स्वास्थ्य मंत्रालय ने सत्यनिष्ठा शपथ के साथ मनाया सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2026, जेपी नड्डा ने दिलाई शपथ

नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने सोमवार को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-1 में ‘सत्यनिष्ठा शपथ’ समारोह के साथ ‘सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2026’ मनाया। इस अवसर पर मंत्रालय ने लोक प्रशासन में ईमानदारी, पारदर्शिता, जवाबदेही और नैतिक आचरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों को सत्यनिष्ठा की शपथ दिलाई। इस दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री और आयुष मंत्रालय के राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव और केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल भी उपस्थित थीं। मंत्रालय के अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपने-अपने कार्यालयों से वर्चुअल माध्यम से इस समारोह में भाग लिया। सतर्कता जागरूकता सप्ताह हर साल उस सप्ताह के दौरान मनाया जाता है, जिसमें सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती 31 अक्टूबर आती है। इस वर्ष यह सप्ताह 26 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 तक ‘सत्यनिष्ठा से समृद्धि’ विषय के साथ मनाया जा रहा है। यह विषय सुशासन और संस्थानों में जन-विश्वास के लिए ईमानदारी, सत्यनिष्ठा और पारदर्शिता के महत्व को रेखांकित करता है। इस विषय के अनुरूप स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग का सतर्कता प्रभाग सतर्कता जागरूकता अभियान 2026 के तहत कई गतिविधियां चला रहा है। इसका उद्देश्य मंत्रालय और उसके अधीनस्थ कार्यालयों, संस्थानों और संगठनों के अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच सतर्कता के प्रति जागरूकता बढ़ाना और नैतिक आचरण को बढ़ावा देना है। इन पहलों का लक्ष्य संस्थागत जवाबदेही को मजबूत करना और एक ऐसा कार्य-वातावरण तैयार करना है, जो पारदर्शिता, जिम्मेदारी और स्थापित नियमों के पालन पर आधारित हो। सत्यनिष्ठा प्रतिज्ञा ने अधिकारियों और कर्मचारियों की इस प्रतिबद्धता को दोहराया कि वे कानून के शासन का पालन करेंगे, और अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते समय ईमानदारी और पारदर्शिता के उच्चतम मानकों को बनाए रखेंगे। इस प्रतिज्ञा में जनहित में काम करने, अपने व्यक्तिगत आचरण के माध्यम से सत्यनिष्ठा प्रदर्शित करने और भ्रष्टाचार के किसी भी मामले की सूचना संबंधित अधिकारियों को देने के महत्व पर भी जोर दिया गया। प्रतिज्ञा में भ्रष्टाचार से निपटने के लिए सरकार, नागरिकों और निजी क्षेत्र की सामूहिक जिम्मेदारी को रेखांकित किया गया। इसमें सार्वजनिक जीवन के सभी क्षेत्रों में निरंतर सतर्कता बरतने और ईमानदारी और सत्यनिष्ठा के उच्चतम मानकों का पालन करने का आह्वान किया गया। इस आयोजन ने आधिकारिक जिम्मेदारियों को निभाते समय नैतिक आचरण और जवाबदेही के उच्च मानकों को बनाए रखने के लिए मंत्रालय की प्रतिबद्धता को फिर से स्पष्ट किया। मंत्रालय ने कहा कि यह प्रतिबद्धता पारदर्शी, जिम्मेदार और प्रभावी लोक प्रशासन के सिद्धांतों के अनुरूप है।

करवा चौथ का निर्जला व्रत किसे नहीं रखना चाहिए? कहीं आप भी तो इस लिस्ट में नहीं शामिल

नई दिल्ली। करवा चौथ का त्योहार सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास होता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए व्रत रखती हैं। इस साल करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखती हैं। हालांकि, आस्था और परंपरा के इस पर्व पर अपनी सेहत का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। कुछ महिलाओं के लिए निर्जला व्रत रखना नुकसानदायक हो सकता है। गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर को पर्याप्त पोषण और पानी की जरूरत होती है। ऐसे में लंबे समय तक भूखे-प्यासे रहने से डिहाइड्रेशन, चक्कर आना और कमजोरी जैसी परेशानियां हो सकती हैं। इसका असर मां की सेहत पर पड़ सकता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को निर्जला व्रत रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। जो महिलाएं अपने नवजात या छोटे बच्चे को स्तनपान कराती हैं, उन्हें भी निर्जला व्रत रखने से बचना चाहिए। इस दौरान शरीर को पर्याप्त तरल पदार्थ और पोषण की जरूरत होती है। लंबे समय तक पानी न पीने से मां को थकान, सिरदर्द और डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है। अगर आप स्तनपान करा रही हैं, तो अपनी सेहत और बच्चे की जरूरतों को प्राथमिकता दें। डायबिटीज यानी मधुमेह से पीड़ित महिलाओं के लिए लंबे समय तक भूखे रहना जोखिम भरा हो सकता है। खासकर वे महिलाएं जो इंसुलिन या ब्लड शुगर कम करने वाली दवाएं लेती हैं, उन्हें लो ब्लड शुगर की समस्या हो सकती है। वहीं, कुछ परिस्थितियों में ब्लड शुगर बढ़ भी सकता है। इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना निर्जला व्रत नहीं रखना चाहिए। अगर आपको दिल या किडनी से जुड़ी कोई बीमारी है, तो व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें। ऐसी बीमारियों में खान-पान और तरल पदार्थों को लेकर खास सावधानी बरतनी पड़ सकती है। बिना पानी पिए लंबे समय तक रहने से शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ सकता है। इससे परेशानी बढ़ने का खतरा रहता है। जिन महिलाओं को अक्सर चक्कर आते हैं, ब्लड प्रेशर कम रहता है या एनीमिया यानी खून की कमी है, उन्हें भी निर्जला व्रत रखने से बचना चाहिए। लंबे समय तक पानी और भोजन न मिलने से कमजोरी बढ़ सकती है। कुछ मामलों में बेहोशी की नौबत भी आ सकती है। मासिक धर्म के दौरान व्रत रखना है या नहीं, यह महिला की शारीरिक स्थिति और धार्मिक परंपराओं पर निर्भर करता है। अगर इस दौरान ज्यादा रक्तस्राव, तेज दर्द, चक्कर या बहुत कमजोरी महसूस होती है, तो निर्जला व्रत रखने से बचना चाहिए। ऐसे समय में शरीर को पर्याप्त पानी और पोषण देना जरूरी है। वहीं, कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही महिलाओं या हाल ही में सर्जरी कराने वाली महिलाओं को भी बिना डॉक्टर की सलाह के निर्जला व्रत नहीं रखना चाहिए।

बांग्लादेश में खसरे के प्रकोप से छह बच्‍चों की मौत, कुल आंकड़ा 1,233 पहुंचा

ढाका। बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। सोमवार को छह और बच्चों की मौत हो गई। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में यह जानकारी के अनुसार इस बीमारी से इस साल मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,233 हो गई है। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के अनुसार, ये मौतें सोमवार सुबह तक के पिछले 24 घंटों के दौरान दर्ज की गईं। बांग्लादेशी समाचार एजेंसी यूएनबी (यूएनबी) की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल में दर्ज हुई सभी छह मौतों को खसरे के संदिग्ध मामलों के रूप में चिह्नित किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, खसरे से पुष्ट मौतों की संख्या 104 पर स्थिर है, जबकि संदिग्ध मौतों की संख्या बढ़कर 1,129 हो गई है। इसी दौरान डीजीएचएस ने पिछले 24 घंटों में 1,388 नए संदिग्ध खसरा मामलों की जानकारी दी। इसके साथ ही कुल संदिग्ध मामलों की संख्या बढ़कर 2,22,552 हो गई है। वहीं, 78 नए पुष्ट मामले सामने आए, जिससे कुल पुष्ट मामलों की संख्या 23,478 तक पहुंच गई। इस महीने की शुरुआत में ‘द संडे गार्डियन’ से बातचीत में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा था कि खसरे की यह ‘महामारी’ सरकारी लापरवाही और दशकों पुराने टीकाकरण तंत्र के कमजोर पड़ने का नतीजा है। हसीना ने आरोप लगाया कि मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान लिए गए राजनीतिक और प्रशासनिक फैसलों के कारण वैक्सीन खरीद की प्रक्रिया प्रभावित हुई, जिससे टीकाकरण में बड़ा अंतर पैदा हो गया। उन्होंने दावा किया कि मार्च 2026 में बांग्लादेश में मीजल्स-रुबेला वैक्सीन का स्टॉक खत्म हो गया था। इसके बाद टीकाकरण कवरेज में तेज गिरावट आई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तय समय पर अतिरिक्त टीकाकरण अभियान शुरू नहीं किया गया। हसीना ने मौजूदा प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बीएनपी सरकार की भी आलोचना की। उनका कहना है कि जब प्रकोप की गंभीरता साफ दिखाई देने लगी, तब भी पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए। उन्होंने कहा, “एक ऐसी बीमारी से एक हजार से अधिक बच्चों की मौत, जिसे रोका जा सकता था। सिर्फ एक सामान्य प्रशासनिक विफलता नहीं है।” पूर्व प्रधानमंत्री ने लगातार वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित करने, संवेदनशील समुदायों के लिए विशेष टीकाकरण अभियान चलाने, बीमारी की रियल-टाइम निगरानी करने, बच्चों के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाने और वैक्सीन खरीद व टीकाकरण में गड़बड़ियों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की। बांग्लादेश के प्रमुख समाचार पत्र ‘द डेली स्टार’ के अनुसार, बांग्लादेश ने अप्रैल में यूनिसेफ के माध्यम से फिर से वैक्सीन खरीद शुरू कर दी और आपातकालीन टीकाकरण अभियान भी चलाया, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि संक्रमण की तेज रफ्तार को देखते हुए स्थिति जल्दी नियंत्रण में नहीं आएगी। इस महीने की शुरुआत में डीजीएचएस के पूर्व रोग नियंत्रण निदेशक डॉ. बेनजीर अहमद ने कहा था कि संक्रमण बहुत तेजी से फैल रहा है, इसलिए महामारी को काबू में आने में समय लग सकता है। पिछले महीने सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बीमारी के दोबारा फैलने के पीछे पहले के टीकाकरण में हुई कमी और अस्पतालों की कुछ खामियों को जिम्मेदार बताया था। इनमें संक्रमित बच्चों की पहचान में देरी और उन्हें समय पर अलग न रखना शामिल है। ‘द डेली स्टार’ से बातचीत में सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ मुश्तुक हुसैन ने कहा कि वैक्सीन लगने के बाद बच्चों में पर्याप्त प्रतिरक्षा विकसित होने में आमतौर पर तीन से चार सप्ताह का समय लगता है। उन्होंने कहा संक्रमण, अस्पताल में भर्ती होने और मौतों की मौजूदा लहर कम से कम एक महीने और जारी रह सकती है।

अब समय आ गया है कि साउथ अफ्रीका आईसीसी के बड़े मंच पर फिर से शानदार प्रदर्शन करे : क्लूजनर

नई दिल्ली। साउथ के पूर्व ऑलराउंडर लांस क्लूजनर का मानना ​​है कि मेंस वनडे वर्ल्ड कप 2027 में साउथ अफ्रीका की किस्मत इस बात पर निर्भर करेगी कि वे पूरे टूर्नामेंट के दौरान लगातार रन बना पाते हैं या नहीं। सह-मेजबान होने के नाते साउथ अफ्रीका अपने घरेलू मैदानों पर खेलने के फायदे को एक मजबूत चुनौती में बदलना चाहेगा। साउथ अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया के साथ मिलकर इस टूर्नामेंट की मेजबानी करेगा। इससे इस क्षेत्र को क्रिकेट के सबसे बड़े आयोजनों में से एक की मेजबानी करने का मौका मिलेगा और साथ ही साउथ अफ्रीकी टीम को एक और बड़ी वैश्विक ट्रॉफी जीतने का अवसर भी मिलेगा। वर्तमान में अबू धाबी टी10 लीग में ‘अरेबियन एसेस’ के हेड कोच क्लूजनर ने टूर्नामेंट के दौरान ‘आईएएनएस’ से कहा कि घरेलू दर्शकों का समर्थन एक बड़ा बूस्ट दे सकता है, लेकिन वर्ल्ड कप जीतने के बुनियादी सिद्धांत वही रहते हैं। टीमों को पूरे टूर्नामेंट के दौरान लगातार अच्छा स्कोर बनाने और मुश्किल लक्ष्यों का पीछा करने में सक्षम होना चाहिए, न कि केवल किसी एक खिलाड़ी के शानदार प्रदर्शन पर निर्भर रहना चाहिए। पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी ने कहा कि हालांकि घरेलू दर्शकों का समर्थन एक बड़ा बूस्ट दे सकता है, लेकिन विश्व कप जीतने के बुनियादी सिद्धांत वही रहते हैं। टीमों को पूरे टूर्नामेंट के दौरान लगातार अच्छा स्कोर बनाने और मुश्किल लक्ष्यों का पीछा करने में सक्षम होना चाहिए। उन्होंने कहा, “जाहिर है पूरे टूर्नामेंट के दौरान लगातार पर्याप्त रन बनाना एक बड़ी चुनौती होगी – न केवल साउथ अफ्रीका के लिए, बल्कि किसी भी ऐसी टीम के लिए, जो खिताब जीतने की उम्मीद कर रही है। इसलिए जो टीम लगातार बोर्ड पर रन लगा सकेगी या बड़े लक्ष्यों का पीछा कर सकेगी, उसी के पास आगे बढ़ने का मौका होगा। एक टीम के रूप में साउथ अफ्रीकी टीम को इसी बात पर ध्यान देने की जरूरत है। दबाव तो होता ही है। आईसीसी के किसी भी बड़े टूर्नामेंट में दबाव होता है, चाहे आप अपने घरेलू मैदान पर खेल रहे हों या कहीं और। यह तो होना ही है। बात बस इतनी है कि हम ऐसे स्टेडियमों में खेलें जो हमारे अपने समर्थकों से भरे हों; घरेलू विश्व कप में यही तो होता है।” क्लूजनर ने माना कि साउथ अफ्रीका पर घरेलू दर्शकों की उम्मीदों का दबाव होगा, लेकिन उन्होंने कहा कि टीम को इस समर्थन को बोझ नहीं, बल्कि एक मौके के रूप में देखना चाहिए। चूंकि इस टूर्नामेंट के जरिए तीनों मेजबान देशों के स्टेडियमों में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेला जाएगा, इसलिए उन्हें लगता है कि यह मौका साउथ अफ्रीकी टीम के लिए एक बड़ी कामयाबी हासिल करने का बेहतरीन मंच बन सकता है। उन्होंने कहा, “हम इस टूर्नामेंट की फिर से मेजबानी करने को लेकर उत्साहित हैं और हां, अब समय आ गया है कि साउथ अफ्रीका एक बार फिर बड़े मंच पर– यानी आईसीसी के उस बड़े मंच पर – शानदार प्रदर्शन करे। हमें उम्मीद है कि हम अपने खिलाड़ियों और पूरे देश के सपनों को उनके अपने घर में पूरा कर पाएंगे। हमने रग्बी में ऐसा करके दिखाया है और अगर हमें क्रिकेट के नजरिए से भी अपने घर में ऐसा करने का मौका मिलता है तो यह सोने पे सुहागा होगा।

माइक्रोसॉफ्ट का स्वैच्छिक निकास कार्यक्रम शुरू, भारत समेत चार देशों के 60 हजार कर्मचारी हो सकते हैं प्रभावित

वॉशिंगटन। टेक दिग्गज कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने भारत, अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन में कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक निकास कार्यक्रम शुरू किया है। यह कार्यक्रम करीब 60,000 कर्मचारियों तक पहुंच सकता है, क्योंकि कंपनी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर बढ़ते खर्च और अपने वेतन ढांचे के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। माइक्रोसॉफ्ट ने सोमवार को कर्मचारियों को भेजे गए संदेश और अपने आधिकारिक ब्लॉग में यह जानकारी दी। कंपनी की एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट और चीफ पीपल ऑफिसर एमी कोलमैन ने कहा कि यह सीमित अवधि का स्वैच्छिक कार्यक्रम है, जिसके तहत पात्र कर्मचारियों को वित्तीय सहायता और करियर योजना से जुड़े संसाधनों के साथ कंपनी छोड़ने का विकल्प दिया जाएगा। यह कार्यक्रम कनाडा, भारत, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका में लेवल-70 या उससे नीचे के पात्र कर्मचारियों के लिए उपलब्ध होगा, हालांकि कंपनी ने पात्र कर्मचारियों की कुल संख्या का आधिकारिक खुलासा नहीं किया है। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 60,000 कर्मचारी इस योजना के दायरे में आ सकते हैं, जो कंपनी के लगभग 2.23 लाख कर्मचारियों का करीब 27 प्रतिशत है। हालांकि भारत में कितने कर्मचारी इसके लिए पात्र होंगे, इसकी जानकारी नहीं दी गई है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि सभी टीमें इस कार्यक्रम का हिस्सा नहीं हैं। विभिन्न इकाइयों में भागीदारी उनके व्यावसायिक लक्ष्यों, ग्राहक प्रतिबद्धताओं और कार्यबल की जरूरतों के आधार पर तय की गई है। रिपोर्टों के अनुसार, कोपायलट, कोरएआई, विंडोज एंड डिवाइसेज, एक्सबॉक्स, फाइनेंस और मानव संसाधन जैसी टीमें इस कार्यक्रम में शामिल हैं, जबकि मार्केटिंग, कमर्शियल बिजनेस, क्वांटम और सिक्योरिटी टीमें इससे बाहर हैं। कर्मचारियों को दिसंबर में इस प्रस्ताव पर फैसला लेना होगा और जो कर्मचारी इसे स्वीकार करेंगे, वे 31 दिसंबर को कंपनी छोड़ेंगे। यह कार्यक्रम ऐसे समय में शुरू किया गया है जब माइक्रोसॉफ्ट एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटरों पर बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है। इससे पहले जुलाई में कंपनी ने एक्सबॉक्स और कमर्शियल सेल्स टीमों में लगभग 4,800 कर्मचारियों की छंटनी की योजना की भी घोषणा की थी।

ऑस्ट्रिया की विदेश मंत्री बीटे मीनिल-रीसिंगर का भारत दौरा 27 अक्टूबर से, जयशंकर से करेंगी मुलाकात

नई दिल्ली। ऑस्ट्रिया की यूरोपीय और अंतर्राष्ट्रीय मामलों की संघीय मंत्री बीटे मीनिल-रीसिंगर भारत आएंगे। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने सोमवार को बताया क‍ि उनकी भारत की यह आध‍िकार‍िक यात्रा 27 अक्टूबर से 2 नवंबर तक रहेगी। अपनी यात्रा के दौरान, रीसिंगर बुधवार को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में विदेश मंत्री (ईएएम) एस. जयशंकर के साथ बातचीत करेंगी। नई दिल्ली में अपने कार्यक्रम पूरे करने के बाद वह 29 अक्टूबर से 2 नवंबर तक जयपुर में विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगी। इससे पहले सोमवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ऑस्ट्रिया के राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर बीटे मीनिल-रीसिंगर, ऑस्ट्रिया की सरकार और वहां के लोगों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने दोनों देशों के बीच मौजूदा ‘एनहैंस्ड पार्टनरशिप’ को और आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी जताई। जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पर पोस्ट कर लिखा, “विदेश मंत्री बीटे मीनिल-रीसिंगर, ऑस्ट्रिया की सरकार और वहां के लोगों को राष्ट्रीय दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। हम भारत-ऑस्ट्रिया की मजबूत साझेदारी को और सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।” इससे पहले 6 अक्टूबर को विदेश मंत्रालय में पश्चिम मामलों के सचिव सिबी जॉर्ज ने ऑस्ट्रिया के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पीटर वोर्होफर से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं ने सुरक्षा और रणनीतिक मामलों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की, जिसमें आतंकवाद-रोधी सहयोग भी शामिल था। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया और आपसी हितों के क्षेत्रों में सहयोग मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। इस साल 11 जून को ऑस्ट्रिया के चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी थी। स्टॉकर ने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनकर उभरा है और ऑस्ट्रिया तथा यूरोपीय संघ का एक मजबूत साझेदार भी बना है। इसके जवाब में प्रधानमंत्री मोदी ने चांसलर स्टॉकर को उनकी शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद दिया था। उन्होंने स्टॉकर की हालिया भारत यात्रा को याद करते हुए कहा था कि वह भारत और ऑस्ट्रिया के संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए उनके साथ मिलकर काम करने के इच्छुक हैं।

व‍िदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूसी स्टेट ड्यूमा के अध्यक्ष वोलोदिन से की मुलाकात, द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर हुई चर्चा

नई दिल्ली। व‍िदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को रूस के स्टेट ड्यूमा के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोदिन से मुलाकात की। इस बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा हुई। व‍िदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पोस्‍ट में ल‍िखा, ”नई दिल्ली में रूस के स्टेट ड्यूमा के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोदिन और उनके प्रतिनिधिमंडल से मिलकर खुशी हुई। हमने अपने द्विपक्षीय सहयोग के साथ-साथ संसदीय संबंधों को और गहरा करने के अवसरों पर चर्चा की।” एक द‍िन पहले रव‍िवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी व्याचेस्लाव वोलोदिन से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने दोनों देशों की संसदों के बीच निरंतर संस्थागत जुड़ाव, संसदीय प्रतिनिधिमंडलों के नियमित आदान-प्रदान, और युवा तथा महिला सांसदों के बीच आपसी संवाद को बढ़ावा देकर संसदीय सहयोग का विस्तार करने पर चर्चा की। बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने भारत-रूस विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। सोमवार को नई दिल्ली में शुरू हुए 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के पूर्ण सत्र में अपने संबोधन में वोलोदिन ने कहा, “हम अलग-अलग राजनीतिक प्रणालियों, आर्थिक मॉडलों और परंपराओं वाले देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन हम एक बहुध्रुवीय दुनिया बनाने के लिए एकजुट हैं। हम अलग-अलग दृष्टिकोणों और राष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करते हैं और प्रत्येक देश के विकास के अपने संप्रभु रास्ते को चुनने के अधिकार को मान्यता देते हैं।” ब्रिक्स नेताओं ने जन केंद्रित विकास सुनिश्चित करने में संसदों की भूमिका को मजबूत करने पर अपने विचार रखे। उन्होंने भविष्य के विकास के लिए सरकारी संस्थानों की स्थिरता बनाए रखने में संसदों की भूमिका के बारे में भी बात की। नई दिल्ली में दो दिवसीय मंच में भाग लेने आए वोलोदिन ने इस बात पर जोर दिया कि अपने अस्तित्व के 20 वर्षों में ब्रिक्स उभरती हुई बहुध्रुवीय दुनिया और एक न्यायपूर्ण विश्व व्यवस्था के मुख्य स्तंभों में से एक बन गया है। स्टेट ड्यूमा अध्यक्ष के अनुसार, यह संगठन सबसे बड़े आर्थिक केंद्रों में से एक बन गया है, जो दुनिया के अधिकांश देशों के हितों का प्रतिनिधित्व करता है। इसके भीतर आपसी व्यापार 1.2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है और सदस्य देश वैश्विक निर्यात का लगभग एक चौथाई हिस्सा है।

अमेरिकी संसद में जुलाई को ‘इंडियन अमेरिकन हेरिटेज मंथ’ घोषित करने का प्रस्ताव, आधे से ज्यादा सांसदों का समर्थन

वाशिंगटन। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के सोमवार को भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने पेश एक प्रस्‍ताव पेश कि‍या। इस प्रस्‍ताव में जुलाई महीने को ‘इंडियन अमेरिकन हेरिटेज मंथ’ (भारतीय-अमेरिकी विरासत माह) घोषित करने की मांग की गई है। उनके इस प्रस्‍ताव का सभा के आधे से अधिक सांसदों ने एक द्विदलीय प्रस्ताव का समर्थन किया। इस प्रस्ताव का उद्देश्य भारतीय-अमेरिकी समुदाय के योगदान को सम्मान देना है। इस प्रस्ताव को 435 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में अब तक 256 सांसदों का समर्थन मिल चुका है। प्रस्ताव में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के योगदान को सराहा गया है और जुलाई को आधिकारिक तौर पर ‘इंडियन अमेरिकन हेरिटेज मंथ’ के रूप में मान्यता देने का समर्थन किया गया है। राजा कृष्णमूर्ति ने कहा, “भारतीय-अमेरिकियों ने कई पीढ़ियों से अमेरिका को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने ऐसे वैज्ञानिक और तकनीकी नवाचार किए हैं जिनसे लोगों की जान बची है, रोजगार पैदा हुए हैं और देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है। साथ ही उन्होंने सेना और सार्वजनिक जीवन में भी महत्वपूर्ण सेवा दी है।” उन्होंने कहा, “मुझे गर्व है कि मेरे साथ 256 सांसद इस प्रस्ताव का समर्थन कर रहे हैं। यह भारतीय-अमेरिकियों की विरासत को सम्मान देने और अमेरिका को समृद्ध बनाने में उनके योगदान का जश्न मनाने का एक अवसर है।” जुलाई महीने को चुनने के पीछे एक ऐतिहासिक कारण भी है। 2 जुलाई 1946 को तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी एस. ट्रूमैन ने ‘ल्यूस-सेलर एक्ट’ पर हस्ताक्षर किए थे। इस कानून ने पहली बार भारतीय मूल के लोगों को अमेरिकी नागरिक बनने का अधिकार दिया था। इससे पहले कई दशकों तक भारतीय प्रवासियों को अमेरिकी नागरिकता प्राप्त करने की अनुमति नहीं थी। प्रस्ताव में अमेरिकी जनगणना ब्यूरो के 2023 के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया है कि अमेरिका में 52 लाख से अधिक लोग खुद को भारतीय-अमेरिकी बताते हैं। दस्तावेज में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारतीय-अमेरिकी समुदाय की जड़ें 5,000 साल से अधिक पुरानी सभ्यता से जुड़ी हैं और यह अमेरिका के सबसे धार्मिक रूप से विविध समुदायों में से एक है। प्रस्ताव में भारतीय-अमेरिकियों के योगदान को विज्ञान, चिकित्सा, जैव-चिकित्सा अनुसंधान, अंतरिक्ष अनुसंधान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कंप्यूटिंग, दूरसंचार और अन्य नवाचार क्षेत्रों में महत्वपूर्ण बताया गया है। इसके अलावा, भारतीय-अमेरिकियों की सेवा को अमेरिकी सशस्त्र बलों की सभी शाखाओं और सरकार के विभिन्न स्तरों पर भी मान्यता दी गई है। प्रस्ताव में कहा गया है कि भारतीय-अमेरिकी अमेरिका की विविधता और ताकत को और बढ़ाते हैं तथा जुलाई को ‘इंडियन अमेरिकन हेरिटेज मंथ’ घोषित करने का समर्थन किया जाना चाहिए। हालांकि, यह एक साधारण हाउस रेजोल्यूशन है, इसलिए इसके पारित होने पर न तो कोई संघीय अवकाश घोषित होगा और न ही राष्ट्रपति की मंजूरी की आवश्यकता होगी। यह प्रस्ताव 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से ठीक एक सप्ताह पहले आया है। इन चुनावों में कई भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवार भी मैदान में हैं।

मुंबई: चित्रपताका मराठी फिल्म फेस्टिवल’ का दूसरा संस्करण 15 नवंबर से, 41 फिल्मों का होगा प्रदर्शन

मुंबई। महाराष्ट्र के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री आशीष शेलार ने ‘चित्रपताका मराठी फिल्म फेस्टिवल’ के दूसरे संस्करण की घोषणा की है। यह फेस्टिवल 15 से 18 नवंबर 2026 तक मुंबई के प्रभादेवी स्थित रवींद्र नाट्य मंदिर, पीएल देशपांडे महाराष्ट्र कला अकादमी में आयोजित किया जाएगा। इस फेस्टिवल का आयोजन महाराष्ट्र सरकार के सांस्कृतिक मामलों के विभाग के मार्गदर्शन में महाराष्ट्र फिल्म, स्टेज एंड कल्चरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन द्वारा किया जा रहा है। इस साल के फेस्टिवल में 41 मराठी फिल्मों का प्रदर्शन, पैनल चर्चा, साक्षात्कार, मास्टरक्लास और अन्य गतिविधियां शामिल होंगी। सांस्कृतिक मंत्री आशीष शेलार ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि मराठी सिनेमा काफी मजबूत है और इसने दुनियाभर के दर्शकों के बीच उत्सुकता पैदा की है। बेहतरीन कंटेंट वाली मराठी फिल्मों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर का मंच तैयार करने के उद्देश्य से पिछले साल इस फेस्टिवल की शुरुआत की गई थी। पहले संस्करण को दर्शकों से शानदार प्रतिक्रिया मिली थी। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल जारी रहनी चाहिए, ताकि मराठी सिनेमा के सांस्कृतिक और कलात्मक महत्व को उजागर किया जा सके। यह फेस्टिवल फिल्म निर्माताओं, मीडिया प्रतिनिधियों, विद्वानों और सिनेमा प्रेमियों के बीच सार्थक बातचीत को बढ़ावा देगा। इस वर्ष कुल 41 मराठी फिल्मों की स्क्रीनिंग की जाएगी। इनमें पांच क्लासिक मराठी फिल्में शामिल हैं, जबकि बाकी 36 फिल्मों में नई फिल्में, विभिन्न समारोहों में सराही गई फिल्में, राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत फिल्में, प्रयोगात्मक सिनेमा और ऐसी फिल्में शामिल हैं जो अभी तक रिलीज नहीं हुई हैं। मंत्री ने घोषणा की कि राज्य में सूखे की स्थिति को देखते हुए इस महोत्सव से होने वाली कमाई को मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा किया जाएगा। महोत्सव का आयोजन बिना किसी अनावश्यक दिखावे या फिजूलखर्ची के किया जाएगा, जिसमें फिल्म निर्माण की कला को ही मुख्य केंद्र में रखा जाएगा। महोत्सव के चारों दिनों के लिए पंजीकरण शुल्क 100 रुपए प्रति व्यक्ति तय किया गया है। इस अवसर पर कॉरपोरेशन की प्रबंध निदेशक स्वाति म्हासे-पाटिल ने बताया कि पहले संस्करण में 2,000 से अधिक लोगों ने पंजीकरण कराया था और लगभग 7,500 लोग शामिल हुए थे। फिल्मों की स्क्रीनिंग के अलावा पांच पैनल चर्चाएं, पांच विशेष साक्षात्कार और पांच मास्टरक्लास भी होंगे। महोत्सव स्थल पर एक विशेष प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी, जो एक सदी से अधिक समय में मराठी सिनेमा के सफर और दादासाहेब फाल्के चित्रनगरी की स्वर्ण जयंती यात्रा को दर्शाएगी। इस साल का मुख्य आकर्षण ‘बुक टू स्क्रीन’ पहल होगी, जिसके तहत मराठी पुस्तकों के लेखकों और प्रकाशकों को फिल्म निर्माताओं से बातचीत का अवसर मिलेगा। साथ ही ‘युवाओं की नजर से महाराष्ट्र’ विषय पर लघु फिल्म प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी।

पहली ही प्रस्तुति से मुंबई में छाया ‘4पीएम तहजीब’, वैष्णवी के सुरों और काव्य प्रस्तुतियों ने मोहा श्रोताओं का मन

मुंबई। संगीत, साहित्य, सिनेमा और सार्थक संवाद को एक मंच पर लाने की पहल ‘4 पीएम तहजीब’ ने अपने पहले ही कार्यक्रम से मुंबई में प्रभावशाली दस्तक दी। 24 अक्टूबर को अंधेरी वेस्ट स्थित वेदा कुंज ऑडिटोरियम में आयोजित गायिका वैष्णवी शर्मा की प्रस्तुति सुनने बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। पूरा सभागार खचाखच भरा रहा। मुंबई के दूर-दराज इलाकों से आए दर्शकों की मौजूदगी ने इस नई सांस्कृतिक यात्रा की शुरुआत को यादगार बना दिया। कार्यक्रम शुरू होने से पहले सभागार में उत्साह और बातचीत की गूंज थी, लेकिन वैष्णवी शर्मा ने जैसे ही गायन शुरू किया, श्रोता शांत होकर उनकी आवाज में डूब गए। कविता के भावों और भारतीय शास्त्रीय संगीत के रागों को जोड़ती उनकी प्रस्तुतियों ने ऐसा वातावरण बनाया कि शब्द और सुर दोनों श्रोताओं के मन तक पहुंचे। इस संध्या की विशेषता कविता और शास्त्रीय रागों का सुंदर मेल रहा। वैष्णवी शर्मा ने ‘राम की चेतावनी’ को राग बैरागी भैरव के साथ प्रस्तुत किया। ‘विराटजयी’ की प्रस्तुति राग मधुवंती पर आधारित रही, जबकि ‘कुपित याज्ञसेनी’ में राग पूरिया धनाश्री और पंतुवराली का रंग सुनने को मिला। ‘सब अनहद है’ को राग जयजयवंती और भैरवी के साथ प्रस्तुत किया गया। इन प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को कविता के अर्थ, उसके भाव और संगीत की गहराई से एक साथ जुड़ने का अवसर दिया। कहीं कविता का ओज था, कहीं भावनाओं की तीव्रता और कहीं सुरों की शांति। वैष्णवी शर्मा ने अपनी आवाज और प्रस्तुति से इन अलग-अलग भावों को श्रोताओं तक पहुंचाया। सभागार में उमड़ी भीड़ और प्रस्तुतियों के दौरान दर्शकों की तन्मयता ने इस आयोजन को खास बना दिया। पहली ही प्रस्तुति को मिले उत्साहपूर्ण प्रतिसाद ने आयोजकों का उत्साह भी बढ़ाया। कार्यक्रम की शुरुआत में ‘4 पीएम तहजीब’ की परिकल्पना रखते हुए वरिष्ठ पत्रकार तथा फिल्म ‘सहिया’ के निर्माता-निर्देशक संजय शर्मा ने कहा कि यह निरंतर चलने वाली सांस्कृतिक यात्रा की पहली कड़ी है। उन्होंने बताया कि हर महीने एक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें दर्शकों को संगीत, साहित्य, अभिनय और संवाद की दुनिया के कलाकारों से जुड़ने का अवसर मिलेगा। संजय शर्मा ने कहा कि पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने के बाद अब 4 पीएम संगीत और सिनेमा के क्षेत्र में भी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में 4 पीएम फिल्म और मनोरंजन जगत में भी एक बड़ा नाम बनकर उभरेगा। ‘तहजीब’ के माध्यम से ऐसे आयोजन करने का उद्देश्य है, जहां कलाकार और दर्शक आमने-सामने बैठें, कला का आनंद लें और एक-दूसरे के अनुभवों को समझें। उन्होंने कहा कि ‘4 पीएम तहजीब’ के मंच पर स्थापित कलाकारों के साथ नई प्रतिभाओं को भी अवसर देने का प्रयास किया जाएगा। संगीत और साहित्य की समृद्ध परंपरा को दर्शकों तक पहुंचाना और ऐसे आयोजनों को नियमित रूप देना इस पहल की प्राथमिकता है। पहले ही कार्यक्रम में दर्शकों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने इस संकल्प को और मजबूत किया है। 4 पीएम की आगामी योजनाओं की जानकारी देते हुए संजय शर्मा ने बताया कि ‘4 पीएम म्यूजिक’ पर हर महीने नए गाने जारी किए जाएंगे और ‘4 पीएम फिल्म्स’ के अंतर्गत हर महीने शॉर्ट फिल्मों का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अच्छी कहानियों, नए विचारों और प्रतिभाशाली कलाकारों को मंच देने के लिए संस्थान लगातार काम करेगा। संगीत, फिल्म और सांस्कृतिक आयोजनों के जरिए दर्शकों के साथ एक व्यापक और आत्मीय रिश्ता बनाने की कोशिश की जा रही है। इस अवसर पर संजय शर्मा ने अपनी फिल्म ‘सहिया’ के विषय और उसकी निर्माण यात्रा के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फिल्म को सेंसर बोर्ड से मंजूरी नहीं मिलने के कारण उसका प्रदर्शन रुका हुआ है और मामला अदालत के समक्ष है। उनके अनुसार, हाईकोर्ट के आदेश के तहत सेंसर बोर्ड को 27 अक्टूबर तक फिल्म के संबंध में अपना अंतिम निर्णय देना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि फिल्म दर्शकों तक पहुंचेगी और उसे उनका भरपूर प्यार मिलेगा। कार्यक्रम में वैष्णवी शर्मा को सुनने के साथ संजय शर्मा से मिलने के लिए भी मुंबई के विभिन्न इलाकों से लोग पहुंचे। पत्रकारिता के माध्यम से उनसे जुड़े दर्शकों के लिए यह मुलाकात एक अलग अनुभव रही। संगीत, बातचीत और आत्मीयता से भरी इस शाम ने कलाकारों, आयोजकों और श्रोताओं को एक साझा सांस्कृतिक अनुभव से जोड़ा। कार्यक्रम के अंत में 4 पीएम की एमडी बबिता चतुर्वेदी ने उपस्थित सभी दर्शकों का हार्दिक धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि आप लोग इतनी दूर-दूर से इस कार्यक्रम में आए, संगीत को इतने प्रेम और ध्यान से सुना, और हमारी पहली कोशिश को इतना स्नेह दिया, इसके लिए मैं हृदय से आभारी हूं। आपकी उपस्थिति और प्यार हमारे लिए बहुत बड़ा प्रोत्साहन है। स्वयं भी एक अच्छी गायिका बबिता चतुर्वेदी ने कहा कि संगीत लोगों को जोड़ता है और ‘4 पीएम तहजीब’ के माध्यम से ऐसी आत्मीय संगीत संध्याओं और सांस्कृतिक मुलाकातों का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।