बीएसएफ ने राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर अमर प्रहरियों को दी भावभीनी श्रद्धांजलि

नई दिल्ली। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने गुरुवार को राष्ट्रीय पुलिस स्मारक, नई दिल्ली में राष्ट्र की सुरक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले अपने अमर प्रहरियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर बीएसएफ के महानिदेशक प्रवीण कुमार के नेतृत्व में अधिकारियों, अधीनस्थ अधिकारियों, जवानों और उनके परिजनों ने वीर बलिदानियों को नमन किया। बीएसएफ के आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल पर पोस्ट करते हुए इस समारोह की जानकारी दी गई। पोस्ट में बताया गया कि आज का दिन वीर बलिदानियों के त्याग और शौर्य को याद करने का दिन था। समारोह के दौरान महानिदेशक प्रवीण कुमार और बीएसएफ वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन (बावा) की अध्यक्ष ऋचा झा ने वीर बलिदानियों के आमंत्रित परिजनों से आत्मीय मुलाकात की। उन्होंने परिजनों का कुशल क्षेम जाना और उन्हें यह भरोसा दिलाया कि पूरा प्रहरी परिवार हर समय, हर कदम पर उनके साथ खड़ा है। बीएसएफ ने अपने संदेश में कहा, “वीर बलिदानियों के त्याग के पुण्य स्मरण के साथ उनके पराक्रम, शौर्य और कर्तव्यनिष्ठा को भी प्रेरणास्वरूप याद किया गया और किया जाता रहेगा।” समारोह को गरिमामय बनाने के लिए स्मृति परेड का आयोजन किया गया। परेड की टुकड़ी ने बैंड के साथ उपस्थित जनसमूह को वीर बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करने और उन्हें वीरोचित सम्मान देने में अगुवाई की। बीएसएफ के ब्रास और पाइप बैंड की हृदयस्पर्शी प्रस्तुतियों ने समारोह को और भी भावपूर्ण बना दिया। पूरा आयोजन ध्वजावतरण के साथ संपन्न हुआ। यह आयोजन राष्ट्र के वीर सपूतों के प्रति कृतज्ञता और सम्मान का प्रतीक रहा। राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर हर साल 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है, लेकिन बीएसएफ ने 22 अक्टूबर को अपने स्तर पर विशेष श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान उन सभी जवानों को याद किया गया, जिन्होंने सीमा पर देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।
एसआरएफटीआई विवाद: जॉन ब्रिटास ने केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और सुरेश गोपी को लिखा पत्र, तत्काल हस्तक्षेप की मांग

नई दिल्ली। राज्यसभा सदस्य जॉन ब्रिटास ने कोलकाता स्थित सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (एसआरएफटीआई) में चल रहे विवाद और छात्र आंदोलन को लेकर केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव तथा केंद्रीय राज्य मंत्री और एसआरएफटीआई के अध्यक्ष सुरेश गोपी को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। जॉन ब्रिटास ने कहा कि संस्थान में उत्पन्न संकट का जल्द समाधान किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे छात्रों की सुरक्षा, शैक्षणिक माहौल और संस्थान की लोकतांत्रिक एवं बहुलतावादी पहचान प्रभावित हो रही है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, विवाद की शुरुआत 27 सितंबर को हुई, जब अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत (एबीजीपी) के एक कार्यक्रम के दौरान टकराव की स्थिति पैदा हुई। आरोप है कि इस दौरान छात्रों के साथ अभद्र व्यवहार किया गया और कुछ छात्रों पर हमला भी हुआ। इसके बाद 4 अक्टूबर को स्थिति और तनावपूर्ण हो गई, जब हिंदू जागरण मंच के सदस्यों ने मार्च निकाला। आरोप है कि इस दौरान छात्रों की ओर पत्थर और बोतलें फेंकी गईं। ब्रिटास ने कहा कि इन घटनाओं ने न केवल छात्रों की सुरक्षा को खतरे में डाला, बल्कि देश के एक प्रतिष्ठित फिल्म संस्थान के लोकतांत्रिक और बहुलतावादी मूल्यों पर भी आघात पहुंचाया। सांसद ने 27 सितंबर और 4 अक्टूबर की घटनाओं की निंदा करते हुए प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में प्रशासन विफल रहा और बाद में विरोध कर रहे छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई कर स्थिति को और खराब कर दिया। उन्होंने बताया कि छह छात्रों को संस्थान से निष्कासित कर दिया गया है, जबकि अन्य छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। इसके विरोध में छात्र अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हुए हैं। जॉन ब्रिटास ने मांग की कि पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए। उन्होंने हमलों, छात्रों के साथ कथित डराने-धमकाने और दुर्व्यवहार की घटनाओं की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता बताई। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ कर्मचारियों द्वारा छात्रों को किस भाषा में बात करनी चाहिए, इसे लेकर निर्देश दिए जाने की खबरें सामने आई हैं, जो भाषाई सम्मान और शैक्षणिक संस्थानों की बहुलतावादी भावना पर गंभीर प्रश्न खड़े करती हैं। ब्रिटास ने छात्रों के खिलाफ की गई सभी अनुशासनात्मक कार्रवाइयों को तत्काल वापस लेने और छात्र संघ के प्रतिनिधियों के साथ संवाद शुरू करने की मांग की। साथ ही उन्होंने छात्रावास सुविधाओं, घायल छात्रों के लिए चिकित्सा सहायता और आंदोलन के कारण प्रभावित हुई कक्षाओं एवं प्रायोगिक कार्यों को दोबारा निर्धारित करने जैसे मुद्दों के समाधान पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सिनेमा शिक्षा और कलात्मक स्वतंत्रता के लिए समर्पित कोई भी संस्थान भय और दबाव का केंद्र नहीं बनना चाहिए। ब्रिटास ने परिसर में सुरक्षा, सम्मान और लोकतांत्रिक संवाद बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाने तथा शैक्षणिक गतिविधियों को सामान्य करने की अपील की।
युवा बड़े सपने देखें, अपनी सफलता को समाज और राष्ट्र की सेवा से जोड़ें: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

रायपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राजधानी रायपुर के सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में नुआखाई के अवसर पर आयोजित ‘सेवा सम्मान पर्व एवं युवा प्रबोधन’ कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि युवा बड़े सपने देखें, अपने विचारों को व्यापक बनाएं और अपनी सफलता को समाज एवं राष्ट्र की सेवा से जोड़ें। परिस्थितियां और चुनौतियां अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन प्रत्येक युवा के भीतर कुछ नया करने, बेहतर बनाने और अपनी पहचान स्थापित करने की ललक होनी चाहिए। जब युवाओं के व्यक्तिगत प्रयास सामूहिक और राष्ट्रीय लक्ष्यों से जुड़ेंगे, तभी देश की प्रगति का मार्ग और अधिक प्रशस्त होगा। इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित बड़ी संख्या में युवा, महिलाएं और समाज के विभिन्न वर्गों के लोग उपस्थित थे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नुआखाई की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि नुआखाई मिलन केवल एक सांस्कृतिक समारोह नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध परंपराओं, आपसी सद्भाव और सामाजिक एकता का उत्सव है। ऐसे आयोजन हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहने, अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने और भारतीय जीवन मूल्यों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि नुआखाई हमारी कृषि परंपरा को सहेजने, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और सामुदायिक भावना को मजबूत करने का पर्व है। अन्न केवल हमारी भूख मिटाने का साधन नहीं, बल्कि किसान भाई-बहनों के परिश्रम, धरती की उदारता और प्रकृति के अनमोल उपहार का प्रतीक है। अन्न का सम्मान करना, किसानों के योगदान को स्वीकार करना और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना हम सभी का सामूहिक दायित्व है। राष्ट्रपति मुर्मु ने युवाओं से कहा कि वे जीवन में सीखना कभी बंद न करें। पुस्तकें पढ़ें, प्रश्न पूछें, नई चीजों को समझें और अपने ज्ञान एवं कौशल को निरंतर विकसित करें। जीवन में लक्ष्य तय करें और चुनौतियों का साहसपूर्वक सामना करें। सफलता और असफलता जीवन का हिस्सा हैं। असफलता से निराश होने के बजाय उससे सीखकर स्वयं में सुधार करते हुए आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं को ज्ञान के साथ विनम्रता, महत्वाकांक्षा के साथ नैतिकता और सफलता के साथ सेवा-भाव को जोड़ना चाहिए। आपका ज्ञान किसी जरूरतमंद के काम आए, आपकी प्रतिभा किसी समस्या का समाधान करे और आपकी सफलता समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बने, तभी उपलब्धि की वास्तविक सार्थकता है। राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्र का निर्माण केवल बड़े निर्णयों से नहीं होता, बल्कि करोड़ों नागरिकों के छोटे-छोटे ईमानदार प्रयासों से होता है। प्रत्येक युवा जो भी कार्य करे, उसे ईमानदारी, निष्ठा और संवेदनशीलता के साथ करे। ये गुण विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में युवाओं के योगदान को और सशक्त बनाएंगे। मुर्मु ने कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए महिलाओं की समान भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। देश की आधी आबादी को आगे बढ़ाए बिना राष्ट्र पूरी क्षमता के साथ प्रगति नहीं कर सकता। उन्होंने महिलाओं से देश और समाज के कार्यों में बढ़-चढ़कर भागीदारी करने का आह्वान किया। राष्ट्रपति ने पुरुषों, विशेषकर युवाओं से कहा कि वे अपनी बहनों और बेटियों को ऐसा वातावरण और अवसर प्रदान करें, जिसमें वे बिना किसी बाधा के अपने सपनों को साकार कर सकें। महिलाओं के प्रति सम्मान केवल शब्दों में नहीं, बल्कि हमारी सोच, व्यवहार और दैनिक आचरण में भी दिखाई देना चाहिए। राष्ट्रपति मुर्मु ने छत्तीसगढ़ में हो रहे सकारात्मक बदलाव का उल्लेख करते हुए प्रसन्नता व्यक्त की कि केंद्र और राज्य सरकारों के प्रयासों तथा युवाओं की दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर प्रदेश के युवा नक्सलवाद के भटकाव से मुक्त होकर मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जहां कभी आतंक का अंधेरा था, वहां आज विकास का उजियारा फैल रहा है। इस परिवर्तन से न केवल युवाओं और उनके परिवारों का कल्याण हो रहा है, बल्कि छत्तीसगढ़ और पूरे भारत के विकास को भी गति मिल रही है। राज्यपाल रमेन डेका ने प्रदेशवासियों को नुआखाई जुहार की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व केवल नई फसल के आगमन की खुशी मनाने का अवसर नहीं, बल्कि धरती माता के प्रति कृतज्ञता, किसानों के परिश्रम के सम्मान और मिल-जुलकर खुशियां बांटने का उत्सव है। यह हमारी समृद्ध कृषि संस्कृति, सामाजिक एकता और आपसी सहयोग की परंपरा को मजबूत करता है। राज्यपाल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की उपस्थिति को प्रदेश के लिए सौभाग्य और प्रेरणा का अवसर बताते हुए कहा कि उनका संघर्ष, सादगी, समर्पण और सेवाभाव हम सभी के लिए प्रेरक है। उन्होंने युवाओं से सेवा को अपने जीवन का स्वभाव बनाने और नशे एवं भटकाव से दूर रहकर ज्ञान, कौशल और नवाचार के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। राज्यपाल डेका ने कहा कि स्वस्थ, शिक्षित, संस्कारित और सेवाभावी युवा ही सशक्त समाज और विकसित राष्ट्र की मजबूत आधारशिला हैं। उन्होंने रक्तदाताओं, विशेष रूप से महिला रक्तदाताओं की सराहना करते हुए कहा कि रक्तदान मानवता की महान सेवाओं में से एक है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ जनता की ओर से हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए कहा कि राष्ट्रपति मुर्मु का छत्तीसगढ़ से गहरा आत्मीय संबंध है। प्रदेशवासियों के मन में उनके प्रति अपार आदर और आत्मीयता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नुआखाई हमारी समृद्ध कृषि संस्कृति, नई फसल के स्वागत और धरती माता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच सदियों पुराने सामाजिक एवं सांस्कृतिक संबंध हैं। ओड़िया समाज ने अपनी मेहनत, सादगी और सेवाभाव से छत्तीसगढ़ के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। नुआखाई के पावन अवसर पर सेवा सम्मान और युवा प्रबोधन का आयोजन हमारी सांस्कृतिक परंपराओं को समाज सेवा और युवा सशक्तीकरण से जोड़ने की महत्वपूर्ण पहल है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में युवाओं की निर्णायक भूमिका होगी। राज्य सरकार विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में युवा शक्ति को केंद्र में रखकर शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास, नवाचार और उद्यमिता के अवसरों का विस्तार कर रही है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा के विस्तार के लिए गीदम, कुनकुरी, जांजगीर-चांपा, मनेन्द्रगढ़ और कवर्धा में पांच नए मेडिकल
वैश्विक व्यवस्था उभरती चुनौतियों के अनुरूप खुद को नहीं ढाल पाई: पीएम मोदी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि मौजूदा वैश्विक व्यवस्था और उसके संस्थान तेजी से बदलती दुनिया के साथ कदमताल करने में विफल रहे हैं। इसके कारण आज की वास्तविकताओं और पुराने पड़ चुके निर्णय लेने के तंत्र के बीच अंतर लगातार बढ़ता जा रहा है। नई दिल्ली में एनडीटीवी वर्ल्ड समिट को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया इस समय बदलाव के दौर से गुजर रही है और एक ऐसी स्थिति में है, जिसे ‘व्यवस्थाओं के बीच की दुनिया’ कहा जा सकता है। प्रधानमंत्री ने इस संदर्भ में दो प्रमुख सवाल उठाए। पहला, वैश्विक व्यवस्था में बदलाव क्यों हो रहा है और पुरानी व्यवस्था आज की चुनौतियों का सामना करने में क्यों सक्षम नहीं है? दूसरा, बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत की क्या भूमिका होनी चाहिए? वैश्विक व्यवस्था में बदलाव के कारणों पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यह परिवर्तन स्वाभाविक होने के साथ-साथ अपरिहार्य भी है। द्वितीय विश्व युद्ध से मिले सबक का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि केवल ताकत और स्वार्थ पर आधारित वैश्विक व्यवस्था लंबे समय तक कायम नहीं रह सकती। संवाद, सहयोग और विवादों का शांतिपूर्ण समाधान बेहद जरूरी हैं। इन्हीं सिद्धांतों के आधार पर संयुक्त राष्ट्र की स्थापना की गई थी। हालांकि, उन्होंने कहा कि इसके बाद से दुनिया में व्यापक बदलाव हुए हैं। लोगों की आकांक्षाएं बदली हैं, नई आर्थिक शक्तियां और ताकतें उभरी हैं तथा तकनीक ने समाज, अर्थव्यवस्था और शक्ति की प्रकृति को पूरी तरह बदल दिया है। जिन देशों को मूल वैश्विक व्यवस्था तैयार करते समय जगह नहीं मिली थी, वे अब वैश्विक मंच पर अपना उचित स्थान मांग रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “सवाल यह है कि क्या वैश्विक व्यवस्था इन बदलावों के साथ कदमताल कर पाई है? इसका जवाब है- नहीं।” उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की ऐतिहासिक भूमिका को स्वीकार करते हुए कहा कि समकालीन चुनौतियों से निपटने में उनकी सीमाएं अब स्पष्ट रूप से सामने आ गई हैं। पीएम मोदी ने कहा कि नई शक्तियां उभर रही हैं, नई आवाजें व्यवस्था में अपनी भागीदारी की मांग कर रही हैं और नई समस्याओं के लिए नए समाधानों की जरूरत है। जब दुनिया की वास्तविकताएं बदल जाती हैं, लेकिन निर्णय लेने के तंत्र स्थिर बने रहते हैं, तो बदलती वैश्विक परिस्थितियों और मौजूदा व्यवस्थाओं के बीच दूरी बढ़ने लगती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज दुनिया ठीक इसी स्थिति का सामना कर रही है। उनकी इन टिप्पणियों में वैश्विक संस्थानों में सुधार की भारत की लंबे समय से चली आ रही मांग भी झलकी। भारत का जोर है कि इन संस्थानों को 21वीं सदी की जरूरतों के अनुरूप अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण, समावेशी और जवाबदेह बनाया जाए, ताकि वे बदलती वैश्विक चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकें।
टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामला: 26 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में 4 आरोपी

मुंबई। अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुई फायरिंग के मामले में गिरफ्तार चारों आरोपियों को अदालत में गुरुवार को पेश किया गया, जहां अदालत ने सभी आरोपियों को 26 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। इस मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की एनडीआर यूनिट ने 20 अक्टूबर को चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कुणाल (21) और सुमित (19) निवासी सोनीपत (हरियाणा), राधा (23) निवासी सीतापुर (उत्तर प्रदेश) और बबीता (23) निवासी आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश) के रूप में हुई है। रिपोर्टों के अनुसार, घटना के बाद आरोपी गुजरात के सूरत भाग गए थे। वहां से वे जयपुर जाने वाली ट्रेन में सवार हुए। बताया जा रहा है कि उनकी योजना पहले नई दिल्ली पहुंचने और फिर वहां से नेपाल फरार होने की थी। हालांकि, दिल्ली पहुंचने से पहले ही राजस्थान के कोटा में मुंबई पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, हमले से पहले आरोपियों ने गोली चलाने का अभ्यास भी किया था। जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने मुंबई के अंधेरी इलाके में स्थित एक होटल के कमरे में हथियार की जांच के दौरान फायरिंग की थी। हथियार सही तरीके से काम कर रहा है या नहीं, यह परखने के लिए उन्होंने उसका परीक्षण किया था। पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को उस जगह के बारे में भी जानकारी दी, जहां उन्होंने हथियार का परीक्षण किया था। बताया जा रहा है कि अभ्यास के दौरान दोनों मुख्य आरोपियों ने सफलतापूर्वक गोली चलाई थी। जांच में यह भी सामने आया है कि अंधेरी स्थित होटल के कमरे में हथियार की जांच करते समय गलती से एक गोली चल गई थी। सूत्रों के मुताबिक, यह गोली कमरे में रखे बिस्तर पर लगी थी। हालांकि, इस घटना से होटल के कर्मचारियों या वहां मौजूद अन्य लोगों को कोई शक नहीं हुआ। पुलिस मामले की आगे जांच कर रही है और आरोपियों से पूछताछ जारी है।
वायु प्रदूषण रोकने के लिए सीएक्यूएम ने की पंजाब और हरियाणा में पराली प्रबंधन उपायों की समीक्षा

चंडीगढ़। दिल्ली एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने गुरुवार को पंजाब और हरियाणा सरकारों द्वारा पराली जलाने की रोकथाम के लिए किए जा रहे इंतजामों, जिला स्तर की तैयारियों और निगरानी व्यवस्था की समीक्षा की। आधिकारिक बयान के अनुसार, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा ने दोनों राज्यों के अधिकारियों के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। इन बैठकों में धान की पराली जलाने की घटनाओं को रोकने और वायु प्रदूषण के अन्य प्रमुख कारणों को नियंत्रित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों की समीक्षा की गई। उन्होंने जमीनी स्तर पर तेजी से कार्रवाई करने पर जोर दिया। पंजाब के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में आयोग की टीम ने जिला और किसान स्तर पर उपलब्ध क्रॉप रेसिड्यू मैनेजमेंट (सीआरएम) मशीनों की उपलब्धता, तैनाती और प्रभावी उपयोग की समीक्षा की। इसके अलावा मशीनों के उपयोग में मौजूद कमियों, पराली के संग्रहण, परिवहन और उपयोग की व्यवस्था का भी आकलन किया गया। बैठक में इन-सीटू और एक्स-सीटू पराली प्रबंधन उपायों पर भी चर्चा हुई। आयोग ने कहा कि फसल अवशेष प्रबंधन की आपूर्ति शृंखला को और मजबूत करने तथा कटाई के चरम मौसम में उपलब्ध मशीनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने की जरूरत है। बैठक में सैटेलाइट आधारित फायर अलर्ट की मदद से जली हुई फसल क्षेत्र की पुष्टि, ड्रोन की तैनाती और पराली जलाने की घटनाओं की निगरानी के लिए कम लागत वाले सेंसरों के इस्तेमाल की भी समीक्षा की गई। वहीं, हरियाणा के अधिकारियों के साथ चर्चा के दौरान केवल पराली जलाने ही नहीं, बल्कि वायु प्रदूषण के अन्य स्रोतों पर भी विशेष ध्यान दिया गया। इसमें वाहनों से होने वाला प्रदूषण, सड़कों और खुले क्षेत्रों की धूल, निर्माण एवं विध्वंस (सीएंडडी) गतिविधियों से निकलने वाली धूल, औद्योगिक प्रदूषण और अन्य संबंधित क्षेत्रों के उपाय शामिल रहे। हरियाणा में भी राज्य कार्ययोजना के तहत पराली प्रबंधन, सीआरएम मशीनों की तैनाती और उपयोग, फसल अवशेष आपूर्ति शृंखला, जले हुए क्षेत्रों की पुष्टि और ड्रोन तथा सेंसर आधारित निगरानी व्यवस्था की समीक्षा की गई। आयोग ने कहा कि पराली प्रबंधन को केवल पराली जलाने से रोकने के उपाय के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि इसे नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने के अवसर के रूप में अपनाना चाहिए। आयोग का मानना है कि पराली का संसाधन के रूप में अधिक उपयोग कर एक मजबूत औद्योगिक तंत्र विकसित किया जा सकता है। सीएक्यूएम ने दोनों राज्यों के अधिकारियों और जिला प्रशासन को जमीनी स्तर पर तत्काल और प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। आयोग ने चेतावनी भी दी कि यदि किसी प्रकार की लापरवाही के कारण पराली जलाने की घटनाओं में वृद्धि होती है, तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा।
अजमेर में रोबोटिक तकनीक से जटिल हायटस हर्निया का सफल ऑपरेशन, डॉ. शिव कुमार बुनकर ने रचा नया कीर्तिमान

जयपुर। राजस्थान में अजमेर के चिकित्सा क्षेत्र में आधुनिक तकनीक की मदद से एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं चिकित्सालय, अजमेर में लेप्रोस्कोपिक एवं रोबोटिक सर्जन डॉ. शिव कुमार बुनकर ने रोबोटिक तकनीक की सहायता से जटिल हायटस हर्निया का सफल ऑपरेशन किया। इस प्रक्रिया में आधुनिक रोबोटिक प्रणाली के माध्यम से सर्जरी को अंजाम दिया गया, जिससे अजमेर में उन्नत चिकित्सा सुविधाओं को नई दिशा मिली है। हायटस हर्निया से पीड़ित 21 वर्षीय मरीज पिछले दो महीनों से अपच, प्रतिवाह और छाती में जलन जैसी समस्याओं से परेशान था। मरीज की जांच और चिकित्सकीय परामर्श के बाद ऑपरेशन का निर्णय लिया गया। डॉ. श्याम भट्ट के मार्गदर्शन में उपचार की योजना तैयार की गई और रोबोटिक तकनीक की मदद से रोबोटिक निसेन फंडोप्लीकेशन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की गई। इस प्रक्रिया में पेट के ऊपरी हिस्से को भोजन नली के निचले भाग के चारों ओर लपेटकर एक वाल्व जैसी संरचना बनाई जाती है। इससे पेट का अम्ल भोजन नली में वापस आने की समस्या को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। आवश्यकता के अनुसार हायटस की खराबी को भी ठीक किया जाता है। ऑपरेशन के दौरान प्रिंसिपल डॉ. अनिल सामरिया की देखरेख में मरीज की प्री-ऑपरेटिव और पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल की गई। इस दौरान डॉ. अरविंद खरे सहित चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और एनेस्थीसिया टीम ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ. बुनकर के अनुसार, रोबोटिक तकनीक से जटिल सर्जरी के दौरान बेहतर दृश्यता, अधिक सटीकता और सूक्ष्म गतिविधियों पर बेहतर नियंत्रण मिलता है। इससे चयनित मरीजों में उपचार के परिणाम बेहतर करने में सहायता मिल सकती है। रोबोटिक तकनीक से जटिल शल्य प्रक्रियाओं को सफलतापूर्वक अंजाम देना शहर में उन्नत चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह उपलब्धि स्थानीय स्तर पर आधुनिक उपचार उपलब्ध कराने के प्रयासों को भी मजबूती देती है। हायटस हर्निया एक ऐसी स्थिति है जिसमें पेट का ऊपरी हिस्सा डायफ्राम में मौजूद एक छेद से ऊपर खिसककर छाती की ओर आ जाता है। है। सीने में जलन, खट्टी डकारें आना, भोजन निगलने में परेशानी, सीने या पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, बार-बार गैस या पेट फूलना इसके सामान्य लक्षण हैं।
‘सत्य सनातन स्वाभिमान पदयात्रा’ के दौरान दिग्विजय सिंह ने सुनीं किसानों की समस्याएं

भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने गुरुवार को सड़क किनारे आलू की बुवाई कर रहे किसानों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने खाद की कमी, बिजली की समस्याओं और अपनी उपज के कम दाम मिलने को लेकर किसानों की शिकायतें सुनीं। यह बातचीत उज्जैन से अयोध्या तक उनकी ‘सत्य सनातन स्वाभिमान पदयात्रा’ के तीसरे दिन हुई। किसानों ने दिग्विजय सिंह को बताया कि बुवाई के मौसम में समय पर खाद उपलब्ध नहीं हो पाई और टोकन-आधारित वितरण प्रणाली से उन्हें काफी परेशानी हो रही है। उन्होंने यह भी शिकायत की कि बिजली से जुड़ी समस्याओं के कारण खेती-बाड़ी के कामों पर बुरा असर पड़ रहा है। आलू की पिछली फसल का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि बाजार में कम दाम मिलने की वजह से वे अपनी उत्पादन लागत भी नहीं निकाल पाए। उन्होंने कहा कि अपनी उपज को कोल्ड स्टोरेज में रखने के बाद भी वे स्टोरेज का खर्च तक नहीं निकाल सके। उन्होंने दिग्विजय सिंह से आग्रह किया कि वे किसान समुदाय की इन चिंताओं को उठाएं। बयान के अनुसार, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर किया, जिसमें उन्होंने ‘धरती माता’ और ‘माता सीता’ के सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए इसे किसानों की गरिमा से जोड़ा। दिग्विजय सिंह ने कहा, “यह धरती केवल भोजन का स्रोत ही नहीं, बल्कि आस्था और संस्कृति की जननी भी है। किसान इस पवित्र भूमि का सेवक और अन्नदाता है।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मिट्टी का सम्मान और किसानों की गरिमा सर्वोपरि होनी चाहिए। सिंह की पदयात्रा 20 अक्टूबर को विजयादशमी के दिन उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना करने के बाद शुरू हुई। लगभग 930 किलोमीटर की यह यात्रा अयोध्या में राम मंदिर में रामलला के दर्शन के साथ संपन्न होगी। यह यात्रा सनातन परंपराओं से जुड़े धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों पर केंद्रित है। बयान में कहा गया है कि इस यात्रा में साधु-संत और आम लोग भी शामिल हो रहे हैं। साथ ही दिग्विजय सिंह रास्ते में स्थानीय निवासियों से मिल रहे हैं और समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों के साथ बातचीत कर रहे हैं। आलू उत्पादक किसानों के साथ हुई इस मुलाकात ने यात्रा के दौरान खेती से जुड़े संसाधनों, बिजली की आपूर्ति और फसलों के दाम को लेकर किसानों की चिंताओं को सामने ला दिया है।
वित्त मंत्री सीतारमण ने चिली के प्रतिनिधिमंडल से की मुलाकात, द्विपक्षीय व्यापार को मजबूत करने पर हुई चर्चा

नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को चिली के पूर्व राष्ट्रपति और विशेष मिशन पर राजदूत एडुआर्डो फ्रेई, चिली के प्रतिनिधिमंडल और लैटिन अमेरिका और कैरिबियन विकास बैंक सीएएफ के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत की। इस दौरान दोनों द्विपक्षीय व्यापार को मजबूत करने और नए अवसर तलाशने पर चर्चा हुई। वित्त मंत्रालय की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर की गई एक पोस्ट में कहा गया कि केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने चिली के पूर्व राष्ट्रपति और विशेष मिशन पर राजदूत एडुआर्डो फ्रेई से मुलाकात की। इस दौरान उनके साथ चिली और लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियन विकास बैंक सीएएफ का एक प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद था। वित्त मंत्री सीतारमण ने चिली में हाल ही में आई बाढ़ को लेकर फ्रे के समक्ष चिंता भी जताई। पोस्ट में आगे कहा गया कि चर्चाओं का मुख्य केंद्र द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूत करना था, जिसमें ‘भारत-चिली व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते’ (सीईपीए) को जल्द पूरा करना और सीएफ के साथ सहयोग के अन्य रास्ते तलाशना शामिल था। वहीं, सीएएफ के सीआईआई और एक्जिम बैंक के साथ पहले से चल रहे जुड़ाव को देखते हुए, केंद्रीय वित्त मंत्री ने सीएएफ को उन परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण के अवसर तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया, जिनमें भारतीय कंपनियां शामिल हैं खासकर महत्वपूर्ण खनिजों और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्रों में। इससे पहले केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को नई दिल्ली में स्कॉटलैंड के फर्स्ट मिनिस्टर जॉन स्विनी से मुलाकात की। मंत्रालय ने बताया कि दोनों नेताओं ने आपसी हित के विषयों पर चर्चा की। साथ ही, वित्तीय सेवा क्षेत्र, नवीकरणीय ऊर्जा, उच्च शिक्षण संस्थानों की स्थापना और द्विपक्षीय पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सहयोग मजबूत करने के अवसरों पर भी बातचीत की।
भविष्य में और भी ऊंचाइयों को छुएं,’ पीएम मोदी ने एशियन पैरा गेम्स के पदक विजेताओं को सराहा

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को ‘एशियन पैरा गेम्स 2026’ में पदक जीतने वाले भारतीय एथलीट्स को बधाई देते हुए उनके समर्पण की सराहना की। भारत कुल 88 मेडल (21 गोल्ड, 26 सिल्वर और 41 ब्रॉन्ज) के साथ मेडल टैली में पांचवें स्थान पर है। पीएम मोदी ने अंजानाबेन को महिलाओं की 400 मीटर टी47 स्पर्धा में गोल्ड जीतने पर बधाई देते हुए कहा, “एशियन पैरा गेम्स 2026 में महिलाओं की 400 मीटर टी47 स्पर्धा में शानदार टाइमिंग के साथ स्वर्ण पदक जीतने पर अंजानाबेन को बधाई। उनकी बेहतरीन गति, फोकस और दृढ़ संकल्प ने पूरे देश को गौरवान्वित किया है। कामना है कि वह भविष्य में भी इसी तरह उत्कृष्ट प्रदर्शन करती रहें और और भी बड़ी सफलताएं हासिल करें।” पुरुषों की 400 मीटर टी47 स्पर्धा में गोल्ड मेडलिस्ट दिलीप की तारीफ में पीएम मोदी ने कहा, “एशियन पैरा गेम्स 2026 में पुरुषों की 400 मीटर टी47 स्पर्धा में शानदार टाइमिंग के साथ स्वर्ण पदक जीतने पर दिलीप को हार्दिक बधाई। अपने प्रदर्शन में सुधार करते हुए अपने खिताब को सफलतापूर्वक बचाए रखना एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। उनकी गति, दृढ़ संकल्प और समर्पण वास्तव में सराहनीय हैं। भारत को उन पर गर्व है।” उन्होंने लॉन्ग जंपर सोलैराज धर्मराज की सराहना करते हुए कहा, “सोलैराज धर्मराज ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में पुरुषों की लॉन्ग जंप टी44/टी62/टी64 स्पर्धा में असाधारण प्रदर्शन करते हुए एक शानदार छलांग के साथ स्वर्ण पदक जीता है। अपने ही एशियाई रिकॉर्ड को तोड़कर उन्होंने एक बार फिर अपने बेहतरीन कौशल और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया है। इस शानदार जीत के लिए सोलैराज को बधाई। कामना है कि वह भविष्य में और भी ऊंचाइयों को छुएं।” पैरा आर्चर स्वाति चौधरी की सराहना करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “भारतीय पैरा आर्चरी (तीरंदाजी) के लिए एक बहुत ही खास उपलब्धि। स्वाति चौधरी ने एशियन पैरा गेम्स में महिलाओं की डब्ल्यू1 आर्चरी स्पर्धा में भारत के लिए पहला पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। अपने पहले ही टूर्नामेंट में उन्होंने रजत पदक हासिल किया है। उनका दृढ़ संकल्प वास्तव में सराहनीय है। कामना है कि वह आगे भी देश को गौरवान्वित करती रहें।” उन्होंने डिस्कस थ्रोअर सुवर्णा राज की सराहना करते हुए कहा, “एशियन पैरा गेम्स 2026 में महिलाओं की डिस्कस थ्रो एफ54 स्पर्धा में शानदार जीत के लिए सुवर्णा राज को बधाई। उनकी यह सफलता उनकी कड़ी मेहनत, लगन और खेल में उत्कृष्टता के प्रति उनके अटूट समर्पण का परिणाम है। भारत उनकी इस शानदार जीत का जश्न मना रहा है। उनके भविष्य के प्रयासों के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं।” बैडमिंटन स्पर्धा में कांस्य पदक जीतने पर पीएम ने प्रमोद भगत और मनीषा रामदास की जोड़ी की तारीफ में कहा, “प्रमोद भगत और मनीषा रामदास का सराहनीय प्रयास। इस प्रतिभाशाली जोड़ी ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में मिक्स्ड डबल्स एसएल3-एसयू5 पैरा बैडमिंटन स्पर्धा में कांस्य पदक जीता है। पूरे टूर्नामेंट के दौरान उनकी टीम वर्क, दृढ़ संकल्प और प्रतिस्पर्धा की भावना साफ तौर पर देखने को मिली। दोनों खिलाड़ियों को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई और उनके भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं।” बैडमिंटन इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल विजेता नित्या और कृष्णा की तारीफ में पीएम मोदी ने कहा, “एशियन पैरा गेम्स 2026 में मिक्स्ड डबल्स एसएच6 पैरा बैडमिंटन इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीतने पर नित्या श्री सुमति सिवन और कृष्णा नागर को बधाई। उनके समर्पण ने भारतीय पैरा बैडमिंटन के लिए एक और गर्व का पल दिया है। आगे की प्रतियोगिताओं में भी उन्हें लगातार सफलता मिले, यही कामना है।” उन्होंने पैरा बैडमिंटन में सुहास एल. यथिराज के ब्रॉन्ज जीतने पर कहा, “सुहास एल. यथिराज ने अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर एक बार फिर अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने एशियन पैरा गेम्स 2026 में मेन्स सिंगल्स एसएल4 पैरा बैडमिंटन इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीता है। उनकी निरंतरता, लगन और खेल के प्रति उनका जुनून वाकई तारीफ के काबिल है। इस उपलब्धि के लिए सुहास को बधाई। वे आगे भी ऐसे ही बेहतरीन प्रदर्शन करते रहें और दूसरों को प्रेरित करते रहें।” भाविना पटेल और शुभम वाधवा को मिक्स्ड डबल्स क्लास एक्सडी7 इवेंट में ब्रॉन्ज जीतने पर बधाई देते हुए पीएम ने कहा, “भारतीय पैरा टेबल टेनिस के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि। भाविना पटेल और शुभम वाधवा ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में मिक्स्ड डबल्स क्लास एक्सडी7 इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीता है। इन खेलों में मिक्स्ड डबल्स इवेंट में भारत का यह पहला मेडल है। उनकी टीम वर्क, समर्पण और दृढ़ संकल्प ने देश का मान बढ़ाया है। इस शानदार उपलब्धि के लिए दोनों खिलाड़ियों को बधाई। उनके भविष्य के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं।” शीतल देवी ने एक ही दिन भारत के लिए दो गोल्ड जीते। पीएम मोदी ने कहा, “एशियन पैरा गेम्स 2026 में पैरा कंपाउंड मिक्स्ड टीम इवेंट में गोल्ड मेडल जीतने पर शीतल देवी और टोमन कुमार को बधाई। उनकी यह शानदार जीत उनके कौशल, संयम और बेहतरीन टीम वर्क का बेहतरीन उदाहरण है। उनकी इस सफलता से पूरा भारत खुश है।” एक अन्य पोस्ट में पीएम ने कहा, “एशियन पैरा गेम्स 2026 में विमेंस इंडिविजुअल पैरा कंपाउंड आर्चरी (तीरंदाजी) इवेंट में शीतल देवी का शानदार प्रदर्शन। उन्होंने सफलतापूर्वक अपना खिताब बरकरार रखा है और लगातार दूसरी बार गोल्ड मेडल जीता है। उनकी सटीकता, निरंतरता और खेल में उत्कृष्टता के प्रति उनका समर्पण वाकई काबिल-ए-तारीफ है। उनके भविष्य के प्रयासों के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं।” महिलाओं की 400 मीटर टी12 स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतने पर पीएम ने तेजलबेन दामोर की तारीफ में कहा, “तेजलबेन दामोर का एक और शानदार प्रदर्शन। उन्होंने एशियन पैरा गेम्स 2026 में महिलाओं की 400 मीटर टी12 स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीता है। उनकी गति, दृढ़ संकल्प और बेहतरीन प्रदर्शन के प्रति उनका समर्पण वाकई तारीफ के काबिल है। इस उपलब्धि के लिए तेजलबेन को बधाई।