स्कूटी सवार घायल हो गया, जिसे एंबुलेंस की मदद से जीटीबी अस्पताल पहुंचाया गया। पुलिस ने दुर्घटना में शामिल मोटरसाइकिल सवार से वाहन के स्वामित्व से संबंधित दस्तावेज मांगे। पुलिस के मुताबिक, वह मोटरसाइकिल के मालिकाना हक से संबंधित वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके बाद पुलिस ने मोटरसाइकिल की जांच की तो उसके चोरी होने की जानकारी सामने आई। जांच में पता चला कि उक्त मोटरसाइकिल के चोरी होने के संबंध में भजनपुरा थाने में ई-एफआईआर नंबर 020543/26, 31 अगस्त 2026 को भारतीय न्याय संहिता की धारा 303(2) के तहत मामला दर्ज था। पुलिस ने मोटरसाइकिल सवार की पहचान शुभम, पुत्र अनिल कुमार, निवासी गली नंबर-1, जोहरीपुर, दिल्ली के रूप में की। पुलिस के अनुसार, तलाशी के दौरान उसकी कार्गो पैंट की दाहिनी जेब से एक बटनदार चाकू बरामद हुआ। इसके बाद ज्योति नगर थाने में एफआईआर 19 सितंबर 2026 दर्ज की गई। जिसके बाद जांच शुरू की गई। पुलिस के मुताबिक, जांच में यह भी सामने आया कि शुभम पहले से झपटमारी, चोरी, वाहन चोरी और आर्म्स एक्ट से जुड़े नौ मामलों में कथित रूप से शामिल रहा है। पुलिस अब बरामद मोटरसाइकिल और चाकू के संबंध में आगे की जांच कर रही है तथा आरोपी के अन्य संभावित आपराधिक मामलों से संबंधों की भी पड़ताल की जा रही है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में आगे की जांच जारी है।

ओमप्रकाश राजभर का अखिलेश पर हमला, बोले-दलित महापुरुषों से चिढ़ते हैं सपा प्रमुख

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) के नारे को लेकर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने पीडीए को ‘ढकोसला’ बताते हुए अखिलेश यादव पर दलितों और दलित महापुरुषों के प्रति कथित तौर पर विरोधी रवैया रखने का आरोप लगाया। राजभर ने कहा कि सपा सरकार के दौरान बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर की सबसे ज्यादा प्रतिमाएं तोड़ी गईं और दलितों पर अत्याचार के मामले बढ़े। ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव कभी पीडीए को पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक बताते हैं तो कभी पी से पंडित, डी से दलित और ए से अहीर कहते हैं। कभी ए से अल्पसंख्यक, कभी आधी आबादी और कभी अगड़ा बता देते हैं। राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव दलितों से नफरत करते हैं और दलित महापुरुषों की प्रतिमाएं देखकर उन्हें ज्यादा चिढ़ होती है। उन्होंने कहा कि 2012 में अखिलेश यादव ने सरकार बनाई और 2017 तक समाजवादी पार्टी के गुंडों ने बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर की असंख्य मूर्तियां तोड़ डालीं। उन्होंने कहा कि डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा सबसे ज्यादा समाजवादी पार्टी की सरकार में तोड़ी गईं। उन्होंने जौनपुर, मऊ, सीतापुर और आजमगढ़ समेत कई जिलों का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे तमाम मामले सामने आए थे। ओमप्रकाश राजभर ने आगरा के एक मामले का जिक्र करते हुए कहा कि सपा सरकार में दलित ग्राम प्रधान को सपाइयों ने पीट-पीटकर मार डाला था। उनके अनुसार, ग्राम प्रधान का कसूर सिर्फ इतना था कि उन्होंने सपा को वोट नहीं दिया था। राजभर ने कहा कि समाजवादी पार्टी के लोग आंबेडकर से संबंधित आंकड़े उठाकर देखें तो अखिलेश राज में दलितों के ऊपर अत्याचार कई गुना बढ़ा था। उन्होंने दावा किया कि बाबा साहब की प्रतिमा तोड़े जाने का रिकॉर्ड भी समाजवादी पार्टी की सरकार में सबसे ज्यादा रहा। राजभर ने कहा कि आज भी उत्तर प्रदेश में दलित अत्याचार के मामलों में यादव और मुस्लिम यानी सपा के वोटर ही सबसे आगे हैं। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव और सैफई के उनके परिवार का बसपा सुप्रीमो मायावती के प्रति क्या विचार रहा है, यह किसी से छिपा नहीं है। उन्होंने 2 जून 1995 के लखनऊ गेस्ट हाउस कांड का जिक्र करते हुए कहा, “सपाई गुंडे मायावती की हत्या करना चाहते थे। संयोग से वहां बीजेपी के नेता पहुंच गए। बीजेपी के लोग नहीं होते तो शायद मायावती की हत्या कर दी जाती। किसी तरह से उनकी जान बची थी।” राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव दलित सम्मान की बात करते हैं, लेकिन उनके शासनकाल में दलित बेटियों के साथ जितना जुर्म हुआ, उसे कौन नहीं जानता। उन्होंने कहा कि आज वक्त बदल गया है और योगी सरकार में दलित महापुरुषों को सम्मान मिल रहा है तथा दलित नायकों को नई पहचान मिल रही है। उन्होंने कहा कि महापुरुषों के नाम पर बने पार्कों में यदि प्रतिमाएं पुरानी हो गई हैं तो उन्हें बदलने, बाउंड्री कराने और सौंदर्यीकरण के अन्य कार्यों के लिए सरकार ने अभी 500 करोड़ रुपये दिए हैं और सभी जगह काम शुरू हो गया है। ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव के नीले गमछे को लेकर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव सोच रहे हैं कि बाबा साहब डॉ. आंबेडकर को आगे करके वोट ले लेंगे लेकिन उनके गले का नीला गमछा ही उनके गले का फांस है। उन्होंने कहा, “सिर पर लाल टोपी और गले में नीला गमछा 2 जून 1995 की घटना याद दिलाता है कि आपने मायावती के साथ गेस्ट हाउस कांड में सपा ने क्या किया था।” राजभर ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव ने आरक्षण में प्रमोशन का आरक्षण खत्म किया। उन्होंने कहा कि दलित महापुरुषों, बाबा साहब सहित अन्य के नाम से बने पार्क और जिले खत्म करने का काम भी अखिलेश यादव ने किया। उन्होंने कहा कि दलितों के उत्थान और विकास के लिए महापुरुषों के नाम से बनी योजनाओं को भी खत्म करने का काम अखिलेश यादव ने किया। ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि आज सभी महापुरुषों का सम्मान योगी सरकार में सुरक्षित है और कहीं कोई घटना नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा कि महापुरुषों को लेकर मौजूदा सरकार जो काम कर रही है, अगर ऐसी सोच सत्ता में रहते हुए अखिलेश यादव के मन में पैदा हुई होती तो शायद कुछ कदम आगे बढ़ते। उन्होंने कहा, “इसलिए जिस सोच को लेकर अखिलेश यादव चल रहे हैं, उस पर 2027 में एक बार फिर पानी फिर जाएगा।

अचानक व्हाइट हाउस लौटे ट्रंप, खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर हमले का अलर्ट, एडवाइजरी जारी

नई द‍िल्‍ली। इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (आईआरआईबी) के मुताब‍िक मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण अमेर‍िकी दूतावासों ने नागर‍िकों की सुरक्षा के ल‍िए अलर्ट जारी क‍िए है। आईआरआईबी ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पोस्‍ट में ल‍िखा, ”मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण, लेबनान, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, कतर, इराक, इजरायल, ओमान, सऊदी अरब और तुर्की में मौजूद अमेरिकी दूतावासों ने वहां रहने वाले अमेरिकी नागरिकों के लिए सुरक्षा से जुड़े जरूरी अलर्ट जारी किए हैं।” आईआरजीसी के एक सैन्य अधिकारी व लेफ्टिनेंट कर्नल इब्राहिम जोल्फागारी के अनुसार, ईरान ने संभावित खतरे के मद्देनजर अधिकतम अलर्ट जारी कर दिया है। ईरान ने पिछले एक घंटे में आईआरजीसी, सेना और सुरक्षाबलों के लिए अपना सबसे ऊंचा अलर्ट लेवल ‘कोड 100’ जारी किया है। जोल्फागारी के अनुसार, ट्रंप अचानक ‘कैंप डेविड’ के दौरे शनिवार रात व्हाइट हाउस लौट आए। इजरायली राष्‍ट्रपत‍ि नेतन्याहू ने भी अपनी अमेरिका यात्रा सीमित कर दी है और इजरायल लौट रहे हैं। वहीं, इराक में अमेरिकी दूतावास और वाणिज्य दूतावास ने एडवाइजरी जारी करते हुए बताया क‍ि मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण सुरक्षा हालात पेचीदा बने हुए हैं और कभी भी स्थिति अचानक बिगड़ सकती है। जो अमेरिकी अभी मिडिल ईस्ट में हैं, उन्हें ज्‍यादा सतर्क रहना चाहिए और फ्लाइट रद्द होने, एयरस्पेस बंद होने और यात्रा में रुकावट आने जैसी संभावनाओं का ध्यान रखना चाहिए। अमेरिकी दूतावास ने कहा क‍ि ईरान समर्थित हूती समूह ने सऊदी अरब के खिलाफ हमलों में हिस्सा लिया है, जिनमें नागरिक हवाई अड्डों को भी निशाना बनाया गया है। यह सैन्य संघर्ष बहुत तेजी से बढ़ सकता है। इस क्षेत्र में आने या यहां से बाहर जाने वाले अमेरिकी नागरिकों को हवाई अड्डों और एयरलाइंस के संचालन से जुड़ी जानकारी पर लगातार नजर रखनी चाहिए। अमेरिकी राजनयिक ठिकानों को निशाना बनाया गया है, जिनमें मध्य पूर्व के बाहर मौजूद ठिकाने भी शामिल हैं। ईरान और उसका समर्थन करने वाले समूह विदेशों में अमेरिका से जुड़े दूसरे हितों या दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अमेरिका और अमेरिकी नागरिकों से जुड़ी जगहों को भी निशाना बना सकते हैं। इनमें अमेरिकी कंपनियां और दूसरी संस्थाएं भी शामिल हैं।

प्रमोद तिवारी बोले- ‘छात्रों का उत्साह देखकर भाजपा का दीया मद्धम पड़ा’, प्रल्हाद जोशी के आरोपों पर भी दिया जवाब

नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने इंदौर में राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को सफल बताते हुए बधाई दी है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे छात्रों का उत्साह बढ़ रहा है, भाजपा का दीया मद्धम पड़ रहा है। शिक्षा व्यवस्था पर राहुल गांधी की टिप्पणी को लेकर प्रमोद तिवारी ने कहा, “राहुल गांधी की टिप्पणियों के लिए मैं आपका धन्यवाद करता हूं। जिस तरह इंदौर के कार्यक्रम में छात्रों का हुजूम उमड़ रहा था और उससे भी बड़ी बात, जो उत्साह दिख रहा था, भाजपा का दीया मद्धम पड़ रहा है। मैं बस इतना ही कह सकता हूं कि ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम की सफलता पर बधाई।” भाजपा के इन आरोपों पर कि प्रधानमंत्री की मां का अपमान किया गया है, प्रमोद तिवारी ने कहा, “ये लोग (भाजपा नेता) पागल हो गए हैं। ‘छात्रों की गूंज’ की सफलता देखकर दिमाग चल गया है। शिक्षा मंत्री (प्रल्हाद जोशी) अशिक्षित जैसी बातें कर रहे हैं। मैं चुनौती देता हूं कि प्रधानमंत्री जी की मां का जिक्र कहां है? कहां महिलाओं के सम्मान के खिलाफ कुछ कहा? मैं राहुल गांधी के एक-एक शब्द की चुनौती देता हूं।” कांग्रेस सांसद ने आगे कहा, “राहुल गांधी की मां का अपमान गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए नरेंद्र मोदी ने किया था। उन्होंने शशि थरूर के बारे में टिप्पणी की थी। रेणुका चौधरी की एक ‘खलनायक’ से तुलना की गई थी। अगर मुझसे बात करने चाहे तो मैं ऐसे 10 मामले गिना सकता हूं। इसलिए प्रधानमंत्री अपनी भाषा संभालें। राहुल गांधी सबसे संभलकर और आचरण वाले एक नेता हैं।” इससे पहले, प्रल्हाद जोशी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने छात्रों के साथ बातचीत का इस्तेमाल करके पीएम नरेंद्र मोदी की दिवंगत मां का मजाक उड़ाया और उनका अपमान किया। उन्होंने इसकी निंदा करते हुए कहा कि यह घटनाक्रम बुनियादी मानवीय संवेदना और राजनीतिक संस्कृति की चौंकाने वाली कमी को दर्शाता है।

मायावती का सख्त संदेश: आकाश आनंद के बाद अब बहन भी पार्टी की जिम्मेदारी से बाहर, ईशान को मौका

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने परिवारवाद को लेकर एक बार फिर अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि पार्टी और बहुजन आंदोलन के हित में वह अपने भाई-बहनों और नजदीकी रिश्तेदारों के मोह से ऊपर उठकर फैसले लेंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि आकाश आनंद और उनकी बहन को अब पार्टी की कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। इसके स्थान पर अपने भाई आनंद कुमार के परिवार से केवल ईशान आनंद को पार्टी में सम्मानजनक जिम्मेदारी देकर आगे बढ़ाया जाएगा। मायावती ने कहा कि यह फैसला उन्होंने बसपा संस्थापक मान्यवर कांशीराम के पदचिह्नों और बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के जीवन से प्रेरणा लेकर लिया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि ईशान आनंद ने भी भविष्य में पार्टी विरोधी कोई गंभीर कृत्य किया तो उन्हें भी पार्टी से बाहर कर दिया जाएगा। ऐसी स्थिति में आनंद कुमार के परिवार के किसी अन्य सदस्य को पार्टी में कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी बल्कि पार्टी में कार्यरत किसी मिशनरी और वफादार कार्यकर्ता को आगे बढ़ाया जाएगा। मायावती ने रविवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा है कि आज मेरा पुनः पार्टी के लोगों से यही कहना है कि मेरे खुद के अनुभव को मद्देनज़र रखते हुये यदि इनको राजनीति में कामयाब होना है और समाज के लिए कुछ करना है तो उन्हें मेरी तरह अपने भाई-बहिनों व नजदीकी रिश्ते-नातों आदि के मोह से ऊपर उठकर अपनी पूरी ईमानदारी व निष्ठा से कार्य करना है।” उन्होंने कहा कि बसपा के जन्मदाता एवं संस्थापक कांशीराम ने राजनीति में आने के बाद अपने नजदीकी रिश्ते-नातों को राजनीतिक लाभ देने से हमेशा दूर रखा और उन्हें केवल निःस्वार्थ भावना से पार्टी संगठन में कार्य करने की इजाजत दी। मायावती ने कहा कि कांशीराम ने अपना परिवार नहीं बनाया और पूरी जिंदगी बहुजन समाज के हित और कल्याण के लिए समर्पित कर दी। बसपा प्रमुख ने कहा कि कांशीराम से प्रेरित होकर उन्होंने भी अपनी पूरी जिंदगी बहुजन समाज के लिए समर्पित करने का फैसला लिया। हालांकि, उन्होंने कहा कि महिला होने के कारण मजबूरी में उन्हें अपने किसी भाई-बहन आदि को अपने साथ रखना पड़ा, जिसके तहत उनके छोटे भाई आनंद कुमार लंबे समय से उनकी सेवा में कार्यरत हैं। मायावती ने कहा कि आनंद कुमार के विशेष आग्रह पर उनके परिवार के बड़े बेटे आकाश आनंद को राजनीति में आगे किया गया था। लेकिन शादी के बाद आकाश आनंद के रवैये और गतिविधियों के कारण उन्हें कुछ दिन पहले पार्टी से अलग करना पड़ा। उन्होंने कहा, “अर्थात् अब वह अपने ससुर श्री अशोक सिद्धार्थ के जंजाल में पूरी तरह से फंस चुके हैं, जिसे अब पार्टी में वापिस लेना यह पार्टी के लिए बहुत बड़ा विश्वासघात ही होगा, जो मैं यह पार्टी विरोधी ग़लत कार्य कदापि नहीं कर सकती हूँ।” मायावती ने कहा कि आनंद कुमार के परिवार में से किसे पार्टी में आगे किया जाए, इसे लेकर वह पिछले कुछ समय से दुविधा में थीं। सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार करने के बाद उन्होंने तय किया है कि परिवार से ऐसे सदस्य को आगे किया जाए, जो आकाश आनंद के नक्शेकदम पर न चले। उन्होंने कहा कि आनंद कुमार की बेटी को भी भविष्य में पार्टी में आगे बढ़ाने का सवाल उठ सकता है लेकिन शादी के बाद यदि उसका मामला भी आकाश आनंद की तरह निकल गया तो यह पार्टी हित में उचित नहीं होगा। इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए आकाश आनंद और उनकी बहन दोनों को पार्टी की किसी भी जिम्मेदारी से दूर रखने का फैसला किया गया है और इसमें कोई फेरबदल नहीं होगा। मायावती ने कहा, “अब इन दोनों के स्थान पर आनन्द कुमार के परिवार में से केवल ईशान आनन्द को ही, पार्टी में सम्मानजनक जिम्मेदारी देकर इनको आगे किया जायेगा, जिसका आकाश आनन्द व इनकी बहन की तरह कभी भी कोई चक्कर नहीं रहेगा। अभी तक ऐसा ही लग रहा है। आगे तो कुछ भी नहीं कहा जा सकता है।” उन्होंने साथ ही चेतावनी दी कि यदि ईशान आनंद भी पार्टी विरोधी गंभीर कृत्य करते हैं तो उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया जाएगा। मायावती ने कहा कि ऐसी स्थिति में आनंद कुमार के परिवार के किसी अन्य सदस्य को पार्टी की छोटी-बड़ी कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। बसपा प्रमुख ने कहा कि इसके बजाय पार्टी में कार्यरत दलित वर्ग के किसी मिशनरी और वफादार कार्यकर्ता को आगे किया जाएगा। उन्होंने कहा कि देश और जनहित के जरूरी मुद्दों के साथ इस विशेष मुद्दे पर भी विचार करने के लिए 23 सितंबर को बसपा की अत्यंत जरूरी अखिल भारतीय बैठक बुलाई गई है, ताकि पार्टी के लोग संगठन के कार्यों में पूरी ताकत से जुट सकें। आंबेडकर के पत्र का भी दिया हवाला मायावती ने परिवार को लेकर अपने फैसले के समर्थन में बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के 23 फरवरी 1956 के एक पत्र का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि 26 अलीपुर रोड, सिविल लाइन्स, नई दिल्ली से आंबेडकर ने अपने पुत्र यशवंत बी. आंबेडकर को पत्र लिखकर बौद्ध भूषण प्रिंटिंग प्रेस से जुड़े कामकाज में कथित अनियमितता को लेकर चेतावनी दी थी। मायावती ने कहा कि उस पत्र में आंबेडकर ने स्पष्ट किया था कि प्रेस सार्वजनिक संपत्ति है, न कि उनकी या उनके पुत्र की निजी संपत्ति। उन्होंने बेटे को अंतिम निर्देश की अवहेलना करने पर प्रेस से बाहर करने और जरूरत पड़ने पर मुकदमा चलाने तक की चेतावनी दी थी। अंत में मायावती ने कहा कि समस्त बहुजन समाज ही उनका असली परिवार है और सत्ता की मास्टर चाबी के जरिये बहुजन समाज को ‘शोषित से शासक वर्ग’ बनाकर उसका हित और कल्याण सुनिश्चित करना ही उनका मिशनरी लक्ष्य और प्रतिज्ञा है। उन्होंने कहा कि इसके लिए वह अपने भाई-बहनों के खिलाफ भी किसी भी हद तक जा सकती हैं और यही उनका संकल्प है।

कांग्रेस की विचारधारा विश्व कल्याण और मानवता की है : पप्पू यादव

नई दिल्ली। दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ (डूसू) चुनाव के नतीजों पर पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को कोई खत्म नहीं कर सकता और इसकी विचारधारा विश्व कल्याण और मानवता के लिए है। पप्पू यादव ने आईएएनएस से कहा, “कोई एनएसयूआई का क्लीन स्वीप नहीं हुआ। जब तक हम सब हैं, कांग्रेस को कोई डुबा नहीं सकता। कांग्रेस को कोई मार नहीं सकता। कांग्रेस की विचारधारा यह विश्व कल्याण और मानवता की विचारधारा है।” उन्होंने कहा कि कांग्रेस को बाहर से कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता, बल्कि नुकसान खुद कांग्रेसियों की वजह से होता है। दिल्ली यूनिवर्सिटी चुनाव में भाजपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “कांग्रेस को खुद कांग्रेसी खत्म करते हैं।” पप्पू यादव ने कहा कि पार्टी के लोग राहुल गांधी की छवि और उनके संघर्ष को देखकर काम नहीं करते, बल्कि निजी स्वार्थ और अहंकार में काम करते हैं। उन्होंने कहा, “हम लोग राहुल गांधी के इमेज के बारे में, उसके जो संघर्ष है उसको हम लोग देखकर काम नहीं करते। अपने निजी स्वार्थ को देख के, अपने निजी ईगो को देख के काम करते हैं।” उन्होंने कहा कि राहुल गांधी लगातार छात्रों की बात कर रहे हैं। कैंपस में कई बच्चों की मौत हुई और जो इंडिपेंडेंट पैनल जीता, वो भी कांग्रेसी ही हैं। जो 100 वोट से हारे, वो भी कांग्रेसी हैं। पप्पू यादव ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष ने आदिवासी समाज के बच्चों को मौका दिया, यह छोटी बात नहीं है। उनके अनुसार हार-जीत मायने नहीं रखती। उन्होंने कहा, “हमारे अध्यक्ष, राहुल गांधी ने जो आदिवासी समाज के बच्चों को दिया, यह छोटी बात थोड़ी है। हार-जीत का मैटर नहीं है। मैटर है कि हमारे बच्चों ने हारा नहीं, हराए गए हमारे अध्यक्ष को। हजार-डेढ़ हजार वोट से हरा दिए गए।” उन्होंने बताया कि गिनती के दौरान वे 14 से 15 राउंड तक आगे चल रहे थे। अंत में उन्होंने कहा कि जिन लोगों को राहुल गांधी ने बड़ी जिम्मेदारी दी है, वे ही उनके सपने, उम्मीद और विश्वास के साथ धोखा कर रहे हैं।

आजम खान के समर्थन में सपा कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में किया प्रदर्शन, कहा- ‘साजिश के तहत हुए 350 मुकदमे’

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री आजम खान के समर्थन में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने रविवार को दिल्ली में जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया। सपा कार्यकर्ताओं ने आजम खान की रिहाई और उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग की। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव और जौनपुर से पूर्व विधायक मोहम्मद अरशद खान के नेतृत्व में रविवार को पार्टी कार्यक्रम रविवार को जंतर-मंतर पर पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने से रोका गया। इसके बाद समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के बाहर सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया। मोहम्मद अरशद खान ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि हमारे पास प्रदर्शन की अनुमति थी, लेकिन पुलिस ने इसे एकाएक रद्द कर दिया। हम लोग यहां प्रदर्शन करने पहुंचे तो पुलिस ने चारों ओर बैरिकेडिंग करके रास्ते को रोक दिया। उन्होंने कहा कि 2019 में तमाम साजिशों के बावजूद आजम खान को जीत मिली थी। अगले कुछ महीनों में उन पर और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ तकरीबन 350 मुकदमे दर्ज कर दिए गए। इतने मुकदमे दर्ज होना सरकारी साजिश का ही नतीजा था। आजम खान और उनके परिवार के साथ अन्याय हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि रामपुर की जौहर यूनिवर्सिटी जायज तरीके से बनी हुई है, लेकिन तीन महीने पहले 38 भवनों के ध्वस्तीकरण का नोटिस दे दिया गया। यह नोटिस गलत तरीके से दिया गया। मांग है कि ध्वस्तीकरण के नोटिस को वापस लिया जाए। विरोध प्रदर्शन के दौरान सपा के नेता प्रधानमंत्री के नाम एक ज्ञापन लेकर भी पहुंचे। इसमें उन्होंने लिखा, “यह सर्वविदित है कि वर्ष 2019 में मात्र 3-4 महीनों की अल्प अवधि में आजम खान, अब्दुल्ला आजम खान और उनके परिवार के सदस्यों के विरुद्ध लगभग 350 आपराधिक मुकदमे दर्ज किए गए। एक ही परिवार पर इतने कम समय में इतनी बड़ी संख्या में मुकदमे दर्ज होना प्रथम दृष्टया राजनीतिक प्रतिशोध और प्रशासनिक दुरूपयोग की आशंका को जन्म देता है। इससे यह संदेह गहरा होता है कि क्या इतने मुकदमे वास्तविक अपराधों पर आधारित हैं या राजनीतिक विरोध की कीमत वसूलने के लिए दर्ज किए गए हैं।” इसमें मोहम्मद अरशद खान ने लिखा, “रामपुर विकास प्राधिकरण की ओर से जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों को ध्वस्त करने का नोटिस जारी किया गया है। यह हजारों छात्रों के भविष्य का सवाल है। यह केवल इमारतों का नहीं बल्कि शिक्षा, शोध और रोजगार से जुड़े हजारों परिवारों के जीवन का प्रश्न है। इसलिए, इस नोटिस को तत्काल निरस्त किया जाए और अंतिम निर्णय तक किसी भी ध्वस्तीकरण कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।

बिहार बाढ़ पीड़ितों के लिए एनडीए नेताओं द्वारा अपनी एक महीने की सैलरी देना सराहनीय : राजीव रंजन

पटना। बिहार में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए एनडीए नेताओं द्वारा अपनी एक महीने की सैलरी मुख्यमंत्री राहत कोष में दान करने के फैसले का स्वागत करते हुए राजीव रंजन ने कहा कि यह एक मिसाल कायम करने वाला कदम है। उन्होंने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “इतनी भयानक बाढ़ के बीच, लोगों की मुश्किलों को कम करने और स्थिति को जितना हो सके काबू में करने की कोशिशें की जा रही हैं। राहत और पुनर्वास कार्यक्रमों के लिए संसाधनों की जरूरत होती है। ऐसे हालात में केंद्र की मदद, राज्य सरकार के संसाधन और फिर आम लोगों की भागीदारी होती है। अब जन-प्रतिनिधियों ने इस बड़े अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेने का फैसला किया है, और यह एक स्वागत योग्य कदम है।” वहीं, जेडीयू विधायक अनंत सिंह और जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता और एमएलसी नीरज कुमार के बीच चल रहे मतभेदों पर पूछे गए सवाल पर राजीव रंजन ने इसे चुनाव से पहले की सामान्य खींचतान बताया। उन्होंने कहा, “अभी चुनाव की अधिसूचना जारी नहीं हुई है। कभी-कभी मतभेद हो जाते हैं। लेकिन एनडीए एक बड़ा परिवार है और इसके सर्वमान्य नेता नीतीश कुमार हैं। बिहार में हमारी कोशिश ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतने की है। इसलिए, अभी तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है। हमें अब भी भरोसा है कि सब कुछ शांतिपूर्ण ढंग से सुलझा लिया जाएगा।” इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एक कार्यक्रम के दौरान मंच से एक बुजुर्ग माता को कुर्सी देने के लिए कहने वाले बयान का कांग्रेस के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के मंच से मजाक उड़ाए जाने की घटना पर भी कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधा। राजीव रंजन ने कहा, “राहुल गांधी ‘सेल्फ-गोल’ करने की कला में माहिर हो गए हैं। वे अक्सर ऐसी गलतियां करते हैं जो भारतीय जनता को बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं होतीं। एक मां के प्रति आम लोगों के सम्मान और श्रद्धा को समझे बिना ऐसी बातें कहना गलत है। बेशक, राहुल गांधी ने ‘गूंज’ कार्यक्रम में कई बातें कही होंगी, लेकिन आज सिर्फ इसी बात पर चर्चा हो रही है। इसलिए, यह समझा जाना चाहिए कि अब तक उन्होंने जितने भी ‘गूंज’ कार्यक्रम किए हैं, वे बेमतलब साबित हुए हैं।

कोलकाता में सीपीआई-एम के दफ्तरों में तोड़फोड़, टीएमसी के पूर्व विधायक के परिवार पर हमला

कोलकाता। दक्षिण कोलकाता के जादवपुर इलाके में मोटरसाइकिल सवार अज्ञात बदमाशों ने सीपीआई-एम के कई पार्टी दफ्तरों और तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक देबराब्रता मजूमदार के घर व दफ्तर पर हमला किया और तोड़-फोड़ की। कोलकाता म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (केएमसी) इलाके के छह वार्डों में सीपीआई-एम के दफ्तरों को निशाना बनाया गया। आरोप है कि इन हमलों के दौरान पार्टी का झंडा उतारकर जमीन पर फेंक दिया गया। वार्ड नंबर 96 के लंबे समय से केएमसी पार्षद और पूर्व विधायक मजूमदार के घर और दफ्तर पर भी हमला किया गया और उनके परिवार के कुछ सदस्यों से मारपीट की गई। अभी यह साफ नहीं है कि इस घटना में कौन-कौन शामिल था। सीपीआई(एम) के एक नेता के अनुसार, वार्ड संख्या 96, 99, 101, 102, 105 और 106 में पार्टी कार्यालयों में तोड़फोड़ की गई। बताया जा रहा है कि इनमें सबसे अधिक तनाव वार्ड संख्या 96 में था, जहां पूर्व तृणमूल कांग्रेस विधायक के आवास और पार्टी कार्यालय के सामने स्थिति काफी तनावपूर्ण रही। इसके अलावा, इस वार्ड में स्थापित सीपीआई(एम) के शहीद स्मारक (मार्टियर्स अल्टर) को भी निशाना बनाकर हमला किया गया। आरोप है कि बदमाशों ने तृणमूल के पूर्व विधायक के बड़े भाई को धमकाया और उन्हें धक्का देकर जमीन पर गिरा दिया। इस हमले के बाद मजूमदार के परिवार ने कहा, “हमने बार-बार पुलिस को फोन करके घटना की जानकारी दी, लेकिन पुलिस एक घंटे बाद आई।” इसके अलावा, वार्ड नंबर 101 और वार्ड नंबर 105 में भी अशांति फैल गई। आरोप है कि वहां भी मारपीट हुई। तृणमूल के पूर्व पार्षद तरुण मंडल के दफ्तर में भी तनावपूर्ण स्थिति बन गई थी। आरोप है कि यह बाइक गैंग न सिर्फ जादवपुर इलाके में, बल्कि दक्षिण 24 परगना जिले के नरेंद्रपुर में भी उपद्रव मचा रहा है। इस घटना के बाद सीपीआई-एम और तृणमूल दोनों ने ही पूरी घटना में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। भाजपा पर भी आरोप लगाए गए हैं, लेकिन पार्टी ने अभी तक इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है। मजूमदार ने कहा, “कम से कम 100 लोग आए और घर में तोड़फोड़ की। उन्होंने मेरे बड़े भाई को अपशब्द कहे। उन्हें धक्का दिया। उन्होंने मुझे भी अपशब्द कहे। मैंने अपने पूरे राजनीतिक करियर में ऐसा कुछ कभी नहीं देखा। वे सभी भाजपा समर्थक हैं।” एक सीपीआई एम कार्यकर्ता ने कहा, “उन्होंने पार्टी के झंडे फाड़ दिए। उन्होंने हमें अपशब्द कहे। वे हमसे यहां न आने के लिए कह रहे हैं। वे सभी भाजपा के हैं। वे पहले तृणमूल के साथ थे।