केरल: तिरुवनंतपुरम अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे ने उड़ान सेवाओं को बंद रहने की एडवाइजरी जारी की, रनवे से गुजरेगा शोभायात्रा

तिरुवनंतपुरम। केरल के तिरुवनंतपुरम अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे की ओर से मंगलवार, 20 अक्टूबर के लिए एडवाइजरी जारी की गई है। श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर की ‘अल्पासी अराट्टू’ शोभायात्रा हवाई अड्डे के रनवे से होकर गुजरेगी। शोभायात्रा में कोई रुकावट न आए, इसके लिए शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक उड़ान सेवाओं को बंद किया जाएगा। तिरुवनंतपुरम अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे की ओर से रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर जानकारी दी गई, “20 अक्टूबर 2026 को, तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे पर 16 बजे से 21 बजे तक उड़ान सेवाएं बंद रहेंगी। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर की ‘अल्पासी अराट्टू’ शोभायात्रा हवाई अड्डे के रनवे से होकर बिना किसी रुकावट के गुजर सके। हवाई अड्डे की ओर से आगे लिखा गया, “यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी संबंधित एयरलाइनों से अपनी उड़ानों का समय पता कर लें और उसी के अनुसार अपनी यात्रा की योजना बनाएं।” बता दें कि 20 अक्टूबर को अल्पासी अराट्टू शोभायात्रा निकाली जाएगी, जिसकी तैयारी की जा रही है। यह श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का एक बेहद भव्य, सदियों पुराना और अनूठा सांस्कृतिक-धार्मिक उत्सव है। इस दिन भव्य अराट्टू (पवित्र स्नान) अनुष्ठान 10 दिनों तक चलने वाले वार्षिक ‘अल्पासी महोत्सव’ का समापन समारोह होगा। 11 अक्टूबर को उत्सव की शुरुआत हुई थी। 19 अक्टूबर को पल्लीवेट्टा (शाही शिकार अनुष्ठान) किया जाएगा और 20 अक्टूबर को अल्पासी अराट्टू (अंतिम दिन) का उत्सव मनाया जाएगा। अल्पासी अराट्टू शोभायात्रा के दौरान तिरुवनंतपुरम अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को लगभग 5 घंटे के लिए पूरी तरह बंद कर दिया जाता है और उड़ानों का समय बदला जाता है। भगवान पद्मनाभस्वामी की यह शोभायात्रा हवाई अड्डे के रनवे के बीच से होकर गुजरती है। यह परंपरा सन 1932 में हवाई अड्डा बनने से भी पहले से चली आ रही है, इसलिए परंपरा का सम्मान करते हुए आज भी हर साल इस मार्ग को शोभायात्रा के लिए सुरक्षित रखा जाता है। ‘अराट्टू’ का भावार्थ ‘पवित्र स्नान’ होता है। शोभायात्रा के दौरान मंदिर के मुख्य विग्रहों (भगवान श्री पद्मनाभस्वामी, भगवान नरसिंह और भगवान श्री कृष्ण की मूर्तियों) को बेहद आकर्षक गरुड़ वाहनों पर सजाकर मंदिर से लगभग 5 किलोमीटर दूर शंघमुघम समुद्र तट ले जाया जाता है। वहां शाम के समय मंदिर के मुख्य पुजारी के नेतृत्व मंत्रोच्चार के बीच भगवान की मूर्तियों को अरब सागर के पवित्र जल में तीन बार स्नान (डुबकी) कराया जाता है। यह उत्सव बुराई पर अच्छाई की जीत और आध्यात्मिक शुद्धि के प्रतीक के तौर पर मनाया जाता है।

कुरुक्षेत्र में कश्मीरी स्लीपर बस पर हमले से भड़के ट्रांसपोर्टर, बोले-यहां होता तो हम जेल में होते

कुपवाड़ा। हरियाणा के कुरुक्षेत्र में कश्मीर जा रही एक स्लीपर बस पर हुए हमले को लेकर घाटी के ट्रांसपोर्टरों में भारी आक्रोश है। कश्मीर ट्रांसपोर्टर्स फेडरेशन के अध्यक्ष मीर मोहम्मद शफी ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और सरकार से निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, पीड़ितों को मुआवजा और ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। मीर मोहम्मद शफी ने कहा कि यह हमला सिर्फ एक बस पर नहीं बल्कि कश्मीर के पूरे ट्रांसपोर्ट समुदाय पर हमला है। इस मामले में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का किया गया सोशल मीडिया पोस्ट काफी नहीं है बल्कि इस मामले में ठोस और जमीनी कार्रवाई होनी चाहिए। फेडरेशन अध्यक्ष मीर मोहम्मद शफी ने आईएएनएस से बात करते हुए बताया कि जैसे ही घटना की खबर सामने आई, उन्होंने कश्मीर बस और स्लीपर बस एसोसिएशन के अध्यक्ष इमरान बक्शी से बात की। वह काफी परेशान थे। इस घटना के बाद वह रात भर सो नहीं पाए। उन्होंने लगातार कॉल किए। हमारी पूरी टीम परेशान थी। शफी ने हरियाणा सरकार और केंद्र सरकार से सवाल पूछते हुए कहा, “क्या कश्मीरी अब कहीं काम नहीं कर सकता? क्या कश्मीरी अब बाहर गाड़ी लेकर नहीं जा सकता? हम पूछना चाहते हैं कि आखिर जम्मू-कश्मीर की गाड़ियों को ही क्यों टारगेट किया जा रहा है? इसके पीछे क्या कारण है?” मीर शफी ने दोहरे मापदंड पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “अगर ये घटना कश्मीर में हुई होती, तो हम लोग जेल में होते। हम पर पीएसए लगा दिया गया होता लेकिन वहां जिस व्यक्ति ने पिस्टल लहराई, लोगों को लाया और बस पर हमला किया, उसके खिलाफ अभी तक कोई एफआईआर दर्ज होने की सूचना भी हमें नहीं दी गई है।” उन्होंने कहा, “हमने भाईचारा हमेशा निभाया है। जब यहां हालात खराब थे, तब भी बाहर से ड्राइवर गाड़ी लेकर यहां आते थे लेकिन हमने आज तक एक भी गाड़ी पर खरोंच तक नहीं आने दी। हमारे साथ क्या हुआ, सबने देखा। अगर इस तरह की घटनाएं नहीं रुकीं, तो इसका असर भाईचारे पर पड़ सकता है। आज अगर हम इस पर चुप बैठेंगे तो कल किसी और के साथ होगा। अगर कल हमने यहां गाड़ियां रोकनी शुरू कर दीं तो फिर भाईचारा भी खतरे में पड़ जाएगा लेकिन हम भाईचारे को खतरे में नहीं डालना चाहते।” ट्रांसपोर्टर्स फेडरेशन ने हरियाणा सरकार, केंद्र सरकार, गृह मंत्री और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल से इस मामले में दखल देने की अपील की है। मीर शफी ने कहा, “हमें इंसाफ दिलाया जाए। आखिर यह हुआ क्या, कैसे हुआ, क्यों हुआ, यह सब बताया जाए। अगर कार्रवाई नहीं हुई तो इसका जो भी नतीजा होगा, उसकी जिम्मेदार सरकार होगी।” उन्होंने कहा, “अगर रास्ते में पत्थर मारे जाएंगे तो पैसेंजर हमारी गाड़ियों में कैसे बैठेगा? उसको डर लगेगा। कौन बैठेगा हमारी बस में? हमारा रोजगार इसी पर टिका है।” मीर मोहम्मद शफी ने सभी ट्रांसपोर्ट संगठनों से एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि चाहे वह दिल्ली के ट्रांसपोर्टर हों, हरियाणा के हों या जम्मू के, सभी को इस मुद्दे पर आगे आना चाहिए। उन्होंने मांग की कि इस हमले में जो लोग जख्मी हुए हैं, उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए और बस को हुए नुकसान की भरपाई की जाए।

यूपी में किसानों के बच्चों पर सरकार का फोकस, छात्रवृत्ति की सीटें दोगुनी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में किसानों और खेतिहर मजदूरों के मेधावी बच्चों को उच्च कृषि शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना का दायरा बढ़ा दिया गया है। राज्य सरकार ने योजना के तहत छात्रवृत्ति की निर्धारित सीटें दोगुनी करने के साथ ही मासिक सहायता राशि भी तीन हजार से बढ़ाकर पांच हजार रुपये कर दी है। इसके बाद पात्र विद्यार्थियों को अब सालाना 36 हजार रुपये के बजाय 60 हजार रुपये की छात्रवृत्ति मिलेगी। राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद की इस योजना के तहत अब प्रत्येक कृषि विश्वविद्यालय एवं कृषि संस्थान में 45 के स्थान पर 90 विद्यार्थियों तथा प्रत्येक कृषि महाविद्यालय में 15 के स्थान पर 30 विद्यार्थियों को मेरिट के आधार पर छात्रवृत्ति दी जाएगी। सीटों की संख्या बढ़ने से आर्थिक रूप से कमजोर किसान परिवारों के अधिक मेधावी विद्यार्थियों को कृषि शिक्षा हासिल करने में मदद मिलने की उम्मीद है। मंडी परिषद के मुताबिक, प्रदेश के 11 कृषि विश्वविद्यालयों एवं कृषि संस्थानों और 61 कृषि महाविद्यालयों में अध्ययनरत पात्र विद्यार्थियों को इस योजना का लाभ दिया जा रहा है। सीटों की संख्या दोगुनी होने के बाद छात्रवृत्ति की कुल निर्धारित संख्या 1,410 से बढ़कर 2,820 हो गई है। योजना के तहत छात्रवृत्ति की मासिक राशि तीन हजार से बढ़ाकर पांच हजार रुपये कर दी गई है। इस तरह प्रत्येक चयनित विद्यार्थी को अब सालाना 60 हजार रुपये मिलेंगे, जो पहले 36 हजार रुपये थे। यानी विद्यार्थियों को एक वर्ष में 24 हजार रुपये की अतिरिक्त आर्थिक सहायता मिलेगी। छात्रवृत्ति की बढ़ी हुई राशि से विद्यार्थियों को पढ़ाई से जुड़े खर्चों को पूरा करने में सहायता मिलेगी। इसके साथ ही कृषि, उद्यान, वानिकी और पशुपालन जैसे क्षेत्रों में उच्च शिक्षा हासिल करने वाले युवाओं के लिए भी योजना उपयोगी होगी। मंडी परिषद के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना के तहत कुल 6,454 विद्यार्थियों को लगभग 22.90 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति दी जा चुकी है। अब निर्धारित सीटों और सहायता राशि में वृद्धि के बाद अधिक विद्यार्थियों को योजना से जोड़ने का अवसर मिलेगा। संशोधित व्यवस्था के तहत कृषि विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों में कृषि स्नातक पाठ्यक्रम के लिए छात्रवृत्ति की सीटें 25 से बढ़ाकर 50 और गृह विज्ञान स्नातक के लिए छह से बढ़ाकर 12 कर दी गई हैं। कृषि स्नातकोत्तर के लिए सीटें 10 से बढ़ाकर 20 और गृह विज्ञान स्नातकोत्तर के लिए चार से बढ़ाकर आठ की गई हैं। वहीं, कृषि महाविद्यालयों में स्नातक स्तर पर छात्रवृत्ति की सीटें 10 से बढ़ाकर 20 और स्नातकोत्तर स्तर पर पांच से बढ़ाकर 10 कर दी गई हैं। कृषि के अलावा उद्यान, वानिकी, पशुपालन और संबंधित विषयों में पढ़ाई कर रहे पात्र विद्यार्थी भी योजना के दायरे में शामिल हैं। योजना का लाभ उत्तर प्रदेश के निवासी कृषकों और खेतिहर मजदूरों के पुत्र-पुत्रियों तथा उन पर पूरी तरह आश्रित विद्यार्थियों को दिया जाता है। स्नातक पाठ्यक्रम के लिए यूपी बोर्ड से इंटरमीडिएट में न्यूनतम 70 प्रतिशत और अन्य बोर्ड से 85 प्रतिशत अंक हासिल करना जरूरी है। स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के लिए स्नातक स्तर पर कम से कम 70 प्रतिशत अंक निर्धारित किए गए हैं। पात्र विद्यार्थियों का चयन मेरिट के आधार पर किया जाता है। मंडी परिषद के निदेशक जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में किसानों और खेतिहर मजदूरों के मेधावी बच्चों को उच्च कृषि शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। छात्रवृत्ति की सीटों और धनराशि में वृद्धि से आर्थिक रूप से कमजोर किसान परिवारों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि योजना के विस्तार से कृषि शिक्षा को प्रोत्साहन मिलेगा और भविष्य में कृषि वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों तथा कृषि आधारित उद्यमियों की नई पीढ़ी तैयार करने की संभावनाएं मजबूत होंगी।

कोलकाता हादसा : गृह मंत्री अमित शाह ने किया अस्पताल का दौरा, जाना घायलों का हालचाल

कोलकाता। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में हुए हादसे में घायल श्रद्धालुओं से अस्पताल जाकर मुलाकात की और उनका हालचाल जाना। उन्होंने कहा कि इस कठिन घड़ी में पश्चिम बंगाल सरकार हर घायल और पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह रविवार को दोपहर में कोलकाता के साल्ट लेक स्थित एक निजी अस्पताल पहुंचे। उनके साथ राज्य के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य मौजूद थे। गृह मंत्री ने प्रशासन से अस्पताल में भर्ती किए गए 14 लोगों की सेहत के बारे में जानकारी ली। इसके अलावा, उन्होंने कुछ घायल लोगों से बातचीत भी की। शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर मुलाकात की तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा, “इस कठिन घड़ी में पश्चिम बंगाल सरकार हर घायल और पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है। मां दुर्गा सभी घायलों को शीघ्र स्वस्थ करें, यही प्रार्थना है।” राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. शरद्वत मुखर्जी ने बताया कि अस्पताल में भर्ती 14 लोगों में से 13 की हालत स्थिर है। वे खतरे से बाहर हैं। उन्होंने कहा, “यहां तक कि जिस व्यक्ति की हालत थोड़ी गंभीर है, उसके लिए भी मैं ‘संकट’ शब्द का इस्तेमाल नहीं करूंगा। मुझे उम्मीद है कि मरने वालों की संख्या अब और नहीं बढ़ेगी। मैं खुद घायलों के इलाज की व्यवस्था पर नजर रख रहा हूं।” गृह मंत्री शाह शनिवार रात कोलकाता पहुंचे थे। रविवार को उनके कई कार्यक्रम तय थे। हालांकि, भगदड़ की इस दुखद घटना के बाद उन्होंने अपने सभी तय कार्यक्रम रद्द कर दिए। इसके बजाय वे सुबह सबसे पहले दक्षिण कोलकाता के कालीघाट स्थित प्रसिद्ध काली मंदिर गए और पूजा-अर्चना की। इसके बाद अमित शाह, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और बंगाल भाजपा के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य के साथ अस्पताल पहुंचे। वे आज ही नई दिल्ली वापस लौट जाएंगे। कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में शनिवार शाम भगदड़ की घटना हुई थी, जिसमें कम से कम 19 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 20 से अधिक श्रद्धालुओं का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज जारी है।

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कोलकाता भगदड़ पर विपक्ष से राजनीति न करने की अपील की

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने रविवार को राज्य के विपक्षी दलों से अपील की कि वे उत्तरी कोलकाता के एक सामुदायिक दुर्गा पूजा पंडाल में हुई दुखद भगदड़ पर राजनीति करने और राजनीतिक बयानबाजी करने से बचें। साथ ही संकट की इस घड़ी में सभी से मिलकर काम करने की अपील की। ​​मुख्यमंत्री ने मीडियाकर्मियों से कहा, “मैं इस मुद्दे पर राजनीति नहीं करना चाहता। मैं विपक्षी दलों से भी ऐसा न करने का आग्रह करता हूं। मुझे शनिवार रात 8:20 बजे कोलकाता पुलिस कमिश्नर से इस त्रासदी के बारे में पहली बार जानकारी मिली। शोक के इस माहौल में मैं सभी के साथ मिलकर काम करना चाहता हूं।” किसी विशेष राजनीतिक दल का नाम लिए बिना मुख्यमंत्री ने कहा कि जो दल पहले राज्य में सत्ता में था, उसके द्वारा इस त्रासदी पर राजनीति करना स्वीकार्य नहीं है, खासकर तब जब उनके कार्यकाल के दौरान भी कई ऐसी आपदाएं हुई थीं जिनमें बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी। अपनी बात को पुष्ट करने के लिए मुख्यमंत्री ने कुछ पुराने बड़े हादसों का भी जिक्र किया। इनमें 31 मार्च 2016 को उत्तरी कोलकाता में विवेकानंद रोड फ्लाईओवर के हिस्से ‘पोस्ता ब्रिज’ का गिरना (जिसमें 7 लोगों की मौत हुई और 80 से ज्यादा घायल हुए), 4 सितंबर 2018 को दक्षिणी कोलकाता में माजेरहाट ब्रिज का एक हिस्सा गिरना और जुलाई 2022 में उत्तर 24 परगना जिले के पानीहाटी में एक मेले के दौरान मची भगदड़ जैसी घटनाएं शामिल हैं। मुख्यमंत्री अधिकारी ने कहा, “पिछले साल दुर्गा पूजा से पहले मानसून के दौरान कोलकाता में पानी में डूबे बिजली के तारों के संपर्क में आने से 13 लोगों की मौत हो गई थी। उस समय पूर्व मुख्यमंत्री क्या कर रही थीं? पिछले साल अक्टूबर में उत्तर बंगाल में अचानक आई बाढ़ (फ्लैश फ्लड) में कई लोगों की जान चली गई थी। तब राज्य प्रशासन कोलकाता में एक कार्निवल में व्यस्त था।” उन्होंने यह भी बताया कि मृतकों के परिवारों ने उन पर भरोसा जताया है। मुख्यमंत्री ने कहा, “जब इन परिवारों ने मेरा हाथ पकड़ा, तो मेरी आंखों में आंसू आ गए। मैंने उनसे माफी भी मांगी। वे भी रो पड़े और बोले कि उन्हें इस सरकार पर भरोसा है।” शनिवार को इस हादसे के तुरंत बाद तृणमूल कांग्रेस के डायमंड हार्बर लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया पर एक संदेश जारी किया, जिसमें उन्होंने इस घटना को लेकर राज्य के मौजूदा प्रशासन की कड़ी आलोचना की। अभिषेक बनर्जी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “मेरे परिवार में पहली बार ऐसा हुआ है! कोलकाता पुलिस, पश्चिम बंगाल पुलिस और मुख्यमंत्री को शर्म आनी चाहिए। मां दुर्गा शोक संतप्त परिवारों को शक्ति और सांत्वना दें, और घायलों को जल्द से जल्द पूरी तरह स्वस्थ होने का आशीर्वाद दें।” बता दें कि कोलकाता के चोरेबागान सर्वजनिन दुर्गा पूजा पंडाल में प्रतिमाओं के दर्शन के लिए उमड़ी अत्यधिक भीड़ के कारण भगदड़ मच गई, जिसमें 19 लोगों की मौत हो गई।

नाशवान खाद्य पदार्थों को लेकर एफएसएसएआई सख्त, कारोबारियों के लिए जारी की नई एडवाइजरी

नई दिल्ली। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने खोया, पनीर, मांस, मछली और अन्य नाशवान खाद्य पदार्थों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रविवार को एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। प्राधिकरण ने कहा है कि ऐसे खाद्य उत्पादों को पूरी सप्लाई चेन में निर्धारित तापमान पर ही संभाला, संग्रहीत और परिवहन किया जाना चाहिए। एफएसएसएआई ने सभी खाद्य कारोबार संचालकों (एफबीओ) को स्वच्छता और तापमान नियंत्रण संबंधी मानकों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में एफएसएसएआई ने कहा, “खाद्य एवं खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण ने आपूर्ति शृंखला में नियंत्रित तापमान स्थितियों के तहत खोया, पनीर, मांस और मछली जैसे नाशवान खाद्य पदार्थों के प्रबंधन, भंडारण और परिवहन के संबंध में एक सलाह जारी की है। खाद्य और व्यावसायिक संस्थाओं (एफबीओ) को स्वच्छता और तापमान मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना होगा।” एफएसएसएआई ने अपनी एडवाइजरी में कहा कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक (खाद्य व्यवसाय लाइसेंसिंग और पंजीकरण) विनियम, 2011 के अनुसूची-4 के तहत पहले से ही खाद्य कारोबार संचालकों के लिए स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताएं निर्धारित हैं। इसके बावजूद यह जानकारी सामने आई है कि कई बार खोया, पनीर, मांस और मछली जैसे जल्दी खराब होने वाले खाद्य पदार्थों को उचित तापमान पर नहीं रखा जाता, जिससे उनमें सूक्ष्मजीवों की वृद्धि और खाद्य खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। एफएसएसएआई ने आगे कहा कि लाइसेंस की शर्तों के अनुसार खाद्य पदार्थों की खरीद, भंडारण, शीतकरण, परिवहन, वितरण और अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया में निर्धारित तापमान बनाए रखना जरूरी है। प्राधिकरण ने कहा कि नाशवान खाद्य उत्पादों के साथ तापमान संबंधी लापरवाही न केवल खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकती है और नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। एडवाइजरी में यह स्पष्ट किया गया है कि खाद्य उत्पादों का परिवहन नियंत्रित तापमान वाले वातावरण में होना चाहिए, ताकि उनकी गुणवत्ता और सुरक्षा बनी रहे। एफएसएसएआई ने नाशवान खाद्य पदार्थों के निर्माण, पैकेजिंग, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री से जुड़े सभी कारोबारियों के लिए कुछ अनिवार्य निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत खाद्य पदार्थों का परिवहन केवल साफ-सुथरे, ढके हुए और स्वच्छ वाहनों में किया जाना चाहिए। भंडारण और परिवहन के दौरान निर्धारित तापमान बनाए रखना अनिवार्य होगा। खाद्य पदार्थों की पैकिंग केवल फूड-ग्रेड सामग्री में की जानी चाहिए और ऐसे उत्पादों को बोरे या अन्य गैर-फूड ग्रेड सामग्री में रखने से बचना होगा। इसके अलावा, खाद्य उत्पादों को धूल, नमी, कीटों, भौतिक क्षति और क्रॉस-कंटैमिनेशन से सुरक्षित रखना होगा। कारोबारियों को माल के रिकॉर्ड और ट्रेसबिलिटी से जुड़ी जानकारी भी सुरक्षित रखनी होगी तथा मांगे जाने पर संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे। एफएसएसएआई ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों, भारतीय रेलवे और अपने क्षेत्रीय निदेशकों से कहा है कि वे लाइसेंसिंग प्राधिकरणों और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को नियमित निरीक्षण और परिवहन जांच के दौरान विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश दें। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 और संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। गंभीर मामलों में खाद्य सामग्री को जब्त कर नष्ट करने जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है। गौरतलब है कि त्योहारों और बढ़ती खाद्य मांग के दौरान खोया, पनीर, मांस और मछली जैसे उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखना बेहद जरूरी हो जाता है। तापमान नियंत्रण में थोड़ी सी लापरवाही भी खाद्य विषाक्तता और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है। ऐसे में, एफएसएसएआई की इस एडवाइजरी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ताओं तक सुरक्षित, स्वच्छ और गुणवत्ता युक्त खाद्य पदार्थ पहुंचें तथा पूरी सप्लाई चेन में खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन हो।

बिहार : तेलडीहा मंदिर में पाठा बलि की परंपरा, मिट्टी के गर्भगृह में विराजती हैं मां, विकास की दरकार

बांका। बिहार के बांका जिले में बदुआ नदी के किनारे स्थित प्रसिद्ध तेलडीहा दुर्गा मंदिर में शारदीय नवरात्र की महाष्टमी पर रविवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। मां दुर्गा के दर्शन, पूजा-अर्चना और मनोकामनाओं की पूर्ति की आस लेकर बिहार के विभिन्न जिलों के अलावा झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और नेपाल से भी श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं। तांत्रिक सिद्धि पीठ के रूप में चर्चित इस मंदिर में नवरात्र के दौरान आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ता है कि मंदिर परिसर से लेकर आसपास के रास्तों तक चहल-पहल बढ़ जाती है। पाठा बलि और डलिया चढ़ाने की परंपरा भी यहां की धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बांका जिले के शंभूगंज प्रखंड के तेलडीहा गांव स्थित यह मंदिर बांका और मुंगेर जिले की सीमा के निकट है। मुंगेर के तारापुर और बांका के शंभूगंज से यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। मंदिर की स्थापना की परंपरा वर्ष 1603 से जुड़ी है। प्रचलित मान्यता के अनुसार, हरिबल्लभ दास ने तांत्रिक विधि से यहां देवी की स्थापना की थी। मंदिर के गर्भगृह की कच्ची मिट्टी की संरचना को लेकर भी विशेष मान्यता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि मां तेलडीहा के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मुरादें पूरी होती हैं। मंदिर के प्रधान पुजारी श्याम आचार्य के अनुसार, मां की महिमा अपरंपार है और भक्तों की अटूट आस्था के कारण यहां हर साल श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है। मान्यता है कि नवरात्र की पहली पूजा पर जलपात्र चढ़ाने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। कई श्रद्धालु सुल्तानगंज की उत्तरवाहिनी गंगा से जल लेकर पैदल भी यहां पहुंचते हैं। सप्तमी से दशमी तक मंदिर में दर्शन और पूजा के लिए बड़ी संख्या में भक्तों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहता है। मंदिर की बढ़ती लोकप्रियता के साथ दशहरा मेले का स्वरूप भी बदल रहा है। करीब पांच वर्ष पहले धार्मिक न्यास बोर्ड में शामिल होने और पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की पहल के बाद यहां बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की उम्मीद बढ़ी है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का भी इस मंदिर से बचपन से जुड़ाव रहा है। उनका पैतृक आवास मंदिर से करीब चार किलोमीटर दूर बताया जाता है। सरकारी स्तर पर मंदिर क्षेत्र को धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के प्रयास की बात बताई जा रही है। प्रकाश, पेयजल, शौचालय, पार्किंग, स्वच्छता और श्रद्धालुओं की सुरक्षा जैसी सुविधाओं के विकास से यहां आने वाले लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, तेलडीहा की पहचान केवल मंदिर तक सीमित नहीं है। इसके साथ बहने वाली बदुआ नदी यहां की धार्मिक परंपरा, ग्रामीण जीवन और सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है। नदी किनारे सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही, पूजा की तैयारियां और घंटियों की गूंज एक विशिष्ट धार्मिक वातावरण बनाती हैं। ऐसे में मंदिर के विकास के साथ नदी के प्राकृतिक स्वरूप और स्वच्छता को सुरक्षित रखना भी बड़ी चुनौती है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के बीच कचरा प्रबंधन, नदी में पूजा सामग्री जाने से रोकना, भीड़ नियंत्रण और तटों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। अतीत में भीड़ बढ़ने पर भगदड़ की स्थिति उत्पन्न होने के अनुभव के बाद प्रशासन के लिए पर्याप्त बैरिकेडिंग और सुचारु आवागमन सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है। धार्मिक पर्यटन स्थानीय दुकानदारों, प्रसाद विक्रेताओं, वाहन चालकों और ग्रामीण कारोबारियों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा कर सकता है। बदुआ नदी के तट पर सुरक्षा संबंधी निर्माण कार्यों में भी नदी के प्राकृतिक प्रवाह और पारिस्थितिकी का ध्यान रखना होगा। चार सदियों से अधिक पुरानी आस्था के केंद्र तेलडीहा के सामने अब विकास और विरासत के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है। मंदिर की भव्यता और श्रद्धालुओं की सुविधाएं बढ़ाने के साथ नदी, प्राकृतिक परिवेश और स्थानीय संस्कृति को बचाना भी उतना ही आवश्यक है। तेलडीहा का वास्तविक विकास तभी सार्थक होगा, जब यहां मंदिर की घंटियों के साथ बदुआ नदी की धारा भी सुरक्षित और स्वच्छ बनी रहे।

तमिलनाडु: चेन्नई में बारिश से हालात बिगड़े, मुख्यमंत्री विजय ने मंत्रियों को तुरंत लौटने का दिया निर्देश

चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने चेन्नई में मानसून की तैयारियों की निगरानी कर रहे मंत्रियों को तुरंत वापस लौटने का निर्देश दिया है। भारी बारिश के कारण सड़कें जलमग्न हो गई हैं, यातायात बाधित है और रिहायशी इलाकों में पानी भर गया है। अगले दो दिनों तक और बारिश होने का अनुमान है। अगस्त में की गई व्यवस्था के तहत, इन मंत्रियों को ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन के 15 जोंनों में बारिश से निपटने की तैयारियों और राहत कार्यों की ज‍िम्मेदारी सौंपी गई थी। रात भर हुई भारी बारिश के बाद, मुख्यमंत्री ने उन्हें शहर पहुंचने और अपने-अपने क्षेत्रों में चल रहे कार्यों की निगरानी करने का निर्देश दिया है। चेन्नई में शनिवार शाम से लेकर आधी रात तक भारी बारिश हुई, जिसके साथ तेज हवाएं चलीं और बिजली भी कड़की। कई सड़कें नदियों की तरह बहने लगीं, जिससे वाहन चालकों को पानी से भरे रास्तों से गुजरने में भारी परेशानी हुई और स्थानीय लोगों को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इस भारी बारिश की सबसे ज्यादा मार उत्तरी चेन्नई पर पड़ी। खबरों के अनुसार, पैरीज कॉर्नर में 36 सेमी बारिश हुई, जबकि तिरुवोट्टियुर के पास काथिवक्कम में 33 सेमी और सथांगाडु में 25 सेमी बारिश दर्ज की गई। इन इलाकों में जगह-जगह भारी जलभराव की सूचना मिली है। मिली जानकारी के अनुसार, शहर के 30 से ज्यादा इलाकों रोयापुरम, टोंडियारपेट, एग्मोर, सैदापेट, नुंगमबक्कम और अलंदुर में 10 सेमी से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। तिरुवोट्टियूर में मुख्य सड़क पर स्थित सरकारी प्रसूति अस्पताल के बाहर घुटनों तक पानी भर गया, जिससे मरीजों, उनके साथ आए लोगों और सड़क का इस्तेमाल करने वाले अन्य लोगों को काफी परेशानी हुई। वडिवुडई अम्मन मंदिर परिसर में भी बारिश का पानी घुस गया, जबकि नवरात्र समारोह के लिए बाहर लगाया गया एक अस्थायी पंडाल गिर गया। रॉयपुरम की जीपी रोड पर वाहन चालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, क्योंकि सड़क पर पानी जमा हो गया था। नुंगमबक्कम में जेमिनी फ्लाईओवर के पास भी सड़क पर पानी जमा हो जाने से यातायात बाधित हुआ। मौसम विभाग ने इस बारिश का कारण उत्तरी तमिलनाडु और उससे सटे दक्षिणी तटीय आंध्र प्रदेश के ऊपर बने वायुमंडलीय परिसंचरण (एटमॉस्फेरिक सर्कुलेशन) को बताया है। विभाग ने रविवार को 17 जिलों चेन्नई, तिरुवल्लुर, कांचीपुरम, चेंगलपट्टू, नीलगिरी, कोयंबटूर, धर्मपुरी, कृष्णगिरि, सलेम, विल्लुपुरम, कल्लाकुरिची, कुड्डालोर, अरियालुर, तिरुचि, पेरम्बलुर, तिरुवन्नामलाई और इरोड में भारी बारिश का अनुमान जताया है। विभाग के अनुसार, तमिलनाडु के अन्य हिस्सों में गरज-चमक के साथ मध्यम बारिश हो सकती है। बारिश के जारी रहने की संभावना के बीच, मुख्यमंत्री के निर्देश पर चेन्नई के विभिन्न क्षेत्रों के लिए जिम्मेदार मंत्री वापस शहर लौट आए हैं, क्योंकि प्रशासन को जगह-जगह जलभराव और जनजीवन में आ रही बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। उत्तरी इलाकों में यह चुनौती विशेष रूप से गंभीर है, जहां अत्यधिक भारी बारिश के कारण सड़कों, एक अस्पताल और मंदिर परिसर तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। अगले दो दिनों में और बारिश होने के पूर्वानुमान ने शहर के प्रभावित इलाकों में सरकार की ओर से की जा रही कार्रवाई की तात्कालिकता को और बढ़ा दिया है।

शीतला माता मंदिर हादसा : सीएम मोहन यादव का बड़ा एक्शन, तीन थाना प्रभारी समेत आठ पुलिसकर्मी सस्पेंड

ग्वालियर। शीतला माता मंदिर हादसा मामले में मुख्यमंत्री मोहन यादव की ओर से बड़ा एक्शन लिया गया है। सीएसपी रवि भदौरिया को हटाने का निर्देश दिया गया है। तीन थाना प्रभारी समेत 8 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया है। इस मामले में कुल 9 पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है। मंत्री एदल सिंह कंषाना और राकेश शुक्ला को ग्वालियर पहुंचने के निर्देश दिए गए। मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख की सहायता राशि और गंभीर घायलों को 2-2 लाख रुपये की घोषणा की गई है। अन्य घायलों को 50-50 हजार की आर्थिक मदद दी जाएगी। सभी घायलों का नि:शुल्क उपचार किया जाएगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव की ओर से श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोपरि बताया गया है। उन्होंने कहा, “कर्तव्य में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, जवाबदेही तय की जाएगी और कठोर कार्रवाई होगी।” बता दें कि जिला मुख्यालय से 18 किलोमीटर दूर ऐतिहासिक शीतला माता मंदिर पर एक ट्रक घाटी से उतरते वक्त बेकाबू हो गया। इसकी चपेट में करीब 50 लोग आ गए हैं, जिनमें से कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई। दो पुलिसकर्मियों और कुछ बच्चों समेत 25 से अधिक लोग घायल हुए हैं। जानकारी के अनुसार, धान की बोरियों से लदा एक ट्रक पहाड़ी से नीचे उतरते समय अनियंत्रित होकर ऐतिहासिक शीतला माता मंदिर के पास दुकानों से जा टकराया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि अचानक बेकाबू ट्रक चीनोर की ओर से आते हुए शीतला माता मंदिर के प्रमुख बाहरी गेट के पास घाटी से नीचे उतर रहा था, तभी वह गेट के आसपास बनी दुकानों में घुस गया। बेकाबू ट्रक की चपेट में आने से कई दुकानों को नुकसान हुआ और कई दो पहिया वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गए। इस हादसे में 12 लोगों की मौत हो गई और दो पुलिसकर्मियों समेत करीब 27 लोग घायल हो गए। हादसे की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने घायलों को अस्पताल के लिए भेजा।

कोलकाता भगदड़ और ग्वालियर हादसे पर भाजपा नेताओं ने जताया दुख, बोले- दोषियों पर हो कड़ी कार्रवाई

नई दिल्ली। देश में दो बड़े धार्मिक स्थलों पर हुई दुर्घटनाओं ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। कोलकाता के चोरबागन दुर्गा पूजा पंडाल में मची भगदड़ और मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित शीतला माता मंदिर के पास हुई दुर्घटना पर भाजपा ने गहरा दुख व्यक्त किया है। पार्टी ने कहा है कि केंद्र और राज्य सरकारें पीड़ित परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी हैं। भाजपा के राज्यसभा सांसद तरुण चुघ ने दोनों घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे अत्यंत दुखद, हृदय विदारक और पीड़ादायक बताया। तरुण चुघ ने कहा, “कोलकाता के चोरबागन दुर्गा पंडाल और ग्वालियर के शीतला माता मंदिर में हुई घटनाएं बहुत ही दुखद हैं। पूरा देश श्रद्धालुओं की मौत पर शोक व्यक्त कर रहा है। मैं दिवंगत आत्माओं की शांति और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं।” उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में सरकारें पीड़ितों के साथ हैं। उन्होंने कहा, “राज्य सरकारें और केंद्र सरकार, दोनों ही प्रभावित परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी हैं। उन्हें चिकित्सा सहायता सहित हर संभव मदद दी जा रही है। हम उम्मीद करते हैं कि घायल लोग जल्द से जल्द स्वस्थ होकर अपने घर लौट सकें।” तरुण चुघ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार हर जरूरी सहायता देने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने जानकारी दी कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह खुद कोलकाता में मौजूद हैं और प्रभावित परिवारों से मिल रहे हैं। उन्होंने कहा, “यह बहुत कठिन समय है। ऐसे में प्रभावित परिवारों का साथ देना, घायलों का उचित इलाज सुनिश्चित करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाना सबसे ज्यादा जरूरी है।” वहीं, कोलकाता की भगदड़ की घटना पर भाजपा नेता आरपी सिंह ने भी दुख जताया। उन्होंने कहा, “कोलकाता की भगदड़ में 19 लोगों की मौत हो गई है। इसके जवाब में बंगाल सरकार ने कार्रवाई करते हुए दुर्गा पूजा के सात आयोजकों को गिरफ्तार किया है।” उन्होंने आगे बताया कि सरकार ने पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे का ऐलान भी किया है। बंगाल सरकार ने पीड़ित परिवारों को सहायता देते हुए प्रति परिवार 25 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा, “बंगाल सरकार इस मामले की गहन जांच करेगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त और उचित कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाएं दोबारा न हों।