नई दिल्ली। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को कहा कि भारत, उद्यमियों – खासकर महिला उद्यमियों – के सामने आने वाली चुनौतियों से निपटने के अपने अनुभव से मिली सीख को ‘ब्रिक्स महिला व्यापार गठबंधन’ (BRICS Women’s Business Alliance) और व्यापक ब्रिक्स व्यापार जुड़ाव में शामिल करना चाहता है।उन्होंने ब्रिक्स देशों से अंतरराष्ट्रीय व्यापार में महिला उद्यमियों और महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों के लिए मौके बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया। साथ ही, उन्होंने क्रेडिट (ऋण) और बाजारों तक आसान पहुंच तथा व्यापार के स्पष्ट नियमों की आवश्यकता पर जोर दिया।यहां FICCI द्वारा आयोजित ‘ब्रिक्स WBA महिला-नेतृत्व विकास सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में कदम रखने वाले उद्यमी को तीन मुख्य बाधाओं को पार करना होता है: क्रेडिट तक पहुंच, खरीदारों और बाजारों तक पहुंच, और ऐसे स्पष्ट नियमों तक पहुंच जो मुक्त व्यापार और खुले अवसरों को बढ़ावा दें।उन्होंने कहा कि भारत ने महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ शिक्षा, कौशल और जीवन की बेहतर गुणवत्ता के माध्यम से उन्हें सशक्त बनाने पर ध्यान केंद्रित किया है, ताकि उन्हें देश की प्रगति का वाहक बनाया जा सके।गोयल ने कहा कि आज लगभग 10 करोड़ (100 मिलियन) ग्रामीण महिलाएं 90 लाख (9 मिलियन) स्वयं-सहायता समूहों, छोटी सहकारी समितियों या महिलाओं के उन समूहों की सदस्य हैं जो अलग-अलग विचारों और उद्यमों पर मिलकर काम कर रही हैं।व्यक्तिगत आय के रूप में 1 लाख रुपये से अधिक कमाने वाली महिलाओं की संख्या 3 करोड़ (30 मिलियन) से अधिक हो गई है। उन्होंने कहा कि इन महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ कहा जाता है और भारत को उम्मीद है कि इनकी संख्या और आय दोनों में वृद्धि जारी रहेगी।गोयल ने आगे कहा कि भारत ने छोटे उद्यमियों को लगभग 56 करोड़ (560 मिलियन) ऋण दिए हैं, जिनमें से 68 प्रतिशत से अधिक ऋण महिला उद्यमियों को मिले हैं।उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि महिलाएं आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनें और परिवार के अन्य सदस्यों पर निर्भर न रहें। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी होती हैं, तो वे भारत के विकास इंजन की चालक बन सकती हैं।उन्होंने बताया कि लगभग एक दशक पहले तक भारत में महिला कार्यबल की भागीदारी लगभग 19 प्रतिशत थी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जैसे-जैसे आय का स्तर बढ़ेगा, शिक्षा में सुधार होगा, कौशल विकसित होंगे और प्रतिभा सामने आएगी, यह संख्या बढ़कर 50 प्रतिशत या उससे अधिक हो जाएगी।गोयल ने कहा कि विकसित समाजों में औपचारिक कार्यबल में महिलाओं का अनुपात 50 प्रतिशत से अधिक हो गया है। श्री गोयल ने इस बात पर ज़ोर दिया कि जैसे-जैसे ज़्यादा महिलाएँ औपचारिक वर्कफ़ोर्स (कामकाजी आबादी) में शामिल होंगी, भारत की आर्थिक विकास दर में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है।उन्होंने यह भी कहा कि विदेशी व्यापार को केवल एक सामान्य व्यावसायिक गतिविधि के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे समाजों और व्यवसायों को जोड़ने और समाज के उन वंचित वर्गों को अवसर प्रदान करने के माध्यम के रूप में देखा जाना चाहिए, जो शायद कभी विदेश जाने की सोच भी नहीं सकते थे।उन्होंने कहा कि ब्रिक्स (BRICS) देश ‘जयपुर सहमति’ (Jaipur Consensus) के तहत अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए एक साझा ब्रिक्स प्लेटफॉर्म बनाने की संभावना तलाशने पर भी सहमत हुए हैं। इससे उद्यमियों के सामने आने वाली दूसरी बड़ी चुनौती—यानी बाज़ारों और खरीदारों तक पहुँच—को हल करने में मदद मिल सकती है।