भारत और कनाडा के बीच होगी 5वें दौर की व्यापार वार्ता, समझौते को अंतिम रूप देने का लक्ष्य

नई दिल्ली। भारत और कनाडा सोमवार को ओटावा में अपने प्रस्तावित व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) के लिए पांचवें दौर की बातचीत शुरू करेंगे, क्योंकि दोनों पक्ष 2026 के अंत तक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने का लक्ष्य रख रहे हैं। दोनों देशों के मुख्य वार्ताकारों के नेतृत्व में पांच दिवसीय दौर 9 अक्टूबर तक जारी रहेगा। पिछला दौर 18 सितंबर को नई दिल्ली में संपन्न हुआ था, और अब अधिकारी अंतिम समझौते की दिशा में तेजी से प्रगति पर जोर दे रहे हैं। व्यापार वार्ता को अतिरिक्त गति मिली है, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिसंबर के आसपास कनाडा का दौरा करने की उम्मीद है, जब दोनों देश अंतिम समझौते को पूरा करने की योजना बना रहे हैं। इस बीच कनाडा के व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू इस महीने के अंत में 300 सदस्यीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल के साथ नई दिल्ली का दौरा करने वाले हैं। प्रधानमंत्री मोदी और उनके कनाडाई समकक्ष मार्क कार्नी ने इस साल मार्च में नई दिल्ली में अपनी बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच सीईपीए के लिए बातचीत को साल के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा और ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को गहरा करने पर सहमति व्यक्त की। उनके शिखर सम्मेलन के बाद जारी संयुक्त बयान के अनुसार, नेताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि एक व्यापक व्यापार ढांचा साझेदारी के लिए एक स्थायी आर्थिक आधार के रूप में काम करेगा और 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 70 अरब कनाडाई डॉलर (4.65 लाख करोड़ रुपए) तक बढ़ाने की साझा आकांक्षा का समर्थन करेगा। 2024-25 में भारत-कनाडा के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार 8.66 अरब डॉलर रहा, जबकि कनाडा को भारत का निर्यात 4.22 अरब डॉलर तक पहुंच गया। कनाडा को भारत के निर्यात की प्रमुख वस्तुओं में फार्मास्युटिकल उत्पाद, मशीनरी के पुर्जे और यांत्रिक उपकरण, लोहा और इस्पात की वस्तुएं, इलेक्ट्रॉनिक सामान, जैविक रसायन, आभूषण, रत्न और कीमती पत्थर, परिधान और वस्त्र, समुद्री भोजन, इंजीनियरिंग सामान और ऑटो पार्ट्स शामिल हैं। कनाडा से भारत के प्रमुख आयातों में दालें, उर्वरक, खनिज ईंधन, लकड़ी का गूदा, रत्न और कीमती पत्थर, विमान के पुर्जे, मशीनरी के पुर्जे और लोहा और एल्यूमीनियम स्क्रैप शामिल हैं। भारत का आईटी सेक्टर कनाडा को सेवा निर्यात में मुख्य योगदानकर्ता है। पीएम कार्नी की भारत यात्रा ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों में उल्लेखनीय सुधार की नींव रखी, जो उनके पूर्ववर्ती जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल के दौरान सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे। ट्रूडो सरकार को अपनी चुनावी राजनीति के तहत कनाडा में सिख चरमपंथियों को भारत विरोधी एजेंडा चलाने के लिए प्रोत्साहित करते हुए देखा गया था।

जहां जीते वहां शपथ, जहां हारे वहां ईवीएम खराब’, राहुल गांधी पर बरसे डिप्टी सीएम विजय शर्मा

रायपुर। ईवीएम और चुनाव आयोग पर सवाल उठाने को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का दोहरा चरित्र उजागर हो गया, जीत मिलते ही इसी सिस्टम में नए कपड़े पहनकर शपथ ले लेते हैं और हारते ही ईवीएम खराब। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयानों को लेकर निशाना साधते हुए छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा, “उनकी बातों को समझा जा सकता है। जहां चुनाव जीतते हैं, वहां इसी व्यवस्था में नए कपड़े पहनकर शपथ ग्रहण कर लेते हैं, और जहां हार जाते हैं, वहां कहने लगते हैं कि ईवीएम खराब है, एसआईआर हो गया, चुनाव आयोग ने गड़बड़ी कर दी या कार्यकर्ताओं ने गड़बड़ी कर दी। अपने गिरेबान में झांकने की आदत अब नहीं रही। इसी क्रम में पूरे देश में इस तरह की बातें चल रही हैं।” छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि दूरस्थ अंचल होने के कारण व्यावसायिक तौर पर बस संचालन करने वालों को मुनाफा नहीं होता, इसलिए वहां बसों का संचालन नहीं हो पा रहा, लेकिन दूरस्थ गांवों तक भी बस सेवा सुचारू रूप से पहुंचे और लोगों को सुविधा मिले, इसके लिए मुख्यमंत्री बस सेवा योजना शुरू की गई है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सरगुजा और बस्तर दोनों क्षेत्रों में यह योजना लागू की गई है। उन्होंने कहा कि दोनों ही क्षेत्रों में इसके बहुत अच्छे परिणाम मिल रहे हैं। अंदरूनी इलाकों में जहां पहले कभी बस नहीं जाती थी, अब वहां से यात्री बसों के माध्यम से आ-जा रहे हैं। इसका किराया भी बहुत कम रखा गया है, क्योंकि मुख्यमंत्री ने इस पर अनुदान दिया है। बस संचालकों को सरकार की ओर से टॉप-अप राशि दी जाती है। डिप्टी सीएम ने आगे कहा कि एक और महत्वपूर्ण विषय आप सबके सामने रखना चाहता हूं। हम जानते हैं कि बस्तर में लंबे समय से नदी किनारे, तालाब किनारे और स्कूल के आसपास आईईडी बिछाकर रखी गई थी। इन आईईडी की चपेट में आने से बस्तर के कई ग्रामीणों के अंग भंग हो गए हैं। ऐसे सभी लोगों की पहचान के लिए पूरे क्षेत्र में ग्राम सभाएं आयोजित कर सूची तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि चाहे आईईडी विस्फोट के कारण या किसी अन्य वजह से जो लोग दिव्यांग हुए हैं, जिन्हें कैलिपर, श्रवण यंत्र या कृत्रिम अंग की आवश्यकता है, उनके लिए 15, 16 और 17 अक्टूबर को जगदलपुर में निःशुल्क शिविर लगाया जा रहा है। यह शिविर ‘सेवा संकल्प महाअभियान’ के तहत आयोजित होगा। जगदलपुर में लगने वाले शिविर में कांकेर, कोंडागांव, नारायणपुर और बस्तर के लोग शामिल होंगे। इसी तरह 15, 16 और 17 अक्टूबर को नवरात्रि के अवसर पर दंतेवाड़ा में भी शिविर लगाया जाएगा। छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम ने कहा कि बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा जिलों के लिए जो पहला कैंप लगाया जा रहा है, उसमें 3000 लोगों का पंजीकरण हो चुका है। आईईडी की चपेट में आने वालों का जो दर्द है, बस्तर में नक्सलवाद का यह जो दंश है, उसे एक झटके में समाप्त करने की कोशिश होगी। सभी लोगों को एक साथ लाकर उनकी दिव्यांगता के प्रभाव से उन्हें मुक्ति दिलाई जाएगी। उन्होंने जानकारी दी कि पहले चरण में कांकेर, कोंडागांव, नारायणपुर और बस्तर जिले शामिल हैं, जबकि दूसरे चरण के लिए पंजीकरण और ग्राम सभाओं के आयोजन का कार्यक्रम चल रहा है।

एशियन गेम्स: पीएम मोदी ने भारतीय दल की सराहना की, कहा- प्रदर्शन से ‘अत्यंत खुशी’ मिली

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘एशियन गेम्स 2026’ में भारतीय दल के प्रदर्शन पर बधाई दी। उन्होंने खिलाड़ियों द्वारा दृढ़ संकल्प, जोश और उल्लेखनीय खेल भावना के साथ देश का प्रतिनिधित्व करने की प्रशंसा की। भारत ने आइची-नागोया खेलों में 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य पदकों सहित 85 पदकों के साथ चौथा स्थान हासिल किया, जो एशियाई खेलों के इतिहास में देश का दूसरा सबसे बड़ा पदक संग्रह है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “’एशियन गेम्स 2026 के समापन के अवसर पर, दृढ़ संकल्प, जोश और उल्लेखनीय खेल भावना के साथ हमारे देश का प्रतिनिधित्व करने वाले भारतीय दल के प्रत्येक सदस्य को मेरी हार्दिक बधाई।” प्रधानमंत्री ने देश के पदक विजेताओं को बधाई दी और कहा कि उनके प्रदर्शन ने देश को अपार खुशी दी है। उन्होंने लिखा, “हमारे सभी पदक विजेताओं को बधाई, जिनके प्रदर्शन ने देश को अपार खुशी दी है।” प्रधानमंत्री मोदी ने आशा व्यक्त की कि आइची-नागोया में हुए प्रदर्शन से आने वाले वर्षों में और भी बड़ी उपलब्धियों की प्रेरणा मिलेगी और जमीनी स्तर पर भारत के खेल पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में मदद मिलेगी। उन्होंने आगे कहा कि आशा है कि ये खेल आने वाले वर्षों में और भी बड़ी उपलब्धियों की प्रेरणा देंगे। आशा है कि ये जमीनी स्तर पर खेलों को मजबूत करने में भी योगदान देंगे। जापान में भारत के अभियान में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां और अलग-अलग खेलों में सफलतापूर्वक खिताब बचाए रखने की घटनाएं खास रहीं। पुरुष और महिला क्रिकेट टीमों ने अपने एशियन गेम्स के खिताब बरकरार रखे, वहीं दोनों कबड्डी टीमों ने भी स्वर्ण पदक जीते। पुरुष हॉकी टीम ने मलेशिया पर 5-1 से जीत हासिल करके अपने खिताब की सफलतापूर्वक रक्षा की, वहीं महिला टीम ने फाइनल में चीन को 1-0 से हराकर एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक के लिए 44 साल का इंतजार खत्म किया। भारत ने कई ऐतिहासिक व्यक्तिगत प्रदर्शन भी किए। प्रणवी उर्स एशियन गेम्स में गोल्फ में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं, वहीं 17 वर्षीय कुमकुम मोहद ने महाद्वीपीय प्रतियोगिता में व्यक्तिगत रिकर्व स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनकर इतिहास रच दिया। लवलीना बोरगोहेन ने भी एशियन गेम्स में मुक्केबाजी में स्वर्ण पदक जीतने वाली मैरी कॉम के बाद दूसरी भारतीय महिला बनकर एक विशिष्ट सूची में अपना नाम दर्ज कराया। एथलेटिक्स में भारत ने सबसे अधिक 24 पदक जीते, जबकि शूटिंग में 15 पदक शामिल हैं। तीरंदाजी स्वर्ण पदकों के मामले में सबसे सफल खेल रहा, जिसमें पांच स्वर्ण पदक जीते गए।

एशियन गेम्स: केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गोल्ड मेडल विजेता प्रणवी उर्स को बधाई दी

नई दिल्ली। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ‘एशियन गेम्स 2026’ में ऐतिहासिक गोल्ड मेडल जीतने वालीं भारतीय गोल्फर प्रणवी उर्स से रविवार को वीडियो कॉल पर बात की। सिंधिया ने एशियन गेम्स 2026 में व्यक्तिगत गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला गोल्फर बनने पर प्रणवी को बधाई देते हुए, उनके धैर्य, कड़ी मेहनत और संयम की तारीफ की। मंत्री सिंधिया ने याद किया कि जब प्रणवी स्कूल में थीं, तब उन्होंने उनके साथ गोल्फ खेला था। उन्होंने कहा कि शुरुआती दिनों से लेकर एशियन गेम्स की चैंपियन बनने तक का उनका सफर देखना बहुत खास रहा। मंत्री ने इस बात पर भी गर्व जताया कि माधवराव सिंधिया फाउंडेशन प्रणवी के सफर का हिस्सा रहा है। प्रणवी और साथी गोल्फर दीक्षा डागर, फाउंडेशन की खेल से जुड़ी पहलों से जुड़ी रही हैं। दोनों ने 2022 एशियन गेम्स के बाद से प्रणवी के सफर, उनकी तैयारी और मानसिक मजबूती, और खेल में धैर्य व लगन के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने कोर्स पर अलग-अलग स्थितियों के लिए तैयारी करने में स्पोर्ट्स साइकोलॉजी (खेल मनोविज्ञान) की भूमिका के बारे में भी बात की। सिंधिया ने प्रणवी, उनके माता-पिता, कोच और उनके सफर में साथ देने वाले सभी लोगों को बधाई दी और उनके आगे भी सफल होने की कामना की। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस बातचीत की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर देते हुए लिखा, “एशियन गेम्स 2026 में महिलाओं के व्यक्तिगत गोल्फ में ऐतिहासिक गोल्ड मेडल जीतने के बाद प्रणवी उर्स के साथ एक शानदार बातचीत। अभी भी यकीन करना मुश्किल है कि यह वही लड़की हैं, जिनके साथ मैं उसके स्कूल के दिनों में कुछ राउंड खेला करता था। उनके सफर को करीब से देखना और इस दौरान माधवराव सिंधिया फाउंडेशन को उसका साथ देते हुए देखना बहुत खास रहा है। उन्होंने इतिहास रचा है, लेकिन मुझे पता है कि यह तो बस शुरुआत है। प्रणवी, ऐसे ही आगे बढ़ती रहो।

दिल्ली ‘आप’ अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने बुलाई इमरजेंसी मीटिंग, बोले- केंद्र सरकार कुछ बड़ा प्लान कर रही

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (आप) के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने पार्टी की इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इसकी जानकारी देते हुए दावा किया कि केंद्र सरकार कुछ बड़ा करने की योजना बना रही है। इसी के मद्देनजर पार्टी के पदाधिकारियों, विधायकों और पार्षदों को पार्टी कार्यालय में बैठक के लिए बुलाया गया है। सौरभ भारद्वाज ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा, “इमरजेंसी मीटिंग। केंद्र सरकार कुछ बड़ा प्लान कर रही है, इसलिए पदाधिकारियों से पार्टी कार्यालय में बैठक में शामिल होने का अनुरोध किया जाता है।” उन्होंने बताया कि दोपहर 12 बजे सभी जिला अध्यक्षों, विधानसभा अध्यक्षों और वार्ड पर्यवेक्षकों की बैठक बुलाई गई है। इसके बाद दोपहर 3 बजे आम आदमी पार्टी के सभी विधायकों और पार्षदों को बैठक में शामिल होने के लिए कहा गया है। सौरभ भारद्वाज का यह पोस्ट ऐसे समय सामने आया है, जब दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन चल रहा है। प्रदर्शनकारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। दिल्ली में रविवार को हुए विरोध प्रदर्शन में आम आदमी पार्टी के भी कई नेताओं ने हिस्सा लिया। सीपीआई(एम), आप और अन्य संगठनों के नेता भी प्रदर्शन में शामिल हुए। दिल्ली आप अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज और पार्टी विधायक कुलदीप कुमार भी विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। इस दौरान आप नेताओं ने दिल्ली पुलिस के रवैये को लेकर सवाल उठाए। अब सौरभ भारद्वाज द्वारा सोमवार को पार्टी की पहली बैठक में जिला, विधानसभा और वार्ड स्तर के पदाधिकारियों को बुलाया गया है, जबकि दूसरी बैठक में सभी विधायकों और पार्षदों को शामिल होने के लिए कहा गया है।

ज्ञानेश कुमार पर लगे आरोपों पर पृथ्वीराज चव्हाण बोले- दोनों आयुक्तों के 14 पत्रों को किया जाए सार्वजनिक

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के मोर्चा खोलने के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। चव्हाण ने दावा किया कि जब दो चुनाव आयुक्तों ने ही सीईसी के फैसलों पर 14 बार लिखित ऐतराज जताया तो इससे साफ है कि आयोग के अंदर सब कुछ ठीक नहीं है। कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने सीईसी ज्ञानेश कुमार पर लगे आरोपों पर कहा, “अभी हमारे सामने सबसे जरूरी मुद्दा चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के समय में हुई कथित गड़बड़ियों और गैर-कानूनी कामों को लेकर चल रहा आंदोलन है। राहुल गांधी ने भी यह मुद्दा उठाया है। सबसे पहले, आइए इलेक्शन कमीशन से जुड़े कानूनी नियमों पर गौर करें।” उन्होंने कहा कि हमने कानून बनाकर तीन सदस्यों वाला चुनाव आयोग बनाया था, और सुप्रीम कोर्ट के फैसले में हर सदस्य की ताकत और अधिकार साफ तौर पर बताए गए हैं। इलेक्शन कमीशन के सभी फैसले या तो आम सहमति से या बहुमत से लिए जाने हैं। महाराष्ट्र के पूर्व सीएम ने कहा कि अगर आम सहमति नहीं बनती है, तो बहुमत के आधार पर फैसला किया जाता है। इसलिए स्थिति बिल्कुल साफ है। कई महीनों से दोनों चुनाव आयुक्तों की बातों को नजरअंदाज किया जा रहा था। पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि सीधी सी बात यह है कि अगर दो इलेक्शन कमिश्नर ने चीफ इलेक्शन कमिश्नर के काम पर ऐतराज जताते हुए 14 लेटर लिखे हैं, तो उन लेटर को पब्लिक किया जाना चाहिए। इससे साफ पता चलता है कि इलेक्शन कमीशन के अंदर अलग-अलग राय है। कांग्रेस नेता ने कहा कि हमारा कहना यह है। कानून कहता है कि इलेक्शन कमीशन के सभी फैसले बहुसंख्यकों से लिए जाने चाहिए। अगर दो चुनाव आयुक्त किसी खास एक्शन के पक्ष में हैं तो वे बहुमत बनाते हैं। इसलिए अगर कोई एक्शन उनके विचारों और पक्ष के खिलाफ लिया गया है तो वह गैरकानूनी है। इस मामले में चुनाव जीतने या हारने का सवाल ही कहां उठता है।

कांग्रेस ने ‘सिख्या क्रांति’ के दावों पर पंजाब सरकार की आलोचना की

चंडीगढ़। विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने रविवार को पंजाब में आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के ‘सिख्या क्रांति’ के बहुचर्चित दावों पर हमला बोला। बाजवा ने कहा कि सरकार के एक विधायक ने शिक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियों को सार्वजनिक रूप से उजागर किया है। बाजवा ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के राज्य के सरकारी स्कूलों को बदलने के बार-बार किए गए दावे विधायक सुखवीर सिंह मैसरखाना द्वारा उठाए गए मुद्दों से बिल्कुल उलट हैं। सुखवीर सिंह मैसरखाना ने अपने निर्वाचन क्षेत्र में शिक्षकों की कमी और सरकारी स्कूलों के कामकाज को लेकर सार्वजनिक रूप से शिकायतें की थीं। बाजवा ने एक बयान में कहा कि भगवंत मान चाहे ‘सिख्या क्रांति’ का नारा दोहराते रहें, लेकिन पंजाब के सरकारी स्कूलों की हकीकत को छुपाना मुश्किल होता जा रहा है। जब आम आदमी पार्टी का एक मौजूदा विधायक सार्वजनिक रूप से कहता है कि उसके अपने बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं और छात्रों को प्रभावित करने वाली शिक्षकों की कमी के बारे में चिंता व्यक्त करता है, तो यह आम आदमी पार्टी के प्रचार और जमीनी हकीकत के बीच बढ़ती खाई को उजागर करता है। मैसरखाना ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि उनके बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं और उन्होंने अपर्याप्त शिक्षण स्टाफ को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने इस मुद्दे को आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और सरकार के समक्ष उठाया था, लेकिन उनका दावा है कि उनकी चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया गया। बाजवा ने कहा कि उनके बयानों से आम आदमी पार्टी सरकार के ‘सिख्या क्रांति’ के दावे पर बुनियादी सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि अगर एक निर्वाचित विधायक को कक्षाओं में पर्याप्त शिक्षकों की कमी जैसे बुनियादी मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठाना पड़ रहा है, तो मान सरकार जिस ‘सिख्या क्रांति’ का प्रचार कर रही है, वह आखिर है क्या? शिक्षा को नारों, ब्रांडिंग और प्रचार से नहीं बदला जा सकता। इसके लिए कक्षाओं में शिक्षकों का होना, सुचारू रूप से चलने वाले स्कूल और अभिभावकों व छात्रों के प्रति जवाबदेही जरूरी है। उन्होंने मैसरखाना के खिलाफ की गई कार्रवाई पर भी सवाल उठाया। सरकार की सार्वजनिक आलोचना के बाद आम आदमी पार्टी की पंजाब इकाई ने विधायक को ‘दल विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता’ का हवाला देते हुए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया। बाजवा ने कहा कि आम आदमी पार्टी के नेतृत्व ने संदेश को संबोधित करने के बजाय संदेशवाहक के खिलाफ कार्रवाई करना चुना है। शिक्षकों की कमी शासन का मुद्दा है, न कि दल विरोधी गतिविधि। अगर कोई निर्वाचित प्रतिनिधि अपने निर्वाचन क्षेत्र के बच्चों की शिक्षा को लेकर चिंता व्यक्त करता है, तो सरकार को सुनना चाहिए, जांच करनी चाहिए और समस्या का समाधान करना चाहिए, न कि उसे चुप कराना चाहिए।

प्रेमानंद महाराज की सुरक्षा बढ़ाने की मांग तेज, संत समाज ने किया समर्थन

नई दिल्ली। वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज की सुरक्षा बढ़ाने को लेकर संत समाज की मांग तेज हो गई है। दिनेश फलाहारी महाराज द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर सुरक्षा बढ़ाने की मांग के बाद कई बड़े संतों ने इसका समर्थन किया है। संतों का कहना है कि प्रेमानंद महाराज वृंदावन और पूरे संत समुदाय का गौरव हैं और हाल में आश्रम से जुड़ी गुटबाजी की खबरों के बीच उनकी सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है। दिनेश फलाहारी महाराज के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रेमानंद महाराज की सुरक्षा बढ़ाने की मांग वाले लेटर पर आर्य संत वरुण दास जी महाराज ने कहा, “मैं दिनेश फलाहारी की प्रेमानंद महाराज जी की सुरक्षा बढ़ाने की मांग का समर्थन करता हूं। प्रेमानंद महाराज के आश्रम में हुई एक घटना के संबंध में कई तरह की गुटबाजी की खबरें आई हैं। असलियत क्या है, यह जांच का विषय है, लेकिन लोगों के बीच जो खबरें आ रही हैं और यह देखते हुए कि प्रेमानंद महाराज वृंदावन धाम और पूरे देश के संत समुदाय के लिए गर्व का विषय हैं, उनकी सुरक्षा निश्चित रूप से बढ़ाई जानी चाहिए।” महंत सीताराम दास ने कहा कि निश्चित रूप से, हमारे प्रेमानंद महाराज के लिए सुरक्षा बढ़ाने की मांग करते हुए फलाहारी द्वारा लिखा गया पत्र सराहनीय है। मैं इस पत्र का समर्थन करता हूं। वे निश्चित रूप से संत समुदाय के लिए गर्व का स्रोत हैं। इस गौरव को बनाए रखना सनातनियों का नैतिक कर्तव्य है और सरकार को उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। महंत राजू दास ने कहा कि समय-समय पर ऐसे तत्व अलग-अलग रूपों में सामने आते रहते हैं। जैसा कि आपने देखा होगा, पूज्य प्रेमानंद के खिलाफ लगातार बयान आते रहे हैं और कट्टरपंथी और विकृत मानसिकता वाले लोग सक्रिय रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए फलाहारी जी ने यह पत्र लिखा है। उत्तर प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था हमेशा अच्छी रही है। हमें सीएम योगी पर भरोसा है और सीएम योगी की सरकार में ऐसा कुछ नहीं हो सकता। जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने कहा कि प्रेमानंद महाराज को सुरक्षा की जरूरत नहीं है। राधा रानी का आशीर्वाद उन पर है, लेकिन कुछ लोग प्रेमानंद महाराज की लोकप्रियता का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि उनके भजन में कोई रुकावट न आए और उन्हें कोई परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि प्रेमानंद कोई राजनीतिक संत नहीं हैं, न ही उन्होंने कोई विवादित बयान दिया है, इसलिए उन्हें किसी से कोई खतरा नहीं है। जहां तक उनके आसपास के लैंड माफिया टाइप के लोगों की बात है जो उनके चेले बन गए हैं, उनके लिए सुरक्षा की कोई जरूरत नहीं है। बस आसपास के उन चेलों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए।

जगन की आवास योजनाएं पूरी करने में नाकाम रही नायडू सरकार: वाईएसआरसीपी

ताडेपल्ली (आंध्र प्रदेश)। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के पोन्नूर निर्वाचन क्षेत्र के समन्वयक अंबाती मुरली कृष्णा ने रविवार को आंध्र प्रदेश में टीडीपी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार की आलोचना की। उन्होंने सरकार पर वाईएस जगन मोहन रेड्डी के कार्यकाल में शुरू की गई आवास परियोजनाओं को पूरा न करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार को गरीबों को घर मुहैया कराने का श्रेय लेने से पहले इन घरों का निर्माण पूरा करना चाहिए। उन्होंने बताया कि जगन के कार्यकाल में सरकार ने 31.19 लाख परिवारों को आवास के लिए भूखंड आवंटित किए और 17,005 वाईएसआर जगनन्ना कॉलोनियां स्थापित कीं। मुरली कृष्णा ने कहा कि सरकार ने 22,80,358 घरों को मंजूरी दी और नौ लाख से अधिक घरों का निर्माण पूरा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में एक भी नया घर नहीं बनाया है और लगभग 11 लाख घर निर्माण के विभिन्न चरणों में अधूरे छोड़ दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि टीडीपी ने मकानों के लिए जमीन के पट्टे बांटने से रोकने के लिए 1,000 से अधिक अदालती मामले दायर किए। उन्होंने कहा कि जगन ने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया और पट्टे बांटने की अनुमति प्राप्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि अमरावती में सरकार ने 50,000 गरीब परिवारों के पट्टे को लेकर अदालत में मुकदमा किया और बाद में उन्हें रद्द कर दिया, जिससे उन परिवारों को रहने की जगह से वंचित कर दिया गया। मुरली कृष्णा ने यह भी सवाल उठाया कि केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की उपस्थिति में हुई बैठक में राज्य में सूखे की स्थिति का मुद्दा क्यों नहीं उठाया गया। राज्य के 688 मंडलों में से 388 मंडल सूखाग्रस्त घोषित किए गए हैं। यहां तक कि इन मंडलों में मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के निर्वाचन क्षेत्र कुप्पम के मंडल भी शामिल हैं। उन्होंने धान, कपास, मक्का, लाल चना, हरा चना और काला चना के न्यूनतम समर्थन मूल्यों पर जवाब मांगा। मंत्री नादेंडला मनोहर द्वारा आवास संबंधी कथित अनियमितताओं की जांच की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए मुरली कृष्णा ने कहा कि वाईएसआरसीपी किसी भी जांच के लिए तैयार है। उन्होंने सरकार को काकीनाडा में चावल के मुद्दे की भी जांच करने की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि वाईएसआरसीपी स्थानीय निकाय चुनावों का विरोध नहीं कर रही है, बल्कि उसे सटीक मतदाता सूचियां चाहिए, जिनमें मृत मतदाताओं और फर्जी वोटों के बारे में स्पष्टता हो। उन्होंने कहा कि किसानों को उचित मूल्य प्राप्त करने में कठिनाई हो रही है और कल्याणकारी योजनाओं के भुगतान में कमी आ रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्थाएं दबाव में हैं और सरकार के ध्यान की आवश्यकता है।

डीजीसीए के पूर्व फ्लाइंग ट्रेनिंग डायरेक्टर समेत चार कंपनियों पर सीबीआई का केस, पक्षपात करने और आर्थिक लाभ पहुंचाने का आरोप

नई दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने डीजीसीए के पूर्व डायरेक्टर ऑफ फ्लाइंग ट्रेनिंग कैप्टन अनिल गिल, ब्लूथ्रोट एयरो ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड, रेडबर्ड एविएशन प्राइवेट लिमिटेड, साब्रेस कॉरपोरेट सॉल्यूशंस लिमिटेड और सैंडहिल्स एविएशन आईएफएससी लिमिटेड के खिलाफ मामला दर्ज किया है। सीबीआई की एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि कैप्टन अनिल गिल ने कुछ चुनिंदा फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गेनाइजेशन (एफटीओ) को अपने आधिकारिक पद का इस्तेमाल कर अनुचित लाभ पहुंचाया। इससे समान स्थिति में काम करने वाले दूसरे ऑपरेटरों को नुकसान और आर्थिक हानि हुई। एफआईआर के मुताबिक, गिल पर अपने करीबी रिश्तेदारों द्वारा संचालित कथित बेनामी और शेल कंपनियों के जरिए बेहद कम कीमत पर ट्रेनिंग विमान खरीदने में मदद करने का आरोप है। बाद में इन विमानों को कथित तौर पर पसंदीदा फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गेनाइजेशन को काफी ऊंची दरों पर लीज पर दिया गया। आरोप है कि इससे भारी आर्थिक लाभ हासिल किया गया। जांच में कथित तौर पर कैप्टन गिल के करीबी और अन्य रिश्तेदारों द्वारा नियंत्रित और संचालित कंपनियों का एक नेटवर्क भी सामने आया। ब्लूथ्रोट एयरो ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड का गठन 2016 में किया गया था। कंपनी में गिल की मां कमलेश गिल और उनकी मौसी संतोष कुमारी निदेशक थीं। बाद में उनके रिश्तेदार विकास नैन और दीपिका गिल भी कंपनी से जुड़े। कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (एमसीए) में बीएजीपीएल की फाइलिंग में कैप्टन गिल का निजी ईमेल पता भी दर्ज था। इसे कंपनी के प्रशासन में उनकी कथित भूमिका से जोड़कर देखा गया। इसके अलावा साब्रेस कॉरपोरेट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड और सैंडहिल्स एविएशन आईएफएससी प्राइवेट लिमिटेड में उनके रिश्तेदारों को निदेशक बनाए जाने की बात कही गई है। आरोप है कि ये कंपनियां संपत्तियों की खरीद, वित्तीय व्यवस्था और विमानों को गिरवी रखने जैसी गतिविधियों से जुड़ी थीं। मामले में विमानों की खरीद और बाद में उन्हें लीज पर देने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। बीएजीपीएल ने 2020 में 1975 मॉडल का सेसना विमान वीटी ईयूसी 10 लाख रुपए में खरीदा था। इसके बाद 2021 में 1981 मॉडल का वीटी एएवाई विमान 37.5 लाख रुपए में खरीदा गया। आरोप है कि वीटी एएवाई पूरी तरह उड़ान भरने की स्थिति में था और उसके केवल 123 इंजन घंटे थे। इसके बावजूद उसे उसकी अनुमानित बाजार कीमत 75 लाख से एक करोड़ रुपए के मुकाबले काफी कम कीमत पर खरीदा गया। दोनों विमानों को बाद में रेडबर्ड एविएशन एकेडमी प्राइवेट लिमिटेड को लीज पर दिया गया। आरोप है कि इसके लिए कैप्टन गिल ने अपनी आधिकारिक नियामक भूमिका में मंजूरी दी थी। 2021 से अक्टूबर 2023 के बीच बीएजीपीएल को अकेले रेडबर्ड एविएशन एकेडमी से 2.16 करोड़ रुपए से ज्यादा की लीज राशि मिली। एफआईआर में नियामकीय मंजूरी देने में कथित पक्षपात और प्रक्रियाओं में अनियमितता के आरोप भी लगाए गए हैं। रेडबर्ड एविएशन एकेडमी को शुरुआती एफटीओ मंजूरी एक महीने और तीन दिन में दी गई, जबकि स्काईनेक्स एयरो प्राइवेट लिमिटेड और जेट सर्व एविएशन प्राइवेट लिमिटेड जैसी दूसरी कंपनियों को शुरुआती मंजूरी मिलने में चार से छह महीने लगे। कैप्टन गिल पर सितंबर 2022 में उस चयन समिति की अध्यक्षता करने का भी आरोप है, जिसने उनके रिश्तेदार विकास नैन को डिप्टी चीफ फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर नियुक्त किया। इसके बाद विकास नैन को रेडबर्ड एविएशन एकेडमी में करीब 6.5 लाख रुपए प्रति माह के वेतन पर नियुक्त किया गया। कैप्टन गिल पर विमानन गतिविधियों में अपने करीबी रिश्तेदारों की भागीदारी और उनके रोजगार की जानकारी छिपाने का भी आरोप लगाया गया है। सीबीआई के मुताबिक, शुरुआती तौर पर सामने आए तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर कैप्टन अनिल गिल, संबंधित कंपनियों, उनके निदेशकों और अन्य अज्ञात सरकारी कर्मचारियों एवं निजी व्यक्तियों के खिलाफ कई धाराओं का मामला बनता है।