दिवाली-छठ पर सुरक्षित यात्रा के लिए रेलवे की बड़ी तैयारी, भीड़ प्रबंधन पर जीआरपी-आरपीएफ ने बनाई रणनीति

नई दिल्ली। दिवाली, छठ और अन्य प्रमुख त्योहारों के दौरान रेलवे यात्रियों की सुरक्षित और सुचारु आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए रेलवे सुरक्षा तंत्र ने व्यापक रणनीति तैयार की है। शनिवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) प्रमुखों का 8वें अखिल भारतीय सम्मेलन में त्योहारों के दौरान भीड़ प्रबंधन, रेलवे सुरक्षा और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) द्वारा आयोजित इस उच्चस्तरीय सम्मेलन का उद्देश्य रेलवे सुरक्षा से जुड़ी उभरती चुनौतियों पर विचार करना, विभिन्न राज्यों के सर्वोत्तम अनुभवों को साझा करना और आरपीएफ, जीआरपी तथा राज्य पुलिस के बीच तालमेल को और मजबूत बनाना था। सम्मेलन में उत्तरी रेलवे के दिल्ली मंडल ने दिवाली और छठ जैसे त्योहारों के दौरान भीड़ नियंत्रण के लिए अपनाए गए मॉडल को प्रस्तुत किया, जिसमें दिल्ली पुलिस, जीआरपी और दिल्ली मेट्रो के साथ समन्वित कार्ययोजना, सीसीटीवी निगरानी, सार्वजनिक घोषणाएं, बैरिकेडिंग, निर्धारित प्रतीक्षा क्षेत्र और विशेष नियंत्रण कक्षों की व्यवस्था को रेखांकित किया गया। रेल मंत्रालय ने कहा कि त्योहारों के दौरान यात्रियों की सुरक्षित और व्यवस्थित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए अग्रिम योजना, यात्री प्रवाह प्रबंधन और सुरक्षा बलों की समन्वित तैनाती पर विशेष जोर दिया गया है। इस सम्मेलन की अध्यक्षता सोनाली मिश्रा, महानिदेशक, आरपीएफ ने की। इसमें सतीश कुमार, अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, रेलवे बोर्ड, बोर्ड के अन्य सदस्य और विभिन्न राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के जीआरपी प्रमुख शामिल हुए। बैठक की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि जीआरपी कर्मियों को रेलमदद प्लेटफॉर्म से जोड़ना रही। सेंटर फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम्स (सीआरआईएस) द्वारा उठाए गए इस कदम का उद्देश्य यात्री शिकायतों के निपटारे को अधिक प्रभावी बनाना, सूचनाओं के आदान-प्रदान को तेज करना और शिकायतों की बेहतर निगरानी सुनिश्चित करना है। सम्मेलन में रेलवे सुरक्षा और यात्री सुरक्षा बढ़ाने से जुड़ी कई अन्य पहलों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। दक्षिण मध्य रेलवे ने अपने “पिंक पेट्रोल: आइज इन द स्काई, शक्ति ऑन द ग्राउंड” मॉडल को प्रस्तुत किया, जिसमें ड्रोन-आधारित निगरानी और महिला सुरक्षा कर्मियों की त्वरित प्रतिक्रिया टीमों को एकीकृत किया गया है। बैठक में ट्रेनों पर पथराव की घटनाओं को भी गंभीर चुनौती के रूप में चिन्हित किया गया। अधिकारियों ने ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष गश्त, बेहतर निगरानी, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, युवाओं के बीच जागरूकता अभियान और आरपीएफ-जीआरपी समन्वय को मजबूत करने पर जोर दिया। रेलवे का मानना है कि सामुदायिक जागरूकता और निवारक उपाय ऐसी घटनाओं को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। वहीं मध्य रेलवे के पुणे मंडल ने प्रोजेक्ट दिशा (सुरक्षा, सद्भाव और जागरूकता के लिए समर्पित पहल) की जानकारी साझा की, जिसके तहत रेलवे ट्रैक के आसपास रहने वाले बच्चों को शिक्षा, मनोरंजन, सुरक्षा जागरूकता और सामुदायिक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। इस परियोजना में गैर-सरकारी संगठनों, राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के स्वयंसेवकों और स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है, जिसका उद्देश्य रेलवे सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना और पथराव, चोरी, अवैध रूप से ट्रैक पार करने जैसी खतरनाक गतिविधियों को हतोत्साहित करना है। रेलवे मंत्रालय का कहना है कि त्योहारी मौसम में यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए ऐसी समन्वित और तकनीक-आधारित सुरक्षा व्यवस्था रेल यात्राओं को अधिक सुरक्षित और सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

यूपी स्पेशल टीईटी तीन नवंबर को, छह शहरों में दो पालियों में होगी परीक्षा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (स्पेशल टीईटी)-2026 तीन नवंबर को आयोजित की जाएगी। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने परीक्षा की तिथि और कार्यक्रम जारी करते हुए बताया कि परीक्षा प्रदेश के छह मंडल मुख्यालयों पर दो पालियों में होगी। अभ्यर्थी 31 अक्टूबर से आयोग की आधिकारिक वेबसाइट से प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकेंगे। आयोग के अनुसार, स्पेशल टीईटी-2026 का आयोजन प्रयागराज, लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, मेरठ और आगरा में किया जाएगा। पहली पाली सुबह 9:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 2:30 बजे से शाम पांच बजे तक निर्धारित की गई है। आयोग ने अभ्यर्थियों के परीक्षा शहर की अग्रिम सूचना भी जारी कर दी है। अभ्यर्थी आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध लिंक के माध्यम से लॉगिन कर अपने आवंटित परीक्षा शहर की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा शहर की अग्रिम सूचना प्रवेश पत्र नहीं है। अभ्यर्थी 31 अक्टूबर से वेबसाइट के माध्यम से अपना प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकेंगे। परीक्षा के आधिकारिक प्रवेश पत्र 31 अक्टूबर से डाउनलोड किए जा सकेंगे। परीक्षा केंद्रों पर वैध एडमिट कार्ड और एक मूल पहचान पत्र (आईडी प्रूफ) ले जाना अनिवार्य होगा। इनके बिना किसी भी अभ्यर्थी को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उल्लेखनीय है कि आयोग ने विज्ञापन संख्या 03/2026 के तहत विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा के लिए पांच सितंबर, 2026 को विज्ञापन जारी किया था। बता दें कि सिटी स्लिप का उपयोग केवल परीक्षा वाले शहर की जानकारी हासिल करके पहले यात्रा की तैयारी के लिए है। एग्जाम सेंटर पर एडमिट कार्ड के रूप में इसका उपयोग नहीं किया जा सकता है।

बंगाल की खाड़ी में चक्रवात का खतरा, दक्षिण बंगाल के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी

कोलकाता। कोलकाता स्थित क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र ने शनिवार को बताया कि आने वाले दिनों में बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक चक्रवात बनने की संभावना है। इसके चलते बुधवार से पश्चिम बंगाल के कई जिलों में भारी बारिश, आंधी-तूफान और तेज हवाएं चलने के आसार हैं। आने वाले सप्ताह में दक्षिण बंगाल के बड़े हिस्सों में भारी बारिश और आंधी-तूफान आने की संभावना है, जिसे देखते हुए मौसम विभाग ने पहले ही चेतावनी जारी कर दी है। मौसम विभाग के अनुसार, शुक्रवार को बंगाल की खाड़ी के पूर्वी-मध्य और उससे सटे दक्षिण-पूर्वी हिस्से में कम दबाव का क्षेत्र बना है। इसके साथ ही समुद्र तल से 5.8 किमी की ऊंचाई तक एक चक्रवाती परिसंचरण भी विकसित हुआ है। शनिवार तक इस सिस्टम के और मजबूत होकर ‘दबाव’ में बदलने और पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ने की उम्मीद है। रविवार तक यह और अधिक शक्तिशाली होकर ‘डीप दबाव’ में बदल सकता है और सोमवार सुबह तक समुद्र के ऊपर इसके चक्रवात का रूप लेने की संभावना है। अगले दो दिनों में यह सिस्टम और ताकतवर हो सकता है और उत्तरी आंध्र प्रदेश तथा दक्षिणी ओडिशा के तटीय इलाकों की ओर बढ़ सकता है। इसके प्रभाव से बुधवार से दक्षिण बंगाल के कई हिस्सों में आंधी-तूफान और भारी बारिश हो सकती है। कोलकाता में बुधवार से शुक्रवार के बीच कहीं-कहीं हल्की बारिश, आंधी-तूफान और तेज हवाएं चलने की संभावना है। इस दौरान हवा की गति 30 से 40 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। हावड़ा, हुगली, उत्तर 24 परगना, पूर्वी बर्दवान, पश्चिमी बर्दवान, बीरभूम, मुर्शिदाबाद और नदिया जिलों में भी ऐसे ही हालात रहने का अनुमान है। दक्षिण बंगाल के कई जिलों में भारी बारिश होने की भी संभावना है। दक्षिण 24 परगना और पूर्वी मेदिनीपुर में बुधवार से शुक्रवार तक लगातार भारी बारिश हो सकती है। पुरुलिया और बांकुरा में गुरुवार और शुक्रवार को भारी बारिश होने के आसार हैं। मंगलवार को दक्षिण 24 परगना, पूर्वी मेदिनीपुर और पश्चिमी मेदिनीपुर में कहीं-कहीं बारिश हो सकती है। सोमवार तक पश्चिम बंगाल के तट के लिए कोई मौसम चेतावनी नहीं है, हालांकि मछुआरों को मंगलवार से समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है, क्योंकि उस दिन से ‘रेड वार्निंग’ लागू हो जाएगी। तटीय इलाकों में हवा की गति 40 से 50 किमी प्रति घंटा रहने की उम्मीद है और हवा के झोंके 60 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकते हैं। समुद्र की स्थिति खराब रहने की संभावना है। सप्ताह के आखिर में उत्तर बंगाल में भी मौसम का मिजाज बदल सकता है। दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार जिलों में गुरुवार और शुक्रवार को भारी बारिश होने की संभावना है। उत्तरी जिलों के अन्य हिस्सों में दोनों दिन कहीं-कहीं बारिश हो सकती है और 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। इस बीच शनिवार सुबह कोलकाता में न्यूनतम तापमान 23.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 0.1 डिग्री अधिक है। शुक्रवार को अधिकतम तापमान 32.2 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 0.5 डिग्री अधिक था।

महिलाओं के खिलाफ अपराध में शामिल हैं देश के 187 सांसद और विधायक : रिपोर्ट

नई दिल्ली। देशभर के 187 सांसद और विधायक महिलाओं के खिलाफ अपराध में शामिल हैं। अगर दलों के हिसाब से देखें तो भाजपा के सबसे अधिक सांसदों और विधायकों पर महिला अपराध से जुड़े मामले हैं। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, एडीआर और नेशनल इलेक्शन वॉच ने देश के 4899 में से 4881 वर्तमान सांसदों और विधायकों के शपथ पत्रों का विश्लेषण किया है, जिसमें 5 साल की अवधि के दौरान इस्तीफे के कारण, मृत्यु या किसी और कारण से हुए उपचुनावों का विश्लेषण भी शामिल हैं। एडीआर की रिपोर्ट से पता चला है कि 772 वर्तमान सांसदों और 4109 वर्तमान विधायकों में से 187 वर्तमान सांसदों और विधायकों ने महिलाओं के ऊपर अत्याचार से संबंधित मामले घोषित किए हैं। रिपोर्ट में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों का भी जिक्र है, जिसमें बताया गया कि भारत में साल 2024 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 4,41,534 मामले दर्ज हुए। इसके अनुसार, प्रतिदिन औसतन 1210 मामले सामने आए। दिल्ली और तेलंगाना में महिलाओं के खिलाफ अपराध की दर राष्ट्रीय औसत प्रति लाख महिला आबादी पर 64.6 मामलों की दर से लगभग दोगुनी दर्ज हुई। इसी विश्लेषण में एडीआर ने रिपोर्ट दी है कि 772 वर्तमान सांसदों और 4109 वर्तमान विधायकों में से 187 वर्तमान सांसदों और विधायकों ने महिलाओं के ऊपर अत्याचार से संबंधित मामले घोषित किए हैं, जिसमें 19 वर्तमान सांसद और 188 वर्तमान विधायक हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि विभिन्न दलों में भाजपा के सबसे अधिकतम 106 वर्तमान सांसदों और विधायकों ने महिलाओं के ऊपर अत्याचार से संबंधित मामले घोषित किए हैं। इसके अलावा, कांग्रेस के 20 और टीडीपी के 18 वर्तमान सांसदों और विधायकों पर महिलाओं के खिलाफ अत्याचार से जुड़े मुकदमे हैं। राज्यों में पश्चिम बंगाल के सबसे अधिकतम 69 वर्तमान सांसद और विधायक हैं जबकि आंध्र प्रदेश के 22 और ओडिशा के 17 ऐसे वर्तमान सांसद व विधायक हैं, जिन्होंने महिलाओं के ऊपर अत्याचार से संबंधित मामले घोषित किए हैं। 14 वर्तमान सांसद और विधायक ऐसे हैं, जिन पर बलात्कार के मुकदमे हैं। इनमें से 2 वर्तमान लोकसभा सांसद और 12 वर्तमान विधायक हैं। बलात्कार के मामलों में दलवार स्थिति के अनुसार भाजपा और कांग्रेस सबसे ऊपर हैं। भाजपा के दो वर्तमान सांसदों और दो विधायकों पर बलात्कार के मामले हैं जबकि कांग्रेस के 4 विधायकों पर ऐसे मामले हैं।

पीएम मोदी 25 अक्टूबर को वाराणसी और भुवनेश्वर दौरे पर, कई अहम परियोजनाओं का करेंगे उद्घाटन

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश और ओडिशा का दौरा करेंगे। सुबह लगभग 11 बजे प्रधानमंत्री वाराणसी में एक नई गारमेंट निर्माण इकाई का उद्घाटन करेंगे। दोपहर लगभग 1 बजे वह मुख्य अतिथि के रूप में वाराणसी के नमो घाट पर ‘एयर फोर्स डे एरियल डिस्प्ले-2026’ देखेंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री ओडिशा जाएंगे, जहां शाम लगभग 4:45 बजे वह भुवनेश्वर में भारतीय रिजर्व बैंक के डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर वह वहां मौजूद लोगों को संबोधित भी करेंगे। वाराणसी में प्रधानमंत्री मोदी अरविंद लिमिटेड की नई गारमेंट निर्माण इकाई का उद्घाटन करेंगे। यह इकाई भारत के कपड़ा और परिधान निर्माण इकोसिस्टम को मजबूत करने और इस क्षेत्र में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आधुनिक निर्माण प्रक्रियाओं पर केंद्रित यह इकाई, विशेष रूप से महिलाओं के लिए, रोजगार के सार्थक अवसर पैदा करेगी और क्षेत्र की आर्थिक प्रगति में योगदान देगी। यह उद्घाटन औद्योगिक निवेश और विनिर्माण-आधारित विकास के केंद्र के रूप में उत्तर प्रदेश की बढ़ती भूमिका को भी दर्शाता है। वैश्विक ग्राहक आधार के साथ यह इस बात का प्रमाण है कि वाराणसी में निर्मित उत्पाद दुनियाभर में पहुंचेंगे। मुख्य रूप से महिलाओं के नेतृत्व वाली पहल होने के नाते यह ‘महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास’ का एक सशक्त प्रतीक है। प्रधानमंत्री वाराणसी के नमो घाट पर ‘एयर फोर्स डे एरियल डिस्प्ले-2026’ देखेंगे। यह कार्यक्रम भारतीय वायु सेना की 94वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया जाएगा और इसकी थीम ‘विंग्स ओवर गंगा’ होगी। इस हवाई प्रदर्शन में तेजस, लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर प्रचंड, एसयू-30एमके I और राफेल जैसे लड़ाकू विमानों के साथ-साथ परिवहन विमान भी शामिल होंगे। भारतीय नौसेना और भारतीय सेना के विमान भी इसमें हिस्सा लेंगे, जो उनके बीच बेहतर तालमेल और संयुक्त संचालन को दर्शाएंगे। भारतीय वायु सेना की प्रमुख प्रदर्शन टीमें, जैसे ‘सूर्य किरण एयरोबैटिक टीम’ और ‘सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम’ भी इस कार्यक्रम में भाग लेंगी। यह प्रदर्शन सटीक उड़ान, आपसी तालमेल और बेहतरीन परिचालन क्षमता का नजारा पेश करेगा। यूपी के बाद पीएम मोदी भुवनेश्वर में भारत की वित्तीय प्रणाली की तकनीकी नींव को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारतीय रिजर्व बैंक के नए डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान का उद्घाटन करेंगे। इन्हें बैंक की कंप्यूटिंग जरूरतों को पूरा करने और बैंक तथा पूरे वित्तीय क्षेत्र के लिए एक सुरक्षित, मजबूत, विस्तार योग्य और भविष्य के लिए तैयार कंप्यूटिंग इकोसिस्टम प्रदान करने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है। चार अत्याधुनिक डेटा सेंटर, महत्वपूर्ण भुगतान और निपटान प्रणालियों के साथ-साथ अन्य प्रमुख पहलों को संचालित करेंगे। इस सुविधा को ‘अपटाइम इंस्टीट्यूट टियर IV’ मानक का प्रमाणन मिला है, जो डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक वैश्विक बेंचमार्क है। यह इसे परिचालन क्षमता और मजबूती के उच्चतम स्तर पर स्थापित करता है। यह दुनिया भर के (बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और बीमा) क्षेत्र में सबसे बड़े टियर IV प्रमाणित केंद्रों में से एक है। यह डिजिटल वित्तीय सेवाओं की पहुंच, कार्यक्षमता और विश्वसनीयता को बढ़ाने में मदद करेगा। साथ ही यह एक ऐसी सुरक्षित डिजिटल नींव तैयार करेगा, जिस पर भारत की तकनीक-आधारित वित्तीय अर्थव्यवस्था और अधिक विकसित हो सकेगी। यह केंद्रीय बैंकिंग समुदाय के बीच डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में एक अग्रणी संस्था के रूप में भारतीय रिजर्व बैंक की विशिष्ट स्थिति को और मजबूत करेगा। साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान साइबर सुरक्षा और एंटरप्राइज-टेक्नोलॉजी से जुड़े प्रशिक्षण, अनुसंधान और पूरे क्षेत्र में क्षमता विकास के लिए एक समर्पित मंच प्रदान करेगा। यह संस्थान बीएफएसआई क्षेत्र से संबंधित अत्याधुनिक तकनीकों पर ध्यान केंद्रित करेगा, जिनमें क्वांटम कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अन्य उभरती हुई तकनीकें शामिल हैं।

डॉ. सज्जन सिंह यादव होंगे जम्मू-कश्मीर के नए मुख्य सचिव, केंद्र ने जारी किया आदेश

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने 1995 बैच के आईएएस अधिकारी डॉ. सज्जन सिंह यादव को जम्मू-कश्मीर का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया है। इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शनिवार को आदेश जारी किया है। गृह मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के साथ डॉ. सज्जन सिंह यादव, आईएएस (एजीएमयूटी :1995) को दिल्ली से जम्मू-कश्मीर स्थानांतरित किया गया है। उन्हें 1 नवंबर 2026 से या कार्यभार ग्रहण करने की तारीख, जो भी बाद में हो, से जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव के पद पर तैनात किया गया है। यह आदेश गृह मंत्रालय की ओर से जारी किया गया है। आदेश की कॉपी दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, पुडुचेरी, अंडमान-निकोबार, गोवा, चंडीगढ़, लद्दाख के मुख्य सचिवों के साथ-साथ डीएनएच एंड डीडी और लक्षद्वीप के प्रशासक के सलाहकार और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल के सचिव को भी भेजी गई है। डॉ. सज्जन सिंह यादव भारतीय प्रशासनिक सेवा के 1995 बैच के एजीएमयूटी कैडर के अधिकारी हैं। उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के जरिए सीधी भर्ती से सेवा में प्रवेश किया था। रिकॉर्ड के अनुसार उनका गृह राज्य हरियाणा है। अपने 31 साल के लंबे कार्यकाल में डॉ. यादव 17 अलग-अलग स्थानों पर 23 पदों पर रह चुके हैं। उन्होंने केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर भी काम किया है। उनकी सबसे लंबी पोस्टिंग 4 साल 8 महीने तक वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग में अतिरिक्त सचिव के तौर पर रही है। इसके अलावा वह नई दिल्ली में वित्त व्यय विभाग में संयुक्त सचिव और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में संयुक्त सचिव जैसे अहम पदों पर भी काम कर चुके हैं। रिकॉर्ड के मुताबिक, डॉ. सज्जन सिंह यादव ने आखिरी बार नई दिल्ली में वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग में अतिरिक्त सचिव के तौर पर काम किया था। वह 19 अगस्त 2026 तक इस पद पर थे। उनके पूरे करियर में औसतन हर पोस्टिंग करीब 1 साल 4 महीने की रही है। शिक्षा की बात करें तो डॉ. सज्जन सिंह यादव ने एनिमल हसबेंडरी की पढ़ाई की है और दिल्ली विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज से फाइनेंस में एमबीए किया है। सेवा के दौरान उन्होंने 9 प्रशिक्षण कार्यक्रम भी पूरे किए हैं।

मुंबई में जैश से जुड़े संदिग्ध की गिरफ्तारी पर पड़ोसी बोले- ‘वह कोई बुरा इंसान नहीं’

मुंबई। मुंबई में जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े होने के आरोप में गिरफ्तार संदिग्ध के पड़ोसियों ने उसका समर्थन किया है। पड़ोसियों ने कहा कि वह कोई बुरा इंसान नहीं था। साथ ही, पड़ोसियों ने मांग की है कि अगर उसने कुछ गलत नहीं किया है तो उसे छोड़ देना चाहिए। दरअसल, महाराष्ट्र एटीएस की कालाचौकी यूनिट ने मुंबई के माहिम इलाके से मोहम्मद हसन अबू सरमद अख्तर (33) को गिरफ्तार किया है। एटीएस के मुताबिक, आरोपी के सोशल मीडिया अकाउंट और मोबाइल फोन की जांच में भड़काऊ पोस्ट, जिहाद के समर्थन में संदेश और प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मौलाना मसूद अजहर के भाषणों से जुड़े ऑडियो मिले हैं। शुरुआती जांच में आरोपी के पाकिस्तानी इंटेलिजेंस ऑपरेटर्स (पीआईओ) के संपर्क में होने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, एक पड़ोसी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुएऐ कहा कि हम पास में कुछ सालों से रह रहे हैं, लेकिन वह व्यक्ति बिल्कुल बुरा आदमी नहीं लग रहा है। पड़ोसी ने कहा, “मैं उसे लगभग तीन से साढ़े तीन साल से जानता हूं। वह यहां किराए पर रहता है। इसके अलावा, मुझे उसके बारे में कुछ नहीं पता। लेकिन मुझे नहीं लगता कि वह कोई बुरे इंसान है। वह रात में बाहर रहता था, कुछ देर कहीं बैठते थे और फिर अपने काम पर चला जाता था। अब किसी के दिल में क्या है, यह तो ऊपर वाला ही जानता है कि कौन अच्छा है और कौन बुरा। इसके आगे मुझे कुछ नहीं पता।” पड़ोसी ने बताया कि शनिवार की सुबह एटीएस और पुलिस टीम आई थी, जो उसे उठा ले गईं। अब उसकी जांच हो रही है या कुछ और, हमें नहीं पता। लेकिन वह व्यक्ति बिल्कुल बुरा आदमी नहीं लग रहा है। हमें भी चार-पांच साल यहां रहते हुए हो चुके हैं। वह व्यक्ति अपने व्यवहार से बिल्कुल नहीं लगता कि वह गलत है। सच्चाई का पता चलाना पुलिस का काम है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई अपने मुल्क के साथ भी गद्दारी करता है तो उससे बड़ा कोई गद्दार नहीं हो सकता है। जिस जमीन पर रह रहे हैं, उसकी हमें हिफाजत करनी चाहिए। यह देश हमारा है और उससे कोई गद्दारी करता है तो उसे गिरफ्तार करके सजा दी जानी चाहिए। अगर कोई गलत नहीं है तो उसे छोड़ देना चाहिए। पड़ोसी ने बताया कि वह सिर्फ दो लोग साथ रहते थे। मौलाना अरबी पढ़ाने के लिए जाते हैं। मौलाना से बात होती रहती है, क्योंकि हम सभी पास में ही रहते हैं। मौलाना ने बताया था कि एक शक के आधार पर पुलिस वाले उसे लेकर गए हैं और वह छूट जाएंगे। हमारा भी यही कहना है कि अगर वह गलत नहीं है तो छोड़ दिया जाना चाहिए।

अपराधी कितना भी डीप फेक का आवरण ओढ़े, उसे खोज निकालेंगे : सीएम योगी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डीपफेक जैसी तकनीकों के दौर में अपराधी कितना भी तकनीक का आवरण ओढ़ ले, उत्तर प्रदेश की वैज्ञानिक और विधिक क्षमता उसे खोज निकालेगी। एआई हमारे लिए मददगार हो सकता है, लेकिन उसे निर्णायक नहीं बनना चाहिए। तकनीक का संचालन मानव विवेक से होना चाहिए, न कि मनुष्य तकनीक के विवेक पर निर्भर हो जाए। पूरी तरह एआई पर निर्भरता भविष्य में संकट बन सकती है। वैज्ञानिक साक्ष्यों, फॉरेंसिक जांच और आधुनिक तकनीक के समन्वय से अपराध अनुसंधान को प्रभावी बनाने के साथ न्याय मिलने में होने वाली देरी को भी कम किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री शनिवार को लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘टेक संगम 2026’ के दूसरे दिन के कार्यक्रम का उद्घाटन कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने क्वांटम फॉरेंसिक्स और विधिक अनुपालन के क्षेत्र में कार्य करने वाले ‘एलईएक्सक्यू सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ का शुभारंभ किया। साथ ही कंसेंट मैनेजमेंट पोर्टल लॉन्च किया, ‘अभेद्य’ परियोजना की आधारशिला रखी और ‘एआई इन कंस्ट्रक्शन’ पुस्तक का अनावरण किया। सम्मेलन में साइबर सुरक्षा, डिजिटल साक्ष्य, क्वांटम तकनीक, फॉरेंसिक विज्ञान और एआई के न्यायिक व प्रशासनिक उपयोग पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था में आए बदलाव का उल्लेख करते हुए बताया कि जिस करीब 100 एकड़ जमीन पर आज विश्वस्तरीय फॉरेंसिक संस्थान खड़ा है, उस पर कभी लखनऊ के एक बड़े भू-माफिया का कब्जा था। उस समय पुलिस भी इस मामले में प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पा रही थी। वर्ष 2017 में पुलिस अधिकारियों से इसकी जानकारी मिलने के बाद जांच कराई गई और भू-माफिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। दूसरी एफआईआर दर्ज होते ही उसने आत्मसमर्पण कर जमीन छोड़ दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक दशक पहले लखनऊ में साइबर फॉरेंसिक और क्वांटम तकनीक जैसे विषयों पर चर्चा करना भी सपने जैसा लगता था। आज उसी जमीन पर बना संस्थान प्रदेश में वैज्ञानिक जांच, आधुनिक अपराध अनुसंधान और तकनीकी शिक्षा को नई दिशा दे रहा है। फॉरेंसिक विज्ञान की उपयोगिता समझाते हुए मुख्यमंत्री ने लोकप्रिय टीवी सीरियल ‘सीआईडी’ का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि पहले लोग टेलीविजन पर देखते थे कि एक बाल या फिंगरप्रिंट के आधार पर अपराधी तक कैसे पहुंचा जाता है। अब फॉरेंसिक विज्ञान और आधुनिक तकनीक की मदद से ऐसी जांच वास्तविक जीवन में संभव हो रही है। न्याय मिलने में देरी का उल्लेख करते हुए उन्होंने एक माफिया के मामले का जिक्र किया, जिसने वर्ष 1980 में पहला अपराध किया था, लेकिन साक्ष्यों के अभाव और डीएनए सैंपल नष्ट होने के कारण उसे वर्ष 2022 में, यानी 42 साल बाद सजा मिल सकी। उन्होंने कहा कि यह उदाहरण बताता है कि अपराध की जांच में वैज्ञानिक साक्ष्य कितने महत्त्वपूर्ण हैं और समय पर साक्ष्य जुटाना न्याय प्रक्रिया के लिए क्यों जरूरी है। मुख्यमंत्री ने बताया कि नए आपराधिक कानूनों के तहत सात वर्ष से अधिक की सजा वाले अपराधों में फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाने पर विशेष जोर दिया गया है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए प्रदेश की सभी 18 पुलिस रेंजों में फॉरेंसिक लैब विकसित की जा रही हैं। इनमें 12 लैब तैयार हो चुकी हैं, जबकि छह अन्य अंतिम चरण में हैं। इसके अतिरिक्त 150 से अधिक फॉरेंसिक वैन तैनात की गई हैं, जिससे घटनास्थल पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाने और जांच को गति देने में मदद मिलेगी। उद्देश्य है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर विवेचना मजबूत हो और न्यायालयों में मामलों के निस्तारण में अनावश्यक देरी कम हो। मुख्यमंत्री ने ‘लॉ विद लैब्स’ यानी कानून और प्रयोगशाला के समन्वय की अवधारणा को महत्त्वपूर्ण बताते हुए कहा कि विज्ञान और कानून को एक-दूसरे का पूरक बनना होगा। वैज्ञानिक जांच की विश्वसनीयता और विधिक प्रक्रिया के अनुरूप साक्ष्यों का उपयोग न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाता है। इसी उद्देश्य से शुरू किया गया एलईएक्सक्यू सेंटर ऑफ एक्सीलेंस क्वांटम तकनीक को कानून, सुरक्षा और फॉरेंसिक विज्ञान से जोड़ेगा। इसमें ‘एलईएक्स’ का संबंध कानून और ‘क्यू’ का संबंध क्वांटम से है। सेंटर के माध्यम से क्वांटम फॉरेंसिक्स, विधिक अनुपालन, अनुसंधान और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया जाएगा। इससे कानून और आधुनिक विज्ञान के बीच सहयोग के नए अवसर विकसित होंगे। उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में डेटा और तकनीक विकास के प्रमुख आधार बन चुके हैं। उन्होंने डेटा को नया तेल बताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश एआई और डेटा सेंटर के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक प्रदेश में पांच गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता विकसित करना है। इसके लिए पांच बड़े डेटा सेंटर क्लस्टर विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। उन्होंने नोएडा में उत्तर भारत की पहली सेमीकंडक्टर फैब यूनिट स्थापित किए जाने का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री के अनुसार, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, साइबर सुरक्षा और एआई जैसे क्षेत्रों में निवेश से प्रदेश की तकनीकी क्षमता बढ़ेगी और नए अवसर पैदा होंगे। औद्योगिक विकास और निवेश के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1947 से 2017 तक उत्तर प्रदेश में करीब 14 हजार उद्योग स्थापित हुए थे, जबकि 2017 के बाद 35 हजार नए उद्योग लगे हैं। उन्होंने इस बदलाव का संबंध बेहतर कानून-व्यवस्था और निवेश के अनुकूल माहौल से जोड़ा। मुख्यमंत्री के मुताबिक, प्रदेश के पास करीब 75 हजार एकड़ का लैंड बैंक है और 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। लखनऊ स्थित एचसीएल सेंटर का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में वहां करीब 100 कर्मचारी काम करते थे, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 12,600 हो गई है। उन्होंने कहा कि महिलाएं भी रात की शिफ्ट में काम कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने इसे सुरक्षा के माहौल में आए बदलाव और महिलाओं की बढ़ती कार्यभागीदारी के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री ने अयोध्या में दीपोत्सव की शुरुआत और शहर में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2017 में वहां बिजली की उपलब्धता सीमित थी। अब अयोध्या को सोलर सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है और वहां अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी है। उन्होंने कहा कि

ग्रैप-1 लागू होने के बाद भी नोएडा की सड़कों पर उड़ रही धूल, प्रदूषण नियंत्रण के दावों पर उठे सवाल

नोएडा। दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) के पहले चरण को लागू किए जाने के बावजूद नोएडा की सड़कों पर धूल उड़ने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शहर के विभिन्न इलाकों में सड़कों पर उड़ती धूल और लगातार जारी निर्माण कार्यों के कारण वायु गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका बनी हुई है। एक ओर उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) की ओर से प्रदूषण की निगरानी के लिए कई टीमें तैनात होने का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर धूल नियंत्रण के इंतजाम प्रभावी नजर नहीं आ रहे हैं। शहर में प्रदूषण का स्तर बढ़ने के साथ ही सड़कों पर धूल की समस्या एक बार फिर चर्चा में है। ग्रेप का पहला चरण लागू होने के बाद प्रदूषण फैलाने वाले कारकों पर नियंत्रण के लिए संबंधित विभागों को सतर्क रहने और आवश्यक कदम उठाने की जरूरत है। इसके बावजूद नोएडा के कई हिस्सों में सड़कों पर वाहनों की आवाजाही के दौरान धूल उड़ती दिखाई दे रही है। इससे आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और सड़क से गुजरने वाले वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। नोएडा में विभिन्न स्थानों पर प्राधिकरण की ओर से विकास और निर्माण संबंधी कार्य लगातार कराए जा रहे हैं। निर्माण स्थलों पर मिट्टी, निर्माण सामग्री और मलबे के उचित प्रबंधन में लापरवाही होने पर धूल हवा में फैल सकती है। इसके अलावा निर्माण सामग्री से लदे वाहनों की आवाजाही और सड़कों पर जमा मिट्टी भी प्रदूषण बढ़ाने वाले कारकों में शामिल हैं। ऐसे में निर्माण कार्यों के दौरान धूल को नियंत्रित करने के लिए नियमित पानी का छिड़काव, निर्माण सामग्री को ढककर रखना, मलबे का उचित निस्तारण और निर्माण स्थलों के आसपास सफाई जैसे उपायों का प्रभावी ढंग से पालन कराना जरूरी है। यदि इन व्यवस्थाओं में कमी रहती है तो प्रदूषण नियंत्रण के लिए लागू प्रतिबंधों का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाएगा। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का दावा है कि प्रदूषण की स्थिति पर नजर रखने के लिए कई टीमें लगातार मॉनिटरिंग कर रही हैं। इन टीमों के माध्यम से प्रदूषण फैलाने वाले कारकों की पहचान करने और संबंधित स्थानों पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई है, हालांकि सड़कों पर लगातार उड़ती धूल के बीच निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण के लिए केवल निरीक्षण करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर प्रभावी कार्रवाई करना भी जरूरी है। निर्माण स्थलों पर निर्धारित मानकों का पालन नहीं होने, सड़कों पर मिट्टी जमा रहने या धूल नियंत्रण के उपाय नहीं किए जाने की स्थिति में संबंधित एजेंसियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। शहर में प्रदूषण बढ़ाने वाले हॉटस्पॉट की पहचान कर वहां रोकथाम के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके बावजूद इन स्थानों पर धूल की समस्या पूरी तरह नियंत्रित होती नजर नहीं आ रही है। हॉटस्पॉट चिह्नित करने के बाद वहां नियमित सफाई, पानी का छिड़काव, निर्माण गतिविधियों की जांच और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई जैसे कदम लगातार उठाए जाने की आवश्यकता है। नोएडा में वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए यूपीपीसीबी, नोएडा प्राधिकरण और अन्य संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय भी जरूरी है। खासतौर पर निर्माण कार्यों वाले क्षेत्रों और धूल प्रभावित सड़कों पर नियमित निगरानी के साथ त्वरित कार्रवाई की जरूरत है।

दूसरी कक्षा की छात्रा से दुष्कर्म मामले में शिक्षक को उम्रकैद; चिपलून विशेष कोर्ट का अहम फैसला

रत्नागिरी। महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले से एक अहम फैसला सामने आया है। चिपलून की विशेष कोर्ट ने नाबालिग छात्रा के साथ दुष्कर्म करने वाले शिक्षक को उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने आरोपी पर जुर्माना भी लगाया है। यह मामला गुहागर तालुका के एक स्कूल का है। आरोपी शिक्षक का नाम उदय नामदेव वेल्हाल है। उसे दूसरी कक्षा में पढ़ने वाली नाबालिग छात्रा के साथ दुष्कर्म के मामले में दोषी पाया गया है। यह फैसला चिपलून की विशेष कोर्ट के जज डी. बी. म्हालटकर ने सुनाया है। घटना मार्च 2020 की है। 7 मार्च 2020 को पीड़ित बच्ची स्कूल से घर लौटी तो उसकी तबीयत खराब लग रही थी। उसकी मां ने उसकी हालत देखी और प्यार से पूछताछ की। इसके बाद बच्ची ने अपने शिक्षक द्वारा किए गए दुष्कर्म की बात अपनी मां को बताई। बच्ची के खुलासे के बाद पीड़िता की मां ने गुहागर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी शिक्षक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की। इस मामले की सुनवाई चिपलून की विशेष कोर्ट में हुई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 10 गवाहों से पूछताछ की गई। सरकार की ओर से विशेष वरिष्ठ लोक अभियोजक पुष्पराज शशिकांत शेट्ये ने कोर्ट में पक्ष रखा। सभी गवाहों और सबूतों को सुनने के बाद कोर्ट ने आरोपी शिक्षक उदय नामदेव वेल्हाल को दोषी करार दिया और उसे उम्रकैद की सजा सुनाई। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, नाबालिग बच्ची से जुड़े इस गंभीर मामले में आया यह फैसला एक महत्वपूर्ण और बड़ी कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है। इससे पहले 17 अक्टूबर को कर्नाटक के मैसूरु की फास्ट ट्रैक अदालत ने 9 साल की बच्ची से दुष्कर्म और उसकी हत्या के मामले में आरोपी कार्तिक को मौत की सजा सुनाई थी। बच्ची पिछले साल दशहरा उत्सव के दौरान अपने परिवार के साथ गुब्बारे बेचने के लिए मैसूरु आई थी।