कर्नाटक में सूखाग्रस्त तालुकों की घोषणा में भेदभाव, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने राज्य सरकार पर लगाया भेदभाव का आरोप

बेंगलुरु। कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष और विधायक बीवाई विजयेंद्र ने सोमवार को कांग्रेस के नेतृत्व वाली राज्य सरकार पर सूखा प्रबंधन में मनमाने ढंग से काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सूखाग्रस्त तालुकों की घोषणा में भेदभाव ने किसानों और संकटग्रस्त लोगों के प्रति सरकार के “गैर-जिम्मेदार” रवैये को उजागर किया है। मुद्दाबिहाल के कांग्रेस विधायक सीएस अप्पाजी नाडागौड़ा द्वारा सूखाग्रस्त तालुकों की घोषणा में भेदभाव का आरोप लगाते हुए जारी किए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए विजयेंद्र ने कहा कि सूखा प्रबंधन और किसानों को सहायता प्रदान करने के मामले में कांग्रेस सरकार का रवैया पूरी तरह से उजागर हो गया है। उन्होंने दावा किया कि भ्रष्टाचार और कुप्रशासन के कारण कांग्रेस सरकार दिवालिया हो गई है और परिणामस्वरूप जिम्मेदारी से बचने के प्रयास में उसने विभिन्न मामलों में पारदर्शिता की धज्जियां उड़ा दीं। विजयेंद्र ने कहा, “भाजपा ने सरकार द्वारा केवल 101 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित करने पर पहले ही कड़ी आपत्ति जताई है जबकि 190 से अधिक तालुका सूखे जैसी स्थितियों का सामना कर रहे हैं।” भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के अनुसार, नादगौड़ा के बयान ने भाजपा के आरोपों का समर्थन करने वाले “स्पष्ट प्रमाण” प्रदान किए। उन्होंने आरोप लगाया कि विजयपुरा जिले के प्रभारी मंत्री एमबी पाटिल ने इस मुद्दे को स्वीकार करने और गलती को सुधारने के बजाय नादगौड़ा के बयान पर स्पष्टीकरण देकर जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास किया। विजयेंद्र ने कहा कि नाडागौड़ा और पाटिल के बयानों ने कांग्रेस सरकार के भीतर के “आंतरिक मतभेदों और कमियों” को सार्वजनिक कर दिया है। विजयेंद्र ने कहा, “आपकी आंतरिक प्रतिष्ठा की लड़ाई या राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता चाहे जो भी हो, सबसे पहले लोगों द्वारा सामना की जा रही कठिनाइयों का समाधान करने पर ध्यान केंद्रित करें, जिसमें सूखा प्रबंधन भी शामिल है।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार किसानों और आम जनता की कठिनाइयों का समाधान करने में विफल रहती है, तो “वह दिन दूर नहीं जब लोग खुद इस सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरेंगे।” गौरतलब है कि वरिष्ठ कांग्रेस विधायक अप्पाजी नाडागौड़ा ने आरोप लगाया था कि सरकार ने जानबूझकर उनके विधानसभा क्षेत्र के दो तालुकों को सूखाग्रस्त क्षेत्रों की सूची से बाहर रखा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्री एमबी पाटिल ने “व्यक्तिगत शत्रुता” के चलते उनके क्षेत्र को सूची से बाहर रखने का काम किया। विधायक नाडागौड़ा ने चेतावनी दी है कि अगर मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेतृत्व ने अन्याय को दूर नहीं किया तो वे विरोध प्रदर्शन करेंगे। आरोपों का जवाब देते हुए मंत्री एमबी पाटिल ने पलटवार करते हुए कहा कि दोनों बार जब सूखे का अध्ययन करने वाली टीम नाडागौड़ा के निर्वाचन क्षेत्र में गई थी, तब विधायक वहां मौजूद नहीं थे और अब किसानों के नाम पर झूठे आरोप लगा रहे हैं। मंत्री पाटिल ने कहा कि विधायक नाडागौड़ा उन्हें “बिना किसी कारण” के निशाना बना रहे हैं और “उन्हें मानसिक स्वास्थ्य के लिए उपचार की आवश्यकता है।

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