पूर्व ब्रिटिश पीएम ऋषि सुनक ने दिल्ली में लिया भारतीय मिठाई का स्वाद, सास सुधा मूर्ति दिखीं साथ

नई दिल्ली। ‘ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम’ में शामिल होने के लिए राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक दिल्ली के प्रसिद्ध बंगाली मार्केट में भी दिखे। वो अपनी सास और सांसद सुधा मूर्ति के साथ पहुंचे। दोनों ने ‘बंगाली स्वीट हाउस एंड पेस्ट्री शॉप’ में भारतीय व्यंजनों और मिठाइयों का स्वाद चखा। उनके साथ राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल भी मौजूद रहीं। बंगाली स्वीट हाउस ने इसे अदभुत पल बताया और खुशी का इजहार करते हुए इंस्टाग्राम पर कुछ वीडियो क्लिप्स साझा की। ‘बंगाली स्वीट हाउस आरसी’ के पार्टनर वर्जेश अग्रवाल ने कहा कि उनका आना हमारी पूरी टीम के लिए एक बहुत ही सुखद पल रहा, और ‘बंगाली स्वीट हाउस एंड पेस्ट्री शॉप’ के शानदार सफर में यह एक गौरवमयी पड़ाव था। इसमें सुनक रेस्त्रां में प्रवेश करते देखे जा सकते हैं। यहीं पर सुधा मूर्ति दामाद से मिलती हैं और स्वाति मालीवाल खुद को इंट्रोड्यूस कराती देखी जा सकती हैं। पूर्व ब्रिटिश पीएम मेन्यू कार्ड को गौर से देख चाय, रसमलाई और चाट का ऑर्डर देते देखे जा सकते हैं। तीनों साथ में बैठकर विभिन्न व्यंजनों को चखते और बातें करते देखे जा सकते हैं। सुनक कुछ मिठाइयां भी चखना चाहते थे, लेकिन वो स्पष्ट कहते सुने जा सकते हैं कि वो दोपहर का भोजन करके आए हैं इसलिए रसमलाई ही लेंगे। इससे पहले 2025 में सुनक, दिवाली के आसपास भी इस जगह पर आए थे। ‘बंगाली स्वीट हाउस आरसी’ के पार्टनर वर्जेश अग्रवाल के साथ बातचीत में, उन्होंने उस समय की दिवाली की खूबसूरत सजावट को याद किया। स्वादिष्ट व्यंजनों के लिए आभार जताया। मंगलवार को ‘ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम’ में शामिल होने के लिए सुनक दिल्ली आए थे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की और सार्वजनिक सेवा में उनके 25 साल पूरे होने पर उन्हें बधाई दी थी। बंगाली मार्केट के बीचों-बीच 1937 में स्थापित ‘बंगाली स्वीट हाउस एंड पेस्ट्री शॉप’ लगभग नौ दशकों से बेहतरीन मिठाइयों, नमकीन और बेकरी आइटम्स के लिए एक प्रमुख स्थान बना हुआ है। लाला भीम सैन, लाला रोहताश चंद और लाला बनवारी लाल द्वारा शुरू की गई यह दुकान राजधानी में बंगाली स्वाद लेकर आई और एक सांस्कृतिक पहचान बन गई।

टीएसएमसी के निवेश से अमेरिका बनाएगा दुनिया के आधे सेमीकंडक्टर’, ट्रंप का दावा

वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ताइवान की चिप निर्माता कंपनी टीएसएमसी के एरिजोना में 265 अरब डॉलर के निवेश के बाद अमेरिका दुनिया के लगभग आधे सेमीकंडक्टर (चिप्स) का उत्पादन करेगा। उन्होंने कहा कि दवा बनाने वाली कई बड़ी कंपनियां आयरलैंड, चीन और ब्रिटेन जैसे देशों से अपना उत्पादन वापस अमेरिका ला रही हैं। बुधवार (स्थानीय समय) को एरिजोना के बुलहेड सिटी में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ट्रंप ने टीएसएमसी की परियोजना का श्रेय खुद को दिया। उन्होंने कहा, “मैं ही वह व्यक्ति हूं, जिसने ताइवान की कंपनी टीएसएमसी को यहां लाने का काम किया। यह 265 अरब डॉलर का निवेश है। यहां दुनिया की सबसे बड़ी सेमीकंडक्टर निर्माण सुविधाएं बनने जा रही हैं।” ट्रंप ने कहा क‍ि मेरा मानना है कि हम दुनिया के 50 प्रतिशत चिप्स बनाएंगे। अभी हमारे पास शून्य प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि इस परियोजना के निर्माण कार्य में ही फिलहाल 6,000 से अधिक लोगों को रोजगार मिला हुआ है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी चिप निर्माता कंपनी ग्लोबलफाउंड्रीज भी अपने कारोबार का विस्तार करेगी। उन्होंने कहा, “ग्लोबलफाउंड्रीज न्यूयॉर्क राज्य के अपस्टेट क्षेत्र में दो विशाल नए सेमीकंडक्टर कारखाने बनाने के लिए 21 अरब डॉलर का निवेश करेगी।” ट्रंप ने इंटेल के साथ हुए समझौते का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा क‍ि हमने 72 अरब डॉलर का मुनाफा कमाया। मैंने इंटेल के साथ एक समझौता किया था। उन्होंने टिकटॉक को लेकर भी 10 अरब डॉलर का जिक्र किया, लेकिन यह नहीं बताया कि ये आंकड़े कैसे निकाले गए और इनमें घोषित निवेश तथा वास्तव में खर्च की गई राशि का क्या अंतर है। फार्मास्यूटिकल क्षेत्र पर बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि कई बड़ी अमेरिकी दवा कंपनियां अपना उत्पादन वापस अमेरिका ला रही हैं। एली लिली ने कई मेडिकल प्लांट लगाने की घोषणा की है। मर्क और फाइजर भी ऐसा कर रहे हैं। हमारा पूरा दवा उद्योग वापस अमेरिका आ रहा है। अभी इसका उत्पादन आयरलैंड, चीन और ब्रिटेन में होता है, लेकिन अब यह सब वापस आ रहा है। ये कंपनियां सैकड़ों अरब डॉलर खर्च कर रही हैं। ट्रंप ने दावा किया कि उनकी ‘मोस्ट-फेवर्ड-नेशन’ दवा मूल्य निर्धारण नीति से दवाओं की कीमतों में भारी कमी आई है। दवाओं की कीमतें, जो दुनिया में सबसे ज्यादा थीं, अब सबसे कम हो गई हैं। हमारी दवाओं की कीमतें 50, 60, 70 और यहां तक कि 80 प्रतिशत तक कम हो जाएंगी। हालांकि, उन्होंने इस दावे के समर्थन में कोई आंकड़े या डेटा पेश नहीं किया। ट्रंप ने अमेरिका में 21.2 ट्रिलियन डॉलर के निवेश के वादों का भी उल्लेख किया। उन्होंने तांबे (कॉपर) पर लगाए गए 50 प्रतिशत शुल्क और एरिजोना की रिजॉल्यूशन कॉपर खदान परियोजना का जिक्र करते हुए कहा कि इससे 3,700 नौकरियां पैदा होंगी।

इजरायली राजनयिकों ने भारतीय मिशनों में डाला वोट, 27 अक्टूबर को है संसदीय चुनाव

नई दिल्ली। भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने गुरुवार को नई दिल्ली में मतदान किया। इजरायल में 27 अक्टूबर को संसदीय चुनाव होने हैं, और विदेशों में तैनात राजनयिकों के लिए पहले से वोट डालने की व्यवस्था है। भारत में इजरायली दूतावास ने ‘एक्स’ पोस्ट के जरिए जानकारी दी कि राजदूत अजार ने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लिया। दूतावास ने बताया, “दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में इजरायल के लिए मतदान! राजदूत रूवेन अजार ने 27 अक्टूबर को होने वाले इजरायली चुनावों से पहले नई दिल्ली में अपना वोट डाला। एक दिलचस्प बात: दुनिया भर के दूतावासों में काम करने वाले इजरायली नागरिक पहले ही मतदान कर देते हैं, ताकि उनके वोट समय पर अपने देश पहुंच सकें!” इस बीच, मुंबई में इजरायल के महावाणिज्य दूतावास में तैनात इजरायली राजनयिकों ने भी चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लिया और चुनावों से पहले अपना वोट डाला। मध्य-पश्चिम भारत के लिए इजरायल के महावाणिज्य दूतावास ने ‘एक्स’ पोस्ट किया, “आज, मुंबई में इजरायली महावाणिज्य दूतावास के राजनयिकों ने ‘नेसेट’ (इजरायली संसद) चुनावों के लिए अपना वोट डाला। वे देश का भविष्य तय करने में दुनिया भर के अन्य इजरायली नागरिकों के साथ शामिल हुए। हर वोट मायने रखता है, चाहे वह यरुशलम में डाला गया हो या मुंबई में।” चुनावों में अभी लगभग दो सप्ताह का समय बचा है। इजरायली मीडिया संस्थानों—’मारिव’मारिव’, ‘चैनल 13’ और ‘कान न्यूज ‘न्यूज’—द्वारा जारी किए गए ओपिनियन पोल से पता चलता है कि मुकाबला कांटे का और अनिश्चित है। ‘द यरूशलम पोस्ट’ की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार गादी आइसेनकोट की ‘यशार’ पार्टी तीनों सर्वे में आगे है। हालांकि, ऐसा नहीं लगता कि कोई भी राजनीतिक गुट ‘नेसेट’ में बहुमत के लिए जरूरी 61 सीटें हासिल कर पाएगा। पोलिंग औसत के अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की पार्टी ‘लिकुड’ गुट—जिसमें ओफर विंटर की ‘पीपल ऑफ इजरायल’ पार्टी भी शामिल है—और जायोनी विपक्ष, दोनों को लगभग 52-52 सीटें मिलने का अनुमान है। सर्वे के नतीजों में अंतर और चुनावी थ्रेशोल्ड (न्यूनतम जरूरी वोट प्रतिशत) के करीब रहने वाली पार्टियों का प्रदर्शन यह तय करने में निर्णायक साबित हो सकता है कि अगली सरकार कौन बनाएगा। ‘चैनल 13’ के सर्वे में आइसेनकोट की ‘यशार’ और नेतन्याहू की ‘लिकुड’ दोनों को 20-20 सीटें मिलने का अनुमान है; इसमें आइसेनकोट की पार्टी को एक सीट का नुकसान और ‘लिकुड’ को एक सीट का फायदा होता दिख रहा है। अनुमान है कि नेतन्याहू का गुट 55 सीटें जीतेगा, जबकि आइसेनकोट के खेमे को 50 सीटें मिल सकती हैं। वहीं, इन दोनों गुटों से बाहर की अरब पार्टियों को कुल मिलाकर 15 सीटें मिलने की उम्मीद है। इजरायली कानून के तहत, संसद के लिए आम चुनाव हर चार साल में होने चाहिए। नेतन्याहू फिलहाल एक ऐसे गठबंधन का नेतृत्व कर रहे हैं जो काफी सीमित है और जिसमें धुर-दक्षिणपंथी तथा कट्टर धार्मिक गुट शामिल हैं।

पाक‍िस्‍तान : पेशावर में स्कूल की छत गिरने से 21 की मौत, मलबे में दबे लोगों को न‍िकालने में जुटे बचावकर्मी

इस्लामाबाद। पाक‍िस्‍तान के पेशावर के अफरीदी आबाद इलाके में गुरुवार को एक स्‍कूल की छत ग‍िरने से 21 लोगों की मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, हादसे में जान गंवाने वालों में 20 बच्‍चे और एक महिला शिक्षिका शाम‍िल हैं। वहीं, कई लोग घायल बताए जा रहे हैं। पाकिस्तान के प्रमुख अखबार ‘द डॉन’ की रिपोर्ट के अनुसार, लेडी रीडिंग अस्पताल (एलआरएच) के प्रवक्ता मोहम्मद आसिम ने बताया कि मरने वाले 20 छात्रों में 18 लड़के और 2 लड़कियां शामिल हैं। उनकी उम्र 7 से 12 साल के बीच है। हादसे में एक महिला शिक्षिका की भी जान चली गई। पाकिस्तान के प्रमुख अखबार ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ की रिपोर्ट के मुताबिक प्रवक्ता मोहम्मद आसिम ने मौतों की पुष्टि करते हुए बताया कि अस्पताल में आपातकाल घोषित कर दिया गया है। घायलों का इलाज चल रहा है और कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है। आसिम ने बताया कि हादसे में प्रभावित सभी बच्चों की उम्र 13 साल या उससे कम थी। घटना की सूचना मिलते ही एंबुलेंस और आपदा राहत दल मौके पर पहुंच गए और बचाव अभियान शुरू कर दिया गया। ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ की रिपोर्ट के अनुसार, रेस्क्यू 1122 की एंबुलेंस टीम ने आठ से ज्यादा घायल बच्चों को प्राथमिक उपचार देने के बाद अस्पताल पहुंचाया। बचावकर्मी मलबे में दबे अन्य लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं। अधिकारियों को आशंका थी कि मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है। रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान में इमारतों और छतों के गिरने की घटनाएं कोई नई बात नहीं हैं। सुरक्षा मानकों का कमजोर पालन और घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल अक्सर ऐसे हादसों की वजह बनता रहा है। इसी साल अगस्त में लगातार तीन दिन हुई भारी बारिश के बाद इस्लामाबाद में एक घर की छत गिरने से एक दंपति की मौत हो गई थी जबकि उनकी बेटियां घायल हो गई थीं। इससे पहले जून में लाहौर के काहना इलाके में एक निजी ट्यूशन सेंटर की छत गिरने से 14 बच्चों की मौत हो गई थी। यह हादसा उस घटना के दो महीने बाद हुआ है, जब पंजाब प्रांत के डेरा गाजी खान शहर में एक निजी स्कूल की कक्षा की छत गिरने से चार बच्चों की मौत हो गई थी और 20 लोग घायल हुए थे। जून में ही एक अन्य घटना में, पंजाब प्रांत के गुजरात जिले के खवासपुर इलाके में निर्माणाधीन इमारत की छत गिरने से एक मजदूर की मौत हो गई थी जबकि तीन अन्य घायल हो गए थे। इन लगातार हो रहे हादसों ने पाकिस्तान में निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

गलत खान-पान बिगाड़ रहा है सेहत? पवनमुक्तासन से पाएं तुरंत राहत

नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में गलत खान-पान और घंटों एक जगह बैठकर काम करने की वजह से पेट संबंधी समस्या आम हो गई है। इन समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए ‘पवनमुक्तासन’ बेहद सरल और प्रभावी आसन बताया गया है। यह आसन शरीर में मौजूद दूषित वायु को बाहर निकालकर पेट को साफ रखता है और मन को शांति प्रदान करता है। पवनमुक्तासन संस्कृत के तीन शब्दों से मिलकर बना है… ‘पवन’ यानी हवा, ‘मुक्त’ यानी छोड़ना, और ‘आसन’ यानी योग की मुद्रा। इसका मतलब यह ऐसा योगासन है जो शरीर से गैस या अपच को बाहर निकालने में मदद करता है। यही कारण है कि इसे अंग्रेजी में ‘वाइंड रिलिजिंग पोज’ भी कहा जाता है। पवनमुक्तासन उन योगासनों में एक आसन है, जिसे वायु मुक्ति आसन या ‘गैस रिलीज पोज’ भी कहा जाता है। यह आसन पेट में जमा गैस को बाहर निकालने और पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मददगार साबित होता है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय अनुसार, पवनमुक्तासन वात से भी राहत दिलाता है और पेट को बढ़ने से रोकता है। इससे पेट पर आंतरिक दबाव पड़ता है जिससे आसन पाचन क्रिया में सहायक होता है। पाचन क्रिया के अलावा यह पेल्विक रीजन की मांसपेशियों, लिगामेंट्स और टेंडन्स के लिए बहुत लाभदायक होता है। इसके साथ ही यह आसन शरीर के कोर मसल्स यानी पेट, कमर और पेल्विक हिस्से की मांसपेशियों को टोन करता है। इन हिस्सों की मांसपेशियां जब मजबूत होती हैं, तो शरीर का संतुलन बेहतर होता है और थकावट कम लगती है। यह खासकर महिलाओं के लिए बहुत फायदेमंद है क्योंकि यह आसन पेल्विक हिस्से की ताकत बढ़ाकर मासिक धर्म से जुड़ी परेशानियों में भी मदद कर सकता है। हालांकि, इस आसन को करने से पहले कुछ सावधानियां भी बतरनी पड़ती है जैसे कि पेट, कमर या रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट या सर्जरी हुई है तो इस आसन को करने से बचें। गर्भवती महिलाओं को यह आसन नहीं करना चाहिए। उच्च रक्तचाप या हर्निया के रोगियों को चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए।

बैसाखी पर पूरा आंदोलन चलाना चाहते हैं राहुल गांधी’, अभिजीत दिपके को चाय पार्टी के लिए निमंत्रण पर बोले भाजपा नेता

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके को चाय पार्टी पर बुलाने के लिए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर कटाक्ष किया है। भाजपा नेताओं ने कहा कि राहुल गांधी अब बैसाखी पर पूरा आंदोलन चलाना चाहते हैं। अभिजीत दिपके को राहुल गांधी के हाई-टी निमंत्रण पर समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा, “राहुल गांधी किस को आमंत्रित करते हैं, यह उनका विषय है। लेकिन देश उनकी एक-एक गतिविधि को ध्यान से देख रहा है और समय आने पर देश इसका निर्णय करेगा कि राहुल गांधी किस प्रकार से ‘एंटी-इंडिया’ ताकतों के साथ हाथ मिलाकर के चीजों को खराब करने में जुटे हैं।” भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा, “राहुल गांधी को समझ में आ रहा है कि अब उनके बस का कुछ नहीं है। इसलिए वे बाकी दलों के, बाकी जो संगठन हैं, उनके बैसाखी पर अभी एक पूरा आंदोलन चलाना चाहते हैं।” सीजेपी संस्थापक को लेकर आरपी सिंह ने कहा, “जहां तक अभिजीत दीपके का मामला है, तो स्पष्ट है कि वो आम आदमी पार्टी के समर्थक हैं और आम आदमी पार्टी की ओर से स्पॉन्सर्ड हैं। वो आम आदमी पार्टी के सर्विस विंग की तरह काम कर रहे हैं। इसलिए अब ये आम आदमी पार्टी तय करे कि उन्हें अपनी मर्जी से भेजा है या वे खुद अपनी मर्जी से गए हैं।” दरअसल, मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने यूथ कांग्रेस, एनएसयूआई, कांग्रेस सेवा दल के पदाधिकारियों को चाय पर बुलाया है। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके को भी चाय पार्टी में बुलाने की चर्चाएं हैं। इससे पहले, मंगलवार को राहुल गांधी ने पार्टी नेताओं के साथ अपने आवास पर चाय पर चर्चा की, जहां चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाए जाने की रणनीति बनाई गई।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम चरण में, मार्को रुबियो की भारत यात्रा से पहले हो सकता है ऐलान: सर्जियो गोर

नई दिल्ली। भारत और अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। अधिकांश प्रमुख मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और अब केवल कुछ शेष बिंदुओं पर बातचीत जारी है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने गुरुवार को यह जानकारी दी। नई दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम में बोलते हुए गोर ने कहा कि प्रस्तावित समझौते का व्यापक ढांचा लगभग तैयार हो चुका है और उन्हें भरोसा है कि दोनों देश जल्द ही इसे अंतिम रूप दे देंगे। उन्होंने कहा, “बड़ी तस्वीर, व्यापक ढांचा और प्रमुख मुद्दों पर काम पूरा हो चुका है।” इस बीच, उन्होंने इन वार्ताओं को दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच होने वाली सबसे तेजी से आगे बढ़ रही व्यापार चर्चाओं में से एक बताया। गोर ने कहा कि बातचीत अब उत्पाद-विशिष्ट और शुल्क स्तर से जुड़े मुद्दों तक पहुंच चुकी है, जिसमें अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर और भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल सहित वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। उन्होंने माना कि दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत स्वाभाविक रूप से जटिल होती है, लेकिन दोनों देश समझौते को अंतिम रूप देने के बहुत करीब हैं। द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती पर प्रकाश डालते हुए अमेरिकी राजदूत ने भारत को अमेरिका का एक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार बताया। उन्होंने उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में पहल को आगे बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की सराहना की और कहा कि भारत उन शुरुआती देशों में शामिल रहा है, जिन्हें महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय प्रौद्योगिकी साझेदारियों में आमंत्रित किया गया। गोर ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), प्रौद्योगिकी विकास, स्वच्छ ऊर्जा और असैन्य परमाणु ऊर्जा के क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग दोनों देशों के लिए नए अवसर पैदा करेगा। उन्होंने गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी और माइक्रोन जैसी प्रमुख अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों द्वारा भारत में बढ़ाए जा रहे निवेश का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी दोनों देशों के लिए लाभकारी है और रोजगार सृजन में मदद करती है। रक्षा संबंधों पर उन्होंने कहा कि भारत किसी भी अन्य देश की तुलना में अमेरिका के साथ अधिक संयुक्त सैन्य अभ्यास करता है। हाल के संयुक्त अभ्यासों और भारत में एफ-35 लड़ाकू विमानों की भागीदारी को उन्होंने बढ़ते रणनीतिक विश्वास का प्रमाण बताया। गोर ने यह भी घोषणा की कि अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो जल्द ही भारत की यात्रा करेंगे। उनकी मुंबई और जामनगर में कई बैठकें और कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ते द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों के बीच इस यात्रा का प्रमुख फोकस व्यापार, निवेश और कारोबारी साझेदारियों पर रहेगा। रूस से जुड़े प्रस्तावित अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर उठ रही चिंताओं पर गोर ने कहा कि ये कदम किसी विशेष देश को निशाना बनाने के लिए नहीं हैं, बल्कि संघर्ष समाप्त करने के उद्देश्य से उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर चर्चा अभी जारी है और अंतिम निर्णय आने वाले दिनों में अमेरिकी प्रशासन द्वारा लिया जाएगा।

पाकिस्तान ने कोई भी आतंकी हरकत की तो पिछली बार से भी बड़ा प्रहार होगा : राजनाथ सिंह

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि यदि आगे पाकिस्तान की तरफ से कोई भी आतंकी हरकत हुई तो पिछली बार से भी बड़ा प्रहार होगा। उन्होंने कहा कि जब-जब आतंकवादियों ने भारत की धरती को लहूलुहान करने की कोशिश की, तब-तब भारत ने करारा जवाब दिया है। उस जवाब की गूंज आज तक आतंकवादियों के आकाओं को सुनाई देती होगी। आप याद कीजिए 2016 में उरी आतंकवादी हमले के बाद हमारे वीर जवानों ने सर्जिकल स्ट्राइक की थीं और आतंकवादियों के ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया था। राजनाथ सिंह ने कहा, ”ऑपरेशन सिंदूर के बारे में हम सब जानते हैं। वह अपने आप में तकनीक आधारित युद्ध का एक शानदार नमूना था। इस अभियान में आकाश तीर, आकाश मिसाइल प्रणाली और ब्रह्मोस जैसी उन्नत मिसाइल प्रणालियों के साथ-साथ कई अत्याधुनिक उपकरणों का भी उपयोग किया गया। इसने साबित किया कि हमारी सेनाएं बदलाव को समझ भी रही हैं और उसका आत्मविश्वास के साथ उपयोग भी कर रही हैं।” उन्होंने कहा कि आज भारतीय सेना के शस्त्र भंडार में 175 में से 159 प्रकार के गोला-बारूद स्वदेशी हैं। यानी गोला-बारूद के प्रकारों में हमने 90 प्रतिशत से अधिक आत्मनिर्भरता हासिल कर ली है। रक्षा मंत्री ने कहा कि वर्ष 2013-14 में भारत से होने वाला रक्षा निर्यात केवल 686 करोड़ रुपये का था। वह आज 2025-26 में बढ़कर 38,000 करोड़ रुपए से अधिक हो गया है। करीब 200 देशों को हमारे देश में बने रक्षा उत्पादों का निर्यात किया जा रहा है। भारत का केवल रक्षा निर्यात ही नहीं बढ़ा है। मैं मानता हूं कि इससे भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है। भारत की विश्वसनीयता बढ़ी है। भारतीय तकनीक पर दुनिया का भरोसा बढ़ा है। राजनाथ सिंह ने कहा, “हमारा लक्ष्य एक ऐसे भारत का निर्माण है जो शांति का पक्षधर होने के साथ-साथ अपनी सुरक्षा के प्रति सजग हो और अपनी संप्रभुता, अखंडता तथा राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम भी हो। देश की सुरक्षा केवल हमारी सेनाओं की तैयारी की तस्वीर मात्र नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र के संकल्प और सामर्थ्य का भी प्रतिबिंब है। शांति के प्रति हमारी प्रतिबद्धता पूरी तरह बरकरार है, मगर भारत की सेनाएं हर चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। जब भारत अपनी आजादी के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब वह केवल एक विकसित देश ही नहीं होगा, बल्कि प्रौद्योगिकी, अर्थव्यवस्था, रक्षा और ऐसे विभिन्न क्षेत्रों में आत्मविश्वास के साथ दुनिया का नेतृत्व भी करेगा। आज हम एक ऐसा रक्षा तंत्र तैयार कर रहे हैं, जो देश की सुरक्षा को मजबूत करे, अर्थव्यवस्था को गति दे और वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था में भारत की भूमिका को और अधिक मजबूत बनाए। एक समय था, जब रक्षा क्षेत्र में छोटी-छोटी और बड़ी-बड़ी हर जरूरत के लिए हम बाहर की ओर देखते थे। हम आयात पर निर्भर थे। लेकिन आज तस्वीर बदल रही है। आज हम छोटी जरूरतों से लेकर बड़े और अत्याधुनिक रक्षा तंत्र तक, अपने देश में बनाने की क्षमता विकसित कर रहे हैं।” रक्षा मंत्री का कहना है कि आज रक्षा खरीद में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ काम हो रहा है। हमारी रक्षा क्षमताओं का आधुनिकीकरण भी किया जा रहा है और स्वदेशीकरण भी। भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी उद्यमशीलता की भावना है। आज रक्षा उत्पादन केवल सार्वजनिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। आज हमारे साथ रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम हैं, जो कंपनीकरण के बाद घाटे में चलने वाली इकाइयों की जगह लाभ कमाने वाली इकाइयां बन चुके हैं। 16 हजार से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम हैं। हजारों आपूर्ति इकाइयां हैं। देशभर में नवाचार केंद्र हैं। यही भारत का नया रक्षा औद्योगिक परिवार है। उन्होंने कहा कि आज रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन केवल रक्षा अनुसंधान और विकास करने वाला संस्थान नहीं है। वह उद्योगों, विश्वविद्यालयों, नवोदित उद्यमों और वैज्ञानिकों को जोड़ने वाला राष्ट्रीय नवाचार मंच बन चुका है। हमारा स्पष्ट लक्ष्य है कि हमारे नवोदित उद्यमों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को मजबूती दी जाए। इसके लिए रक्षा मंत्रालय ने इन उद्यमों से 2,400 करोड़ रुपए से अधिक की खरीदारी करने की मंजूरी दी है और नई तकनीक के विकास के लिए 1,500 करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। सेनाओं के आधुनिकीकरण के लिए निर्धारित बजट का 75 प्रतिशत हिस्सा भारतीय उद्योगों से खरीद के लिए सुरक्षित किया गया है। जो नई रक्षा खरीद प्रक्रिया लाई जा रही है, उसमें कई बड़े सुधार किए गए हैं, जिनसे देश में रक्षा उत्पादन को नई रफ्तार और ताकत मिलेगी।

सीजेपी आंदोलन ‘अरब स्प्रिंग’ जैसा, युवा बेहद समझदार : सैम पित्रोदा

नई दिल्ली। इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के प्रमुख सैम पित्रोदा ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के विरोध-प्रदर्शन का समर्थन किया है। उन्होंने इसे “निडर विपक्ष, साहस और जागरूकता” का प्रतीक बताते हुए आंदोलन की तुलना ‘अरब स्प्रिंग’ से की। मंगलवार को उन्होंने कहा कि भले ही कभी-कभी युवाओं से गलतियां हो गई हों, लेकिन अपनी आवाज बुलंद करने के लिए उनकी सराहना की जानी चाहिए। ‘अरब स्प्रिंग’ 2010 और 2011 में मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका में लोकतंत्र समर्थक विरोध प्रदर्शनों और विद्रोहों की एक लहर थी, जिसने इस क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही तानाशाही सरकारों को चुनौती दी थी। इसकी शुरुआत ट्यूनीशिया और मिस्र में हुए विरोध प्रदर्शनों से हुई। परिणामस्वरूप वहां की सरकारों को उखाड़ फेंका गया, जिससे अन्य अरब देशों में भी इसी तरह के प्रयास शुरू हुए थे। आईएएनएस को दिए एक विशेष साक्षात्कार में, पित्रोदा ने कहा, “मुझे लगता है कि छात्र आंदोलन और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ आंदोलन निडर विरोध, साहस और जागरूकता को लेकर है। अपने एक लेख में, मैंने इसे ‘भारतीय मानसून’ कहा था, जो ‘अरब स्प्रिंग’ से काफी मेल खाता है। इसका श्रेय अपनी आवाज बुलंद करने वाले इन युवाओं को जाता है। कुछ बातें सही होती हैं, कुछ गलत, और यह ठीक है।” ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के विरोध प्रदर्शनों के दौरान कथित तौर पर अभद्र भाषा के इस्तेमाल पर हुए विवाद पर, पित्रोदा ने कहा कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने तेज आवाज में बात की और अनुचित भाषा का इस्तेमाल किया, लेकिन उनके गुस्से ने चर्चा के नए भी अवसर खोल दिए। उन्होंने कहा, “कुछ लोगों ने तेज आवाज में बात की, कुछ ने गलत भाषा का इस्तेमाल किया। मेरी नजर में, यह ठीक है। ऐसा नहीं है कि मैं इसका समर्थन करता हूं, लेकिन आप उनके गुस्से को देख सकते थे, और इसी आक्रोश ने वास्तव में कई नए अवसर पैदा किए।” जब उनसे इस बारे में पूछा गया कि क्या ‘कॉकरोच जनता पार्टी’, ‘आम आदमी पार्टी’ (आप) से निकली है, तो पित्रोदा ने कहा कि उनके पास इस दावे पर टिप्पणी करने के लिए पर्याप्त जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता। मुझे इन चीजों के बारे में जानकारी नहीं है, और मुझे कोई अंदाजा नहीं है। वे जो कहते हैं, मैं उसे उसी रूप में स्वीकार करता हूं। जहां तक मैं समझता हूं, वे युवाओं का एक समूह है, जो बहुत समझदार है। मैं उन्हें कभी-कभी टीवी पर देखता हूं। मुझे उन पर गर्व है। मुझे उन्हें देखकर अच्छा लगता है।” पित्रोदा ने युवा प्रदर्शनकारियों को अपने विचारों को स्पष्ट रूप से रखने, जटिल व्यवस्था के बीच काम करने और साहस दिखाने की क्षमता की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी बात रखने की आजादी मिलनी चाहिए, भले ही वे इस दौरान गलतियां ही क्यों न कर बैठें। उन्होंने कहा, “वे गलतियां कर सकते हैं, कोई बात नहीं। लेकिन वे अच्छे हैं। हमें अपने युवाओं पर गर्व होना चाहिए। जब ​​मैं उन्हें देखता हूं, तो मुझे कुछ उम्मीद नजर आती है। मुझे अच्छा लगता है जब लोग संघर्ष करते हैं और अपनी बात रखते हैं। कभी-कभी, वे गलत भी हो सकते हैं। यह भी ठीक है। लेकिन सबसे अहम बात यह है कि वे डर को दूर कर पाए और उन्होंने हिम्मत दिखाई।” महात्मा गांधी के साहस पर जोर देने की बात को याद करते हुए, पित्रोदा ने कहा कि बदलाव लाने और अपनी आवाज उठाने के लिए लोगों को डर से बाहर निकलना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में हुए छात्र आंदोलनों ने अल्पसंख्यकों, अन्य पिछड़ा वर्गों (ओबीसी), दलितों और आदिवासी समुदायों को अपनी बात रखने के लिए प्रेरित किया है। ये समुदाय अक्सर खुद को आर्थिक अवसरों और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं से बाहर महसूस करते हैं। उन्होंने कहा, “छात्र आंदोलन ने उनमें एक नई ऊर्जा भर दी है। अब वे भी अपनी बात रख सकते हैं। उन्हें अब महसूस हो रहा है कि सिर्फ छात्र ही नहीं बल्कि उनकी भी अपनी आवाज है।” यूट्यूबर ध्रुव राठी के बारे में बात करते हुए, पित्रोदा ने उन्हें एक होनहार युवा बताया, जिनके बहुत सारे फॉलोअर्स हैं। उन्होंने विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने और अपने विचार रखने के उनके अधिकार का समर्थन किया। उन्होंने कहा, “मैं उन्हें अच्छी तरह जानता हूं। मुझे लगता है कि वह एक होनहार युवा हैं। उनके बहुत सारे फॉलोअर्स हैं, और एक भारतीय नागरिक के तौर पर उन्हें विरोध प्रदर्शन में शामिल होने और अपने विचार रखने का पूरा अधिकार है। वह भी एक लड़ाई लड़ रहे हैं, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है। मैं इसके लिए उनका सम्मान करता हूं। मैं उनके साहस की सराहना करता हूं, और मुझे लगता है कि हमें उनके जैसे और भी लोगों की जरूरत है और वह अच्छे इंसान हैं।

तमिलनाडु: आयुध पूजा की छुट्टियों से पहले बस और हवाई किराए में बड़ी बढ़ोतरी

चेन्नई। तमिलनाडु में नवरात्रि के नौवें दिन (महानवमी) के अवसर पर मनाई जाने वाली आयुध पूजा से पहले ही बस और हवाई किराए बढ़ गए हैं। आयुध पूजा की छुट्टियों के लिए चेन्नई से बाहर जाने वाले यात्रियों को परिवहन के लिए काफी ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। निजी बसों का किराया सामान्य स्तर से कई गुना बढ़ गया है, और कई रूटों पर हवाई किराए में भी भारी उछाल आया है। चार दिनों की छुट्टियों का सिलसिला 17 और 18 अक्टूबर को वीकेंड के साथ शुरू हो रहा है, जिसके बाद 19 अक्टूबर को आयुध पूजा और 20 अक्टूबर को विजयादशमी मनाया जाएगा। ट्रेनों में रिजर्वेशन पहले ही फुल हो चुके हैं, इसलिए अपने गृहनगर जाने वाले कई लोग अब बस और फ्लाइट की तलाश कर रहे हैं। यात्रियों की ओर से शिकायत की गई है कि त्योहारों की भीड़ को देखते हुए चेन्नई से दक्षिणी जिलों और अन्य जगहों के लिए प्राइवेट बसों के किराए में भारी बढ़ोतरी हुई है। इससे उन लोगों के लिए यात्रा काफी महंगी हो गई है, जिन्होंने अभी तक टिकट बुक नहीं कराए हैं। चेन्नई-कन्याकुमारी रूट पर, जो टिकट आमतौर पर 800 से 1,200 रुपये के बीच मिलते थे, उनकी कीमत अब 3,420 रुपये तक पहुंच गई है। तिरुनेलवेली का किराया लगभग 1,300 रुपये से बढ़कर 3,000 रुपये हो गया है जबकि मदुरै का किराया 800 रुपये से बढ़कर 2,500 रुपये हो गया है। चेन्नई-कोयंबटूर रूट पर जो किराया आमतौर पर 600 से 1,000 रुपये के बीच होता था, वह अब 3,500 रुपये तक पहुंच गया है, जिससे छुट्टियों में यात्रा करने वालों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। हवाई यात्रियों को भी किराए में भारी बढ़ोतरी का सामना करना पड़ रहा है, खासकर 16 और 17 अक्टूबर को क्योंकि लंबी छुट्टियों से पहले मांग काफी बढ़ गई है। 16 अक्टूबर के लिए चेन्नई-मदुरै फ्लाइट के टिकट जो लगभग 3,500 से 5,500 रुपये में मिल रहे थे, 17 अक्टूबर के लिए उनकी कीमत 12,026 से 18,626 रुपये के बीच बताई जा रही है। चेन्नई-कोयंबटूर रूट पर जहां किराया आमतौर पर 3,500 से 4,500 रुपये के आसपास होता है, वह 16 और 17 अक्टूबर के लिए लगभग 11,000 रुपये तक पहुंच गया है। थूथुकुडी के टिकट जो आमतौर पर 4,000 से 5,500 रुपये के बीच मिलते थे, अब 11,736 से 13,626 रुपये में मिल रहे हैं। चेन्नई-कोलकाता का किराया जो आमतौर पर 6,000 से 7,000 रुपये के बीच रहता था, अब बढ़कर 14,117 रुपये हो गए हैं। किराये में यह बढ़ोतरी तमिलनाडु के भीतर छोटे रूटों पर भी देखने को मिल रही है। चेन्नई-तिरुचिरापल्ली के टिकट जिनकी कीमत आमतौर पर 2,300 से 3,500 रुपये के बीच होती है 16 और 17 अक्टूबर के लिए 6,500 से 9,500 रुपये में मिल रहे हैं। चेन्नई-सलेम रूट पर भी किराया लगभग 1,900-3,800 रुपये से बढ़कर 5,600 से 12,000 रुपये के बीच पहुंच गया है।