सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग की सफाई, एसआईआर पर मुख्य चुनाव आयुक्त के फैसलों को बताया सामूहिक

नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है। आयोग ने हलफनामे में कहा कि जून 2025, अक्टूबर 2025 और मई 2026 में जारी किए गए तीनों एसआईआर आदेश सर्वसम्मति से लिए गए थे। ईसीआई ने माना कि ऑनलाइन फॉर्म को देखकर ऐसा लग सकता था कि उसमें संशोधन किया गया है। 21 अक्टूबर से ऑनलाइन आवेदन में फॉर्म 6 और घोषणा-पत्र अलग-अलग दिखाए जाएंगे, जैसा कि भौतिक फॉर्म में है। ईसीआई ने कहा है कि मैपिंग नहीं होने वाले मतदाताओं को सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना जरूरी नहीं होगा। बीएलओ उनके घर जाकर दस्तावेज जुटाएंगे। सुनवाई केवल असाधारण परिस्थितियों में होगी और जहां संभव होगा, ऑनलाइन कराई जाएगी। ईसीआईनेट पर चुनाव आयोग ने बताया है कि ईआरओ के आदेश के बिना किसी मतदाता का नाम मतदाता सूची में जोड़ा या हटाया नहीं जाता। नियमों के अनुपालन की जांच के लिए आईआईटी और आईआईएससी के विशेषज्ञों वाली समिति गठित की गई है। गोवा के 97 मतदाताओं के मामले पर आयोग ने अपने जवाब में कहा है कि छूट गए 97 मतदाताओं में से 88 पहले से मतदाता सूची में शामिल थे, छह विदेश में थे और तीन के पास पुर्तगाली पासपोर्ट थे। पश्चिम बंगाल की अपीलों पर चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने के खिलाफ अपीलें सीईओ, पश्चिम बंगाल के अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत दायर की थीं। ईसीआई ने कहा कि ये मामले आयोग के समक्ष नहीं रखे गए थे। चुनाव आयोग ने याचिका की सुनवाई-योग्यता पर सवाल उठाते हुए कहा कि सीईसी को पद से हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने जैसी है। आयोग ने मीडिया में आंतरिक दस्तावेज जारी करने से इनकार किया। ईसीआई ने कहा कि उसने किसी आंतरिक नोट या फाइल को मीडिया में जारी नहीं किया और न ही उसे जारी करने की अनुमति दी। आयोग ने ईवीएम से जुड़ी याचिकाओं पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि ईवीएम को चुनौती देने वाली याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट पहले ही कई बार खारिज कर चुका है। आयोग ने विस्तृत जवाब दाखिल करने की अनुमति मांगी और कहा कि दशहरा अवकाश के कारण आयोग ने फिलहाल संक्षिप्त जवाब दाखिल किया है और सुप्रीम कोर्ट से विस्तृत, बिंदुवार जवाब देने की अनुमति मांगी है। यह हलफनामा मुख्य निर्वाचन आयुक्त के कामकाज पर सवाल उठाने वाली याचिकाओं के जवाब में दाखिल किया गया था। निर्वाचन आयोग ने कहा कि उसके समक्ष दाखिल किए गए प्रति-हलफनामे को मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी थी। चुनाव आयोग के कामकाज और विभिन्न राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर दायर लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी समेत 13 विपक्षी नेताओं की याचिकाओं पर चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों ने एक साथ हलफनामा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया है। ईसीआई ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में सीईसी पर लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। चुनाव आयोग ने कहा है कि याचिका सिर्फ एक खबर पर आधारित है। सीईसी ज्ञानेश कुमार के एकतरफा फैसले लेने की खबर को गलत बताया गया है। हलफनामे में कहा गया है कि एसआईआर के तीनों आदेश (जून 2025, अक्टूबर 2025 और मई 2026) आयोग के सर्वसम्मत फैसले हैं। हलफनामे में कहा गया है कि फाइल सिस्टम के मुताबिक फाइल पहले एक चुनाव आयुक्त, फिर दूसरे चुनाव आयुक्त और फिर मुख्य चुनाव आयुक्त के पास जाती है। नोट या सवाल फैसले नहीं होते हैं। हलफनामे के मुताबिक, 28 जुलाई का ऑर्डर एडिशनल सेक्रेटरी ने जारी किया था। दोनों चुनाव आयुक्तों ने अगले दिन कैबिनेट सचिव को लिखा। 30 जुलाई को दोनों आयुक्तों के संयुक्त निर्देश के बाद यह आदेश लागू नहीं हुआ। हलफनामे में बताया गया है कि फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसे सिर्फ सरकार बदल सकती है। एसआईआर डिक्लेरेशन अलग है। 21 अक्टूबर से ऑनलाइन फॉर्म भी दो हिस्सों फॉर्म 6 और डिक्लेरेशन में बंटेगा।
रेलवे आरक्षण काउंटरों पर भी मिलेगी यात्रा बीमा सुविधा, 27 अक्टूबर से लागू होगी नई व्यवस्था

मुंबई। भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। 27 अक्टूबर से आरक्षित टिकट बुक कराने वाले यात्री अब रेलवे के पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (पीआरएस) काउंटरों पर भी वैकल्पिक यात्रा बीमा (ऑप्शनल ट्रैवल इंश्योरेंस) का लाभ ले सकेंगे। अब तक यह सुविधा केवल आईआरसीटीसी के माध्यम से ई-टिकट बुक कराने वाले यात्रियों के लिए उपलब्ध थी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद देशभर के रेलवे आरक्षण काउंटरों से आरक्षित टिकट खरीदने वाले यात्री भी यात्रा के दौरान बीमा सुरक्षा प्राप्त कर सकेंगे। रेलवे के अनुसार, बीमा सुविधा का लाभ लेने के लिए यात्रियों को टिकट बुकिंग के समय अपना मोबाइल नंबर देना होगा और बीमा प्रीमियम का भुगतान डिजिटल माध्यम से करना होगा। मौजूदा योजना के तहत बीमा प्रीमियम मात्र 45 पैसे प्रति यात्री निर्धारित किया गया है। यात्रा बीमा योजना के तहत यात्रियों को रेलवे दुर्घटना या अप्रिय घटना में मृत्यु होने पर: 10 लाख रुपए, स्थायी पूर्ण विकलांगता पर: 10 लाख रुपए, स्थायी आंशिक विकलांगता पर: 7.5 लाख रुपए तक, चोट लगने पर अस्पताल में इलाज के खर्च के लिए: 2 लाख रुपए तक और पार्थिव शरीर के परिवहन के लिए: 10 हजार रुपए की कवरेज प्राप्त होगी। रेलवे ने स्पष्ट किया है कि बीमा कवरेज की शर्तें और नियम वही होंगे जो वर्तमान में आईआरसीटीसी के ई-टिकट यात्रियों के लिए लागू हैं। बीमा विकल्प चुनने वाले यात्रियों को उनकी पॉलिसी से संबंधित जानकारी पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भेजी जाएगी। आरक्षण काउंटरों पर तैनात कर्मचारी यात्रियों को इस सुविधा के बारे में मार्गदर्शन देंगे तथा प्रीमियम संग्रह और आवश्यक विवरण दर्ज करने में सहायता करेंगे। मध्य रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे बेहद कम प्रीमियम पर उपलब्ध इस वैकल्पिक बीमा सुविधा का लाभ उठाएं, जिससे रेल यात्रा के दौरान अतिरिक्त वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। रेलवे का कहना है कि यात्री सुरक्षा, सुविधा और कल्याण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है और भविष्य में भी यात्री हितों को ध्यान में रखते हुए ऐसी जनहितकारी पहल जारी रहेंगी।
खड़गे की टिप्पणी पर क्लाइड क्रैस्टो का भाजपा पर पलटवार, बोले- पहले खुद माफी मांगे

मुंबई। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के राष्ट्रीय प्रवक्ता क्लाइड क्रैस्टो ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई टिप्पणी, सुल्तानपुर कोर्ट से राहुल गांधी को मिली राहत, मंत्री नितेश राणे के बयानों और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के कानून-व्यवस्था संबंधी दावों पर प्रतिक्रिया दी। क्रैस्टो ने खड़गे की टिप्पणी पर माफी की मांग को लेकर भाजपा पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि किसी के बारे में बोलने की एक सीमा होनी चाहिए, लेकिन भाजपा को भी अपने पुराने बयानों पर आत्ममंथन करना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर मल्लिकार्जुन खड़गे की टिप्पणी पर क्रैस्टो ने कहा कि किसी भी व्यक्ति के बारे में बोलते समय भाषा और व्यवहार की सीमा का ध्यान रखना जरूरी है। किसी के बारे में कुछ भी कहने का अधिकार किसी को नहीं है और राजनीतिक विरोध के बावजूद मर्यादा बनाए रखनी चाहिए। भाजपा की ओर से खड़गे से माफी की मांग पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा को पहले अपने बयानों पर भी गौर करना चाहिए। भाजपा ने कई बार नेताओं और अन्य लोगों के खिलाफ ऐसी बातें कही हैं, जो उचित नहीं थीं। क्रैस्टो ने कहा कि यदि भाजपा खड़गे से माफी की अपेक्षा कर रही है, तो उसे पहले अपने पुराने बयानों के लिए माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी और सोनिया गांधी के खिलाफ भाजपा नेताओं की ओर से की गई टिप्पणियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भाजपा को दूसरों से माफी मांगने के लिए कहने से पहले खुद अपने आचरण पर विचार करना चाहिए। सुल्तानपुर कोर्ट से राहुल गांधी को मिली राहत पर क्रैस्टो ने न्यायपालिका में विश्वास जताया। उन्होंने कहा कि उन्हें भरोसा है कि न्यायपालिका सही फैसला करेगी और लोगों को न्याय दिलाएगी। राहुल गांधी को अदालत से न्याय मिला है। भाजपा अपनी ओर से कुछ भी कह सकती है और उसके द्वारा फर्जी नैरेटिव बनाए जाते हैं, लेकिन न्याय व्यवस्था सर्वोच्च है। अदालत सही और गलत के बीच अंतर कर सकती है और देश के प्रत्येक नागरिक को न्याय पाने का अधिकार है। राहुल गांधी को भी इसी व्यवस्था के तहत न्याय मिला है और उन्हें न्यायपालिका पर भरोसा है। मंत्री नितेश राणे के हालिया बयान पर क्रैस्टो ने कहा कि उनकी बातों को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि राणे सुर्खियों में बने रहने और प्रचार पाने के लिए इस तरह के बयान देते रहते हैं। उनके बयानों को सावधानी के साथ देखना चाहिए। उन्होंने नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के हर नागरिक को जीने और अपना व्यवसाय करने का अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि मानवीय आधार पर इन अधिकारों का सम्मान करना महत्वपूर्ण है। वह प्रचार और राजनीतिक लाभ लेने के लिए किसी विशेष समुदाय या समाज के वर्ग को निशाना बनाने की कोशिश करते हैं। महाराष्ट्र और देश के लोग अब ऐसे बयानों को समझने लगे हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के महाराष्ट्र और मुंबई को सुरक्षित बताने वाले दावों पर भी क्रैस्टो ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि फर्जी नैरेटिव मुख्यमंत्री की ओर से फैलाया जाता है, जब वे राज्य और मुंबई की सुरक्षा को लेकर ऐसे दावे करते हैं। क्रैस्टो ने सार्वजनिक स्थानों पर हथियारबंद लोगों के घूमने, टाइगर श्रॉफ पर हमले और कल्याण में डांडिया कार्यक्रम के दौरान तलवार लेकर घूमने वाले युवकों की घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने पुणे में कोयता गैंग के सक्रिय होने का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल किया कि यदि महाराष्ट्र और मुंबई सुरक्षित हैं, तो इस तरह की घटनाएं कैसे सामने आ रही हैं?
महाराष्ट्र में दो मिनट में होगी दवाओं की गुणवत्ता की प्राथमिक जांच, आठ विभागों में ड्रग डिटेक्शन मशीनें शुरू

मुंबई। महाराष्ट्र के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराने के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य के आठ विभागों में आधुनिक ड्रग डिटेक्शन मशीनें शुरू की गई हैं। इन मशीनों की मदद से दवाओं के नमूनों की महज दो से तीन मिनट में प्राथमिक जांच की जा सकेगी। यदि किसी दवा की गुणवत्ता को लेकर संदेह होता है तो उसके नमूने को आगे की जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजा जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने सोमवार को मुंबई स्थित आरोग्य भवन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह जानकारी दी। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त डॉ. संजय काटकर और डॉ. सुनील भोकरे भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में मशीन के काम करने की प्रक्रिया का भी प्रदर्शन किया गया। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, प्रत्येक ड्रग डिटेक्शन मशीन की कीमत करीब 1 करोड़ 20 लाख रुपए है। यह मशीन नोबेल पुरस्कार विजेता भारतीय वैज्ञानिक सर सीवी रमन के ‘रमन इफेक्ट’ पर आधारित तकनीक से काम करती है। विभाग का कहना है कि इस तकनीक के माध्यम से दवाओं के नमूनों की शुरुआती जांच तेजी से की जा सकेगी। आठ विभागों में मशीनों के संचालन के लिए अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं। प्रत्येक टीम में दो सदस्य होंगे। इस तरह कुल 16 अधिकारी और कर्मचारी इस व्यवस्था के तहत काम करेंगे। सभी संबंधित अधिकारियों को मशीन के इस्तेमाल का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। अब दवाओं की गुणवत्ता की जांच केवल शिकायत मिलने पर निर्भर नहीं रहेगी। स्वास्थ्य विभाग की टीमें हर महीने यादृच्छिक तरीके से दवाओं के नमूनों की जांच करेंगी। इसमें जिला अस्पतालों, महिला अस्पतालों और सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत आने वाली अन्य स्वास्थ्य संस्थाओं में उपलब्ध दवाओं को शामिल किया जाएगा। मेडिकल वस्तु खरीद प्राधिकरण के माध्यम से खरीदी गई दवाओं के अलावा जिला स्तर पर, स्थानीय निधि और स्थानीय खरीद से उपलब्ध कराई गई दवाओं के नमूनों की भी जांच की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य दवाओं की खरीद और आपूर्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना तथा गुणवत्ता में किसी भी तरह की गड़बड़ी पर समय रहते ध्यान देना है। निविदा प्रक्रिया के दौरान दिए गए दवाओं के नमूनों और वास्तविक आपूर्ति में अंतर होने पर भी इस जांच के माध्यम से इसका पता लगाने में मदद मिल सकती है। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि ड्रग डिटेक्शन मशीन से होने वाली जांच प्रारंभिक होगी। यदि किसी नमूने में संदिग्ध परिणाम सामने आते हैं तो उसे आगे की पुष्टि के लिए बाहरी प्रयोगशाला में भेजा जाएगा। राज्य में इस तरह की जांच के लिए 12 सरकारी मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाएं उपलब्ध हैं। विभाग को उम्मीद है कि प्रयोगशाला की रिपोर्ट लगभग आठ दिनों में मिल जाएगी। यदि जांच में दवा की गुणवत्ता में कमी, नकली दवा या नियमों के उल्लंघन जैसी बात सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी देकर नियमानुसार कार्रवाई के लिए आगे बढ़ाया जाएगा। दवाओं के मामले में नियामक कार्रवाई खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के अधिकार क्षेत्र में आती है। सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग संदिग्ध नमूनों की जानकारी संबंधित विभाग तक पहुंचाएगा और कार्रवाई के लिए समन्वय करेगा। फिलहाल, यह व्यवस्था सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के अस्पतालों के लिए खरीदी गई दवाओं तक सीमित रहेगी। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए 4 नवंबर को मुंबई के यशवंतराव चव्हाण प्रतिष्ठान में 1,440 डॉक्टरों को एक साथ नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे। इसके अलावा अगले चरण में 1,900 कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर की नियुक्ति की योजना है। संबंधित परीक्षा प्रक्रिया 25 अक्टूबर को पूरी होने के बाद अगले आठ से 15 दिनों में नियुक्ति पत्र देने की कार्रवाई की जाएगी। इन नियुक्तियों से ग्रामीण, आदिवासी और दुर्गम क्षेत्रों के साथ-साथ कोंकण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है। स्वास्थ्य विभाग ने 15 हजार कर्मचारियों को स्थायी व्यवस्था में शामिल करने का निर्णय भी लिया है। उन्हें अधिसंख्य पदों पर समायोजित किया जाएगा। स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और नागरिकों की जरूरतों के अनुरूप बनाने के लिए राज्य में स्वास्थ्य संवाद यात्रा शुरू की गई है। इसके माध्यम से गांवों और बस्तियों में लोगों से बातचीत कर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का फीडबैक लिया जाएगा। जहां कमियां सामने आएंगी, वहां सुधार के लिए कदम उठाए जाएंगे। विभाग ने करीब 1.12 लाख स्वास्थ्य केंद्र विकसित करने की योजना का भी उल्लेख किया। इन केंद्रों पर दवाएं, इंजेक्शन और डे-केयर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि लोगों को स्थानीय स्तर पर ही आवश्यक उपचार मिल सके। इसके अलावा, 15 अगस्त को 125 स्वास्थ्य संस्थाओं का लोकार्पण किया गया था। स्वास्थ्य संवाद अभियान के तहत आगे 125 और संस्थाओं का लोकार्पण करने की योजना है। इनमें जिला अस्पताल, उपजिला अस्पताल, महिला अस्पताल, ग्रामीण अस्पताल, जांच सुविधाएं और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शामिल होंगे। स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा के लिए तालुका और विधानसभा क्षेत्र स्तर पर स्वास्थ्यवर्धिनी समितियां बनाई गई हैं। इनमें विधायक, जिला परिषद और पंचायत समिति के सदस्य तथा सरपंच शामिल होंगे। संबंधित विधायकों को हर तीन महीने में स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। मंत्रालय स्तर पर हर छह महीने में इनकी समीक्षा की जाएगी। ग्राम स्तर की जनआरोग्य समितियों और स्वास्थ्य संस्थाओं से जुड़ी अन्य समितियों को ऑनलाइन करने का भी निर्णय लिया गया है। इससे सदस्य और नागरिक स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे। विभाग ने इस वर्ष 10 लाख जनआरोग्य समिति सदस्यों को जोड़ने का लक्ष्य रखा है, जिनमें अब तक करीब साढ़े छह से सात लाख सदस्य जोड़े जाने की जानकारी दी गई है। स्वास्थ्य मंत्री के मुताबिक, महात्मा फुले जनआरोग्य योजना के तहत महंगी पीईटी स्कैन सुविधा को शामिल करने की योजना बनाई जा रही है। इस सुविधा के लिए मरीजों से अस्पतालों द्वारा कोई राशि नहीं ली जानी चाहिए, यह विभाग की स्पष्ट भूमिका है। योजना के क्रियान्वयन में अनियमितता करने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई है। सरकार का उद्देश्य दवाओं की गुणवत्ता, स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार, डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों की उपलब्धता तथा तकनीक आधारित निगरानी के जरिए सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करना है। विभाग का कहना है कि इन प्रयासों से मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने
सीआईएमएल बैठक में एआई, डिजिटलीकरण और मापन मानकों पर चर्चा, नई दिल्ली में जुटे वैश्विक विशेषज्ञ

नई दिल्ली। भारत पहली बार विधिक माप विज्ञान की अंतरराष्ट्रीय समिति (सीआईएमएल) की 61वीं बैठक की मेजबानी कर रहा है। यह बैठक 26 से 28 अक्टूबर तक नई दिल्ली में आयोजित हो रही है। इसमें मापन मानकों, उपभोक्ता संरक्षण और निष्पक्ष व्यापार में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए दुनियाभर से प्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ एक मंच पर जुटे हैं। कार्यक्रम का शुभारंभ आज ‘विधिक माप विज्ञान में विकास’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के साथ हुआ, जिसके बाद सीआईएमएल की 61वीं बैठक का पहला सत्र आयोजित किया गया। सीआईएमएल के अध्यक्ष डॉ. बॉब जोसेफ मैथ्यू ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों का स्वागत किया और निष्पक्ष व्यापार सुनिश्चित करने, उपभोक्ताओं की रक्षा करने तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने में विधिक माप विज्ञान के रणनीतिक महत्व पर जोर दिया। स्वीडन की सीआईएमएल की प्रथम उपाध्यक्ष रेनी हैन्सन ने डिजिटलीकरण, उभरती प्रौद्योगिकियों और बदलती बाजार आवश्यकताओं से निपटने में विधिक माप विज्ञान की विकसित होती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने सामंजस्यपूर्ण मापन मानकों और सदस्य देशों के बीच घनिष्ठ सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। विधिक माप विज्ञान के अंतरराष्ट्रीय ब्यूरो के निदेशक एंथनी डोनेलन ने अंतरराष्ट्रीय विधिक मापिकी संगठन (ओआईएमएल) प्रमाणन प्रणाली के माध्यम से परीक्षण परिणामों की पारस्परिक स्वीकृति को सुगम बनाने और क्षमता निर्माण को मजबूत करने के प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने मशीन-पठनीय मानकों, एआई और डिजिटल परिवर्तन से संबंधित उभरती पहलों के बारे में भी बताया। सम्मेलन को संबोधित करते हुए उपभोक्ता मामले विभाग की सचिव निधि खरे ने कहा कि भारत के लिए यह गर्व का विषय है कि वह पहली बार सीआईएमएल बैठक की मेजबानी कर रहा है। उन्होंने कहा कि सटीक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामंजस्यपूर्ण मापन, निष्पक्ष व्यापार, उपभोक्ताओं का विश्वास, औद्योगिक नवाचार और आर्थिक विकास के मूल आधार हैं। उन्होंने उपभोक्ता संरक्षण के साथ-साथ कारोबार में सुगमता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का जिक्र करते हुए वर्ष 2023 और 2026 के जन विश्वास सुधारों का उल्लेख किया। इन सुधारों के तहत निर्दिष्ट अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और आनुपातिक नियामक ढांचे को बढ़ावा देने के उपाय किए गए हैं। खरे ने बताया कि सत्यापन क्षमता बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा स्वीकृत परीक्षण केंद्रों यानी जीएटीसी का विस्तार किया गया है और विधिक माप विज्ञान के क्षेत्र में एकीकृत डिजिटल सेवाएं प्रदान करने के लिए ई-माप राष्ट्रीय पोर्टल विकसित किया गया है। उन्होंने ओआईएमएल-सीएस के अंतर्गत भारत को जारीकर्ता प्राधिकरण के रूप में मान्यता मिलने का भी उल्लेख किया, जो भारतीय निर्माताओं को वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद करेगा। उन्होंने राष्ट्रीय समय प्रसार परियोजना ‘एक राष्ट्र, एक समय’ पर भी प्रकाश डाला, जिसका उद्देश्य पूरे देश में सटीक और विश्वसनीय भारतीय मानक समय प्रदान करना है। इससे बैंकिंग, दूरसंचार, 5जी नेटवर्क, नौवहन और विद्युत प्रणालियों में समय तालमेल को मजबूती मिलेगी। सेमिनार के दौरान उपभोक्ता मामले विभाग के निदेशक आशुतोष अग्रवाल ने ‘भारत में विधिक माप विज्ञान का विकास और सुधार’ विषय पर प्रस्तुति दी। इसमें अनुपालन प्रक्रियाओं को सरल बनाने, ई-माप पोर्टल, पैकेज्ड वस्तुओं का विनियमन और रांची स्थित भारतीय विधिक माप विज्ञान संस्थान जैसी पहलों पर प्रकाश डाला गया। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग उपकरणों, डिजिटल परिवर्तन, ओआईएमएल की स्मार्ट सिफारिशें पहल और मापन प्रणालियों में एआई के उपयोग पर चर्चा की। ओआईएमएल की रणनीति कार्यशाला 27 अक्टूबर को होगी, जिसके बाद 28 अक्टूबर को प्रतिनिधि सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला का दौरा करेंगे।
असम: गुवाहाटी में गोलीबारी, 6 लोगों की मौत, कई घायल

गुवाहाटी। असम के गुवाहाटी में गोलीबारी की बड़ी वारदात सामने आई है। जीएस रोड पर बोरा सर्विस के पास स्थित एक होटल में अज्ञात हमलावरों ने अंधाधुंध गोलियां चलाईं, जिसमें 6 लोगों की मौत की आशंका जताई जा रही है, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। पुलिस के अनुसार, सोमवार देर शाम कुछ अज्ञात लोग होटल में आए और वहां मौजूद लोगों पर फायरिंग शुरू कर दी। अचानक हुई गोलीबारी से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को मामले की सूचना दी। शुरुआती खबरों के अनुसार, गोली लगने से मौके पर ही कई लोगों की मौत हो गई, जबकि घायलों को तुरंत गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल यानी जीएमसीएच ले जाया गया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इस घटना में 6 लोगों की मौत की खबर सामने आ रही है। हालांकि, पुलिस ने अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। घटना की जानकारी मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और इलाके को घेर लिया। फोरेंसिक टीम को भी बुलाया गया है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि हमलावरों की पहचान की जा सके। वारदात के बाद हमलावर भाग निकले। पुलिस ने पूरे शहर में नाकाबंदी कर दी है और वाहनों की चेकिंग की जा रही है। यह इलाका गुवाहाटी के सबसे व्यस्त इलाकों में से एक है। शाम के समय यहां काफी भीड़ रहती है। गोलीबारी की घटना के बाद दुकानें बंद हो गईं और लोग दहशत में हैं। फिलहाल, घायलों का जीएमसीएच में इलाज चल रहा है, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।