‘सामना’ में सीजेपी कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी को लेकर केंद्र की आलोचना

मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) की ओर से शुक्रवार को केंद्र सरकार पर ‘गहरी असुरक्षा’ से ग्रस्त होने और देश में एक तरह का ‘पुलिस राज’ कायम करने का आरोप लगाया गया। शिवसेना (यूबीटी) ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के युवा कार्यकर्ताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी और सात दिनों तक हिरासत में रखे जाने की कड़ी आलोचना की। शिवसेना (यूबीटी) की ओर से पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ के एक संपादकीय में सवाल उठाया गया कि क्या सरकार शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों से डरती है, या फिर वह तिरंगा थामे युवाओं को देखकर घबरा जाती है? संपादकीय में मुंबई, दिल्ली, पटना, लखनऊ और कोलकाता जैसे शहरों में सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन की जगहों पर सरकार द्वारा कब्जा करने की निंदा की गई और इसे लोकतंत्र का गला घोंटने जैसा बताया गया। ‘सामना’ में एक बड़ा विरोधाभास दिखाते हुए कहा गया है कि जहां अदालतें तिरंगा थामे आदर्शवादी युवाओं को उपदेश देती हैं, वहीं गंभीर अपराध करने वालों के प्रति न्याय व्यवस्था आश्चर्यजनक रूप से नरम रुख अपनाती है। इसमें दुष्कर्म के दोषी पूर्व नेता कुलदीप सेंगर का उदाहरण दिया गया, जिसकी सजा को एक जज ने निलंबित कर दिया था। ‘सामना’ में प्रशासन की आलोचना करते हुए कहा गया कि असहमति को दबाने के लिए पुलिस और अपने वफादार समर्थकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें कहा गया कि पहले के नेता विरोध करने वालों का सीधे सामना करते थे, जबकि मौजूदा सरकार बैरिकेड्स, पुलिस बलों और अदालती आदेशों की आड़ में छिप जाती है। शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र में विस्तार से बताया गया है कि कैसे सीजेपी कार्यकर्ता सौरव दास और आशुतोष रांका को तिहाड़ जेल में डाल दिया गया। उन्होंने सरकार के उस आदेश को नहीं माना था, जिसके तहत जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन के लिए अधिकृत जगहों की सूची से एकतरफा तरीके से हटा दिया गया था। ‘सामना’ में सवाल किया गया, “ये युवा जंतर-मंतर पर ‘डांडिया’ खेलने नहीं गए थे। वे भ्रष्ट चुनावी तौर-तरीकों के खिलाफ अपनी आवाज उठाने गए थे। अगर सरकार सच में उदार और लोकतांत्रिक होती, तो क्या वह जंतर-मंतर को बंद कर देती? सरकार के अन्याय के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए सरकार से ही अनुमति मांगना बेतुका है। क्या कोई सरकार कभी अपने ही खिलाफ विरोध प्रदर्शन की अनुमति देगी?” पुलिस की कार्रवाई को सही ठहराने के लिए तर्क दिया गया था कि सार्वजनिक रैलियों में ‘अवांछित तत्व’ घुस सकते हैं। इस तर्क को खारिज करते हुए कहा गया कि सोनम वांगचुक, विपक्षी सांसद और अर्थशास्त्री पराकला प्रभाकर जैसे प्रमुख लोग भी सड़कों पर उतरे हैं। संपादकीय में सवाल किया गया, “क्या ये लोग भी ‘उपद्रवी’ हैं?” इसमें आरोप लगाया गया कि असल हिंसा तो सरकार समर्थित उन लोगों की तरफ से होती है, जो खाकी वर्दी पहनकर छात्रों पर कार्रवाई करते हैं। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने हाई कोर्ट द्वारा युवा आदर्शवादियों को फ्रांस या अल्बानिया में हुए छात्र आंदोलनों का उदाहरण देकर नसीहत देने पर गहरी निराशा जताई। पार्टी ने न्यायपालिका से आग्रह किया कि वे केवल ऊपरी लक्षणों को देखने के बजाय समस्या की जड़ तक जाएं। ‘सामना’ में कहा गया है कि मौजूदा नेतृत्व की नीति बिल्कुल साफ है, नागरिकों को न तो सवाल पूछने चाहिए और न ही जवाबदेही की मांग करनी चाहिए। जब कोई सरकार तिरंगा थामे शांतिप्रिय और देशप्रेमी युवाओं से डरने लगे, तो यह उसकी ताकत नहीं, बल्कि उसके राजनीतिक वहम की पराकाष्ठा को दिखाता है।

गौशालाओं में गोवंश की मौत पर केशव मौर्य सख्त, तीन बीडीओ पर कार्रवाई, कासगंज के अधिकारी निलंबित

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में गौशालाओं में गोवंश की मौत और देखभाल में लापरवाही के मामलों को लेकर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सख्त रुख अपनाया है। बदायूं में दो खंड विकास अधिकारियों (बीडीओ) के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई शुरू की गई है, जबकि कासगंज के पटियाली विकास खंड के बीडीओ संजीव कुमार को एक कथित वीडियो प्रकरण में प्रथमदृष्टया गंभीर अनियमितता के संकेत मिलने के बाद निलंबित कर दिया गया है। उपमुख्यमंत्री ने प्रदेशभर की गौशालाओं की नियमित निगरानी और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए हैं। उपमुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से शुक्रवार को जारी विज्ञप्ति के अनुसार, बदायूं के म्याऊं विकास खंड की अभिगांव गौशाला में 20 गोवंश की मौत के मामले में बीडीओ राकेश कुमार निराला को प्रथमदृष्टया जिम्मेदार पाया गया है। गौशाला की निर्धारित क्षमता 100 गोवंश की थी, जबकि वहां 428 गोवंश संरक्षित पाए गए। जिले में पहले से रेड अलर्ट जारी होने के बावजूद अस्थायी व्यवस्था और अतिरिक्त शेड की व्यवस्था नहीं कराए जाने को गंभीर लापरवाही माना गया है। इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के नियम-7 के तहत अनुशासनिक कार्रवाई शुरू की गई है। संयुक्त विकास आयुक्त, बरेली मंडल को जांच अधिकारी नामित किया गया है। इसी तरह, बदायूं के सालारपुर विकास खंड के बीडीओ नितिन कुमार के खिलाफ गौशाला में 14 गोवंश की मौत और लापरवाही के मामले में अनुशासनिक कार्रवाई शुरू की गई है। वहीं, कासगंज जिले के पटियाली विकास खंड के बीडीओ संजीव कुमार से संबंधित एक कथित वीडियो सामने आने के बाद उपमुख्यमंत्री ने स्वतः संज्ञान लिया। विज्ञप्ति के मुताबिक, मामले में प्रथमदृष्टया गंभीर अनियमितता के संकेत मिलने पर उन्हें निलंबित कर मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। केशव प्रसाद मौर्य ने ग्राम्य विकास विभाग के प्रमुख सचिव को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश की सभी गौशालाओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए। जहां भी अव्यवस्था, अनियमितता, संसाधनों की कमी या गोवंश की देखभाल में लापरवाही सामने आए, वहां संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाए। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि गोवंश संरक्षण सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। गौशालाओं में चारा, पानी, पर्याप्त शेड, स्वच्छता और पशुओं की समुचित देखभाल सुनिश्चित करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लापरवाही, अनियमितता, भ्रष्टाचार या नियमों के विरुद्ध काम करने वाले अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को गौशालाओं का नियमित स्थलीय निरीक्षण करने, कमियों को तत्काल दूर कराने और गोवंश के संरक्षण में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होने देने के निर्देश दिए।

‘हमारा राष्ट्र ही हमारी संस्कृति और अस्तित्व का आधार है’, चिन्मय अमृत महोत्सव के उद्घाटन में बोले प्रधानमंत्री मोदी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सरकार की नीतियों और प्रयासों के केंद्र में देश के युवा हैं। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि चिन्मय अमृत महोत्सव के आयोजन में भी युवाओं ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। प्रधानमंत्री ने बताया कि अनेक युवा स्वयंसेवकों ने लगभग 300 दिनों में 40 हजार किलोमीटर की यात्रा की और इस दौरान एक लाख से अधिक युवाओं से संपर्क स्थापित किया। उन्होंने इस अभियान की सराहना करते हुए पूरी टीम को बधाई और शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री ने कहा, “हमारे उपनिषदों का कथन ‘वयं अमृतस्य पुत्राः’ है। इसका मतलब है कि हम अमृत की संतानें हैं। ये संकल्पना केवल आध्यात्मिक दर्शन नहीं है, यह हमारा सांस्कृतिक विश्वास भी है। इसका अर्थ है कि हमारी चेतना अमर है। हमारा ज्ञान और बोध अमर है। इसी बोध के कारण ये भारत भी हजारों वर्षों से अमर बना हुआ है, क्योंकि भारत शब्द का अर्थ ही यही है कि जो ज्ञान और प्रकाश के अनुसंधान में लगा हो। इसीलिए जब देश की आजादी के 75 वर्ष का अवसर आया तो मेरे मन में विचार आया कि हमें इस अवसर को विकसित भारत का प्रेरणा मंच तो बनाना ही है और हमें भारत के उस स्वरूप को जीवंत करना है, जो अमृत विचारों को जीना जानता है।” पीएम ने कहा, “मैंने उस उत्सव को ‘अमृत महोत्सव’ के रूप में मनाने का आह्वान किया था। समय के साथ-साथ एक के बाद एक अद्भुत यात्राएं उस संकल्प से जुड़ती चली जा रही हैं। कितने ही आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संगठनों ने इस दौरान अपनी यात्रा के अहम पड़ावों पर ‘अमृत संकल्प’ लिए और अब चिन्मय मिशन भी अमृत महोत्सव के रूप में भारत के अमृतकाल के अभियान से जुड़ रहा है। भारत के संकल्पों की असली ताकत यही है। यही तो हमारे ‘अमृतस्य पुत्राः’ होने का प्रमाण है।” प्रधानमंत्री ने कहा, “हमारे वेदों का ‘वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः’ आह्वान है। इसका मतलब है कि राष्ट्र का हित चाहने वाले हम लोग राष्ट्र को जागृत और उन्नत बनाएं। स्वामी चिन्मयानंद ने अपना पूरा जीवन इसी मंत्र को लेकर जिया। वे जितनी श्रद्धा से आध्यात्मिक विषयों पर बोलते थे, उतनी ही तत्परता से वे राष्ट्र के विषयों पर भी मुखर होकर व्याख्यान देते थे। हमारा राष्ट्र ही हमारी संस्कृति की जन्मभूमि है। राष्ट्र ही हमारे अस्तित्व का आधार है। स्वामी जी ने हमेशा यह शिक्षा दी। हम अपनी आध्यात्मिक उन्नति को व्यक्तिगत उन्नति से जोड़ें और व्यक्तिगत उन्नति को राष्ट्र की प्रगति का माध्यम बनाएं।” पीएम ने कहा, “भारत के लोगों को भारत के प्रति स्वाभिमान से भरना स्वामी जी का मिशन था। उन्होंने हमारे शास्त्रों के ज्ञान को जनसामान्य तक पहुँचाने का अभियान शुरू किया। आज उनके उस संकल्प का परिणाम हमें दिखाई दे रहा है। चिन्मय मिशन के प्रयासों से आज लाखों युवा भारत के सांस्कृतिक ब्रांड एंबेसडर का काम कर रहे हैं। ये युवा भारतीय मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुँचा रहे हैं। गुरुदेव का ये योगदान भारत के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पुनर्जागरण का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। 2015 में मुझे उनकी स्मृति में एक विशेष सिक्का जारी करने का सौभाग्य मिला था। मैंने तब भी कहा था कि स्वामी जी का जीवन ज्ञान, कर्म और भक्ति का अद्भुत संगम था।” उन्होंने कहा, “उनके गुरु स्वामी शिवानंद ने उन्हें आशीर्वाद दिया था। उन्होंने अपना पूरा जीवन उसी भाव में जिया। उनकी वाणी में आत्मविश्वास और आंतरिक बल था। वह हर किसी के हृदय पर उनके विचारों की छाप छोड़ जाती थी। महान लोगों का मिशन उनके बाद भी सजीव रहता है।

एमएलसी की दोनों सीटें जीतेगी भाजपा, 2027 के चुनाव में आएगी सुनामी : दयाशंकर सिंह

बलिया। उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों पर शुक्रवार को मतदान जारी है। इस बीच बलिया में यूपी सरकार के मंत्री दयाशंकर सिंह ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा एमएलसी की दोनों सीटें जीतेगी और 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की लहर नहीं, बल्कि सुनामी आएगी। यूपी सरकार के मंत्री दयाशंकर सिंह ने आईएएनएस से कहा, “विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में यह बुद्धिजीवी वर्ग है, जो देश का विकास चाहता है, प्रदेश में शांति व्यवस्था चाहता है। कानून का राज चाहता है। शिक्षण का माहौल चाहता है। सभी बच्चे शांतिपूर्वक शिक्षा ग्रहण करें और देश के लिए काम करें। तो ये भाजपा को वोट करेंगे।” उन्होंने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि सपा लगातार हार रही है। उन्होंने कहा, “समाजवादी पार्टी हार रही है। 2014, 2017, 2019, 2022 में लगातार हार रही है। 27 में तो यहां सुनामी बहने वाली है।” बता दें कि समाजवादी पार्टी (सपा) के राज्यसभा सदस्य राम गोपाल यादव ने कहा है कि इस एमएलसी चुनाव का 2027 के विधानसभा चुनाव से कोई लेना-देना नहीं है। वहीं, दूसरी ओर अखिलेश यादव की आजम खान से मुलाकात पर भी मंत्री दयाशंकर सिंह ने तंज कसा। उन्होंने कहा, “उन लोगों को अपने वर्ग विशेष के वोट का डर सता रहा है। जब ओवैसी उत्तर प्रदेश में सक्रिय हुए हैं तो उन लोगों को अपने समुदाय के वोट का डर सता रहा है। इसलिए वे सोच रहे हैं कि आजम खान के कारण नैया पार हो जाए। समाजवादी पार्टी आजम खान की चिंता भी देर से कर रही है।” उन्होंने आरोप लगाया कि जब समाजवादी पार्टी सत्ता में थी तो लोगों पर अत्याचार करती थी। उन्होंने कहा, “प्रदेश की जनता जानती है कि समाजवादी पार्टी जब-जब सत्ता में रही है तो उसने किस तरह से लोगों पर अत्याचार किए हैं।

दिल्ली के कुछ स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी, पुलिस ने चलाया तलाशी अभियान

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में फिर से स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को जानकारी दी कि कुछ स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। सूचना के पुलिस टीम और फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची। शुरुआती जांच में अब तक कोई संदिग्ध वस्तु या प्रतिकूल तथ्य सामने नहीं आया है। फिलहाल, मामले की जांच जारी है। दिल्ली पुलिस के अनुसार, रोहिणी के वेंकटेश्वर पब्लिक स्कूल और मयूर विहार के सालवन पब्लिक स्कूल को भी धमकियां मिली हैं। सुबह करीब 9.37 और 9.57 पर फायर विभाग को सूचना दी गई थी। पुलिस ने बताया कि मयूर विहार के सालवन पब्लिक स्कूल को मिली धमकी में 30 अक्टूबर को बम से उड़ाने की बात की गई है। इससे पहले, 12 अक्टूबर को दिल्ली से सटे नोएडा कई स्कूलों को ई-मेल के माध्यम से बम से उड़ाने की धमकी मिलने से हड़कंप मच गया। इनमें सेक्टर-16 स्थित एपीजे स्कूल, स्टेप बाय स्टेप और डीपीएस जीबीएन समेत अन्य स्कूल शामिल थे। धमकी की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन अलर्ट हो गया। सुरक्षा के मद्देनजर संबंधित स्कूलों में तत्काल जांच अभियान शुरू किया गया। बम निरोधक दस्ते, डॉग स्क्वॉड, एंटी-सबोटाज चेकिंग टीम और फायर ब्रिगेड की टीमों को मौके पर भेजकर स्कूल परिसरों की सघन तलाशी ली गई। गौतमबुद्धनगर पुलिस के अनुसार, संबंधित थानों की पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित किया। बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वॉड की मदद से स्कूलों के विभिन्न हिस्सों की जांच कराई गई। इसके साथ ही एंटी-सबोटाज चेकिंग टीम और फायर ब्रिगेड को भी सुरक्षा जांच में लगाया गया। हालांकि, जांच में कोई ऐसी वस्तु या तथ्य नहीं मिला। गौरतलब है कि राजधानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में स्कूलों को बम विस्फोट की धमकियां मिलने का यह सिलसिला हाल के वर्षों में तेजी से बढ़ा है। इन धमकियों ने पुलिस प्रशासन के साथ-साथ स्कूल, बच्चे और अभिभावकों की चिंताएं भी बढ़ाई हैं।

‘यूपी में सपा को खत्म करना चाहती है कांग्रेस,’ सीट बंटवारे की खबरों पर ओपी राजभर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर बातचीत की खबरें सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी को 172 सीटों की एक सूची सौंपी है। इस पर उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने चुटकी लेते हुए कहा कि कांग्रेस सीट-शेयरिंग की आड़ में समाजवादी पार्टी को कमजोर करना चाहती है। अंबेडकर नगर में मीडिया से बात करते हुए ओम प्रकाश राजभर ने कहा, “कांग्रेस चाहती है कि समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में खत्म हो जाए। जिस तरह बंगाल में टीएमसी और बिहार में तेजस्वी यादव की पार्टी को कमजोर करने की कोशिश हुई, उसी तरह कांग्रेस की सोच है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े प्रदेश में सपा को खत्म किया जाए।” उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस ने सपा को 172 सीटों की सूची दी है, लेकिन समाजवादी पार्टी इतनी सीटें देने के लिए तैयार नहीं है। अगर कांग्रेस अपनी इस मांग पर अड़ी रही, तो गठबंधन हो पाना मुश्किल हो जाएगा। राजभर ने दावा किया कि कांग्रेस की मंशा है कि अखिलेश यादव अक्टूबर तक सीटें फाइनल कर दें ताकि वह अपनी तैयारी शुरू कर सके, जबकि अखिलेश यादव की रणनीति अलग है। वह चाहते हैं कि चरणबद्ध तरीके से सीटों का फैसला हो, पहले चरण के चुनाव में जितनी सीटें देनी हैं, उतनी तय हों, फिर दूसरे और तीसरे चरण के लिए अलग से फैसला लिया जाए। इसी वजह से कांग्रेस के नेता जल्दबाजी में हैं और चाहते हैं कि सीट बंटवारा जल्दी हो ताकि वे चुनावी तैयारियों में जुट सकें। दूसरी तरफ, लखनऊ में समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने गठबंधन को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन तय है और इस पर कोई संशय नहीं होना चाहिए। फखरुल हसन ने कहा, “राहुल गांधी और अखिलेश यादव लगातार इस विषय पर चर्चा कर रहे हैं। अखिलेश यादव पहले ही कह चुके हैं कि अब सवाल सीटों की संख्या का नहीं है। कितनी सीटें किसे मिलेंगी, यह दोनों दल आपस में बैठकर तय कर लेंगे। हम सबका लक्ष्य भारतीय जनता पार्टी को हराना है।” ओम प्रकाश राजभर के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सपा प्रवक्ता ने कहा, “ओम प्रकाश राजभर को बीजेपी दो सीटें दे रही है। इतनी खिचड़ी पकाने और बीजेपी का गुणगान करने के बाद भी उन्हें केवल दो सीटें मिली हैं। उन्हें अपनी चिंता करनी चाहिए। बीजेपी तीसरी सीट देने को तैयार नहीं है और कह रही है कि दो सीट ले लो और खुद लड़ लो, वो भी उनकी पसंद की सीट नहीं। जहां से वह लड़ना चाहते हैं, वहां से संजय निषाद मांग कर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि बीजेपी उन्हें पिता-पुत्र दोनों को भी चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दे रही है। ऐसे में जिन लोगों को गठबंधन में सिर्फ दो सीटें मिल रही हैं, उन्हें पहले अपना घर और अपना दल देखना चाहिए। समाजवादी पार्टी बीजेपी और उसके बड़बोले सहयोगियों को हराने का काम करेगी।

18 देशों के विशेषज्ञों संग समुद्री विज्ञान और टेक्नोलॉजी पर मंथन करेगी नौसेना

नई दिल्ली। भारतीय नौसेना नई दिल्ली में हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद 2026 का आयोजन करेगी। तीन दिन के इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में 18 देशों के समुद्री विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, शिक्षाविद, नीति निर्माता और राजनयिक हिस्सा लेंगे। सम्मेलन में समुद्र से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए विज्ञान, तकनीक और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी। यह आयोजन 3 से 5 नवंबर तक चलेगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी इसमें शामिल होंगे व विभिन्न देशों के विशेषज्ञों को संबोधित करेंगे। भारत और श्रीलंका के पूर्व नौसेना प्रमुख यहां अपने विचार रखेंगे। इस वर्ष सम्मेलन का मुख्य विषय ‘हिंद-प्रशांत क्षेत्र में विज्ञान, तकनीक और शैक्षणिक सहयोग’ रखा गया है। भारतीय नौसेना अपने प्रमुख नॉलेज सहयोगी, राष्ट्रीय समुद्री फाउंडेशन के साथ मिलकर इसका आयोजन कर रही है। इसका उद्देश्य समुद्र से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए विभिन्न देशों के बीच साझा शोध, तकनीकी विकास और जानकारी के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है। दरअसल आज समुद्र से जुड़ी चुनौतियां किसी एक देश तक सीमित नहीं हैं। जलवायु परिवर्तन, समुद्री व्यापार और आपूर्ति शृंखला की सुरक्षा, समुद्री संसाधनों पर बढ़ता दबाव और महत्वपूर्ण समुद्री ढांचे की सुरक्षा जैसे मुद्दों से निपटने के लिए देशों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए सम्मेलन में वैज्ञानिक क्षमताओं को साझा करने, शोध संस्थानों के बीच साझेदारी बढ़ाने और प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने के उपायों पर विचार किया जाएगा। यहां पांच प्रमुख विषयों पर चर्चा होगी और तीन दिन के सम्मेलन में पांच विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों में केवल चुनौतियों की पहचान ही नहीं की जाएगी, बल्कि उनके व्यावहारिक समाधान भी तलाशे जाएंगे। संयुक्त शोध परियोजनाओं, नई तकनीकों के साझा विकास, वैज्ञानिक आंकड़ों तक उचित पहुंच और संस्थानों के बीच मजबूत साझेदारी जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहेंगे। नौसेना के मुताबिक सम्मेलन में विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित के साथ-साथ सामाजिक विज्ञान, जीवन विज्ञान और मानविकी के महत्व पर भी जोर दिया जाएगा। इसका उद्देश्य समुद्री चुनौतियों को व्यापक नजरिए से समझना और उनके समाधान के लिए अलग-अलग विषयों के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाना है। सम्मेलन के पहले दिन ‘पर्सपेक्टिव्स फ्रॉम द फ्लैग ब्रिज’ नाम से एक विशेष सत्र होगा। इसमें भारत और श्रीलंका के पूर्व नौसेना प्रमुख अपने अनुभव और विचार साझा करेंगे। इसके अलावा ‘सहयोग का संवाद’ नाम से राजदूतों की एक विशेष बातचीत भी आयोजित की जाएगी। तीन दिवसीय कार्यक्रम में मंत्रियों और अन्य विशिष्ट अतिथियों के विशेष संबोधन भी होंगे। हिंद-प्रशांत क्षेत्र के 18 देशों से आए विशेषज्ञ समुद्री सुरक्षा, वैज्ञानिक सहयोग और क्षेत्रीय साझेदारी से जुड़े विषयों पर अपने विचार रखेंगे। हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद भारतीय नौसेना का प्रमुख वार्षिक अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक सम्मेलन है। इसके पिछले आयोजनों में हिंद-प्रशांत महासागर पहल के साथ परस्पर जुड़े सहयोग क्षेत्रों से संबंधित विषयों पर चर्चा होती रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 2019 में बैंकॉक में आयोजित 14वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में इस पहल की घोषणा की थी। भारत के समुद्री विजन ‘महासागर’ यानी क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास को आगे बढ़ाने के साझा दृष्टिकोण के तहत यह संवाद व्यापक सहयोग की रूपरेखा को ठोस कार्ययोजनाओं में बदलने का प्रयास करेगा। सम्मेलन में मिले सुझावों को राष्ट्रीय, उपक्षेत्रीय और पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र के स्तर पर लागू किए जा सकने वाले उपायों के रूप में विकसित करने पर जोर रहेगा।

यूपी एमएलसी चुनाव : दोपहर 12 बजे तक 24.09 प्रतिशत मतदान, शिक्षक सीटों पर ज्यादा उत्साह

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक निर्वाचन सीटों के लिए शुक्रवार को मतदान जारी है। दोपहर 12 बजे तक प्रदेश के सभी 11 निर्वाचन क्षेत्रों में कुल 24.09 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं ने अपेक्षाकृत अधिक उत्साह दिखाया। बरेली-मुरादाबाद खंड शिक्षक सीट पर सर्वाधिक 38.16 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक सीट पर सबसे कम 13.35 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश के कार्यालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में मेरठ खंड में 18.12 प्रतिशत, आगरा खंड में 18.05 प्रतिशत, लखनऊ खंड में 15.73 प्रतिशत, वाराणसी खंड में 15.08 प्रतिशत और इलाहाबाद-झांसी खंड में 13.35 प्रतिशत मतदान हुआ। वहीं, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में बरेली-मुरादाबाद खंड में 38.16 प्रतिशत, गोरखपुर-फैजाबाद खंड में 36.07 प्रतिशत, वाराणसी खंड में 34.71 प्रतिशत, मेरठ खंड में 32.44 प्रतिशत, आगरा खंड में 26.70 प्रतिशत और लखनऊ खंड में 16.61 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। मतदान के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है। भाजपा उपाध्यक्ष नीरज सिंह और सरोजनीनगर से विधायक राजेश्वर सिंह ने पार्टी के सभी 11 प्रत्याशियों की जीत का दावा किया। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी ने विभिन्न जिलों में कथित फर्जी मतदान, बूथ कैप्चरिंग, कार्यकर्ताओं के साथ दुर्व्यवहार और मतदान प्रक्रिया को प्रभावित करने की शिकायतें उठाई हैं। समाजवादी पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर मैनपुरी के बेवर और देवी रोड स्थित विभिन्न बूथों पर पहचान पत्रों की जांच किए बिना मतदान कराए जाने का आरोप लगाया। पार्टी ने श्रावस्ती के इकौना ब्लॉक स्थित बूथ संख्या 183 पर भाजपा विधायक राम फेरन पांडेय और उनके समर्थकों के मतदान केंद्र में प्रवेश कर मतदान प्रभावित करने का आरोप भी लगाया। सपा ने गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी प्रत्याशी डॉ. संजयन त्रिपाठी को भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा कथित तौर पर धमकाए जाने, मुरादाबाद-बरेली खंड के बिलारी तहसील स्थित बूथ संख्या 80 पर मतदाता सूची में फर्जी और डुप्लीकेट प्रविष्टियों के आधार पर मतदान कराए जाने तथा आगरा के फतेहाबाद क्षेत्र में बूथ कैप्चरिंग और सपा कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट के आरोप लगाए। पार्टी ने फतेहपुर के विजयीपुर ब्लॉक में भी अपने कार्यकर्ताओं के साथ कथित अभद्रता और धक्का-मुक्की की शिकायत की। सपा ने चुनाव आयोग से इन मामलों की जांच कर निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित कराने की मांग की है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। सपा प्रत्याशी कांति सिंह ने भी चुनाव आयोग से शिकायतों का संज्ञान लेने की अपील की। उन्होंने हरदोई, प्रतापगढ़, रायबरेली और सीतापुर में पुलिस पर दबाव बनाने तथा लोगों को थाने बुलाए जाने की शिकायतें मिलने का दावा किया। समाजवादी पार्टी की प्रवक्ता पूजा शुक्ला ने मतदान करने के बाद कहा कि लोग सपा के पक्ष में वोट कर रहे हैं। उन्होंने शिक्षकों के बीच कुछ नाराजगी होने की बात स्वीकार करते हुए दावा किया कि स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी प्रत्याशी कांति सिंह जीत हासिल करेंगी। भाजपा की ओर से लखनऊ उत्तर के विधायक डॉ. नीरज बोरा ने इंजीनियरिंग कॉलेज स्थित मतदान केंद्र पर मतदान किया। उन्होंने मतदाताओं से लोकतंत्र में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने और मताधिकार का इस्तेमाल करने की अपील की। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अपनी पत्नी नम्रता के साथ महानगर स्थित मतदान केंद्र पर कतार में लगकर वोट डाला। उधर, औरैया में आगरा खंड स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए सुबह आठ बजे से मतदान जारी रहा। जिलाधिकारी ब्रजेश कुमार और पुलिस अधीक्षक अभिषेक भारती ने मतदान केंद्रों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।