सर्जियो गोर ने एडमिरल पापारो की भारत में मेजबानी की, भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी पर दिया जोर

नई दिल्ली। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने अमेरिकी हिंद-प्रशांत कमान के कमांडर एडमिरल सैमुअल पापारो की भारत में मेजबानी की। अमेरिकी पैसिफिक कमांड के कमांडर एडमिरल सैमुअल जे. पापारो, अमेरिका-भारत की अहम रक्षा साझेदारी को आगे बढ़ाने और दोनों देशों के बीच सेनाओं के आपसी सहयोग को मजबूत करने के लिए 3 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक भारत के दौरे पर हैं। सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तस्वीरें साझा कर लिखा, “भारत में एडमिरल सैमुअल पापारो की मेजबानी करना सम्मान की बात है। अमेरिका के सबसे महत्वपूर्ण सैन्य नेताओं में से एक, एडमिरल पापारो अमेरिकी प्रशांत कमान (यूएस पैसिफिक कमांड) का नेतृत्व करते हैं, जो देश की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी भौगोलिक लड़ाकू कमान है। यह कमान लगभग आधी दुनिया में फैले क्षेत्र में लगभग चार लाख सैन्य और असैन्य कर्मियों की निगरानी करती है।” सर्जियो गोर के अनुसार, इस दौरान एडमिरल पापारो ने भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि, थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ, वायु सेना के उप-प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित, एकीकृत रक्षा स्टाफ के प्रमुख एयर मार्शल तेजिंदर सिंह और अन्य वरिष्ठ भारतीय रक्षा अधिकारियों के साथ बैठक की। गोर ने कहा कि यह शाम अमेरिका-भारत प्रमुख रक्षा साझेदारी की बढ़ती मजबूती, महत्वाकांक्षा और महत्व को दर्शाती है। अपने छह दिवसीय भारत दौरे पर एडमिरल पापारो साझा सुरक्षा प्राथमिकताओं, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, उभरती प्रौद्योगिकियों, क्षेत्रीय रणनीतिक स्थिरता और हिंद-प्रशांत में समुद्री सहयोग पर चर्चा करेंगे। इससे पहले एडमिरल पापारो ने रविवार को विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर से भी मुलाकात की थी। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच सुरक्षा साझेदारी और समुद्री सहयोग बढ़ाने को लेकर चर्चा हुई। विदेश मंत्री जयशंकर ने एक्स पर लिखा, “अमेरिकी प्रशांत कमान के कमांडर एडमिरल सैमुअल जे. पापारो से मिलकर खुशी हुई। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में हमारी सुरक्षा साझेदारी और समुद्री सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की।” एडमिरल सैमुअल जे. पापारो शनिवार को नई दिल्ली पहुंचे थे। उनकी इस यात्रा का मकसद भारत और अमेरिका के बीच रक्षा साझेदारी को और मजबूत करना है। सर्जियो गोर ने भारत पहुंचने पर एडमिरल पापारो का गर्मजोशी से स्वागत किया।

‘एक वोट की ताकत’: बोंगईगांव मेडिकल कॉलेज का वादा पूरा करने पर बोले सीएम सरमा

गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार को बोंगईगांव मेडिकल कॉलेज का उद्घाटन करते हुए राज्य सरकार के विकास एजेंडे पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट उस सिद्धांत को दिखाता है जिसके तहत जिन कामों की नींव रखी जाती है, उन्हें पूरा करके उनका उद्घाटन भी किया जाता है। लोगों को संबोधित करते हुए सरमा ने कहा कि मेडिकल कॉलेज की नींव 2021 में रखी गई थी और अब वही प्रोजेक्ट पूरा हो गया है और उसका उद्घाटन किया गया है। विकास कार्यों में जनता के समर्थन की भूमिका का जिक्र करते हुए सरमा ने कहा कि आपके एक वोट की ताकत ने ही सरकारों को ऐसे प्रोजेक्ट लागू करने में सक्षम बनाया है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार का यह सिद्धांत है कि जिस भी प्रोजेक्ट की नींव रखी जाए, उसे पूरा करके उसका उद्घाटन भी किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि 2021 में बोंगईगांव मेडिकल कॉलेज की नींव रखी गई थी, और आज, भगवान की कृपा से, हमें उसी मेडिकल कॉलेज का उद्घाटन करने का सौभाग्य मिला है। यह उद्घाटन गुवाहाटी और अन्य बड़े शहरी केंद्रों से बाहर मेडिकल शिक्षा और हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने के असम के बड़े प्रयासों का हिस्सा है। राज्य सरकार असम के सभी जिलों में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की नीति पर काम कर रही है ताकि स्पेशलाइज्ड हेल्थकेयर तक पहुंच बेहतर हो सके और ट्रेंड डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाई जा सके। पिछले कुछ सालों में, असम में मेडिकल एजुकेशन नेटवर्क को मजबूत करने के लिए सरकार ने राज्य के अलग-अलग हिस्सों में कई नए मेडिकल कॉलेज शुरू किए हैं। इस विस्तार का मकसद दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों के मरीजों की बेहतर इलाज के लिए गुवाहाटी के बड़े अस्पतालों पर निर्भरता को कम करना भी है। उम्मीद है कि बोंगईगांव मेडिकल कॉलेज, बोंगईगांव और आस-पास के जिलों के मरीजों की सेवा करेगा और साथ ही स्थानीय छात्रों को घर के पास मेडिकल की पढ़ाई करने का मौका भी देगा। असम सरकार ने बार-बार कहा है कि उसका लंबे समय का लक्ष्य राज्य के हर जिले में कम से कम एक मेडिकल कॉलेज खोलना है। यह पहल अस्पतालों, मेडिकल एजुकेशन सुविधाओं और दूसरे हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के साथ-साथ की जा रही है। सरकार ने मेडिकल कॉलेजों के विस्तार को राज्य में डॉक्टरों और हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स की संख्या बढ़ाने की जरूरत से भी जोड़ा है। सरमा ने अक्सर मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार को राज्य की विकास रणनीति का एक अहम हिस्सा बताया है, खासकर बड़े शहरों के बाहर के इलाकों में हेल्थकेयर तक पहुंच बेहतर बनाने के लिए।

फ्लाईदुबई फ्लाइट की घटना पर ईरान बोला- स्मित मच्छार ने बचाईं जानें, पूरी इजरायल की साजिश

मुंबई। फ्लाईदुबई फ्लाइट की घटना पर मुंबई में ईरान के कॉन्सल जनरल सईद रजा मोसायेब मोतलाघ ने भारतीय पायलट स्मित मच्छर की सराहना करते हुए कहा कि मानव जीवन बचाना हमेशा सराहनीय है और पायलट ने अपनी सूझबूझ से सैकड़ों जानें बचाईं। साथ ही उन्होंने इजरायल पर तीखा हमला बोलते हुए दावा किया कि यह पूरी घटना प्रधानमंत्री पद के चुनाव से पहले टकराव पैदा करने के लिए खुद इजरायल द्वारा ही रची गई थी। अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल के दाम बढ़ने और भारतीय बाजार में आई गिरावट के बीच अमेरिका के न रुकने की वजह से आने वाले हालात को लेकर मुंबई में ईरान के कॉन्सल जनरल सईद रजा मोसायेब मोतलाघ ने कहा, “यह बिल्कुल स्पष्ट है। अगर आप इस हमले से पहले की स्थिति को देखें तो होर्मुज पूरी तरह से खुला था, बिना किसी प्रतिबंध के और देश इसका स्वतंत्र रूप से उपयोग कर रहे थे। दरअसल, इस वजह से ईरान को दो बड़े नुकसान झेलने पड़ रहे थे।” उन्होंने आगे कहा कि पहला, ईरान का दुश्मन ठीक उसकी सीमाओं के पास मौजूद था, जैसा कि हमने देखा। दूसरा, जब हम प्रतिबंधों के अधीन थे, तब अन्य देश होर्मुज का अधिकतम उपयोग कर रहे थे, जबकि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान संयम बरत रहा था और इस आवाजाही में कोई बाधा नहीं डाल रहा था। हाल ही में इजरायल ने कहा कि वह आतंकवाद को खत्म करने के लिए गहराई तक जाएगा और कुछ बड़े की योजना बना रहा है, इस पर ईरानी राजनयिक ने कहा कि उन्होंने अपनी कुटिल मंशा के लिए इस योजना को अंजाम दिया है और अब वे हालात का अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें इस बात से भी कोई परहेज नहीं है कि इस प्रक्रिया में भारी संसाधनों का नुकसान हो या कई देश गंभीर मुश्किलों में धकेले जाएं। उन्होंने आगे कहा कि हमने इसे करीब सात महीने पहले इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के खिलाफ उनके द्वारा किए गए हमले और आक्रामकता में देखा है। देखिए कि इसके परिणाम क्षेत्र के लिए और भारत जैसे देश के लिए भी क्या रहे हैं। आप देख सकते हैं कि लोगों को किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है और किस तरह अन्य देश भी इन समस्याओं में घसीटे गए हैं। फ्लाईदुबई फ्लाइट की घटना पर उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से हाल के दिनों में हमने एक ऐसी घटना देखी है जो बेहद संदिग्ध है और इसे लेकर काफी चर्चा और अटकलें लग रही हैं। दरअसल, इस इंटरव्यू के शुरू होने से ठीक पहले भी मैं इस मामले पर एक लेख पढ़ रहा था, लेकिन किसी भी स्थिति में कोई भी घटना जो मानव जीवन को जोखिम में डालती है, वह खेदजनक और अस्वीकार्य है। भारतीय पायलट स्मित मच्छार द्वारा कई इजरायलियों की जान बचाने पर सईद रजा ने कहा कि मानव जीवन को बचाना, चाहे वह कहीं भी हो या कोई भी पद पर हो, सराहनीय है। इस मामले में पायलट ने अपनी जान भी बचाई है। इस घटना को लेकर काफी विवाद और अटकलें रही हैं, लेकिन एक बार फिर मैं कहूंगा कि मानव जीवन बचाने का कोई भी प्रयास सराहना के योग्य है। जब उनसे पूछा गया कि क्या इजरायल में प्रधानमंत्री पद के चुनाव नजदीक होने के कारण इजरायल ने फ्लाईदुबई की इस उड़ान वाली घटना की पहले से योजना बनाई थी, तो मुंबई में ईरान के कॉन्सल जनरल मोतलाघ ने कहा, “स्वाभाविक रूप से, आप इस बात को लेकर निश्चित हो सकते हैं। जैसा कि मैंने अपने पिछले जवाबों में कहा था, मैंने इस मुद्दे से जुड़े कई पहलुओं और विवादों का जिक्र किया था और तब भी यही बात कही थी। दुर्भाग्य से उनके उद्देश्य इतने स्वार्थी और लापरवाह हो गए हैं कि अब हम देख रहे हैं कि वे किसी एक व्यक्ति या किसी खास समूह के अस्तित्व को बचाने के लिए, जरूरी नहीं कि अपने शासन के अस्तित्व के लिए ही, दुनिया भर में टकराव पैदा कर रहे हैं।” इजरायल का कहना है कि शुरुआती जांच के मुताबिक ओमानी को-पायलट के आईआरजीसी से संबंध थे और यह एक आतंकी हमला था। इसे लेकर उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर काफी विवाद रहा है। जब आप इससे जुड़ी परिस्थितियों को देखते और उनका अध्ययन करते हैं, तो आपको एहसास होता है कि इस बात की प्रबल संभावना है कि यह पूरी घटना खुद इजरायलियों द्वारा ही रची गई हो। घटना से ठीक एक दिन पहले आपने देखा कि इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अनिवार्य रूप से इस संभावना के बारे में एक बयान जारी किया था कि कुछ हो सकता है और अगले ही दिन यह घटना घट गई।

तब्बू ने फिल्म ‘निन्ने पेल्लाडाथा’ के 30 साल पूरे होने पर मनाया जश्न, बोलीं- समय की कसौटी पर खरी उतरी कहानी

मुंबई। एक्ट्रेस तब्बू ने सोशल मीडिया पर एक प्यारी और दिल को छू लेने वाली पोस्ट के साथ नागार्जुन के साथ अपनी रोमांटिक एंटरटेनर फिल्म ‘निन्ने पेल्लाडाथा’ के 30 साल पूरे होने का जश्न मनाया। सोमवार को तब्बू ने अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम हैंडल पर कृष्णा वामसी की डायरेक्ट की हुई फिल्म की कुछ झलकियां शेयर कीं। उन्होंने बताया कि ‘निन्ने पेल्लाडाथा’ एक ऐसी कहानी है जिसने बहुत से लोगों के दिलों को छुआ और समय की कसौटी पर खरी उतरी। तब्बू ने आगे कहा कि इस फैमिली ड्रामा के गाने आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में खास जगह रखते हैं। ‘निन्ने पेल्लाडाथा’ के 3 दशक पूरे होने पर, उन्होंने फोटो-शेयरिंग ऐप पर लिखा, “एक ऐसी रोमांटिक कहानी जिसने दिल जीत लिए, एक ऐसी कहानी जो समय की कसौटी पर खरी उतरी, और ऐसे गाने जो पीढ़ियों को मंत्रमुग्ध करते रहे हैं। निन्ने पेल्लाडथा के सदाबहार जादू और तीन यादगार दशकों के इसके खूबसूरत सफर का जश्न मनाते हुए।” पुरानी यादों को ताज़ा करते हुए, कमेंट सेक्शन में लोगों ने कहा, “ओह माय गॉड, 30 साल हो गए और मुझे अब भी इससे प्यार है”, और “यह मेरी अब तक की पसंदीदा फिल्मों में से एक है।” कृष्णा वामसी द्वारा लिखित और डायरेक्ट की गई ‘निन्ने पेल्लाडाथा’ को नागार्जुन ने अन्नपूर्णा स्टूडियोज के बैनर तले प्रोड्यूस किया था। इस प्रोजेक्ट में नागार्जुन ने सीनू और तब्बू ने महालक्ष्मी “पांडु” का किरदार निभाया था। इनके अलावा, चलपति राव, गिरी बाबू, चंद्र मोहन, आहुति प्रसाद, ब्रह्माजी, बनर्जी, रवि तेजा, सी.वी.एल. नरसिम्हा राव, जीवा, उत्तेज, पृथ्वीराज, लक्ष्मी, रमा प्रभा, मंजू भार्गवी, कविता, शानूर सना और रामाराजू जैसे कलाकारों ने भी इसमें अहम भूमिकाएं निभाई थीं। बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफलता के साथ-साथ, ‘निन्ने पेल्लाडाथा’ को कई अवॉर्ड्स भी मिले, जिनमें 1996 का ‘तेलुगु में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म’ का नेशनल फिल्म अवॉर्ड भी शामिल है। बाद में इस फिल्म को तमिल में ‘उन्नय्ये कल्याणम पन्निकिरेन’ नाम से डब किया गया और कन्नड़ में ‘प्रीथसोद थप्पा’ टाइटल के साथ इसका रीमेक भी बनाया गया। टेक्निकल क्रू की बात करें तो, इस ड्रामा का कैमरा वर्क के प्रसाद ने किया था, जबकि एडिटिंग का काम शंकर ने संभाला था। संदीप चौटा ने ‘निन्ने पेल्लाडाथा’ के लिए संगीत तैयार किया है, जो टॉलीवुड में उनका पहला काम है।

150 अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को डिपोर्ट करने के लिए कश्मीर से बंगाल भेजा गया

कोलकाता। जम्मू-कश्मीर से निकाले गए कुल 150 अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को डिपोर्ट करने (वापस भेजने) के लिए पश्चिम बंगाल लाया गया है। सूत्रों ने पुष्टि की कि इन अवैध प्रवासियों को भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के विमान से श्रीनगर से बागडोगरा हवाई अड्डे तक लाया गया। एक अधिकारी ने बताया कि उन्हें आगे की कार्रवाई के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के नॉर्थ बंगाल फ्रंटियर के अधिकारियों को सौंप दिया गया है। उन्हें एक डिटेंशन सेंटर में रखा जाएगा और आधिकारिक चैनलों के माध्यम से उन्हें वापस बांग्लादेश भेजने की कोशिश की जाएगी। अधिकारी ने आगे कहा कि अगर बांग्लादेश उन्हें स्वीकार करने से इनकार करता है, तो अवैध प्रवासियों को सीमा पार धकेल दिया जाएगा। यह प्रक्रिया 7 अक्टूबर को होने की संभावना है। अधिकारी ने कहा कि यह प्रक्रिया सीमा के अलग-अलग हिस्सों में चरणबद्ध तरीके से होती है। अवैध प्रवासियों को सीमा की बाड़ के पार ले जाया जाता है और जीरो लाइन के करीब पहुंचाया जाता है। फिर वे खुद बांग्लादेश में प्रवेश करते हैं। पश्चिम बंगाल में बीएसएफ ने पहले भी इसी तरह के डिपोर्टेशन का काम किया है। देश के अलग-अलग हिस्सों में पकड़े गए अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को अक्सर अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार डिपोर्ट करने के लिए पश्चिम बंगाल भेजा जाता है। अधिकारियों ने बताया कि कुछ मामलों में बांग्लादेशी अधिकारी अपने नागरिकों को वापस लेने के लिए तैयार हो जाते हैं, जबकि अन्य मामलों में वे जिम्मेदारी लेने से इनकार कर देते हैं। अधिकारियों के अनुसार, आने वाले दिनों में जम्मू-कश्मीर से और भी अवैध प्रवासियों को दूसरी जगह भेजा जा सकता है। इसके परिणामस्वरूप, डिपोर्टेशन (देश से बाहर भेजने) के लिए और भी बांग्लादेशी नागरिकों को पश्चिम बंगाल लाया जा सकता है। इससे पहले भी गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों से अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को पश्चिम बंगाल के रास्ते ही डिपोर्ट किया गया है। खबरों के मुताबिक, अकेले 2026 में पश्चिम बंगाल के रास्ते लगभग 4,800 से 5,000 अवैध प्रवासियों को बांग्लादेश डिपोर्ट किया गया है। विदेश मंत्रालय द्वारा संसद में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, 2009 और 2011 के बीच 23,653 लोगों को डिपोर्ट किया गया था। गृह मंत्रालय ने यह भी बताया है कि 2014 तक 28,131 अवैध प्रवासियों को डिपोर्ट किया गया था। कई राज्यों में वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (एसआईआर) का काम चल रहा है, ऐसे में अधिकारियों का मानना ​​है कि आने वाले महीनों में और भी लोगों को डिपोर्ट किया जा सकता है।

तेलंगाना: एसीबी ने 4 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए टाउन प्लानिंग ऑफिसर को पकड़ा

हैदराबाद। तेलंगाना के एंटी-करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने सोमवार को एक टाउन प्लानिंग ऑफिसर को 4 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा। गोलकोंडा जोन में ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (जीएचएमसी) के ऑफिस में टाउन प्लानिंग सुपरवाइजर, तुलसाराम सुनीता को एसीबी अधिकारियों ने तब पकड़ा जब वह एक सरकारी काम में मदद करने के बदले शिकायतकर्ता से 8 लाख रुपए की रिश्वत मांग रही थीं और 4 लाख रुपए की पहली किस्त ले रही थीं। एसीबी के अनुसार, आरोपी ऑफिसर ने शिकायतकर्ता से रिश्वत की मांग की और उसे स्वीकार किया। यह रिश्वत जीएचएमसी के डिप्टी कमिश्नर द्वारा जारी आदेशों को नजरअंदाज करने के लिए मांगी गई थी, ताकि शिकायतकर्ता बिल्डिंग का निर्माण जारी रख सके, उसे और परेशान न किया जाए और भविष्य में सहयोग मिले। भ्रष्टाचार-रोधी एजेंसी ने एक बयान में कहा कि आरोपी ऑफिसर के पास से रिश्वत के 4 लाख रुपए बरामद किए गए। रिश्वत की रकम के अलावा, आरोपी ऑफिसर के पास 2.50 लाख रुपए नकद भी मिले। यह रकम बरामद कर जब्त कर ली गई। एसीबी ने कहा कि आरोपी ऑफिसर ने अनुचित लाभ पाने के लिए अपने कर्तव्यों का पालन गलत और बेईमानीपूर्ण तरीके से किया था। आरोपी ऑफिसर को न्यायिक रिमांड के लिए नामपल्ली में एसपीई और एसीबी मामलों के स्पेशल जज के सामने पेश किया जा रहा है। बयान में कहा गया है कि मामले की जांच चल रही है। एक और मामले में, एसीबी ने रिश्वतखोरी के आरोप में रंगा रेड्डी जिले की मेडिकल और हेल्थ ऑफिसर स्वर्णा कुमारी, हेल्थ इंस्पेक्टर एम. श्रीनिवास और एक प्राइवेट ड्राइवर मड्डुरी कृष्णाया को पकड़ा। एसीबी के अनुसार डीएम एंड एचओ और हेल्थ इंस्पेक्टर के कहने पर ड्राइवर ने शिकायतकर्ता से उसके जब्त किए गए फिजियोथेरेपी सेंटर की चाबियां लौटाने के बदले 1 लाख रुपए की रिश्वत मांगी। एसीबी अधिकारियों ने ड्राइवर के पास से रिश्वत की रकम बरामद की। तीनों आरोपियों को न्यायिक रिमांड के लिए नामपल्ली में एसपीई और एसीबी मामलों के स्पेशल जज के सामने पेश किया जा रहा है।

संबित पात्रा ने राहुल गांधी के ‘फॉर्म 6’ वाले दावों को खारिज किया, कहा- सुप्रीम कोर्ट ने इसे गैरकानूनी नहीं बताया

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने सोमवार को विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर हमला करते हुए उनके फॉर्म 6, निर्वाचन आयोग और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से संबंधित आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने राहुल गांधी पर उच्चतम न्यायालय की कार्यवाही के संबंध में भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप लगाया। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि कांग्रेस नेता ने उच्चतम न्यायालय की टिप्पणियों को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया और गलत रूप से यह दर्शाया कि न्यायालय ने यह स्थापित कर दिया है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने भाजपा को लाभ पहुंचाने के लिए अवैध और एकतरफा रूप से फॉर्म 6 में बदलाव किया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने उच्चतम न्यायालय में सुनवाई के तुरंत बाद सोशल मीडिया मंच एक्स पर यह आरोप लगाए थे। पात्रा के अनुसार, गांधी ने दावा किया था कि यह बिना किसी संदेह के स्थापित हो गया है कि कुमार ने अवैध और एकतरफा तरीके से फॉर्म 6 को बदला है और अपने पद का दुरुपयोग भाजपा की सहायता के लिए किया है। राहुल गांधी ने यह भी कहा था कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराना होगा। भाजपा नेता ने इस व्याख्या को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि उच्चतम न्यायालय ने न तो फॉर्म 6 को अवैध घोषित किया है और न ही उसे खारिज किया है। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने केवल यह स्पष्ट किया है कि उसने किसी भी संशोधित फॉर्म 6 को अनुमोदित नहीं किया है और यह जानने के लिए आधिकारिक अभिलेखों की जांच करना चाहता है कि बदलाव किसने किए हैं। संबित पात्रा के अनुसार, सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने टिप्पणी की थी कि न्यायालय ने किसी भी परिवर्तित फॉर्म 6 को स्वीकृति नहीं दी है और यह स्थापित करने के लिए अभिलेखों की जांच करनी होगी कि संशोधन किसने किया है। पात्रा ने कहा कि इस टिप्पणी को इस न्यायिक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता कि फॉर्म 6 स्वयं अवैध है। भाजपा नेता ने निर्वाचन आयोग की 26 सितंबर की प्रेस विज्ञप्ति का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि एसआईआर प्रक्रिया के लिए फॉर्म 6 से संलग्न घोषणा को उच्चतम न्यायालय ने बरकरार रखा है। उन्होंने कहा कि गांधी इस विषय को इस प्रकार प्रस्तुत कर भ्रम उत्पन्न कर रहे हैं, मानो पूरे फॉर्म 6 को ही अवैध घोषित कर दिया गया हो। दरअसल, राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने पोस्ट में आरोप लगाया था कि उच्चतम न्यायालय की कार्यवाही से यह स्थापित हो गया है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने अवैध और एकतरफा तरीके से फॉर्म 6 में बदलाव किया है। उन्होंने कथित बदलाव को भाजपा की सहायता के लिए मुख्य निर्वाचन आयुक्त के पद के दुरुपयोग के एक और प्रमाण के रूप में बताया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि लोकतंत्र पर हमले के रूप में उल्लेखित इस मामले में कथित रूप से शामिल मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य लोगों को जवाबदेह ठहराना होगा। हालांकि, भाजपा ने तर्क दिया कि राहुल गांधी की व्याख्या उच्चतम न्यायालय द्वारा सुनवाई के दौरान कही गई बातों से कहीं आगे है। संबित पात्रा ने कहा कि न्यायालय ने इस पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला है कि विवादित बदलाव किसने किए या क्या वे बदलाव अवैध थे। भाजपा प्रवक्ता ने एसआईआर प्रक्रिया के लिए दस्तावेज़ीकरण पर निर्वाचन आयोग के रुख को स्पष्ट करते हुए उच्चतम न्यायालय के 27 मई, 2026 के निर्णय का भी हवाला दिया। भाजपा प्रवक्ता ने तर्क दिया कि उच्चतम न्यायालय का निर्णय ऐसी व्याख्या का समर्थन नहीं करता। पात्रा ने इस आरोप का भी खंडन किया कि एसआईआर का निर्णय एकतरफा रूप से लिया गया था। उन्होंने कहा कि 24 जून, 2025 को जारी बिहार एसआईआर आदेश को तीनों निर्वाचन आयुक्तों ने सर्वसम्मति से अनुमोदित किया था। पात्रा के अनुसार, निर्वाचन आयोग ने स्वयं अपनी तथ्य-जांच प्रतिक्रिया में इस स्थिति को दोहराया था। भाजपा ने कहा कि यह निर्णय आयोग द्वारा सामूहिक रूप से लिया गया था और घोषणा से जुड़े सार्वजनिक रिकॉर्ड को इस बात के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया कि तीनों निर्वाचन आयुक्तों ने इस प्रक्रिया में भाग लिया था। उन्होंने गांधी पर आरोप लगाया कि वे इस निर्णय को एक व्यक्ति की कार्रवाई के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं, जबकि भाजपा द्वारा उद्धृत निर्वाचन आयोग की स्थिति के अनुसार, यह तीन सदस्यीय आयोग का सर्वसम्मत निर्णय था।पात्रा ने राफेल लड़ाकू विमान विवाद के संबंध में गांधी की ओर से पहले की गई उच्चतम न्यायालय की आलोचना का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि गांधी ने पहले राफेल मामले में उच्चतम न्यायालय ने क्या कहा था, इस बारे में गलत दावे किए थे और बाद में उन्हें न्यायालय के समक्ष अपने बयानों पर स्पष्टीकरण देना पड़ा था। पात्रा ने तर्क दिया कि फॉर्म 6 विवाद में भी एक समान प्रवृत्ति उभर रही है, जहां पूरी कानूनी अभिलेखों की जांच से पहले ही उच्चतम न्यायालय की टिप्पणियों की राजनीतिक व्याख्या की जा रही है। उन्होंने राजनीतिक नेताओं से आग्रह किया कि संवैधानिक संस्थाओं से जुड़े सार्वजनिक आरोप लगाने से पहले वे निर्णयों और आधिकारिक दस्तावेजों का ध्यानपूर्वक अध्ययन करें। पात्रा द्वारा उठाया गया एक अन्य मुद्दा यह दावा था कि निर्वाचन आयोग ने फॉर्म 6 और एसआईआर से संबंधित अपनी 26 सितंबर की प्रेस विज्ञप्ति को वापस ले लिया है। पात्रा ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि प्रेस विज्ञप्ति वापस नहीं ली गई है। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग ने इस विषय पर तथ्य-जांच जारी की है और 26 सितंबर की विज्ञप्ति आयोग के सार्वजनिक रिकॉर्ड का हिस्सा बनी हुई है। भाजपा नेता के अनुसार, उच्चतम न्यायालय में सुनवाई के बाद प्रेस विज्ञप्ति वापस लिए जाने की बात कहने वाली खबरें असत्य हैं। उन्होंने राहुल गांधी पर संवैधानिक संस्थाओं के विरुद्ध आरोप लगाकर भ्रम और अस्थिरता पैदा करने का प्रयास करने का आरोप लगाया। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि राजनीतिक मतभेद वैध हैं, लेकिन दावा किया कि उच्चतम न्यायालय और निर्वाचन आयोग का चुनिंदा रूप से उल्लेख नहीं किया जाना चाहिए या उन्हें इस तरह प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए,

एमपीएससी छात्रों के आंदोलन पर सरकार गंभीर, सचिव हटाए गए, अध्यक्ष पर भी होगा फैसला: एकनाथ शिंदे

मुंबई। महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) की परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग को लेकर चल रहे छात्रों के आंदोलन पर राज्य सरकार ने गंभीर रुख अपनाया है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि सरकार इस पूरे मामले को सकारात्मकता से देख रही है और छात्रों के भविष्य के साथ कोई खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, “हमारे विधायक और सांसद खुद जाकर आंदोलन कर रहे छात्रों से मिले हैं और उनका ज्ञापन लिया है। ओमराजे के क्षेत्र के भी कुछ छात्र उनसे मिले थे। यह छात्रों का आंदोलन है और सरकार इस मामले को सकारात्मकता से देख रही है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि परीक्षाओं में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए और केवल मेरिट को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। किसी भी तरह की गड़बड़ी या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शिंदे ने कहा, “मैं तो कह रहा हूं कि इसमें पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए। परीक्षा में आखिर विद्यार्थियों के भविष्य का सवाल है। मेरिट होना चाहिए। इसमें कोई भी गैर-व्यवहार नहीं होना चाहिए। विद्यार्थियों के जीवन के साथ किसी को भी खेलने का अधिकार नहीं है।” सरकार की कार्रवाई का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि इसी के चलते सरकार ने सचिव को तत्काल पद से हटा दिया है। एमपीएससी सचिव पद पर तैनात हरपलकर को पद से दूर कर दिया गया है। एकनाथ शिंदे ने कहा, “सचिव को तो तुरंत सरकार ने साइड में कर दिया है। एमपीएससी के विद्यार्थियों का जो आंदोलन शुरू है, उस बारे में सरकार ने गंभीरता से संज्ञान लिया है। अगर कुछ गलत हुआ है तो उसको सुधारा जाना चाहिए, यही सरकार की भूमिका है।” वहीं, एमपीएससी अध्यक्ष को हटाने की छात्रों की मांग पर भी सरकार विचार कर रही है। उपमुख्यमंत्री ने बताया कि अध्यक्ष को लेकर छात्रों की मांग पर भी मुख्यमंत्री ने गंभीरता से संज्ञान लिया है और इस संबंध में राज्यपाल से चर्चा जारी है। उन्होंने कहा, “अब जो अध्यक्ष के बारे में मांग की गई है, उस पर भी मुख्यमंत्री ने गंभीरता से लिया है। राज्यपाल से भी उनकी चर्चा शुरू है। ये संवैधानिक पद होने की वजह से इस बारे में जो भी प्रक्रिया है, वो मुख्यमंत्री ने भी गंभीरता से ली है, इसलिए उस पर भी सही निर्णय होगा।” सरकार का स्पष्ट रुख है कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मेरिट को ही महत्व दिया जाएगा और यदि कोई गलती हुई है तो उसे सुधारा जाएगा।

केरल: प्रियंका गांधी की पर्यटन पहल और सरकार की योजना से आकार ले रहा ‘ब्रांड वायनाड’

तिरुवनंतपुरम। वायनाड को एक बेहतर तरीके से प्रबंधित वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में नई पहचान देने की तैयारी है। राज्य सरकार मंगलवार को अपने चर्चित ‘ब्रांड वायनाड’ प्रोजेक्ट की शुरुआत करने जा रही है। वायनाड की सांसद प्रियंका गांधी भी पिछले कुछ समय से ऐसी पहल की वकालत करती रही हैं। प्रियंका गांधी पहाड़ी जिले की प्राकृतिक सुंदरता, संस्कृति और एडवेंचर टूरिज्म की संभावनाओं को सामने लाने के लिए व्यापक स्तर पर पर्यटन को बढ़ावा देने की बात करती रही हैं। पर्यटन मंत्री पीसी विष्णुनाध मंगलवार को वायथिरी विलेज रिजॉर्ट में इस प्रोजेक्ट की शुरुआत करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि मंत्री टी. सिद्दीकी करेंगे। इस पहल को वीडी सतीशन सरकार के 100 दिवसीय एक्शन प्रोग्राम में शामिल किया गया है। यह प्रोजेक्ट इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसका उद्देश्य वायनाड को केवल एक पारंपरिक हिल स्टेशन की पहचान से आगे ले जाना है। इसे प्रकृति, स्थानीय जीवन, कृषि और आदिवासी संस्कृति को जोड़ने वाले एक खास पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने की योजना है। प्रियंका गांधी वायनाड में बेहतर बुनियादी ढांचा तैयार करने और पर्यटन स्थल के रूप में जिले का बड़े स्तर पर प्रचार करने की वकालत करती रही हैं। उनसे पहले वायनाड के सांसद रहे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी कई बार जिले की पर्यटन संभावनाओं पर अधिक ध्यान देने की मांग की थी। उन्होंने पर्यटन के जरिए स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के अवसर बढ़ाने पर भी जोर दिया था। अब सरकार की पहल इस सोच को औपचारिक रूप देने की कोशिश है। ‘ब्रांड वायनाड’ के केंद्र में जिम्मेदार पर्यटन यानी रेस्पोंसिबल टूरिज्म होगा। इसके तहत होमस्टे को आधुनिक बनाने के साथ वायनाड को एक सुरक्षित और टिकाऊ वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में बढ़ावा दिया जाएगा। इस योजना में केवल दर्शनीय स्थलों को दिखाने के बजाय पर्यटकों को अलग-अलग अनुभव देने पर जोर रहेगा। इसमें कॉफी के बागान, स्थानीय भोजन, कृषि जीवन, आदिवासी विरासत, ग्रामीण अनुभव और जिले का खास प्राकृतिक वातावरण शामिल होगा। वायनाड की कॉफी, मसाले, पारंपरिक चावल की किस्मों और शहद को भी पर्यटन के अनुभव से जोड़ा जाएगा। जीआई टैग वाली वायनाड रोबस्टा कॉफी को ‘फार्म-टू-कप’ मॉडल के जरिए वैश्विक स्तर पर प्रमोट किया जाएगा। एन ऊरू हेरिटेज विलेज का विस्तार किया जाएगा, ताकि वायनाड की मूल आदिवासी संस्कृति को बेहतर तरीके से दुनिया के सामने पेश किया जा सके। इसके अलावा 50 करोड़ रुपए की लागत से एक ट्राइबल यूनिवर्सिटी और हेरिटेज नॉलेज सेंटर भी स्थापित किया जाएगा। सरकार की योजना वायनाड सीएसआर एक्सचेंज शुरू करने, ई-वेस्ट मुक्त अभियान चलाने और जिले के विकास में कॉरपोरेट क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने की भी है। इस योजना में पर्यटन को केवल पहाड़ियों पर ज्यादा पर्यटकों को लाने तक सीमित नहीं रखा गया है। नई सोच के तहत वायनाड के प्राकृतिक नजारे, स्थानीय लोग, उत्पाद, संस्कृति और जीवनशैली को मिलाकर पूरे जिले को एक अलग ‘ब्रांड’ के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है। सरकार के लिए असली परीक्षा यह होगी कि ‘ब्रांड वायनाड’ की यह योजना बेहतर तरीके से प्रबंधित पर्यटन को जमीन पर कितना सफल बना पाती है और इससे वायनाड में रहने वाले स्थानीय लोगों की आमदनी में कितनी बढ़ोतरी होती है।

जावेद अख्तर ने सीजेपी पर टिप्पणी से जुड़े फर्जी संदेश को किया खारिज, बोले- मेरे नाम से फैलाई जा रही झूठी बातें

मुंबई। दिग्गज पटकथा लेखक जोड़ी सलीम-जावेद के सदस्य और मशहूर लेखक जावेद अख्तर ने हाल ही में उनके नाम से वायरल किए गए एक फर्जी संदेश को लेकर सफाई दी है। जावेद अख्तर ने सोमवार को ‘एक्स’ अकाउंट पर एक लंबा नोट लिखकर उन दावों को खारिज किया जिनमें कहा गया था कि उन्होंने सीजेपी के फाउंडर अभिजीत दिपके की आलोचना की है। उन्होंने बताया कि वह मैसेज नकली है। उन्होंने लिखा, “मैं जावेद अख्तर, सभी को बताना चाहता हूं कि सोशल मीडिया पर चल रहा वह नकली मैसेज, जिसमें कहा गया है कि मैंने सीजेपी की आलोचना की है और अभिजीत दिपके को बुरा-भला कहा है, पूरी तरह से झूठा है।” उन्होंने कहा, “मुझे हैरानी है कि जो लोग दिपके और सीजेपी का विरोध कर रहे हैं, उन्हें मुझ जैसे व्यक्ति से विश्वसनीयता उधार लेने की जरूरत पड़ रही है। क्या हालत हो गई है? दुखद है।” सोशल मीडिया पर एक नकली मैसेज फैलाया गया, जिसमें दावा किया गया कि जाने-माने गीतकार और पटकथा लेखक ने अभिजीत दिपके और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की आलोचना की है। उस मैसेज में दिपके को अरविंद केजरीवाल का ‘कठपुतली’ बताया गया और सीजेपी पर भाजपा विरोधी एजेंडा चलाने का आरोप लगाया गया। इस बीच, अभिजीत दिपके के नेतृत्व वाली कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर एक नया विरोध अभियान शुरू किया है। यह आंदोलन 2 अक्टूबर को मुंबई में शुरू हुआ, जिसमें पुलिस द्वारा प्रदर्शन की अनुमति न दिए जाने के बावजूद सैकड़ों समर्थक शिवाजी पार्क में जमा हुए। सीजेपी चुनाव आयोग द्वारा वोटर लिस्ट (मतदाता सूची) के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) का विरोध कर रही है और उसने इस प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। चुनाव आयोग का कहना है कि इस संशोधन का उद्देश्य योग्य मतदाताओं को बनाए रखते हुए डुप्लिकेट, मृत और अयोग्य मतदाताओं के नाम हटाना है। सीजेपी ने घोषणा की है कि यह अभियान गोवा, बेंगलुरु और कोलकाता सहित अन्य शहरों तक भी फैलाया जाएगा। दिपके ने दिल्ली लौटने की भी घोषणा की है और कहा है कि अगर मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा नहीं देते हैं तो 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। दिल्ली पुलिस ने 4 अक्टूबर को एक प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था।