अरुणाचल में तेज बहाव के बीच बीआरओ ने पुल को किया बहाल, वाहनों की आवाजाही शुरू

नई दिल्ली। बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन ने तेज बहाव वाली लोहित नदी पर बने 800 फीट लंबे करोटी पुल को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में बहाल किया है। अरुणाचल प्रदेश में एक ओवरलोडेड टिपर से पुल के नुकसान पहुंचने के बाद बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) यह कार्य किया है। बीआरओ के मुताबिक यह घटना 116 रोड कंस्ट्रक्शन कंपनी, 48 टास्क फोर्स और परियोजना उदयक के दल के लिए बड़ी चुनौती थी। टीम ने सबसे पहले क्षतिग्रस्त हिस्से की स्थिति को स्थिर किया और पुल पर फंसे टिपर को सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला। इसके बाद बीआरओ ने कठिन परिस्थितियों के बीच पुल पर जरूरी मरम्मत और बहाली का काम किया गया। इससे क्षेत्र में सड़क संपर्क बनाए रखने और स्थानीय आवागमन को सुचारु करने में मदद मिली। तेज बहाव वाली नदी और जोखिमपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद दल ने सावधानी और तकनीकी दक्षता के साथ काम जारी रखा। आवश्यक बहाली कार्य पूरे होने के बाद करोटी पुल को हल्के वाहनों की आवाजाही के लिए खोल दिया गया। बीआरओ के कर्मयोगियों ने इस दौरान इंजीनियरिंग कौशल, अनुभव और सटीकता का परिचय दिया। क्षतिग्रस्त पुल को जल्द से जल्द उपयोग के योग्य बनाना इस अभियान की प्रमुख उपलब्धि रही। संगठन के अनुसार, चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों में सड़क और पुलों का रखरखाव सामरिक तथा स्थानीय संपर्क, दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। गुरुवार को संगठन ने बताया कि इन प्रयासों के बाद करोटी पुल को हल्के वाहनों की आवाजाही के लिए खोल दिया गया। बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन के महानिदेशक ने इस चुनौतीपूर्ण अभियान में समर्पण और पेशेवर प्रतिबद्धता के लिए लेफ्टिनेंट कर्नल एपीएस नेगी, कैप्टन मयंक जोशी, कैप्टन शुभम एम नेसरागी, उपकरण एवं मैकेनिकल विशेषज्ञ देवेंद्र कुमार और मोटर परिवहन चालक सुखजीत सिंह की सराहना की है। बीआरओ ने इस अभियान को विषम परिस्थितियों में इंजीनियरिंग की मिसाल बताया है। बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन का कहना है कि यह कार्रवाई दर्शाती है कि कौशल, अनुभव और सटीकता के साथ कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी काम को पूरा किया जा सकता है। इसी के साथ संगठन ने अपने मूलमंत्र श्रमेन सर्वं साध्यम को भी दोहराया।

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