गाजियाबाद: रामलीला मैदान में रावण का पुतला बनाते समय विस्फोट; पांच घायल, दो दीवारें गिरीं

गाजियाबाद। गाजियाबाद के साहिबाबाद थाना क्षेत्र में सोमवार सुबह रामलीला मैदान में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब सामुदायिक केंद्र भवन के एक बड़े हॉल में अचानक आग लग गई। प्रारंभिक सूचना में आग पटाखों की दुकान में लगने की बात सामने आई थी, जिसके बाद दमकल विभाग की टीम तत्काल मौके के लिए रवाना हुई। हालांकि घटनास्थल पर पहुंचने के बाद पता चला कि आग किसी पटाखे की दुकान में नहीं, बल्कि रामलीला मैदान के पीछे स्थित सामुदायिक केंद्र के बड़े हॉल में लगी थी। हादसे में पांच लोग घायल हुए हैं। सभी घायलों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां से उन्हें आगे जीटीबी अस्पताल रेफर किए जाने की जानकारी मिली है। फायर विभाग के अनुसार, सोमवार 5 अक्टूबर 2026 को सुबह करीब 9:26 बजे फायर स्टेशन साहिबाबाद के कंट्रोल रूम को रामलीला मैदान, शनि चौक स्थित पटाखों की दुकान में आग लगने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही मुख्य अग्निशमन अधिकारी गाजियाबाद, प्रभारी अग्निशमन अधिकारी साहिबाबाद और फायर स्टेशन साहिबाबाद से तीन फायर टेंडर तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना किए गए। दमकल की टीम मौके पर पहुंची तो स्थिति अलग मिली। टीम ने देखा कि आग रामलीला मैदान के बैक साइड स्थित सामुदायिक केंद्र भवन के एक बड़े हॉल में लगी थी। फायर यूनिट ने तत्काल अग्निशमन वाहनों से पंपिंग कर आग पर काबू पाने का अभियान शुरू किया। कुछ ही देर में आग को पूरी तरह बुझा दिया गया और घटनास्थल को शांत कर दिया गया। आग बुझाने के बाद दमकल टीम ने हॉल का बारीकी से निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सामने आया कि हॉल के अंदर रामलीला कार्यक्रम के लिए रावण का पुतला तैयार करने का काम चल रहा था। फायर विभाग के अनुसार, प्रथम दृष्टया आशंका है कि पुतला तैयार करने के दौरान आतिशबाजी अथवा किसी अन्य विस्फोटक सामग्री के इस्तेमाल के कारण उसमें विस्फोट हुआ, जिसके बाद हॉल में आग लग गई। विस्फोट इतना तेज था कि भवन की दो दीवारें भी गिर गईं। हादसे के बाद मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। घटना की जानकारी मिलते ही घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया। फायर यूनिट ने अस्पताल पहुंचकर घायलों की स्थिति के बारे में जानकारी ली। अस्पताल से बताया गया कि घायलों को बेहतर उपचार के लिए जीटीबी अस्पताल रेफर किया गया है। फायर विभाग की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक, हादसे में कुल पांच लोग घायल हुए हैं। इनमें दो घायलों की पहचान ऋषभ और हरेंद्र के रूप में हुई है, जबकि तीन अन्य घायलों के नाम अभी स्पष्ट नहीं हो सके हैं। सभी घायलों का उपचार कराया जा रहा है। फिलहाल आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया है। घटनास्थल पर दमकल टीम द्वारा आवश्यक निरीक्षण किया गया है। विस्फोट और आग लगने के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि रावण का पुतला तैयार करते समय किस प्रकार की सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा था और सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं।

बिहार में बाढ़ : पप्पू यादव का सरकार पर हमला, बोले-गाद नासा ने नहीं, बिहार की व्यवस्था ने जमा की

पटना। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने बिहार में बाढ़ और बाढ़ नियंत्रण के नाम पर होने वाले खर्च को लेकर राज्य और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि बाढ़ के स्थायी समाधान के बजाय हर साल राहत और निर्माण के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। पटना में सोमवार को एक प्रेस वार्ता में पप्पू यादव ने उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी के कथित बयान पर तंज कसते हुए कहा कि यदि बिहार में बारिश और बाढ़ के लिए नासा जिम्मेदार है, तो नदियों में जमा गाद के लिए भी नासा ही जिम्मेदार होगा। उन्होंने सवाल किया कि एंटी-इरोशन के नाम पर एक करोड़ रुपए से अधिक खर्च हुए हैं तो क्या वह पैसा भी नासा लेकर चला गया? उन्होंने कहा कि 1990 से अब तक बिहार में जाति, धर्म और मजहब के नाम पर खुली लूट हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि हर साल एक ही स्थान पर बांध क्यों टूटता है और बार-बार उसी ठेकेदार को काम क्यों दिया जाता है। उन्होंने नेताओं, मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि बाढ़ बिहार के लिए नासूर बन चुकी है और इस साल तीन बार बाढ़ की स्थिति बनी है। सांसद ने कहा कि फरक्का संधि दिसंबर में समाप्त हो रही है, लेकिन बिहार की बाढ़ समस्या को लेकर गंभीर पहल नहीं हो रही है। उन्होंने सवाल किया कि असम, पंजाब और नेपाल को मदद मिलती है, लेकिन बिहार को क्यों नहीं। उन्होंने दावा किया कि 2008 में तत्कालीन केंद्र सरकार ने बिहार की बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित कर 1,000 करोड़ रुपए दिए थे, जबकि 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5,000 करोड़ रुपए की घोषणा की थी, लेकिन उनके अनुसार बिहार को राशि नहीं मिली। पप्पू यादव ने कहा कि चुनाव के समय भाजपा हिंदू-मुसलमान करती है, लेकिन बाढ़ आने पर उसका हिंदुत्व डूब जाता है। इसी तरह विपक्ष चुनाव में जाति की राजनीति करता है, लेकिन बाढ़ में उसकी जाति भी डूब जाती है। उन्होंने सांसदों और विधायकों पर भी बाढ़ पीड़ितों की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नेता चुनाव के समय हेलीकॉप्टर से जनता के बीच पहुंचते हैं, लेकिन आपदा के समय उनकी जिम्मेदारी और संवेदनशीलता भी दिखाई देनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने छपरा और नौतन में करीब 60 लाख रुपए की सहायता दी है और टूटे घरों के लिए 10 से 25 हजार रुपए तक की मदद की है। उन्होंने सवाल किया कि जिन सांसदों के पास पर्याप्त संसाधन हैं, उन्होंने बाढ़ पीड़ितों के लिए क्या किया। उन्होंने कहा कि बाढ़ और निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं की जांच होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि वह इस संबंध में करीब 50 पत्र लिख चुके हैं और सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दाखिल की है। उन्होंने कहा कि 1990 के बाद बिहार में रहे सिंचाई मंत्रियों और अधिकारियों की संपत्ति की जांच कराई जानी चाहिए।

‘अपराधियों में डर पैदा करने की जरूरत’, दिल्ली में रेप की घटनाओं पर सख्त सुप्रीम कोर्ट, पुलिस को दिए निर्देश

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में रेप की हालिया घटनाओं पर सख्ती दिखाते हुए दिल्ली पुलिस को अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा है कि आपको अपराध करने की सोच रखने वाले व्यक्ति के मन में डर पैदा करना होगा। दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते रेप और दूसरे अपराधों पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। सोमवार को इसी ‘सुओ मोटो’ मामले में जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच ने सुनवाई की। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा है कि जरूरत पड़ने पर वे सख्त रुख अपनाएं। कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसे लोग भी होंगे जो आर्टिकल 21 की बात करेंगे, यानी वे मानवाधिकार समूह जो अपराधियों के साथ बुरे बर्ताव का विरोध करते हैं। कोर्ट ने कहा कि अधिकारी ऐसे समूहों की परवाह किए बिना, रेप जैसे घिनौने अपराध करने वाले अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकते हैं। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा कि जब तक आप अपराधियों के मन में यह डर पैदा नहीं करते कि ‘अगर हमने ऐसा कुछ किया तो मारे जाएंगे’, तब तक आप ऐसे अपराधों को रोक नहीं पाएंगे। आपको ऐसे अपराध करने की सोच रखने वाले व्यक्ति के मन में डर पैदा करने की जरूरत है। जस्टिस जेबी पारदीवाला ने कहा, “दुर्गा पूजा और दिवाली जैसी छुट्टियों के दौरान, ये बदमाश और गुंडे अधिक सक्रिय हो जाते हैं। आपको उनके मन में डर पैदा करना होगा। उन्हें पकड़कर जेल में डालना ही एकमात्र समाधान नहीं है। अफसरों, हालात के मुताबिक अपनी जिम्मेदारी निभाएं। हमें निराश न करें। छेड़छाड़ या रेप का शिकार होने वाली हर महिला और लड़की हमारी बहन और मां के समान है। अपनी जिम्मेदारी निभाएं। इसे एक चुनौती के तौर पर लें। ऐसी घटनाओं को न होने दें।” सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से एनसीआर क्षेत्र में महिलाओं की सुरक्षा के बारे में जानकारी देते हुए एक एफिडेविट फाइल करने को कहा। मामले में 16 नवंबर को अगली सुनवाई होगी।

योगासन करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान, आयुष मंत्रालय ने बताए अभ्यास से जुड़े नियम

नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में खुद को स्वस्थ और तनावमुक्त रखने के लिए योग एक अच्छा माध्यम माना जाता है। नियमित योग अभ्यास से शरीर को सक्रिय रखने और मानसिक शांति पाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, योग का पूरा लाभ उठाने के लिए केवल आसन करना ही काफी नहीं है, बल्कि अभ्यास से पहले कुछ जरूरी नियमों का ध्या न रखना भी आवश्यक है। आयुष मंत्रालय ने योग अभ्यास से जुड़े ऐसे ही कई दिशा-निर्देश बताए गए हैं, जिन्हें अपनाकर अभ्यास को अधिक सहज और सुरक्षित बनाया जा सकता है। योग के सामान्य नियमों में सबसे पहले स्वच्छता का महत्व बताया गया है। इसका मतलब शरीर के साथ-साथ अभ्यास के आसपास के वातावरण और मन को भी स्वच्छ और शांत रखना है। योग हमेशा ऐसी जगह पर करना चाहिए, जहां शोर-शराबा कम हो और व्यक्ति बिना किसी परेशानी के अपना ध्यान अभ्यास पर लगा सके। योग करने से पहले शरीर और मन को आराम की स्थिति में रखना चाहिए। जल्दबाजी या अत्यधिक थकान में योगाभ्यास करने से बचना बेहतर है। इसके अलावा अभ्यास शुरू करने से पहले शौच करना जरूरी है, ताकि पेट हल्का रहे और अभ्यास के दौरान किसी तरह की असहजता न हो। अभ्यास के दौरान आरामदायक कपड़े पहनना भी जरूरी है। हल्के और ढीले सूती कपड़े शरीर को आसानी से हिलाने-डुलाने में मदद करते हैं। योगाभ्यास करने के लिए योग मैट, दरी, गद्दे या मुड़े हुए कंबल का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे जमीन पर बैठने और आसन करने में सुविधा रहती है। योग हर व्यक्ति के लिए एक जैसा नहीं होता। अगर किसी को पुरानी बीमारी, शरीर में लगातार दर्द या दिल से जुड़ी समस्या है, तो योगासन शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य योग विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही आसनों का चुनाव करना जरूरी है। इसी तरह गर्भावस्था के दौरान भी योग अभ्यास को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए। ऐसी स्थिति में योग विशेषज्ञ की सलाह से उपयुक्त अभ्यास करना बेहतर रहता है।

अमेरिका पहुंचकर रॉबर्ट डी नीरो से मिले अनुपम खेर, बोले- ‘हर बार उनसे मिलना मेरे लिए खुशी की बात’

मुंबई। अभिनेता अनुपम खेर इन दिनों अपने नाटक ‘जाने पहचाने अनजाने’ के साथ अमेरिका और कनाडा के दौरे पर हैं। अपने इस सफर के दौरान वह कई लोगों से मिले। इस बीच उन्होंने हॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता और अपने करीबी दोस्त रॉबर्ट डी नीरो से उनके घर पर मुलाकात की। अनुपम ने इस मुलाकात की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए और बताया कि उनके दौरे की सबसे खास यादों में यह मुलाकात भी शामिल हो गई है। अनुपम खेर ने इंस्टाग्राम पर मुलाकात की कुछ तस्वीर और वीडियो शेयर की। तस्वीरों और वीडियो में वह रॉबर्ट डी नीरो के साथ नजर आ रहे हैं। दोनों के बीच की दोस्ती साफ दिखाई दे रही है। इस पोस्ट के कैप्शन में उन्होंने लिखा, ”मैं अमेरिका आऊं और अपने सबसे प्यारे दोस्त रॉबर्ट डी नीरो से न मिलूं, ऐसा कैसे हो सकता है। डी नीरो दुनिया के बेहतरीन अभिनेताओं में से एक है। उनसे मिलना हर बार मेरे लिए खुशी की बात होती है। अमेरिका और कनाडा में अपने म्यूजिकल प्ले ‘जाने पहचाने अनजाने’ के साथ चल रहे दौरे के दौरान डी नीरो से मुलाकात सबसे खास अनुभवों में से एक रही।” अपनी पोस्ट में अनुपम खेर ने रॉबर्ट डी नीरो को उनके घर बुलाने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने लिखा, ”धन्यवाद, प्यारे डी नीरो, मुझे अपने घर पर आमंत्रित करने के लिए और स्वादिष्ट भोजन के लिए। हमारी बातचीत और आपकी ओर से दिया गया समय मेरे लिए बहुत मायने रखता है। जब भी मैं आपसे मिलता हूं, तो मेरे अंदर का फैन भी उतना ही उत्साहित हो जाता है, जितना एक दोस्त अपने दोस्त से मिलकर होता है। मैं एक अभिनेता के तौर पर आपको बहुत मानता हूं, लेकिन एक इंसान के रूप में भी मेरे मन में आपके लिए बहुत सम्मान है। मैं सच में खुद को भाग्यशाली मानता हूं कि मैं दुनिया के इस महान अभिनेता को अपना दोस्त कह सकता हूं।” अनुपम खेर ने रॉबर्ट डी नीरो के परिवार का भी आभार जताया। उन्होंने कहा, ”आपके परिवार ने मिलकर इस मुलाकात को एक और खूबसूरत याद बना दिया। मैं इन पलों को अपने साथ घर लेकर जाऊंगा और इसे लंबे समय तक याद रखूंगा। सबसे जरूरी बात, कैप गिफ्ट करने के लिए धन्यवाद। यह गिफ्ट मेरे लिए बहुत मायने रखता है।

जब संजय मिश्रा एक्टिंग छोड़कर ढाबे पर करने लगे थे काम, फिर ऐसे हुई फिल्मों में वापसी

मुंबई। बॉलीवुड में कुछ कलाकार ऐसे हैं, जिन्हें पर्दे पर देखते ही चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। संजय मिश्रा भी ऐसे ही कलाकार हैं। ‘गोलमाल’, ‘धमाल’, ‘वध’, ‘भूल भुलैया’ और ‘आंखों देखी’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाकर अपनी खास पहचान बनाई है। रोल छोटा हो या बड़ा, संजय मिश्रा जब भी स्क्रीन पर आते हैं, अपनी एक्टिंग से किरदार में जान डाल देते हैं। उनकी जिंदगी का एक दौर ऐसा भी था, जब उन्होंने एक्टिंग से पूरी तरह दूरी बनाने का फैसला कर लिया था और ऋषिकेश के एक ढाबे पर काम करने लगे थे। 6 अक्टूबर 1963 को जन्मे संजय मिश्रा का बचपन वाराणसी में बीता। इसके बाद उन्होंने दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से पढ़ाई की और 1989 में वहां से ग्रेजुएशन किया। इसके बाद थिएटर और टेलीविजन के जरिए उन्होंने अभिनय की दुनिया में अपनी जगह बनानी शुरू की। फिल्मों में उनका सफर ‘ओह डार्लिंग! ये है इंडिया!’ से शुरू हुआ। इसके बाद वह ‘सत्या’, ‘दिल से..’, ‘वजूद’, ‘राजकुमार’ और ‘फिर भी दिल है हिंदुस्तानी’ जैसी फिल्मों में नजर आए। धीरे-धीरे उनकी पहचान एक ऐसे कलाकार के तौर पर बनने लगी, जो हर तरह के किरदार को अपने अंदाज में निभा सकता है। निजी जिंदगी में आए एक बड़े झटके ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया। पिता के निधन के बाद संजय मिश्रा ने फिल्मों से दूरी बनाने का फैसला कर लिया। वह मुंबई की चमक-दमक से दूर ऋषिकेश चले गए। यहां उन्होंने एक ढाबे पर काम करना शुरू कर दिया और लोगों के लिए ऑमलेट बनाने लगे। यह दौर उनके लिए आसान नहीं था लेकिन उन्होंने अपनी पहचान को पीछे छोड़कर एक आम जिंदगी जीने की कोशिश की। दिलचस्प बात यह है कि ढाबे पर आने वाले कुछ लोग उन्हें पहचान भी लेते थे। लोग उनसे पूछते कि क्या वह वही संजय मिश्रा हैं, जिन्होंने ‘गोलमाल’ में काम किया है। हालांकि संजय मिश्रा अपनी पहचान स्वीकार करने के बजाय मजाक में कह देते थे कि वह उस अभिनेता के हमशक्ल हैं। हालांकि किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था। फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी ने उन्हें दोबारा फिल्मों में आने के लिए मनाया। इसके बाद उन्हें फिल्म ‘ऑल द बेस्ट’ में काम करने का मौका मिला। यहीं से उनके फिल्मी करियर ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली। इसके बाद संजय मिश्रा ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। ‘गोलमाल: फन अनलिमिटेड’ और ‘धमाल’ जैसी फिल्मों में उनकी कॉमेडी ने दर्शकों को खूब हंसाया, तो ‘आंखों देखी’ जैसी फिल्म में उन्होंने अपनी गंभीर अदाकारी का दम दिखाया। इस फिल्म में उनके अभिनय को खूब सराहा गया और उन्हें समीक्षकों की ओर से सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला।

जनता दर्शन : सीएम योगी ने कहा- उचित समस्या को लेकर दूसरी बार फरियादी आए तो जवाबदेही तय

लखनऊ। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार सुबह ‘जनता दर्शन’ में दूरदराज से आए लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। लोगों को समाधान का भरोसा देते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रशासन हर उचित समस्या का समयबद्ध निस्तारण कराए, यदि पीड़ित एक ही समस्या को लेकर दूसरी बार आया और वह समस्या वास्तविक रही तो जवाबदेही तय होगी। उन्होंने कहा कि पीड़ित की संतुष्टि सरकार का ध्येय है। यदि पीड़ित की समस्या वास्तविक है और समय से उसका निस्तारण नहीं हो पाया, तो यह अक्षम्य है। सीएम योगी ने कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों तक पहुंचकर उनकी पीड़ा जानी और आश्वस्त किया कि सभी की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने ‘जनता दर्शन’ में मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर पीड़ित व्यक्ति की समस्या पर संवेदनशीलता से ध्यान दें और समयबद्ध/पारदर्शी निस्तारण कराएं। इस दौरान कुछ लोगों ने जमीन जबरन कब्जा कर लिए जाने की शिकायत की। इस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि यदि किसी दबंग ने किसी गरीब की जमीन हड़पी है तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। जमीन अवैध या जबरन कब्जे से मुक्त होनी चाहिए। जमीन कब्जामुक्त कराने के साथ जबरन कब्जा करने वालों को कड़ा कानूनी सबक सिखाया जाए। पीड़ित को न्याय और दोषियों को सजा दिलाएं। मुख्यमंत्री कार्यालय ने जनता दर्शन की फोटो शेयर करते हुए लिखा, ”लोक-कल्याण एवं सुशासन की प्रतिबद्धता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास पर आयोजित ‘जनता दर्शन’ में विभिन्न जनपदों से आए नागरिकों की समस्याएं सुनीं तथा संबंधित अधिकारियों को उनके त्वरित एवं प्रभावी निराकरण के निर्देश दिए।” मुख्यमंत्री जनता दर्शन में लगातार फरियादियों से उनके राजस्व के मामले में अधिकारियों को निर्देशित कर रहे हैं। उन्होंने बड़े सख्त लफ्ज़ो में कहा है कि जनता की समस्याओं के समाधान में संवेदनशीलता, पारदर्शिता और समयबद्धता का विशेष ध्यान रखा जाए। पीड़ित को न्याय मिले और दोषियों को उनके कृत्य की सजा मिले, यह प्रशासन की जिम्मेदारी है।

दिल्ली पुलिस ने नौकरी दिलाने के नाम पर चल रहे दो फर्जी कॉल सेंटर का किया भंडाफोड़, 11 गिरफ्तार

नई दिल्ली। सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के स्पेशल स्टाफ, साइबर पुलिस स्टेशन और रंजीत नगर पुलिस ने रंजीत नगर में नौकरी दिलाने के नाम पर चल रहे दो फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ करते हुए 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। दोनों जगहों से पुलिस ने 13 कंप्यूटर सिस्टम और 5 मोबाइल फोन के साथ-साथ कॉलिंग सॉफ्टवेयर, नौकरी चाहने वालों का डेटा और डिजिटल, फाइनेंशियल सबूत जब्त किए गए। पुलिस ने बताया कि 3 सितंबर को दिल्ली के रंजीत नगर में शादीपुर मेट्रो स्टेशन के पास लाल रतन बिल्डिंग से चल रहे दो संदिग्ध नकली जॉब-प्लेसमेंट, कॉलिंग सेंटरों के बारे में जानकारी मिली। इन दोनों कॉल सेंटर में बेरोजगारों से नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे लिए जा रहे थे। सच्चाई का पता लगाने और जरूरी कार्रवाई के लिए पुलिस की दो टीमें बनाई गईं। एक टीम में रंजीत नगर पुलिस स्टेशन और स्पेशल स्टाफ के लोग शामिल थे, जिन्होंने तकनीकी विश्लेषण और फील्ड वेरिफिकेशन के जरिए जानकारी को और पुख्ता किया। संदिग्ध नेटवर्क की तकनीकी जांच के दौरान, पता चला कि संदिग्ध जॉब-प्लेसमेंट गतिविधि से जुड़ी बहुत सारी कॉल उसी जगह से की जा रही थीं। तकनीकी जानकारी और फील्ड वेरिफिकेशन के आधार पर संदिग्ध जगह पर छापा मारा गया। छापे के दौरान चार महिलाएं और दो पुरुष मौजूद मिले और उन्हें पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। ऑफिस की अच्छी तरह से तलाशी ली गई और नौकरी चाहने वालों से संपर्क करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे कंप्यूटर सिस्टम, कॉलिंग एप्लिकेशन और डिजिटल सामग्री की जांच की गई। जांच में पता चला कि नौकरी चाहने वालों के डेटा और संपर्क विवरण का इस्तेमाल संभावित उम्मीदवारों से संपर्क करने और उन्हें नौकरी के अवसर देने के लिए किया जा रहा था। उम्मीदवारों से अलग-अलग पैकेज के तहत रजिस्ट्रेशन फीस जमा करने के लिए कहा जाता था। इसके बाद कॉलर कुछ दिनों तक नौकरी और आगे की औपचारिकताओं के बारे में भरोसा दिलाकर उम्मीदवारों से संपर्क बनाए रखते थे और फिर वादा की गई नौकरी दिए बिना ही संपर्क बंद कर देते थे। इसी दौरान, स्पेशल स्टाफ और सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के साइबर पुलिस स्टेशन की एक और संयुक्त टीम ने लाल रतन बिल्डिंग से चल रहे एक और संदिग्ध नकली जॉब-प्लेसमेंट कॉल सेंटर के बारे में पक्की जानकारी मिलने पर उस जगह पर भी छापा मारा। पांच पुरुष कर्मचारी कॉलिंग क्यूबिकल्स में काम करते हुए पाए गए और उन्हें पकड़ लिया गया। जब पुलिस ने कॉर्पोरेट ऑथराइजेशन लेटर, प्लेसमेंट एग्रीमेंट या नौकरी पाने वाले असली उम्मीदवारों के रिकॉर्ड मांगे, तो कर्मचारी भर्ती की असली प्रक्रिया साबित करने वाला कोई भी वैध दस्तावेज नहीं दिखा पाए। कंप्यूटर की जांच करने पर कॉलिंग सॉफ्टवेयर और नौकरी चाहने वालों का डेटा मिला। इसके बाद, पूछताछ और आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए उन पांचों कर्मचारियों को थाने लाया गया। इस तरह, नौकरी दिलाने वाले दो फर्जी कॉल सेंटरों से कुल 11 कर्मचारियों को पकड़ा गया। जांच से पता चला कि दोनों कॉल सेंटरों में काम करने का तरीका एक जैसा था। नौकरी चाहने वालों का डेटा और कॉन्टैक्ट डिटेल्स ऑनलाइन जॉब-सर्च और रिक्रूटमेंट प्लेटफॉर्म से हासिल किए गए थे और उनका इस्तेमाल टारगेटेड कॉलिंग के लिए किया जाता था। ऑपरेटर रिक्रूटर बनकर उम्मीदवारों को नौकरी के आकर्षक मौके देते थे। उनका भरोसा जीतने के बाद, उन्होंने अलग-अलग पैकेज के तहत रजिस्ट्रेशन औक प्रोसेसिंग फीस की मांग की, जिसमें 3,500, 1,400 और 1,200 रुपये शामिल थे। पैसे मिलने के बाद कॉलर ने कथित तौर पर नौकरी और आगे की औपचारिकताओं के बारे में भरोसा दिलाकर कुछ समय तक उम्मीदवारों को उलझाए रखा। इसके बाद, वादा की गई नौकरी दिए बिना ही बातचीत बंद कर दी गई। पहले कॉल सेंटर से अर्पित, सकीना, करिश्मा, मीनाक्षी, चंचल और अशोक को पकड़ा गया। वहीं, दूसरे कॉल सेंटर से आसिम, संदीप, गौरव मलिक, ज्ञान सिंह और रोहित को गिरफ्तार किया गया। दोनों फर्जी कॉल सेंटर चलाने वाले मास्टरमाइंड की पहचान करने और उन्हें पकड़ने, नौकरी चाहने वालों के डेटा का स्रोत पता लगाने, पैसों के लेन-देन का पता लगाने, जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की जांच और कथित फ़र्ज़ी जॉब-प्लेसमेंट ऑपरेशन से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने के लिए आगे की जांच चल रही है।

टैरिफ के झटकों के बावजूद ग्लोबल ट्रेड मजबूत बना हुआ है: प्रमुख डब्ल्यूटीओ प्रमुख

वॉशिंगटन। वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन की प्रमुख न्गोजी ओकोन्जो-इवेला की ओर से कहा गया कि अमेरिका के कड़े टैरिफ, ईरान युद्ध, ऊर्जा की ऊंची कीमतों और नियमों पर आधारित ट्रेडिंग सिस्टम पर बढ़ते दबाव के बावजूद ग्लोबल ट्रेड उम्मीद से कहीं ज्यादा मजबूत बना हुए हैं। उन्होंने व्यापार में एआई की वजह से आई तेजी की ओर इशारा किया, साथ ही यह चेतावनी भी दी कि यह सिस्टम अभी भी कमजोर बना हुआ है। डब्ल्यूटीओ की डायरेक्टर-जनरल ने कहा कि दुनिया के सामानों का 72 प्रतिशत व्यापार अभी भी डब्ल्यूटीओ की ‘मोस्ट-फेवर्ड-नेशन’ (सबसे पसंदीदा देश) शर्तों के तहत हो रहा है। इससे पारंपरिक व्यापार नियमों पर भारी दबाव होने के बावजूद व्यवसायों को स्थिरता और भविष्य का अंदाज़ा लगाने की सुविधा मिलती है। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक सामान व्यापार ने डब्ल्यूटीओ के अनुमानों से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है, जिसमें पिछले साल की बढ़ोतरी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े उत्पादों का 42 प्रतिशत हिस्सा रहा। ओकोन्जो-इवेला ने सीएनएन के साथ एक इंटरव्यू में कहा, “मैं पूरी ईमानदारी से कहूंगी कि हम भी इस मजबूती से हैरान हैं और इसके लिए आभारी हैं।” यह इंटरव्यू ऐसे समय में हुआ जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तहत अमेरिकी व्यापार नीति में बुनियादी बदलाव हुए हैं, वाशिंगटन और बीजिंग के बीच तनाव बढ़ा है, ईरान युद्ध के कारण ऊर्जा बाज़ारों में व्यवधान आया है, और वैश्विक शिपिंग मार्गों पर दबाव बना हुआ है। ओकोन्जो-इवेला ने कहा, “हम देखते हैं कि दुनिया का कितना व्यापार असल में डब्ल्यूटीओ के नियमों के अनुसार हो रहा है।” उन्होंने कहा, “मेरा मतलब है, जैसा कि आपने कहा, दुनिया वैसी नहीं रही जैसी पहले थी और वैश्विक व्यापार नियम दबाव में हैं, फिर भी हम पाते हैं कि दुनिया का 72 प्रतिशत व्यापार, यानी वैश्विक वस्तुओं का व्यापार अभी भी डब्ल्यूटीओ की शर्तों, यानी ‘मोस्ट-फेवर्ड-नेशन’ शर्तों के तहत हो रहा है।” उन्होंने कहा, “इसे ही हम ‘प्रेडिक्टेबल स्टेबल’ (भरोसेमंद और स्थिर) कहते हैं।” ओकोन्जो-इवेला ने कहा कि कंपनियां मल्टीलेटरल ट्रेडिंग सिस्टम पर भरोसा करती रहती हैं क्योंकि उन्हें निश्चितता की ज़रूरत होती है। उन्होंने कहा, “हम बिजनेस से बात करते हैं, और उन्हें अपने व्यापार के तरीके में कुछ स्थिरता और निश्चितता की जरूरत होती है।” उन्होंने कहा कि शायद सबसे हैरान करने वाली बात असल व्यापार में हुई बढ़ोतरी की मजबूती रही है।

‘न्यायाधीश संविधान के संरक्षक हैं’, एसआईआर को लेकर जज की बातों पर अभिषेक मनु सिंघवी की प्रतिक्रिया

नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर जस्टिस उज्जल भुइयां और पूर्व जस्टिस नरीमन के उठाए सवालों और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के कथित विरोध पर प्रतिक्रिया दी है। पत्रकारों से बातचीत में अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, “जस्टिस नरीमन सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज हैं। इससे पहले वे वरिष्ठ वकील थे। उनका नाम बड़े आदर से लिया जाता है। उन्हें निष्पक्षता के सिवा किसी तरह का पक्ष लेते नहीं देखा गया है। वे आम आदमी पर बोल रहे थे। आम आदमी के लिए इससे बड़ी बात क्या है कि उसका वोट ही हटा दिया जाए। आम आदमी का सबसे बड़ा मानवाधिकार अगर कोई है, तो गणतंत्र में मतदान का अधिकार है। इसलिए उन्होंने सच कहा है। मैं उनकी इस बात का स्वागत करता हूं।” अभिषेक मनु सिंघवी ने आगे कहा, “जस्टिस उज्जल भुइयां विद्यार्थियों के स्थल पर बोल रहे थे। उन्होंने जो कहा है, उसमें कोई त्रुटि नहीं निकाल सकता। मेरा मानना है कि अगर इन वक्तव्यों को देखा जाए तो संवैधानिक संरक्षक का इससे ज्यादा महत्वपूर्ण कार्य क्या होगा? संविधान के संरक्षक यही न्यायाधीश हैं। उन्होंने बिल्कुल सत्य कहा है। मेरी आशा और विश्वास है कि इसी प्रकार के स्वतंत्र व्यक्तित्व से सुधार आएगा।” ज्ञानेश कुमार को लेकर अपने बयान पर सफाई देते हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, “पूरा इंटरव्यू छपा है। मैंने कहा था कि कई लोग बिना वजह कानून का दरवाजा खटखटाते हैं, जबकि उन्हें कानून की सीमाएं पता होती हैं और कई बार गलत तरीके से या जानबूझकर उस चीज को वैधता दे देते हैं। हर चीज का हल अदालत के दरवाजे पर नहीं होता। मेरा सिर्फ इतना कहना है कि सोच-समझकर कानून के पास जाना चाहिए।