भारत-किरिबाती साझेदारी को मिली नई मजबूती, तरावा में वर्जिन कोकोनट ऑयल परियोजना शुरू

साउथ तरावा । भारत और प्रशांत द्वीपीय देश किरिबाती के बीच साझेदारी को नई दिशा देते हुए तरावा में ‘वर्जिन कोकोनट ऑयल’ (वीसीओ) प्रोजेक्ट शुरू किया गया। परियोजना का उद्देश्य किरिबाती के प्रचुर नारियल संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करते हुए स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के नए अवसर पैदा करना है। फिजी स्थित भारतीय उच्चायोग के अनुसार, इस परियोजना को इंडिया-यूएन डेवलपमेंट पार्टनरशिप फंड से 9 लाख अमेरिकी डॉलर की सहायता मिली है और इसे संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) लागू कर रहा है। भारत की सहायता से किरिबाती के नोनौती और तेराइना द्वीपों में वर्जिन कोकोनट ऑयल प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही स्थानीय लोगों को प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण की सुविधा भी दी जाएगी। भारतीय उच्चायोग ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा, “यह पहल किरिबाती के नारियल संसाधनों को अधिक मूल्य वाले उत्पादों में बदलने में मदद करेगी। इससे किसानों, महिला सहकारी समितियों और ग्रामीण समुदायों के लिए नए आर्थिक अवसर पैदा होंगे। ये पहल भारत के दक्षिण-दक्षिण सहयोग के प्रति समर्पण को दर्शाती है।” परियोजना की लॉन्चिंग समारोह में किरिबाती के राष्ट्रपति तानेती मामाउ, सरकार के वरिष्ठ नेता, यूएनडीपी के प्रतिनिधि, उद्योग जगत से जुड़े लोग और स्थानीय समुदायों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। इससे किरिबाती में सतत आर्थिक विकास को लेकर साझा प्रतिबद्धता का संकेत मिला। समारोह को संबोधित करते हुए भारत के उच्चायुक्त सुनीत मेहता और किरिबाती की पर्यटन, वाणिज्य, उद्योग एवं सहकारिता मंत्री तंगारिकी रीते ने परियोजना के महत्व और स्थानीय लोगों की आजीविका पर इसके संभावित प्रभाव को रेखांकित किया। मेहता ने कहा कि परियोजना से किरिबाती में नारियल से पैदा होने वाले आर्थिक मूल्य का बड़ा हिस्सा देश के भीतर ही बनाए रखने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा, “नारियल का स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण होने से इस संसाधन से पैदा होने वाले मूल्य का अधिक हिस्सा किरिबाती में ही रहेगा। इससे किसानों और आपूर्तिकर्ताओं, छोटे कारोबारों, महिलाओं और युवाओं तथा बाहरी द्वीपों के समुदायों के लिए अवसर पैदा होंगे।” उन्होंने कहा कि भारत का मानना है कि विकास के समाधान तब अधिक प्रभावी होते हैं जब वे ‘स्थानीय स्वामित्व, स्थानीय प्रबंधन और स्थानीय जरूरतों’ के अनुरूप तैयार किए जाएं। वहीं, रीते ने कहा कि यह परियोजना किरिबाती की अर्थव्यवस्था में विविधता लाने और नारियल क्षेत्र को मजबूत करने के प्रयासों का हिस्सा है। उन्होंने कहा, “यह परियोजना सरकार के प्रमुख नीतिगत दस्तावेजों को जमीन पर लागू करने की दिशा में कदम है, जिनमें किरिबाती 20-वर्षीय विजन और राष्ट्रीय विकास योजना 2024-2027 शामिल हैं। किरिबाती के लिए नारियल उद्योग में क्षमता निर्माण और व्यवहार्य निवेश प्राथमिकता बने हुए हैं। देश पारंपरिक कोपरा पर निर्भरता से आगे बढ़कर नारियल से अधिक मूल्य हासिल करने और नए उत्पाद विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है।” यूएनडीपी के अनुसार, यह पहल किरिबाती की दीर्घकालिक विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप है और नारियल क्षेत्र को मजबूत करने के साथ-साथ वैल्यू एडिशन और उत्पाद विविधीकरण को बढ़ावा देगी। इस परियोजना को भारत की दक्षिण-दक्षिण सहयोग नीति के तहत प्रशांत क्षेत्र में स्थानीय समुदायों की आजीविका, आर्थिक अवसरों और जलवायु एवं आर्थिक लचीलेपन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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