कोलकाता पंडाल हादसा: मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने की आपात बैठक, अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

कोलकाता। कोलकाता दुर्गा पूजा पंडाल भगदड़ हादसे में 17 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 25 लोग घायल हो गए हैं। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस घटना पर गहरा दुख जताया है। इसके साथ ही कोलकाता मेडिकल कॉलेज में एक आपातकालीन बैठक हुई, जिसमें सुवेंदु अधिकारी, मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। चोरबागान सर्वजनिन दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ पर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि यह एक दुखद घटना है। सत्रह लोगों की मौत हो गई है और 25 लोग घायल हो गए हैं। क्लब द्वारा घोषणा किए जाने के बाद भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई। यह बेहद दुखद है। हमारी प्राथमिकता मृतकों के परिवारों के साथ खड़े रहना और घायलों का इलाज सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि सरकार मिलकर काम कर रही है। मैं सभी पूजा समितियों से पुलिस के साथ समन्वय करने और सुरक्षित निकास मार्ग सुनिश्चित करने का अनुरोध करता हूं। थीम आधारित पूजा के नाम पर कई पंडालों के अंदर उचित रोशनी नहीं है। मैं सभी को आश्वस्त करता हूं कि हम सभी की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री के साथ कल के कार्यक्रम स्थगित कर दिए गए हैं क्योंकि हमें जनता के साथ खड़ा रहना है। एक जांच दल घटना की स्थिति का पता लगाएगा। कोलकाता पुलिस को निजी सुरक्षाकर्मियों और पूजा आयोजकों को हिरासत में लेने का निर्देश दिया गया है। फोरेंसिक जांच की जाएगी। मैं मीडिया और राजनीतिक नेताओं से घटनास्थल पर साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ न करने का अनुरोध करता हूं। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि कोलकाता में चोरबागान के दुर्गा पंडाल में भगदड़ के चलते कई श्रद्धालुओं की मृत्यु एवं घायल होना अत्यंत दुःखद है। उन्होंने कहा कि इस पीड़ादायी दुर्घटना में अपनों को खोने वाले परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्माओं को अपने चरणों में स्थान दें तथा घायलों को शीघ्र स्वस्थ करें। वहीं, ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा कि मां दुर्गा शोक संतप्त परिवारों को शक्ति और सांत्वना प्रदान करें और सभी घायलों को शीघ्र और पूर्ण स्वस्थ होने का आशीर्वाद दें।
महिला पत्रकार ने राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की, गर्भावस्था में धक्का देने का आरोप

नई दिल्ली। महिला पत्रकार ऋचा पराशर ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अन्य लोगों के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज कराते हुए एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 12 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट परिसर में रिपोर्टिंग के दौरान उनके साथ धक्का-मुक्की की गई, धमकाया गया और आपराधिक बल का इस्तेमाल किया गया। पत्रकार के अनुसार, घटना के समय वह लगभग 11 सप्ताह की गर्भवती थीं। वनइंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत ऋचा पराशर ने नई दिल्ली जिले के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) को दी शिकायत में घटना की विस्तृत जानकारी दी है। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच करने की मांग की है। शिकायत के अनुसार, 12 अक्टूबर को शाम करीब 6:30 बजे ऋचा सुप्रीम कोर्ट परिसर में रजिस्ट्री काउंटर के पास एक याचिका से जुड़ी खबर की कवरेज कर रही थीं। इसी दौरान राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों का एक बड़ा समूह परिसर में पहुंचा। पत्रकार का आरोप है कि उन्होंने राहुल गांधी से सुप्रीम कोर्ट परिसर में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मौजूदगी को लेकर सवाल पूछा, जिसके बाद राहुल गांधी ने उन्हें धक्का दिया। ऋचा ने शिकायत में दावा किया है कि धक्का लगने से उनका संतुलन बिगड़ गया और वह गिर पड़ीं। गिरने के दौरान उनके हाथों में चोट आई। उन्होंने मदद की गुहार लगाने और करीब 40 मिनट तक सहायता का इंतजार करने का भी दावा किया है। उनका आरोप है कि मौके पर मौजूद लोगों ने उनकी परेशानी पर ध्यान नहीं दिया। शिकायत में कहा गया है कि घटना के बाद पेट के निचले हिस्से में दर्द होने पर उन्हें उसी रात दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के आपातकालीन विभाग में ले जाया गया। अगले दिन, 13 अक्टूबर को उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया। शिकायतकर्ता के मुताबिक, मेडिकल रिकॉर्ड में गर्भावस्था के 11 सप्ताह तीन दिन होने और गिरने के बाद पेट में दर्द की जानकारी दर्ज है। उनकी जांच की गई और भ्रूण की हृदय गतिविधि देखने के लिए अल्ट्रासाउंड भी कराया गया। ऋचा ने बीएनएस की धारा 74, 115(2), 131, 125 और 3(5) के तहत कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने पुलिस से राहुल गांधी सहित घटना में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष और समयबद्ध जांच करने का अनुरोध किया है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि जांच के दौरान सामने आने वाले अन्य अपराधों के लिए भी संबंधित कानूनी प्रावधान जोड़े जाएं। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और इस मामले में पुलिस की कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
सिरसा का पंजाब सरकार पर हमला, बोले- नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों को बनाया जा रहा निशाना

नई दिल्ली। दिल्ली के कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने वायु प्रदूषण से निपटने के लिए चल रही बैठकों, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ चर्चा और एक एक्टिविस्ट की हत्या पर पंजाब के डीजीपी से जवाब मांगने के लिए गृह मंत्रालय की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया दी। पंजाब में ड्रग्स के खिलाफ मुहिम में हाल ही में हुई हत्याओं को लेकर गृह मंत्रालय के नोटिस जारी करने पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा, “गृह मंत्रालय का यह नोटिस बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि पंजाब देश का इकलौता ऐसा राज्य है जहां नशे की समस्या को रोकने की कोशिश करने वालों की हत्या की जा रही है। नशा विरोधी कार्यकर्ताओं की हत्या की जा रही है, उन्हें जेल भेजा जा रहा है, उन पर एफआईआर दर्ज की जा रही है और उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। ” उन्होंने कहा कि देश में पंजाब ही ऐसा राज्य है। अन्य राज्यों में, जहां नशीले पदार्थों की समस्या है। हमने सुना है कि नशा तस्करों या ड्रग माफिया के खिलाफ कार्रवाई की जाती है, लेकिन नशा विरोधी कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई पहली बार पंजाब में हो रही है। इसी कारण गृह मंत्रालय ने इस पर जानकारी मांगी है और यह बहुत अहम है। एक प्रमुख कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद, उनके परिवार ने अभी तक उनका अंतिम संस्कार नहीं होने दिया है। उनका मानना है कि इसमें सरकार का सीधा हाथ है और डीजीपी तथा मुख्यमंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए, पंजाब में इस समय यह एक बहुत बड़ा मुद्दा है। मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा कहते हैं, “शनिवार को दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण से जुड़े एक ‘इनोवेशन चैलेंज’ को लेकर संबंधित लोगों के साथ एक बैठक हुई। इसमें चर्चा की गई कि कौन-से नए नवाचार मौजूद हैं और किन नए उपायों से दिल्ली के प्रदूषण से निपटा जा सकता है। इस बैठक से कई अच्छे सुझाव सामने आए। मेरा मानना है और आज की चर्चा में यह बात भी आई कि श्मशान घाटों पर होने वाले प्रदूषण को कैसे शून्य तक लाया जा सकता है या उत्सर्जन को 95 प्रतिशत से अधिक कैसे कम किया जा सकता है। उन्होंने आगे कहा कि इसी तरह, ‘हाइपर-सेंसर’ (हवा की गुणवत्ता मापने वाले सेंसर) के मामले में, हमारे पास सरकारी सिस्टम के साथ-साथ अब सस्ते सेंसर भी उपलब्ध हैं। यह एक ऐसी तकनीक है, जिसके जरिए हम बहुत ही सटीक और स्थानीय स्तर पर यह जानकारी जुटा सकते हैं कि प्रदूषण का स्रोत क्या है और यह कहां से आ रहा है।
जंतर-मंतर हिंसा समेत अन्य घटनाओं के प्रभावितों को राहत, एचपीईसी ने पोर्टल लॉन्च किया

नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने जुलाई 2026 के दौरान दिल्ली के जंतर-मंतर और दिल्ली के बाहर विभिन्न स्थानों पर हुई हिंसा की घटनाओं के सभी पहलुओं की जांच करने हेतु एक उच्चाधिकार प्राप्त जांच समिति (एचपीईसी) का गठन किया था। प्रभावित लोगों (पुलिसकर्मी भी शामिल) की सुविधा के लिए एचपीईसी ने एक पोर्टल ‘एचपीईसी डॉट एनआईसी डॉट इन’ लॉन्च किया है। एचपीईसी सर्वोच्च न्यायालय के 18 अगस्त 2026 के आदेश के पैराग्राफ 12 और 13 तथा 10 सितंबर 2026 के आदेश के पैराग्राफ 5(आई) में बताए गए सभी मुद्दों की जांच करेगी। इसमें पैलेट गन के उपयोग, लक्षित हिंसा, महिला प्रदर्शनकारियों के उत्पीड़न तथा दोनों पक्षों की ओर से की गई अत्यधिक हिंसा व संपत्ति की क्षति से जुड़े मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी। पोर्टल को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि संवेदनशील गवाहों को समुचित सुरक्षा मिल सके और यदि प्रभावित व्यक्ति चाहें, तो उनकी पहचान को गोपनीय एवं गुप्त भी रखा जा सके। प्रभावित व्यक्तियों तथा अन्य हितधारकों को प्रोत्साहित किया जाता है कि वे इस पोर्टल पर जाएं और उपयुक्त प्रारूपों का उपयोग करते हुए अपनी शिकायतें/ अभ्यावेदन अपलोड करें। इसके अलावा, जो कोई भी व्यक्ति 18 अगस्त 2026 और 10 सितंबर 2026 के आदेशों के तहत एचपीईसी को सौंपे गए मुद्दों से जुड़ी जानकारी या सुझाव देना चाहता है, वह उक्त पोर्टल के माध्यम से ऐसा कर सकता है। जो लोग अपनी शिकायतें, अभ्यावेदन या अन्य संबंधित सामग्री स्वयं कार्यालय आकर जमा करना चाहते हैं, वे सभी कार्य-दिवसों के दौरान दोपहर दो बजे से शाम बजे के बीच, शिक्षा सदन, 17, राउज एवेन्यू इंस्टीट्यूशनल एरिया, नई दिल्ली 110002 स्थित एचपीईसी के कार्यालय में ऐसा कर सकते हैं। ये दस्तावेज उपरोक्त पते पर डाक द्वारा ईमेल के माध्यम से भी भेजे जा सकते हैं।
इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में सीनियर रेजिडेंट बनने का सुनहरा मौका, 24 अक्टूबर को वॉक-इन-इंटरव्यू

पटना। मेडिकल क्षेत्र से जुड़े जो लोग नौकरी की तलाश में जुटे हैं, उनके लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) ने कार्डियोलॉजी विभाग में 89 दिनों के लिए ‘एडहॉक’ (अस्थायी) आधार पर सीनियर रेजिडेंट के कुल 8 पदों पर नियुक्ति की घोषणा करते हुए एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की है। आईजीआईएमएस की ओर से सीनियर रेजिडेंट पोस्ट के लिए जारी 8 रिक्तियों में अनारक्षित के 2, अनारक्षित (महिला) का 1, अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) के 2, पिछड़ा वर्ग (बीसी) का 1, अनुसूचित जाति (एससी) का 1 और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) का 1 पद शामिल हैं। सीनियर रेजिडेंट के इन सभी पदों पर योग्य अभ्यर्थियों का चयन वॉक-इन-इंटरव्यू और दस्तावेज सत्यापन के आधार पर किया जाएगा, जिसके बाद चयनित कैंडिडेट्स की सैलरी संस्थान के नियम के अनुसार होगी। इंटरव्यू में उपस्थित होने वाले अभ्यर्थियों के पास एमएस/एमडी मेडिसिन की डिग्री होनी चाहिए। आवेदकों की अधिकतम आयु 45 वर्ष तय की गई है, जिसकी गणना 7 फरवरी 2026 के आधार पर की जाएगी। वहीं, आरक्षित श्रेणी से आने वाले अभ्यर्थियों को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी। वॉक-इन-इंटरव्यू 24 अक्टूबर को सुबह 11 बजे से आईजीआईएमएस, पटना-14 के कार्डियोलॉजी विभाग के एचओडी कक्ष (पॉली विंग क्लिनिक, तीसरी मंजिल) में आयोजित होगा। इच्छुक उम्मीदवारों को इंटरव्यू के दिन सुबह 10 बजे तक केंद्र पर रिपोर्ट करना होगा। वहीं, दस्तावेजों का सत्यापन इंटरव्यू वाले दिन ही एचओडी कार्डियोलॉजी कक्ष (पॉली विंग क्लिनिक, तीसरी मंजिल) में किया जाएगा। इंटरव्यू में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे केंद्र पर समय से रिपोर्ट करने के अलावा अपने साथ भरे हुए आवेदन पत्र की हार्ड कॉपी के साथ सभी संबंधित डॉक्यूमेंट्स की मूल और फोटोकॉपी ले जाएं। आवेदन पत्र डाउनलोड करने के लिए उम्मीदवार सबसे पहले आईजीआईएमएस की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। वहां संबंधित रिक्तियों के लिए दिए गए आवेदन पत्र को डाउनलोड कर प्रिंट आउट निकाल लें। फिर फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारियों को दर्ज करें और याद से इंटरव्यू के दिन केंद्र पर ले जाएं। कैंडिडेट्स ध्यान दें कि एप्लीकेशन फॉर्म डाउनलोड करने के लिए उम्मीदवारों को अपने वर्ग अनुसार निर्धारित आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा, जो अनारक्षित/ईडब्ल्यूएस/बीसी/ईबीसी के लिए 1,000 रुपए और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लिए 250 रुपए तय है।
कैंसर मरीजों को बड़ी राहत, 137 एंटी-कैंसर दवाओं के दाम 70 प्रतिशत तक होंगे कम

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कैंसर मरीजों को बड़ी राहत देते हुए 137 गैर-अनुसूचित (नॉन-शेड्यूल्ड) कैंसर रोधी दवाओं की कीमतों में भारी कमी लाने का फैसला किया है। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के तहत कार्यरत राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने इन दवाओं के लिए ट्रेड मार्जिन युक्तसंगतीकरण (टीएमआर) लागू किया है। टीएमआर लागू होने से कई दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में 70 प्रतिशत तक कमी आने की उम्मीद है। संशोधित मूल्य 9 नवंबर से प्रभावी होंगे। यह पहल एनपीपीए के 2019 के पायलट टीएमआर अभ्यास की सफलता पर आधारित है, जिसके तहत 42 कैंसर रोधी दवाओं के व्यापार मार्जिन को 30 प्रतिशत तक सीमित किया गया था। उस अभ्यास के बाद गैर-अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं के 526 ब्रांडों के एमआरपी में 90 प्रतिशत तक की कमी की गई थी। वर्तमान अभ्यास इस दृष्टिकोण को स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के तहत विशेषज्ञ समिति द्वारा अनुशंसित सूची के आधार पर कैंसर रोधी दवाओं के एक बड़े समूह तक इस दृष्टिकोण का विस्तार करता है। विशेषज्ञ समिति में देशभर के अस्पतालों के प्रमुख कैंसर विशेषज्ञ, चिकित्सा विशेषज्ञ और सरकारी अधिकारी शामिल थे। समिति ने टीएमआर (अधिकतम खुदरा मूल्य) के अंतर्गत शामिल करने के लिए 137 दवाओं पर विचार-विमर्श किया और उनकी सिफारिश की। इस सूची को समय-समय पर अपडेट किया जाएगा। समिति द्वारा अनुशंसित दवाओं को ध्यान में रखते हुए एनपीपीए ने औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश (डीपीसीओ), 2013 के अनुच्छेद 19 के अनुसार, व्यापार मार्जिन को अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) के 30 प्रतिशत पर सीमित कर दिया है। 17 अक्टूबर 2026 की राजपत्र अधिसूचना एनपीपीए की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है । इस उपाय से कैंसर से प्रभावित कई रोगियों और उनके परिवारों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें अक्सर उपचार की उच्च लागत के कारण भारी वित्तीय बोझ का सामना करना पड़ता है। राजपत्र अधिसूचना के प्रकाशन के 7 दिनों के भीतर सभी निर्माताओं को एनपीपीए को अपने संशोधित मूल्यों की सूचना देना अनिवार्य होगा। संशोधित मूल्य 9 नवंबर, 2026 से प्रभावी होंगे। निर्माताओं को अपनी वेबसाइट पर मूल्य सूची प्रदर्शित करना और सभी खुदरा विक्रेताओं और अस्पतालों को व्यापक रूप से वितरित करना अनिवार्य होगा। सभी खुदरा विक्रेताओं और अस्पतालों को 9 नवंबर से कम कीमतों पर दवाएं बेचनी होंगी और अपनी फार्मेसियों में संशोधित मूल्य प्रदर्शित करने होंगे। अस्पतालों को अपनी वेबसाइट पर भी संशोधित मूल्य प्रमुखता से प्रदर्शित करने होंगे। उपभोक्ता फार्मा सही दाम ऐप और एनपीपीए वेबसाइट का उपयोग करके दवाओं के संशोधित मूल्यों की जांच कर सकते हैं। चूंकि एंटी-कैंसर दवाओं की एक महत्वपूर्ण आपूर्ति सीधे अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों को की जाती है, इसलिए वे कार्यान्वयन की तारीख से ऐसी दवाओं की संशोधित कीमतें सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होंगे। राज्य औषधि नियंत्रक (स्टेट ड्रग कंट्रोलर्स) निर्माताओं, खुदरा विक्रेताओं सहित डीलरों, अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों द्वारा अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे। कैंसर रोधी दवाओं पर टीएमआर का उपाय वितरण और खुदरा चैनलों में अत्यधिक व्यापार मार्जिन को नियंत्रित करने, वैध निर्माता राजस्व की रक्षा करने और कृत्रिम बाजार की कमी को रोकने के उद्देश्य से है। दवा कंपनियों को अधिसूचित फॉर्मूलेशन के लिए वर्तमान उत्पादन और आपूर्ति स्तर बनाए रखना होगा ताकि रोगियों को समय पर और निर्बाध रूप से दवाएं मिल सकें। कैंसर रोधी दवाओं को अधिक किफायती और सुलभ बनाकर, यह पहल रोगियों और उनके परिवारों पर वित्तीय बोझ को कम करने में मदद करेगी और कैंसर उपचार तक समान पहुंच के व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य उद्देश्य का समर्थन करेगी।
दिल्ली की मुख्यमंत्री ने साफ-सफाई बेहतर करने के लिए 500 से अधिक एमसीडी वाहन किए लॉन्च

नई दिल्ली। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने शनिवार को एमसीडी वार्डों के लिए घर-घर जाकर कचरा उठाने वाले 500 से अधिक वाहनों और बैटरी से चलने वाली 250 कचरा उठाने वाली मशीनों की शुरुआत की। यह पहल प्राथमिक और द्वितीयक वाहनों के जरिए साफ-सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के प्रयासों का हिस्सा है। सरिता विहार में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार शहर में साफ-सफाई की सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए नगर निकाय को सभी जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। मल्होत्रा ने कहा कि राजधानी में विकास अपने सही अर्थों में तब शुरू हुआ जब भाजपा की विधानसभा चुनाव जीत के बाद रेखा गुप्ता ने मुख्यमंत्री का पद संभाला। एक बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री ने मेयर प्रवेश वाही, डिप्टी मेयर मोनिका पंत और स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा की मौजूदगी में नई एनडीसी सुविधाओं का उद्घाटन किया। बयान में कहा गया है कि इस पहल के तहत घर-घर जाकर कचरा उठाने के लिए 428 ऑटो-टिपर, 128 ई-रिक्शा और 25 टाटा 407 वाहन शामिल किए गए हैं। कार्यक्रम में कचरे को तेजी से ढोने के लिए 27 रिफ्यूज कॉम्पैक्टर, 5 रिफ्यूज कलेक्टर और 30 हुक लोडर भी लॉन्च किए गए। बयान के मुताबिक, कचरा प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए 100 और कॉम्पैक्टर बिन भी जारी किए गए। बयान में बताया गया है कि दिल्ली के सभी 250 वार्डों में सड़कों और सार्वजनिक जगहों की सफाई के लिए बैटरी से चलने वाली आधुनिक ‘लिटर पिकर’ (कचरा उठाने वाली) मशीनें लाई गई हैं। इसमें यह भी कहा गया है कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता रविवार को यमुना के किनारे स्वयंसेवकों के साथ मिलकर एक सफाई अभियान का नेतृत्व करेंगी। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से ‘एक्स’ पर पोस्ट किए गए एक संदेश में कहा गया, “यमुना की स्वच्छता हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। आइए, 18 अक्टूबर को सुबह 7.30 बजे दिल्ली में 70 जगहों पर आयोजित होने वाले इस बड़े स्वच्छता अभियान में शामिल हों। अपने नजदीकी यमुना घाट पर पहुंचें और इस जन-संकल्प में अपना योगदान दें।” दिल्ली भाजपा के एक बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री आईटीओ हाथी घाट-1 पर यमुना किनारे स्वयंसेवकों के साथ जुड़ेंगे, जबकि मल्होत्रा गांधी नगर घाट पर स्वच्छता अभियान का नेतृत्व करेंगे। बयान में कहा गया है कि दक्षिण दिल्ली के सांसद रामवीर बिधूड़ी कालिंदी कुंज किनारे स्वच्छता अभियान का नेतृत्व करेंगे, जबकि नई दिल्ली की सांसद बांसुरी स्वराज राम घाट पर स्वयंसेवा देंगी।
नोएडा में साइबर अपराधियों को बैंक खाता उपलब्ध कराने वाला आरोपी गुरुग्राम से गिरफ्तार

नोएडा। ऑनलाइन स्टोर चलाकर मुनाफा कमाने का लालच देकर लोगों के साथ साइबर ठगी करने के मामले में गौतमबुद्धनगर की साइबर क्राइम पुलिस ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने साइबर अपराधियों को धोखाधड़ी के लिए बैंक खाता उपलब्ध कराने के आरोप में मोहम्मद समीर को गुरुग्राम से गिरफ्तार किया है। आरोपी की उम्र करीब 21 वर्ष बताई गई है। पुलिस के अनुसार, इस मामले में इस्तेमाल किए गए बैंक खाते के खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों में कुल 33 शिकायतें दर्ज हैं। इससे पहले पुलिस इस प्रकरण में तीन अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। आरोपी के कब्जे से एक मोबाइल फोन बरामद किया गया है। पुलिस के मुताबिक, मामले में शिकायतकर्ता ने थाना साइबर क्राइम में लिखित शिकायत देकर बताया था कि अज्ञात साइबर अपराधियों ने फेसबुक और व्हाट्सएप के माध्यम से उसे लिंक भेजे थे। आरोपियों ने ऑनलाइन स्टोर चलाने और इसके जरिए अच्छा मुनाफा कमाने का झांसा दिया। शिकायतकर्ता को अपने जाल में फंसाकर 20 अगस्त 2025 से 18 नवंबर 2025 के बीच साइबर धोखाधड़ी की गई। शिकायत के आधार पर थाना साइबर क्राइम में मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) और 319(2) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66डी के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। पुलिस की जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी मोहम्मद समीर साइबर अपराधियों को धोखाधड़ी के लिए अपना बैंक खाता उपलब्ध कराता था। साइबर ठगी से संबंधित रकम के लेनदेन में इस खाते का इस्तेमाल किया गया। पुलिस अब आरोपी की भूमिका और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। पुलिस के अनुसार, संबंधित बैंक खाते के खिलाफ विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों में कुल 33 शिकायतें दर्ज हैं। इनमें महाराष्ट्र और केरल में पांच-पांच, तेलंगाना और कर्नाटक में पांच-पांच शिकायतें शामिल हैं। तमिलनाडु में तीन शिकायतें दर्ज हैं। आंध्र प्रदेश में दो शिकायतें हैं। इसके अलावा बिहार, हरियाणा, दिल्ली, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, झारखंड और गुरुग्राम से एक-एक शिकायत दर्ज होने की जानकारी दी गई है। साइबर क्राइम पुलिस ने 16 अक्टूबर को संकलित सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई करते हुए मोहम्मद समीर को गुरुग्राम से गिरफ्तार किया। आरोपी की पहचान मोहम्मद समीर पुत्र मोहम्मद नवाब, निवासी मोहल्ला नत्था सिंह, जसपुर पट्टी, थाना कोतवाली नगर, जिला ऊधमसिंह नगर के रूप में हुई है। उसकी उम्र करीब 21 वर्ष है। पुलिस ने आरोपी के पास से एक मोबाइल फोन बरामद किया है। इस मामले में पहले ही तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। अब पुलिस गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ कर साइबर ठगी के नेटवर्क और बैंक खाते के इस्तेमाल से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रही है।
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष ने रोहिणी में तीन नागरिक परियोजनाओं का उद्घाटन किया

नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष और रोहिणी विधायक विजेंद्र गुप्ता ने शनिवार को अपने निर्वाचन क्षेत्र में पांच विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। उन्होंने सुरक्षित वातावरण और सुलभ सामुदायिक स्थानों को सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। गुप्ता ने कहा कि विकास को केवल परियोजनाओं की संख्या से नहीं, बल्कि उनसे लोगों के दैनिक जीवन में होने वाले सुधारों से मापा जाना चाहिए। हर मोहल्ले को सुरक्षित वातावरण, सुलभ सामुदायिक स्थान और निवासियों की जरूरतों को पूरा करने वाली बुनियादी ढांचागत सुविधाओं का हकदार है। उन्होंने रोहिणी के सेक्टर 13 में स्थित शांति अपार्टमेंट्स और सूर्या अपार्टमेंट्स में नवनिर्मित दो मनोरंजन केंद्रों का उद्घाटन किया, साथ ही इसी सेक्टर में वीर अपार्टमेंट्स में एक नए बूम बैरियर और प्रवेश द्वार का भी उद्घाटन किया। गुप्ता ने सेक्टर 13 के सुंदर अपार्टमेंट्स और सेक्टर 9 के लोकनायक अपार्टमेंट्स में दो मनोरंजन केंद्रों का शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं निर्वाचन क्षेत्र में सामुदायिक बुनियादी ढांचे के विस्तार और आवासीय सुरक्षा को मजबूत करने के प्रयासों का हिस्सा हैं, जिनमें स्थापित आवासीय क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं में सुधार पर विशेष जोर दिया गया है। इन पहलों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए अध्यक्ष ने कहा कि शहरी विकास को निवासियों की सामाजिक और मनोरंजक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पारंपरिक बुनियादी ढांचे से आगे बढ़ना होगा। नए मनोरंजन केंद्र सामुदायिक सभाओं, मनोरंजक गतिविधियों और सामाजिक मेलजोल के लिए समर्पित स्थान प्रदान करेंगे, जिससे विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों, बच्चों और परिवारों को लाभ होगा। वीर अपार्टमेंट्स में बूम बैरियर और प्रवेश द्वार का उद्देश्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और आवासीय परिसर में प्रवेश और निकास के प्रबंधन में सुधार करना है। गुप्ता ने इस बात पर जोर दिया कि सुरक्षित, सुलभ और सुव्यवस्थित पड़ोस की सुविधाएं शहरी जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए आवश्यक हैं। प्रस्तावित दो मनोरंजन केंद्रों के बारे में बात करते हुए गुप्ता ने सामाजिक सामंजस्य और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने वाले साझा स्थानों के निर्माण के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आवासीय कॉलोनियों में मनोरंजन संबंधी बुनियादी ढांचे का विस्तार समावेशी शहरी नियोजन का एक महत्वपूर्ण घटक है, जो विभिन्न पीढ़ियों के निवासियों को सांस्कृतिक, सामाजिक और सामुदायिक गतिविधियों में भाग लेने में सक्षम बनाता है। उन्होंने कहा कि ऐसी सुविधाओं को उन समुदायों की आवश्यकताओं के अनुसार डिजाइन और विकसित किया जाना चाहिए जिनकी सेवा के लिए वे बनाई गई हैं।
यौन अपराधों पर फैसलों में एकरूपता और संवेदनशीलता जरूरी : एनसीडब्ल्यू प्रमुख

नई दिल्ली। राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने शनिवार को लैंगिक संवेदनशील न्याय, तथा न्यायिक प्रक्रिया में निरंतरता, संवेदनशीलता और करुणा की आवश्यकता पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने महिलाओं के खिलाफ यौन अपराधों से जुड़े हाईकोर्ट के दो फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि इन मामलों में अपराध की गंभीरता को कम करके आंका गया प्रतीत होता है। उन्होंने महिलाओं के खिलाफ यौन अपराधों से संबंधित दो उच्च न्यायालय के फैसलों का जिक्र किया, जिनमें अपराधों की गंभीरता को कमतर आंका गया प्रतीत होता है। रहाटकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में उन दो मामलों का विवरण साझा किया, जिनमें उच्च न्यायालयों ने आरोपियों के अपराधों की व्याख्या कम गंभीर दंड प्रावधानों के तहत की और उन्हें “दुष्कर्म के प्रयास” के लिए दोषी ठहराने की याचिकाओं को खारिज कर दिया। एनसीडब्ल्यू प्रमुख ने कहा, “न्याय कानून और साक्ष्य द्वारा निर्देशित होना चाहिए, जबकि इसकी भाषा और तर्क प्रत्येक पीड़ित की गरिमा को बनाए रखना चाहिए। न्याय व्यवस्था में जनता का विश्वास मजबूत करने के लिए लैंगिक संवेदनशीलता से न्याय करना आवश्यक है।” रहाटकर ने कहा, “राष्ट्रीय महिला आयोग मानता है कि प्रत्येक मामले का फैसला उसके तथ्यों, परिस्थितियों, साक्ष्यों और लागू कानून के आधार पर होना चाहिए। साथ ही, ये फैसले यौन अपराधों में ‘तैयारी’ और ‘प्रयास’ के बीच कानूनी अंतर को लागू करने में स्पष्टता और एकरूपता के महत्व को उजागर करते हैं।” राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष द्वारा उद्धृत मामलों में से एक पटना हाईकोर्ट का मोहम्मद ऐनुल हक बनाम बिहार राज्य का मामला था। दूसरा मामला इलाहाबाद उच्च न्यायालय का था। पटना उच्च न्यायालय के मामले में आदेश में कहा गया, “अपीलकर्ता द्वारा देर रात सो रही विधवा के घर में प्रवेश करना, दीपक बुझाना, उसका मुंह दबाना आईपीसी की धारा 354 (लज्जा भंग करना) के तहत अपराध स्थापित करने के लिए पर्याप्त था, हालांकि कपड़े उतारने या प्रवेश की दिशा में किसी भी कृत्य के साक्ष्य के अभाव में यह कृत्य दुष्कर्म का प्रयास (आईपीसी की धारा 376 को धारा 511 के साथ पढ़ा जाए) नहीं माना जा सकता।” एनसीडब्ल्यू प्रमुख ने बताया कि दूसरा मामला इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश से संबंधित था, जिसमें पीड़िता के कपड़े खींचने के कृत्य का जिक्र था, जिसके चलते सर्वोच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्यवाही शुरू की। रहाटकर ने राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी द्वारा प्रकाशित हैंडबुक “जजमेंट्स एंड जेंडर: सेंसिटिविटी एंड कंपैशन इन राइटिंग जजमेंट्स” का भी उल्लेख किया। उन्होंने न्यायिक तर्कों और न्यायिक भाषा में लैंगिक संवेदनशीलता को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि न्याय प्रदान करते समय संवेदनशील, संतुलित और सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाना बेहद जरूरी है। एनसीडब्ल्यू अध्यक्ष ने पुस्तिका में शामिल प्रमुख सिद्धांतों की ओर इशारा किया, जिनमें पीड़ितों द्वारा अनुभव किए गए आघात के संदर्भ में साक्ष्य को समझना; ऐसी भाषा से बचना जो किसी पीड़ित की गरिमा को रूढ़िबद्ध, कलंकित या कमतर आंकती हो और यौन अपराधों को शारीरिक स्वायत्तता, व्यक्तिगत गरिमा और व्यक्तिगत अधिकारों के उल्लंघन के रूप में पहचानना, न कि उन्हें पवित्रता, पारिवारिक सम्मान या नैतिकता की धारणाओं के माध्यम से देखना शामिल है। न्यायिक भाषा में संवेदनशीलता की वकालत करते हुए रहाटकर ने कहा कि लैंगिक संवेदनशील फैसलों में निष्पक्षता, गरिमा और सहानुभूति का स्पष्ट प्रतिबिंब होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यौन हिंसा की पीड़िताओं के साथ सम्मान और करुणा का व्यवहार किया जाना चाहिए तथा न्यायिक टिप्पणियों या भाषा में ऐसा कोई संकेत नहीं होना चाहिए जिससे यह प्रतीत हो कि अपराध के लिए पीड़िता स्वयं किसी रूप में जिम्मेदार है।