एशियन गेम्स: रोमांचक जीत के बाद पीएम मोदी ने पुरुषों की कंपाउंड तीरंदाजी टीम को बधाई दी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कुशल दलाल, साहिल राजेश जाधव और गणेश मणिरत्नम थिरुमुरु को बधाई दी। इन तीनों ने ओकाजाकी में हो रहे एशियन गेम्स 2026 में पुरुषों की कंपाउंड टीम इवेंट में गोल्ड मेडल जीता। इसी के साथ पीएम ने ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले रेसलर सुनील कुमार को सराहा है। भारत ने एक रोमांचक फाइनल में चीन को 238-237 से हराया और गेम्स में कंपाउंड तीरंदाजी में गोल्ड मेडल की हैट्रिक पूरी की। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पीएम मोदी ने भारतीय तीरंदाजों की सटीकता और टीम वर्क की तारीफ करते हुए उनके भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं दीं। पीएमओ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा, “कुशल दलाल, साहिल राजेश जाधव और गणेश मणिरत्नम थिरुमुरु ने एक रोमांचक फाइनल के बाद एशियन गेम्स में पुरुषों की कंपाउंड टीम इवेंट में गोल्ड मेडल जीता। उन्होंने सटीकता और टीम वर्क का शानदार प्रदर्शन किया। हमारे चैंपियन तीरंदाजों को बधाई। उनके भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं।” पहले राउंड के बाद भारत चीन से 58-60 से पीछे था। चीनी टीम ने अपने पहले छह तीरों से परफेक्ट 60 स्कोर किया था। इसके बाद दोनों टीमों ने दूसरे राउंड में परफेक्ट स्कोर किया। चीन ने 120-118 के स्कोर के साथ दो अंकों की बढ़त बनाए रखी, क्योंकि अंपायर की जांच के बाद उनके एक तीर का स्कोर नौ से बढ़ाकर 10 कर दिया गया था। भारत ने तीसरे राउंड में वापसी की और छह परफेक्ट 10 स्कोर किए, जबकि चीन ने एक अंक गंवाया, जिससे अंतर कम होकर 178-179 हो गया। चौथे राउंड में नाटकीय बदलाव देखने को मिला। चीन ने आठ के स्कोर से शुरुआत की, जबकि भारत ने लगातार तीन 10 के स्कोर के साथ बढ़त बना ली। चीन ने भले ही तीन परफेक्ट 10 के साथ समापन किया, लेकिन भारत ने बढ़त बनाए रखी और एक अंक से जीत हासिल कर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इसके साथ ही पीएम मोदी ने रेसलर सुनील कुमार की तारीफ की, जिन्होंने बुधवार को पुरुषों के 87 किलोग्राम ग्रीको-रोमन रेसलिंग इवेंट में फिलीपींस के कैलम जॉनस्टन रॉबर्ट्स के खिलाफ ‘टेक्निकल सुपीरियरिटी’ के आधार पर 9-0 से जीत हासिल की। इसी के साथ सुनील ने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम कर लिया। पीएम मोदी ने कहा, “एशियन गेम्स में सुनील कुमार ने ब्रॉन्ज मेडल जीता, उन्होंने पुरुषों के ग्रीको-रोमन 87 किग्रा इवेंट में शानदार जीत के साथ पोडियम पर जगह बनाई और 2022 के अपने प्रदर्शन को दोहराया। बधाई हो, सुनील। भारतीय कुश्ती के लिए यह एक बेहतरीन प्रदर्शन और गर्व का पल है। उम्मीद है कि वह देश के लिए और भी कई सम्मान लाते रहेंगे।
1 अक्टूबर 1952 को जन्मीं बिहार कोकिला शारदा सिन्हा, जिनकी आवाज में बसता था छठ

नई दिल्ली। जब-जब कार्तिक का महीना आएगा, घाटों पर जब-जब सुपली में ठेकुआ सजेगा, तब-तब एक आवाज हवा में गूंजेगी ‘केलवा के पात पर उगेलन सूरजमल झुके झुके’। ये आवाज थी बिहार की बेटी, स्वर कोकिला शारदा सिन्हा की। 1 अक्टूबर 1952 में बिहार के सुपौल जिले के एक छोटे से गांव हुलास में सुखदेव ठाकुर के घर एक बेटी का जन्म हुआ था, जिसने आगे चलकर बिहार की पहचान को सात समंदर पार तक पहुंचा दिया। शारदा सिन्हा का बचपन बेहद साधारण था। गांव के ही पंडित रामचन्द्र झा से उन्होंने शास्त्रीय संगीत की शुरुआती तालीम ली। ससुराल बेगूसराय के सिहमा गांव में होने के बाद भी उन्होंने संगीत नहीं छोड़ा। समस्तीपुर के एक कॉलेज में संगीत की शिक्षिका बनीं और फिर धीरे-धीरे लोकगीतों को नया जीवन देने लगीं। 1974 में उन्होंने पहला भोजपुरी गीत गाया, लेकिन असली पहचान 1978 में आई जब उनका छठ गीत आया। उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। मैथिली, भोजपुरी, मगही, बज्जिका, और हर भाषा में उन्होंने अपनी छाप छोड़ी। बिहार में कहा जाता है – दो चीजों के बिना छठ नहीं हो सकता, एक सूरज देव और दूसरी शारदा सिन्हा की आवाज। उनके गीत सिर्फ गीत नहीं, व्रत की भावना थे। ‘उग हो सूरज देव’, ‘पटना के घाट पर’, ‘सुनअ छठी माई’, ‘हो दीनानाथ’, ‘सांझ के दिहली अर्घिया’ – ऐसा कोई घाट नहीं जहां ये गीत न बजे हों। परदेश में रह रहा बिहारी जब ये गीत सुनता है तो उसकी आंखें नम हो जाती हैं, उसे अपना गांव याद आ जाता है। और देखिए जीवन का आखिरी संयोग—जीवन भर छठी मैया के गीत गाने वाली शारदा सिन्हा ने छठ पर ही विदा ली। 5 नवंबर 2024, छठ महापर्व का पहला दिन नहाय-खाय। उसी रात 9 बजकर 20 मिनट पर दिल्ली के एम्स में 72 साल की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। वे 6 साल से मल्टीपल मायलोमा, एक तरह के ब्लड कैंसर से जूझ रही थीं। जाते-जाते भी 4 दिन पहले उन्होंने एम्स के बेड से अपना आखिरी छठ गीत ‘दुखवा मिटाई छठी मैया’ रिलीज करवाया और सभी व्रतियों को छठ की शुभकामनाएं दीं थीं। लोकगीतों के अलावा हिंदी फिल्मों में भी उनकी आवाज अमर है। सलमान खान की पहली सुपरहिट फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ (1989) का गीत ‘कहे तोसे सजना तोहरी सजनिया’ और ‘हम आपके हैं कौन’ का ‘बाबुल जो तुमने ‘सिखाया’—दोनों में शारदा सिन्हा की ही आवाज है। नई पीढ़ी ने उन्हें ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर-2’ के ‘तार बिजली से पतले हमारे पिया’ से पहचाना। उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 1991 में पद्मश्री और 2018 में पद्म भूषण से सम्मानित किया। इसके अलावा संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, बिहार रत्न, मिथिला विभूति जैसे सैकड़ों सम्मान मिले। बिहार की वह शरीर से गई हैं, लेकिन जब तक छठ है, जब तक घाट है, तब तक शारदा सिन्हा जिंदा रहेंगी।