ईरान पूरी तरह से आर्थिक, सैन्य और सुरक्षा युद्ध में है: राष्ट्रपति पेजेश्कियन

तेहरान। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने रविवार को कहा कि देश दुश्मनों के साथ सर्वव्यापी आर्थिक, सैन्य और सुरक्षा युद्ध में है। आधिकारिक न्यूज एजेंसी आईआरएनए की तरफ से प्रसारित एक टेलीविजन भाषण में पेजेश्कियन ने कहा, “अमेरिका के दबाव के बावजूद हम इस युद्ध के सामने खड़े हैं और लोगों की सेवा के लिए प्रयास कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि सरकार महंगाई कम करने और लोगों की आर्थिक समस्याओं को हल करने के लिए पूरे दिल से प्रयास कर रही है। आईआरएनए के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने रविवार को एक बयान में कहा कि अमेरिका के पास ईरानी लोगों से सम्मानपूर्वक बात करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दावा किया गया ईरान विरोधी आर्थिक ऑपरेशन एक दोहराया जाने वाला परिदृश्य है और वही धौंस है, जो हमेशा अमेरिकी नीतियों में होती है। एक मायने में यह एक दोहराई जाने वाली फिल्म है जिसे हमने बार-बार देखा है और हम जानते हैं कि इससे कैसे निपटना है।” दरअसल, बुधवार को ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को जीवन रेखा प्रदान करने वाले किसी भी देश के खिलाफ अब तक के सबसे कठोर आर्थिक ऑपरेशन की घोषणा की थी। इस कदम को एक आर्थिक डी-डे बताते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “यह अभूतपूर्व पैमाने पर आर्थिक युद्ध और अलगाव होगा।” अमेरिका और ईरान के बीच सुलह की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। दरअसल, दोनों देशों ने 18 जून को लेबनान समेत सभी मोर्चों पर क्षेत्रीय युद्ध खत्म करने को लेकर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के तहत 60 दिन के अंदर अंतिम डील पर बातचीत पूरी होनी थी, जिसकी डेडलाइन सोमवार को खत्म हो गई, लेकिन पिछले महीने दोनों देशों के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ने से इस पूरी बातचीत पर संशय के बादल मंडरा रहे हैं और समझौते का भविष्य अधर में लटक गया है। एक वरिष्ठ ईरानी सुरक्षा अधिकारी ने शनिवार को पड़ोसी देशों और अन्य देशों को अपने देश के खिलाफ अमेरिका के आर्थिक दबाव अभियान में शामिल होने के खिलाफ चेतावनी दी और कहा कि तेहरान ऐसे देशों को दुश्मन मानेगा। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई ने सरकारी चैनल आईआरआईबी टीवी के साथ एक इंटरव्यू में कहा कि ईरान पहले संबंधित देशों के साथ बातचीत करने की कोशिश करेगा और उनसे आग्रह करेगा कि वे अपने देश के खिलाफ अमेरिका के इस आर्थिक युद्ध में भाग न लें।

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