कोलकाता: रियल मैड्रिड और बार्सिलोना के लीजेंड्स के बीच होगा मुकाबला

कोलकाता। फुटबॉल के दीवाने शहर कोलकाता के फैंस को जल्द ही एक बड़ी सौगात मिलने वाली है। 25 नवंबर को विवेकानंद युवा भारती क्रीड़ांगन में रियल मैड्रिड और बार्सिलोना के लीजेंड्स के बीच एक मुकाबला होने वाला है। इसकी घोषणा पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में करेंगे। दुनिया के दो सबसे बड़े फुटबॉल क्लबों के पुराने खिलाड़ियों के बीच प्रस्तावित इस मैच को लेकर कोलकाता के फुटबॉल फैंस के बीच रोमांच है। दोनों टीमों की कोलकाता में बड़ी फैन फॉलोइंग है। जानकारी के मुताबिक, इस मैच में लुइस फिगो, स्पेन के पुराने गोलकीपर इकर कैसिलास और बार्सिलोना के महान खिलाड़ी कार्ल्स पुयोल के शामिल होने की उम्मीद है। फिलहाल इस मैच से जुड़े खिलाड़ियों और अन्य पहलुओं की जानकारी नहीं दी गई है। ब्राजील और उरुग्वे के साथ भारतीय फुटबॉल टीम के मैच हाल ही में देखने वाले कोलकाता के फुटबॉल फैंस के लिए रियल मैड्रिड और बार्सिलोना के लीजेंड्स के बीच का मैच देखना किसी सपने के सच होने जैसा है। यह मुकाबला इस खेल के सबसे कड़े मुकाबलों में से एक की पुरानी यादों और रोमांच के इर्द-गिर्द बना होगा। भारत ने पिछली बार 6 अप्रैल, 2025 को नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में लीजेंड्स के एल क्लासिको की मेजबानी की थी। रियल मैड्रिड लीजेंड्स ने 2-0 से जीत हासिल की, जिसमें फर्नांडो मोरिएंटेस और डेविड बैरल ने गोल किए। इस मुकाबले में मैड्रिड के लिए फिगो, माइकल ओवेन और पेपे जैसे कई जाने-माने नाम शामिल थे, जबकि बार्सिलोना के लिए जावी हर्नांडेज़, रिवाल्डो और पुयोल ने गोल किए। टिकटों की बिक्री, किक-ऑफ का समय और ब्रॉडकास्ट की व्यवस्था के बारे में जानकारी बाद में मिलने की उम्मीद है। कोलकाता के फुटबॉल फैंस के लिए साल्ट लेक स्टेडियम में पुराने जमाने के स्टार्स को देखने की उम्मीद 25 नवंबर को होने वाले मैच ने बढ़ा दी है।

एनपीसीआई का बड़ा ऐलान, दीपावली के बाद लागू होगा यूपीआई एमडीआर;तारीख अभी तय नहीं

नई दिल्ली। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) ने मंगलवार को ऐलान किया कि प्रस्तावित यूपीआई एमडीआर (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) फ्रेमवर्क को दीपावली के बाद लागू किया जाएगा। हालांकि, इसके लिए तारीख का ऐलान किया जाना बाकी है। एनपीसीआई की ओर से जारी नोटिफिकेशन में कहा गया, “यूपीआई और सर्विसेज स्टीयरिंग कमिटी ने आज फैसला किया कि त्योहारों के सीजन को ध्यान में रखते हुए, चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) यूपीआई ट्रांजैक्शन पर एमडीआर को दीपावाली के तुरंत बाद लागू किया जाएगा। इसकी तारीख की घोषणा अलग से की जाएगी।” यह फैसला ऐसे समय पर लिया गया है जब व्यापारी संगठनों, फिनटेक और पेमेंट कंपनियों ने एनपीसीआई से यूपीआई फ्रेमवर्क के लागू होने की तारीख आगे बढ़ाने का अनुरोध किया था। उन्होंने त्योहारों के दौरान होने वाली अधिक बिक्री पर इसके प्रभाव को लेकर चिंता जताई थी। पिछले महीने, यूपीआई स्टीयरिंग कमिटी ने 2,000 रुपए से ज्यादा के ट्रांजैक्शन के लिए यूपीआई एमडीआर को 0.4 प्रतिशत या 40 बेसिस पॉइंट्स तय किया था। एमडीआर वह फीस है जो डिजिटल पेमेंट प्रोसेस करने के लिए व्यापारियों से ली जाती है। 0.4 प्रतिशत फीस का मतलब है कि हर 2,000 रुपए के खर्च पर 8 रुपए या यूपीआई से किए गए हर 10,000 रुपए के पेमेंट पर 40 रुपए का अतिरिक्त खर्च। सरकार की ओर से साफ किया जा चुका है कि यह यूपीआई एमडीआर केवल व्यापारियों से लिया जाएगा और व्यापारी इसे ग्राहकों को किसी भी तरीके से पास नहीं कर सकते हैं। इससे पहले, विश्व बैंक समूह के कार्यकारी निदेशक नीलकंठ मिश्रा ने कहा था कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) लेनदेन पर एमडीआर की अनुमति देना एक अधिकार प्रदान करने वाला नियम होगा। हालांकि, भुगतान क्षेत्र में कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण इससे शुल्क में बड़ी बढ़ोतरी होने की आशंका कम है। मिश्रा ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि इससे बड़े पैमाने पर शुल्क में बढ़ोतरी होगी, क्योंकि यह एक मुक्त और प्रतिस्पर्धी बाजार है। ऐसी कंपनियां भी थीं, जो एमडीआर शुल्क नहीं ले पाने के बावजूद अपना कारोबार चलाने में सक्षम रहीं और बाजार में बनी रहीं।

‘हनुमान अंश’ के बाद अब गोलू देवता की कहानी पर बनी फिल्म, क्या ‘बाला गोरिया’ रचेगी बॉक्स ऑफिस पर इतिहास?

मुंबई। धार्मिक आस्था और भारतीय लोककथाओं पर आधारित फिल्मों की चर्चा के बीच अब उत्तराखंड के गोलू देवता की कहानी बड़े पर्दे पर आने वाली है। फिल्म का नाम ‘बाला गोरिया’ है, जो कुमाऊं क्षेत्र में न्याय के देवता के रूप में पूजे जाते हैं। गोलू देवता की लोकगाथा पर आधारित ये फिल्म ऐसे समय में आ रही है, जब नीम करोली बाबा के जीवन से प्रेरित फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने बॉक्स ऑफिस पर ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। ट्रेड रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘हनुमान अंश’ फिल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 435 करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है। इसकी शुरुआत भले ही उम्मीद के मुताबिक नहीं रही हो, लेकिन बाद में फिल्म को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला। अब ‘बाला गोरिया’ को लेकर भी मेकर्स ऐसी ही उम्मीद लगाए बैठे हैं। ‘हनुमान अंश’ में नीम करोली बाबा की कहानी है, जिनके बारे में देश और विदेश में बड़ी संख्या में लोग जानते हैं। इसके मुकाबले गोलू देवता की पहचान खास तौर पर उत्तराखंड और कुमाऊं क्षेत्र में ज्यादा है। इसलिए ‘बाला गोरिया’ के मेकर्स को दूसरे राज्यों के दर्शकों तक अपनी कहानी पहुंचाने के लिए हाई प्रमोशन की जरूरत होगी। शुरुआती रिपोर्ट्स की मानें, तो यह फिल्म 16 अक्टूबर को रिलीज होने वाली थी, लेकिन ‘हनुमान अंश’ की कमाई को देखते हुए इसे टाल दी गई। अब फिल्म के नवंबर में रिलीज होने की संभावना है। ‘बाला गोरिया’ की कहानी उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र के लोकदेवता गोलू देवता से जुड़ी है। उन्हें गोल्ज्यू महाराज और न्याय के देवता के नाम से भी जाना जाता है। अल्मोड़ा के चितई, चंपावत और घोड़ाखाल में उनके प्रसिद्ध मंदिर हैं। स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक, गोलू देवता के दरबार में लोग अपनी समस्याएं और शिकायतें चिट्ठियों में लिखकर अर्पित करते हैं। मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु मंदिर में घंटियां चढ़ाकर आभार जताते हैं। लोककथा के मुताबिक, गोलू देवता का जन्म राजपरिवार में हुआ था। बताया जाता है कि परिवार के भीतर हुई साजिशों के बावजूद वह जीवित बच गए और आगे चलकर न्यायप्रियता के लिए पहचाने गए। इसी वजह से लोगों के बीच उनकी छवि ऐसे देवता की बनी, जिनसे अन्याय के खिलाफ न्याय की गुहार लगाई जाती है।

तंग गलियों और आस-पास संवेदनशील इमारतों की वजह से जंतर-मंतर विरोध-प्रदर्शन के लिए उपयुक्त नहीं था: किरण बेदी

नई दिल्ली। पूर्व आईपीएस अधिकारी और पुडुचेरी की पूर्व उप-राज्यपाल किरण बेदी ने मंगलवार को कहा कि संकरी गलियों, संवेदनशील इमारतों और सरकारी दफ्तरों के पास में होने की वजह से जंतर-मंतर विरोध-प्रदर्शन की जगह के तौर पर ठीक नहीं है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जब रामलीला मैदान में प्रदर्शन की इजाजत दी जाए, तो वहां सुरक्षा और कामकाज का साफ-सुथरा प्लान होना चाहिए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए किरण बेदी ने याद किया कि कैसे दशकों में दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन के लिए तय जगहें बदलती रहीं। उन्होंने कहा, “दिल्ली शहर में पुलिसिंग के अपने कार्यकाल के दौरान, मैंने विरोध-प्रदर्शन की जगहों को बदलते देखा है। प्रधानमंत्री आवास, तीन मूर्ति मार्ग (तब श्रीमती गांधी का आवास) से लेकर 1970 के दशक की शुरुआत में लुटियंस दिल्ली की सड़कों तक, 1980 के दशक में इंडिया गेट, बोट क्लब और फिर जंतर-मंतर तक।” बेदी ने कहा, “हर शहर को लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति (जिसे हम विरोध-प्रदर्शन भी कहते हैं) के लिए एक खुली जगह की जरूरत होती है, लेकिन अक्सर इसकी व्यवस्था करना भूल जाते हैं। शहर के योजनाकार कृपया ध्यान दें; तंग गलियों और संवेदनशील इमारतों व दफ्तरों के पास होने के कारण जंतर-मंतर विरोध-प्रदर्शन की जगह के तौर पर सबसे कम उपयुक्त था।” उन्होंने कहा, “कनॉट प्लेस कॉम्प्लेक्स जैसे मशहूर कमर्शियल इलाके के अलावा, मुझे लगता है कि उस समय प्रशासन ने वह फैसला लेने में गलती की और इतने समय तक उसे सुधारा नहीं। इसके नतीजे सबके सामने हैं। गृह मंत्रालय ने रामलीला मैदान और दूसरी जगहों की पहचान की है। शायद इस बदलाव के लिए अदालती दखल की जरूरत थी। अब हमें रामलीला मैदान के लिए एक साफ सुरक्षा और कामकाज की योजना चाहिए, जिसे मंजूरी देते समय बताया जाए।” किरण बेदी की ओर से ये बातें दिल्ली पुलिस की ओर से सोमवार को जारी एक आदेश के बाद सामने आईं, जिसमें जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन के लिए तय जगहों की सूची से हटा दिया गया और प्रदर्शनों के लिए तीन वैकल्पिक जगहों की पहचान की गई। दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने 11 अक्टूबर को स्टैंडिंग ऑर्डर जारी कर रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और सीबीडी ग्राउंड को विरोध-प्रदर्शन के लिए नई जगहें घोषित किया है। जंतर-मंतर सेंट्रल दिल्ली में है, जो संसद भवन से मुश्किल से एक किलोमीटर दूर है। उत्तरी दिल्ली में बुराड़ी ग्राउंड लगभग 23 किलोमीटर दूर है, जबकि शाहदरा में सीबीडी ग्राउंड लगभग 12 किलोमीटर दूर है। रामलीला मैदान जंतर-मंतर से करीब तीन किलोमीटर दूर है। सरकार के इस फैसले की विपक्षी पार्टियों और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की ओर से आलोचना की गई है।

राहुल गांधी के दिल्ली मार्च में गुंडागर्दी और अहंकार का खुला प्रदर्शन: विजयेंद्र

बेंगलुरु। कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष और विधायक बी.वाई. विजयेंद्र ने मंगलवार को दिल्ली में कांग्रेस के नेतृत्व में निकाले गए विरोध मार्च को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने इस दौरान अहंकार और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति अनादर का प्रदर्शन किया। विजयेंद्र ने कहा कि इस घटनाक्रम ने संवैधानिक मर्यादाओं के प्रति कांग्रेस के सम्मान पर सवाल खड़े किए हैं। विजयेंद्र ने एक बयान में विरोध प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी के व्यवहार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार का कुर्ता पकड़कर उन्हें पीछे भीड़ में धकेल दिया। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं को कोहनी मारने और एक महिला पत्रकार के साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की किए जाने की खबरों का भी जिक्र किया। भाजपा नेता ने इस घटनाक्रम को “गुंडागर्दी, अहंकार और चाटुकारिता का खुला प्रदर्शन” करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सामने आए दृश्यों से राहुल गांधी की असहिष्णुता और विशेषाधिकार की भावना जाहिर होती है। विजयेंद्र ने कहा कि राहुल गांधी के व्यवहार में पार्टी नेताओं की गरिमा, निर्वाचित मुख्यमंत्री के पद और पत्रकारों की सुरक्षा के प्रति कोई खास सम्मान दिखाई नहीं दिया। उन्होंने कहा, “यह वही सत्तावादी मानसिकता है, जिसे भारत ने पांच दशक पहले आपातकाल के दौरान देखा था। उस समय उनकी दादी की सरकार ने लोकतांत्रिक स्वतंत्रताओं को कुचल दिया था और संस्थाओं को अपने अधीन करने की कोशिश की थी।” विजयेंद्र ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में लगाए गए आपातकाल का जिक्र करते हुए राहुल गांधी के व्यवहार की तुलना उस दौर से की। भाजपा नेता ने संवैधानिक संस्थाओं के प्रति कांग्रेस के रवैये पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक निराशा को न्यायपालिका पर दबाव बनाने के प्रयास में बदलने की कोशिश कर रही है। विजयेंद्र ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की ओर से कथित तौर पर मुलाकात से इनकार किए जाने के बावजूद कांग्रेस नेताओं के सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने की भी आलोचना की। उन्होंने इस कवायद के उद्देश्य पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि इस मामले से संबंधित सौंपे गए याचिका-पत्र को कथित तौर पर 14 खामियों के साथ वापस कर दिया गया था। उन्होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट राजनीतिक नाटकबाजी का मंच नहीं है और संविधान को किसी एक विशेषाधिकार प्राप्त राजनीतिक परिवार की चुनावी निराशा के सामने बंधक नहीं बनाया जा सकता।” विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व संवैधानिक संस्थाओं को पार्टी के विस्तार के रूप में देख रहा है। उन्होंने कहा कि कोई भी राजनीतिक नेता या परिवार संविधान और कानून से ऊपर नहीं है। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि भारत का लोकतंत्र किसी एक राजनीतिक परिवार की महत्वाकांक्षाओं से कहीं बड़ा है। उन्होंने विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर सत्तावादी रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवैधानिक संस्थाओं और उनकी गरिमा का सम्मान किया जाना चाहिए।

राहुल गांधी की याचिका पर मंगलवार को नहीं होगी सुनवाई, सप्लीमेंट्री लिस्ट में शामिल नहीं

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और इंडिया ब्लॉक के 11 नेताओं द्वारा चुनाव आयोग के खिलाफ दायर याचिका पर मंगलवार को सुनवाई नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट की ओर से 13 अक्टूबर के लिए जारी सप्लीमेंट्री लिस्ट में राहुल गांधी की याचिका शामिल नहीं हुई है। दरअसल, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से चुनाव आयोग के खिलाफ दायर याचिका में सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने 14 कमियां पाई हैं। इन कमियों को दूर करने के बाद ही यह मामला सुनवाई के लिए लिस्ट हो सकेगा। रजिस्ट्री के अनुसार, याचिका में कई तकनीकी और दस्तावेजी खामियां हैं। इनमें लोगों को नाम से प्रतिवादी बनाना, पुराने फैसले की कॉपी न लगाना और 9 याचिकाकर्ताओं का वकालतनामा न होना शामिल है। इसके अलावा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आईडी कार्ड की धुंधली कॉपी दी गई है और कोर्ट को 220 रुपए कोर्ट फीस कम मिली है। रजिस्ट्री ने साफ कहा है कि धुंधले दस्तावेज और बाकी कमियों को ठीक करने के बाद ही केस को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। इससे पहले राहुल गांधी की कानूनी टीम ने भारतीय चुनाव आयोग की अनियमितताओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक अहम याचिका दाखिल की थी। याचिका को सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में दर्ज कर लिया गया था। यह याचिका 12 अक्टूबर को शाम 4:37 बजे फाइल की गई थी। यह याचिका अकेले राहुल गांधी की नहीं, बल्कि विपक्षी ‘इंडिया’ ब्लॉक के 11 बड़े नेताओं की ओर से संयुक्त रूप से दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ताओं में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, सौगत रॉय, अखिलेश यादव, तेजस्वी प्रसाद यादव, संजय राउत, एमए बेबी, डी. राजा, महुआ माजी, सुप्रिया सुले और ई. टी. मोहम्मद बशीर शामिल थे। याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी की जिम्मेदारी अधिवक्ता प्रसन्ना एस. की थी। याचिका में कुल चार पक्षों को प्रतिवादी बनाया गया था। इनमें पहला प्रतिवादी भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई), जबकि अन्य तीन प्रतिवादी चुनाव आयोग के अधिकारी ज्ञानेश कुमार, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी थे। सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी ने कल यानी मंगलवार को लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों को अपने आवास पर चाय के लिए बुलाया है। कल दोपहर इंडिया गठबंधन के नेताओं की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी, जिसके बाद चाय का कार्यक्रम रखा गया है। माना जा रहा है कि इस बैठक में चुनाव आयोग के खिलाफ आगे की रणनीति पर चर्चा होगी।

दिल्ली में प्रदूषण पर लगाम लगाने की तैयारी तेज, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आईसीसीसी का किया निरीक्षण

नई दिल्ली। दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने और प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए दिल्ली सरकार ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव, केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा और दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) का निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने प्रदूषण की निगरानी, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और वायु गुणवत्ता से संबंधित व्यवस्थाओं की जानकारी दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ पांच सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चार्जिंग स्टेशनों की शुरुआत की। इसके अलावा, 13 नए कंटीन्यूअस एंबिएंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशनों का उद्घाटन भी किया गया। सरकार का उद्देश्य प्रदूषण की निगरानी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना और वायु गुणवत्ता से जुड़े आंकड़ों की सटीकता बढ़ाना है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के सहयोग से दिल्ली सरकार प्रदूषण के खिलाफ लगातार काम कर रही है। केंद्र सरकार के मार्गदर्शन में दिल्ली अब इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के माध्यम से रियल-टाइम मॉनिटरिंग की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि यह दिल्ली के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से प्रदूषण से संबंधित परिस्थितियों पर लगातार नजर रखने और आवश्यक कदम उठाने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने इसे प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों में एक अहम उपलब्धि बताया। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) की एक बैठक में दिल्ली सरकार की ओर से इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का प्रस्ताव रखा गया था। उन्होंने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को निर्धारित समय-सीमा से पहले इस केंद्र को शुरू करने के लिए बधाई दी। यादव ने कहा कि दिल्ली और पूरे एनसीआर में प्रदूषण से निपटने के लिए सबसे पहली आवश्यकता वायु गुणवत्ता सूचकांक की सटीक जानकारी हासिल करना है। इसके लिए एनसीआर के अधिकारियों को पांच किलोमीटर के अंतराल पर वायु गुणवत्ता सूचकांक मॉनिटरिंग उपकरण लगाने के निर्देश दिए गए थे, ताकि वायु गुणवत्ता की अधिक सटीक जानकारी मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली में वायु प्रदूषण के संकट से निपटने के लिए सभी लोगों को जिम्मेदारी के साथ काम करना होगा। सरकार ने इस दिशा में अभियान शुरू किया है और नागरिकों से सहयोग की अपील की है। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि एसआईआर कोई नई प्रक्रिया नहीं है, बल्कि निर्वाचन आयोग व्यापक दिशानिर्देशों के तहत इसे संचालित करता है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव में हार के बाद विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची से गलत नाम हटाने की मांग की थी, लेकिन अब सूची में सुधार की प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं। मतदाता सूची को दुरुस्त करने की प्रक्रिया पर आपत्ति जताना उचित नहीं है। केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने दिल्ली की जनता को ऐसी सरकार चुनने के लिए धन्यवाद दिया, जो उनके अनुसार, पहले दिन से ही राजधानी के विकास के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारें प्रदूषण के मुद्दे पर ठोस कार्रवाई करने के बजाय पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश पर आरोप लगाती रही थीं। मल्होत्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में सरकार ने जलभराव और प्रदूषण जैसी समस्याओं पर काम शुरू किया है। इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का संचालन इसी दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है।

नवरात्र : पश्चिम बंगाल में हैं सर्वाधिक शक्तिपीठ, तांत्रिक साधना के लिए भी माना जाता है प्रमुख केंद्र

कोलकाता। देशभर में धूमधाम से नवरात्र का पर्व मनाया जा रहा है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां के मंदिरों में जाकर उनके दर्शन कर पूजन-अर्चन करते हैं। पश्चिम बंगाल में माता के सबसे अधिक शक्तिपीठ हैं, जहां बड़ी श्रद्धा के साथ श्रद्धालु मां के दर्शन करने जाते हैं। पूर्व मेदिनीपुर जिले के तामलुक में देवी कपालिनी का मंदिर है। यहां माता सती की बायीं एड़ी गिरी थी। यहां मां को भीमरूपा (वर्गा भीमा) के रूप में पूजा जाता है। यहां भगवान शिव ‘सर्वानंद’ रूप में विराजमान हैं। ‘कपालिनी’ का अर्थ मुंड है कि वह जो मुंड या कपाल (खप्पर) धारण करती हैं। मां कपालिनी की उपासना से भक्तों को साहस, शक्ति, और सभी प्रकार के भय, संकट तथा नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है। हुगली जिले के रत्नावली शक्तिपीठ में मां देवी कुमारी का मंदिर है। यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। यहां माता सती का दायां कंधा गिरा था। यहां मां को ‘कुमारी’ या ‘आनंदमयी’ नाम से पूजा जाता है। यहां भगवान शिव ‘भैरव’ के रूप में विराजमान हैं। मुर्शीदाबाद जिले के किरीटकोण ग्राम में किरीटेश्वरी शक्तिपीठ है, यहां मां विमला देवी का मंदिर है। यहां देवी सती का मुकुट गिरा था। इस शक्तिपीठ के साथ भगवान शिव का संभर्ध्व (संर्त) या काल भैरव रूप जुड़ा हुआ माना जाता है। विमला देवी का बीज मंत्र ‘ॐ ह्रीं विमलायै नमः’ है। जलपाईगुड़ी जिले के बोडा मंडल में सालबाढ़ी गांव में मां भ्रामरी देवी का मंदिर है। यहां देवी सती का बायां पैर गिरा था। यह 51 शक्तिपीठों में से एक है। यहां देवी ‘भ्रामरी’ और उनके साथ भैरव ‘ईश्वर’ स्वरूप में विराजमान हैं। तीस्ता नदी के घने जंगलों के बीच मां भ्रामरी का शांत मंदिर है। मां भ्रामरी को कालिका या भद्रकाली का ही उग्र एवं करुणामय स्वरूप माना गया है, जो काले रंग की भ्रमरों (मधुमक्खियों) से घिरी रहती हैं। वर्धमान जिले के केतुग्राम इलाके में बहुला देवी शक्तिपीठ है। यहां माता सती का बायां हाथ गिरा था। इस शक्तिपीठ में माता सती की पूजा ‘मां बहुला’ के रूप में और भगवान शिव की पूजा उनके ‘भीरुक’ (सर्वसिद्धिदायक) भैरव रूप में की जाती है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से पूजा करने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उन्हें असीम शांति व समृद्धि मिलती है। वर्धमान जिले के उजानी गांव में मंगल चंद्रिका माता शक्तिपीठ है। यहां देवी सती का दाहिनी कलाई (या हाथ का हिस्सा) गिरी थी। इस शक्ति पीठ में मां दुर्गा के स्वरूप देवी ‘मंगल चंडी’ की पूजा की जाती है, और यहां के भैरव (शिव) को ‘कपिलांबर’ कहा जाता है। मान्यता है कि देवी मंगल चंद्रिका की आराधना से घर-परिवार में सुख-शांति, समृद्धि, उन्नति और सभी प्रकार के संकटों से रक्षा होती है। यहां तांत्रिक साधना और विशेष अनुष्ठान भी किए जाते हैं। पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में पापहर नदी के तट पर स्थित 51 शक्तिपीठों में से एक वक्रेश्वर शक्तिपीठ है। यहां देवी सती का भ्रूमध्य यानी भौंहों के बीच का भाग या उनका ‘मन’ गिरा था। यहां मां को ‘महिषासुरमर्दिनी’ और भगवान शिव को ‘वक्रनाथ’ के रूप में पूजा जाता है। बीरभूम के नलहाटी में स्थित नलहाटी शक्तिपीठ 51 शक्तिपीठों में से एक है। यहां देवी सती का कंठ (गला) या उदर नली गिरी थी। यहां मां को ‘कालिका’ और भैरव की ‘योगीश’ रूप में पूजा की जाती है। मन्दिर के गर्भगृह में माता के मुख के ठीक नीचे कंठ (नाला) का स्थान है। यहां एक अनोखी मान्यता है कि माता के गले में कितना भी जल अर्पित किया जाए, वह न तो कभी भरता है और न ही सूखता है, बल्कि जल निगलने जैसी आवाज सुनाई देती है। बीरभूम जिले के लाभपुर के पास फुल्लारा देवी शक्तिपीठ है। 51 शक्तिपीठों में से एक इस शक्तिपीठ को अट्टहास शक्तिपीठ भी कहा जाता है। यहां माता सती का निचला होठ गिरा था। यहां माता को ‘फुल्लरा’ और भगवान शिव ‘विश्वेश’ के रूप में पूजा जाता है। इस मंदिर में मूर्ति के स्थान पर लगभग 15 से 18 फीट लंबी एक विशाल प्राकृतिक शिला (पत्थर) की पूजा की जाती है, जिसे माता का स्वरूप माना जाता है। वीरभूम जिले में सैंथिया शहर में स्थित नंदीपुर शक्तिपीठ 51 शक्तिपीठों में से एक है। यहां देवी सती का कंठहार (गले का हार) गिरा था। इस मंदिर में माता सती को ‘नंदिनी’ और भगवान शिव को ‘नंदिकेश्वर’ (भैरव) के रूप में पूजा जाता है। यहां मां की मूर्ति एक बड़े वटवृक्ष के नीचे कछुए के आकार की सिंदूर लेपित चट्टान के रूप में विद्यमान है, जिस पर चांदी का मुकुट और सोने की तीन आंखें सुशोभित हैं। वर्धमान जिले के क्षीरग्राम में युगाधा शक्तिपीठ स्थित है। यहां देवी सती का दाहिने पैर का अंगूठा गिरा था। यहां की अधिष्ठात्री (मुख्य) देवी को ‘युगाद्या’ (भूतधात्री) और भगवान शिव (भैरव) को ‘क्षीर कंठक’ (क्षीरखंडक) के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि देवी की असली प्रतिमा मंदिर के पास स्थित ‘क्षीरडिघी’ नामक पवित्र तालाब के जल में निवास करती है। कोलकाता में स्थित कालीघाट शक्तिपीठ 51 शक्तिपीठों में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध धाम है। यहां माता सती के दाएं पैर का अंगूठा गिरा था। यहां देवी को ‘कालिका’ और भैरव को ‘नकुशील’ (नकुलेश्वर) के रूप में पूजा जाता है। यहां मां कालिका की अनूठी प्रतिमा स्थापित है, जिसके तीन विशाल नेत्र, चार हाथ और सोने से मढ़ी हुई लंबी प्रस्फुटन यानी जीभ हैं। माता के हाथों में खड्ग (तलवार) और असुर का कटा हुआ सिर सुशोभित है। यह स्थान आम भक्तों की आस्था के साथ-साथ तांत्रिक साधना के लिए भी बहुत शक्तिशाली केंद्र माना जाता है। बीरभूम जिले में बोलपुर के पास कोपई नदी के तट पर स्थित कांची देवगर्भ शक्तिपीठ (कंकालिता मंदिर) 51 शक्तिपीठों में से एक है। यहां देवी की कमर या कंकाल गिरा था। यहां देवी को ‘देवगर्भा’ और भगवान शिव (भैरव) को ‘रुरु’ कहा जाता है। यह शक्तिपीठ तंत्र-मंत्र और साधना के लिए भी बहुत प्रसिद्ध माना जाता है। मंदिर के पास ही श्मशान घाट है जहां कई साधकों और तांत्रिकों ने सिद्धि प्राप्त की है।

भारत ने भूटान को सौंपे 290 करोड़, 13वीं पंचवर्षीय योजना की परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार

थिम्पू। भारत ने भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना के तहत चल रही कई विकास परियोजनाओं के लिए अपनी प्रतिबद्धता के तहत 290 करोड़ रुपए (आईएनआर/नू. 2.90 अरब) की राशि भूटान के वित्त मंत्रालय को सौंपी है। इसकी जानकारी मंगलवार को थिम्फू स्थित भारतीय दूतावास ने दी। भारत और भूटान के बीच भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना के तहत 19वीं मासिक समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक में भारत की मदद से भूटान में चल रही विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति और आगे की कार्ययोजना पर चर्चा हुई। बैठक के दौरान भारतीय पक्ष ने भूटान के वित्त मंत्रालय को 290 करोड़ रुपए के चेक सौंपे। यह राशि 13वीं पंचवर्षीय योजना के तहत विभिन्न परियोजनाओं के लिए भारत सरकार की वित्तीय सहायता का हिस्सा है। भारतीय दूतावास के अनुसार, बैठक में भारतीय मिशन और भूटान की शाही सरकार (आरजीओबी) के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। भारत ने भूटान के साथ अपने सहयोग और समन्वय को आगे भी जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। इस सहायता से जिन परियोजनाओं को समर्थन मिलेगा, उनमें रॉयल यूनिवर्सिटी ऑफ भूटान (आरयूबी) के कॉलेजों में आधुनिक और बेहतर बुनियादी ढांचे का विकास, मानव संसाधन विकास और कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम, शिक्षकों और छात्रों के लिए प्रशिक्षण एवं विनिमय कार्यक्रम तथा फसलों की सुरक्षा के लिए चेन-लिंक फेंसिंग के दूसरे चरण के काम शामिल हैं। इसके अलावा, फुएंटशोलिंग स्पोर्ट्स एसोसिएशन मैदान के पुनर्विकास, थिम्फू में राष्ट्रीय मौसम एवं बाढ़ चेतावनी केंद्र और वैज्ञानिक सुविधाओं की स्थापना तथा आरयूबी के आठ कॉलेजों में पढ़ाई के लिए डिजिटल तकनीक शुरू करने जैसी परियोजनाओं को भी सहायता दी जाएगी। फंडिंग के तहत डिजिटल स्किलिंग प्रोग्राम को भी शामिल किया गया है। इसके लिए 8.83 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, जिससे देशभर के सभी गेवोग (स्थानीय प्रशासनिक क्षेत्रों) में लगभग 10 लाख लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है। सहायता राशि का उपयोग थिम्फू स्थित रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के बुनियादी ढांचे के विकास, थिम्फू जिला न्यायालय के निर्माण और गेलेफू जनरल अस्पताल के नवीनीकरण के लिए भी किया जाएगा। बैठक में 30 जुलाई को दोनों देशों के विदेश सचिवों के नेतृत्व में हुई पांचवीं योजना वार्ता और 16-17 सितंबर को विदेश मंत्री एस. जयशंकर की भूटान यात्रा के दौरान हुई बैठकों का भी उल्लेख किया गया। दोनों पक्षों ने भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना के तहत भारत की सहायता और चल रही परियोजनाओं की प्रगति की सराहना की। साथ ही विभिन्न परियोजनाओं के कार्यान्वयन की समीक्षा भी की गई। समीक्षा की गई परियोजनाओं में प्रमुख राजमार्ग पुलों का पुनर्निर्माण, 11 नए पुलों का निर्माण, 37 केंद्रीय और क्लस्टर स्कूलों का उन्नयन, सरकारी उपयोग के लिए 100 इलेक्ट्रिक कारों और सार्वजनिक परिवहन के लिए 45 इलेक्ट्रिक बसों की खरीद तथा थिम्फू में दो स्थानों पर सभी मंत्रालयों के लिए नए सरकारी कार्यालयों का निर्माण शामिल है। बैठक में भारत की सहायता से चल रही सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं का भी आकलन किया गया। इसके अलावा, मल्टी-डिसिप्लिनरी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल (एमडीएसएसएच) परियोजना की प्रगति की समीक्षा की गई। इस परियोजना में 200 बिस्तरों वाला कैंसर अस्पताल और 430 बिस्तरों वाली इनडोर-आउटडोर चिकित्सा सुविधा शामिल है, जिसे जिग्मे दोर्जी वांगचुक नेशनल रेफरल हॉस्पिटल और थिम्फू जनरल हॉस्पिटल से जोड़ा गया है।

फ्लाइट में खटमलों का आतंक, ऑस्ट्रेलियाई कंपनी क्वांटस ने विमान को किया ग्राउंड

नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया की विमानन कंपनी क्वांटस को अपने एक बोइंग 787 ड्रीमलाइनर को रोम में अस्थायी रूप से सेवा से बाहर करना पड़ा। इसका कारण वो खटमल थे जिन्होंने यात्रियों को परेशान कर दिया था। विमान की गहन सफाई कराई गई। इस वजह से रोम से ऑस्ट्रेलिया के पर्थ जाने वाली उड़ान रद्द करनी पड़ी और यात्रियों को वैकल्पिक उड़ानों से भेजने की व्यवस्था करनी पड़ी। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 9 अक्टूबर को पर्थ से रोम जा रही क्वांटस की उड़ान क्यूएफ5 के इकोनॉमी क्लास के आगे वाले हिस्से में ‘बेडबग’ यानी खटमल पाए गए। ये छोटे परजीवी कीड़े इंसानों समेत कुछ स्तनधारियों का खून चूसते हैं। इन्हें पूरी तरह खत्म करना मुश्किल होता है, क्योंकि ये सीटों, कपड़ों और दूसरी जगहों में छिप सकते हैं। यात्री इससे काफी परेशान हो गए थे। यही वजह है कि विमान के रोम पहुंचने के बाद उसे सफाई के लिए सेवा से हटाना पड़ा। इसके चलते 10 अक्टूबर को रोम से पर्थ जाने वाली वापसी उड़ान रद्द कर दी गई। कंपनी ने एक बयान जारी कर अपना पक्ष रखा। बताया कि इकोनॉमी क्लास की कुछ सीटों में समस्या सामने आने के बाद इंजीनियरों और रखरखाव दल ने विमान की गहन सफाई की। कंपनी ने उड़ान रद्द होने से यात्रियों को हुई असुविधा के लिए माफी भी मांगी। क्वांटस के मुताबिक, प्रभावित यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था की गई और उन्हें उनकी निर्धारित उड़ान के समय से 48 घंटे के भीतर दूसरी उड़ानों में जगह दी गई। कंपनी ने कहा कि उसके विमानों के केबिन की नियमित रूप से सफाई की जाती है और उन्हें उच्च मानकों के अनुरूप स्वच्छ रखा जाता है। एहतियाती उपाय के तौर पर हर 50 दिन में विमानों में कीटाणुनाशक का इस्तेमाल भी किया जाता है। कहा जा रहा है कि खटमल किसी यात्री के सामान या कपड़ों के जरिए विमान में पहुंचे होंगे। ये कीड़े अंधेरी जगहों में छिपना पसंद करते हैं और कपड़ों की गंध से आकर्षित होकर सामान में पहुंच सकते हैं। होटल या अन्य यात्रा स्थलों से भी इनके फैलने की आशंका रहती है। खटमल आमतौर पर खतरनाक नहीं होते, लेकिन इनके काटने से खुजली और त्वचा में जलन हो सकती है। इन्हें खत्म करना कठिन है, क्योंकि ये बिस्तर की चादरों, सीटों की दरारों और अन्य छिपी हुई जगहों में लंबे समय तक रह सकते हैं। भोजन के बिना भी ये काफी समय तक जीवित रह सकते हैं। खटमलों की समस्या केवल किसी एक आर्थिक वर्ग तक सीमित नहीं है। अक्सर यात्रा करने वाले लोग अनजाने में इन्हें एक जगह से दूसरी जगह पहुंचा सकते हैं। वहीं, सीमित आर्थिक संसाधनों वाले परिवारों के लिए कीटनाशक और अन्य प्रभावी उपायों का खर्च उठाना अधिक मुश्किल हो सकता है। खटमल छोटे, बिना पंख वाले परजीवी होते हैं जो कपड़ों, फर्नीचर और बिस्तर में रह सकते हैं। इनके काटने से खुजली हो सकती है, लेकिन आमतौर पर इनसे सेहत से जुड़ी कोई गंभीर समस्या नहीं होती।